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योगी सरकार की योजना का असर, डेयरी नेटवर्क से महिलाओं की आय बढ़ी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'महिला सामर्थ्य योजना' आज अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अयोध्या से लेकर कानपुर नगर तक के सात जनपदों के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अब इस योजना का सफल विस्तार लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में भी किया जा रहा है, जो प्रदेश की 'आधी आबादी' के सशक्तिकरण के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का विजन: सशक्त महिला, समृद्ध समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार और समाज समृद्ध होता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए 'महिला सामर्थ्य योजना' के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार उपलब्ध कराने और भुगतान की प्रक्रिया तक सीधे जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के इस फोकस का नतीजा है कि आज अवध की महिलाएं डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर अपने परिवारों की मुख्य आर्थिक संरक्षक बन चुकी हैं। डेयरी नेटवर्क से श्वेत क्रांति और 1380 करोड़ का डीबीटी इस योजना की सबसे बड़ी सफलता इसका विशाल डेयरी नेटवर्क है। अवध क्षेत्र के गांवों से आज प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि का प्रमाण है। योजना की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक महिलाओं के बैंक खातों में 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी जा चुकी है। इस व्यवस्था ने बिचौलिया तंत्र को जड़ से खत्म कर महिलाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत किया है। शून्य से शिखर तक: एक लाख महिलाओं का जुड़ाव योजना की विकास यात्रा किसी मिसाल से कम नहीं है। मार्च 2023 में महज 340 गांवों और 8000 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों तक फैल चुका है, जिसमें एक लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय का यह तेजी से हुआ विस्तार यह सिद्ध करता है कि योगी सरकार की नीतियां सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं। सफलता की मिसाल: सुल्तानपुर की अनीता वर्मा योजना की कामयाबी को सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक की अनीता वर्मा जैसी हजारों महिलाओं की सफलता से समझा जा सकता है। मुकुंदपुर गांव की रहने वाली अनीता ने केवल दो गायों से अपना काम शुरू किया था और आज वह सफलता का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं। गत वर्ष उन्हें लगभग साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। अनीता की यह कहानी न केवल आर्थिक बदलाव की गाथा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।  

स्वास्थ्य भवन बना आशा और उम्मीदों का केंद्र, मातृ-शिशु सेवा को मिलेगा नया आयाम : मंत्री राकेश सिंह

मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी की शीघ्र होगी पूर्ति : उप मुख्यमंत्री देवड़ा स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती स्वास्थ्य भवन बना आशा और उम्मीदों का केंद्र, मातृ-शिशु सेवा को मिलेगा नया आयाम : मंत्री राकेश सिंह मंदसौर जिला अस्पताल में 29 करोड़ के विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण एवं भूमि-पूजन  मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने शुक्रवार को मंदसौर जिले के स्वास्थ्य एवं अधोसंरचना विकास को नई गति देते हुए इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय, मंदसौर में कुल 29 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने 7 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से निर्मित 100 बिस्तरीय नवनिर्मित वार्ड तथा 17 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से बने 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) भवन का लोकार्पण किया। साथ ही 4 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से चांदाखेड़ी फंटा से खजुरिया मार्ग निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी को धीरे-धीरे दूर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन संस्थानों से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले विद्यार्थी प्रदेश में ही सेवाएं देंगे, जिससे आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जिला चिकित्सालय मंदसौर में आज जो सुविधाएं जोड़ी गई हैं, वे क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी सौगात हैं और इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य भवन केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आशाओं का केंद्र है। यह विशेष रूप से माताओं और बहनों की सेवा के लिए समर्पित रहेगा तथा समाज के लिए प्रेरणादायक केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर किया जा रहा है। बदलते हुए भारत में परिवर्तन को महसूस किया जा रहा है। सकारात्मक परिवर्तन देखा जा रहा है। विकास को नए पंख लगे हैं। विकास की धारा बह रही हैं। विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि सरकार निरंतर विकास कार्यों को गति दे रही है और विभिन्न क्षेत्रों में नई सौगातें प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर बजट आवंटन किया गया। जिसके परिणामस्वरूप सुविधाओं में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है। सांसद बंशीलाल गुर्जर ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने एक नई कार्य संस्कृति विकसित की है, जिसमें गुणवत्ता के साथ कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम के अंत में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत मरीजों को फूड बास्केट वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।  

योगी सरकार ने बुजुर्गों को दिया सुरक्षा कवच, हर जिले में वृद्धाश्रमों से बेघर और असहाय बुजुर्गों को मिल रहा सहारा

लखनऊ.  योगी सरकार प्रदेश के बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। सरकार द्वारा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों में वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जहां बेघर, निराश्रित और असहाय बुजुर्गों को आश्रय, भोजन, चिकित्सा और देखभाल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। इस व्यवस्था से वर्तमान समय में 6055 बुजुर्गों को सुरक्षा और सहारा मिल रहा है। नाश्ते से लेकर भोजन तक पौष्टिक खानपान प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए सुबह नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के भोजन तक पौष्टिक खानपान की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही साफ-सुथरे वस्त्र, स्वच्छ बिस्तर और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। वहीं वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की चिकित्सा सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाएं, डॉक्टरों की परामर्श सेवा और आपातकालीन स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे उन बुजुर्गों को राहत मिली है, जो आर्थिक तंगी या पारिवारिक उपेक्षा के कारण इलाज नहीं करा पाते थे। सभी जिलों में संचालित हैं वृद्धाश्रम योगी सरकार में यूपी के सभी 75 जिलों में 150 क्षमता वाले वृद्धाश्रम संचालित हैं जहां नाश्ते में चाय, हलवा, चना, नमकीन दलिया, नमकीन पूड़ी, पोहा और मीठी दलिया दी जाती है। वहीं दिन के खाने में अरहर दाल, राजमा, मिक्स वेज, मौसमी सब्जी, कढ़ी, रोटी, सब्जी, चावल और सलाद निर्धारित दिनों के अनुसार दिया जाता है। इसी तरह रात्रि के भोजन में रसेदार सब्जी, तहड़ी, खिचड़ी, पूड़ी, रोटी, चावल और खीर दी जाती है। योगी सरकार में बुजुर्गों को मिला नया जीवन योगी सरकार की इस बेहतर व्यवस्था से कई ऐसे बुजुर्गों को नया जीवन मिला है, जो पहले सड़कों, रेलवे स्टेशनों या सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा जीवन जीने को मजबूर थे। उन्हें सुरक्षित छत, समय पर भोजन और देखभाल मिल रही है। कई वृद्धाश्रमों में मनोरंजन, योग, भजन-कीर्तन और सामूहिक संवाद जैसी गतिविधियां भी कराई जाती हैं, जिससे बुजुर्ग मानसिक रूप से प्रसन्न और सक्रिय बने रहें। 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन दे रही सरकार समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर निरीक्षण, समीक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जहां जरूरत है, वहां अतिरिक्त सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा प्रतिमाह बुजुर्गों को 1 हजार रुपए वृद्धापेंशन और आयुष्मान कार्ड के जरिए 5 लाख तक निशुल्क इलाज दिलवाने का काम भी विभाग के द्वारा किया जा रहा है। सबसे ज्यादा संख्या बरेली में  लखनऊ में 128, मैनपुरी में 116, प्रयागराज में 120, हमीरपुर में 107, मुरादाबाद में 127, बरेली में 134, गोरखपुर में 107, कानपुर देहात में 116, जालौन में 114, गौतमबुद्ध नगर में 104 बुजुर्ग रह रहे हैं।

मंडप में रोती रहीं बच्चियां, प्रशासन ने पहुंचकर बचाया बचपन

  बूंदी राजस्थान के बूंदी जिले में मासूम बचपन को कुचलने की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां नीम का खेड़ा गांव में 10 से 13 साल की 7 बच्चियों को 'नए घर' ले जाने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया गया. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों को जब एहसास हुआ कि उनका बाल विवाह कराया जा रहा है तो वे फूट-फूट कर रोने लगीं. मंडप में गूंजी मासूमों की सिसकियां बच्चियों ने काउंसलिंग में अधिकारियों को बताया कि परिजनों ने उन्हें कुछ दिन के लिए दूसरे घर जाने की बात कही थी. लेकिन जब मंडप में पंडित ने फेरे शुरू कराए और उन्हें एक अजनबी युवक के साथ बैठाया गया तो उनके होश उड़ गए. खुशी से सजाए गए मंडप में मासूमों की सिसकियां गूंजने लगीं. समाज की भीड़ के आगे उनकी आवाज दब रही थी लेकिन तभी प्रशासन वहां देवदूत बनकर पहुंच गया. टीम का एक्शन और 50 शादियों पर रोक सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने मौके पर पहुंचकर इन सात बाल विवाह को तुरंत रुकवा दिया. बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि हाल ही में चलाए गए अभियान के तहत 14 बाल विवाह रोके गए हैं. नैनवा, हिंडोली, दबलाना जैसे गांवों में दबिश दी गई. पिछले 4 महीनों में ही बूंदी प्रशासन ने 50 मासूमों की शादियां रुकवाकर उनकी जिंदगी बर्बाद होने से बचाई है. परंपरा के नाम पर बचपन की बलि यह मामला भील समाज से जुड़ा है जहां बच्चों के रिश्ते जन्म के समय ही तय कर दिए जाते हैं और आखातीज जैसे मौकों पर एक साथ कई शादियां कर दी जाती हैं. प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बाद अब समाज में डर का माहौल है. सभी मामलों में कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया गया है जिससे आगे इन शादियों को नहीं कराया जा सकेगा. "हमें शादी नहीं करनी, हमें पढ़ना है" जब बाल कल्याण समिति के सामने माता-पिता अपनी बच्चियों को वापस ले जाने के लिए गिड़गिड़ाने लगे तो बच्चियों ने गजब की हिम्मत दिखाई. डरी-सहमी होने के बावजूद उन्होंने साफ कह दिया कि वे अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहतीं. बच्चियों का सिर्फ एक ही सपना था कि उन्हें आगे पढ़ना है. प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाल विवाह करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और समाज को भी इस कुरीति के खिलाफ जागरूक होना होगा.

योगी सरकार की नई नीति लागू, 30 जून तक होगा सर्वे और डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की गई है। इसके तहत गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग गन्ने की फसल का जीपीएस सर्वेक्षण कराएगा। यह जीपीएस सर्वेक्षण 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसकी सूचना 3 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड गन्ना किसानों को मोबाइल एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इनको सर्वेक्षण से पहले प्रशिक्षित भी किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान किसान की मौजूदगी जरूरी होगी। टीम किसान के खेत पर पहुंचकर जीपीएस के जरिए उत्पादन का डाटा सीधे विभाग के सर्वर पर फीड करेगी। वहीं सर्वेक्षण के बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म समेत अन्य जानकारी भी किसानों को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी गई है। सर्वेक्षण कार्य 1 मई से प्रारम्भ कर 30 जून तक पूरा किया जाएगा। साथ ही बताया कि किसी भी गन्ना कृषक के सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in से किया जा सकता है। चीनी मिलें गन्ना सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगी। सर्वेक्षण के दौरान होगा नए किसानों का पंजीकरण विभाग के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण के दौरान नए सदस्यों (किसान) का पंजीकरण भी किया जाएगा। 30 सितम्बर 2026 तक पंजीकृत कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज बढ़ोत्तरी के लिए गन्ना सर्वेक्षण से लेकर 30 सितम्बर 2026 तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के कृषकों, लघु कृषकों और अन्य कृषकों से क्रमशः 10, 100 एवं 200 रुपये प्रति कृषक शुल्क जमा कराया जाएगा।  

फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही खाली हुआ बैंक अकाउंट, चार ट्रांजैक्शन में उड़े पैसे

अजमेर डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लेने के चक्कर में अजमेर के एक शख्स ने 3.50 लाख रुपए से भी ज्यादा की रकम गंवा दी. एक अज्ञात नंबर से आए फोन कॉल के चक्कर में यह शख्स ठगी का शिकार हो गया. साइबर ठगी का यह मामला वाकई चौंकाने वाला है. जानकारी के अनुसार, पुष्कर रोड निवासी मुकेश के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को मेडिकल सेवा से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए किसी नामी डॉक्टर से जल्द अपॉइंटमेंट दिलाने का भरोसा दिलाया. आरोपी ने बातों में फंसाकर मुकेश से कुल 3.66 लाख रुपए ठग लिए. एक लिंक पर क्लिक और अकाउंट खाली ठग ने पीड़ित को एक लिंक भेजा और उसे ओपन करने को कहा. उसके बताए अनुसार मुकेश ने निजी और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी भर दी. जैसे ही मुकेश ने लिंक पर क्लिक कर मांगी गई डिटेल्स दर्ज की, कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 3 लाख 66 हजार रुपए निकाल लिए गए. उसके खाते से अमाउंट कटने का मैसेज आया, जिसके बाद उसे ठगी का अहसास हुआ. साइबर पुलिस ने शुरू की जांच पीड़ित ने तुरंत साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. मामले में साइबर थाना प्रभारी शमशेर खान के नेतृत्व में जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस उन खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगों ने फर्जी लिंक के जरिए मोबाइल और बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बनाई. पुलिस ने आमजन से अपील की, "किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें. अपनी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा करने से बचें."

बालोद : मई के पहले सप्ताह से शुरू होगा तेंदुपत्ता संग्रहण का कार्य

बालोद     जिले में वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य मई माह के प्रथम सप्ताह से शुरू होने जा रहा है। जिसके लिए जिला यूनियन वनमंडल बालोद द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। वनमण्डलाधिकारी एवं जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित बालोद के प्रबंध संचालक श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि जिले के लगभग 25 हजार संग्राहकों के द्वारा तेंदुपत्ता संग्रहण का कार्य किया जाना है। जिन्हंें 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से ऑनलाइन भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य मई माह के प्रथम सप्ताह से शुरू होगा। जिसके लिए 252 फड़ खोले जाएंगे। कलेक्टर द्वारा अन्य विभागों से 151 फड़ एवं वनमंडलाधिकारी द्वारा 101 विभागीय और अभिरक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अलावा निगरानी के लिए जोनल अधिकारी और पोषक अधिकारियों की नियुक्तियां भी पूर्ण हो चुकी हैं।     प्रबंध संचालक ने बताया कि संग्रहण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ’शाखकर्तन कार्यशाला’ का आयोजन पूर्व में किया जा चुका है। फड़मुंशियों का अनुमोदन भी हो गया है। जब तक अच्छी गुणवत्ता के पत्ते प्राप्त होंगे, तब तक संग्रहण केंद्र खुले रहेंगे ताकि संग्राहकों को अधिकतम लाभ मिल सके। संग्रहण और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके अलावा 21 अप्रैल 2026 को जिला पंचायत की वन स्थायी समिति के सदस्यों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। समिति के सदस्य स्वयं फड़ों का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने बताया कि संग्रहण कार्य को अंतिम रूप देने के लिए इसी सप्ताह क्रेता, प्रबंधक और पोषक अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। जिले में तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए पूरी व्यवस्था चाक-चौबंद है। संग्राहकों को सही समय पर उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और संग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी संपन्न कराना हमारा लक्ष्य है। 

पुलिस ने लूट को झपटमारी में बदलकर सजा कम करने की कोशिश की, हाई कोर्ट ने DSP और जांच अधिकारी को किया तलब

चंडीगढ़   पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक मामले में सजा कम करने के उद्देश्य से पुलिस ने लूटमार की घटना को झपटमारी में बदल दिया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लूटमार का मामला होने के बावजूद इसे झपटमारी में परिवर्तित करना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। यह मामला जालंधर में दर्ज एक एफआईआर से संबंधित है, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तीन अज्ञात हमलावरों ने बेसबाल बैट और ‘दातर’ जैसे हथियारों से हमला कर उसे और उसके साथी को घायल किया और मोबाइल फोन, नकदी तथा मोटरसाइकिल छीनकर फरार हो गए। इन तथ्यों के बावजूद पुलिस ने लूटमार की गंभीर धाराओं के बजाय झपटमारी से संबंधित प्रविधानों में मामला दर्ज किया। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने टिप्पणी की कि एफआईआर में वर्णित घटनाक्रम स्पष्ट रूप से लूटमार की श्रेणी में आता है। अदालत ने जांच अधिकारी और संबंधित डीएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि लूटमार के मामले को झपटमारी में क्यों बदला गया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में लापरवाही या जानबूझकर की गई त्रुटियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। हमलावरों ने हथियारों से हमला कर जालंधर में की थी लूट आरोपित को दी जमानत कोर्ट ने कहा कि इस तरह की त्रुटियां तकनीकी नहीं होतीं, बल्कि इससे पूरे मामले की गंभीरता, सजा की प्रकृति और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। आरोपित को नियमित जमानत भी प्रदान की, यह कहते हुए कि आरोपित सात महीने से हिरासत में है और जांच पूरी हो चुकी है। सह-आरोपितों को पहले ही मिल चुकी है।  

प्रदेश में सहकार से हो रहा है डेयरी गतिविधियों का विस्तार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

प्रदेश में सहकार से हो रहा है डेयरी गतिविधियों का विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव डेयरी गतिविधियों में 26 हजार गांवों को जोड़ने और प्रतिदिन 52 लाख कि.ग्रा. दुग्ध संकलन का लक्ष्य दुग्ध क्षेत्र में पारदर्शिता और ब्रांड सुदृढ़ीकरण पर होगा विशेष फोकस दुग्ध समितियों में महिला सदस्यता को किया जाए प्रोत्साहित मोबाइल ऐप से होगा दुग्ध संकलन जिला स्तर पर कार्यक्रमों में होगा आदर्श पशुपालकों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई म.प्र. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में प्रभावी रूप से सहायक है। किसानों की आय दोगुना करने के लिए किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार डेयरी गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा प्रदेश के दुग्ध संघों को दिए जा रहे सहयोग से दुग्ध संकलन में वृद्धि हुई है और किसानों को भी दूध के बेहतर दाम मिल रहे हैं। सहकार के भाव से डेयरी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। दुग्ध समितियों में महिला सदस्यता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डेयरी सहकारी कवरेज के विस्तार और सुदृढ़ीकरण, नई डेयरी प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और पशु चारा संयंत्र के आधुनिकीकरण, डेयरी वैल्यू चैन के डिजीट्लाइजेशन, पारदर्शिता और दुग्ध उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। डेयरी विकास योजना के अंतर्गत 26 हजार गांवो को जोड़ने, प्रतिदिन दुग्ध संकलन 52 लाख किलोग्राम तक करने का लक्ष्य रख, गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की राज्य स्तरीय संचालन समिति की द्वितीय बैठक में दिए। मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में हुई बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल, वरिष्ठ विधायक तथा वरिष्ठ विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अध्यक्ष नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड मीनेष शाह उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के दुग्ध क्षेत्र में अनुभव का लाभ राजधानी से लेकर ग्राम स्तर तक सुनिश्चित किया जाए। दूध और दुग्ध उत्पादों के बिक्री में सुधार के लिए ब्राण्ड सुदृढ़ीकरण और नई पैकेजिंग डिजाइन कर उत्पादों की पहुंच का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुग्ध उत्पादन में वद्धि और विभिन्न दुग्ध उत्पादों के निर्माण के लिए किसानों को नवाचार करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों तथा प्रदेश के युवाओं को डेयरी टेक्नोलॉजी की नई तकनीकों से परिचित कराने की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदर्श पशुपालकों को सम्मानित करने, दूधारू पशुओं की प्रदर्शनी आयोजित करने और डेयरी के संबंध में सूचना सम्प्रेषण के लिए जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और दुग्ध संघों का कार्यअनुबंध करने के बाद वर्ष 2025-26 में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया तथा 701 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील किया गया। प्रदेश में प्रतिदिन 9 लाख 67 हजार कि.ग्रा. दुग्ध संकलन किया जा रहा है, साथ ही 153 नवीन बल्क मिल्क कूलर की स्थापना की गई है। दूध और दूध उत्पादों का क्रेडिट पर विक्रय बन्द कर दिया गया है। प्रदेश में दुग्ध संकलन मोबाइल ऐप से प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से दुग्ध प्रदायकों को दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सकेगी। क्षेत्र संचालन तथा विपणन कार्य में लगे मैदानी अमले की मॉनीटरिंग के लिए फील्ड फोर्स मॉनीटरिंग ऐप आरंभ किया गया है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में दूध की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन में हानि को कम करने और एक समान उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की गई है। इंदौर में स्थापित 30 मीट्रिक टन क्षमता का दुग्ध चूर्ण संयंत्र आरंभ किया जा चुका है। शिवपुरी में 20 हजार लीटर क्षमता के डेयरी संयंत्र और ग्वालियर डेयरी संयंत्र के सुदृढ़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। पशु आहार संयंत्रों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है। पीपीपी मोड पर भी प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास उमाकांत उमराव, प्रमुख सचिव सहकारिता डी. पी. आहूजा, सहित राज्य सरकार और एनडीडीबी के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

स्वगणना 30 अप्रैल तक जारी, 1 मई से शुरू होगा मकान सूचीकरण कार्य

रायपुर : पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने दिलाई जनगणना शपथ नागरिकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान स्वगणना 30 अप्रैल तक जारी, 1 मई से शुरू होगा मकान सूचीकरण कार्य रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सभी को आग्रह करते हुए कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, जो देश की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में आधार प्रदान करता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वगणना प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।       अग्रवाल ने कहा कि जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत जिले में प्रथम चरण के अंतर्गत स्वगणना की प्रक्रिया 16 अप्रैल से प्रारंभ हो चुकी है, जो 30 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगी। मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक किया जाएगा। इसी क्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार को जिला कलेक्टरेट अंबिकापुर सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को जनगणना की शपथ दिलाई।       शपथ के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने यह संकल्प लिया कि वे 1 मई तक चलने वाली जनगणना प्रक्रिया को स्वयं पूर्ण करेंगे तथा समाज के अन्य लोगों को भी इसमें भागीदारी के लिए जागरूक करेंगे। साथ ही यह भी शपथ ली गई कि जनगणना प्रारंभ होने पर प्रगणकों द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों के सही एवं पूर्ण उत्तर प्रदान किए जाएंगे।         इस अवसर पर शपथ में यह भी संकल्प व्यक्त किया गया कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सभी जनगणना 2027 के दौरान अपने कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा से पालन करेंगे और देश के समग्र विकास, सुदृढ़ीकरण एवं सशक्तिकरण में अपनी सक्रिय एवं सकारात्मक भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर कलेक्टरेट सभाकक्ष में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जनगणना के इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्धता जताई और इसे जनभागीदारी से सफल बनाने पर जोर दिया।