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राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान में कराया गया विशेष भ्रमण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुख-सुविधा और मानसिक प्रसन्नता के लिए लगातार नई पहल कर रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के तहत बुजुर्गों को प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में उत्साह और सकारात्मकता बनी रहे। इस तरह से 2022 से 2026 के वित्तीय वर्ष तक योगी सरकार यूपी के वृद्धाश्रमों में रहने वाले 2493 वरिष्ठ नागरिकों को भ्रमण करवा चुकी है।  राष्ट्रपति भवन का कराया गया भ्रमण  हाल ही में उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र के विभिन्न जनपदों से आए 211 वृद्धजनों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रसिद्ध अमृत उद्यान का भ्रमण कराया गया। इस दौरान बुजुर्गों ने उद्यान की सुंदरता, हरियाली और मनोहारी वातावरण का आनंद लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुखद, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करना था। विभाग की ओर से आवागमन, जलपान, सुरक्षा और अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। बुजुर्गों ने संगम में लगाई डुबकी वहीं धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रयागराज में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ 2025 में 1,515 वरिष्ठ नागरिकों को स्नान का अवसर उपलब्ध कराया। वहीं माघ मेला 2026 में 767 बुजुर्गों ने संगम में डुबकी लगाकर अपनी लंबे समय से संजोई इच्छा पूरी की। इन आयोजनों में भाग लेकर बुजुर्गों ने आध्यात्मिक संतोष और आत्मिक शांति का अनुभव किया। धार्मिक स्थलों के कराएं जाते हैं दर्शन योगी सरकार की यह पहल केवल बाहरी भ्रमण तक सीमित नहीं है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को समय-समय पर स्थानीय मंदिरों, धार्मिक स्थलों और दर्शनीय स्थानों के दर्शन भी कराए जाते हैं। इससे वृद्धजनों के मन में उत्साह बना रहता है, अकेलेपन की भावना कम होती है और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है। सम्मान और खुशहाली के लिए काम कर रही योगी सरकार  समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि  2022- 23 के वित्तीय वर्ष से 2025-26 के वित्तीय वर्ष तक कुल 2493 वरिष्ठ नागरिकों को प्रयागराज महाकुंभ, माघ मेला और राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान का भ्रमण कराया गया है। इसके अलावा समय- समय पर निकटतम धार्मिक स्थलों पर भी ले जाने का काम किया जाता है। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि बुजुर्ग केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज की धरोहर हैं, जिनके सम्मान और खुशहाली के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) से अनाथ बच्चों को मिल रहा सहारा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेसहारा बेटियों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत योगी सरकार ने न सिर्फ अनाथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उनके जीवन में माता-पिता की कमी को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया है। इस योजना के तहत अब तक 60 से ज्यादा बेसहारा बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। योजना के तहत योगी सरकार बेटियों की शादी के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद कर रही है। यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभा रही है। बेटियों की शादी कराकर सरकार ने अभिभावक की भूमिका निभाई दरअसल मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का सहारा बन चुकी है। योगी सरकार ने इस योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई है। इस तरह यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए एक भरोसा है, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। सरकार इन बेटियों के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे उनका नया जीवन सम्मान के साथ शुरू हो सके। वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा बच्चों को मिल रहा लाभ इस योजना की शुरुआत साल 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य उन बच्चों को सहारा देना है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण 1 मार्च 2020 के बाद अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया था। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके भरण-पोषण, शिक्षा और भविष्य की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक व्यापक और संवेदनशील व्यवस्था तैयार की। वर्तमान समय में इस योजना के तहत 10,904 बच्चों को लाभ मिल रहा है, जबकि शुरुआत में यह संख्या 13,926 थी।  हजारों बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ कई बच्चे समय के साथ वयस्क हो गए या योजना की अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। इसके बावजूद हजारों बच्चों को निरंतर सहायता मिल रही है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। यह सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने या 12वीं कक्षा पास करने तक (जो पहले हो) दी जाती है। इसके साथ ही शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 8085 लैपटॉप भी वितरित किए हैं, जिससे बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में पीछे न रहें। कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए निशुल्क आवास की व्यवस्था योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें 12,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को इन बच्चों का संरक्षक बनाया गया है, ताकि उनकी चल-अचल संपत्ति की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भी योजना के दायरे में रखा गया है। उच्च शिक्षा, डिप्लोमा या प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट,जेईई और क्लैट की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई जारी रहती है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी मिलता है। योगी सरकार का लक्ष्यः कोई बेटी खुद को असहाय न महसूस करें महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) प्रदेश सरकार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों और बेटियों को संबल देना है, जिन्होंने महामारी में अपने अभिभावकों को खो दिया। डॉ. वर्मा ने बताया कि योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता, मुफ्त शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही बालिग होने पर बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय महसूस न करे और सभी को समान अवसर मिल सकें।

जनसेवा और सादगी की मिसाल रामेश्वर पासवान अब नहीं रहे

 सिकंदरा सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति के मजबूत स्तंभ और सात बार विधायक रहे रामेश्वर पासवान का बुधवार सुबह हृदयाघात से निधन हो गया। 92 वर्षीय पासवान ने पटना स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही बिहार की राजनीति में सादगी, सौम्यता और जनसेवा की एक लंबी परंपरा का अंत हो गया। स्वजनों के अनुसार, वे रोज की तरह अपने दैनिक कार्यों के बाद विश्राम कर रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और दिल की धड़कन अनियंत्रित हो गई। परिवार के लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक उनका निधन हो चुका था। उनके बड़े पुत्र जयप्रकाश पासवान ने बताया कि गुरुवार को जमुई जिले के पैतृक गांव नौआडीह में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। जनसेवा और सादगी की मिसाल रामेश्वर पासवान सात बार सिकंदरा से विधायक चुने गए और उन्होंने समाज कल्याण मंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उनका पूरा राजनीतिक जीवन आम लोगों, खासकर गरीबों और किसानों के हितों के लिए समर्पित रहा। वे अपनी सादगी, शालीनता और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे, जिसने उन्हें हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। शोक की लहर, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि उनके निधन की खबर मिलते ही सिकंदरा, जमुई और पटना सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों और आम लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सर्वदलीय नेताओं ने उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया। स्थानीय लोगों द्वारा शोक सभा आयोजित कर उनके राजनीतिक जीवन और योगदान को याद किया गया। बताया कि रामेश्वर पासवान हमेशा अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहते थे। उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

ग्राम हांफा में मनाया जाएगा भगवान श्री नृसिंह देव जी का प्रगटोत्सव”

 सकरी   (कैलाश वस्त्रकार)ग्राम हांफा में कल 30 अप्रैल, गुरुवार को भगवान श्री नृसिंह देव जी का पावन प्रगटोत्सव बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ बघर्रा पाठ मंदिर परिसर में भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे ग्राम सहित आसपास क्षेत्रों में उत्साह का माहौल बना हुआ है।मंदिर के आचार्य पंडित धनेश उपाध्याय ने समस्त ग्रामवासियों, भक्त माताओं,बुजुर्गों एवं युवा साथियों से इस पावन उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित करने अपील की है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि ग्राम की एकता और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है।उत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में भगवान नृसिंह नाथ की विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, छप्पन भोग-प्रसाद वितरण, महिला संकीर्तन एवं रामायण पाठ का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के अनुसार संध्या 6:30 बजे से महाआरती एवं उसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भोग प्रसाद भंडारे की व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से इस आयोजन को और अधिक भव्य बनाने के लिए अपनी श्रद्धा अनुसार तन मन धन से उपस्थिति का आग्रह किया है। बघर्रा पाठ महराज ग्राम हांफा के सुरक्षा प्रहरी के रूप में स्थापित मान्य देवता माने जाते हैं। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार पुराने समय में जब ग्राम के चारों ओर घना जंगल हुआ करता था और जंगली जानवर मवेशियों को नुकसान पहुंचाते थे, तब ग्रामवासियों ने इस समस्या के समाधान हेतु गोकने नाला के किनारे ऊंचे स्थान पर बघर्रा पाठ महराज की स्थापना की थी। तभी से ग्राम की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और मंगल कार्यों में उनकी विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। भक्तजन बघर्रा पाठ महाराज जी को नरसिंह देव का प्रतिरूप मानते है। आस पास के ग्रामीण भक्तजन विवाह के बाद  नववधू के गृह प्रवेश से पूर्व सबसे पहले बघर्रा पाठ महराज के दर्शन और आशीर्वाद लेते है, इसी प्रकार प्रत्येक मांगलिक कार्य उनकी पूजा-अर्चना के बिना पूर्ण नहीं माना जाता है।भगवान श्री नृसिंह देव जी का प्रगटोत्सव कार्यक्रम  को सफ़ल बनाने के लिए पंडित धनेश उपाध्याय एवं श्रद्धालुगण जुटे हुए है।

गैस उपभोक्ताओं के लिए नई गाइडलाइन: OTP डिलीवरी और eKYC अनिवार्य होने के संकेत

 जयपुर LPG गैस को लेकर आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है. कुछ परेशानी इसलिए भी हुई की लोगों को गैस बुकिंग और डिलिवरी के नियमों की जानकारी नहीं थी. ऐसे में अब 1 मई 2026 से LPG गैस सिलेंडर से जुड़े बदलाव होने वाले हैं तो आपको इसके बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए. इसके तहत LPG की बुकिंग से लेकर डिलिवरी तक कई नियम बदल रहे हैं. अगर आप इसे समझ लेगें तो आपको परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. बता दें घरेलू गैस की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. वहीं 1 मई 2026 को गैस के कीमतों में बदलाव किया जा सकता है. साथ ही कमर्शियल सिलेंडर की कीमत भी लगातार बढ़े हैं तो इसकी कीमत भी बदल सकती है. बदलेगा बुकिंग का नियम नए नियम के तहत LPG सिलेंडर बुक करने का समय अंतराल 25 दिन कर दिया गया है. जो पहले 21 दिन था. जबकि ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का समय होगा. यानी 45 दिन बाद ही गैस की बुकिंग की जा सकेगी. ऐसे में अगर आप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको बुकिंग के समय को ध्यान रखना होगा. आप गैस सिलेंडर कई तरीकों से बुक कर सकते हैं. व्हाट्सऐप, मिस्ड कॉल, SMS, मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से बुकिंग की जा सकती है. बस ध्यान रखें कि बुकिंग हमेशा अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ही करें. साथ ही ध्यान रखें कि किसी अनजान लिंक या नंबर से बुकिंग न करें और पेमेंट करने से पहले डिटेल्स जरूर चेक करें. बदलेगा डिलिवरी का नियम गैस की होम डिलिवरी का नियम भी बदला गया है. गैस की डिलिवरी सुरक्षित तरीके से हो इसके लिए OTP सिस्टम लागू किया गया है. यानी अगर आपके घर पर सिलेंडर आता है तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा जिसे आपको डिलिवरी बॉय को बताना होगा. OTP के जरिए डिलिवरी होने से गैस सिलेंडर सही व्यक्ति को मिलेगा और इसमें गड़बड़ी नहीं होगी. PNG हो सकता अनिवार्य सरकार लगातार PNG कनेक्शन को बढ़ावा दे रही है. ऐसे में जिन क्षेत्रों में PNG पाइपलाइन उपलब्ध है वहां लोगों को तय समय में कनेक्शन लेना अनिवार्य किया जा सकता है. ऐसा नहीं करने पर LPG गैस सिलेंडर की डिलिवरी बंद की जा सकती है. अब गैस सिलेंडर के लिए eKYC जरूरी होगा. ऐसा नहीं करने पर सिलेंडर की डिलिवरी रूक सकती है, जबकि सब्सिडी का लाभ भी मिलना बंद हो सकता है. यह एक वित्त वर्ष में एक बार करना जरूरी होता है.

छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट में बेटियों का जलवा, 10वीं-12वीं में पास प्रतिशत शानदार

रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने वर्ष 2026 की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। दोनों कक्षाओं में पास प्रतिशत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष हाईस्कूल में 77.15% और हायर सेकेंडरी में 83.04% परीक्षार्थी सफल रहे। साथ ही दोनों ही परीक्षाओं में बालिकाओं का प्रदर्शन बालकों से बेहतर रहा है। हाईस्कूल सर्टिफिकेट मुख्य परीक्षा वर्ष 2026 में कुल 3,21,677 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए। इनमें से 3,16,730 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें 1,40,402 बालक तथा 1,76,328 बालिकाएं शामिल थीं। इनमें से 3,14,953 परीक्षार्थियों के परिणाम घोषित किए गए, जिनमें 2,43,016 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। इस प्रकार कुल 77.15 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत: 81.03% बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 72.27% श्रेणीवार परिणाम इस प्रकार है- प्रथम श्रेणी: 1,40,108 (44.48%) द्वितीय श्रेणी: 96,721 (30.71%) तृतीय श्रेणी: 6,187 (1.96%) एक या दो विषयों में 19,347 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण रहे। कुल 161 परीक्षार्थियों के परिणाम विभिन्न कारणों से रोके गए हैं, जिनमें 15 नकल प्रकरण और 143 जांच श्रेणी में शामिल हैं। वहीं 1,616 परीक्षार्थियों के आवेदन पात्रता के अभाव में निरस्त किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 3 परीक्षार्थियों के परिणाम बाद में घोषित किए जाएंगे। पिछले वर्ष से सुधार हायर सेकेंडरी (12वीं) का परिणाम, 83.04% छात्र सफल हायर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट मुख्य परीक्षा वर्ष 2026 में कुल 2,46,166 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए। इनमें से 2,44,453 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें 1,02,259 बालक तथा 1,42,194 बालिकाएं शामिल थीं। इनमें से 2,43,898 परीक्षार्थियों के परिणाम घोषित किए गए, जिनमें 2,02,549 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। इस प्रकार कुल 83.04 प्रतिशत परीक्षार्थी सफल रहे। बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत: 86.04% बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत: 78.86% श्रेणीवार परिणाम इस प्रकार है- प्रथम श्रेणी: 1,27,334 (52.2%) द्वितीय श्रेणी: 72,402 (29.68%) तृतीय श्रेणी: 2,806 (1.15%) पास श्रेणी: 7 परीक्षार्थी एक या दो विषयों में 23,866 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण रहे। कुल 63 परीक्षार्थियों के परिणाम विभिन्न कारणों से रोके गए हैं, जिनमें 5 नकल प्रकरण और 56 जांच श्रेणी में हैं। वहीं 492 परीक्षार्थियों के आवेदन पात्रता के अभाव में निरस्त किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2 परीक्षार्थियों के परिणाम बाद में घोषित किए जाएंगे। पिछले वर्ष से बेहतर प्रदर्शन वर्ष 2025 में पास प्रतिशत 81.87% था, जबकि इस वर्ष इसमें लगभग 1.17% की वृद्धि हुई है।

दूरस्थ बिनागुंडा गांव से मरीज को कठिन हालात में पहुंचाया गया अस्पताल

दूरस्थ बिनागुंडा गांव से मरीज को कठिन हालात में पहुंचाया गया अस्पताल पैदल और हाथों से उठाकर नेटवर्क क्षेत्र तक लाया गया, 108 एम्बुलेंस से पखांजूर, फिर जीएमसी कांकेर रेफर रायपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कांकेर की रिपोर्ट के अनुसार, एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को अत्यंत दुर्गम क्षेत्र बिनागुंडा से कठिन परिस्थितियों में निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। बिनागुंडा गांव अत्यंत दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है, जहां न तो सड़क संपर्क उपलब्ध है और न ही मोबाइल नेटवर्क की सुविधा। यह इलाका हाल ही में कैंप स्थापित होने के बाद पहुंच में आया है और कांकेर जिले की सीमा से लगा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मरीज की तबीयत अचानक 22 अप्रैल 2026 को बिगड़ गई थी। प्रारंभ में परिजनों ने स्थानीय बैगा (पारंपरिक वैद्य) से उपचार कराया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर मरीज को अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। गांव में सड़क और संचार सुविधा के अभाव के चलते परिजनों ने मरीज को पैदल और हाथों से उठाकर उस स्थान तक पहुंचाया, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध था। वहां से 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी गई। इसके बाद मरीज को पहले नजदीकी कैंप तक लाया गया और फिर 108 एम्बुलेंस के माध्यम से पाखांजूर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर जांच एवं इलाज के लिए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (GMC) कांकेर रेफर किया है। स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं।

Bus Accident Mystery: शवों की पहचान के लिए DNA टेस्ट, विस्फोट की आशंका पर जांच तेज

भिवानी. बवानीखेड़ा के गांव मिलकपुर में सोमवार रात करीब आठ बजे प्राइवेट बस में लगी भीषण आग ने दो लोगों की जान ले ली, जबकि आठ यात्री गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों में से पांच के बयान पुलिस ने दर्ज किए हैं। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार, बस में अचानक तेज धमाका हुआ और देखते ही देखते आग फैल गई। इसके बाद अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मृतकों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर एक पुलिस कर्मी और एक निजी कंपनी के आपरेटर होने की आशंका जताई जा रही है। डीएनए जांच के लिए भेजे गए सैंपल घटना में दोनों शव पूरी तरह जल जाने के कारण उनकी पहचान नहीं हो सकी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए मंगलवार को जिला नागरिक अस्पताल लाया गया, जहां से डीएनए जांच के लिए सैंपल मधुबन भेजे गए हैं। पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम पुष्टि की जाएगी। प्रशासन ने परिजनों से सहयोग की अपील की है ताकि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और सच्चाई सामने आ सके। टायर फटने की थ्योरी कमजोर शुरुआती जांच में आग लगने का कारण बस का टायर फटना माना जा रहा था। आशंका थी कि टायर का हिस्सा तेल के टैंक से टकराया, जिससे टैंक फट गया और आग भड़क उठी। हालांकि जांच के दौरान तेल का टैंक सही हालत में मिलने से यह संभावना कमजोर पड़ गई है। इसके बाद अब मामले में विस्फोट यानी ब्लास्ट की आशंका गहराने लगी है। पुलिस इस एंगल को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रही है, ताकि हादसे के असली कारणों का पता लगाया जा सके। बैलिस्टिक और फोरेंसिक जांच से खुलेगा राज पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने घटनास्थल का दौरा कर स्पष्ट किया कि मामले की गहराई से जांच के लिए बैलिस्टिक टीम की मदद ली जाएगी। इसके साथ ही फारेंसिक टीम और स्थानीय पुलिस अधिकारी भी मौके से साक्ष्य जुटाने में लगे हैं। उप पुलिस अधीक्षक दिलीप सिंह, थाना प्रभारी सुरेश कुमार और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम जांच में जुटी है। घायलों का उपचार हांसी और हिसार के अस्पतालों में जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह एक हादसा था या किसी साजिश के तहत विस्फोट किया गया।

ESIC Update: ड्यूटी के दौरान मौत पर परिवार को पेंशन और बकाया रकम मिलेगी

पटना. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने रोजगार दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक बीमित कर्मी के आश्रितों को आर्थिक राहत प्रदान करते हुए आश्रित हितलाभ का भुगतान किया है। बिहार क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक सीए. निरंजन कुमार ने सुमन कुमार सिंह की पत्नी आशा देवी तथा उनके दो पुत्रों चंदन कुमार सिंह और सोनू कुमार सिंह को यह लाभ सौंपते हुए संवेदना व्यक्त की। सुमन कुमार सिंह सहरसा के सोनवर्षा में मेसर्स अनुपम कंस्ट्रक्शन के अंतर्गत नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) में मानव बल के पद पर कार्यरत थे। 21 अक्टूबर 2022 को कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। वे परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और पूरा परिवार उन्हीं पर आश्रित था। नियोजक द्वारा दुर्घटना रिपोर्ट भेजे जाने के बाद ईएसआइसी ने मामले की जांच कर आश्रितों के लिए मासिक पेंशन स्वीकृत की। इसके तहत 276 रुपये प्रतिदिन की दर से प्रति माह 8,280 रुपये की पेंशन दी जाएगी। साथ ही, दुर्घटना की तिथि से अब तक का लगभग 3,47,760 रुपये का बकाया भुगतान भी आश्रितों के खाते में हस्तांतरित किया जा रहा है। किसे कहते हैं रोजगार चोट ईएसआइसी अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत कार्यस्थल पर या कार्यस्थल और निवास के बीच आवागमन के दौरान हुई दुर्घटना को ‘रोजगार चोट’ माना जाता है। ऐसे मामलों में बीमित कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को वेतन का 90 प्रतिशत तक मासिक पेंशन देने का प्रावधान है। इस अवसर पर सहायक निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) अभिषेक कुमार भी उपस्थित रहे।

Helmet Rule Confusion: कार ड्राइवर का कटा चालान, XUV700 केस ने उठाए सवाल

डोंगरगढ़. ट्रैफिक नियमों के पालन के लिए लागू किया गया ई-चालान सिस्टम अब खुद अपनी विश्वसनीयता खोता नजर आ रहा है. ताजा मामला उस गंभीर तकनीकी खामी को उजागर करता है. एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर CG 04 QM 9295 दो अलग-अलग वाहन, जिनमें एक टू-व्हीलर और एक SUV कार पर दर्ज पाया गया. इस गड़बड़ी का खामियाजा भुगतना पड़ा राजनांदगांव निवासी पीड़ित अमित गौतम को, जिनकी कार पर बिना हेलमेट के वाहन चलाने का चालान जारी कर दिया गया. अमित गौतम के पास XUV 700 कार है, लेकिन उनके मोबाइल पर जो ई-चालान पहुंचा, वह एक ऐसे उल्लंघन का था जो केवल दोपहिया वाहन से संबंधित होता है. पहले तो वे इस नोटिस को देखकर हैरान रह गए, लेकिन जब उन्होंने मामले की गहराई से जांच की, तब पूरा खेल सामने आया. पता चला कि इसी नंबर से एक बाइक भी सड़कों पर चल रही है, जो नियमों की अनदेखी कर रही है, जबकि चालान SUV मालिक के नाम पर फट रहा है. यह घटना RTO के डेटा मैनेजमेंट सिस्टम में गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है. वाहन पंजीयन जैसे संवेदनशील रिकॉर्ड में एक ही नंबर का दो बार दर्ज होना न सिर्फ तकनीकी चूक है, बल्कि यह सिस्टम की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है. इसके साथ ही नंबर प्लेट पहचान (ANPR) तकनीक और ई-चालान जनरेशन प्रक्रिया की सटीकता भी संदेह के घेरे में आ गई है. पीड़ित अमित गौतम ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिना किसी गलती के उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि यदि वे समय रहते सच्चाई तक नहीं पहुंचते, तो उन्हें बेवजह जुर्माना भरना पड़ता. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “सिस्टम सुधारने की बजाय अगर ऐसे ही फर्जी चालान भेजे जाएंगे, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?” अमित गौतम अब इस मामले की शिकायत RTO के वरिष्ठ अधिकारियों से करने जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यदि विभाग इस गलती को स्वीकार कर सुधार और माफी नहीं देता, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे. यह पूरा मामला एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है, तकनीक पर आंख बंद कर भरोसा करना. जब सिस्टम में ही खामियां हों और उनकी समय पर जांच न हो, तो उसका सीधा असर आम नागरिक पर पड़ता है. जरूरत इस बात की है कि RTO अपने डेटा सिस्टम की व्यापक जांच करे, दोहराव और त्रुटियों को तुरंत दुरुस्त करे, और ई-चालान जैसी व्यवस्थाओं को पारदर्शी व भरोसेमंद बनाए, ताकि ‘स्मार्ट सिस्टम’ वाकई स्मार्ट साबित हो, न कि आम लोगों के लिए मुसीबत.