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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना जनता के लिए भरोसेमंद मंच

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार घर बैठे मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र, समय और धन की हुई बचत; डिजिटल सेवाओं से रोजगार की राह हुई आसान, ग्रामीणों में बढ़ा शासन पर विश्वास रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सेवा वितरण को नई दिशा मिल रही है। शासन की जनहितैषी सोच और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा सेवा सेतु पोर्टल आज प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए भरोसेमंद माध्यम बन चुका है। इस पोर्टल के जरिए शासकीय सेवाएं अब घर बैठे सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आमजन का समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है। रायगढ़ जिले की तहसील पुसौर के ग्राम भाठनपाली निवासी अजय कुमार प्रधान की सफलता की कहानी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की डिजिटल सुशासन की सोच को साकार करती है। लंबे समय से स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे सरकारी कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे थे। बार-बार तहसील कार्यालय जाने से समय और आर्थिक संसाधनों की हानि हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आवश्यक प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इसके कारण वे कई सरकारी नौकरियों में आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे। इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इस प्रमाण पत्र ने न केवल उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया, बल्कि रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खोल दिए। प्रमाण पत्र मिलने के बाद अजय कुमार प्रधान ने रोजगार सहायक के पद के लिए आवेदन किया। अब वे स्वयं सेवा सेतु पोर्टल का लाभ लेने के साथ-साथ अपने गांव के अन्य लोगों को भी जाति, आय, निवास सहित विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों और सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा सेतु पोर्टल ने सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर समाप्त कर दिए हैं। अब घर बैठे आवेदन करना, समय पर सेवाएं प्राप्त करना और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का सशक्त परिणाम है, जिसने शासकीय सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाकर प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया है। यह पहल न केवल नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु भी बन रही है। अजय कुमार प्रधान की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित डिजिटल पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सेवा सेतु पोर्टल आज केवल एक ऑनलाइन मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए सुविधा, विश्वास और सशक्तिकरण का माध्यम बन चुका है।

रिम्स का औचक निरीक्षण, वित्त मंत्री और स्वास्थ्य सचिव ने व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश

रांची. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सोमवार दोपहर अचानक राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) पहुंचकर वहां की चिकित्सा व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया. दोनों आलाधिकारी ठीक दोपहर 12 बजे रिम्स के ट्रॉमा बिल्डिंग पहुंचे और सेंट्रल इमरजेंसी के साथ-साथ क्रिटिकल केयर विभाग के आईसीयू (ICU) का भ्रमण किया. निरीक्षण के दौरान आईसीयू वार्ड में कई जगह खाली स्थान देखकर वित्त मंत्री और स्वास्थ्य सचिव ने रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा को आड़े हाथों लिया. उन्होंने सख्त लहजे में पूछा कि यहां बेड क्यों नहीं हैं? इस पर रिम्स प्रशासन द्वारा सफाई दी गई कि पुराने बेड टूट गए हैं और नए बेड की खरीद की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है. वेंटिलेटर की धीमी खरीद प्रक्रिया पर सचिव ने जताई नाराजगी बेड की कमी पर जवाब मिलने के तुरंत बाद स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अस्पताल में जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता को लेकर रिम्स प्रबंधन से सवाल किए. उन्होंने पूछा कि अति आवश्यक वेंटिलेटरों की खरीदारी में अब तक इतनी देरी क्यों हुई है? रिम्स प्रबंधन ने इस पर अपनी दलील देते हुए बताया कि फिलहाल 13 नए वेंटिलेटरों की खरीद की कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. इस दौरान मंत्री और सचिव को क्रिटिकल केयर विभाग के एक्सपेंशन को लेकर आगामी योजनाओं से भी अवगत कराया गया. अधिकारियों को बताया गया कि परिसर स्थित बीएसएनएल (BSNL) की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर वहां जल्द ही 16 नए बेड स्थापित किए जा रहे हैं, जिस पर काम शुरू हो चुका है. 20 दिन में होगी गवर्निंग बॉडी की बैठक अस्पताल की बदहाली को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सचिव ने रिम्स प्रशासन को तत्काल सभी अधूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का सख्त निर्देश दिया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगले 15 से 20 दिनों के भीतर रिम्स गवर्निंग बॉडी (GB) की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक होने वाली है. उस बैठक से पहले अस्पताल की इन सभी बुनियादी कमियों और खामियों को हर हाल में दूर कर लिया जाना चाहिए. इसके बाद सचिव ने रिम्स के सभी विभागाध्यक्षों (HOD) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की. उन्होंने साफ निर्देश दिया कि रिम्स परिसर के जितने भी जर्जर और अनुपयोगी भवन हैं, उन्हें अविलंब तोड़कर वहां नए और आधुनिक चिकित्सा भवनों का निर्माण कराया जाए. उन्होंने याद दिलाया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में रिम्स को राज्य भर में अग्रणी भूमिका निभानी है, इसलिए आंतरिक व्यवस्था में अमूल-चूल सुधार लाना अनिवार्य है. पलामू के एक ही परिवार के पांचवें सदस्य की मौत वित्त मंत्री और स्वास्थ्य सचिव करीब एक घंटे तक ट्रॉमा बिल्डिंग में रहे. इस दौरान उन्होंने एक दुखद मामले का भी संज्ञान लिया. रिम्स के क्रिटिकल आईसीयू वार्ड में भर्ती पलामू के एक ही परिवार के प्रभावित सदस्यों में से सोमवार को पांचवें मरीज की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. वहीं, इसी परिवार की छठवीं महिला सदस्य की स्थिति भी अभी गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहा है. हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक महिला की तबीयत में पहले की तुलना में आंशिक सुधार देखा गया है, लेकिन एहतियातन उन्हें आईसीयू में ही रखा गया है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार को व्यक्तिगत रूप से पीड़ित परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया. उन्होंने डॉक्टरों की टीम को निर्देश दिया कि महिला को बचाने के लिए देश के बेहतरीन से बेहतरीन चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया जाए.

पंजाब में दर्दनाक हादसा, जालंधर-पठानकोट हाईवे पर दो कारें भिड़ीं, 4 लोगों की मौत

जालंधर. जालंधर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर किशनगढ़ के पास सोमवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे दो कारों की आमने-सामने टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) के प्रभारी एएसआइ रणजीत सिंह ने बताया कि सुबह करीब साढ़े पांच बजे उन्हें सूचना मिली कि किशनगढ़ अड्डे से आगे एक ढाबे के सामने दो कारों की भीषण टक्कर हुई है, जिसमें चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है और पांच लोग घायल हैं। सूचना मिलते ही एसएसएफ की टीम मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि पीबी-07-सीए-1510 नंबर की एक मारुति बलेनो कार भोगपुर की ओर से जालंधर जा रही थी। किशनगढ़ अड्डा पार करने के बाद कार अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में चली गई और सामने से आ रही उत्तर प्रदेश नंबर की क्रेटा से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बलेनो कार में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान रुपिंदर सिंह पुत्र सुरिंदर सिंह, निवासी होशियारपुर, हरप्रीत कौर पत्नी रुपिंदर सिंह, अर्शदीप सिंह पुत्र रुपिंदर सिंह तथा संतोष कौर के रूप में हुई है। वहीं, क्रेटा कार में सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने एसएसएफ टीम के पहुंचने से पहले ही उन्हें उपचार के लिए नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। घायलों की पहचान अलीना खान पुत्री अब्दुल सईद खान, अब्दुल सईद खान, परवीन खान पुत्र अब्दुल सईद खान, अब्दुल फैसल खान पुत्री अब्दुल सईद खान तथा मैनाल खान पुत्री अब्दुल सईद खान के रूप में हुई है। सभी घायल बरेली (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं।

संत कबीर महोत्सव में मुख्यमंत्री साय और राज्यपाल गहलोत ने किया वृक्षारोपण, सेवा और समरसता का दिया संदेश

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत आज राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लेकर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल  थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है।

रायपुर में बेदखली अभियान पर बवाल, पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई, ग्रामीणों का विरोध

रायपुर. महीनों के उहापोह के बाद आखिरकार प्रशासन की माना क्षेत्र स्थित ग्राम नकटी में बेदखली कार्रवाई शुरू हो गई है. क्षेत्र में अवैध तरीके से बनाए गए मकानों को ढहाने के लिए आधी रात से जेसीबी के साथ करीबन हजार पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं. जानकारी के अनुसार, गांव के वार्ड 16 और 17 में ऐसे 48 अवैध मकान हैं, जिन्हें ढहाने के लिए राजस्व विभाग ने बेदखली का नोटिस चस्पा किया है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है, इसलिए बेदखली की कार्रवाई की जा रही है. वहीं कार्रवाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों का तर्क है कि वे इस जमीन पर सालों से रह रहे हैं. इनमें से कई मकान को पीएम आवास योजना के तहत बनाए गए हैं. बहरहाल, दावे और प्रतिदावे के बीच बेदखली कार्रवाई के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती से गांव में तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है. प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ जिला प्रशासन ने नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी शुरू कर दी है. एसडीएम ने बताया कि सभी परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जा रही है, आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है.

प्रदेशभर में धर्मकांटों की जांच अभियान, 18 जब्त, अनियमितताओं पर चार लाख रुपये के करीब जुर्माना

जयपुर उपभोक्ता मामलात मंत्री श्री सुमित गोदारा के निर्देशानुसार राज्य में निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा उपभोक्ताओं के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा 23 से 25 जून तक प्रदेशभर में धर्मकांटों (वे-ब्रिज) का विशेष सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया।  अभियान के दौरान कुल 311 धर्मकांटों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में 179 संस्थानों पर विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई करते हुए 3 लाख 99 हजार 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं गंभीर अनियमितताओं के मामलों में 18 धर्मकांटे भी जब्त किए गए।  निरीक्षण में 116 मामलों में बिना सत्यापन के धर्मकांटे संचालित पाए गए। इसके अलावा 98 मामलों में सत्यापन प्रमाण-पत्र प्रदर्शित नहीं किया गया, 48 मामलों में मानक बाट सत्यापित नहीं मिले, जबकि 27 संस्थानों पर अनिवार्य एक टन मानक भार उपलब्ध नहीं था। वहीं 2 मामलों में निर्धारित अधिकतम स्वीकार्य त्रुटि से अधिक वजन पाया गया, जिससे व्यापारिक लेन-देन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका है।  जिला स्तर पर ब्यावर में सर्वाधिक 34 हजार 500, चूरू में 30 हजार, हनुमानगढ़ में 26 हजार, अलवर में 22 हजार 500 तथा अजमेर में 18 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। साथ ही अलवर जिले में सर्वाधिक 9 धर्मकांटे जब्त किए गए। विभाग की ओर से बताया कि व्यापारिक लेन-देन में उपयोग होने वाले सभी धर्मकांटों का समय पर सत्यापन कराना, सत्यापन प्रमाण-पत्र का सार्वजनिक प्रदर्शन करना तथा निर्धारित मानक भार उपलब्ध रखना अनिवार्य है। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध विधिक माप विज्ञान अधिनियम एवं नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी धर्मकांटा संचालकों से अपील की है कि वे अपने उपकरणों का समय पर सत्यापन कराएं, आवश्यक मानक भार उपलब्ध रखें तथा सभी वैधानिक प्रावधानों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित करें। विभाग द्वारा भविष्य में भी प्रदेशभर में ऐसे विशेष निरीक्षण अभियान नियमित रूप से संचालित किए जाएंगे, ताकि व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और उपभोक्ताओं का विश्वास कायम रखा जा सके।

योगी सरकार की पहल से उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

यमुना जल परियोजना पर हरियाणा-राजस्थान में समझौता, राजस्थान को मिलेगा पेयजल

चंडीगढ़ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सोमवार को नई दिल्ली में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में हरियाणा सरकार और राजस्थान सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुए इस समझौते के अंतर्गत हरियाणा व राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग तीन दशक पुरानी समस्या का समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सहकारी संघवाद के मंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। दोनों राज्यों के बीच हुआ जल समझौता इस बात का उदाहरण है कि अगर राज्य सहकारी संघवाद की सोच को आगे बढ़ाएं तो तीन दशक पुरानी समस्या भी सरलता से सुलझ सकती है। समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइप लाइनों के जरिये राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन तीन पाइप लाइनों का व्यास 3.6 मीटर से भी अधिक होगा, जिनके माध्यम से राजस्थान और हरियाणा राज्यों के लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था होगी। अमित शाह ने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लिए विन-विन सिचुएशन का अच्छा उदाहरण है। समझौते में वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझीकरण, जल आवंटन और जल छोड़ने के प्रोटोकाल के साथ रखरखाव का बारीकी से ध्यान रखा गया है। हरियाणा, राजस्थान और विशेषकर केंद्रीय जल आयोग ने इस समझौते का जो प्रारूप बनाया है वह आने वाले कई दशकों तक विवादहीन समझौते के रूप में स्थापित रहेगा। समझौते के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में भी पीने का पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो जाएगी। परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के जरिये राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुंचाना है। इससे राज्य, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बंटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। हथनीकुंड बैराज से राजस्थान तक बिछेगी पाइपलान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि यमुना जल परियोजना को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में लगातार हरियाणा और राजस्थान के बीच बैठकें हुई। एमओयू के अंतर्गत हरियाणा में जुलाई और अक्टूबर के बीच जो वर्षा का सरप्लस पानी होता है, राजस्थान उसे पाइपलाइन के माध्यम से ले जाकर पेयजल के लिए उपयोग करेगा। इस परियोजना के अंतर्गत हथनीकुंड बैराज से राजस्थान तक पाइपलाइन बिछाई जाएगी और सरप्लस पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी समेत राजस्थान व केंद्र सरकार के अधिकारी मौजूद रहे।

गोमती नदी के उद्गम स्थल के विकास पर योगी सरकार का फोकस, ₹1.04 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

योगी सरकार 1.04 करोड़ से संवारेगी गोमती नदी का उद्गम स्थल पर्यटन विभाग की पहल, पीलीभीत जिले में स्थित मां गोमती उद्गम स्थल पर विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएं गोमती नदी की प्रदेश में 960 किमी. की है यात्रा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सम्मान मां गोमती के उद्गम स्थल के विकास से खुलेगा पर्यटन का नया अध्याय: मंत्री जयवीर सिंह लखनऊ/पीलीभीत  उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा। करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित गोमती नदी प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करते हुए करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन आकर्षण के लिए होंगे कई काम परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को मिली है। धार्मिक विरासत को मिलेगा सम्मान गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा क्षेत्र स्थित पौराणिक फुलहर झील (गोमत ताल) से होता है। लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों को जीवन प्रदान करती हुई अंततः गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। वहीं नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की वाहक मानी जाती है। मां गोमती सनातन आस्था की प्रतीक मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए।

इन्फ्लुएंसर मीट से चमकेगा छत्तीसगढ़ पर्यटन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दुनिया देखेगी प्रदेश की खूबसूरती

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव रायपुर डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर" का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी। मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं। यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।  इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।