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Chrome को टक्कर देने आया Comet ब्राउज़र, अरविंद श्रीनिवास ने किया भारतीय यूजर्स के लिए लॉन्च

नई दिल्ली Google Chrome वेब ब्राउजर को अब भारत में कड़ी टक्कर मिल सकती है. दरअसल Perplexity के CEO अरविंद श्रीनिवास ने ऐलान किया है कि अब भारतीय यूजर्स के लिए भी Perplexity Comet ब्राउजर एवेलेबल हो जाएगा. आपको बता दें कि पिछले कुछ महीने में कॉमेट ब्राउजर काफी सुर्खियां बटोर रहा है.  परप्लेक्सिटी के कॉमेट ब्राउजर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमे कंपनी Agentic AI का सपोर्ट दिया है. इस ब्राउजर में इनबिल्ट असिस्टेंट दिया गया है जो आपके दिए गए कमांड के बेसिस पर खुद से टास्क परफॉर्म करता है. उदाहरण के तौर पर आप इस ब्राउजर में दिए गए असिस्टेंट को कमांड दे कर टिकट बुक करा सकते हैं.  एजेंटिक वेब ब्राउजर्स की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि ये आपके लिए खुद से आपके टैब्स को टेकओवर लेकर उसमें काम कर सकते हैं. आपको इसे सिर्फ कमांड देना है और ये खुद से वेबसाइट्स के साथ इंट्रैक्ट कर सकता है.  Perplexity Comet अब तक इन्वाइट बेस्ड ब्राउजर है यानी सभी को इसका ऐक्सेस नहीं मिला है. अब भारत में इसे विंडोज और मैक कंप्यूटर्स और लैपटॉप्स में यूज किया जा सकेगा. हालांकि एंड्रॉयड और आईफोन में कॉमेट ब्राउजर के लिए और इंतजार करना होगा, क्योंकि अभी सिर्फ साइन अप कर सकते हैं. जब एवेलेबल होगा तब ही आप इसे मोबाइल फोन में डाउनलोड कर सकेंगे.  Perplexity CEO अरविंद श्रीनिवास ने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा है कि भारत के सभी Perplexity Pro यूजर्स के लिए Comet ब्राउजर रोलआउट किया जा रहा है. यानी परप्लेक्सिटी के फ्री यूजर्स को कॉमेट ब्राउजर नहीं मिलेगा.  गौरतलब है कि अमेरिका में कंपनी ने सबसे पहले Perplexity AI ने कॉमेट ब्राउजर को इन्वाइट ऑनली जारी किया था. शुरुआत में इसे खूब सराहना मिली और लोगों ने भी खूब पसंद किया. क्योंकि ये यूजर्स को इफिशिएंट और फास्ट बना रहा है. कई यूजर्स ने इसे डिफॉल्ट भी बना लिया, लेकिन धीरे धीरे इसे लेकर लोग शिकायत कर रहे हैं.  Perplexity का कॉमेट ब्राउजर क्रोम की तरह ही ज्यादा एनर्जी कंज्यूम कर रहा है यानी आपके कंप्यूटर का ज्यादा सीपीयू इसी ब्राउजर के लिए यूज होगा. प्राइवेसी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि Perplexity Comet का असिस्टेंट आपके ब्राउजर और टैब को पूरी तरह कंट्रोल में ले सकता है. इतना ही नहीं आगे ये भी प्लान है कि कंप्यूटर के नेटिव सेटिंग्स के साथ भी Perplexity का कॉमेट असिस्टेंट काम कर सकता है.  कैसे करें यूज? अगर आपके पास Perplexity Pro सब्सक्रिप्शन है तो आप कॉमेट ब्राउजर की वेबसाइट पर जा कर इसे डाउनलोड कर सकते हैं. लॉगइन करने के बाद आप इसे यूज कर सकते हैं.

प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स सामान्य, लेकिन समझदारी से करें मैनेज: क्या खाएं, क्या नहीं

प्रेग्नेंसी के दौरान फूड क्रेविंग्स बेहद आम हैं और ज्यादातर महिलाओं में पहली तिमाही के अंत से दूसरी तिमाही में यह बढ़ जाती हैं; मीठा, नमकीन, खट्टा और मसालेदार चीजों की चाह सामान्य है, लेकिन पोषण संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव, स्वाद और गंध की संवेदनशीलता, मॉर्निंग सिकनेस और पोषक तत्वों की कमी क्रेविंग को बढ़ाते हैं, इसलिए हेल्दी विकल्प चुनना मां और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित रहता है। क्रेविंग्स क्यों होती हैं गर्भावस्था में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बदलने से स्वाद और गंध की समझ प्रभावित होती है, जिससे कुछ चीजें अधिक आकर्षक लगती हैं और कुछ से अरुचि हो जाती है। शरीर को अतिरिक्त पोषक तत्वों (आयरन, कैल्शियम, ओमेगा-3, विटामिन C) की जरूरत पड़ती है; कमी होने पर शरीर संकेत के रूप में खास खाद्य पदार्थों की चाह पैदा कर सकता है। मॉर्निंग सिकनेस, थकान और मूड स्विंग जैसी स्थितियां भी त्वरित ऊर्जा और “कंफर्ट फूड” की इच्छा बढ़ा सकती हैं। क्या खाएं: स्मार्ट स्वैप्स मीठा खाने की क्रेविंग: डार्क चॉकलेट की छोटी मात्रा, खजूर, दही के साथ फलों की स्मूदी, घर की बनी सेब-ओट क्रम्बल जैसे विकल्प लें। नमकीन/क्रंची: भुने चने, मखाने, भुने बादाम-काजू, होल-ग्रेन क्रैकर्स के साथ हुमस या दही डिप चुनें। खट्टा: नींबू पानी, मौसमी/संतरा, कच्चे आम की हल्की चटनी, घर का प्रोबायोटिक दही; बाजारू अत्यधिक नमक वाले अचार और पैक्ड चटनी सीमित रखें। मसालेदार: घर का हल्का मसाला, तला-भुना और बहुत तीखा कम करें; दिल और पाचन पर बोझ घटेगा। कार्ब क्रेविंग: मल्टीग्रेन रोटी, ब्राउन राइस, ओट्स, सूजी-दलिया उपमा, सब्जियों से भरपूर मिलेट खिचड़ी जैसे कॉम्प्लेक्स कार्ब चुनें। जिन चीजों से बचें या सीमित करें कोल्ड डेली मीट, अधपका मांस/अंडा/मछली, अनपास्चराइज्ड डेयरी और प्रीमेड डेली सलाद में संक्रमण का जोखिम रहता है; इन्हें अवॉयड करें। सोडा, हाई-शुगर ड्रिंक्स, डीप-फ्राइड स्नैक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स वजन बढ़ने, एसिडिटी और ब्लड शुगर स्पाइक बढ़ा सकते हैं। कैफीन सीमित रखें; दैनिक अनुशंसित सीमा के भीतर रहें और देर शाम कैफीन से बचें ताकि नींद प्रभावित न हो। नॉन-फूड क्रेविंग (मिट्टी, चाक, डिटर्जेंट आदि) को पिका कहा जाता है—यह खतरनाक है; ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। दिनभर की सरल आदतें ब्रेकफास्ट जरूरी: प्रोटीन + फाइबर (अंडा/दही/पनीर + फल/ओट्स/मिलेट) से दिन की शुरुआत करें, इससे मीठी और जंक क्रेविंग घटती हैं। छोटी-छोटी फ्रीक्वेंट मील्स: 2-3 घंटे में हल्का और संतुलित खाएं, ब्लड शुगर स्थिर रहेगी और उल्टी/मिचली कम होगी। हाइड्रेशन: पानी, नारियल पानी, सूप, छाछ/लस्सी (कम नमक-शक्कर) लें; डिहाइड्रेशन क्रेविंग्स बढ़ा सकता है। स्मार्ट प्रेप: कटे फल, भुने नट्स, दही, हुमस, सलाद बॉक्स जैसे हेल्दी स्नैक पहले से तैयार रखें ताकि अचानक क्रेविंग पर बेहतर विकल्प हाथ में हों। जरूरी पोषक तत्वों पर फोकस आयरन: पालक, सरसों के साग, मेथी, चना/राजमा, गुड़-किशमिश; विटामिन C के साथ लें ताकि अवशोषण बेहतर हो। कैल्शियम: दूध, दही, पनीर, तिल; अगर डेयरी नहीं लेते तो कैल्शियम-फोर्टिफाइड विकल्प देखें। ओमेगा-3: सालमन/श्रिम्प जैसी लो-मर्करी मछली; मछली न लेने पर अखरोट, अलसी, चिया और ओमेगा-3 एग्स helpful हैं। प्रोटीन: दालें, पनीर, अंडे, दुबला मांस/चिकन, टोफू; हर मील में प्रोटीन का हिस्सा रखें। कब लें डॉक्टर की सलाह लगातार उल्टी/भोजन से अरुचि के कारण वजन घट रहा हो, पानी नहीं ठहर रहा हो या कमजोरी-चक्कर आ रहे हों। नॉन-फूड आइटम्स की क्रेविंग हो, फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षण दिखें, या गेस्ट्रिक/एसिडिटी अत्यधिक बढ़ जाए। मधुमेह, थायराइड, हाई बीपी जैसी स्थितियां हों—डायटीशियन/गायनो के साथ पर्सनलाइज्ड प्लान बनाएं। त्वरित 7 हेल्दी टिप्स घर की स्मूदी से फल-सब्जियां बढ़ाएं। “कुकीज की क्रेविंग” पर पहले फल/नट्स लें; फिर भी मन न माने तो छोटी सर्विंग। ब्रेकफास्ट कभी न छोड़ें। रोज 2-3 डेयरी सर्विंग्स या समकक्ष कैल्शियम लें। लो-मर्करी मछली सप्ताह में 1-2 बार; नहीं खाते तो प्लांट ओमेगा-3 लें। आयरन-समृद्ध भोजन के साथ विटामिन C जोड़ें। रात में भारी, तला-भुना और बहुत मसालेदार भोजन कम करें; नींद बेहतर होगी। डिस्क्लेमर: हर गर्भावस्था अलग होती है; कोई भी विशेष आहार परिवर्तन, सप्लीमेंट, या प्रतिबंध शुरू करने से पहले प्रसूति-विशेषज्ञ/डायटीशियन की सलाह लेना सुरक्षित रहता है।  

तत्काल टिकट अब फटाफट: टाइमिंग, मास्टर लिस्ट और पेमेंट ट्रिक्स

नई दिल्ली आईआरसीटीसी से तत्काल टिकट बुकिंग कई यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि टिकट खुलते ही कुछ ही मिनटों में भर जाते हैं। ऐसे में तेज़ इंटरनेट और स्मार्ट ट्रिक अपनाकर आप कंफर्म टिकट पाने की संभावना बढ़ा सकते हैं। यहां हम आपको कुछ महत्वपूर्ण टिप्स बता रहे हैं, जिनसे आप फटाफट तत्काल टिकट बुक कर पाएंगे। तत्काल टिकट बुकिंग का सही समय तत्काल टिकट केवल ट्रेन यात्रा से एक दिन पहले ही बुक की जा सकती है। एसी श्रेणी (1AC, 2AC, 3AC) के लिए बुकिंग सुबह 10 बजे से शुरू होती है। स्लीपर क्लास के लिए तत्काल बुकिंग दोपहर 11 बजे से शुरू होती है। एक पीएनआर नंबर पर अधिकतम 4 यात्री ही जोड़े जा सकते हैं। पहले से सेव रखें जरूरी डिटेल्स यात्रियों का नाम, उम्र और लिंग जैसी जानकारी पहले से सेव करके रखें। आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट पर मास्टर लिस्ट फीचर का इस्तेमाल करें। इससे बुकिंग के दौरान केवल क्लिक करके तुरंत यात्री डिटेल भरी जा सकती है। मास्टर लिस्ट बनाने के फायदे मास्टर लिस्ट में आप अपने परिवार या अक्सर यात्रा करने वाले लोगों का नाम, उम्र, लिंग और आईडी प्रूफ सेव कर सकते हैं। इससे हर बार डिटेल टाइप करने की ज़रूरत नहीं पड़ती और टिकट बुक करने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है। पेमेंट ऑप्शन पहले से रखें सेव बुकिंग के दौरान पेमेंट प्रोसेस में समय बचाने के लिए अपना पसंदीदा पेमेंट मोड पहले से सेव रखें। आप नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, यूपीआई और मोबाइल वॉलेट जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर लगातार एक ही कार्ड या यूपीआई अकाउंट से भुगतान करते हैं, तो उसे फास्ट पेमेंट ऑप्शन में सेव कर लें। तेज इंटरनेट कनेक्शन है जरूरी तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान हर सेकंड मायने रखता है। धीमा इंटरनेट बुकिंग फेल या टिकट वेटिंग लिस्ट में जाने की संभावना बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि आपके पास हाई स्पीड वाई-फाई या 4G/5G इंटरनेट कनेक्शन हो। अतिरिक्त टिप्स बुकिंग ओपन होने से कुछ मिनट पहले ही आईआरसीटीसी वेबसाइट या ऐप में लॉग-इन कर लें। ऑटॉफिल विकल्प का इस्तेमाल करें, जिससे डिटेल भरने का समय कम लगे। बार-बार OTP एंटर करने की झंझट से बचने के लिए अपने अकाउंट को पहले से वेरिफाई रखें। आईआरसीटीसी की तत्काल टिकट बुकिंग भले ही काफी चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन अगर आप ये तैयारी पहले से कर लें तो आपके कंफर्म टिकट मिलने की संभावना कहीं ज्यादा बढ़ जाती है।  

स्वास्थ्य चेतावनी! अत्यधिक दुबलेपन से 3 गुना बढ़ जाता है असमय मौत का जोखिम

नईदिल्ली  अक्सर सभी ने सुना ही होगा कि अधिक वजन के कारण लोगों को कई समस्याएं होती हैं और आगे चलकर यही समस्याएं जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन सकती हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में दावा किया गया है कि थोड़ा अधिक वजन होना आपकी जिंदगी को छोटा नहीं कर सकता लेकिन बहुत ज़्यादा पतला होना आपकी जिंदगी को कम जरूर कर सकता है. दरअसल, शरीर के वजन और आपकी सेहत के बीच का संबंध अक्सर हम जितना समझ पाते हैं, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है. 85,000 से अधिक वयस्कों पर की गई डेनिश स्टडी में पाया गया है कि आसान भाषा में समझें तो 18.5 से कम बीएमआई वाले लोगों की समय से पहले मृत्यु होने की संभावना 22.5 और 24.9 के बीच बीएमआई वाले लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थी. पतले लोगों में समय से पहले मौत का खतरा आमतौर पर 18.5 से 24.9 बीएमआई को हेल्दी माना जाता है लेकिन रिसर्च में यह भी सामने आया कि इस रेंज के नीचे आने वाले लोगों की जान भी जोखिम में होती है. दरअसल, जिनका BMI 18.5 से 19.9 था, उनमें मौत का खतरा दोगुना पाया गया और वहीं जिनका बीएमआई 20 से 22.4 था, उनमें रिस्क 27 फीसदी तक था. हालांकि ये निष्कर्ष आश्चर्यजनक लगते हैं क्योंकि 18.5 और 24.9 के बीच बीएमआई को आमतौर पर स्वस्थ्य माना जाता है. ओवरवेट लोग अधिक खतरे में नहीं स्टडी में सामने आया है कि ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त (BMI 25 से 35) लोग जिनके बारे में माना जाता था कि उन्हें वजन के कारण जोखिम अधिक है, उन्हें मौत का खतरा अधिक नहीं था. सिर्फ जिनका बीएमआई 40 से अधिक था, उनमें ही मौत का जोखिम 2 गुना पाया गया था. यानी जिनका वजन थोड़ा ज्यादा है, उन्हें यह नहीं मान लेना चाहिए कि वे मौत के खतरे में है. रिसर्च के नतीजे इस बात को चैलेंज करते हैं कि पतला होना हमेशा सेहतमंद होता है और मोटापा हमेशा जोखिम में डालता है. क्यों खतरनाक है बहुत दुबला होना? एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत दुबले लोगों के शरीर में फैट स्टोर काफी कम होता है और जब कोई गंभीर बीमारी या ट्रीटमेंट (जैसे कि कैंसर की कीमोथेरेपी के दौरान वजन गिरता है) होता है तब शरीर को रिकवरी के लिए स्टोर किए गए फैट की जरूरत होती है. जिन लोगों के पास पर्याप्त फैट नहीं होता, उनका शरीर जल्दी कमजोर पड़ जाता है और जरूरी अंग सही से काम नहीं कर पाते. इस कारण अधिक पतला होना भी सेहतमंद नहीं बल्कि जानलेवा साबित हो सकता है. BMI हमेशा सही पैमाना नहीं रिसर्चर्स का कहना है कि BMI सिर्फ हाइट और वेट पर आधारित एक केल्कुलेशन है. यह शरीर की फैट डिस्ट्रिब्यूशन, डाइट, लाइफस्टाइल या जेनेटिक फैक्टर्स को शामिल नहीं करता और यही कारण है कि BMI हर व्यक्ति के लिए सटीक पैमाना नहीं हो सकता. डेनिश रिसर्चर्स का मानना है कि अब सेफ BMI रेंज 22.5 से 30 तक मानी जा सकती है. यानी थोड़ा-बहुत ओवरवेट होना उतना नुकसानदायक नहीं जितना पहले माना जाता था. रिसर्च का मुख्य संदेश यही है कि बहुत दुबला होना खतरनाक है और पतलापन हमेशा सेहतमंद नहीं होता. थोड़ा ज्यादा वजन होना हमेशा जानलेवा नहीं है. सेहत का असली पैमाना हेल्दी डाइट, एक्टिव लाइफस्टाइल और मेडिकल चेकअप होना चाहिए. BMI को सिर्फ एक इंडिकेटर मानना चाहिए.

Paytm ने लॉन्च किया Postpaid सर्विस, UPI यूजर्स को मिलेंगे बड़े लाभ

 नई दिल्ली फिनटेक कंपनी पेटीएम (Paytm) ने अपने यूजर्स के लिए एक शानदार नई सुविधा 'पेटीएम पोस्टपेड' (Paytm Postpaid) लॉन्च की है। अब आप यूपीआई (UPI) पेमेंट के लिए क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे छोटी-मोटी खरीदारी करना और भी आसान हो जाएगा। इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अभी खर्च कर सकते हैं और इसका भुगतान अगले महीने आराम से कर सकते हैं। कैसे काम करती है यह सुविधा? 'पेटीएम पोस्टपेड' सेवा नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (SSFB) के साथ मिलकर शुरू की गई है। इस सेवा का उद्देश्य लोगों को उनके रोजमर्रा के खर्चों में तुरंत क्रेडिट देना है। पेमेंट का तरीका: आप किसी भी यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन करके पेमेंट कर सकते हैं, चाहे वह ऑनलाइन शॉपिंग हो, मोबाइल रिचार्ज हो, बिल भुगतान हो या कोई बुकिंग हो। क्रेडिट की अवधि: इस सेवा में आपको 30 दिनों तक की शॉर्ट-टर्म क्रेडिट मिलती है, जिससे आप अपनी जरूरतों के हिसाब से तुरंत खर्च कर सकें। चयनित यूजर्स: फिलहाल, यह सुविधा सीमित यूजर्स के लिए शुरू की गई है, जिन्हें उनके खर्च करने के तरीके के आधार पर चुना गया है। आने वाले समय में इसे और ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यूजर्स और मर्चेंट्स को क्या मिलेगा फायदा? पेटीएम के सीओओ अविजीत जैन ने बताया कि यह सेवा भारतीय लोगों को उनके रोजमर्रा के खर्चों में वित्तीय लचीलापन देगी। यह न केवल यूजर्स के लिए भुगतान को आसान बनाती है, बल्कि व्यापारियों (मर्चेंट्स) को भी तुरंत पैसा मिलने और यूनिवर्सल स्वीकृति सुनिश्चित करती है।

नया Aadhaar App जल्द होगा लॉन्च, मोबाइल नंबर अपडेट करना होगा पहले से आसान

नई दिल्ली आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी यूनिक आइडेंटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) अब एक नया ऐप लेकर आ रही है. इस ऐप की जानकारी खुद UIDAI के सीईओ भुवनेशर कुमार ने दी है. उन्होंने इस ऐप के प्रोग्रेस और इसके फीचर्स के बारे में बताया है. साथ ही उन्होंने मोबाइल नंबर अपडेट कराने का प्रोसेस भी बताया है.  UIDAI के सीईओ भुवनेशर कुमार ने इंडियाटुडे के साथ बातचीत में बताया कि नया आधार ऐप तैयार हो गया है, जो जल्द ही लॉन्च किया जाएगा. लॉन्चिंग टाइमलाइन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2-3 महीने के अंदर नया आधार ऐप लॉन्च हो जाएगा.  नए आधार ऐप को लेकर टेस्टिंग कंप्लीट हो चुकी हैं. इसके डेमो पूरा हो चुका है.   UIDAI के सीईओ ने बताया कि इस नए ऐप के अंदर आइडेंटी शेयरिंग का फीचर मिलेगा. ये डिटेल्स शेयरिंग आधार कार्ड होल्डर्स की परमिशन के बाद होगी. अभी तक लोगों को आधार संबंधित डिटेल्स आदि शेयर करने के लिए फोटोकॉपी लेकर जानी पड़ती है. न्यू ऐप के बाद ये काम डिजिटली तरीके से होगा.  मोबाइल नंबर नहीं करा सकेंगे अपडेट  भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि आधार से लिंक मोबाइल नंबर को बदलना आसान है, लेकिन यह एक सेंसटिव मामला भी है. आधार कार्ड पर न्यू मोबाइल नंबर को अपडेट कराने के लिए आधार सेंटर्स जाना जरूरी होगा. सेंटर्स पर पहले बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को कंप्लीट करना होगा, उसके बाद ही मोबाइल नंबर को अपडेट करा पाएंगे.  फेक आधार कार्ड को पहचानना आसान  फेक आधार कार्ड को लेकर भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि फर्जी आधार कार्ड को पहचानने के लिए एक खास फीचर मिलता है. सभी आधार कार्ड के ऊपर एक क्विक रिस्पोंस कोड (QR Code) मिलता है, जिसे स्कैन करके आधार कार्ड की सही जानकारी तक पहुंचा जा सकता है. 

चेहरे की खूबसूरती बढ़ाएँ: ब्लड सर्कुलेशन सुधारने और डबल चिन हटाने वाले योगासन

शरीर में फैट जमा होने की समस्या काफी आम हो चुकी है। इसके कारण कई लोगों की डबल चिन भी आ जाती है। डबल चिन ठुड्डी के नीचे जमा फैट को कहते हैं। उम्र, वजन बढ़ने या गलत पोस्चर में बैठने की वजह से यह समस्या हो सकती है। ठुड्डी के नीचे फैट बढ़ने की वजह से चेहरे का आकार बदलने लगता है। हालांकि, कुछ आसान योगासनों की मदद से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। जी हां, कुछ योगासनों से मांसपेशियों में खिंचाव आता है और चेहरे के ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है, जिससे डबल चिन को कम करने में मदद मिलती है। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 योगासनों के बारे में। सिंहासन सिंहासन को चेहरे और गर्दन की मांसपेशियों के लिए सबसे अच्छा आसन माना जाता है। इस आसन में चेहरे, गले और जबड़े की मांसपेशियों में जोरदार खिंचाव होता है, जो डबल चिन वाली जगह को टोन करने में मदद करता है। कैसे करें     वज्रासन में बैठ जाएं या फिर पद्मासन लगा लें।     अपने हाथों को घुटनों पर रखें और उंगलियों को फैलाएं।     गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए मुंह को खोलें और जीभ को बाहर निकालकर ठुड्डी की ओर ले जाएं।     आंखों को पूरी तरह खुला रखें और गले से 'हा' की आवाज निकालें, जैसे शेर दहाड़ रहा हो।     इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें और फिर नॉर्मल पोजीशन आ जाएं। इसे 3-5 बार दोहराएं। उष्ट्रासन उष्ट्रासन गर्दन और गले के हिस्से में खिंचाव पैदा करता है। यह आसन थायरॉयड ग्लैंड को एक्टिव करने और गर्दन की एक्स्ट्रा चर्बी को कम करने में मददगार साबित होता है। कैसे करें?     घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं, घुटनों और पैरों को हिप्स की चौड़ाई जितना खोल लें।     हाथों को कमर पर रखें और कोहनियों को पीछे की ओर खींचें।     सांस छोड़ते हुए पीछे की ओर झुकें और हाथों से एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें।     गर्दन को रिलैक्स छोड़ दें और सिर को पीछे की ओर लटकने दें, ताकि गले में अच्छा खिंचाव महसूस हो।     30 सेकंड से 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहें। जलंधर बंध जलंधर बंध एक बंध या लॉक है, जिसे प्राणायाम के दौरान किया जाता है। यह सीधे तौर पर गले और ठुड्डी के नीचे के हिस्से पर काम करता है, जिससे वहां की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और चर्बी कम होती है। कैसे करें?     सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।     गहरी सांस लें और सांस को रोककर रखें ।     सिर को आगे झुकाएं और ठुड्डी को छाती से सटाने की कोशिश करें।     हाथों को घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा बना सकते हैं।     जब तक हो सांस को रोककर रखें, फिर सिर को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ें।     इसे 3-5 बार दोहराएं। सर्वांगासन सर्वांगासन को 'सभी अंगों का आसन' कहा जाता है। यह थायरॉयड ग्लैंड पर दबाव डालकर मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करने में मदद करता है, जिससे वजन कंट्रोल रहता है। साथ ही, इस मुद्रा में गर्दन में खिंचाव आता है, जो डबल चिन को कम करने में सहायक है। कैसे करें?     पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर के बगल में रखें।     पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और कमर को हाथों का सहारा देकर ऊपर ले जाएं।     शरीर को सीधा ऊपर की ओर खींचे, ठुड्डी छाती से सटी रहे।     शरीर का पूरा भार कंधों पर होना चाहिए।     30 सेकंड से शुरुआत करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। मत्स्यासन मत्स्यासन गर्दन और गले के हिस्से को पूरी तरह से स्ट्रेच करता है। यह आसन थायरॉयड ग्लैंड को एक्टिव करता है और गर्दन की अकड़न को दूर करके उसके आसपास जमा फैट को कम करने में मदद करता है। कैसे करें?     पद्मासन में बैठ जाएं।     पीठ के बल लेट जाएं और हाथों से पैर के अंगूठे को पकड़ें।     कोहनियों को जमीन पर टिका दें। सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं और सिर को जमीन पर टिका दें।     गर्दन में गहरा खिंचाव महसूस करें। सांस लेते और छोड़ते रहें।     30 सेकंड से 1 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।  

लोग बोले- लगता है अब हद हो गई! टैटू का नया ट्रेंड जानकर रह जाएंगे दंग

नई दिल्ली फैशन की दुनिया में नए-नए ट्रेंड रोज सामने आते हैं, लेकिन चीन से आया यह ट्रेंड लोगों को चौंका रहा है। यहां युवा अब दांतों पर टैटू बनवाने लगे हैं। यह सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन हकीकत यह है कि टैटू सीधे दांतों पर नहीं बनाए जाते, बल्कि 3D प्रिंटिंग से बने छोटे क्राउन पर डिजाइन बनाकर उसे दांत पर चढ़ा दिया जाता है। इस टैटू को बनवाना न तो दर्दनाक है और न ही जटिल। पहले क्राउन तैयार किया जाता है, फिर उस पर डिजाइन, अक्षर, या कोई चित्र उकेरा जाता है। इसके बाद इसे असली दांत के ऊपर फिट कर दिया जाता है। लोग अपने लकी नंबर, पसंदीदा अक्षर या शुभ शब्द भी इन क्राउन पर बनवाते हैं। कुछ क्लीनिक तो अब क्राउन के साथ मुफ्त टैटू डिज़ाइन देने का ऑफर भी दे रहे हैं। हालांकि, इस ट्रेंड को लेकर डेंटल एक्सपर्ट्स ने चेतावनी भी दी है। शंघाई के डॉक्टरों का कहना है कि क्राउन पर डिज़ाइन उकेरने से वह कमजोर हो सकता है और जल्दी घिस सकता है। इसलिए दांतों पर टैटू बनवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सोशल मीडिया पर मचा तहलका सोशल मीडिया पर इस फैशन ने तहलका मचा दिया है। किसी को यह आइडिया क्रिएटिव लगा तो किसी ने इसे दांतों की सेहत के लिए खतरनाक बताया। एक यूजर ने मजाक में लिखा, 'ये वही लोग हैं जिनके दांत किसी भी चीज़ को चबा सकते हैं, उन दांतों पर टैटू बनवाना कोई बड़ी बात नहीं।' वहीं दूसरे ने लिखा, 'लगता है अब चमड़ी पर जगह कम पड़ गई थी।'

सावधान! पेन किलर और इनहेलर के सही इस्तेमाल का AIIMS ने दिया खास निर्देश

भोपाल   पेनकिलर या स्टेरॉयड का गलत उपयोग किडनी को प्रभावित कर सकता है। मेडिकल डिवाइस का सही ज्ञान न होने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो व्यक्ति को विचलित या गंभीर स्थिति में ला सकती है। यही नहीं, एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है, जिससे गंभीर बीमारी होने पर एंटीबायोटिक्स असर करना बंद कर देंगी और यह मौत का प्रमुख कारण बन सकता है। एम्स के विशेषज्ञों ने 21 सितंबर को 5वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान ये जानकारी दी। इस्तेमाल करने का सही तरीका सीखें विशेषज्ञों ने कहा कि ब्लड प्रेशर मशीन, ग्लूकोमीटर और इनहेलर जैसे उपकरणों को सही तरीके से उपयोग करना सीखें। गलत तकनीक परिणामों को प्रभावित कर सकती है। गलत परिणाम देखकर कई बार स्वस्थ व्यक्ति भी विचलित हो जाता है। इस स्थिति से बचना चाहिए, क्योंकि भ्रम में कई बार व्यक्ति जल्दबाजी में बड़ी गलती कर बैठता है। इसके अलावा थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर आदि का नियमित केलिब्रेशन और सफाई जरूरी है, ताकि इन्फेक्शन का खतरा न रहे। बिना सलाह न लें पेनकिलर, स्टेरॉयड AIIMS Bhopal के विशेषज्ञों ने कहा कि बिना विशेषज्ञ की सलाह के एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर और स्टेरॉयड का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके गलत उपयोग से किडनी पर असर पड़ सकता है। इसके साथ-साथ एंटीबायोटिक्स के खिलाफ शरीर में रेजिस्टेंस बनता है, जिससे जब दवा की जरूरत पड़ती है तो शरीर पर उसका असर नहीं होता। टोल-फ्री नंबर पर करें कॉल किसी भी तरह के दुष्प्रभाव दिखने पर रिपोर्टिंग के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-180- 3024 और मोबाइल ऐप का उपयोग करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम का संचालन रिसर्च एसोसिएट दीपिका चौधरी और फैजान ने किया। वहीं, डॉ. फ्लोरेंस जॉय, डॉ. केविन जैन, डॉ. चिराग अग्रवाल और डॉ. सिद्धांत ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया और उपभोक्ताओं एवं स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

मुलायम और खूबसूरत पैर चाहिए? बस फॉलो करें ये ज़रूरी टिप्स

ज‍ितनी केयर की जरूरत हमारे स्‍क‍िन को होती है, उतनी ही हाथ-पैरों की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है। आमतौर पर लोग चेहरे और हाथों की सफाई कर लेते हैं, लेक‍िन पैरों को अनदेखा कर द‍िया जाता है। पैरों को सुंदर बनाए रखने के लि‍ए आपको कुछ बातों का ध्‍यान रखना जरूरी होता है। वैसे तो पैरों की देखभाल करने के कई ऑप्‍शंस हैं, लेकिन क्रीम का इस्तेमाल करना सबसे आसान और सस्‍ता व‍िकल्‍पा माना जाता है। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे क‍ि पैरों में क्रीम लगाने के क्‍या फायदे हो सकते हैं। आइए जानते हैं वि‍स्‍तार से – फुट क्रीम लगाने के फायदे     पैरों में ज्यादा पसीना आने या टाइट जूते पहनने से अक्सर एथलीट फुट नाम की समस्या होने लगती है। इसमें पैरों, खासकर उंगलियों के बीच जलन और खुजली होती है। ऐसे में अगर आप रोजाना फुट क्रीम लगाती हैं तो इस परेशानी से बचाव क‍िया जा सकता है।     अक्सर हम चेहरे और हाथों पर मॉइश्चराइजर लगा लेते हैं लेकिन पैरों पर भूल जाते हैं। फुट क्रीम लगाने से पैरों में नमी बरकरार रहती है। साथ ही आपके पैर भी दिनभर मुलायम रहते हैं।     फटी और रूखी एड़ियाें की समस्‍या बहुत आम हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है पैरों को नमी न मिलना। अगर आप रोजाना फुट क्रीम लगाएंगे तो एड़ियां फटने से बचेंगी और पैरों की स्किन मुलायम रहेगी। फुट क्रीम कैसे लगाएं? नहाने के बाद जब पैर हल्के गीले हों तभी फुट क्रीम लगाना चाह‍िए। इससे क्रीम जल्दी और अच्छी तरह एब्‍जॉर्ब हो जाती है। पैरों में क्रीम लगाने के ल‍िए हथेली पर थोड़ी-सी क्रीम लें और पैरों पर हल्के गोल-गोल मसाज करें। आप रात में भी क्रीम लगाकर मोजे पहन सकती हैं। इससे रातभर क्रीम अपना काम करेगी और सुबह पैर मुलायम लगेंगे। ध्यान रखें कि क्रीम लगाने से पहले पैरों को धो जरूर लें। इसके बाद क्रीम लगाएं। मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा होता है। इन ट‍िप्‍स को करें फॉलाे     हफ्ते में एक बार पैरों को 15 से 20 मिनट गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इससे धूल-मिट्टी और गंदगी निकल जाएगी।     पैरों की डेड स्किन हटाने के लिए प्यूमिक स्टोन या कोई फुट स्क्रब इस्तेमाल करें। धीरे-धीरे रगड़ें ताकि चोट न लगे।     जैसे चेहरे के लिए फेस पैक होता है, वैसे ही पैरों पर भी पैक लगाएं। आप मुल्तानी मिट्टी (फुलर अर्थ), दही या कुछ बूंदें एसेंशियल ऑयल की इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे पैरों को ठंडक और नमी दोनों मिलती है।     सारे स्टेप पूरे करने के बाद फुट क्रीम लगाना न भूलें। हल्के हाथों से मसाज करें ताकि पैरों की त्वचा नरम और हेल्‍दी बने।     पैरों को समय-समय पर स्क्रबर से साफ करें।     नाखून हमेशा छोटे और साफ रखें।