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अब टैंकर नहीं, सीधे गंगाजल से बुझेगी फरीदाबाद की प्यास

फरीदाबाद औद्योगिक नगरी से गंगाजल केवल 35 किलोमीटर दूर है। जिले को गंगाजल हापुड़ जिले के डेहरा गांव के पास से गुजर रही अपर गंगा कैनाल से मिलेगा। वहां से पाइप लाइन यमुना नदी को पार करते हुए जिले के अमीपुर गांव तक बिछाई जाएगी। यहीं पर इस पानी को साफ करने का प्लांट भी लगाया जाएगा। इसके बाद यह पानी शहर में भेजा जाएगा। सिंचाई विभाग ने इसका पूरा रूट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया है। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जल्द जलशक्ति मंत्री और उत्तर प्रदेश के मंत्री से मुलाकात करेंगे पता चला है कि इसी सप्ताह में दिल्ली में यह मुलाकात हो सकती है। इसके बाद योजना को सिरे चढ़ाया जाएगा। याद रहे गंगाजल को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी काफी गंभीर हैं। इसलिए अधिकारियाें को जल्द योजना का खाका तैयार करने के आदेश दिए गए थे। 3500 एमएम मोटाई की होगी पाइप लाइन दिनभर में अधिक गंगाजल आ सके, इसलिए 3500 एमएम मोटाई वाली पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसमें एक दिन में 500 एमएलडी पानी शहर में आ सकेगा। इतना पानी आने वाले 25 साल के लिए काफी होगा। इस लाइन को डालने में कहीं कोई अड़चन भी नहीं होगी, क्योंकि जहां से लाइन आएगी, वह पूरी जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की है। इसके बाद यमुना नदी और फिर अमीपुर गांव, यहां हरियाणा सिंचाई विभाग की जमीन है। बाकी प्लांट लगाने के लिए जमीन भी आसानी से मिल जाएगी। शहर तक लाइनें पहले से ही बिछी हुई हैं और योजना स्वीकृत होने के बाद नए सिरे से लाइन बिछा दी जाएंगी। मांग-आपूर्ति में बड़ा अंतर शहर की आबादी 30 लाख से अधिक है। शहर में पेयजल आपूर्ति की मांग 450 एमएलडी और आपूर्ति 330 एमएलडी हो रही है। यमुना नदी किनारे 22 रेनीवेल लगे हुए हैं। 12 और लगाने शुरू कर दिए हैं। फिलहाल शहर में पेजयल किल्लत है। मांग व आपूर्ति में अधिक अंतर होने की वजह से शहर की काफी आबादी टैंकरों के पानी पर निर्भर है। नगर निगम द्वारा टैंकर मुहैया नहीं कराए जाते। लोगों को अपने स्तर पर इंतजाम करना होता है। सबसे अधिक दिक्कत अरावली पहाड़ी के आसपास व एनआइटी क्षेत्र में है। पेयजल मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधि भी आमने-सामने हो जाते हैं। पेयजल सप्लाई को लेकर भेदभाव के आरोप लगते हैं। हांफने लगे हैं रेनीवेल मानसून में ही यमुना नदी में पानी होता है, बाकी महीनों में यह नाले के रूप में बहती है। इसलिए नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल लगातार खिसक रहा है। इसलिए चिंता बढ़ गई है। अब एफएमडीए और रेनीवेल लगा तो रहा है लेकिन अगले 20 से 30 साल के लिए अभी से पूरा इंतजाम करना जरूरी हो गया है। यमुना नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल स्तर हर साल खिसक रहा है। इसलिए आने वाले कुछ साल में और दिक्कत हो सकती है। इसलिए गंगा जल लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह योजना स्वीकृत हो जाती है तो कई दशक तक पानी की दिक्कत नहीं होगी।     – विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, एफएमडीए     हमारी ओर से पूरी तैयारी है। योजना का पूरा खाका तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवा दिया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।     – गौरव लांबा, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग  

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की घोषणा की

रायपुर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर राज्य की नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की बड़ी घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार "नर्सिंग सिस्टर" अब "सीनियर नर्सिंग ऑफिसर" कहलाएंगी जबकि स्टाफ नर्स का नाम नर्सिंग ऑफिसर होगा।     डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ये घोषणा की है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी व नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मरीजों की सेवा में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो दिन-रात समर्पण भाव से मरीजों की देखभाल कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदनाओं और सेवा भाव का सबसे बड़ा उदाहरण नर्सिंग स्टाफ प्रस्तुत करता है।  उन्होंने कोविड काल में नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सों ने समर्पण और सेवा भाव के साथ कार्य किया। चिकित्सा सेवा में नर्स माँ के समान होती है। उनका दर्जा माँ के समान उच्च है क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं।  स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्षों से लंबित कई सुविधाओं और व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित पूरे नर्सिंग ऑफिसर को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।

अंबाला बना मिसाल: फसल अवशेष प्रबंधन से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता और खेती का लाभ

फरीदाबाद  हरियाणा में गेहूं कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों में काफी जागरूकता देखने को मिल रही है. दरअसल पहले जहां खेतों में बचे डंठलों (फाने) और पराली को जला दिया जाता था. वहीं अब किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं, बल्कि अपनी भूमि की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल अवशेष जलाना खेती के लिए हानिकारक कदम है, क्योंकि इससे मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं. जैविक कार्बन की मात्रा घटती है और खेत की उत्पादक क्षमता प्रभावित होती है. साथ ही इससे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण और तापमान वृद्धि का कारण बनता है, यही वजह है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है और इसके साथ ही फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर कई जगह कानूनी कार्रवाई भी की जा रही हैं. पराली को जलाया नहीं बल्कि मिट्टी में मिला दिया बता दे कि इस दिशा में अंबाला जिला पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है. क्योंकि इस वर्ष जिले में गेहूं की कटाई पूरी होने के बाद किसानों ने फसल अवशेषों का प्रबंधन अत्यंत जिम्मेदारी के साथ किया है. फसलों के फाने (डंठलों) को जलाने के बजाय किसानों ने रोटावेटर, हैप्पी सीडर और मल्चर जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग करके उन्हें मिट्टी में मिला दिया. इससे अवशेष धीरे-धीरे सड़कर प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे मिट्टी में उर्वरक शक्ति बढ़ती है और जल धारण क्षमता मजबूत होती है. खासतौर पर इस वैज्ञानिक पद्धति से खेत की सेहत सुधरती है और आने वाली फसलों को बेहतर पोषण मिलने के साथ साथ पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी होती हैं. ढैंचा की खेती के लिए किया जा रहा जागरूक कृषि विभाग की निरंतर जागरूकता का परिणाम है. कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि गेहूं कटाई के बाद खाली पड़े खेतों का बेहतर उपयोग करने के लिए किसानों को ढैंचा की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. क्योंकि ढैंचा एक महत्वपूर्ण दलहनी हरी खाद फसल है, जो मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करती है और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता को बढ़ाती है. इसकी खेती के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है ओर बुवाई के 30 से 40 दिन बाद इस फसल को खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है. रासायनिक खाद से कम होती है उर्वरता लगातार यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के लाभकारी जीवों की संख्या घट रही है, जिससे भूमि की शक्ति कमजोर हो रही है और खेती की लागत बढ़ रही है.उन्होंने कहा कि ऐसे में ढैंचा जैसी हरी खाद फसलें किसानों के लिए कम खर्च में अधिक लाभ देने वाला विकल्प साबित हो रही हैं. सरकार भी इस पहल को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रति एकड़ ढैंचा की खेती पर 1,000 रुपये का अनुदान दे रही है तथा बीज सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है. वहीं अंबाला जिले के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि यदि आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक सोच को अपनाया जाए तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है. फसल अवशेष न जलाने और हरी खाद को अपनाने की यह पहल हरियाणा के अन्य जिलों के किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है.

आसमान से बरस रही आग: मध्यप्रदेश में दिन ही नहीं, रातें भी हुईं तपती; मौसम विभाग की चेतावनी

भोपाल मध्य प्रदेश में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम का असर खत्म होते ही प्रदेश में चिलचिलाती गर्मी की शुरुआत हो गई है. हालात यह हैं कि सोमवार को रतलाम में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जबकि मालवा-निमाड़ के कई जिले भी भीषण गर्मी और लू की गिरफ्त में आ चुके हैं. मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया है. वहीं दिन के साथ अब रातें भी गर्म होने लगी हैं, जिससे लोगों को चौबीस घंटे गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। रतलाम बना प्रदेश का सबसे गर्म शहर मध्य प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह सामान्य से करीब 5.7 डिग्री अधिक है. वहीं धार में भी तापमान 44.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. जबकि इंदौर में 43.2 डिग्री, उज्जैन में 43.0 डिग्री, खरगोन में 42.6 डिग्री और खंडवा में 42.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान की ओर से आने वाली गर्म हवाओं ने मालवा और निमाड़ क्षेत्र में तापमान तेजी से बढ़ा दिया है. यही कारण है कि दोपहर के समय सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। भोपाल में भी बढ़ी तपिश, रात की ठंडक गायब राजधानी भोपाल भी तेज गर्मी की चपेट में है. सोमवार को यहां अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री तक पहुंच गया. वहीं रात में भी गर्म हवाओं का असर महसूस किया जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार इस बार मई में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने से गर्मी का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है. पिछले कुछ वर्षों में मई में प्री-मानसून बारिश से राहत मिल जाती थी, लेकिन इस बार मौसम शुष्क बना हुआ है. ऐसे में राजधानी समेत कई शहरों में पुराने रिकार्ड टूटने की आशंका बढ़ गई है। पूर्वी जिलों में भी चढ़ रहा पारा मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार गर्मी अब सिर्फ पश्चिमी मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रही. पूर्वी और मध्य जिलों में भी तापमान तेजी से बढ़ रहा है. सागर में 41.4 डिग्री, नरसिंहपुर में 41.0 डिग्री, जबलपुर में 40.8 डिग्री और दमोह में 40.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. वहीं ग्वालियर में फिलहाल तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, लेकिन आने वाले दिनों में वहां भी लू चलने की संभावना जताई गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 72 घंटे प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी दौरान गर्मी अपने चरम पर पहुंच सकती है। 15 मई तक हीट वेव का अलर्ट मौसम केंद्र भोपाल ने 12 मई से कई जिलों में हीट वेव का येलो अलर्ट जारी किया है. रतलाम, धार, झाबुआ, उज्जैन, आगर-मालवा, राजगढ़ और शाजापुर समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में लू का असर सबसे अधिक रहने की संभावना है. मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मई तक दक्षिण-पश्चिम और मध्य मध्य प्रदेश में गर्म हवाओं का दौर जारी रहेगा. जिससे तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है। मध्य प्रदेश में इसलिए बढ़ रही गर्मी मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की ओर खिसक चुका है. वहीं दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवातीय परिसंचरण बना हुआ है. इसके कारण राजस्थान और पश्चिमी इलाकों से गर्म और शुष्क हवाएं मध्य प्रदेश की ओर आ रही हैं. यही वजह है कि प्रदेश में लगातार तापमान बढ़ रहा है और लू की स्थिति बन रही है। इधर भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचने को कहा गया है. लगातार पानी, नींबू पानी और ओआरएस पीते रहने की सलाह दी गई है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. मौसम विभाग ने स्पष्ट कहा है कि अगले कुछ दिन प्रदेशवासियों को तेज गर्मी और लू के लिए तैयार रहना होगा।

र मालवा महोत्सव में छाया रहा गेड़ी नृत्य का जादू विधानसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री ने किया अनिल गढ़ेवाल का सम्मान

बिलासपुर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 25 वा मालवा महोत्सव जो की इंदौर जिला में संपन्न हुआ इसमें बिलासपुर छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय संस्था गेड़ी लोक नृत्य दल को प्रदर्शन हेतु आमंत्रण प्राप्त हुआ था गेड़ी लोक नृत्य दल अनिल कुमार गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में प्रदर्शन दिनांक 6 एवं 7 तथा 8 मई को इंदौर के विराट मंच में प्रदर्शित किया गया  गेड़ी लोक नृत्य का प्रदर्शन पारंपरिक वेशभूषा तथा पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं पारंपरिक गीत शैली के आधार पर प्रदर्शित किया गया जिसकी सराहना इंदौर वासियों ने खुले मन से किये ! अनिल गढ़ेवाल के द्वारा गाया हुआ गीत काट ले हरिहर बाँसे जो भला गीत में इंदौर वासी झूम उठे वहीं बिना ताल टूटे एक ही जगह पर घूम-घूम कर मोहन डोंगरे ने मांदल वादन किया तो पूरा दशहरा मैदान तालिया की गड़गड़ाहट से गूंज उठा ! मुख्य मांदल वादक संजय रात्रे ने पारंपरिक मांदल वादन कर दर्शकों को चकित कर दिया वहीं महेश नवरंग के बांसुरी के स्वर लहरियों में इंदौर वासी झूम उठे तथा सौखी लाल सूर्यवंशी के द्वारा गीत एवं नृत्य को हारमोनियम में  स्वर दिया गया सह वादक के रूप में रामनाथ उत्तम ने अपनी भूमिका निभाई ! दर्शन गण आश्चर्यचकित तब हुवे जब मुख्य गेड़ी नर्तक चेतन कुर्रे तथा लक्ष्मी नारायण माण्डले के गेड़ी में खड़े रहने के बावजूद शुभम भार्गव ने उनके कंधों पर खड़े होकर गेड़ी को हवा में लहराया तो दशहरा मैदान तालियो की गड़गड़ाहट से गूंज उठा वही फूलचंद ओगरे ने एक गेड़ी उठाकर डांस किया तो दर्शनगण आश्चर्य चकित हो गए सह गेड़ी नर्तक के रूप में मनोज माण्डले ,खेलन दास ओगरे ,अजय चेलकर, योगेश ओगरे ,संजय ओगरे ने अपनी भूमिका निभाई ! गेदी नृत्य प्रदर्शन के उपरांत केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी एवं मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर जी ने अनिल गढ़ेवाल का मंच पर सम्मानित किये!कौड़ियों एवं चीनी मिट्टी की माला पटसन वस्त्र ,मयूर पंख धारण करके सभी कलाकारों ने अद्भुत गेड़ी नृत्य का प्रदर्शन किया गेड़ी लोक नृत्य का नृत्य संचालन एवं गीत संयोजन अनिल कुमार गढ़ेवाल  के द्वारा तैयार किया गया है !

ड्रग माफिया पर प्रशासन सख्त: गंभीर मामलों में आरोपी तस्कर के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

अमृतसर अमृतसर के मजीठा में नशा तस्करों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस और नगर काउंसिल ने संयुक्त रूप से एक नशा तस्कर के घर पर बुलडोजर चलाया। यह कार्रवाई मजीठा के खासा पत्ती इलाके में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। प्रशासन का कहना है कि यह मकान अवैध तरीके से बनाया गया था और पहले ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन तय समय के बावजूद निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। SSP सुहेल मीर ने दी कार्रवाई की जानकारी SSP देहाती सुहेल मीर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई वार्ड नंबर 4 में स्थित उस संपत्ति पर की गई, जहां सुनील और उसका भाई करण उर्फ कन्नू रहते थे। सुनील के खिलाफ हरियाणा में यूएपीए एक्ट के तहत मामला दर्ज है और वह फिलहाल जेल में बंद है। वहीं करण उर्फ कन्नू के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत पांच मामले दर्ज हैं, जिनमें कमर्शियल मात्रा में नशा बरामद होने के केस भी शामिल हैं। कानून के मुताबिक होगी सख्त कार्रवाई एसएसपी सुहेल मीर ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने साफ किया कि यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माण के आधार पर की गई है। प्रशासन का कहना है कि जहां भी गैर-कानूनी कब्जे या अवैध निर्माण पाए जाएंगे, वहां कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

6000 एकड़ भूमि अधिग्रहण लक्ष्य के साथ नया गोरखपुर प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहजनपद गोरखपुर में विकास की तमाम योजनाएं परवान चढ़ रही हैं। इसी बीच नया गोरखपुर और वैदिक सिटी बसाने की योजनाएं भी अब जोर पकड़ने लगी हैं। इन योजनाओं के मूर्त रूप लेने पर बड़ी संख्या में लोगों के शानदार लाइफ स्टाइल के साथ स्वस्थ, साफ-सुथरा और सुखी जीवन जीने के सपने पूरे हो सकेंगे। गुरुकुल सिटी, वैदिक सिटी और ताल रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाओं को लेकर सोमवार को भूमि अर्जन विभाग की गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों और भू-स्वामियों से संवाद स्थापित कर अधिकतम भूमि आपसी सहमति से खरीदने पर जोर दें। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और भूमि अधिग्रहण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि नया गोरखपुर में 6000 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का लक्ष्य है। 25 गांव में इसके लिए जमीन अधिग्रहित होनी है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बैठक में बताया गया कि नया गोरखपुर के तहत गुरुकुल सिटी परियोजना मानीराम, रहमतनगर, बलापार और बैजनाथपुर गांव में विकसित हो रही। यहां मानीराम में 66.92 हेक्टेयर में से 40.80 हेक्टेयर, बलापार में 68.70 हेक्टेयर में से 40.56 हेक्टेयर और रहमतनगर में 17.44 हेक्टेयर में से 9.59 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। वहीं बैजनाथपुर में 176.75 हेक्टेयर में से अभी केवल 2.15 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हो सका है। बैठक में इन योजनाओं को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दूसरी ओर करीब 251.89 हेक्टेयर में कोनी, माड़ापार और तकिया-मेदिनीपुर गांव में वैदिक अवधारणा पर वैदिक सिटी विकसित की जाएगी। यहां नक्षत्र वाटिका, वैदिक ज्ञान केंद्र, स्थानीय हस्तशिल्प जोन और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी। कुसम्ही, रुद्रपुर, भैंसहा, अराजी मतौनी और अराजी बसदीला गांवों में भी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। बैठक में इन सब योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जीडीए उपाध्यक्ष ने एक-एक योजना के बारे में जानकारी ली और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। ताल रिंग रोड परियोजना की भी हुई समीक्षा इसके अलावा बैठक में ताल रिंग रोड परियोजना की भी समीक्षा की गई। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को बताया गया कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-1 में 2.66 हेक्टेयर भूमि की जरूरत है, जिसमें अब तक 0.20 हेक्टेयर भूमि ही खरीदी जा सकी है। बैठक में भूमि अधिग्रहण विभाग की कार्यप्रणाली, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की जिम्मेदारियों, आपसी सहमति से भूमि खरीद की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। इस संबंध में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

कुचायकोट में छापेमारी के दौरान 16 संचालक गिरफ्तार, कई सबूत बरामद

गोपालगंज गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऑर्केस्ट्रा नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अड्डों पर छापेमारी की. इस दौरान 45 नाबालिग लड़कियों को छुड़ाया गया है. वहीं पांच युवतियों और 16 ऑर्केस्ट्रा संचालकों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस को मौके से किशोरियों के उत्पीड़न से जुड़े कई अहम सबूत भी मिले हैं. यह कार्रवाई एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर की गई. कुचायकोट थानाध्यक्ष दर्पण सुमन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कुचायकोट, बलिवन सागर और विंदवलिया भठवां इलाके में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया. राजस्थान से लापता किशोरी भी मिली पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बरामद किशोरियों में एक लड़की ऐसी भी मिली, जो पिछले पांच वर्षों से राजस्थान से लापता थी. वहां के थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज है. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसके परिजनों को सूचना दे दी है ताकि वे आकर अपनी बेटी को घर ले जा सकें. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद लड़कियों में सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल की है. जबरन ऑर्केस्ट्रा में काम कराने का आरोप किशोरियों ने पूछताछ में आरोप लगाया कि उन्हें जबरन ऑर्केस्ट्रा में काम कराया जाता था. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है. गिरफ्तार युवतियों और संचालकों से लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है. NGO ने भी किया सहयोग इस अभियान में पटना पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के साथ ‘एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन’ और ‘नारायणी सेवा संस्थान’ की टीम ने भी सहयोग किया. दोनों संस्थाएं ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ नेटवर्क से जुड़ी हैं, जो देशभर में बाल संरक्षण पर काम करता है. यौन शोषण की आशंका एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि इस कार्रवाई ने नाबालिग लड़कियों की तस्करी और शोषण के बड़े नेटवर्क को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि कई बच्चियों को झांसा देकर इस धंधे में धकेला जाता है और उनके यौन शोषण तक की आशंका सामने आई है.

पेपर लीक के बाद RPSC का बड़ा फैसला, SI परीक्षा दोबारा होगी

 अजमेर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए साल 2021 की उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है. 12 मई 2026 को जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह निर्णय परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों की जांच के बाद लिया गया है. आयोग ने अब इस परीक्षा के पुन: आयोजन के लिए 20 सितंबर 2026 (रविवार) की तिथि निर्धारित की है. केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही मिलेगा प्रवेश इस पुन: परीक्षा में सभी पुराने आवेदक शामिल नहीं हो सकेंगे. आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल वे 3,83,097 अभ्यर्थी ही इस परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे, जिन्होंने सितंबर 2021 में आयोजित हुई मूल लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. जिन्होंने पूर्व में परीक्षा छोड़ दी थी, वे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाएंगे. आवेदन फॉर्म में 30 मई तक सुधार कर सकेंगे अभ्यर्थियों को अपने पुराने आवेदन पत्र में आवश्यक सुधार के लिए 16 मई से 30 मई 2026 तक का समय दिया गया है. इस दौरान उम्मीदवार अपने मोबाइल नंबर, ईमेल और पते जैसी जानकारियों को अपडेट कर सकेंगे. हालांकि, आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता का आधार साल 2021 के मूल नोटिफिकेशन के अनुसार ही रहेगा. आयोग ने कड़े निर्देश दिए हैं कि जिन अभ्यर्थियों को अपने फॉर्म में कोई बदलाव नहीं करना है, उन्हें भी पोर्टल पर जाकर 'संशोधन की आवश्यकता नहीं' की घोषणा करनी होगी और बायोमेट्रिक सहमति देनी होगी. इस प्रक्रिया को पूरा न करने पर अभ्यर्थी का आवेदन निरस्त माना जाएगा. विवादों के बाद सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख बताते चलें कि 859 पदों के लिए शुरू हुई यह भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक कानूनी विवादों और एसओजी (SOG) की जांच के घेरे में रही. डमी कैंडिडेट्स और नकल गिरोह की संलिप्तता के कारण कई ट्रेनी सब-इंस्पेक्टरों की गिरफ्तारियां भी हुई थीं. हाल ही में 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस भर्ती को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी परीक्षा को नए सिरे से कराने का निर्णय लिया है. कैसे मिलेगा एडमिट कार्ड? परीक्षार्थी नवीनतम अपडेट और सुधार प्रक्रिया के लिए RPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग-इन कर सकते हैं. अभ्यर्थियों को अपनी एसएसओ (SSO) आईडी के माध्यम से OTR (One Time Registration) की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा, ताकि वे आगामी परीक्षा के लिए अपना एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकें.

रामगढ़ के पतरातू प्लांट से अब 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन, गर्मी में मिलेगी राहत

रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू स्थित पीवीयूएनएल प्लांट में 11 मई 2026 को शाम 7:15 बजे 800 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-2 का सफलतापूर्वक ट्रायल ऑपरेशन किया गया. इस सफलता के साथ यूनिट-2 के नियमित संचालन और कमर्शियल ऑपरेशन का मार्ग प्रशस्त हो गया है. इस यूनिट के शुरू होने से झारखंड सहित अन्य राज्यों में गर्मी के मौसम के दौरान बढ़ी हुई बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे बिजली संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाई जाएगी. झारखंड को मिलेगा 85 प्रतिशत बिजली रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड स्थित पीभीयूएनएल का दूसरा यूनिट का सफलता पूर्वक ट्रायल हुआ इस यूनिट से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. इससे पहले यूनिट 1 से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. अब रामगढ़ जिले के पतरातू पीवीयूएनएल से 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा इसमें झारखंड राज्य को 1360 मेगावाट बिजली मिलेगा. गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ी हुई है अब पतरातू से बिजली झारखंड को मिलने के बाद पूरे राज्य को फायदा होगा. पतरातू प्लांट से उत्पादित कुल बिजली का 85 प्रतिशत हिस्सा झारखंड राज्य को उपलब्ध होगी, जिससे औद्योगिकीकरण और विकास को गति मिलेगी. अधिकारियों ने मनाया सफलता का जश्न इस अवसर पर पीवीयूएनएल के सीईओ ए के सहगल, सीजीएम प्रोजेक्ट अनुपम मुखर्जी, जीएम ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट मनीष खेतरपाल, जीएम जोगेश चंद्र पत्रा, जीएम विष्णु दत्ता दास और जीएम ओपी सोलंकी सहित पीवीयूएनएल, एनटीपीसी और बीएचईएल के अधिकारियों और कर्मचारियों खुशी जाहिर किया है. सीईओ ए के सहगल ने टीम को दी बधाई. सीईओ ए के सहगल ने सभी कर्मचारियों, अभियंताओं और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता पूरी टीम की मेहनत, समर्पण और सामूहिक कोशिश का परिणाम है. यूनिट-1 के बाद यूनिट-2 भी संचालन के लिए तैयार सीईओ ए के सहगल ने बताया कि 5 नवंबर 2025 को यूनिट-1 के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा की गई थी और अब यूनिट-2 भी कमर्शियल ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार है. सहयोगी संस्थाओं का जताया आभार सीईओ ए के सहगल ने एनटीपीसी, झारखंड सरकार, जेबीवीएनएल और अन्य हितधारकों का उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया.