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हेपेटाइटिस-बी टेस्ट में क्रांति: ऑस्ट्रेलियाई खोज से लैब जैसी सटीक जांच संभव

आस्ट्रेलिया में दुनिया के पहले ट्रायल में पता चला है कि हेपेटाइटिस बी डीएनए के लिए एक सामान्य फिंगरस्टिक टेस्ट  स्टैंडर्ड लैब टेस्टिंग जितना ही सटीक है, जिससे दूरदराज और सीमित संसाधनों वाली जगहों के ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच का रास्ता खुल गया है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलाजी में प्रकाशित हुआ। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि यह प्वॉइंट ऑफ केयर टेस्ट एक घंटे के अंदर नतीजे दे सकता है और इसे विकेंद्रीकृत क्लीनिकों में भी किया जा सकता है। टेस्ट में देरी को करेगा कम आस्ट्रेलिया में न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के किर्बी इंस्टीट्यूट के एक बयान के अनुसार, फिंगरस्टिक टेस्ट प्रयोगशाला आधारित टेस्टिंग की वजह से होने वाली देरी को दूर करने में मदद कर सकता है। किर्बी इंस्टीट्यूट में अनुसंधान का नेतृत्व करने वाली प्रोफेसर गैल मैथ्यूज ने कहा, परिणामों ने पाया कि फिंगरस्टिक प्वाइंट आफ केयर परीक्षण अत्यधिक सटीक है, जो पारंपरिक परीक्षणों की सटीकता के करीब है। मैथ्यूज ने कहा कि यह खोज वैश्विक स्तर पर परीक्षण और उपचार की पहुंच को बढ़ाने की क्षमता रखती है, विशेष रूप क्लिनिक में फिंगर स्टिक ब्लड सैंपल का से जहां परीक्षण की पहुंच सीमित है । हर साल 10 लाख से ज्यादा मौतें हेपेटाइटिस बी एक वायरल संक्रमण है जो लिवर पर हमला करता है । ग्लोबल डाटा के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 25 करोड़ 40 लाख लोग इससे पीड़ित हैं और हर साल 10 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं। हालांकि वैक्सीन से इसे रोका जा सकता है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, क्रानिक हेपेटाइटिस बी से पीड़ित लोगों में से सिर्फ आठ प्रतिशत को ही इलाज मिल पाता है। अभी हेपेटाइटिस बी डीएन टेस्टिंग, निदान और निगरानी दोनों के लिए, एक केंद्रीय प्रयोगशाला में प्रोसेस करने के लिए वीनस ब्लड सैंपल इकट्ठा करने की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि टेस्ट के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है और फिर अक्सर रिजल्ट के लिए कई दिनों या हफ्तों तक इंतज़ार करना पड़ सकता है। यह देरी इलाज और देखभाल में रुकावट डाल सकती हैं। 60 मिनट के अंदर रिजल्ट   इसकी तुलना में नया प्वाइंट आफ केयर टेस्ट छोटे हेल्थ इस्तेमाल करके किया जा सकता है, जिसे ज्यादा हेल्थ केयर वर्कर कर सकते हैं और 60 मिनट के अंदर रिजल्ट मिल जाता है। यह कई संक्रामक रोगों जिसमें हेपेटाइटिस सी भी शामिल है, के लिए लैब टेस्ट का एक प्रभावी विकल्प है। नया परीक्षण डब्ल्यूएचओ के 2030 तक हेपेटाइटिस बी को स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वैश्विक प्रयासों का समर्थन कर सकता है।  

डुप्लीकेट फोटोज़ से परेशान? Google Photos का सीक्रेट ट्रिक बनाएगा फोन हल्का

नई दिल्ली  स्मार्टफोन में स्टोरेज भरने की समस्या बहुत आती है। ज्यादा स्टोरेज वाले फोन मंहगे आते हैं। इस कारण लोगों को कम स्टोरेज वाले फोन में ही किसी ऐसी ट्रिक की तलाश होती है, जो हैंडसेट के स्टोरेज को खाली रखे। अगर आप भी ऐसी ही कोई ट्रिक चाहते हैं तो आपके लिए यह आर्टिकल काफी उपयोगी साबित होने वाला है। नई फोटो क्लिक करने या ऐप्स डाउनलोड करने पर 'Storage Full' का नोटिफिकेशन किसी को भी परेशान कर देता है। अक्सर हमारे फोन में एक ही फोटो के कई वर्जन होते हैं। उदाहरण के लिए जैसी कई सारी सेल्फी या व्हाट्सऐप से डाउनलोड की गई डुप्लीकेट फाइलें। ये फोन में काफी स्पेस लेते हैं। इन्हें एक साथ डिलीट करके फोन के स्टोरेज को खाली किया जा सकता है। Google Photos का एक छिपा हुआ और बेहद स्मार्ट फीचर स्मार्टफोन यूजर्स को बिना किसी फोटो को सर्च किए तुरंत सैकड़ों MB या GB जगह खाली करने में मदद कर सकता है। यह फीचर आपके स्टोरेज को क्लीन करने का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है, जिससे आपका फोन फिर से सुपरफास्ट हो जाएगा। स्टोरेज खाली होने के फायदा     स्टोरेज खाली होने से आपके स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस बेहतर हो जाती है।     डुप्लिकेट, धुंधली और एक जैसी फोटो अपने आप हट जाती हैं।     आपकी फोटो लाइब्रेरी को ऑर्गनाइज करना और नेविगेट करना आसान हो जाता है। डिलीट करने से पहले जरूर कर लें ये काम     फोटोज डिलीट करने से पहले स्मार्टफोन पर Google Photos ऐप खोलें।     स्क्रीन के ऊपर राइट साइड में आ रही अपनी प्रोफाइल फोटो पर क्लिक करें।     इसके बाद फोटो सेटिंग्स पर क्लिक करें और फिर ‘बैक अप एंड सिंक’ पर क्लिक करें।     इससे क्लाउड पर आपकी फोटोज का बैकअप आ जाएगा।     पहले से बैकअप की गई फोटो और वीडियो देखने के लिए ‘स्पेस खाली करें’ पर क्लिक करें।     उन्हें अपने स्मार्टफोन से डिलीट करने के लिए ‘स्पेस खाली करें’ पर क्लिक करें सजेस्ट डिटेक्शन टूल का इस्तेमाल करें     ‘लाइब्रेरी’ टैब पर जाएं और ‘यूटिलिटीज’ एरिया में जाएं।     यहां धुंधली, मिलती-जुलती या पुरानी इमेज को पहचानने और मार्क करने के लिए ‘Suggest Deletion’ को सिलेक्ट करें।     सुझावों को देखें और उन्हें एक-एक करके, एक साथ डिलीट करें, या आर्काइव में ले जाएं। बड़े वीडियो आर्काइव करें     Google Photos ऐप से एक बड़ा वीडियो ढूंढें और सिलेक्ट करें।     वीडियो को दबाकर रखें और ‘मूव टू आर्काइव’ चुनें।     अपने फोन पर काफी जगह खाली करने के लिए इन वीडियो को क्लाउड में सेव करें।

पीरियड्स के दर्द से राहत के लिए गर्भासन है असरदार, जानिए फायदे

 पीरियड्स शुरू होते ही कई महिलाओं को तेज दर्द, ऐंठन और पेट में सूजन की शिकायत होती है, जो बेहद कष्टदायक होता है। ऐसे में हर बार पेन किलर का सहारा लेना जरूरी नहीं। योग के माध्यम से इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है। इसी क्रम में गर्भासन एक बहुत प्रभावी योग मुद्रा है। गर्भासन के रोजाना अभ्यास से पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियां कम होती हैं, गर्भाशय स्वस्थ रहता है और मासिक चक्र भी नियमित बनता है। यह आसन तनाव दूर कर शरीर-मन को संतुलित रखने में भी मदद करता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ने महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गर्भासन को बहुत फायदेमंद बताया है। यह योगासन खासतौर पर स्वस्थ गर्भाशय बनाए रखने और पीरियड्स के दर्द में राहत के साथ ही उसे नियमित करने में मदद करता है। रोजाना कुछ मिनट इस आसन का अभ्यास करने से शरीर और मन दोनों को शांति मिलती है। गर्भासन का नाम 'गर्भ' यानी भ्रूण और 'आसन' यानी मुद्रा से मिलकर बना है। इस आसन में शरीर की स्थिति भ्रूण जैसी हो जाती है, इसलिए इसे गर्भासन कहते हैं। नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता काफी कम होती है, मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। महिलाओं के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और पीरियड्स से जुड़ी कई समस्याओं में राहत देता है। इस आसन को सही तरीके से करने के लिए पहले कुछ तैयारी जरूरी है। एक्सपर्ट के अनुसार, गर्भासन शुरू करने से कुछ दिन पहले कुक्कटासन का अभ्यास करें। कुक्कटासन में शरीर का संतुलन अच्छा होने पर ही गर्भासन को आजमाएं। सबसे पहले पद्मासन में बैठें, हाथों को जांघों-पिंडलियों के बीच फंसाकर कोहनियां बाहर निकालें। कोहनियां मोड़कर दोनों कान पकड़ने की कोशिश करें। भार कूल्हों पर रहे। क्षमता अनुसार 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में वापस आएं। एक्सपर्ट के अनुसार, नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ती है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। हालांकि, कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। गर्भासन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा होता है। कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो, जैसे गर्दन, कंधे या कमर में दर्द, तो सलाह लेकर ही करें।

मौसम का असर: वायरल बुखार फैलने की बड़ी वजह

बदलता मौसम अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है। यह सब जानते हुए भी हम असावधान रहते हैं और वायरल बुखार की चपेट में आ जाते हैं। प्रायः बुखार वायरल की शुरुआत खांसी, जुकाम और बुखार से होती है। विशेषकर सर्दियां प्रारंभ होते ही मौसम की शुष्कता वायरल बुखार की जिम्मेदार होती है। इस दौरान नाक, कान, गले की एलर्जी सांस लेते समय छाती में परेशानी, आवाज बैठना, खांसी, जुकाम का होना आम बात है। कौन कौन से होते हैं वायरल इंफेक्शन:- -हैजा भी वायरल इंफेक्शन है। यह किसी भी मौसम में हो सकता है। -डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, पीलिया, हेपेटाइटिस, डायरिया आदि वायरस से फैलते हैं। ये भी साल में कभी भी हो सकते हैं। -जुकाम-खांसी आदि साधारण वायरल इंफेक्शन हैं। जुकाम में नाक बंद रहती है, छींके आती हैं, गला खराब रहता है, खांसी होती है। ये अधिकतर सर्दियों में फैलते हैं। -शरीर में दर्द और बुखार भी वायरल इंफेक्शन से होता है। -बच्चों में डायरिया का मुख्य कारण भी वायरल इंफेक्शन होता है। कैसे फैलता है वायरल -वातावरण में फैला प्रदूषण वायरल इंफेक्शन को फैलाने में मदद करता है। उसी प्रदूषित वातावरण में हम सांस लेते हैं जिसमें हजारों वायरस होते हैं। -भीड़भाड़ वाले स्थान में जाने से वायरल संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। -एयर कंडीशंड रूम में हम ताजी हवा का सुख नहीं ले पाते। अगर कोई खांसता है तो उसका वायरस वहीं रहता है जिससे अन्य कमजोर लोग उसकी चपेट में आ जाते हैं। -आस-पास की गंदगी भी वायरस फैलाने में मददगार होती है। कोई भी काम करने के बाद हाथों का न धोना, नाखूनों का गंदा होना, गंदे बर्तनों में खाना पकाना या खाना, सब्जियों और फलों को बिना धुले खाना आदि से भी संक्रमण हो सकता है। वायरल हो जाए तो क्या करें -नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें। -ज्यादा खट्टे फलों का सेवन न करें। -पानी अधिक लें। विटामिन सी वाली चीजें लें। -पौष्टिक और संतुलित आहार लें। -गर्म सब्जियों का सूप, खिचड़ी, दलिया और रसदार सब्जियों का भरपूर सेवन करें। -अदरक व शहद वाली चाय लें। -च्यवनप्राश का सेवन करें। -शहद व गुड़ का प्रयोग करें। -तुलसी पत्र को प्रातःखाली पेट पानी के साथ निगल लें। -गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी रात्रि में सोने से पहले ले सकते हैं। लाभ मिलेगा। ताकि स्वयं को बचा सकें वायरल की चपेट से -मौसम के अनुसार पूरे वस्त्र पहनें। -खाली पेट बाहर न निकलें। खाली पेट रहने से शरीर में कमजोरी आती है और संक्रमण का प्रभाव जल्दी होता है। -खांसी और जुकाम होने पर रूमाल का प्रयोग करें। अगर आसपास कोई खांस रहा है तो आप रूमाल अपने मुंह पर रख लें। -खाना मौसम के अनुसार लें। अगर बाहर खाएं तो सफाई का पूरा ध्यान रखें। -ठंडे खाद्य पदार्थों से परहेज रखें। -बदलते मौसम में फ्रिज का पानी न पिएं। -डब्ल्यू एच ओ साल में दो बार एंटी-फ्लू वैक्सीन निकालता है, सितंबर और मार्च में। 6 महीने तक के छोटे बच्चों को साल में दो बार टीका लगवाएं। छः माह से बड़े बच्चों और बुजुर्गों को भी यह टीका लगवाया जा सकता है।  

रसोई की पीली हल्दी से अलग है ‘नीली हल्दी’—औषधीय गुणों का अनोखा खजाना

हल्दी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में गहरा पीला रंग आता है। हम सभी जानते हैं कि पीली हल्दी हमारी रसोई की शान है, क्योंकि यह सेहत और स्किन दोनों के लिए काफी फायदेमंद होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की मिट्टी में एक ऐसी दुर्लभ हल्दी भी उगती है जो पीली नहीं, बल्कि अंदर से नीले रंग की होती है? जी हां, इसे 'नीला सोना' भी कहा जा सकता है क्योंकि यह सामान्य मसाले से कहीं बढ़कर, एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है। आइए, शारदा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से जानते हैं इसके बारे में। क्या है नीली हल्दी? यह एक बहुत ही दुर्लभ पौधा है जिसे विज्ञान की भाषा में करकुमा कैसिया (Curcuma Caesia) कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग इसे 'काली हल्दी' के नाम से भी जानते हैं। यह सामान्य हल्दी से बिल्कुल अलग दिखती है। जब आप इसकी जड़ को तोड़ते हैं, तो यह अंदर से चमकदार पीली नहीं, बल्कि गहरे नीले या नीले-काले रंग की निकलती है। यह मुख्य रूप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ चुनिंदा इलाकों में ही पाई जाती है। क्यों है यह इतनी खास? हम जो पीली हल्दी खाते हैं, उसमें 'करक्यूमिन' होता है, जो उसे पीला रंग और स्वाद देता है, लेकिन नीली हल्दी का मामला थोड़ा अलग है। इसमें करक्यूमिन बहुत कम होता है, लेकिन इसमें कपूर और कई तरह के 'एशेंशियल ऑयल्स' भरपूर मात्रा में होते हैं। इसका स्वाद कड़वा होता है और इसमें कपूर जैसी तेज महक आती है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल खाना पकाने में नहीं, बल्कि आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में दवा के तौर पर किया जाता है। नीली हल्दी के अद्भुत फायदे नीली हल्दी को इसके औषधीय गुणों के कारण 'सुपरचार्ज्ड' माना जाता है। सही मात्रा में इस्तेमाल करने पर इसके कई फायदे हैं:     जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकड़न या किसी चोट के दर्द में यह बहुत राहत देती है। यह सूजन को कम करने में भी कारगर मानी जाती है।     इसमें रोगाणुओं से लड़ने की ताकत होती है, जो इन्फेक्शन को दूर रखने और घावों को भरने में मदद करती है।     पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल खांसी, अस्थमा और छाती में जकड़न जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह पाचन को भी सुधारती है और पेट की गैस को कम करती है। साथ ही, त्वचा की खुजली, रशेज और छोटे-मोटे घावों पर इसका लेप बहुत फायदेमंद होता है। सावधानी भी है जरूरी चूंकि, नीली हल्दी में बहुत शक्तिशाली तत्व होते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत संभलकर करना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इसे हमेशा कम मात्रा में ही यूज करें। गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में लेने पर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।  

2nm चिप का कमाल: अश्विनी वैष्णव की यह कामयाबी भारत को सेमीकंडक्टर महाशक्ति बना पाएगी?

नई दिल्ली द‍िग्‍गज कंपनी क्‍वॉलकॉम ने अपने भारतीय केंद्रों में 2nm च‍िप के ड‍िजाइन को व‍िकसि‍त क‍िया है। केंद्रीय मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने इस कामयाबी को देखा। यह उपलब्‍ध‍ि भारत को सेमीकंडक्‍टर के क्षेत्र में बहुत आगे ले जा सकती है। 2nm बेहद एडवांस्‍ड च‍िप है, ज‍िस एआई से लेकर गैजेट्स तक में इस्‍तेमाल क‍िया जाएगा। केंद्रीय मंत्री अश्‍विनी वैष्‍णव की दो उंगलियों के बीच आपको एक छोटी सी चीज दिख रही होगी। यह 2nm (नैनोमीटर) चिप है। इस चिप को बड़ी अमेरिकी कंपनी क्‍वॉलकॉम ने अपने बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित इंजीनियरिंग केंद्रों में विकसित किया है, जो भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी है। शनिवार को कंपनी ने इस चिप के डिजाइन के सफल टेप-आउट (डिजाइन के अंति‍म चरण) का ऐलान क‍िया। क्‍या 2nm चिप भारत की तकदीर को बदल सकती है? इसका जवाब है हां, क्‍योंकि यह सबसे एडवांस्‍ड चिप है जिसे आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस से लेकर हमारे गैजेट्स तक में इस्‍तेमाल करने की तैयारी है। क्‍यों खास है 2nm (नैनोमीटर) चिप? 2nm (नैनोमीटर) चिप को नेक्‍स्‍ट-जेनरेशन सेमीकंडक्‍टर टेक्‍नोलॉजी कहा जाता है। इसकी ट्रांजिस्‍टर डे‍ंसिटी बहुत अधिक है। इस चिप का बड़े पैमाने पर उत्‍पादन इस साल शुरू होने की उम्‍मीद है। दावा है कि इस चिप का इस्‍तेमाल शुरू होने के बाद किसी भी गैजेट या अन्‍य इस्‍तेमाल वाली चीज में ऊर्जा की खपत 45 फीसदी कम हो जाएगी। दावा है कि यह मौजूदा 3nm और 5nm चिपसेट से बेहतर परफॉर्मेंस देगी। इस चिप को आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस सर्वरों, स्‍मार्टफोन्‍स, IoT यानी इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स में इस्‍तेमाल किया जा सकता है। स्‍मार्टफोन्‍स की बात करें तो सबसे पहले यह चिप प्रीमियम स्‍मार्टफोन्‍स में देखने को मिल सकती है। इनमें iphone 18 सीरीज और Google की अपकमिंग पिक्‍सल स्‍मार्टफोन सीरीज का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। Samsung S26 सीरीज में भी आ सकती है चिप कहा जाता है कि 2nm चिप तकनीक को सैमसंग की अपकमिंग गैलेक्‍सी एस26 सीरीज के स्‍मार्टफोन्‍स में लाया जा सकता है। ऐसी अफवाहें हैं कि Exynos 2600 प्रोसेसर में 2एनएम प्रोसेस का इस्‍तेमाल किया गया है। इसके अलावा, एआई सर्वरों, डेटा सेंटरों और उन एआई ऐप्‍ल‍िकेशंस के लिए भी यह चिप कारगर होने वाली है, जो बहुत ज्‍यादा बिजली इस्‍तेमाल करते हैं। क्‍या सिर्फ क्‍वाॅलकॉम ये चिप बना रही या अन्‍य कंपनियां भी? 2nm (नैनोमीटर) चिप पर काम करने वाली क्‍वॉलकॉम अकेली नहीं है। TSMC (N2 process), सैमसंग, इंटेल, आईबीएम जैसी कंपनियां इसे तैयार कर रही हैं। भारत के लिए यह उपलब्‍ध‍ि अहम क्‍यों? क्‍वॉलकॉम का बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित इंजीनियरिंग केंद्रों में 2nm चिप को विकस‍ित करना भारत के लिए बड़ी उपलब्‍ध‍ि है। कंपनी ने खुद कहा है कि अमेरिका के बाहर यह उसका सबसे बड़ा इंजीनियर‍िंग टैलंट पूल है। केंद्रीय मंत्री अश्‍विनी वैष्‍णव के अनुसार, इस तरह की उपलब्‍ध‍ियां यह बताती हैं कि भारत का डिजाइन इकोसिस्‍टम कितना आगे निकल गया है। दुनिया में सेमीकंडक्‍टर को लेकर जो मुकाबला चल रहा है, उसमें हमारी तैयारी भी काफी मजबूत है। खबर में जिस टेप-आउट का जिक्र हमने शुरू में किया था, उसका मतलब होता है चिप डिजाइनिंग की फाइनल स्‍टेज। कैसे बदल सकती है भारत की तकदीर? भारत मैन्‍युफैक्‍चरिंग का दुनिया में बड़ा हब बनता जा रहा है। इस कामयाबी के बाद वह प्रोडक्‍ट डिजाइनिंग का भी बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में सेमीकंडक्‍टर का क्षेत्र आने वाले समय में काफी अहम होने वाला है। अगर भारत सेमीकंडक्‍टर के विकास में आगे निकलता है तो वह अमेरिका और चीन के समकक्ष खड़ा होकर दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकता है। इससे भारतीय टैलंट की साख और मजबूत होगी।

iPhone का सबसे सस्ता मॉडल लॉन्च को तैयार, इन 4 बड़े बदलावों के साथ जानें कब और कितनी होगी कीमत

नई दिल्ली ऐपल लवर्स के लिए खुशखबरी है कि इस महीने ऐपल अपना iPhone 17 लॉन्च कर सकती है। पिछले साल फरवरी 2025 में ही ऐपल ने iPhone SE को बंद कर iPhone 16e पेश किया था। रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐपल 19 फरवरी को नया iPhone 17e लॉन्च कर सकती है। यह मॉडल ऐपल की लेटेस्ट सीरीज का सबसे सस्ता iPhone होगा। ऐसी खबरें हैं कि इस iPhone में पिछली बार के मुकाबले 4 बड़े अपग्रेड्स देखने को मिल सकते हैं। क्या बदलेगा iPhone 17e में? iPhone 17e के लुक्स में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। यह दिखने में काफी हद तक iPhone 16e की तरह होगा। हालांकि इस बार ऐपल iPhone 17e में नॉच की जगह डायनामिक आइलैंड दे सकता है। हालांकि खबरें ऐसी भी आ रही हैं कि शायद ऐपल डायनामिक आइलैंड इसके अगले मॉडल में लेकर आए। ऐसे में देखना होगा कि ऐपल डायनामिक आइलैंड के साथ क्या फैसला लेता है। iPhone 17e में A19 चिपसेट दिया जाएगा, जो कि इसके पिछले मॉडल के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज और एफीशिएंट बनाएगा। इसके अलावा iPhone 17e में N1 चिप भी होगी, जो Wi-Fi 7 और ब्लूटूथ 6 जैसे एडवांस फीचर्स को सपोर्ट देगी। iPhone 17e की कनेक्टिविटी में भी होंगे सुधार iPhone 17e में ऐपल अपना नया C1X मॉडम दे सकता है। ऐपल का दावा है कि यह दूसरी पीढ़ी का मॉडम पहले के मुकाबले दोगुना तेज है और अब तक का सबसे ज्यादा पावर-एफिशिएंट मॉडम है। इसका मतलब है कि आपको सुपरफास्ट 5G स्पीड के साथ बेहतर बैटरी लाइफ भी मिलेगी। इस फोन में बाकी मॉडल्स की तरह MagSafe सपोर्ट मिल सकता है। बता दें कि ऐपल ने iPhone 16e में सिर्फ 7.5W की स्लो वायरलेस चार्जिंग ही दी थी। वहीं iPhone 17e में 20W-25W की मैग्नेटिक वायरलेस चार्जिंग मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यूजर्स सस्ते iPhone के साथ भी मैग्नेटिक वॉलेट या बैटरी पैक जैसी एक्सेसरीज का इस्तेमाल कर पाएंगे। क्या रहेगी कीमत और कितने मिलेंगे कैमरे? iPhone 17e के कैमरा की बात करें, तो इसमें पीछे की तरफ सिंगल 48-मेगापिक्सल का कैमरा मिलने की उम्मीद है।वहीं कीमत को लेकर ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि iPhone 16e की तरह ही iPhone 17e की शुरुआत 599 डॉलर से हो सकती है। iPad 12 भी हो सकता है पेश रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐपल iPad 12 पर भी काम कर रहा है। उम्मीद है कि iPhone 17e के साथ ऐपल इसे भी लॉन्च कर दे। इसका डिजाइन iPad 11 जैसा ही होगा। हालांकि चिप A18 और रैम 8 GB तक बढ़ सकती है। इसके अलावा इसमें ऐपल इंटेलिजेंस का सपोर्ट भी मिलेगा। आईपैड की कीमतों को लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।

ASUS ने पेश किए नए लैपटॉप्स, AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ के साथ शानदार परफॉर्मेंस

नई दिल्ली ASUS ने अपने लेटेस्ट लैपटॉप की प्रीबुकिंग शुरू कर दी है. ये लैपटॉप्स कंपनी की Zenbook और Vivobook सीरीज का हिस्सा हैं, जो AMD Ryzen AI प्रोसेसर के साथ आते हैं. कंपनी के पोर्टफोलियो में कई लैपटॉप शामिल हैं, जिन्हें आप प्रीबुक कर सकते हैं. जल्द ही इनकी सेल भी शुरू होगी.  इन लैपटॉप्स की कीमत और फीचर्स का खुलास कंपनी ने कर दिया है. ब्रांड का कहना है कि इन प्रोडक्ट्स को AI असिस्ट प्रोडक्टिविटी, मल्टीटास्किंग, क्रिएटिव वर्कलोड और रोजमर्रा की कम्प्यूटिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. आइए जानते हैं इनकी खास बातें.  क्या हैं फीचर्स? ASUS Zenbook S16 में AMD Ryzen AI 9 465 प्रोसेसर दिया गया है. ये लैपटॉप Copilot+ PC कैपेबिलिटी और ASUS AI ऐप्लिकेशन्स के साथ आता है. इसका वजन 1.5 किलोग्राम है और ये लैपटॉप ऑल-मेटल चैसी के साथ आता है. इसमें 16-inch का OLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. कंपनी की मानें तो डिवाइस 23 घंटे की बैटरी लाइफ के साथ आता है.  Zenbook 14 को कंपनी ने AMD Ryzen AI 5 430 प्रोसेसर के साथ लॉन्च किया है. इसमें 14-inch का FHD+ OLED टच स्क्रीन डिस्प्ले मिलता है. ब्रांड का कहना है कि ये लैपटॉप सिंगल चार्ज में 25 घंटे तक की बैटरी लाइफ ऑफर करता है.  इसके अलावा Vivobook S16 को कंपनी ने इंट्रोड्यूस किया है, जो AMD Ryzen AI 400 प्रोसेसर के साथ आता है. इसमें Copilot+ PC फीचर मिलता है. डिवाइस FHD+ OLED डिस्प्ले के साथ आता है. ये मशीन सिंगल चार्ज में 23 घंटे तक चल सकती है.  इनके अलावा कंपनी ने Vivobook 16, Vivobook 15 और दूसरे मॉडल्स को लॉन्च किया है. सभी में कंपनी ने AMD Ryzen प्रोसेसर दिया है, जो अगल-अगल कैपेबिलिटी के साथ आते हैं. इनमें कंपनी ने SSD स्टोरेज दिया है.  कितनी है कीमत?  इन सभी मॉडल्स को 12 फरवरी से खरीदा जा सकेगा. हालांकि, ASUS Vivobook 16 मार्च में उपलब्ध होगा. Zenbook S16 की कीमत 1,69,990 रुपये है. वहीं Zenbook 14 की कीमत 1,15,990 रुपये है. Vivobook S16 की कीमत 1,04,990 रुपये से शुरू है.  Vivobook 16 को कंपनी ने 87,990 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. वहीं Vivobook 15 की कीमत 62,990 रुपये से शुरू होती है. ASUS Vivobook 16 (M1605NAQ) की कीमत 65,990 रुपये से शुरू होती है. प्रीऑर्डर पर 5,599 रुपये का फायदा सिर्फ 1 रुपये में मिलेगा. ये ऑफर जेनबुक मॉडल्स पर है.

पीरियड्स के दौरान दर्द और थकान से परेशान? जानें फिट रहने के आसान तरीके

 पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान या चिड़चिड़ापन महसूस होना बहुत आम बात है और हर लड़की या महिला कभी न कभी इससे गुजरती है। पेट के निचले हिस्से में ऐंठन, कमर दर्द, सिर दर्द, उलझन या बिना किसी खास वजह के मूड खराब होना हार्मोनल बदलावों की वजह से होता है। इस समय शरीर थोड़ा कमजोर भी महसूस करता है, इसलिए खुद को समझना और सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। सबसे पहले खाने-पीने पर ध्यान देना चाहिए। पीरियड्स के दिनों में हल्का, पोषण से भरपूर खाना जैसे हरी सब्जियां, फल, दालें और आयरन से भरपूर चीजें शरीर को ताकत देती हैं। खूब पानी पीना भी बहुत जरूरी है, इससे पेट की सूजन और थकान कम होती है। ज्यादा नमक, जंक फूड, चाय-कॉफी और कोल्ड ड्रिंक से दूरी बनाकर रखना बेहतर रहता है क्योंकि ये दर्द और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही आराम और हल्की-फुल्की गतिविधि का संतुलन भी जरूरी है। बहुत ज्यादा बिस्तर पर पड़े रहना भी शरीर को सुस्त बना देता है, इसलिए हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या योग करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है। हालांकि, भारी एक्सरसाइज या ज्यादा थकाने वाला काम करने से बचना चाहिए। अगर मन करता है तो गुनगुने पानी से नहाना या पेट पर गर्म पानी की थैली रखना भी काफी आराम देता है। नींद पूरी लेना भी जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी से मूड स्विंग्स और थकान बढ़ सकती है। पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। समय-समय पर सैनिटरी पैड या साफ कपड़ा बदलना चाहिए, आमतौर पर हर 6 घंटे में। इस्तेमाल किए गए पैड को ठीक से लपेटकर फेंकें और अंडरगारमेंट्स रोज बदलें। अंडरगारमेंट्स को अच्छे से धोकर धूप में सुखाना चाहिए ताकि कीटाणु न पनपें। इस दौरान गंदे या नम कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। हाथों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें और बार-बार हाथ धोते रहें। मानसिक सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना शारीरिक सेहत का। पीरियड्स के समय भावनाएं जल्दी आहत हो सकती हैं, गुस्सा या उदासी बिना वजह महसूस हो सकती है। ऐसे में खुद पर ज्यादा सख्त न हों। मनपसंद काम करें, हल्का संगीत सुनें, किताब पढ़ें या किसी अपने से बात करें। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो या पीरियड्स बहुत अनियमित हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Google का अलर्ट: 40% स्मार्टफोन में बढ़ा खतरा, अपनी सेफ्टी के लिए ये कदम उठाएं

 नई दिल्ली अमेरिकी कंपनी गूगल ने एक बड़ी वॉर्निंग दी है और बताया है कि करीब आधे एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स पर मैलवेयर और स्पाईवेयर के खतरे में है. ये खतरा पुराने Android OS वर्जन होने की वजह से है.  ये जानकारी फॉर्ब्स ने दी है. रिपोर्ट में बताया है कि इस खतरे की वजह पुराना एंड्रॉयड ओएस वर्जन है. जो एंड्रॉयड 13 या उससे भी पुराने ओएस पर काम करते हैं. पुराने Android OS को अब सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिलता है, जिसकी वजह से उनपर सबसे ज्यादा खतरा है. ऐसे स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या दुनियाभर में 1 अरब से ज्यादा है.  Android 16 इतने यूजर्स के फोन में  दुनियाभर में Android 16 अभी सिर्फ 7.5% डिवाइस में ही मौजूद है, जो दिसंबर तक का डेटा है. Android 15 पर 19.3 परसेंट फोन काम करते हैं. Android 14 पर 17.9 परसेंट स्मार्टफोन काम करते हैं और Android 13 पर 13.9 परसेंट स्मार्टफोन काम करते हैं. सिर्फ इतने परसेंट लोग सिक्योरिटी अपडेट के तहत आते हैं रिपोर्ट्स में बताया है कि 58 परसेंट स्मार्टफोन ऐसे हैं, जो सिक्योरिटी सपोर्ट के अंदर आते हैं, जबकि 40 परसेंट स्मार्टफोन के लिए सिक्योरिटी अपडेट अवेलेबल नहीं है.  पुराना स्मार्टफोन चलाने वाले यूजर्स को सलाह  स्मार्टफोन यूजर्स को सलाह दी गई है कि जिनके मोबाइल पुराने OS पर काम करते हैं, उनको लेटेस्ट एंड्रॉयड ओएस के साथ अपडेट कर लेना चाहिए. साथ ही सिक्योरिटी सपोर्ट को रेगुलर अपडेट करते रहना चाहिए. iPhone को मिलते हैं सिक्योरिटी अपडेट  पुराने iPhone को समय रहते अपडेट मिल जाते हैं और कई पुराने एंड्रॉयड स्मार्टफोन में जरूरी सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिल पाते हैं. अगर कंपनी की तरफ से सपोर्ट बंद किया जा चुका है तो नया स्मार्टफोन खरीद लेना चाहिए.   कंपनियां 4-5 साल के लिए देती हैं सिक्योरिटी अपडेट  स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर की तरफ से अपने हैंडसेट के लिए एक फिक्स टाइम तक सिक्योरिटी अपडेट दिया जाता है. आमतौर पर कंपनियां इसे 4 साल या 5 साल के लिए देती हैं. अब Samsung और गूगल पिक्सल हैंडसेट में 7 साल से ज्यादा के लिए सिक्योरिटी अपडेट देने का ऐलान किया है.  सिक्योरिटी अपडेट क्या होता है? स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर की तरफ से हैंडसेट की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी अपडेट जारी किए जाते हैं. यह अपडेट बग्स और उन खामियों को दूर करने का काम करता है, जो कई बार गलती से पुराने OS में आ जाती हैं. इन कमजोरियों और बग्स का फायदा उठाकर हैकर्स डिवाइस तक एक्सेस कर सकते हैं और डेटा चोरी कर सकते हैं. कई बार स्मार्टफोन को हैक तक किया जा सकता है.     एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले स्मार्टफोन की संख्या दुनियाभर में बहुत ज्यादा है. वहीं iPhone के iOS का यूज सिर्फ ऐपल के स्मार्टफोन को ही मिलता है और उनकी संख्या भी बहुत कम है. Android OS के साथ मिलकर सैमसंग, रियलमी, रेडमी, ओप्पो, वनप्लस जैसे स्मार्टफोन तैयार करते हैं और उनको ग्लोबल मार्केट में सेल करते हैं.