samacharsecretary.com

निर्माण स्थलों पर सुरक्षा घेरा अनिवार्य, बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं: डॉ. वर्णिका शर्मा

रायपुर : निर्माण स्थलों पर सुरक्षा घेरा अनिवार्य हो, बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं: डॉ. वर्णिका शर्मा बारिश के मौसम में बच्चों की सुरक्षा पर अलर्ट, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दिए निर्देश रायपुर बारिश के मौसम में खुले गड्ढों, निर्माणाधीन स्थलों और पानी से भरी नालियों के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों के अधिकारियों को आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।     आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बारिश के दौरान खुले गड्ढों में पानी भर जाने से बच्चों के लिए गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई बार खेलते समय या स्कूल आते-जाते बच्चों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे उनकी जान तक जोखिम में पड़ जाती है।     आयोग ने नगरीय क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर खुले गड्ढों, नालियों और निर्माणाधीन स्थलों की पहचान करने तथा उन्हें तत्काल भरने या उनके चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा लगाने की अनुशंसा की है। साथ ही निर्माण एजेंसियों और आवासीय कॉलोनियों को भी निर्देशित करने कहा गया है कि निर्माण कार्यों के लिए खोदे गए गड्ढों को खुला न छोड़ें और उनके आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करें।     डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि संवेदनशील और निर्माणाधीन स्थलों पर आवश्यकता अनुसार चौकीदार या सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं, ताकि बच्चों को संभावित जोखिम से बचाया जा सके। उन्होंने इस विषय को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए जिला स्तर पर नियमित समीक्षा करने और संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।     आयोग ने संबंधित विभागों और निकायों से इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करते हुए किए गए उपायों की जानकारी 7 जुलाई 2026 तक उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि बारिश के मौसम में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यूपीटीईटी-2026 के लिए व्यापक तैयारियां, 60 जनपदों के 955 परीक्षा केन्द्रों पर लगभग 20 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा है। इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। परीक्षा का संचालन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की जवाबदेही का विषय है। प्रत्येक अभ्यर्थी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी अभ्यर्थी को आवागमन, प्रवास, सुरक्षा अथवा अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री मंगलवार को आगामी 02, 03 एवं 04 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे थे।  इस दौरान, मुख्यमंत्री ने सेवारत शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए कार्यरत शिक्षकों को अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें अधिक अवसर मिल सकें और केवल अवसर के अभाव में किसी शिक्षक को कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ अन्य राज्यों से भी आएंगे। ऐसे में रेलवे स्टेशन, बस अड्डों तथा प्रमुख यातायात केन्द्रों पर पर्याप्त सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। परिवहन निगम, रेलवे तथा आवश्यकतानुसार निजी स्थानीय परिवहन संचालकों के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। परीक्षा के पूर्व एवं पश्चात संभावित भीड़ को देखते हुए प्रभावी यातायात प्रबंधन किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेष व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बड़ी संख्या में युवाओं के आवागमन के दौरान खाद्य एवं पेय पदार्थों के मूल्य अनावश्यक रूप से न बढ़ाए जाएं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केन्द्रों पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, छायादार प्रतीक्षास्थल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अग्निशमन व्यवस्था तथा आकस्मिक चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। वर्तमान मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। प्रत्येक जनपद में स्थापित कंट्रोल रूम प्रभावी ढंग से कार्य करें तथा किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परीक्षा के सफल एवं त्रुटिरहित संचालन के लिए एक दिन पूर्व सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास अनिवार्य रूप से कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि है। परीक्षा ड्यूटी में केवल स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ही तैनाती की जाए। गोपनीय परीक्षा सामग्री के भंडारण, परिवहन तथा परीक्षा उपरांत आयोग तक उसके सुरक्षित प्रेषण की पूरी प्रक्रिया उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न कराई जाए। उन्होंने सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों पर अफवाह, भ्रामक अथवा गलत सूचनाएं प्रसारित करने के प्रयासों पर कड़ी निगरानी रखने और ऐसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 का आयोजन प्रदेश के 60 जनपदों में स्थापित 955 परीक्षा केन्द्रों पर किया जाएगा। परीक्षा 02 से 04 जुलाई तक कुल पांच पालियों में आयोजित होगी। 02 जुलाई को दोनों पालियों में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा होगी। 03 जुलाई को प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक तथा द्वितीय पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 04 जुलाई को प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न होगी। बैठक में बताया गया कि परीक्षा में कुल 19,94,661 अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। इनमें 17,67,180 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि 2,27,481 अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे। परीक्षा में 1,85,791 सेवारत शिक्षक तथा 18,08,870 नए अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। प्राथमिक स्तर के लिए 3,88,179, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 8,16,436 तथा दोनों स्तरों के लिए 3,95,023 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। बैठक में यह भी बताया गया कि सर्वाधिक परीक्षा केन्द्र एवं अभ्यर्थियों वाले जनपदों में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा तथा जौनपुर प्रमुख हैं। वाराणसी में 68 परीक्षा केन्द्रों पर 1,27,239 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रयागराज में 53 परीक्षा केन्द्रों पर 76,634 तथा लखनऊ में 43 परीक्षा केन्द्रों पर 76,720 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इन जनपदों में बाहरी जिलों एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आगमन को देखते हुए यातायात, सुरक्षा, चिकित्सीय सहायता तथा प्रवास संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Train Delay Alert: यात्रियों के लिए बड़ी राहत, 15 मिनट से ज्यादा देरी पर मोबाइल ऐप देगा तुरंत सूचना

भोपाल  भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। आने वाले समय में ट्रेनों के लेट होने की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है। रेलवे ने ट्रेनों की आवाजाही पर सटीक और रियल-टाइम नजर रखने के लिए एक आधुनिक एंड्रॉयड मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है। इस खास ऐप का नाम 'Punctuality BZA' है, जिसे साउथ कोस्ट रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन द्वारा विकसित किया गया है। इस डिजिटल तकनीक के आने से अब रेलवे के परिचालन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर ही किसी भी ट्रेन की सटीक लोकेशन, उसकी गति और देरी से जुड़ी पल-पल की जानकारी हासिल कर सकेंगे। पहले जिस काम के लिए सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, वह काम अब बेहद तेज और आसान हो गया है। एक ही डैशबोर्ड पर मिलेगी पूरी कुंडली 'Punctuality BZA' एप्लीकेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके सिंगल डैशबोर्ड पर ही यूजर को ट्रेन संचालन से जुड़ी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं। इस ऐप में मिलने वाली मुख्य सुविधाएं इस प्रकार हैं:     लाइव ट्रैकिंग: अलग-अलग रूट और सेक्शन पर ट्रेनों की मौजूदा स्थिति की लाइव मॉनिटरिंग।     इंटेलिजेंट अलर्ट सिस्टम: यदि कोई ट्रेन अपने निर्धारित समय से 15 मिनट से अधिक लेट होती है, तो यह ऐप अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजता है।     जीपीएस कनेक्टिविटी: यह ऐप सीधे 'जीपीएस आधारित लेट ट्रेन मॉनिटरिंग सिस्टम' से जुड़ा है, जो ट्रेनों की आवाजाही को खुद-ब-खुद रिकॉर्ड करता है।     कागजी कार्रवाई से मुक्ति: ट्रेन के लेट होने की वजहों को डिजिटल माध्यम से तुरंत दर्ज कर लिया जाता है, जिससे पुराना कागजी काम बेहद कम हो गया है। इससे ट्रेन मैनेजरों को सुरक्षित ट्रेन संचालन पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। पुराने सिस्टम (ICMS) की कमियों से मिलेगा छुटकारा इस नई तकनीक के आने से पहले रेलवे मुख्य रूप से 'इंटीग्रेटेड कोचिंग मैनेजमेंट सिस्टम' (ICMS) के वेब पोर्टल का इस्तेमाल करता था। पुराने सिस्टम में अधिकारियों को बार-बार वन-टाइम पासवर्ड (OTP) डालकर लॉगइन करना पड़ता था। साथ ही, अलग-अलग जानकारियों के लिए बार-बार कंप्यूटर स्क्रीन बदलनी पड़ती थी, जिससे समय की बर्बादी होती थी। नया ऐप इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और 'यूजर-फ्रेंडली' बनाता है। यात्रियों और रेलवे को क्या होगा बड़ा फायदा? इस ऐप के जरिए मिलने वाले सटीक डेटा से रेलवे के उच्च अधिकारियों को विपरीत परिस्थितियों में तुरंत और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। जब रेलवे स्टाफ के पास हर ट्रेन की रियल-टाइम लोकेशन होगी, तो वे ट्रेनों को ज्यादा कुशलता से री-शेड्यूल कर पाएंगे, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को होगा और उनकी असुविधाएं कम होंगी। विजयवाड़ा डिवीजन में इस ऐप के सफल प्रयोग के बाद अब इसे भारतीय रेलवे के अन्य डिवीजनों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।  

PM सूर्य घर योजना: 3KW सोलर प्लांट पर ₹78,000 की सब्सिडी, ऊर्जा मंत्री तोमर ने दी जानकारी

पीएम सूर्य घर योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार रूपये की सब्सिडी : ऊर्जा मंत्री तोमर अब तक 1 लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ताओं के खातों में पहुंची 100 करोड़ रूपये से अधिक की सब्सिडी भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल एक लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ता लाभान्वित हुए हैं। इनके बैंक खातों में 1010 करोड़ 25 लाख रूपये की सब्सिडी जमा कराई जा चुकी है। योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयंत्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। कहां करें आवेदन पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए संबंधित विद्य़ुत वितरण कंपनी की वेबसाइट अथवा उपाय एप, वॉट्सऐप चेटबॉट एवं टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं। कंपनीवार स्थिति मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 51 हजार 343 सोलर संयंत्रों पर 361 करोड़ 99 लाख, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 58 हजार 715 संयंत्रों पर 4162 करोड़ 30 लाख 39 हजार और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 33 हजार 092 सोलर संयंत्रों पर 231 करोड़ 95 लाख 50 हजार रूपये की सब्सिडी दी गई है।  

भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान, पर्यटकों की बढ़ी पसंद

रायपुर : भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान पर्यटन, प्रकृति और रोजगार का नया आयाम एक माह में ही पहुंचे 480 से ज्यादा पर्यटक, युवाओं, महिला समूह, वन प्रबंधन समिति को पौने 3 लाख रुपए से अधिक की हुई आय पर्यटन के साथ स्थानीय समुदाय को मिल रहा प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ जंगल सफारी, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग से पर्यटकों का बढ़ा आकर्षण रायपुर   छत्तीसगढ़ में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है भोरमदेव जंगल सफारी में । 'ईको-टूरिज्म' के तहत स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों को प्रकृति से जोड़ने की नई पहल शुरू की गई है, जिसमें पर्यटकों को आकर्षित करने वाले शानदार मॉडल शामिल हैं।               छत्तीसगढ़ सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित भोरमदेव जंगल सफारी संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान बनकर उभरी है। जंगल सफारी प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है, सिर्फ एक माह में ही 489 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे हैं, वहीं स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आमदनी के नए अवसर मिले हैं। भोरमदेव जंगल सफारी प्रकृति, रोमांच और स्थानीय विकास का सफल संगम बनी यह पहल भोरमदेव को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। एक माह में पहुंचे सैंकड़ों पर्यटक          मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह जंगल सफारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है। वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का उद्घाटन 3 मई को कर पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू किया गया था। मानसून को देखते हुए 4 जून से सफारी को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। मात्र एक माह के संचालन के दौरान 480 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे पौने 3 लाख रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। बारिश के बाद नवंबर माह से इसका संचालन फिर से शुरू होगा।  पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को मिला रोजगार        भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं। केवल एक महीने के संचालन में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन भी पर्यटकों की पसंद बनी रही। एक माह में कैंटीन से 20 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ, जिससे समूह की महिलाओं की आय बढ़ी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती मिली। सिर्फ सफारी ही नहीं, उद्यान भी बना आकर्षण का केंद्र        जंगल सफारी के साथ-साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बन रहा है। सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भी भ्रमण किया। इससे साफ है कि भोरमदेव क्षेत्र धीरे-धीरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग ने बढ़ाया आकर्षण        करीब 36 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को कई वन्यजीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिला। सफारी में भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न (टाइगर पगमार्क), जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहीं। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वातावरण ने सफारी को रोमांचक और यादगार अनुभव बना दिया। इको-टूरिज्म की नई पहचान         वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के पास करियाआमा क्षेत्र में स्थित है, जहां से पर्यटक अपनी जंगल यात्रा शुरू करते हैं। इस सफारी के माध्यम से पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव, जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

बोधि वृक्ष से 3डी गैलरी तक, बुद्ध दर्शन का मिलेगा अनूठा अनुभव, लाइट एंड साउंड शो होगा खास

लखनऊ/कुशीनगर  योगी सरकार में वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की पहचान को और मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। कुशीनगर में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा गौतम बुद्ध संग्रहालय के नजदीक लगभग 11.32 करोड़ रुपये की लागत से विकसित बुद्ध थीम पार्क का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। यह पार्क जल्द ही आम जनता के लिए खोला जाएगा।  आधुनिक तकनीक, आध्यात्मिक अनुभव और बौद्ध विरासत के अद्भुत संगम के रूप में विकसित यह थीम पार्क देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन, दर्शन और करुणा के संदेश से जोड़ने का नया माध्यम बनेगा। इंटरएक्टिव गैलरियों से मिलेगा आध्यात्मिक अनुभव बुद्ध थीम पार्क को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि बौद्ध ज्ञान और आध्यात्मिकता के जीवंत अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां संवादात्मक शैली में कहानी कहने, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन और आधुनिक प्रस्तुतीकरण तकनीकों के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनकी शिक्षाओं को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पार्क का उद्देश्य यहां आने वालों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मचिंतन और आंतरिक जागृति का अनुभव कराना भी है। बोधि वृक्ष और आठ तथागत स्तूप होंगे प्रमुख आकर्षण पार्क का सबसे प्रमुख आकर्षण बोधि वृक्ष होगा, जहां संवादात्मक शैली में भगवान बुद्ध के ज्ञान, करुणा और जीवन मूल्यों को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा तिब्बती शैली के स्तूप, प्रार्थना चक्र (प्रेयर व्हील्स), मूर्तिकला स्थापनाएं और विभिन्न अनुभवात्मक प्रदर्शनियां आगंतुकों (पर्यटकों व अन्य) को बौद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराएंगी। यहां स्थापित आठ तथागत स्तूप भगवान बुद्ध के आठ महान कार्यों का प्रतीक होंगे और बौद्ध दर्शन की गहराई को समझने का अवसर प्रदान करेंगे। 3डी झांकियां और डिजिटल तकनीक से जीवंत होगा बुद्ध जीवन पार्क में तैयार की गई 3D झांकियां और डिजिटल प्रदर्शनियां भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी। विशेष रूप से विकसित ट्रेवलॉग इंस्टॉलेशन बुद्ध की पवित्र यात्रा को क्रमबद्ध रूप से दर्शाएगा। इसके साथ ही भूमिस्पर्श, ध्यान, अभय और धर्मचक्र सहित भगवान बुद्ध की आठ विशाल मुद्राएं स्थापित की गई हैं, जो उनके जीवन, उपदेशों और बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। 40 फीट बुद्ध वॉल पर होगा लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को एक यादगार अनुभव देने के लिए पार्क में अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक का उपयोग किया गया है। यहां 40 फीट ऊंची फैसाड बुद्ध वॉल पर भव्य लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होगा, जिसमें कला, तकनीक और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन और उनके संदेशों को जीवंत किया जाएगा। भव्य प्रवेश द्वार और सांस्कृतिक आकर्षण भी होंगे विशेष पार्क का भव्य प्रवेश द्वार प्राचीन बौद्ध तोरणों से प्रेरित है। इस पर उत्कृष्ट नक्काशी और प्रतीकात्मक कलाकृतियों के माध्यम से शांति, ज्ञान और करुणा का संदेश प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा पार्क में बुद्ध जीवन दीर्घाएं, भगवान बुद्ध के जीवन प्रसंगों पर आधारित कलात्मक भित्ति चित्र, सांस्कृतिक थीम पर आधारित बच्चों का खेल क्षेत्र और स्मारिका केंद्र भी विकसित किया गया है, जहां बौद्ध हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद उपलब्ध होंगे। कुशीनगर की वैश्विक पहचान होगी और मजबूत यूपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुद्ध थीम पार्क का निर्माण पूरा होना कुशीनगर में बौद्ध पर्यटन को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना आध्यात्मिकता, कला, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन और विचारों से गहराई से जोड़ने का अवसर देगी।  उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में लगभग 82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.4 लाख से अधिक विदेशी यात्री शामिल थे। ऐसे में यह नया थीम पार्क कुशीनगर की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा और उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय बौद्ध पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान

रायपुर  खीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। व्यावसायिक खेती में खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों का सहारा देकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, गलते नहीं हैं और उनका आकार, रंग और चमक शानदार रहती है, जिससे बाजार में बेहतरीन भाव मिलता है। बुवाई के 45-50 दिनों बाद फल तोड़ने योग्य हो जाते हैं। मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है।                   सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे फायदे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक  खीमांशु गजेसिंग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। 4 एकड़ में खीरे की व्यावसायिक खेती       गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और पौध संरक्षण जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया। पारंपरिक से वैज्ञानिक खेती का सफर         पहले पारंपरिक ढर्रे पर खेती करने के कारण  गजेसिंग के लिए कृषि की लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद पासा पलट गया। वैज्ञानिक तरीके से की गई इस खेती के कारण खीरे की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके खीरे की भारी मांग है। उपज का सही और उचित मूल्य मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। भविष्य की योजनाएं और संदेश           अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए  खीमांशु गजेसिंग ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग से मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला। इस सफलता से प्रेरित होकर अब मैं भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाने की योजना बना रहा हूँ।    उद्यानिकी विभाग भी लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।  गजेसिंग की यह उपलब्धि साबित करती है कि वैज्ञानिक नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कृषि को टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

जिले को देंगे ₹620 करोड़ से अधिक की 11 विकास परियोजनाओं की सौगात

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार 1 जुलाई को सहारनपुर से राज्यव्यापी 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण का शुभारंभ करेंगे। नए शैक्षिक सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू हो रहे इस अभियान के साथ मुख्यमंत्री सहारनपुर जनपद की दो विधानसभाओं को ₹620 करोड़ से अधिक लागत की 11 विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे। शिक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में एक ओर विद्यालय से बाहर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर जनपद की आधारभूत संरचना को मजबूत करने वाली परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जाएगा। सहारनपुर के इस्माइलपुर ग्राम में सीएम मॉडल  कंपोजिट विद्यालय में 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बच्चों को नवीन शैक्षणिक सत्र की पाठ्य पुस्तकें, स्कूल बैग व स्टेशनरी का वितरण भी करेंगे। इस अवसर पर जनपद के सर्वश्रेठ प्रधानाध्यापकों का सम्मान भी किया जाएगा। इसके पश्चात मुख्यमंत्री महाराज सिंह डिग्री कॉलेज ग्राउंड जाएंगे, जहां वह सहारनपुर नगर विधानसभा क्षेत्र की ₹612 करोड़ से अधिक लागत की 8 विकास परियोजनाओं और सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र की ₹7 करोड़ से अधिक लागत की 3 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के अन्तर्गत विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान, उनका नामांकन, ड्रॉपआउट बच्चों की पुनर्वापसी, अभिभावकों को जागरूक करने और जनप्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा। अभियान का उद्देश्य प्रत्येक पात्र बच्चे को विद्यालय से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में शिक्षा सुधारों को मिला नया आयाम, टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 बनी भविष्य की कार्ययोजना का आधार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (टीएलपीएस) अध्ययन और निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में आयोजित 'पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग' एवं टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 के विमोचन कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञों तथा शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी सहित बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  प्रारंभिक सत्र में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, अब तक हुए शिक्षा सुधारों, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा अधिगम गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान परख के निष्कर्ष, शिक्षा सुधारों के प्रमुख आयाम, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने किया। टीएलपीएस रिपोर्ट ने दिखाई कक्षा-कक्ष में बदलाव की वास्तविक तस्वीर कार्यक्रम में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। यह रिपोर्ट प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को मजबूत बनाने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित दस्तावेज है। रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सुधारों की वास्तविक सफलता का आधार कक्षा-कक्ष में दिखाई देने वाला परिवर्तन और बच्चों के सीखने के स्तर में होने वाला सुधार है। नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर एवं बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक मेंटरिंग तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान की गई है। रिपोर्ट भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को अधिक साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुख और बच्चों की सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है। प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण पर बनी साझा रणनीति 'स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो-आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पीछे रह गए बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियों को अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मजबूत करने तथा कक्षा-कक्ष में बच्चों के भीतर प्रश्न पूछने के संकोच और भय को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही एसआरजी, एआरपी एवं शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए ब्लॉक स्तर पर विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक समीक्षा, प्रभावी अकादमिक सहयोग और सतत मार्गदर्शन को शिक्षा सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों और अकादमिक नेतृत्व से किया सीधा संवाद कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के सुझाव भी दिए। भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा समापन सत्र में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, मजबूत शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी। विशेषज्ञों ने कहा कि नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे।

पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 42.03 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश पोर्टल पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में 5,48,778 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 4,68,539 विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूर्ण हो चुका है तथा 2, 93, 257 विद्यार्थियों ने विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त कर लिया है। पिछले वर्ष कि तुलना में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रवेश में 42.03 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 30 जून तक 2,06,482 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 2,93,257 हो गई है। यानी एक वर्ष में 86,775 अधिक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अपनाई गई पारदर्शी, ऑनलाइन, सरल एवं विद्यार्थी-केंद्रित प्रवेश व्यवस्था, महाविद्यालयों में समयबद्ध दस्तावेज सत्यापन तथा प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। विद्यार्थियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने रिक्त सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया को और अधिक सरल बना दिया है। अब जिन शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में सीटें रिक्त हैं, वहाँ इच्छुक विद्यार्थी सीधे संबंधित महाविद्यालय पहुँचकर उसी दिन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन एवं सीट आवंटन की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करा सकेंगे। सीट आवंटित होने के तुरंत बाद विद्यार्थी उसी दिन निर्धारित शुल्क जमा कर प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को किसी अतिरिक्त चरण अथवा प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा और रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया तेजी से पूर्ण हो सकेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी पात्र विद्यार्थियों से आग्रह किया है कि वे अपने निकटतम शासकीय अथवा अशासकीय महाविद्यालय में उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर इस विशेष सुविधा का लाभ उठाएँ तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना प्रवेश सुनिश्चित करें।