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भीषण गर्मी में राहत देगा सौंफ का शरबत, शरीर को रखेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

 पिछले कुछ दिनों से भारत के ज्यादातर शहरों में चिलचिलाती तपती गर्मी और लू चल रही है. लू और गर्मी में जब शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तो उसे हाइड्रेटेड और ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है. गर्मी में नींबू का शरबत तो सभी पीते हैं लेकिन क्या आपने कभी सौंफ का शरबत ट्राई किया है. बाजार में मिलने वाले शरबत अक्सर चीनी और प्रिजर्वेटिव्स से भरे होते हैं. ऐसे में सौफ का शरबत एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प है. सौंफ की तासीर बेहद ठंडी होती है. ऐसे में बिना चीनी और बिना किसी आर्टिफिशियल मसाले वाला यह शरबत न केवल आपके शरीर को अंदर से ठंडा रखेगा बल्कि पाचन को दुरुस्त कर एसिडिटी और जलन जैसी समस्याओं को भी दूर भगाएगा. शरबत के लिए तैयार कर लें ये चीजें 1/2 कप मोटी सौंफ 2 कप पानी (भिगोने के लिए) 1/2 कप धागे वाली मिश्री मिश्री चीनी के विकल्प के रूप में जो प्रकृति में ठंडी होती है. आप चाहें तो शहद भी यूज कर सकते हैं. 8-10 ताजा पुदीने के पत्ते बर्फ के टुकड़े बिना चीनी-मसाले वाला सौंफ का शरबत कैसे बनाएं सबसे पहले सौंफ को अच्छी तरह साफ कर लें और इसे रात भर या कम से कम 4-5 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें. अब भीगी हुई सौंफ को उसी पानी के साथ मिक्सी जार में डालें. इसमें धागे वाली मिश्री और पुदीने के पत्ते डालकर एक महीन पेस्ट बना लें. तैयार पेस्ट को एक बारीक छलनी या सूती कपड़े की मदद से छान लें ताकि सौंफ के रेशे अलग हो जाएं. एक गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें, तैयार सौंफ का अर्क डालें और ऊपर से ठंडा पानी मिलाएं. इसे अच्छी तरह चलाएं और ताजा पुदीने से सजाकर परोसें.

गर्मी में ककड़ी खाने के फायदे, शरीर को रखे ठंडा और हाइड्रेटेड

 गर्मियों के मौसम में शरीर को ऐसे फूड्स की जरूरत होती है जो पेट को ठंडा रखें, आसानी से पच जाएं और शरीर को हाइड्रेट रखें. ककड़ी यानी लंबा खीरा एक ऐसा ही आसान और हेल्दी ऑप्शन है जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है बल्कि कई तरह से फायदा भी पहुंचाता है. यह सड़क किनारे मार्केट में आसानी से मिल जाती है और सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. आप इसे ऐसे ही खा सकते हैं या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं. आइए जानते हैं कि गर्मी के इस मौसम में ककड़ी खाना आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है. शरीर को रखे हाइड्रेट गर्मियों में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है लेकिन ककड़ी खाने से यह समस्या कम हो सकती है. इसमें लगभग 96% पानी होता है जो शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने में मदद करता है. धूप में बाहर रहने पर इसे खाना बहुत फायदेमंद होता है. स्किन के लिए फायदेमंद गर्मी में धूप, पसीना और प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा हमारी स्किन पर पड़ता है. ऐसे में ककड़ी स्किन को अंदर से ठंडक देती है और उसे फ्रेश बनाए रखने में मदद करती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं और झुर्रियों को कम करने में भी मदद करते हैं. शरीर को ठंडक देता है जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है तो ऐसे खाने की जरूरत होती है जो शरीर को ठंडा रखे. ककड़ी में नेचुरल ठंडक होती है, इसलिए यह बॉडी टेंपरेचर कम करने में मदद करती है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह गर्मियों में शरीर को ठंडा और तरोताजा बनाए रखती है. वजन कम करने में मददगार अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो ककड़ी एक बेहतर ऑप्शन है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. इससे बार-बार खाने की आदत कम होती है और वजन कंट्रोल में रहता है. डाइजेशन को बेहतर बनाती है अगर आपको पेट भारी लग रहा है या ब्लोटिंग की समस्या है तो ककड़ी खाना फायदेमंद हो सकता है. इसमें फाइबर होता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है और पेट को हल्का रखता है. यह आसानी से पच जाती है, इसलिए भारी खाना खाने के बाद भी इसे खाया जा सकता है.  

Aadhaar में DOB अपडेट रिक्वेक्ट हो गया? ऐसे करें सही और सफल अपडेट

Aadhaar कार्ड आज हर भारतीय के लिए एक जरूरी दस्तावेज है। बैंक, मोबाइल सिम हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर Aadhaar में आपकी जन्मतिथि (Date of Birth) गलत हो, तो कई काम अटक सकते हैं। लोग अक्सर इसे ठीक कराने के लिए अपडेट रिक्वेस्ट डालते हैं, लेकिन कई बार यह रिक्वेस्ट रिजेक्ट भी हो जाती है। ऐसे में क्या करें यहां जानें: DOB अपडेट रिक्वेस्ट रिजेक्ट होने पर करें ये काम UIDAI ने साफ किया है कि अगर आपकी DOB अपडेट रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो जाती है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आप सीधे UIDAI की हेल्पलाइन 1947 पर कॉल कर सकते हैं या help@uidai.gov.in पर ईमेल भेजकर मदद ले सकते हैं। आगे आपको बताते हैं DOB अपडेट रिजेक्ट होने पर क्या करें, क्यों रिजेक्ट होता है और सही तरीका क्या है। क्यों होता है DOB अपडेट रिजेक्ट Aadhaar में जन्मतिथि अपडेट कराने के लिए सही डॉक्यूमेंट देना जरूरी होता है। अगर आपके द्वारा दिए गए दस्तावेज सही नहीं हैं या उनमें जानकारी मेल नहीं खाती, तो रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो सकती है। कई बार डॉक्यूमेंट क्लियर नहीं होता, नाम और DOB में मिसमैच होता है या आपने गलत कैटेगरी में अपडेट डाल दिया होता है। ऐसे में सिस्टम रिक्वेस्ट को रिजेक्ट कर देता है। ईमेल करते समय किन बातों का रखें ध्यान जब आप UIDAI को ईमेल करें तो अपनी समस्या साफ-साफ लिखें। आपको अपनी Aadhaar संख्या (पूरी या masked), नाम, और समस्या का विवरण देना चाहिए। साथ ही जरूरी डॉक्यूमेंट भी अटैच करें, ताकि आपकी समस्या जल्दी समझी जा सके और समाधान मिल सके। घर बैठे Aadhaar में डेट ऑफ बर्थ बदलने का पूरा तरीका Step 1: सबसे पहले UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं और “My Aadhaar” सेक्शन में जाएं। वहां आपको “Update Your Aadhaar” का ऑप्शन मिलेगा। अब अपना 12-digit Aadhaar नंबर डालें और कैप्चा भरें। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा, जिसे डालकर लॉगिन करना होगा। Step 2: लॉगिन करने के बाद “Update Aadhaar Online” पर क्लिक करें। यहां आपको अलग-अलग डिटेल्स अपडेट करने का ऑप्शन मिलेगा, जिसमें Date of Birth (DOB) भी शामिल है। अब अपनी सही जन्मतिथि (DOB) भरें। ध्यान रखें कि जो DOB आप डाल रहे हैं, वही आपके डॉक्यूमेंट में भी होना चाहिए। Step 3: DOB अपडेट करने के लिए आपको वैध डॉक्यूमेंट अपलोड करना होगा, जैसे: Birth Certificate, 10th Marksheet, Passport डॉक्यूमेंट साफ और readable होना चाहिए, वरना रिक्वेस्ट रिजेक्ट हो सकती है। अब आपको अपडेट के लिए छोटी-सी फीस (आमतौर पर ₹50) ऑनलाइन पे करनी होती है। पेमेंट आप UPI, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से कर सकते हैं।

जापानी लाइफस्टाइल के 5 हेल्दी राज: लंबी उम्र और फिट बॉडी का आसान फॉर्मूला

हेल्दी और फिट रहने की बात आती है तो जापानी लाइफस्टाइल को दुनिया में सबसे बेहतर माना जाता है. जापान के लोग न सिर्फ लंबी उम्र जीते हैं, बल्कि बढ़ती उम्र में भी एक्टिव और एनर्जेटिक बने रहते हैं. उनकी फिटनेस का राज सिर्फ डाइट या एक्सरसाइज नहीं, बल्कि उनकी रोजाना की आदतों और लाइफस्टाइल में छुपा होता है. अगर आप भी बिना ज्यादा मेहनत के हेल्दी रहना चाहते हैं तो जापानी लोगों की कुछ आसान आदतें अपनाकर अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. धीरे-धीरे चबाकर खाएं जापानी लोग खाना बहुत आराम से और धीरे-धीरे चबाकर खाते हैं. इससे खाना अच्छे से पचता है और कम खाने में ही पेट भरा हुआ महसूस होता है. यह आदत ओवरईटिंग से बचाती है और वजन कंट्रोल रखने में मदद करती है. खाने में वैरायटी बढ़ाएं जापान में लोग एक बार में ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय अलग-अलग चीजें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते हैं. इससे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं और खाने में वैरायटी भी बनी रहती है, जबकि ओवरईटिंग नहीं होती. खुद को एक्टिव रखें जापानी लोग अपनी डेली रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी को जरूर शामिल करते हैं. वे अक्सर पैदल चलते हैं या साइकिल का इस्तेमाल करते हैं. इससे उनका शरीर एक्टिव रहता है और फिटनेस बनी रहती है. भूख का 80% ही खाएं जापान में 'हारा हाची बू' नाम की परंपरा है, जिसमें लोग अपनी भूख का सिर्फ 80% ही खाते हैं. यह आदत ज्यादा खाने से रोकती है और वजन को बैलेंस रखने में मदद करती है. ग्रीन टी ग्रीन टी जापानी संस्कृति का अहम हिस्सा है. इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. रेगुलर ग्रीन टी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और वजन कंट्रोल में रहता है. अगर आप भी फिट और हेल्दी रहना चाहते हैं तो इन आसान आदतों को अपनी डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं. छोटी-छोटी ये आदतें आपके लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव ला सकती हैं.

एलॉन मस्क vs सैम ऑल्टमैन: OpenAI को लेकर कोर्ट में हाई-प्रोफाइल जंग शुरू

दुनिया की सबसे बड़ी टेक लड़ाइयों में से एक अब कोर्ट तक पहुंच चुकी है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और AI के धुरंधर सैम ऑल्टमैन आमने-सामने हैं. मामला सिर्फ दो बड़े नामों का नहीं है, बल्कि AI की दुनिया का डायरेक्शन तय करने वाली इस लड़ाई पर पूरी दुनिया की नजर है. अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल में एलॉन मस्क खुद गवाही देने कोर्ट पहुंचे. उन्होंने OpenAI पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मस्क का कहना है कि जिस मकसद से OpenAI की शुरुआत हुई थी, उसे पूरी तरह बदल दिया गया है. यहां तक की चैरिटी लूटने तक का आरोप लगा दिया. एलॉन मस्क ने ये भी बताया है कि उन्होंने ही कंपनी का नाम रखा था. इसके पीछे की कहानी बताई है. कहा है कि Open नाम इसलिए रखा गया था, क्योंकि इसे ओपन सोर्स रखने का मकसद था, गूगल की तरह इसे क्लोज सोर्स नहीं रखना था. कहां से शुरू हुई कहानी यह कहानी 2015 से शुरू होती है, जब एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन ने मिलकर OpenAI की शुरुआत की थी. उस समय इसे एक नॉन-प्रॉफिट संस्था के तौर पर बनाया गया था. मकसद AI को सुरक्षित और इंसानों के हित में डेवेलेप करना था. मस्क ने इस प्रोजेक्ट को फंड भी किया और इसे एक मानवता के लिए AI पहल बताया गया. लेकिन समय के साथ चीजें बदलने लगीं. अब आरोप क्या हैं एलॉन मस्क का आरोप है कि OpenAI ने अपने असली मकसद से धोखा किया. उनका कहना है कि कंपनी अब एक प्रॉफिट कमाने वाली कंपनी बन गई है, जबकि शुरुआत में इसे गैर-लाभकारी संस्था के रूप में बनाया गया था. मस्क ने कोर्ट में कहा कि उन्हें यह सोचकर इन्वेस्ट करने को कहा गया था कि OpenAI मानवता के लिए काम करेगा, लेकिन बाद में इसे एक बिजनेस में बदल दिया गया. उन्होंने यहां तक कहा कि यह चैरिटी को लूटने जैसा है और कंपनी ने अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह हटकर काम किया. कितना बड़ा है मामला यह सिर्फ एक सामान्य केस नहीं है. एलॉन मस्क इस केस में अरबों डॉलर का मुआवजा मांग रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रकम 130 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती है. अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो इससे OpenAI के काम करना का तरीका पूरी तरह से बदल सकता है. यहां तक कि कंपनी को फिर से नॉन-प्रॉफिट मॉडल में वापस लाने की मांग भी की गई है. इस पूरे केस को और बड़ा बनाता है इसमें दांव पर लगी रकम. मस्क ने OpenAI के खिलाफ करीब 100 अरब डॉलर से ज्यादा के नुकसान का दावा किया है. उनका कहना है कि उन्हें जिस मकसद के लिए निवेश करने को कहा गया था, वह पूरी तरह बदल दिया गया और इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ. अगर कोर्ट एलॉन मस्क के पक्ष में फैसला देता है, तो यह टेक इंडस्ट्री के इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक बन सकता है. OpenAI का जवाब क्या है दूसरी तरफ OpenAI और सैम ऑल्टमैन ने इन आरोपों को खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि मस्क का असली मकसद प्रतिस्पर्धा है. OpenAI का तर्क है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में टिके रहने के लिए फंडिंग और प्रॉफिट मॉडल जरूरी था. खासकर गूगल और दूसरी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा. कंपनी यह भी कह रही है कि मस्क खुद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI चला रहे हैं, इसलिए यह मामला कंपटीशन से भी जुड़ा हुआ है. कोर्ट में क्या हुआ अब तक ट्रायल के दौरान एलॉन मस्क ने खुद गवाही दी और ओपनAI के शुरुआती दिनों की कहानी बताई. उन्होंने कहा कि OpenAI एक ओपन और सुरक्षित AI बनाने के लिए शुरू किया गया था, उन्होंने गूगल के साथ AI रेस और उस समय के अंदरूनी फैसलों का भी जिक्र किया. वहीं, कोर्ट में यह भी सामने आया कि यह मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि पर्सनल भी बन चुका है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह लड़ाई अब दो नेताओं के बीच की टकराव जैसी दिख रही है. AI की दुनिया पर क्या असर पड़ेगा यह केस सिर्फ मस्क और ऑल्टमैन तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ सकता है. अगर मस्क जीतते हैं, तो AI कंपनियों पर ज्यादा नियम और ट्रांसपेरेंसी का दबाव बढ़ सकता है. वहीं अगर OpenAI जीतता है, तो यह साबित होगा कि AI को आगे बढ़ाने के लिए प्रॉफिट मॉडल जरूरी है. दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन कभी साथ काम करते थे. लेकिन आज वही दो लोग कोर्ट में आमने-सामने खड़े हैं. यह लड़ाई सिर्फ पैसे की नहीं है, बल्कि इस बात की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फ्यूचर कैसा होगा. क्या यह मानवता के लिए काम करेगा या कंपनियों के मुनाफे के लिए? इस पूरे मामले से एक बात साफ है. AI जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके आसपास विवाद भी बढ़ रहे हैं. एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन की यह लड़ाई आने वाले समय में यह तय कर सकती है कि AI का रास्ता कौन तय करेगा, टेक्नोलॉजी या बिजनेस.

बिजली के उतार-चढ़ाव से बचाव: क्यों जरूरी है पूरे घर के लिए वोल्टेज स्टेबलाइजर

मनोरंजन और सुकून के लिए अधिकतर लोग अपने घरों में टीवी, फ्रिज, AC,कूलर आदि रखते हैं. कुल मिलाकर एक घर में बिजली से चलने वाले सामान की कीमत से कम 2-3 लाख रुपये होती है. ये सब कुछ एक झटके में खराब हो सकता है अगर आप अपने घर में वॉल्टेज कंट्रोल करने के लिए स्टेबलाइजर का यूज नहीं करते हैं. आमतौर पर लोग AC आदि की सुरक्षा के लिए उसमें स्टेबलाइजर का यूज करते हैं. अगर आपके इलाके में बिजली फ्लकचुएट करती है तो पूरे घर के लिए एक वॉल्टेज स्टेबलाइज होना चाहिए. ईकॉमर्स मार्केट और स्थानीय मार्केट में कई स्टेबलाइजर मौजूद हैं, जो पूरे घर के लिए यूज किए जा सकते हैं. यूजर्स अपनी जरूरत के मुताबिक किलोवाट चुन सकते हैं. मार्केट में 5 KVA हेवी ड्यूटी स्टेबलाइजर को भी खरीदा जा सकता है, जिसकी कीमत करीब 10 हजार रुपये है. मार्केट में 3 किलोवाट से 10 किलोवाट तक का स्टेबलाइजर मौजूद घर के लिए स्टेबलाइजर अपनी जरूरत के हिसाब से चुनना चाहिए. मार्केट में 3 किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट तक का स्टेबलाइजर आता है. अलग-अलग ब्रांड वारंटी भी देते हैं. बिजली का उतार-चढ़ावा क्या होता है? बिजली विभाग या कंपनी द्वारा बिजली केबल पर एक लिमिट में पावर सप्लाई होती है और कई बार ओवर डिमांड होने पर या किसी खामी की वजह से बिजली में फ्लक्चुएशन देखने को मिलता है, जिसमें वॉल्टेज आउटपुट कम या ज्यादा हो जाता है. वॉल्टेज स्टेबलाइजर कैसे काम करता है? वॉल्टेज स्टेबलाइज, असल में खंबे से आने वाली बिजली को चेक करता है और फिर उसको आगे सप्लाई करता है. यह कम होते वॉल्टेज और बढ़ते वॉल्टेज को सेंस करता है, फिर स्टेबलाइजर के अंदर ट्रांसफॉर्मर और कंट्रोल सर्किट होते हैं जो वोल्टेज को बढ़ाते और घटाने का काम करते हैं. इसको उदाहरण के रूप में समझें तो अगर अगर घर में आने वाली पावर सप्लाई का वोल्टेज 150V तक गिर जाए तो स्टेबलाइजर उसको बढ़ाकर ~220V कर देगा. वहीं, अगर पावर सप्लाई में आने वाले वॉल्टेज 260V तक बढ़ जाए तो फिर स्टेबलाइजर उसे घटाकर ~220V कर देता है.

घर पर बनाएं डायमंड फेशियल ग्लो मास्क, ओट्स और बादाम से पाएँ नेचुरल चमकदार स्किन

 हर कोई चाहता है कि उसकी स्किन साफ, सॉफ्ट और ग्लोइंग दिखे लेकिन कोई जरूरी नहीं कि इसके लिए हर बार पार्लर जाना जरूरी नहीं है. आपकी किचन में मौजूद कुछ चीजें भी ग्लोइंग स्किन पाने में आपकी मदद कर सकती हैं. आज हम आपको घर पर नेचुरल चीजों से  डायमंड फेशियल ग्लो मास्क बनाना बताएंगे जो स्किन से जुड़ीं समस्याओं को कम कर चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करेगा. इस फेस मास्क को घर पर बनाना और लगाना दोनों ही बेहद आसान है. तो आइए जानते हैं घर पर डायमंड फेशियल ग्लो मास्क कैसे बना सकते हैं और इसे लगाने का सही तरीका क्या है. डायमंड फेशियल ग्लो मास्क घर पर कैसे बनाएं ? डायमंड फेशियल ग्लो मास्क बनाने के लिए 1 चम्मच ओट्स, 1 चम्मच चिया सीड्स, 1 चम्मच चावल 4 बादाम एक आउल में निकाल लें. इसके बाद इसमें पर्याप्त मात्रा में दूध डालें और इन्हें रातभर के लिए भिगोकर रख दें. फिर अगली सुबह इन सभी चीजों को अच्छे से पीसकर एक स्मूद पेस्ट बना लें. इस फेस पैक का इस्तेमाल कैसे करें? तैयार किए गए पेस्ट को चेहरे पर लगाने से पहले अच्छी तरह से साफ कर लें. फिर चेहरा सुखने के बाद इस पेस्ट को स्किन पर समान रूप से लगाएं. इसे 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें, ताकि यह स्किन में अच्छे से एब्जॉर्ब हो जाए. जब यह थोड़ा सूख जाए तो हल्के हाथों से मसाज करते हुए इसे हटाएं और फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. इस फेस मास्क के क्या फायदे हैं? डायमंड फेशियल ग्लो मास्क स्किन के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. इसमें मौजूद ओट्स, चिया सीड्स, चावल और बादाम स्किन को गहराई से साफ करने में मदद करते हैं और डेड स्किन को हटाते हैं, जिससे चेहरा साफ और स्मूद नजर आता है. दूध चेहरे को नमी देता है और उसे सॉफ्ट बनाता है. इस फेस मास्क के रेगुलर इस्तेमाल से स्किन को पोषण मिलता है, दाग-धब्बे हल्के होते हैं और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है. साथ ही, यह स्किन को फ्रेश और हेल्दी दिखाने में भी मदद करता है, जिससे चेहरा ज्यादा दमकता हुआ नजर आता है.  

18 किलो वजन कम करने का आसान तरीका: मिंडी कलिंग की फिटनेस जर्नी ने सबको चौंकाया

हॉलीवुड एक्ट्रेस और राइटर मिंडी कलिंग अपने जबरदस्त बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर चर्चा में हैं. 40 साल की मिंडी ने जिस तरह से करीब 18 किलो वजन कम किया है वो काफी आसान है और कोई भी उनके तरीके को फॉलो कर सकता है. अक्सर लोग सेलिब्रिटीज के वेट लॉस को किसी जादुई पिल्स या क्रैश डाइट से जोड़कर देखते हैं लेकिन मिंडी की कहानी पूरी तरह अलग है. उन्होंने बिना डाइटिंग के सिर्फ लाइफस्टाइल को बदलकर अपना वजन कम किया है. आइए जानते हैं कि आखिर वह कौन सा तरीका है जिसने मिंडी को इतना फिट बना दिया है. डाइट नहीं, पोर्शन कंट्रोल डेली मेल के मुताबित, मिंडी कलिंग ने अपनी पसंद का खाना पूरी तरह से नहीं छोड़ा. उनका कहना है कि वह आज भी वह सब खाती हैं जो उन्हें पसंद है, बस उसकी मात्रा (Portion Size) कम कर दी है. मिंडी का कहना है, 'अगर मैं खुद पर पाबंदी लगाती हूं तो वह मेरे लिए काम नहीं करता इसलिए मैं सब खाती हूं लेकिन कम खाती हूं. मैंने प्रोसेस्ड फूड और शुगर को कम कर दिया है और हाइड्रेशन पर खास ध्यान देती हूं. मैं सुबह 7 बजे से पहले ही करीब 1.5 लीटर पानी पी लेती हूं जिससे मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है.' हफ्ते में 32 किलोमीटर वॉक मिंडी का सबसे बड़ा फिटनेस मंत्र मूवमेंट है. वह जिम में घंटों पसीना बहाने के बजाय एक्टिव रहने की कोशिश करती हैं. वह हर हफ्ते करीब 32 किलोमीटर पैदल चलने या हाइकिंग करने का टारगेट रखती हैं. मिंडी के मुताबित,वह छोटे-छोटे समय का भी इस्तेमाल करती हैं जैसे बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद 3-4 किलोमीटर वॉक करना या फोन पर बात करते हुए टहलना. इसके अलावा वह हफ्ते में 3 दिन सुबह जल्दी उठकर जॉगिंग और योग भी करती हैं. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और रिसर्च? हेल्थ एक्सपर्ट्स मिंडी के इस वेट लॉस तरीके को सबसे कारगर मानते हैं. मायो क्लिनिक के एक्सपर्ट के मुताबिक, वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट के मुकाबले धीरे-धीरे लाइफस्टाइल में बदलाव करना ज्यादा टिकाऊ होता है. रिसर्च बताती है कि पैदल चलना न केवल कैलोरी बर्न करता है बल्कि यह हार्ट हेल्थ और मेंटल क्लैरिटी के लिए भी बेहतरीन है. बोल्ट फॉर्मेसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना 30-60 मिनट की तेज वॉक कैलोरी डेफिसिट पैदा करने का सबसे सुरक्षित और साइंटिफिक तरीका है जो बिना किसी साइड इफेक्ट के वजन घटाने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मिंडी की तरह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो का मेल बॉडी कंपोजिशन को सुधारने में मदद करता है.    

सितंबर 2026 से कुछ स्मार्टफोन्स में नहीं चलेगा WhatsApp, जानें कौन से होंगे प्रभावित

मुंबई  आजकल डिजिटल दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि पुराने फोन और सॉफ्टवेयर को बनाए रखना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. इसी बीच व्हाट्सएप ने एक बड़ा ऐलान किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल सितंबर से कंपनी पुराने एंड्रॉयड वर्जन वाले फोनों पर अपना सपोर्ट बंद करने वाली है. अभी व्हाट्सएप एंड्रॉयड 5.0 और उसके ऊपर वाले डिवाइस पर चलता है, लेकिन 8 सितंबर 2026 से सिर्फ एंड्रॉयड 6.0 या उससे नए वर्जन वाले स्मार्टफोन ही ऐप इस्तेमाल कर पाएंगे।  इसका मतलब है कि एंड्रॉयड 5.0 और 5.1 वाले फोन यूज़र्स को सितंबर के बाद मैसेजिंग, कॉल्स या कोई नई सुविधा नहीं मिलेगी. कंपनी ने नए फीचर्स को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया है, क्योंकि पुराने सिस्टम पर नई चीजों को चलाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में प्रभावित यूज़र्स को ऐप के अंदर ही अलर्ट दिखने शुरू हो गए हैं. व्हाट्सएप सलाह दे रहा है कि वो अपना चैट हिस्ट्री बैकअप जरूर कर लें. बैकअप गूगल ड्राइव या फोन की मेमोरी में सेव किया जा सकता है, ताकि नया फोन लेने पर पुरानी बातों को भी आसानी से रिस्टोर किया जा सके।  भारत समेत कई देशों में पड़ेगा असर यह बदलाव भारत, ब्राजील, साउथ-ईस्ट एशिया और अफ्रीका जैसे इलाकों में ज्यादा असर डालेगा, जहां अभी भी बहुत से लोग पुराने स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल करते हैं. इन फोन्स को अक्सर सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं मिलते, इस कारण नई जरूरतों को पूरा करना उनके लिए संभव नहीं हो पाता. जो लोग व्हाट्सएप जारी रखना चाहते हैं, उन्हें एड्रॉयड 6.0 या उससे ऊपर वाले एंड्रॉयड फोन को खरीदना जरूरी होगा. यह नियम व्हाट्सएप मैसेंजर और व्हाट्सएप बिजनेस दोनों पर लागू होगा।  हालांकि, अगर आप पुराने आईओएस वर्ज़न वाला आईफोन यूज़ करते हैं, तो आपके ऊपर व्हाट्सएप के इस बदलाव का कोई असर नहीं होगा. iOS 15.1 या उसके बाद वाले वर्ज़न और iPadOS 15.1 या नए वाले डिवाइस पर व्हाट्सएप बिना किसी रुकावट चलता रहेगा. इसी बीच एक और अच्छी ख़बर आई है कि व्हाट्सएप एंड्रॉयड यूजर्स के लिए नोटिफिकेशन बबल्स फीचर लाने की तैयारी कर रहा है. फेसबुक मैसेंजर पर यह सुविधा पहले से उपलब्ध है, जहां चैट एक छोटे फ्लोटिंग बबल के रूप में दिखती है।  इससे यूज़र्स को दूसरे ऐप्स में काम करते हुए भी मैसेज पढ़ने में और रिप्लाई करने में आसानी होती है. अब इस फीचर को व्हाट्सएप पर भी लाया जा रहा है. हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सएप का बबल फीचर अभी बीटा टेस्टिंग में नहीं आया है, लेकिन जल्द ही उपलब्ध होने की उम्मीद है. इससे एंड्रॉयड फोन पर मल्टीटास्टिंग और ज्यादा आसान हो जाएगी।   

दिल्ली में अब बिना PUC सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा फ्यूल

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदुषण बड़ी समस्या बन चुकी है। सालों से इस समस्या पर काम किया जा रहा है, लेकिन अभी तक बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है। दरअसल, अब सरकार ने इसे लेकर एक सख्त कदम उठाया है। दरअसल, गाड़ियों से जुड़ा एक नया सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें दिल्ली के अंदर फ्यूल पंप केवल उन्हीं गाड़ियों को फ्यूल देंगे, जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट होगा जरूरी होगा। जिन गाड़ियों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें न केवल पेट्रोल, डीजल या CNG देने से मना कर दिया जाएगा, बल्कि उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। अब किसी भी तरह के फ्यूल के लिए वैध PUC सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इस नए कदम को प्रदूषण-रोधी एक स्थायी पहल बना दिया गया है। इसका मतलब है कि ये जांचे पूरे साल चलती रहेंगी। अगर आपका PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया है, तो इससे आपको देरी का सामना करना पड़ सकता है या फिर आपके इंश्योरेंस क्लेम को भी खारिज किया जा सकता है। कई इंश्योरेंस कंपनियां प्रदूषण उत्सर्जन के नियमों का पालन करने की उम्मीद करती हैं। इसके बिना क्लेम मिलने में देरी हो या फिर क्लेम को पूरी तरह से खारिज भी किया जा सकता है। परिवहन विभाग, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस जैसी एजेंसियां इन नियमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आपकी गाड़ी के पास वैलिड PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट नहीं है और आप उसे लेकर पास के पेट्रोल पंप पर जाते हैं, तो इसके नतीजे आम जुर्माने से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। 'सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989' के तहत, अधिकारी मौके पर ही चालान काट देंगे। यह काम या तो कोई ट्रैफिक पुलिस अधिकारी कर सकता है या फिर किसी ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए किया जा सकता है। जुर्माने की रकम 10,000 रुपए या उससे ज्यादा होने की उम्मीद है। ऐसे बनवाएं PUC सर्टिफिकेट PUC सर्टिफिकेट की मदद से ये पता चलता है कि आपकी गाड़ी कितना पॉल्युशन कर रही है। दिल्ली-NCR में आपके पास ये सर्टिफिकेट होना बहुत जरूरी है, क्योंकि पॉल्युशन को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक पुलिस उन गाड़ियों पर कड़ी निगरानी रखती है जो पॉल्युशन फैलाती हैं। PUC सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाता है जब PUC सेंटर पर चेकिंग के दौरान गाड़ी तय सीमा के दायरे में पाई जाए। अगर आपकी गाड़ी प्रदूषण करती है, तो गाड़ी की रिपेयरिंग या ट्यूनिंग कराने के लिए कहा जाता है। ट्रांसपोर्ट विभाग ने दिल्‍ली के कई पेट्रोल पंप और वर्कशॉप पर पॉल्युशन चेकिंग सेंटर की लिस्ट जारी की है। लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें। PUC सर्टिफिकेट को लेकर कानून एक समय के बाद कार का PUC सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य हो जाता है। यदि आपके पास PUC सर्टिफिकेट नहीं है, या फिर एक्सपायर हो चुका है तो मोटर वीइकल्‍स एक्ट, 1988 की धारा 190(2) के तहत चालान काटा जाता है। इसमें 10,000 रुपए का जुर्माना या 6 महीने की जेल या फिर दोनों हो सकते हैं। इतना ही नहीं, ट्रांसपोर्ट विभाग अपनी तरफ से PUC सर्टिफिकेट ना होने पर गाड़ी के ओनर का लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड भी कर सकता है। यदि PUC सर्टिफिकेट होने के बाद भी गाड़ी पॉल्युशन ज्यादा कर रही है, तब 7 दिन के अंदर नया PUC सर्टिफिकेट लेना होगा।