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सभी अधिकारी नगरीय निकायों को स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में स्थापित करें: मंत्री विजयवर्गीय

सभी अधिकारी नगरीय निकायों को स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में करें स्थापित : मंत्री विजयवर्गीय अधिकारी विद्यार्थी भाव से सेवा और जन-भागीदारी को बनाएँ अपना ध्येय सड़क और जल आपूर्ति के साथ रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि पर दें विशेष ध्यान सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में "शहरी सुधार कार्यशाला" का किया शुभारंभ भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में दीप प्रज्ज्वलित कर "शहरी सुधार कार्यशाला"का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारियों को संबोधित करते हुए दूरदर्शी नेतृत्व और कर्मठता के साथ नगरों के कायाकल्प करने का आह्वान किया। प्रशासन व्यवहार से चलता है, जन-सेवा ही सर्वोपरि: मंत्री विजयवर्गीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि, "यदि सभी अधिकारी विद्यार्थी भाव को आत्मसात कर जीवन जिएंगे, तो व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों ही उत्कृष्ट होंगे। उन्होंने कहा  कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं, बल्कि उचित व्यवहार से चलता है। जनता की सेवा के लिए समर्पण और कठोर परिश्रम ही एक सफल अधिकारी की वास्तविक पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को दोहराते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप हमें सभी नगरीय निकायों को 'आत्मनिर्भर' बनाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि हमारे शहरी केंद्रों को 'विकास केंद्र' के रूप में विकसित किया जाए। अधिकारियों को अब केवल सुदृढ़ सड़क और स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शहर में रोजगार के नवीन अवसर उत्पन्न करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। नवाचार और राजस्व वृद्धि पर विशेष बल मंत्री विजयवर्गीय ने नगरों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए भूमि मुद्रीकरण और भूमि के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि नगरीय भूमि का उपयोग जनकल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए प्रभावी ढंग से हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाला समय शहरीकरण का है। यदि आप पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ नवीन कार्य करेंगे और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ देंगे, तो जनता भी कर वृद्धि जैसे निर्णयों में सहर्ष आपका साथ देगी। उन्होंने अधिकारियों को जन-प्रतिनिधियों के साथ सामंजस्य बिठाकर चुनौतियों को स्वीकार करने की सीख दी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारियों से संवाद के दौरान कहा कि नगरीय निकायों में कार्य करते समय सेवा भाव अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह सीधे जनता से जुड़ा दायित्व है। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संस्थान में प्रथम बार इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से सक्रियता, ऊर्जा और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। दुबे ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आगामी वर्ष के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना और नियोजित विकास के साथ नागरिक जागरूकता विकसित करना है। उन्होंने अर्बल चेलेंज फंड और द्वारका योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से नगरीय निकायों के कायाकल्प की संभावनाओं पर भी बल दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विभाग एक परिवार और सामूहिक भावना के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के आयुक्त, मुख्य नगरपालिका अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यशाला में सम्मिलित हैं। कार्यशाला का मुख्य केंद्र नागरिक संतुष्टि और मूलभूत सिद्धांतों पर कार्य करना है।        इस कार्यशाला के माध्यम से आगामी दो दिनों तक नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार , समीक्षा और संवाद का क्रम निरंतर जारी रहेगा, ताकि प्रदेश के शहरों को आधुनिक और जन-सुविधाओं से युक्त बनाया जा सके।  

सुमेरपुर में मिलावटखोरी का भंडाफोड़, नामी ब्रांड के नाम पर नकली घी तैयार

पाली पाली जिले के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के संजय नगर में मिलावटखोरी के खिलाफ खाद्य विभाग और सुमेरपुर थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की. नकली घी बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारा. भारी मात्रा में मिलावटी सामग्री, नकली घी और पैकिंग से जुड़ा सामान बरामद किया गया है. सभी को जब्‍त कर लिया गया.   ब्रांडेड नाम से हो रही थी ठगी फैक्ट्री में घटिया गुणवत्ता के पाम ऑयल और केमिकल्स की मदद से नकली घी तैयार किया जा रहा था. तैयार घी को कृष्णा, सरस और नोवा जैसे नामी ब्रांड्स के स्‍टीकर लगाकर टिन में पैक किया जा रहा था, ज‍िससे बाजार में उसे असली बताकर बेचा जा सके. 44 टिन घी सी कार्रवाई के दौरान टीम ने 44 टिन नकली घी को जब्त किया. इसके साथ ही बड़ी मात्रा में पाम ऑयल भी बरामद हुआ, जिसका उपयोग मिलावट के लिए किया जा रहा था. अधिकारियों के अनुसार, यह घी उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता था. 244 किलो केमिकल जब्त मौके से करीब 244 किलो मिलावटी केमिकल और पैकिंग मटेरियल भी बरामद किया गया है. इसके अलावा घी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें और अन्य उपकरण भी जब्त कर लिए गए हैं. संगठित नेटवर्क की आशंका शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से संचालित हो रहा था, और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क हो सकता है.  स्थानीय स्तर पर सुमेरपुर को नकली घी के कारोबार का बड़ा केंद्र माना जा रहा है. आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस फिलहाल खाद्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई क्षेत्र में लगातार जारी रहेगी. मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है, और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.   सीएमएचओ डॉक्टर विकाश मरवाल ने कहा कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी, ज‍िससे मिलावटखोरी पर रोक लगाई जा सके, और आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो.

भीषण हादसे से दहला वेदांता प्लांट, उद्योग मंत्री ने जताया गहरा शोक

रायपुर. वाणिज्य, उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने सक्ती जिले के डभरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में बॉयलर फटने से हुई दुर्घटना में जानमाल के नुकसान पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मंत्री देवांगन ने इस घटना को अत्यंत दुखद और पीड़ादायक बताते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ प्रकट कीं। उन्होंने कहा कि इस हादसे में श्रमिकों की मृत्यु और कई लोगों के घायल होने का समाचार अत्यंत व्यथित करने वाला है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। उद्योग मंत्री ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही  कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से दूरभाष पर चर्चा कर जिला प्रशासन को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। वर्तमान में प्रशासन की निगरानी में तेजी से राहत कार्य संचालित किया जा रहा है तथा घायलों को त्वरित और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी घायलों के उपचार में किसी प्रकार की कमी न हो और आवश्यकतानुसार बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही, उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मंत्री देवांगन ने स्पष्ट किया कि इस घटना की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध श्रम क़ानून के अंतर्गत सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

हरियाणा में टैक्स चोरी का खेल, दक्षिण भारत के वाहन फर्जी पते पर रजिस्टर्ड

अंबाला अंबाला छावनी के उप-मंडलाधिकारी कार्यालय में एक बड़े वाहन पंजीकरण घोटाले का खुलासा हुआ है। इस घोटाले के तहत बाहरी राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत के वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हरियाणा में पंजीकृत किया जा रहा था। जांच में अब तक 200 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। क्या है पूरा मामला जांच रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु और नगालैंड जैसे राज्यों के वाहनों को अंबाला के फर्जी पतों पर पंजीकृत किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा में कम पंजीकरण शुल्क का लाभ उठाना और टैक्स चोरी करना था। अब तक 213 वाहनों की पहचान की गई है जिनका पंजीकरण धोखाधड़ी से किया गया।अनुमान है कि प्रति वाहन 1 से 2 लाख रुपये अवैध रूप से वसूले गए, जो एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हैं। कई वाहन ऐसी कंपनियों के नाम पर दर्ज थे जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। इस प्रकार के मामले आए सामने एक हाइड्रोलिक मोबाइल क्रेन के.पी.कंस्ट्रक्शन के नाम पर दर्ज थी, लेकिन जांच में गांव में ऐसी कोई कंपनी नहीं मिली। इसका असली मालिक तमिलनाडु का निकला। इसी प्रकार एक अन्य क्रेन  एसआर क्रेन सर्विसेज। के नाम पर थी, जिसका मालिक कोयंबटूर का निवासी पाया गया। नियमों की धज्जियां जांच समिति ने इसे राजस्व की जानबूझकर की गई हानि और दुर्भावना पूर्ण  मंशा का मामला बताया है। नियमों के अनुसार, वाहन वहीं पंजीकृत हो सकता है जहां मालिक सामान्य रूप से निवास करता हो। प्रमुख खामियां जो जांच में मिलीं     अनिवार्य फॉर्म 20, 21 और 22 गायब मिले, केवल असत्यापित फोटोकॉपी फाइल में थी     कोई वैध बीमा कागजात या मोटर वाहन निरीक्षक प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था।     अंबाला में निवास का कोई वैध प्रमाण या आईडी जमा नहीं की गई थी।  

सिलगेर के माड़वी कोसा की मेहनत रंग लाई: अपने हाथों से बनाया घर, CM ने सौंपी खुशियों की चाबी

रायपुर.  ग्राम पंचायत सिलगेर विकासखंड कोन्टा के हितग्राही माड़वी कोसा के लिए वर्षों पुराना सपना अब साकार हो गया है। जो परिवार कभी कठिन परिस्थितियों में जर्जर झोपड़ी में जीवन गुजार रहा था, आज उसी परिवार के पास एक सुरक्षित, सम्मानजनक और मजबूत पक्का आवास है। नियद नेल्लानार योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के संयुक्त प्रयासों ने उनके जीवन में वह बदलाव ला दिया, जिसने संघर्ष को उम्मीद में बदल दिया। इस बदलाव की असली नींव बनी रूरल मेसन ट्रेनिंग, जिसे मेरापथ एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त कर कोसा ने न केवल निर्माण कार्य की तकनीक सीखी, बल्कि आत्मविश्वास के साथ अपने ही हाथों से अपने घर का निर्माण कर दिखाया। यह कहानी केवल एक मकान बनने की नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के आत्मनिर्भर बनने और अपने भविष्य को स्वयं गढ़ने की प्रेरक मिसाल बन गई है। वित्तीय वर्ष 2024–25 में प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण अंतर्गत कोसा को 1.20 लाख रुपए की आवास स्वीकृति मिली। इसके साथ ही मनरेगा अभिसरण से 95 मानव दिवस एवं 23,085 रुपए की मजदूरी सहायता प्रदान की गई, जिससे निर्माण कार्य को गति मिली। वहीं स्वच्छ भारत मिशन से 12,000 रुपए की राशि से शौचालय निर्माण, सोलर पैनल से रोशनी की सुविधा और नल–जल व्यवस्था से घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से उनके परिवार का जीवन अब सुविधाजनक और सुरक्षित बन गया है। इस प्रेरणादायक परिवर्तन पर कलेक्टर अमित कुमार ने इसे जिले के लिए मॉडल बताते हुए कहा कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन और कौशल विकास मिलकर परिवारों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। वहीं जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने इसे सफल उदाहरण बताते हुए कहा कि प्रशिक्षण से गुणवत्ता बढ़ती है और हितग्राही स्वयं सशक्त बनता है। मुख्यमंत्री प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कोसा से संवाद कर उन्हें साल-श्रीफल एवं सांकेतिक चाबी भेंट कर सम्मानित किया। आज माड़वी कोसा का यह पक्का घर केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक की वह कहानी है जो पूरे क्षेत्र को प्रेरणा दे रही है।

मनरेगा से पनारी नाले का जीर्णोद्धार: 1200 ग्रामीणों को पेयजल व सिंचाई का लाभ

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदृष्टि एवं ग्रामीण समृद्धि के संकल्प को साकार करते हुए जिला सूरजपुर  के जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत पहाड़ अमोरनी (सारासोर) में पनारी नाले का मनरेगा के तहत सफलतापूर्वक जीर्णोद्धार किया गया है। कलेक्टर एस. जयवर्धन के निर्देश एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजेंद्र पाटले के मार्गदर्शन में किए गए इस कार्य से 1200 से अधिक ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो रहा है। गाद सफाई एवं स्टॉप डेम मरम्मत से नाले को मिला नया जीवन इस कार्य के अंतर्गत 156 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया। नाले की गाद सफाई कर उसे पुनर्जीवित किया गया तथा पूर्व निर्मित स्टॉप डेम की मरम्मत कर जल संरक्षण सुनिश्चित किया गया। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में नाले में लगभग 2 मीटर तक जलस्तर दर्ज किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में जल उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पेयजल संकट से राहत, पशुओं को भी मिल रहा लाभ नाले में जलस्तर बढ़ने से ग्राम पंचायत पहाड़ अमोरनी के ग्रामीणों को हैंडपंप एवं अन्य जल स्रोतों से सहजता से पेयजल उपलब्ध हो रहा है। साथ ही लगभग 200 पशुओं की पानी की आवश्यकता भी इस जलस्रोत से पूरी हो रही है, जिससे पशुपालकों को भी बड़ी राहत मिली है। कृषि को मिला संबल, किसानों की आय में वृद्धि नाले के पुनर्जीवन से क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिला है। लगभग 20 हेक्टेयर भूमि पर 26 किसान रबी-खरीफ फसलों के साथ-साथ मौसमी सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। ग्राम के कृषक अम्बेलाल, नंदलाल एवं रामधन द्वारा उत्पादित सब्जियों को चंद्रमेणा बाजार में विक्रय कर अच्छी आमदनी अर्जित की जा रही है। ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का स्पष्ट विजन है कि ग्रामीण, आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों के किसान आत्मनिर्भर बनें तथा शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे उनके खेत-खलिहान तक पहुंचे। पनारी नाले का यह जीर्णोद्धार कार्य मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन, जल संरक्षण एवं कृषि विकास—इन तीनों उद्देश्यों की एक साथ सफल पूर्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।

अब बालिका विद्यालयों में सख्ती, केवल अभिभावकों को ही मिलेगा प्रवेश: शिक्षा विभाग

जयपुर राजस्थान शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश में बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब नया कदम उठाया गया है. शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी बालिका विद्यालयों और छात्रावासों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है. इस आदेश के बाद अब बालिका विद्यालयों और छात्रावासों में केवल वही व्यक्ति प्रवेश कर पाएंगे, जिनका नाम पहले से छात्रा के अभिभावक या संरक्षक के रूप में अंकित है. इसके अलावा कोई भी व्यक्ति बिना अभिभावकों की जानकारी के बालिका से नहीं मिल पाएगा.   महिलाओं से हो रहे अपराध आंकड़ों की बात करें, तो एनसीआरबी की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में महिला की बेइज्जती या मारपीट कर मर्यादा भंग करने के कुल 9 हजार 537 मामले सामने आए. महिलाओं के अपहरण के कुल 7 हजार 663 मामले, बलात्कार के 5 हजार 194, बलात्कार प्रयास के 846 के मामले सामने आए.   प्रिंंसिपल और वार्डन को निर्देश जारी   विभाग की ओर से सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और छात्रावासों के वॉर्डन को इसके लिए विशेष दिशा निर्देश जारी किए गए हैं. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि जब मैं सामाजिक अधिकारिता मंत्री था, तब समाज कल्याण के छात्रावास में इस तरह का नियम हमने किया था.   मिलने वाले की फोटो ली जाएगी कोई भी व्यक्ति छात्रा से मिलने आता था तो उसका नाम और फोटो से पहचान की जाती थी. नाम और फोटो प्रवेश के वक्त ही रजिस्टर्ड कर लिए जाते थे. अब प्रदेश के सभी स्कूलों और छात्रावासों में बालिकाओं की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है.

लहरागागा के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में ओपीडी और आईपीडी सेवाओं की शुरुआत

लहरागागा  पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा, डॉ. बलबीर सिंह और बरिंदर कुमार गोयल द्वारा लहरागागा में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के पंजाब सरकार के ऐतिहासिक फैसले की दिशा में पहला कदम उठाते हुए, यहां के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं सहित ओपीडी और आईपीडी सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। लहरागागा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि ये मेडिकल सेवाएं जनहित ट्रस्ट के यूनिट आचार्य विद्यानंद जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च द्वारा प्रदान की जाएंगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि इस संस्था को किसी भी रूप में निजी हाथों में नहीं दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना है, और इसी उद्देश्य से इसे जनहित ट्रस्ट को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार के प्रयासों से बंद पड़े बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के रूप में पुनः शुरू किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पहले इस क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी थी, लेकिन अब सरकार इस क्षेत्र में विशेष ध्यान दे रही है। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि अगले साल से मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग की कक्षाएं शुरू होंगी, साथ ही एमडी और एमएस की पढ़ाई भी शुरू की जाएगी। इससे क्षेत्र के योग्य छात्रों को डॉक्टर बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले आपातकालीन सेवाओं की कमी के कारण मरीजों को संगरूर या पटियाला जाना पड़ता था, जिससे कई बार समय पर इलाज न मिलने के कारण जान का नुकसान हो जाता था। अब स्थानीय स्तर पर ही बेहतर औरo आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होंगी। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश और सीटों का वितरण राज्य सरकार के नियमों के अनुसार किया जाएगा। सभी श्रेणियों के लिए फीस भी सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही ली जाएगी। इस मेडिकल कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों की क्षमता और कम से कम 440 बेड होंगे।  

भोजशाला विवाद में मंदिर पक्ष का बयान: इस्लामी सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा- जबरन मस्जिद का निर्माण नहीं हो सकता

भोजशाला विवाद: मंदिर पक्ष ने इस्लामी सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा- जबरन जमीन पर मस्जिद मान्य नहीं भोजशाला विवाद में मंदिर पक्ष का बयान: इस्लामी सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा- जबरन मस्जिद का निर्माण नहीं हो सकता भोजशाला विवाद में मंदिर पक्ष का बड़ा बयान, इस्लामी सिद्धांत पर आधारित कहा- जबरन मस्जिद की मान्यता नहीं इंदौर  मध्यप्रदेश में धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने के लिए हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में बुधवार से पुनः नियमित सुनवाई शुरू हो गई। मंदिर पक्ष के समर्थन में याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से एडवोकेट मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा, इस्लामिक सिद्धांत के अनुसार जबरन जमीन लेकर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता। यदि कहीं ऐसा हुआ भी है, तो उस जमीन को लौटाने के उदाहरण भी इस्लाम में हैं। वहीं, हिंदू धार्मिक नियमों व मान्यताओं के अनुसार, एक बार मंदिर रहा स्थल सदैव मंदिर ही रहता है। ये दोनों ही बातें इंगित करती हैं कि भोजशाला आज भी वाग्देवी का मंदिर ही है। गुप्ता ने ब्रिटिश संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूर्ति पर अंकित विवरण का संदर्भ देते हुए कहा, उससे इस मूर्ति की स्थापना राजा भोज द्वारा किए जाने का प्रमाण सामने आता है। उन्होंने कहा, भोजशाला में इसके पहले भी एएसआई का सर्वे हो चुका है। हर सर्वे में यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां, चित्र मिले हैं, जो किसी मस्जिद में नहीं हो सकते। हवन कुंड से लेकर मूर्तियां तक मंदिर होने का प्रमाण: न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला व आलोक अवस्थी की पीठ के समक्ष शुक्रवार को अधूरी रही बहस आगे बढ़ाते हुए मनीष गुप्ता ने कहा, वर्ष 1908 में प्रकाशित राजपत्र में कहा गया है कि भोजशाला में पत्थरों पर लिखा है कि यहां बसंत पंचमी के दिन राजा भोज द्वारा लिखे गए नाटक का मंचन किया जाता था। राजा भोज द्वारा लिखी पुस्तकों में उल्लखित मानकों के अनुरूप ही भोजशाला में बने हवन कुंड की लंबाई-चौड़ाई है। भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से बहुत पहले से है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने इस्लामी सिद्धांत हदीस का हवाला देते हुए कहा कि इस्लामिक कानून कहता है कि जबरन जमीन लेकर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता, अगर कहीं ऐसा हुआ भी है तो उस जमीन को लौटाने के उदाहरण भी इस्लाम में हैं। हिंदू कानून के अनुसार एक बार मंदिर रहा स्थल हमेशा मंदिर ही रहता है। ये दोनों ही बातें इंगित करती हैं कि भोजशाला वाग्देवी का मंदिर ही है। ऐतिहासिक राजपत्र और राजा भोज की पुस्तकों का उल्लेख  न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भोजशाला मामले में सुनवाई शुरू हुई। एडवोकेट गुप्ता ने शुक्रवार को अधूरी रही बहस आगे बढ़ाते हुए कोर्ट को बताया कि वर्ष 1908 में प्रकाशित राजपत्र में कहा है कि भोजशाला में जो पत्थर लगे हैं उन पर लिखा है कि यहां बसंत पंचमी के दिन राजा भोज द्वारा लिखे गए नाटक का मंचन किया जाता था। एडवोकेट गुप्ता ने राजा भोज द्वारा लिखी गई पुस्तकों का उल्लेख किया और बताया कि इन पुस्तकों में बताया है कि हवन कुंड कैसा होना चाहिए, हवन कुंड का क्षेत्रफल कितना होना चाहिए, मंदिर में स्थापित देवी की मूर्ति की साइज कितनी होनी चाहिए। हवन कुंड और वाग्देवी की मूर्ति का मिलान मूर्ति की मुद्रा क्या होनी चाहिए, पुस्तक में बताया है कि हवन कुंड की लंबाई-चौड़ाई कितनी होनी चाहिए। भोजशाला में बने हवन कुंड की लंबाई-चौड़ाई उतनी ही है जो राजा भोज द्वारा लिखी गई पुस्तक में लिखी है। वाग्देवी की ब्रिटिश संग्रहालय में रखी मूर्ति पर भी उल्लेखित है कि इसे राजा भोज ने स्थापित किया था। यह मूर्ति भोजशाला से ही ब्रिटिश संग्रहालय पहुंचाई गई थी। इन बातों से सिद्ध होता है कि भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से बहुत पहले से है। भोजशाला के सर्वे में अब तक 150 से ज्यादा मूर्तियां मिल चुकी हैं। यह इस बात को सिद्ध करता है कि भोजशाला मंदिर ही है। सर्वे रिपोर्ट और मूर्तियों के साक्ष्य का हवाला अदालत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट और पुरातात्विक साक्ष्यों का भी हवाला दिया गया। बताया गया कि भोजशाला परिसर से अब तक 150 से अधिक देवी-देवताओं की मूर्तियां, आकृतियां और चित्र मिले हैं, जो किसी मस्जिद में संभव नहीं हैं। ब्रिटिश संग्रहालय में रखी गई वाग्देवी की मूर्ति पर जो विवरण अंकित है वह बताता है कि मूर्ति की स्थापना राजा भोज ने की थी। धार भोजशाला में इसके पहले भी कई बार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का सर्वे हो चुका है। हर बार सर्वे में यहां से देवी-देवताओं की मूर्तियां, आकृतियां, चित्र मिले हैं जो किसी मस्जिद में हो ही नहीं सकते क्योंकि इन्हें वहां रखने की अनुमति नहीं होती। भोजशाला मंदिर है इसलिए याचिकाकर्ता को 24 घंटे पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। इस्लामिक कानून के उदाहरण और अगली सुनवाई एडवोकेट गुप्ता ने कोर्ट के समक्ष इस्लामिक कानून का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि इस्लामिक कानून के अनुसार किसी की जमीन जबरन लेकर उस पर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में ऐसे उदाहरण भी प्रस्तुत किए जब जबरन ली गई जमीन लौटाई गई हो। भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील चल रही हैं। इन सभी में सुनवाई एक साथ हो रही है। 6 अप्रैल से हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई में अब तक दो याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और कुलदीप तिवारी की ओर से तर्क रखे जा चुके हैं। मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। आज भी होगी सुनवाई भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चार याचिकाएं और एक अपील विचाराधीन है। सभी में सुनवाई एक साथ हो रही है। छह अप्रैल से हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई में अब तक दो याचिकाकर्ता- हिंदू फ्रंट फार जस्टिस और कुलदीप तिवारी की ओर से तर्क रखे जा चुके हैं। मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। एक अन्य याचिकाकर्ता अंतर सिंह की ओर से तर्क रखे जाएंगे।  

स्व-गणना 2026 शुरू: हरियाणा में लोग खुद भर सकेंगे जनगणना विवरण

चंडीगढ़ हरियाणा में जनगणना का पहला चरण शुरू हो गया है। आज सुबह से स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रदेश में 16 से 30 अप्रैल तक स्व-गणना की प्रक्रिया चलेगी। सीएम नायब सैनी ने स्व-गणना के आंकड़े दर्ज किए।   पहले चरण में मकानों की गणना और मकान से संबंधित जानकारी लोगों से पूछी जाएगी। यह जनगणना एक मई से 30 मई तक चलेगी। भारत सरकार ने इस बार एक विशेष सुविधा दी है, जिससे लोग खुद से अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे।   भारत सरकार ने स्व जनगणना के लिए एक पोर्टल https://se.census.gov.in/ लॉन्च किया है। इसके पोर्टल के जरिये लोग स्वयं भी अपना डाटा भर सकेंगे। स्वगणना से समय की बचत होगी। सटीक जानकारी भरी जा सकेगी। जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इसमें लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी। आजादी के बाद पहली बार जाति का डेटा जुटाया जाएगा। इससे पहले 1931 में ऐसा हुआ था। हरियाणा ने जनगणना की पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए अधिकारियों की ट्रेनिंग व जिम्मेदारी तय कर दी गई है। स्वगणना में सिर्फ 15 मिनट का समय लगेगा। पोर्टल से ऐसे भरनी होगी जानकारी 1. सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा। 2. अपने मोबाइल नंबर से ओटीपी द्वारा लॉगिन करें 3.अपना राज्य, जिला और स्थानीय विवरण चुनें 4. डिजिटल मानचित्र पर अपने घर का स्थान चिन्हित करें 5.मकान व परिवार से संबंधित जानकारी भरें 6. सबमिशन के बाद स्व गणना की एक आईडी मिलेगी 7. इस आईडी को संभाल रखें। फोटो खींच ले या प्रिंट आउट निकाल कर रख लें। 8. जब जनगणना कर्मी आएंगे तो उन्हें सिर्फ अपनी आई डी दे दें। स्व गणना नहीं कर पाए तो चिंता की बात नहीं चीफ प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी डा. ललित जैन ने बताया यदि कोई स्व गणना नहीं कर पाता है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। एक मई से जनगणना कर्मी घर आएंगे और सारी जानकारी नोट कर ले जाएंगे। हरियाणा में 70 हजार कर्मियों को जनगणना के लिए प्रशिक्षित किया गया है। यह ट्रेनिंग पिछले दो महीने से चल रही है। इसके अतिरिक्त सभी डिविजनल कमिश्नर, डीसी, सीटीएम, तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को भी विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारी दी गई है। आपसे क्या-क्या पूछा जाएगा मकान से संबंधित : मकान संख्या, फर्श, दीवार व छत की मुख्य सामग्री, मकान का उपयोग (आवासीय/गैर-आवासीय), मकान की स्थिति। परिवार की जानकारी : परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम, मकान का स्वामित्व, कमरों की संख्या। मूलभूत सुविधाएं : पेयजल का स्रोत, बिजली की सुविधा, शौचालय की उपलब्धता व प्रकार, स्नानघर की सुविधा, रसोई व गैस कनेक्शन, खाना पकाने का ईंधन। परिवार की सुविधाएं : रेडियो-टेलीविजन, इंटरनेट व कंप्यूटर, मोबाइल फोन, दोपहिया व चारपहिया वाहन। जनगणना कर्मी के आई कार्ड में होगा बार कोड इस जनगणना कर्मी के आई कार्ड में बार कोड भी होगा। यदि किसी को शक है कि वह कर्मी जनगणना विभाग का नहीं है तो वह मोबाइल से बार कोड को स्कैन कर उस कर्मी की पूरी जानकारी मिल जाएगी। जनगणना के लिए इस बार विशेष तौर पर सरपंचों व महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप से अपील की गई है कि वे अपनी और अपने साथ जुड़े लोगों से स्व गणना करवाएं, ताकि जनगणना का काम निर्धारित समय पर पूरा किया जा सके। मेरी लोगों से अपील है कि जो जानकारी पूछी जाए, उसकी सही जानकारी दें। जनगणना में सभी जानकारी पूरी तरह से गोपनीय और सुरक्षित होगी। लोगों से अपील की जाती है कि वह जनगणना कर्मी का सहयोग करें और स्व-गणना भी करें। – ललित जैन, चीफ प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी