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मोटापे और खर्राटों पर बड़ा दावा! एक इंजेक्शन ने स्टडी में दिखाया असरदार परिणाम

आगरा मोटापा से मधुमेह, खर्राटे, युवतियों में मासिक धर्म अनियमित होने के साथ ही फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ी है। एसएन मेडिकल कॉलेज में मोटापे के साथ इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर स्टडी की गई, मरीजों को तीन महीने तक हर सप्ताह तिरजेपाइड इंजेक्शन दिया गया। तीन महीने में 10 प्रतिशत तक वजन वजन कम हो गया। इसके साथ ही खर्राटे की समस्या और पाली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर (पीसीओएस ) से मासिक धर्म अनियमित होने की समस्या भी ठीक हो गई। यह स्टडी इसी वर्ष जर्नल ऑफ मिड टर्म में प्रकाशित हुई है। एसएन मेडिकल कॉलेज में 93 मरीजों पर की गई स्टडी के चौंकाने वाले नतीजे मधुमेह रोगियों में शुगर का स्तर नियंत्रित रखने के लिए तिरजेपाइड इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है। यह इंजेक्शन सप्ताह में एक बार लेना होता है। मरीज को दवाएं और इंसुलिन लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे वजन भी कम होता है। एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि मोटापे के कारण मधुमेह, खर्राटे, पीसीओएस, फैटी लिवर से पीड़ित 18 वर्ष से अधिक आयु के 93 मरीजों पर स्टडी की गई। इसमें मधुमेह रोगी 23 मरीज थे जबकि 70 मरीजों को मधुमेह नहीं था उन्हें खर्राटे सहित अन्य बीमारियां थी। इन्हें तीन महीने तक हर सप्ताह तिरजेपाइड इंजेक्शन दिया गया, पहले महीने 2.5 एमजी, दूसरी महीने 5 एमजी और तीसरे महीने 7.5 एमजी दिया गया। तीन महीने तक एक इंजेक्शन हर सप्ताह देने से सात किलोग्राम तक वजन हुआ कम डॉक्टर प्रभात अग्रवाल ने बताया कि तीन महीने में जिन मरीजों को मधुमेह की समस्या नहीं थी उनका सात किलोग्राम से अधिक वजन (10 प्रतिशत ) और जिनको मधुमेह की समस्या थी उनका वजन छह किलोग्राम तक कम हो गया। इससे खर्राटे और फैटी लिवर की समस्या में आराम मिल गया। एसएन की स्त्री रोग विभाग की डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि स्टडी में 10 प्रतिशत युवतियों को शामिल किया गया था, इन्हें पीसीओ के कारण वजन अधिक होने से मासिक धर्म अनियमित थे। वजन कम होने से मासिक धर्म की समस्या भी ठीक हो गई। 72 सप्ताह में 20 प्रतिशत तम वजन हो सकता है कम डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि इंजेक्शन 72 सप्ताह तक लिया जाए तो 20 प्रतिशत तक वजन कम हो सकता है। इसके साथ ही जीवनशैली में बदलाव, चिकनाई युक्त भोजन ना लेने और नियमित व्यायाम करने से इंजेक्शन बंद करने के बाद वजन बढ़ने से भी रोका जा सकता है। रक्त शर्करा, इंसुलिन और चयापचय पर प्रभाव वजन घटाने वाले इंजेक्शन आपके शरीर के रक्त शर्करा के प्रबंधन को भी बेहतर बनाते हैं।  ये इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करते हैं, जिससे कोशिकाएं ऊर्जा का अधिक कुशलता से उपयोग कर पाती हैं। इससे पूरे दिन रक्त शर्करा का स्तर स्थिर रहता है। इंसुलिन प्रतिरोध होने पर , ग्लूकोज ऊर्जा के रूप में उपयोग होने के बजाय रक्तप्रवाह में ही रहता है। शरीर अधिक इंसुलिन का उत्पादन करके प्रतिक्रिया करता है, जिससे शरीर वसा-भंडारण मोड में बना रहता है। इंसुलिन प्रतिरोध से पीड़ित कई लोगों के लिए, अस्थिर रक्त शर्करा के कारण वजन कम करना बहुत मुश्किल हो जाता है। शरीर वसा-भंडारण मोड में बना रहता है। इंसुलिन प्रतिक्रिया में सुधार करके, वजन घटाने वाले इंजेक्शन अतिरिक्त इंसुलिन के स्तर को कम करने में मदद करते हैं जो शरीर को वसा-भंडारण मोड में बनाए रखता है। जब इंसुलिन संकेत अधिक संतुलित हो जाते हैं, तो कोशिकाएं ऊर्जा के लिए संग्रहित वसा का अधिक आसानी से उपयोग कर पाती हैं, जिससे वजन कम करना अधिक स्थिर और लंबे समय तक बनाए रखना आसान हो जाता है। एक सिरिंज पकड़े हुए हाथ और एक संदेश जिसमें लिखा है "वजन घटाने वाले इंजेक्शन कितनी जल्दी असर करते हैं" वजन घटाने वाले इंजेक्शन कितनी जल्दी असर दिखाना शुरू कर देते हैं? वजन घटाने वाले इंजेक्शन अक्सर पहले एक से दो हफ्तों में असर दिखाना शुरू कर देते हैं। शुरुआती बदलाव आमतौर पर आंतरिक होते हैं, न कि वजन मापने वाली मशीन पर दिखाई देते हैं।  जैसे-जैसे हार्मोन और चयापचय स्थिर होने लगते हैं, अगले कुछ हफ्तों में वजन में स्पष्ट कमी आने लगती है।   सप्ताह 1-2: भूख में कमी आमतौर पर पहले एक से दो हफ्तों में ही लक्षण दिखने लगते हैं।  भूख में कमी अक्सर शुरुआत में ही शुरू हो जाती है। शोध परीक्षणों में, जिन लोगों को सेमाग्लूटाइड का इंजेक्शन दिया गया, उन्होंने जानबूझकर कैलोरी कम किए बिना भी अपनी कैलोरी की मात्रा में 24-35% की कमी देखी। आपको पाचन क्रिया में भी शुरुआती बदलाव नज़र आ सकते हैं।  जल्दी पेट भर जाना या लंबे समय तक पेट भरा रहना आम बात है। कई लोगों के लिए, यही वह पल होता है जब उन्हें एहसास होता है कि भूख कम होने में अब महीनों नहीं लगे हैं। यह अक्सर दिखने वाले पहले बदलावों में से एक होता है।   सप्ताह 3-6: वजन में स्पष्ट कमी शुरू होती है तीसरे और छठे सप्ताह के बीच, शारीरिक बदलाव अक्सर अधिक स्पष्ट होने लगते हैं।  यही वह समय होता है जब वजन घटाने वाले इंजेक्शन के परिणाम वास्तविक लगने लगते हैं। वजन में लगातार बदलाव आना शुरू हो सकता है। कपड़े पहले की तरह फिट होने लग सकते हैं। कुछ लोगों को रक्त शर्करा के स्थिर होने के साथ-साथ ऊर्जा में वृद्धि का अनुभव होता है। पहले महीने में आपका कितना वजन कम होता है,  यह अलग-अलग हो सकता है। शुरुआती वजन, इंसुलिन प्रतिरोध और जीवनशैली में बदलाव जैसे कारक महत्वपूर्ण होते हैं।    सप्ताह 8-12 और उसके बाद: स्थायी वसा हानि पहले दो से तीन महीनों के बाद, वज़न कम होना ज़्यादा स्थिर और अनुमानित लगने लगता है।  वसा का कम होना तेज़ गति के बजाय ज़्यादा नियमित हो जाता है। यही वो समय होता है जब दीर्घकालिक वज़न प्रबंधन आकार लेना शुरू करता है। चयापचय में समय के साथ सुधार होता रहता है। भूख का नियंत्रण स्थिर हो जाता है। रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार होता है। क्योंकि यह एक साप्ताहिक इंजेक्शन द्वारा ली जाने वाली वज़न घटाने की दवा है, इसलिए खुराक का समायोजन परिणामों और सहनशीलता दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर, … Read more

गर्मियों में AC यूज करने के 5 जरूरी नियम, कूलिंग भी बढ़ेगी और बिजली भी बचेगी

AC चलाने का तरीका दिल्ली-NCR समेत देश में कई शहरों और कस्बों में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर (AC) का यूज करते हैं. हालांकि AC चलाने की वजह से भारी बिजली का भी सामना करना पड़ता है. AC चलाने में करते हैं गलतियां AC चलाने में बहुत से लोग कॉमन गलतियां करते हैं. इसकी वजह से ना सिर्फ उनको भारी बिजली बिल का सामना करना पड़ता है बल्कि उनका AC भी खराब हो सकता है. रूल नंबर-1 AC को हमेशा सही टेम्प्रेचर पर रखकर चलाना चाहिए, जो 24-25 डिग्री सेल्सियस होता है. 18 डिग्री सेल्सियस पर टेम्प्रेचर सेट करके AC को नहीं चलाना चाहिए. इससे बिजली बिल और AC दोनों पर असर पड़ता है. रूल नंबर-2 AC की रेगुलर मेंटेनेंस करानी चाहिए. इसके लिए AC मैकेनिक को घर बुलाएं और AC को क्लीन कराएं. AC को 2 महीने में एक बार जरूरी क्लीनिंग करा लेना चाहिए.   रूल नंबर-3 AC के वायरिंग को रेगुलर चेक करें. अगर बिजली का तार खराब, टूट रहा है या फिर उसमें कट गया है तो तुरंत मैकेनिक को बुलाकर उसको चेंज कराएं. ध्यान रखें कि AC की वायरिंग पूरी एक सिंगल पीस में हो. कई बार तार दो तार को जोड़कर उनपर टेप लगा दिया जाता है.   रूल नंबर-4 AC से बेहतर कूलिंग और एयर फ्लो पाने के लिए एयर फिल्टर को रेगुलर क्लीन करें. इसको हर सप्ताह क्लीन करना चाहिए. इससे AC पर लोड कम पड़ेगा और वह बेहतर कूलिंग भी प्रोवाइड कराएगा.   रूल नंबर-5 AC की हवा जल्दी से पूरे कमरे में सर्कुलेट नहीं हो पाती है, इसके लिए सबसे कम स्पीड पर सीलिंग फैन का यूज कर सकते हैं. ये ट्रिक्स रूम के टेम्प्रेचर को कम करने में मदद करती है.  (Photo: Unsplash)  

नई स्टडी में खुलास,6–7 घंटे से कम या ज्यादा नींद लेने से बढ़ती है शरीर की उम्र तेजी से

 रात में बहुत कम या जरूरत से ज्यादा सोना सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि ये बॉडी के कई जरूरी अंगों की उम्र भी तेजी से बढ़ा सकता है. नेचर जर्नल में 13 मई को पब्लिश हुई एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद ब्रेन, हार्ट, फेफड़ों और इम्यून सिस्टम पर बुरा असर डाल सकती है. रिसर्च के मुताबिक सबसे कम खतरा उन लोगों में देखा गया जो रोज करीब 6.4 से 7.8 घंटे की नींद लेते हैं. नींद क्यों है हमारे लिए जरूरी? इस स्टडी को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ रेडियोलॉजी जुनहाओ वेन ने लीड किया. उन्होंने कहा कि हमारी रिसर्च दिखाती है कि बहुत कम और बहुत ज्यादा दोनों तरह की नींद शरीर के लगभग हर अंग की उम्र बढ़ने की रफ्तार तेज कर सकती है. इससे ये साफ होता है कि अच्छी नींद ब्रेन और पूरी बॉडी को हेल्दी रखने में बेहद जरूरी है. रिसर्च में क्या पता लगाया गया? रिसर्चर्स ने एजिंग को मापने के लिए मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया. टीम ने 17 अलग-अलग ऑर्गन सिस्टम्स के लिए 23 बायोलॉजिकल क्लॉक्स तैयार किए. इन क्लॉक्स में मेडिकल स्कैन, ब्लड टेस्ट और बॉडी प्रोटीन से जुड़ी जानकारी शामिल की गई, जिससे पता लगाया गया कि किसी इंसान के अंग उसकी असली उम्र के मुकाबले कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं. किन लोगों की उम्र तेजी से बढ़ती है? इस स्टडी में यूके बायोबैंक के करीब पांच लाख लोगों के हेल्थ डेटा का एनालिसिस किया गया. रिसर्च में एक यू-शेप पैटर्न सामने आया. यानी जो लोग रोज 6 घंटे से कम सोते थे और जो 8 घंटे से ज्यादा सोते थे, दोनों में एजिंग की स्पीड ज्यादा पाई गई. सबसे हेल्दी स्लीप रेंज करीब 7 घंटे मानी गई. कम नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा देखा गया. वहीं कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा से भी जुड़ी मिली. इसके अलावा एसिड रिफ्लक्स जैसी पेट की समस्याओं का रिस्क भी बढ़ता पाया गया. कम नींद लेने के क्या होते हैं नुकसान? जुनहाओ वेन के मुताबिक नींद सिर्फ दिमाग से जुड़ी चीज नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी बॉडी पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्लीप ड्यूरेशन हमारी पूरी फिजियोलॉजी से जुड़ी होती है और इसका असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर दिखाई देता है. रिसर्च टीम ने बुजुर्ग लोगों में डिप्रेशन पर भी असर देखा. एनालिसिस में सामने आया कि कम नींद सीधे तौर पर डिप्रेशन को बढ़ा सकती है, जबकि ज्यादा नींद ब्रेन और बॉडी फैट में होने वाले बदलावों के जरिए इसका असर डाल सकती है. रिसर्चर्स का मानना है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोगों के लिए अलग-अलग तरह की हेल्थ केयर की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि स्टडी ये साबित नहीं करती कि सिर्फ नींद ही तेजी से बूढ़ा होने की वजह है, लेकिन रिसर्चर्स का कहना है कि सही स्लीप हैबिट्स बढ़ती उम्र में हेल्थ को बेहतर बनाए रखने का अहम हिस्सा हो सकती हैं.

हंता वायरस को लेकर नई चिंता: क्या यह ब्रेस्ट मिल्क और स्पर्म से फैल सकता है? जानिए सच्चाई

 हंता वायरस को लेकर इन दिनों एक नई चिंता सामने आ रही है. सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ये खतरनाक वायरस ब्रेस्ट मिल्क और स्पर्म के जरिए भी फैल सकता है. इसके बाद लोगों के मन में डर बढ़ गया है, खासकर उन परिवारों में जहां छोटे बच्चे या प्रेग्नेंट महिलाएं हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे मामले बेहद रेयर हैं और बिना पूरी जानकारी के घबराने की जरूरत नहीं है. कब हुई थी इस तरह की चर्चा की शुरुआत इस चर्चा की शुरुआत 2023 में जर्नल वायरसेस में पब्लिश एक स्टडी के बाद हुई. इस रिसर्च में पाया गया कि चूहों से फैलने वाले एंडीज स्ट्रेन का वायरल आरएनए इंसानी स्पर्म में रिकवरी के कई साल बाद तक मौजूद रह सकता है. स्विट्जरलैंड के स्पीएज लैबोरेटरी के साइंटिस्ट्स ने अपनी रिसर्च में बताया कि एंडीज वायरस मेल रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में लंबे समय तक टिक सकता है, ठीक वैसे ही जैसे इबोला और जीका जैसे कुछ दूसरे वायरस. रिसर्च में कहा गया कि एंडीज वायरस में सेक्शुअल ट्रांसमिशन की संभावना हो सकती है, लेकिन अब तक ऐसा कोई कन्फर्म केस सामने नहीं आया है. क्या रिकवरी के बाद भी हो सकता है इंफेक्शन? इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रिसर्च सेल के कन्वीनर डॉ. राजीव जयदेवन ने HealthandMe से बातचीत में बताया कि रिकवरी के बाद स्पर्म में वायरस का आरएनए मिलना कोई नई बात नहीं हैय उनके मुताबिक कम से कम 27 अलग-अलग वायरस में ऐसा देखा जा चुका है. डॉ. राजीव कहते हैं, टेस्टिस बॉडी का ऐसा हिस्सा है जो इम्यून सिस्टम से काफी हद तक सुरक्षित रहता है. इसी वजह से कुछ वायरस वहां लंबे समय तक बने रह सकते हैं. हालांकि उन्होंने साफ किया कि रिसर्च में सिर्फ वायरल आरएनए मिला था, जिंदा वायरस नहीं. यानी अभी तक इस बात का सबूत नहीं है कि रिकवरी के बाद भी वायरस इंसान को इंफेक्टेड कर सकता है. क्या ब्रेस्ट मिल्क को लेकर भी होती है दिक्कत? ब्रेस्ट मिल्क को लेकर भी एक स्टडी ने चिंता बढ़ाई थी. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के जर्नल इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च में चिली की एक इंफेक्टेड मां के ब्रेस्ट मिल्क में एंडीज वायरस के जीनोम और प्रोटीन मिलने की बात कही गई थी. रिसर्चर्स का मानना था कि इससे मां से बच्चे में वायरस पहुंचने की संभावना हो सकती है. आम लोगों को जरूरत से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं लेकिन डीवाई पाटिल विद्यापीठ, पुणे के प्रोफेसर और एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अमिताव बनर्जी ने healthandme से कहा कि ऐसे मामले बेहद कम हैं. उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट मिल्क के जरिए हंता वायरस फैलने के केस बहुत रेयर हैं. आम लोगों को जरूरत से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है. डॉ. अमिताव के मुताबिक बीमारी के शुरुआती तेज बुखार वाले फेज में मां कुछ समय के लिए ब्रेस्टफीडिंग रोक सकती है, क्योंकि उस दौरान वायरल लोड ज्यादा होता है. लेकिन सिर्फ डर की वजह से हमेशा के लिए ब्रेस्टफीडिंग बंद करना सही नहीं माना जाता. हंता वायरस और एचआईवी में बड़ा फर्क एक्सपर्ट्स का कहना है कि हंता वायरस और एचआईवी में बड़ा फर्क है. एचआईवी लंबे समय तक बॉडी फ्लूइड्स में बना रहता है, जबकि हंता वायरस आमतौर पर रिकवरी के बाद शरीर से खत्म हो जाता है. डॉ. अमिताव बनर्जी ने ये भी कहा कि आरटी- पीसीआर टेस्ट बेहद सेंसिटिव होते हैं और कई बार सिर्फ वायरस के मृत कणों को भी पकड़ लेते हैं. इसलिए अगर किसी टेस्ट में वायरल मटेरियल मिल जाए, तो इसका मतलब हमेशा ये नहीं होता कि इंसान अभी भी दूसरों को इंफेक्टेड कर सकता है. फिलहाल एक्सपर्ट्स के पास ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि रिकवरी के लंबे समय बाद हंता वायरस सेक्शुअली फैलता है.

साइबर गुलामी मामले में खुलासा, भारतीय युवाओं को विदेश में फंसाकर कराई जा रही थी ठगी

 पटना राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। फरार मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। यह आरोप पत्र पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। एनआईए ने आनंद कुमार सिंह और उसकेचार सहयोगियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं। यूपी के हैं दो आरोपित आरोप पत्र में शामिल तीन सह-आरोपी उत्तर प्रदेश के अभय नाथ दुबे, बिहार के अभिरंजन कुमार और उत्तर प्रदेश के रोहित यादव को इस वर्ष फरवरी में कंबोडिया से दिल्ली पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया था। वहीं पांचवां आरोपी प्रहलाद कुमार सिंह फिलहाल जमानत पर बाहर है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने एक संगठित मानव तस्करी गिरोह के तहत भारतीय युवाओं को विदेश में वैध नौकरी और आकर्षक वेतन का झांसा देकर कंबोडिया भेजा। वहां पहुंचने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें फर्जी कंपनियों में साइबर ठगी से जुड़े काम करने के लिए मजबूर किया गया। युवाओं को दिए जाते थे ब‍िजली के झटके विरोध करने वाले युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच में सामने आया है कि पीड़ितों को बिजली के झटके दिए गए, जबरन कैद में रखा गया और भोजन-पानी तक से वंचित किया गया। एनआईए की जांच में आनंद कुमार सिंह को इस पूरे गिरोह का सरगना पाया गया है। एजेंसी के मुताबिक, वह भारत में एजेंटों और ट्रैवल एजेंटों के जरिए युवाओं की भर्ती करता था। इसके बाद कंबोडिया में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उनकी अवैध तस्करी कराता था। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रत्येक युवक को फर्जी कंपनियों को बेचने के बदले 2,000 से 3,000 अमेरिकी डॉलर तक वसूले जाते थे। एनआईए ने कहा है कि मामले आरसी-10/2024/एनआइए/डीएलाई में गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए जांच अभी जारी है।

गर्मियों में एनर्जी बनाए रखने के लिए बेस्ट हेल्दी ब्रेकफास्ट आइडियाज, जानें आसान विकल्प

गर्मियों के इन दिनों में हमारा शरीर और भी ज्यादा थका हुआ महसूस करने लगता है. हर समय तेज धूप, लगातार बहता पसीना और गर्म बहती हवाएं शरीर की एनर्जी को देखते ही देखते कम कर देती हैं. आपके साथ ऐसा न हो इसलिए यह काफी जरूरी हो जाता है कि आप अपने सुबह के ब्रेकफास्ट को हेल्दी और बैलेंस्ड रखने रखें. जब आप अपने दिन की शुरुआत हेल्दी और शरीर को ठंडक देने वाली चीजों के साथ करते हैं, तो आपका शरीर पूरे दिन एक्टिव और फ्रेश महसूस करता है. अगर आप भी गर्मियों के इन दिनों में अपने शरीर को एक्टिव और एनर्जेटिक बनाकर रखना चाहते हैं तो आज की यह आर्टिकल आपके लिए ही है. आज हम आपको कुछ ऐसे हेल्दी ब्रेकफास्ट आइडियाज देने जा रहे हैं जिन्हें खाकर आप पूरे दिन बिना थके और आलस महसूस किये एक्टिव और एनर्जेटिक बनाकर रख सकेंगे. तो चलिए इन चीजों के बारे में विस्तार से जानते हैं. दही और फलों का करें सेवन गर्मियों के इन दिनों में आपको दही का सेवन जरूर करना चाहिए. यह आपके शरीर को ठंडक देने का काम करता है. इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स आपके पेट को हेल्दी रखने में मदद करते हैं और और साथ ही आपके डाइजेशन को भी बेहतर बनाता हैं. ब्रेकफास्ट में जब आप दही के साथ फलों को मिलाकर सेवन करते हैं, तो यह सबसे हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शंस में से एक साबित होता है. आप इसमें अपने हिसाब से केले, ऐपल, पापीते, आम या फिर तरबूज जैसे फलों को मिक्स करके भी खा सकते हैं. इसके ऊपर से अगर थोड़े से ड्राई फ्रूट्स और चिया सीड्स मिक्स कर देते हैं, तो इसका न्यूट्रिशन और भी ज्यादा बढ़ जाता है. यह ब्रेकफास्ट आपके शरीर को एनर्जी देता है और साथ ही पेट को भी ज्यादा देर तक भरा हुआ रखता है. ब्रेकफास्ट में ट्राय करें मूंग दाल चीला अगर आप सुबह के समय में कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो सिर्फ हेल्दी ही न हो बल्कि आपका पेट भी जल्दी से भर दे, तो मूंग दाल चीला एक परफेक्ट चॉइस है. मूंग दाल में प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो गर्मियों के इन दिनों में आपके शरीर को हल्का महसूस करने में मदद करता है. इसे बनाना काफी ज्यादा आसान है. इसके लिए आपको मूंग दाल को अच्छे से पीसकर उसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और थोड़ा नमक मिला लेना है. इसके बाद एक तवे पर बिलकुल ही हल्का सा तेल लगाकर चीला तैयार कर लेना है. मूंग दाल का चीला काफी जल्दी डाइजेस्ट हो जाता है और आपके शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देता रहता है. आप इसे दही या फिर हरी चटनी के साथ भी एन्जॉय कर सकते हैं. जरूर ट्राय करें ओट्स और ठंडा दूध गर्मियों के इन दिनों में आपको अपने ब्रेकफास्ट में ओट्स को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें आपको भरपूर मात्रा में फाइबर मिल जाता है, जिसकी वजह से आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ रहता है. आप अगर चाहें तो ठंडे दूध में भी ओट्स मिक्स करके ट्राय कर सकते हैं. आप अगर इसके स्वाद को बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें शहद, केला और ड्राई फ्रूट्स मिक्स कर सकते हैं. यह ब्रेकफास्ट सिर्फ टेस्टी नहीं होता है, यह काफी ज्यादा न्यूट्रिशियस भी होता है. अगर आप सुबह की हड़बड़ी में रहते हैं तो आपको इस डिश को जरूर ट्राय करना चाहिए. यह आसानी से और काफी कम समय में बनाकर तैयार हो जाता है. इसके सेवन से आपके शरीर को एनर्जी मिलती है और साथ ही बार-बार भूख लगने की समस्या भी खत्म होती है.

मेटा ने पेश किया नया AI स्मार्ट ग्लास, हवा में टाइपिंग का मिलेगा फीचर

फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा ने कुछ नए फीचर्स का ऐलान किया है, जो उसके आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) स्मार्ट ग्लास के लिए है. इस स्मार्ट ग्लास का नाम मेटा रेबेन डिस्प्ले है. यूजर्स बिना किसी डिस्प्ले या कीबोर्ड को छुए बिना ही हवा में उंगलियां घुमाने से टाइप कर सकेंगे. यह न्यूरल रिस्टबैंड के चलते संभव हो पाया है. यह सभी मैसेजिंग ऐप्स जैसे वॉट्सऐप आदि को सपोर्ट करेगा. मेटा रेबन डिस्प्ले को कंपनी ने करीब 6 महीने पहले लॉन्च किया था और अब इसके लिए कई नए फीचर्स का ऐलान किया है. यह नए फीचर्स डिवाइस के लिए कम्युनिकेशन में बहुत ही मददगार साबित होंगे. मेटा रेबेन डिस्प्ले अभी भारत में सेल के लिए उपलब्ध नहीं है. ना फोन, ना कीबोर्ड, ना वायस कमांड नए अपडेट में सबसे अहम रोल न्यूरल हैंडराइटिंग है. इसकी मदद से स्मार्टफोन को पॉकेट से निकाले बिना ही टाइपिंग की जा सकती है. इसके लिए किसी भी कीबोर्ड, फिजिकल या डिजिटल कीबोर्ड का यूज नहीं करना होगा. हवा में उंगलियों को घुमाकर टाइपिंग कर सकेंगे मेटा रेबन डिस्प्ले पहनने वाला शख्स सिर्फ हवा में उंगलियों को घुमाकर टाइपिंग कर सकेंगे. यूजर्स को हवा में शब्द का टाइप करना होगा, जैसे एम लिखने के लिए अंग्रेजी में एम बनाने की शेप में उंगलियां चलानी होंगी. न्यूरल रिस्टबैंड का यूज करना होगा मेटा रेबेन डिस्प्ले के साथ यूजर्स को न्यूरल रिस्टबैंड का यूज करना होगा, जिसको कंपनी ने मेटा रेबन डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया गया है. यह बैंड इंसानी हाथों के जेस्चर को ट्रैक करता है और उनको समझता है और उसको कमांड में भी ट्रांसलेट कर सकता है. सभी मैसेजिंग ऐप्स जैसे वॉट्सऐप आदि को सपोर्ट करेगा लेटेस्ट अपडेट की मदद से अब यह सभी मैसेजिंग ऐप्स जैसे वॉट्सऐप, मैसेंजर, इंस्टाग्राम और एंड्रॉयड व आईओएस के मैसेजिंग ऐप्स पर भी सपोर्ट करता है. मेटा ने ये नए फीचर्स भी शामिल किए हैं जेस्चर बेस्ड टाइपिंग के अलावा कंपनी ने कुछ और फीचर्स को शामिल किया गया है. इसमें डिस्प्ले रिकॉर्डिंग, इम्प्रूव्ड नेविगेशन और लाइव कैप्शन एक्सपेंड कर सकेंगे. ये न्यू अपडेट मेटा रेबन ग्लास डिस्प्ले फीचर को बेहतर करा सकेंगे.  

बदलते मौसम में स्किन केयर कैसे रखें सही? जानें हेल्दी और ग्लोइंग त्वचा के आसान टिप्स

 जैसे ही मौसम बदलता है इसका सबसे पहला असर हमारे चेहरे और स्किन पर दिखाई देना शुरू हो जाता है. कभी स्किन काफी ज्यादा ड्राई और बेजान हो जाती है, तो कभी चेहरे पर ढेर सारे पिंपल्स निकल आते हैं और रैशेज की प्रॉब्लम भी बढ़ जाती है. अक्सर लोग इसे बदलते हुए मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर आप सही समय पर अपने चेहरे और स्किन की सही से केयर नहीं करते हैं तो देखते ही देखते ग्लो कम होने लग जाती है. ऐसे में आज की यह आर्टिकल हर उस इंसान के काम की होने वाली है जो हर बदलते हुए मौसम में स्किन से जुड़ी अलग-अलग प्रॉब्लम्स से जूझते रहते हैं. आज हम आपको कुछ आसान सीजनल स्किनकेयर टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनी डेली रूटीन में शामिल करके आप अपनी स्किन को किसी भी मौसम में काफी आसानी से हेल्दी और ग्लोइंग बनाकर रख सकेंगे. मौसम के अनुसार बदलें अपनी स्किन केयर रूटीन हर मौसम में आपकी स्किन की जरूरतें बिलकुल ही अलग होती हैं. गर्मियों के इन दोनों में आपकी स्किन से ज्यादा पसीना बहता है और वह बार-बार ऑयली भी बनती रहती है. वहीं, सर्दियों के दिनों में आपकी स्किन हद से ज्यादा ड्राई हो जाती है. यह एक बड़ी वजह है कि आपको एक ही स्किनकेयर रूटीन को पूरे साल फॉलो नहीं करना चाहिए. बदलते हुए मौसम के साथ अपने फेसवॉश, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन को भी बदलते रहें. ऐसा करने से आपकी स्किन बैलेंस्ड रहने लगती है और डैमेज भी कम होता है. स्किन को हमेशा रखें हाइड्रेटेड मौसम चाहे गर्मियों का हो या फिर सर्दियों का, आपके लिए यह काफी जरूरी हो जाता है कि आप अपनी स्किन को हाइड्रेटेड रखना शुरू कर दें. अगर शरीर में पानी की कमी होगी तो आपकी स्किन भी काफी ज्यादा ड्राई और बेजान दिखाई देने लग जाएगी. ऐसा न हो इसलिए दिनभर के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहे. जब आप सही मात्रा में पानी पीते रहते हैं तो आपकी स्किन अंदर से हेल्दी रहने लगती है. अपनी स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए आप नारिल पानी, फ्रेश फलों का जूस और हरी सब्जियों को भी डाइट में शामिल कर सकते हैं. ये सभी चीजें आपकी स्किन को एक नेचुरल ग्लो दिलाने में मदद करती हैं. मॉइश्चराइजर लगाना न भूलें कुछ लोगों का यह मानना होता है कि मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल सिर्फ सर्दियों के दिनों में ही किया जाता है, जबकि ऐसा सोचना बिलकुल भी सही नहीं है. गर्मियों के इन दिनों में भी आपको अपने चेहरे पर एक लाइट और ऑयल फ्री मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए. वहीं, सर्दियों के दिनों के लिए गाढ़े और डीप मॉइस्चर देने वाले क्रीम का इस्तेमाल करना चाहिए. एक सही मॉइस्चराइजर स्किन को सॉफ्ट बनाये रखने में मदद करता है और ड्राइनेस की प्रॉब्लम को जड़ से खत्म करता है. सनस्क्रीन हर मौसम में जरूरी अगर आप उन लोगों में से हैं जो अपनी स्किन पर सनस्क्रीन का इस्तेमाल सीर्फ गर्मियों के दिनों में ही करते हैं तो आपको अपनी इस आदत को बदल लेना चाहिए. सूर्य की हानिकारक किरणें आपकी स्किन को हर मौसम में नुकसान पहुंचा सकती है. जब भी आप घर से बाहर निकलें एक ज्यादा एसपीएफ रेटिंग वाले सनस्क्रीन का इस्तेमाल अपने चेहरे पर जरूर करें. यह छोटी सी चीज आपकी स्किन को टैनिंग, पिग्मेंटेशन और समय से पहले चेहरे पर दिखने वाले रिंकल्स से बचाकर रखेगी. डाइट का रखें खास ख्याल अगर आप अपनी स्किन को खूबसूरत बनाकर रखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सिर्फ बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर से भी उसका ख्याल रखना शुरू कर देना चाहिए. सबसे पहले आपको अपनी डाइट में सही चीजों को शामिल करना शुरू कर देना चाहिए. इसके अलावा काफी ज्यादा फ्राइड और जंक फूड्स को खाने से भी बचना चाहिए. इस तरह की चीजें आपकी स्किन को ऑयली बनाती हैं और साथ ही पिंपल्स की प्रॉब्लम को बढ़ा देती हैं. इससे बचने के लिए आपको अपनी डाइट में फलों, ड्राई फ्रूट्स और विटामिन्स से लोडेड चीजों को शामिल करना शुरू कर देना चाहिए. स्ट्रेस और नींद का भी पड़ता है असर जब आप सही से अपनी नींद को पूरा नहीं करते हैं या फिर ज्यादा स्ट्रेस लेने लगते हैं, तो इसका सीधा असर आपके चेहरे पर दिखाई देने लगता है. ऐसा करने से आपकी स्किन थकी हुई दिखाई देने लगती है और साथ ही बेजान भी लगने लगती है. कोशिश करें कि हर दिन कम से कक 7 से 8 घंटे की नींद जरूर पूरा करें. इसके अलावा जितना हो सके स्ट्रेस से भी दूरी बना लें. आपकी स्किन को हेल्दी और खूबसूरत रखने के लिए यह और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. जब आप अपनी स्किन का हर मौसम में सही से ख्याल रखते हैं तो आपकी स्किन ज्यादा हेल्दी, फ्रेश और ग्लोइंग बनी रहती है.

WhatsApp में आया धमाकेदार फीचर, सीक्रेट चैट होगी पूरी तरह सुरक्षित

 नई दिल्ली इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप में एक नया फीचर शामिल किया गया है, जिसका नाम इनकॉग्निटो चैट है. इसकी मदद से यूजर्स मेटा AI के साथ सीक्रेट चैट करने में मदद मिलेगी. यह चैट पूरी तरह से सीक्रेट होगी. आमतौर पर कई एक्सपर्ट का कहना है कि AI के साथ की गई चैटिंग कंपनी द्वारा पढ़ी जाती हैं।  मेटा ने न्यू फीचर को Incognito Chat with Meta AI नाम दिया है. AI के साथ की गई पूरी बातचीत को सीक्रेट रखने के लिए तैयार किया गया है।  मेटा का ये नया फीचर प्राइवेट प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है. ऐलान में बताया है कि इनकॉग्निटो चैट में सभी AI प्रोसेसिंग एक ट्रस्टेड एक्जीक्युशन एनवायरमेंट (TEE) के अंदर होता है, जिसका उद्देश्य कि सीक्रेट चैटिंग किसी के भी द्वारा एक्सेस ना की जा सके. यहां तक कि खुद मेटा भी उसको एक्सेस नहीं कर पाएगा।  वॉट्सऐप इनकॉग्निटो चैट के फीचर्स      Meta का दावा है कि यह पहला बड़ा AI प्रोडक्ट है, जिसमें चैटिंग के लॉग कंपनी के सर्वर पर स्टोर नहीं किए जाते हैं।      डिसअपीरिंग मैसेज : इनकॉग्निटो चैट के अंदर AI से की गई बातचीत अस्थाई रूप से भी सेव नहीं होती है. सेशन से बाहर निकलते ही सभी मैसेज खुद ब खुद डिलीट हो जाते हैं।      एंड टू एंड एनक्रिप्शन जैसी सुरक्षा: इनकॉग्निटो चैट की सिक्योरिटी की तुलना कंपनी ने एंड टू एंड एनक्रिप्शन के साथ कर दी है. कंपनी ने बताया है कि इस डेटा को कोई भी बाहरी या कंपनी द्वारा नहीं देखा जा सकेगा।  वॉट्सऐप में मेटा AI को यूज करना बहुत ही आसान है. इसके लिए मेटा आइकन पर क्लिक करें. उसके बाद उसमें कुछ प्रॉम्प्ट पहले से लिस्ट हैं, जिनका यूज किया जा सकता है. साथ ही मेटा AI के साथ यूजर्स चैट कर सकते हैं. मेटा AI की मदद से इमेज आदि को भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

घर पर बनाएं शाही राजभोग कुल्फी, केसर और ड्रायफ्रूट्स से भरपूर मलाईदार स्वाद

 गर्मियों में ठंडी-ठंडी आइसक्रीम खाने का मन भला किसका नहीं करता लेकिन बाहर की आइसक्रीम और कुल्फी में बहुत ज्यादा चीनी और प्रिर्जेवेटिव्स का डर रहता है. ऐसे में क्यों ना इस गर्मी में आप घर पर ही राजभोग कुल्फी बनाएं. यह एक ऐसी ही शाही और पारंपरिक मलाईदार डेजर्ट है जो ड्रायफ्रूट्स, केसर और मावे के लाजवाब स्वाद से भरपूर होती है जो बच्चों को खासतौर पर खूब पसंद होती है. यहां हम आपको इसकी आसान रेसिपी बता रहे हैं जिसकी मदद से आप बिना किसी झंझट के बाजार से भी गाढ़ी, दानेदार और मलाईदार राजभोग कुल्फी घर पर ही तैयार कर सकते हैं जिसे खाते ही बच्चे और बड़े सभी इसके दीवाने हो जाएंगे. शाही राजभोग कुल्फी रेसिपी सामग्री फुल क्रीम दूध: 1 लीटर सम्बंधित ख़बरें मावा (खोया) या मिल्क पाउडर चीनी (स्वादानुसार) केसर के धागे 15-20 (2 चम्मच गुनगुने दूध में भीगे हुए) काजू, बादाम और पिस्ता (बारीक कटे हुए) हरी इलायची पाउडर 1 चम्मच कॉर्नफ्लोर (2 चम्मच ठंडे दूध में घुला हुआ कुल्फी को गाढ़ा करने के लिए है. आप चाहें तो स्किप कर सकते हैं) कुल्फी बनाने का तरीका दूध उबालें: एक भारी तले की कड़ाही में दूध डालकर तेज आंच पर उबालें. जब दूध में उबाल आ जाए, तो गैस की आंच धीमी कर दें. दूध को गाढ़ा करें: दूध को धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि वह अपनी मूल मात्रा का आधा न रह जाए. कड़ाही के किनारों पर जमने वाली मलाई को खुरचकर दूध में ही मिलाते रहें, इससे कुल्फी दानेदार बनेगी. मावा और चीनी मिलाएं: जब दूध आधा रह जाए, तो इसमें कद्दूकस किया हुआ मावा (या मिल्क पाउडर) और चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसे 5 मिनट तक और पकाएं ताकि मावा और चीनी दूध में पूरी तरह घुल जाएं. फ्लेवर और कॉर्नफ्लोर डालें: अब इसमें केसर वाला दूध, इलायची पाउडर और बारीक कटे हुए ड्रायफ्रूट्स (थोड़े से ड्रायफ्रूट्स गार्निशिंग के लिए बचा लें) डालें. इसके बाद, कॉर्नफ्लोर का घोल धीरे-धीरे डालते हुए दूध को लगातार चलाते रहें ताकि गुठलियां न बनें. दूध को 3-4 मिनट और पकाएं, मिश्रण काफी गाढ़ा और मलाईदार हो जाएगा. ठंडा करें: गैस बंद कर दें और कुल्फी के इस गाढ़े मिश्रण को पूरी तरह से ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद इसे कुल्फी मोल्ड (सांचे) या पेपर कप में डालें. ऊपर से बचे हुए कटे हुए ड्रायफ्रूट्स डालें. फ्रीज करें: मोल्ड को एल्युमिनियम फॉयल से ढक दें (ताकि बर्फ के क्रिस्टल न जमने पाएं) और बीच में एक कट लगाकर कुल्फी स्टिक लगा दें. इसे 7-8 घंटे या पूरी रात के लिए डीप फ्रीजर में जमने के लिए रख दें. आपकी ठंडी-ठंडी, मलाईदार राजभोग कुल्फी तैयार है! सांचे को कुछ सेकंड पानी में डिपोकर कुल्फी बाहर निकालें और सर्व करें.