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गर्मी में ठंडक और स्वाद का कॉम्बो: अचारी लौकी सलाद बनाने की आसान रेसिपी

 गर्मियों के मौसम में जब कुछ हल्का और चटपटा खाने का मन होता है तो अक्सर सलाद खाने का मन करता है. लेकिन क्या आपने कभी अचारी लौकी सलाद ट्राई किया है. इसमें लौकी की ठंडक और अचार के मसालों का चटपटा स्वाद मिलता है जो खाने का मजा कई गुना बढ़ा देता है. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि लौकी न खाने वाले भी इसे मांग-मांगकर खाते हैं. खास बात यह है कि यह सलाद बिना तेल के बनता है और झटपट तैयार हो जाता है, इसलिए हेल्दी डाइट फॉलो करने वालों के लिए भी यह एक बेहतर ऑप्शन है.  आइए जानते हैं कि लौकी का अचारी सलाद कैसे बनता है और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 1 कप कद्दूकस की हुई या हल्की उबली लौकी 1/2 कप दही 1 चम्मच अचारी मसाला (अचार का मसाला या घर का बना) 1/2 चम्मच भुना जीरा पाउडर चुटकी भर काली मिर्च 1 चम्मच नींबू का रस नमक स्वादानुसार थोड़ा सा हरा धनिया (गार्निश के लिए) लौकी का अचारी सलाद कैसे बनाते हैं?     लौकी का अचारी सलाद बनाने के लिए सबसे पहले लौकी को हल्का उबाल लें या कद्दूकस करके उसमें थोड़ा नमक मिलाकर 5 मिनट रख दें. इसके बाद उसका पानी अच्छी तरह निचोड़ लें.     अब एक बाउल में दही को अच्छी तरह फेंट लें. इसमें अचारी मसाला, नमक, भुना जीरा पाउडर, काली मिर्च और नींबू का रस डालकर अच्छे से मिलाएं.     अब इसमें तैयार की हुई लौकी डालें और अच्छी तरह मिक्स करें. ऊपर से हरा धनिया डालकर गार्निश करें और सलाद को हल्का ठंडा करके सर्व करें.     अचारी मसाले के लिए आप घर के आम या मिक्स अचार का मसाला इस्तेमाल कर सकते हैं. चाहें तो इसमें थोड़ा कटा हुआ प्याज या टमाटर भी डाल सकते हैं, इससे इसका स्वाद और बढ़ जाएगा.  

महिला स्वास्थ्य का आधार है मासिक धर्म, जानें इसे नियमित रखने के सरल उपाय

मासिक धर्म को हर महीने होने वाली साधारण प्रक्रिया के तौर पर देखा जाता है, लेकिन यह केवल सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिला के शरीर के शुद्धिकरण की प्राकृतिक प्रक्रिया मानी जाती है। आयुर्वेद में इसे “आर्तव चक्र” कहा गया है और महिला स्वास्थ्य का मूल आधार माना गया है, लेकिन आज के समय में खराब जीवनशैली की वजह से मासिक धर्म में गड़बड़ी, दर्द होना, पेडू पर सूजन आना, और गर्भाशय में सिस्ट का होना तेजी से बढ़ती समस्याएं बनती जा रही हैं। इससे हार्मोन संतुलन और प्रजनन क्षमता पर फर्क पड़ता है।  चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में मासिक धर्म को “आर्तव प्रवृत्ति” कहा गया है, जो हर महीने 3 से लेकर 5 दिनों तक होता है। हालांकि, जीवन शैली बिगड़ने से मासिक चक्र में गड़बड़ी हो जाती है, और इसके पीछे का कारण है शरीर के तीनों दोष। वात दोष असंतुलन से कमर दर्द और शरीर में ऐंठन बनी रहती है, और पित्त दोष असंतुलन से रक्त का प्रवाह अधिक हो जाता है और शरीर में जलन और गर्मी महसूस होती है, जबकि कफ दोष असंतुलन से शरीर भारी और सुस्त महसूस करता है। आयुर्वेद में मासिक धर्म को नियमित करने के कई उपाय बताए गए हैं, जिसमें पहला उपाय है संतुलित आहार। संतुलित आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल खाने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही तैलीय, मसालेदार और जंक फूड खाने से परहेज करना चाहिए। आयुर्वेदिक औषधियां भी मासिक धर्म को नियमित करने में मदद कर सकती हैं। अशोक, शतावरी और लोध्र जैसे औषधीय तत्व हार्मोन संतुलन में सहायक होते हैं और मासिक धर्म को नियमित कर दर्द से राहत दिलाते हैं। हालांकि सेवन से पहले सही मात्रा और समाधान के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें। मासिक धर्म को नियमित करने के लिए नियमित दिनचर्या का होना भी जरूरी है। देर रात तक जागना और नींद की कमी हार्मोनल असंतुलन बढ़ा सकती है। समय पर सोना-उठना आवश्यक है और इसके साथ ही रोजाना सुबह योग और प्राणायाम जरूर करें। भद्रासन, पवनमुक्तासन और अनुलोम-विलोम मासिक धर्म को नियमित करने में मददगार हैं।

प्रेग्नेंसी में योगासन के अनगिनत लाभ, आयुष मंत्रालय ने किया खुलासा

नई दिल्ली  गर्भावस्था एक महिला के जीवन में बदलाव, शक्ति और नई शुरुआत का खूबसूरत सफर है। इस दौरान मां की सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी है क्योंकि मां स्वस्थ रहेगी तो बच्चा भी स्वस्थ रहेगा। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय गर्भवती महिलाओं को योग करने की सलाह देता है। योग न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है। प्रेग्नेंसी के दौरान योग करने से कई समस्याएं कम हो जाती हैं। आमतौर पर महिलाओं को पीठ दर्द, सिरदर्द, मतली और सांस लेने में तकलीफ होती है। नियमित योग इन परेशानियों को काफी हद तक कम कर देता है। योग आसनों से शरीर में लचीलापन आता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और प्रसव के समय जरूरी ताकत और सहनशक्ति मिलती है। योग नींद की गुणवत्ता भी सुधारता है। गर्भावस्था में कई महिलाएं नींद की समस्या से जूझती हैं। योग से गहरी और आरामदायक नींद आती है। साथ ही यह स्ट्रेस और एंग्जायटी को कम करने में बहुत मदद करता है। प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव का होना आम है, लेकिन योग से मन शांत रहता है और मां बच्चे से गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग मां का पालन-पोषण करता है ताकि वह आने वाले बच्चे का अच्छे से पालन-पोषण कर सके। यह मां को शांत, संतुलित और ऊर्जावान बनाए रखता है। गर्भावस्था के हर पड़ाव पर योग मां को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करता है। मदर्स डे (10 मई) के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने खास अपील की है कि हर गर्भवती मां योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करे। मंत्रालय का कहना है कि “मां का पहला तोहफा सेहत है”। वह योग अपनाकर खुद को स्वस्थ रख सकती है और बच्चे को भी स्वस्थ जीवन दे सकती है। योग के आसान और सुरक्षित आसन गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं। इन्हें डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए। सही तरीके से किए गए योग से न सिर्फ प्रसव आसान होता है बल्कि प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज होती है।

चींटियों से छुटकारा पाने का आसान तरीका! डिटॉल और हींग वाला स्प्रे करेगा काम

किचन घर का एक ऐसा कोना है जहां साफ-सफाई सबसे जरूरी हो जाती है क्योंकि यहां आपका खाना-पीना बनता है जो सीधे आपकी सेहत पर असर करता है. लेकिन खाने-पीने की चीजों की वजह से किचन में चींटिया और कॉकरोच जैसे कीड़े-मकोड़े खिचें चले आते हैं. चीनी का एक दाना या खाने की हल्की सी महक भी चींटियों की पूरी फौज को दावत दे देती है. बाजार में मिलने वाले कीटनाशक स्प्रे खाने की जगह पर इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. ऐसे में मशहूर शेफ पंकज भदौरिया की ट्रिक आपके काफी काम आ सकती है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर कुछ समय पहले ये ट्रिक शेयर की थी. इस नुस्खे की सबसे अच्छी बात यह है कि इससे चींटियों को कोई नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें भगाया जा सकता है जिससे आपकी रसोई भी सुरक्षित और साफ बनी रहती है. पंकज भदौरिया ने दी ये टिप शेफ पंकज के अनुसार, चींटियों को भगाने के लिए एक स्प्रे बॉटल लीजिए. इसमें 2 चम्मच डिटॉल मिलाएं और एक चम्मच पिसी हुई हींग. अब इसे अच्छी तरह शेक कर लीजिए. वो बताती हैं कि हींग और डिटॉल की महक चींटियों को दूर रखती है. इसे आप किचन समेत घर में कहीं भी स्प्रे कर सकते हैं और चींटियों से छुटकारा पा सकते हैं. ये तरीके भी आ सकते हैं काम यहां हम आपको कुछ और घरेलू नुस्खे भी बता रहे हैं जो आपके घर को चींटियों से मुक्त रख सकते हैं. चींटियों को भगाने के लिए सफेद सिरका भी काफी शक्तिशाली हथियार है. इसके लिए एक स्प्रे बोतल में बराबर मात्रा में पानी और सफेद सिरका मिलाएं. जहां भी आपको चींटियों की कतार दिखे या उनके घुसने की जगह हो (जैसे खिड़कियों के कोने, दराजों के नीचे या स्लैब के किनारे), वहां इस मिश्रण का छिड़काव करें.

स्मार्टफोन खरीदना हुआ महंगा! OnePlus, Realme और Xiaomi ने बढ़ाई कीमतें, 6 हजार तक का इजाफा

भारत में स्मार्टफोन महंगे हो गए हैं. अब अगर आपको न्यू स्मार्टफोन खरीदना है तो 6 हजार रुपये तक एक्स्ट्रा खर्च करने होंगे. कीमत बढ़ाने वाली कंपनियों में शाओमी, रियलमी, वनप्लस और नथिंग जैसे नाम शामिल हैं.  नई कीमतों को ऑफिशियल वेबसाइट पर अपडेट किया जा चुका है. भारत में कंपनियों ने अपने मिड रेंज और प्रीमियम सेगमेंट के स्मार्टफोन को महंगा कर दिया गया है. ये नई कीमत ऑफिशयल पोर्टल पर अपडेट हो चुकी हैं. स्मार्टफोन महंगे क्यों हुए हैं? स्मार्टफोन इंडस्ट्री लगातार बढ़ती कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों का सामना कर रही है. खासकर मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की कीमत में बढ़ोत्तरी हुई है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिसकी वजह से टेक कंपनियां अपने डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में RAM और GPU चिप्स खरीद रही हैं. ऐसे में स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कंपोनेंट्स की कमी हो चुकी है. रैम मैन्युफैक्चरर अब हाई एंड बैंडविड्थ मेमोरी पर फोकस कर रही हैं. ऐसे में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. OnePlus ने महंगे किए फोन OnePlus की ऑफिशियल वेबसाइट पर हैंडसेट महंगे किए जा चुके हैं. जब हमने वनप्लस के ऑफिशियल पोर्टल पर विजिट किया तो पाया कि OnePlus 15 और OnePlus 15R की नई कीमतें जारी की जा चुकी हैं. OnePlus 15 को भारत में 72,999 रुपये में लॉन्च किया था अब कंपनी ने कीमत बढ़ाकर नई कीमत 77,999 रुपये कर दी है, जिसमें 12GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट मिलता है. वनप्लस 15 के टॉप एंड वेरिएंट यानी 16GB RAM + 512GB स्टोरेज अब 85,999 रुपये में लिस्ट किया है. यहां पर 6 हजार रुपये तक का इजाफा देखने को मिला. वनप्लस 15R की कीमत में करीब 2500 रुपये तक का इजाफा किया गया है. शुरुआती पहले वेरिएंट पहले 50,499 रुपये में था, जो अब 52,999 रुपये में आता है. दूसरे वेरिएंट की कीमत 55,499 रुपये से बढ़ाकर 57,999 रुपये की जा चुकी है. रियलमी ने महंगे किए फोन रियलमी ने भी स्मार्टफोन को महंगा कर दिया है. अभी करीब 6 हैंडसेट की कीमत में इजाफा हुआ है. हर एक स्टोरेज वेरिएंट की कीमत में करीब 1 हजार रुपये का इजाफा दिया गया है. इसमें रियलमी सी71 5जी, रियलमी 15x 5G, रियलमी 15T 5G, रियलमी C85 5G, रियलमी 16 Pro 5G और रियलमी 16 प्रो + 5G हैंडसेट शामिल हैं. शाओमी के भी स्मार्टफोन हुए महंगे चीनी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर ने अपने स्मार्टफोन की कीमत में इजाफा कर दिया है. ऑफिशियल पोर्टल पर कंपनी ने अपने हैंडसेट की कीमत को रिवाइज कर दिया है. इसमें  Redmi Note 15 सीरीज के हैंडसेट के नाम शामिल हैं.

दिल्ली के विवेक विहार में AC ब्लास्ट से बड़ा हादसा! 9 लोगों की मौत, जानें कैसे होता है AC में आग लगने का खतरा

दिल्ली के विवेक विहार स्थित एक घर में आग लग गई. आग लगने की वजह एयर कंडीशनर (AC) ब्लास्ट को बताया गया है, जिसकी वजह से घर में मौजूद 9 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग बुरी तरह से झुलस गए. फायर कर्मी ने बताया है कि सुबह करीब 3:47 बजे सूचना मिली थी. इसके बाद मौके पर 14 फायर टेंडर पहुंचीं और आग बुझाने का काम किया. शुरुआत जांच में बताया गया है कि आग लगने की वजह AC में ब्लास्ट बताया है. आजकल गर्मी से राहत पाने के लिए बहुत से लोग घरों में AC का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि AC ब्लास्ट होने के मुख्य कारण क्या है और उनसे बचाव कैसे किया जा सकता है. AC में ब्लास्ट या आग लगने के 5 बड़े कारण AC में इलेक्ट्रिक शॉट सर्किट गर्मी से राहत पाने के लिए बहुत से लोग AC का यूज करते हैं. ऐसे में AC अगर कई घंटे चल रही है और इलेक्ट्रिक तार लूज है या खराब क्वालिटी का है, तो उसमें शॉट सर्किट हो सकता है, जिसकी वजह से आग लगती है. बचाव के लिए जरूरी है कि AC सर्विसिंग कराने के साथ-साथ इलेक्ट्रिशियन से तार भी चेक करा लें. ओवरलोड या फ्लक्चुएशन AC में आग लगने का दूसरा सबसे बड़ा और अहम कारण इलेक्ट्रिक वॉल्टेज का फ्लक्चुएट होना है. इसकी वजह से AC के पार्ट्स खराब या जल जाते हैं. AC में लगने वाली आग मिनटों में पूरे घर में फैल जाती है.  वॉल्टेज फ्लेक्चुएशन से AC को बचाने के लिए स्टेबलाइजर का यूज जरूर करें. AC में धूल और गंदगी होना AC के अंदर एक बड़ा मैकेनिज्म होता है, जिसको ठंडा करने के लिए पंखा भी लगा होता है. कई AC काफी गंदे होते हैं और उनपर ढेर सारी धूल मिट्टी जमा होती है. ऐसे AC में आग लग जाती है. बचाव के लिए जरूरी है कि AC को रेगुलर क्लीन कराएं. सस्ते पार्ट्स का इस्तेमाल AC में आग लगने की एक अन्य वजह खराब क्वालिटी के पार्ट्स भी होते हैं. अगर AC रिपेयरिंग के दौरान घटिया क्वालिटी के पार्ट्स का यूज होते हैं, तो उसकी वजह से भी आग लग सकती है. ये बहुत जानलेवा हो सकती है. खराब इंस्टॉलेशन या मेंटेनेंस लोकल मेकेनिक के द्वारा अगर खराब तरीके से इंस्टॉलेशन होती है, उसकी वजह से भी AC में आग लग सकती है. इसलिए जरूरी है कि कंपनी के मैकेनिक से काम करना चाहिए, जिनको खासतौर से ब्रांड ट्रेनिंग देता है. 

चुकंदर का जूस हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं! इन लोगों के लिए बन सकता है खतरनाक

आजकल लोग अपनी फिटनेस का खास ख्याल रखने लगे हैं और इसी वजह से जिम जाने वाले और हेल्थ कॉन्शियस लोग सब्जियों का जूस अधिक पीने लगे हैं. इसी कड़ी में सुबह-सुबह हेल्दी ड्रिंक के नाम पर चुकंदर का जूस पीना आजकल ट्रेंड बन चुका है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट्स तक, हर कोई इसके फायदे गिनाता है. लेकिन हर चीज के फायदे के साथ कुछ नुकसान भी होते हैं. उसी तरह चुकंदर का जूस जिसे हेल्दी मानकर लोग पी रहे हैं, वो कुछ लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. चुकंदर का जूस पोषक तत्वों से भरपूर जरूर है, लेकिन यह हर शरीर पर एक जैसा असर नहीं करता. कई बार इसको ज्यादा पीना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए इस जूस को पीने से पहले यह जान लीजिए कि क्या यह आपके लिए सही है या नहीं. डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतों से परेशान लोग जिन लोगों को अक्सर डाइजेशन की समस्या रहती है,उनको इस जूस से परहेज करना चाहिए. कुछ लोगों को चुकंदर का जूस पीने के बाद पेट फूलना, ऐंठन, गैस या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, चुकंदर में मौजूद प्राकृतिक नाइट्रेट्स और फाइबर कुछ लोगों के डाइजेस्टिव सिस्टम पर तेज असर डाल सकते हैं, खासकर जब इसे खाली पेट पिया जाए. पेशाब का लाल होना अगर चुकंदर का जूस पीने के बाद आपका पेशाब या मल लाल दिखाई दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसे बीटुरिया कहा जाता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (HMS)के हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह चुकंदर के प्राकृतिक पिगमेंट के कारण होता है और आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है. किडनी स्टोन वालों के लिए खतरा चुकंदर में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है. इस वजह से किडनी स्टोन वाले मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए. अमेरिका की नेशनल किडनी फाउंडेशन (NKF) के अनुसार, ज्यादा ऑक्सलेट शरीर में कैल्शियम के साथ मिलकर किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ा सकता है, जिन लोगों को पहले से किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें इसका सीमित सेवन करना चाहिए. लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए सावधानी चुकंदर का जूस ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है. लेकिन अगर आपका बीपी पहले से कम है या आप उसकी दवाई ले रहे हैं. तो यह ज्यादा लो का कारण बन सकता है, जिससे चक्कर और कमजोरी महसूस हो सकती है. किन लोगों को चुकंदर के जूस से बचना चाहिए?     किडनी स्टोन या किडनी रोग वाले लोग     लो ब्लड प्रेशर के मरीज     डायबिटीज वाले लोग     कमजोर पाचन तंत्र वाले लोग     प्रेग्नेंट महिलाएं चुकंदर का जूस पीने का सही तरीका क्या है? चुकंदर का जूस पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे जितना ज्यादा, उतना बेहतर समझ कर पीना गलती हो सकती है. एक लिमिट में ही किसी भी चीज का सेवन सही होता है और शुरुआत में इसे पीने के बाद अपने शरीर में होने वाले रिएक्शन का भी ध्यान रखें. अगर कुछ भी बदलाव नजर आए तो पहले तुरंत जूस पीना बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें.

दिल्ली में भीषण गर्मी का असर, गर्भवती महिलाओं में बढ़ीं प्रेगनेंसी से जुड़ी जटिलताएं

 गर्मी के तेवर अपने चरम पर हैं और देश के कई राज्यों समेत राजधानी दिल्ली में सूरज की तपिश अब बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है. यहां का पारा पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार भी पहुंच चुका है जिसके चलते आम लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है. लेकिन इसका सबसे खतरनाक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के हॉस्पिटल में गर्मी के कारण प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याओं वाली महिलाओं की संख्या काफी बढ़ गई है. डॉक्टर्स का कहना है कि बढ़ता तापमान न केवल मां की सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ को भी रोक रहा है. गर्मी से समय से पहले डिलीवरी का जोखिम मलिक रेडिक्स हेल्थकेयर की डायरेक्टर डॉ. रेनू मलिक का कहना है गर्मी की वजह से प्री-टर्म लेबर (समय से पहले प्रसव) के मामले बढ़ रहे हैं. शरीर का तापमान बढ़ने से स्ट्रेस पैदा होता है जो डिलीवरी की प्रक्रिया को वक्त से पहले शुरू कर सकता है. वहीं डॉक्टरों के मुताबिक, जब तापमान 45 डिग्री के आसपास होता है तो शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इससे गर्भाशय में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन समय से पहले एक्टिव हो सकते हैं. बच्चे के वजन और ग्रोथ पर बुरा असर गर्मी सिर्फ मां के लिए ही नहीं बल्कि भ्रूण के लिए भी घातक है. रिपोर्ट बताती है कि हीट स्ट्रेस के कारण प्लेसेंटा तक पोषण सही तरह से नहीं पहुंच पाता. इसका सीधा परिणाम 'लो बर्थ वेट' यानी जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना है. इसके अलावा लंबे समय तक धूप में रहने वाली महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर) का खतरा भी बढ़ जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दोपहर 11 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें.

मोबाइल पर कैसे आएगा इमरजेंसी अलर्ट? जानिए नई सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी

शनिवार को देशभर में सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम (Cell Broadcast System) का बड़े पैमाने पर टेस्ट किया गया है. साफ है कि आने वाले समय में यह सर्विस आम लोगों के लिए नियमित तौर पर इस्तेमाल में लाई जाएगी. यानी आगे जब भी कोई बड़ी आपदा जैसे भूकंप, बाढ़, साइकलोन या कोई सिक्योरिटी थ्रेट का खतरा होगा, तो सरकार सीधे आपके फोन पर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट भेज सकेगी. यह कोई सामान्य SMS नहीं होगा, बल्कि टावर से एक साथ पूरे इलाके में ब्रॉडकास्ट होने वाला मैसेज होगा, जिसे पाने के लिए न इंटरनेट की जरूरत होगी और न ही किसी ऐप की. हालांकि कमजोर नेटवर्क में भी काम करेगा, लेकिन एक शर्त है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जा रही है कि यह कमजोर नेटवर्क में भी काम कर सकता है. यानी जहां कॉल ड्रॉप हो रही हो, इंटरनेट न चल रहा हो, वहां भी अलर्ट आने की संभावना रहेगी, क्योंकि यह SMS की तरह कतार में नहीं फंसता, बल्कि सीधे टावर से पुश होता है. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी होगी क‍ि अगर आपके फोन में बिल्कुल “No Service” है, यानी टावर का कोई सिग्नल ही नहीं मिल रहा, तो फिर यह सिस्टम भी काम नहीं करेगा. बिना स‍िम के फोन पर भी दिख सकता है अलर्ट आने वाले समय में इस सिस्टम की एक और खास बात लोगों को चौंका सकती है, यह नंबर पर नहीं, बल्कि एरिया पर काम करता है. यानी अगर आपका फोन ऑन है और किसी नेटवर्क का सिग्नल पकड़ रहा है, तो बिना स‍िम के भी इमरजेंसी अलर्ट स्क्रीन पर फ्लैश हो सकता है. यही वजह है कि इसे आपदा के समय ज्यादा कारगर कम्‍युन‍िकेशन टूल माना जा रहा है. फिर भी कुछ लोग रह जाएंगे ‘आउट ऑफ कवरेज’ हालांकि यह सिस्टम काफी एडवांस्ड है, लेकिन पूरी तरह फूलप्रुफ नहीं है. जिन इलाकों में नेटवर्क कवरेज ही नहीं है, वहां रहने वाले लोग इन अलर्ट से वंचित रह सकते हैं. इसी तरह अगर फोन स्‍व‍िच ऑफ है या बैटरी खत्म है, तो कोई भी चेतावनी नहीं पहुंचेगी. एयरप्‍लेन मोड में भी फोन नेटवर्क से कट जाता है, इसलिए वहां भी अलर्ट नहीं आएगा. इसके अलावा पुराने फीचर फोन्स या ऐसे स्‍मार्टफोन जिनमें यह फीचर सपोर्ट नहीं करता है, वे भी इस सिस्टम के दायरे से बाहर रहेंगे. कई बार यूजर्स खुद सेट‍िंग्‍स में जाकर इमरजेंसी अलर्ट को disable कर देते हैं, ऐसे में भी यह सर्विस उन तक नहीं पहुंच पाएगी. आने वाले समय की ‘लाइफ-सेवर’ टेक्नोलॉजी आगे चलकर सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम को देश के आपदा प्रबंधन ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जाएगा. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे आपके इलाके में लगा एक ड‍िज‍िटल लाउडस्पीकर. अगर आप उसकी रेंज में हैं और आपका फोन नेटवर्क से जुड़ा है, तो वार्न‍िंग आपको तुरंत मिल जाएगी. लेकिन अगर आप उस रेंज से बाहर हैं या आपने खुद को नेटवर्क से ड‍िसकनेक्‍ट कर रखा है, तो यह अलर्ट आप तक नहीं पहुंचेगा. यानी साफ है क‍ि यह तकनीक तेज, असरदार और कई मामलों में लाइफ सेवर साबित होगी, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं, जिन्हें समझना उतना ही जरूरी है.

कोकोनट लस्सी रेसिपी: गर्मी में ठंडक देने वाला हेल्दी ड्रिंक

 गर्मियों के मौसम में जब पारा चढ़ने लगता है तो शरीर को हाइड्रेटेड और पेट को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. वैसे तो उत्तर भारत में लस्सी सबसे लोकप्रिय समर ड्रिंक है लेकिन अगर आप वही साधारण लस्सी पीकर बोर हो चुके हैं तो क्यों ना कुछ नया ट्राई किया जाए. ऐसे में कोकोनट यानी नारियल की लस्सी आपके लिए परफेक्ट हो सकती है. नारियल की लस्सी के फायदे कोकोनट लस्सी न केवल स्वाद में बेहतरीन है बल्कि नारियल की तासीर ठंडी होने के कारण यह आपके पेट को दोगुनी ठंडक पहुंचाती है. यह एक ऐसा प्रीमियम ड्रिंक है जो आपको ताजगी के साथ-साथ भरपूर ऊर्जा भी देती है. आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और झटपट रेसिपी. लस्सी के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें ताजा दही (गाढ़ा) – 2 कप नारियल का दूध या कद्दूकस किया हुआ ताजा नारियल – 1 कप नारियल पानी (लस्सीको पतला करने के लिए) – 1/2 कप चीनी या मिश्री पाउडर – स्वादानुसार इलायची पाउडर – एक चुटकी बर्फ के टुकड़े  – 4-5 बारीक कटा हुआ सूखा नारियल और कटे हुए बादाम बनाने का तरीका एक मिक्सर जार या ब्लेंडर में गाढ़ा दही और नारियल का दूध डालें. अगर आप ताजा नारियल इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे पहले बारीक पीस लें. इसमें स्वादानुसार चीनी, इलायची पाउडर और थोड़े से बर्फ के टुकड़े डालें. अब सभी सामग्रियों को 1-2 मिनट के लिए अच्छी तरह ब्लेंड करें जब तक कि लस्सी एकदम स्मूथ और झागदार न हो जाए. अगर लस्सी बहुत गाढ़ी लग रही है तो आप इसमें थोड़ा नारियल पानी मिला सकते हैं. तैयार कोकोनट लस्सी को गिलास में निकालें. ऊपर से नारियल के लच्छे या ड्राई फ्रूट्स सजाएं और इसे ठंडा-ठंडा सर्व करें.