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AC का Auto Clean फीचर क्या है और यह कैसे काम करता है?

अगर आप इस फीचर की वजह से AC खरीद रहे हैं या इसे AC सर्विस का विकल्प समझ रहे हैं, तो जरूरी है कि आप जान लें कि Auto Clean फीचर कैसे काम करता है और कितनी ताकत रखता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि यह फीचर पूरी तरह बेकार है, लेकिन यह AC सर्विस की जगह नहीं ले सकता। असल में यह फीचर AC में से आने वाली बदबू या बैक्टीरिया आदि को दूर करने में काफी हद तक सक्षम होता है लेकिन इसके चलते सर्विस को नजरअंदाज करना बड़ी भूल हो सकती है। कैसे काम करता है Auto Clean फीचर? Auto Clean फीचर असल में AC को साफ करने की जगह अंदर से सुखाता है। इसे आप ड्राइंग प्रोसेस समझ सकते हैं। दरअसल AC को इस्तेमाल करने के बाद उसमें नमी और पानी रह जाता है। यह नमी बैक्टीरिया या फंगस के पनपने का कारण बन सकती है, जिसकी वजह से AC से बदबू भी आती है। इस समस्या को दूर Auto Clean फीचर करता है। इसमें AC का कंप्रेसर काम नहीं करता और सिर्फ ब्लोअर फैन चालू रहता है। यह पंखा अंदर की कॉइल्स पर तेज हवा फेंकता है, जिससे वहां जमा सारी नमी पूरी तरह सूख जाती है। इससे AC में से किसी तरह की बदबू नहीं आती। Auto Clean Feature की सीमाएं क्या हैं? Auto Clean फीचर आपके AC को चकाचक साफ नहीं कर सकता। यह आपके AC से बदबू हटा सकता है लेकिन:     यह फीचर नमी को दूर कर सकता है, लेकिन धूल, मिट्टी और गंदगी की मोटी परत साफ नहीं कर सकता।     यह AC के फिल्टर को भी साफ नहीं कर सकता। इन्हें आपको हर 15 दिन में खुद साफ करना चाहिए।     इस फीचर से आउटडोर यूनिट क्लीन नहीं होती। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सिर्फ इंडोर यूनिट के अंदर ही चलता है।     इसके अलावा ड्रेन पाइप में फंसी गंदगी को भी यह फीचर नहीं साफ करता। Auto Clean फीचर के रहते सर्विस करवानी चाहिए? इसका सीधा और स्पष्ट जवाह है हां, क्योंकि Auto Clean फीचर AC में मौजूद नमी को सुखाने से ज्यादा कुछ भी नहीं कर सकता। AC में लगे फिल्टर से लेकर कंडेंसर तक में जमा होेने वाली गंदगी सिर्फ AC सर्विस के बाद ही साफ हो सकती है। दरअसल Auto Clean फीचर का नाम कुछ ऐसा है कि लोग इसे AC की सफाई से जोड़कर देख सकते हैं। हालांकि अगर आप इस फीचर के चक्कर में AC सर्विस को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो इससे आपका बिजली बिल तो बढ़ ही सकता है लेकिन साथ ही AC में आग लगने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं। यही वजह है कि Auto Clean फीचर को सिर्फ AC से आने वाली बदबू को रोकने लायक ही मानना चाहिए।

इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा vs इंडक्शन: कौन है ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन?

 शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने नई टेक्नोलॉजी वाले इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हे की जानकारी X पर पोस्ट की। इस अनोखे चूल्हे के बारे में बताया गया कि यह बिना LPG या PNG कनेक्शन के बिजली से आग की लपटें पैदा कर सकता है। हालांकि इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा, इंडक्शन चूल्हे से बेहतर है? दरअसल वीडियो में बिजली से आग की लपटें पैदा करने वाली यह टेक्नोलॉजी किसी जादू से कम नहीं लगती लेकिन असल सवाल यही है कि यह तकनीक कितनी प्रैक्टिकल है? क्या यह LPG-PNG के बाद रसोई में इस्तेमाल होने के लायक है? गौर करने वाली बात है कि इंडक्शन के मुकाबले 10 गुना ज्यादा कीमत और बिजली के ज्यादा इस्तेमाल के चलते यह आपके बिल को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है। इसके अलावा जहां इंडक्शन चूल्हे एफिशिएंसी 90% तक होती है, वहीं प्लाज्मा चूल्हा अपनी ज्यादातर ऊर्जा रोशनी और शोर में बर्बाद कर देता है। ऐसे में नई टेक्नोलॉजी को लेकर ज्यादा उम्मीदें लगाने से पहले दोनों के फर्क को समझ लेना जरूर हो जाता है। इंडक्शन और प्लाज्मा चूल्हे की कीमत में फर्क इंडक्शन और प्लाज्मा चूल्हे में सबसे बड़ा फर्क कीमत को लेकर दिखता है। भारत में जहां एक अच्छा इंडक्शन चूल्हा 2500 से 4500 रुपये में खरीदा जा सकता है। वहीं नई तकनीक होने की वजह से प्लाज्मा चूल्हे की कीमत 35000-45000 रुपये तक जाती है। वहीं अगर किसी खास मॉडल को आप चीन या वियतनाम जैसे दूसरे देश से इंपोर्ट कर रहे हैं, तो प्लाज्मा चूल्हे की कीमत 60,000 रुपये तक भी पहुंच सकती है। इसके बाद इस चूल्हे की मेंटेनेंस भी इंडक्शन चूल्हे से कई गुना ज्यादा पड़ती है। इस वजह से LPG-PNG के बाद इंडक्शन चूल्हा ज्यादा प्रैक्टिकल ऑप्शन नजर आता है।(REF.) टेक्नोलॉजी और बिजली की खपत में फर्क अब भले इंडक्शन और इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हा बिजली पर काम करते हैं लेकिन अलग-अलग टेक्नोलॉजी की वजह से इनकी बिजली की खपत और खर्च अलग-अलग पड़ता है। प्लाज्मा चूल्हा हवा को आयोनाइज करके प्लाज्मा फ्लेम बनाता है। इससे आग तो पैदा होती है, लेकिन ऊर्जा का बड़ा हिस्सा रौशनी और आवाज के रूप में बर्बाद होता है। साथ ही इसकी बर्तन में हीट ट्रांसफर करने की ताकत भी एक साधारण LPG या इंडक्शन चूल्हे के मुकाबले काफी कम होती है। वहीं इंडक्शन चूल्हा मैग्नेटिक फील्ड से सीधा बर्तन को गर्म करता है। इसमें ऊर्जा की बर्बादी न के बराबर होती है। आसान भाषा में समझाएं, अगर आप इंडक्शन और इल्केट्रिक प्लाज्मा चूल्हे पर 1 घंटा खाना पकाएं, तो प्लाज्मा बिजली की ज्यादा खपत करते हुए महीने भर में 60-100 यूनिट तक बिजली खा सकता है। वहीं इंडक्शन इससे आधे से भी कम में खाना पका देगा। भारतीय रसोई के लिए कौन प्रैक्टिकल अब बात अगर भारतीय रसोई की करें, जहां ज्यादा आंच पर सब्जी, रोटी-पराठें पकाए जाते हैं। वहां इंडक्शन चूल्हा ज्यादा प्रैक्टिकल साबित होता है। दरअसल प्लाज्मा चूल्हे की खासियत है कि उसके लिए किसी खास बर्तन की जरूरत नहीं होती लेकिन प्लाजमा चूल्हे की आंच इतनी स्थिर नहीं होती कि भारतीय पकवान अच्छे से पकाए जा सकें।  

झुर्रियों से बचाव के लिए खाएं ये 5 सुपरफूड्स, त्वचा रहेगी जवान

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां और फाइन लाइंस आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन हमारी खराब जीवनशैली और खान-पान इसे समय से पहले ही न्योता दे देते हैं. अगर आप भी महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट्स के बजाय प्राकृतिक तरीके से अपनी त्वचा को जवां और चमकदार बनाए रखना चाहते हैं तो इसका हल आपके किचन में ही छिपा है. समय से पहले आने लगा है बुढ़ापा? खाएं ये फूड्स सही पोषण न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि त्वचा के कोलेजन को बढ़ाकर झुर्रियों को दूर रखने में भी मदद करता है. यहां हम आपको ऐसे 5 सुपरफूड्स की जानकारी दे रहे हैं जो आपकी त्वचा को लंबे समय तक जवान बनाए रखने में मदद करते हैं. 1. पपीता पपीता एंटीऑक्सीडेंट्स और पपेन नामक एंजाइम से भरपूर होता है. यह मृत कोशिकाओं को हटाने और त्वचा में लचीलापन (Elasticity) लाने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से फाइन लाइंस कम होती हैं. 2. ब्लूबेरी और जामुन बेरीज विटामिन C और एंथोसायनिन का बेहतरीन स्रोत हैं. ये त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों और प्रदूषण से होने वाले डैमेज से बचाती हैं, जिससे त्वचा ढीली नहीं पड़ती. 3. नट्स और सीड्स बादाम, अखरोट और अलसी के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन E पाया जाता है. ये तत्व त्वचा की नमी को बरकरार रखते हैं और प्राकृतिक चमक प्रदान करते हैं, जिससे झुर्रियां जल्दी नहीं आतीं. 4. पालक और हरी सब्जियां पालक में क्लोरोफिल, विटामिन C और आयरन भरपूर मात्रा में होता है. यह शरीर में कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है, जो त्वचा को टाइट रखने और झुर्रियों को रोकने के लिए सबसे जरूरी प्रोटीन है. 5. एवोकाडो एवोकाडो में हेल्दी फैट्स और विटामिन A होता है. यह त्वचा की गहराई से मरम्मत करता है और स्किन सेल्स को पोषण देता है जिससे चेहरा फ्रेश और यंग दिखता है.

वॉट्सऐप जैसा फीचर अब जीमेल में, एक क्लिक में काम हो जाएगा, यूज करने का तरीका जानें

 नई दिल्ली गूगल ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसमें जीमेल यूजर्स को एंड टू एंड एनक्रिप्शन का सपोर्ट मिलेगा. यह सपोर्ट एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम पर मिलेगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन की सुविधा इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर भी मिलता है।  एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स को सेंसटिव ईमेल भेजने के लिए सिक्योरिटी लेयर के लिए अलग से सॉफ्टवेयर या एक्सटेंशन की जरूरत नहीं होगी. ईमेल सुरक्षित तरीके से रिसीवर तक पहुंच जाएगा।  एंड टू एंड एनक्रिप्शन क्या होता है?  एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, असल में एक तरह का डिजिटल सिक्योरिटी लॉक सिस्टम है. इस टेक्नोलॉजी का यूज करने पर डेटा भेजने वाले और रिसीव करने वाले के अलावा अन्य कोई शख्स ईमेल या मैसेज को बीच में डिकोड नहीं कर पाएगा।  सीधे शब्दों में समझें तो आप किसी बक्से को भेजते हैं, जिसमें सोना-चांदी है. ऐसे लोग उसमें ताला लगा देते हैं और चाबी सिर्फ रिसीवर के पास है. एंड टू एंड एनक्रिप्शन कुछ ऐसे ही काम करता है।  गूगल ने जीमेल के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सपोर्ट को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस तक एक्सपेंशन का ऐलान किया है. एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स अब सीधे Gmail मोबाइल ऐप की मदद से एन्क्रिप्टेड ईमेल लिख, भेज और पढ़ सकेंगे।  इन यूजर्स को मिलेगी सुविधा  एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन गूगल वर्क स्पेस के एंटरप्राइज यूजर्स को मिलेगी, जिनके पास क्लाइंट-साइड एनक्रिप्शन कैपिबिलटीज है. इसके लिए पहले एडमिन कंसोल के जरिए एंड्रॉयड और आईओएस सपोर्ट को एक्टिवेट करना होगा, उसके बाद ही यूजर्स इसका एक्सेस कर पाएंगे।  गूगल बता चुका है कि अपडेट रैपिड रिलीज और शेड्यूल रिलीज दोनों डोमेन के लिए लाइव हो चुका है. एक बार मोबाइल पर एंड टू एंड इनक्रिप्शन की सुविधा मिलने के बाद यूजर्स कहीं से भी सुरक्षित तरीके से एक्सेस कर पाएंगे. पहले एन्क्रिप्टेड ईमेल के लिए डेस्कटॉप या थर्ड-पार्टी टूल्स की जरूरत होती थी। 

भारत में मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ीं, यूजर्स पर पड़ेगा असर

स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. भारत में एक बार फिर मोबाइल फोन महंगे हो रहे हैं और इस बार दो बड़ी कंपनियों Motorola और Nothing ने अपने कई स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा दी है. हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों ने अपने पॉपुलर मॉडल्स के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसका सीधा असर आम यूजर्स की जेब पर पड़ने वाला है. Motorola और Nothing ने बढ़ाईं कीमतें सबसे पहले बात Motorola की करें तो कंपनी ने अप्रैल 2026 से अपने कुछ चुनिंदा मॉडल्स की कीमत बढ़ाई है. रिपोर्ट्स के अनुसार Moto G35, Moto G57 Power और Edge 60 Fusion जैसे स्मार्टफोन्स अब पहले से महंगे हो गए हैं. इन डिवाइसेज की कीमत में लगभग 1000 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी गई है. पहले जो फोन एक तय बजट में आसानी से मिल जाते थे, अब वही मॉडल थोड़ा ज्यादा खर्च करवाएंगे. यह बढ़ोतरी सिर्फ प्रीमियम फोन्स तक सीमित नहीं है. Motorola ने अपने बजट और मिड-रेंज सेगमेंट को भी महंगा किया है. यानी जो यूजर्स 15 से 25 हजार रुपये के बीच फोन खरीदने की सोच रहे थे, उन्हें अब अपना बजट बढ़ाना पड़ेगा. खास बात यह है कि यह बदलाव नए स्टॉक के साथ लागू हो रहा है, इसलिए कई ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर कीमतें अलग-अलग भी दिख सकती हैं. अब बात Nothing की करें तो कंपनी ने भी अपने नए और पॉपुलर मॉडल्स की कीमत में बदलाव किया है. Nothing Phone 2a और Phone 3a Lite जैसे स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ने की खबर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकी कीमत में करीब 2000 से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. यानी जो फोन पहले 20 से 22 हजार रुपये के आसपास मिल रहा था, अब उसकी कीमत 23 से 26 हजार रुपये तक जा सकती है. क्यों हो रहे हैं स्मार्टफोन्स महंगे? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अचानक स्मार्टफोन्स इतने महंगे क्यों हो रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कंपोनेंट्स की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी. खासतौर पर RAM और स्टोरेज जैसे पार्ट्स की कीमतें बढ़ गई हैं. AI टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से मेमोरी चिप्स की डिमांड काफी बढ़ गई है, जिससे सप्लाई पर दबाव पड़ा है और कीमतें ऊपर चली गई हैं. हालांकि कंपनियां AI के नाम पर ज्यादा मार्जिन कमाने के लिए भी तेजी से फोन महंगे कर सकती हैं. क्योंकि ये एक परसेप्शन बन चुका है कि AI की वजह से चिप शॉर्टेज हो रही है. इसके अलावा ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें भी एक बड़ी वजह हैं. कई देशों में मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी है. साथ ही रुपये की कमजोरी ने भी इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ा दी है. यही कारण है कि सिर्फ Motorola और Nothing ही नहीं, बल्कि दूसरी कंपनियां भी धीरे-धीरे अपने स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ा रही हैं. क्या कहते हैं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स? इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. कंपनियों के लिए कम कीमत में ज्यादा फीचर्स देना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में या तो यूजर्स को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे या फिर कम फीचर्स के साथ समझौता करना पड़ेगा. इस पूरे बदलाव का असर सीधे तौर पर कस्टमर्स पर पड़ने वाला है. जो लोग नया फोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं, उनके लिए यह सही समय हो सकता है कि वे जल्दी फैसला लें. क्योंकि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में वही फोन और महंगे हो सकते हैं.

गूगल का ऐलान: अब Gmail ईमेल होंगे और ज्यादा सुरक्षित

गूगल ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसमें जीमेल यूजर्स को एंड टू एंड एनक्रिप्शन का सपोर्ट मिलेगा. यह सपोर्ट एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम पर मिलेगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन की सुविधा इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर भी मिलता है.   एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स को सेंसटिव ईमेल भेजने के लिए सिक्योरिटी लेयर के लिए अलग से सॉफ्टवेयर या एक्सटेंशन की जरूरत नहीं होगी. ईमेल सुरक्षित तरीके से रिसीवर तक पहुंच जाएगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन क्या होता है? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, असल में एक तरह का डिजिटल सिक्योरिटी लॉक सिस्टम है. इस टेक्नोलॉजी का यूज करने पर डेटा भेजने वाले और रिसीव करने वाले के अलावा अन्य कोई शख्स ईमेल या मैसेज को बीच में डिकोड नहीं कर पाएगा. सीधे शब्दों में समझें तो आप किसी बक्से को भेजते हैं, जिसमें सोना-चांदी है. ऐसे लोग उसमें ताला लगा देते हैं और चाबी सिर्फ रिसीवर के पास है. एंड टू एंड एनक्रिप्शन कुछ ऐसे ही काम करता है. गूगल ने जीमेल के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सपोर्ट को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस तक एक्सपेंशन का ऐलान किया है. एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स अब सीधे Gmail मोबाइल ऐप की मदद से एन्क्रिप्टेड ईमेल लिख, भेज और पढ़ सकेंगे. इन यूजर्स को मिलेगी सुविधा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन गूगल वर्क स्पेस के एंटरप्राइज यूजर्स को मिलेगी, जिनके पास क्लाइंट-साइड एनक्रिप्शन कैपिबिलटीज है. इसके लिए पहले एडमिन कंसोल के जरिए एंड्रॉयड और आईओएस सपोर्ट को एक्टिवेट करना होगा, उसके बाद ही यूजर्स इसका एक्सेस कर पाएंगे. गूगल बता चुका है कि अपडेट रैपिड रिलीज और शेड्यूल रिलीज दोनों डोमेन के लिए लाइव हो चुका है. एक बार मोबाइल पर एंड टू एंड इनक्रिप्शन की सुविधा मिलने के बाद यूजर्स कहीं से भी सुरक्षित तरीके से एक्सेस कर पाएंगे. पहले एन्क्रिप्टेड ईमेल के लिए डेस्कटॉप या थर्ड-पार्टी टूल्स की जरूरत होती थी.

समब्रानी धूप से बालों की देखभाल का आयुर्वेदिक तरीका

 आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बालों का झड़ना, पतला होना और उनकी ग्रोथ धीमी पड़ना बहुत आम बात हो गई है. यही वजह है कि कई लोग इसे लेकर स्ट्रेस में भी रहने लगते हैं. लंबे, घने और मजबूत बाल सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बढ़ाते, बल्कि यह आपके अच्छी सेहत का भी संकेत होते हैं. लेकिन सच यह है कि बालों को बेहतर बनाने के लिए कोई जादुई तरीका नहीं होता है. अगर आप अपने बालों को हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो उनकी सही देखभाल करना ही सबसे जरूरी है. नियमित केयर और सही आदतों से ही बालों की सेहत में सुधार लाया जा सकता है. ऐसा ही बालों को हेल्दी बनाने का एक आयुर्वेदिक तरीका है, जिसमें खास तरीके के धुएं का इस्तेमाल किया जाता है. इस आयुर्वेदिक नुस्खे का नाम है समब्रानी धूप (Sambrani Dhoop). आपने कम ही सुना होगा किसी को अपने बालों में समब्रानी धूप का इस्तेमाल करते हुए. अगर हम अभी की बात करें तो समब्रानी धूप को लेकर दिमाग में Jodhaa Akbar फिल्म का सीन याद आता है, जिसमें एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन इस चीज का इस्तेमाल करती नजर आई थीं. हालांकि, आजकल के बीजी शेड्यूल में यह तरीका ज्यादा देखने को नहीं मिलता है. लेकिन, पहले के समय में यह आयुर्वेदिक नुस्खा बालों को हेल्दी और मजबूत बनाने के लिए बहुत ही जरूरी माना जाता था. लेकिन इसका इस्तेमाल करने के लिए इसका बारे में जानना भी जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि क्या है समब्रानी धूप, जो बालों को मजबूती देता है. क्या है समब्रानी धूप? आयुर्वेद और नेचुरल थेरेपी एक्सपर्ट Rretvika के मुताबिक, समब्रानी धूप एक नेचुरल जड़ीबूटी है, जो स्टाइरैक्स पेड़ से मिलती है. इसकी खुशबू थोड़ी वुडी और मस्की होती है. ये बालों और स्कैल्प के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है. एक्सपर्ट Rretvika के अनुसार, नहाने के बाद धूप लेना सिर्फ बालों के लिए ही अच्छी नहीं होता है, बल्कि ये मन को सुकून देने वाली आदत भी मानी जाती है. इससे बॉडी बैलेंस रहती है और दिमाग भी शांत रहता है. इस धुएं की हल्की गर्माहट वट दोष को भी कंट्रोल करने में मदद करती है. ऐसा भी माना जाता है कि ये आसपास की नेगेटिव एनर्जी को भी दूर करता है. इस हर्बल स्मोक में नीम, तुलसी, गुग्गल के एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण भी शामिल हैं, जो सिर की गंदगी, बैक्टीरिया और पसीने को हटाने में भी मदद करते हैं. इस हर्बल स्मोक से बाल सुखाने पर स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होता है, जिससे हेयर फॉलिकल्स को पोषण मिलता है और जड़ें मजबूत होती हैं. अगर आप ज्यादा अच्छा रिजल्ट चाहते हैं, तो सूखे नीम के पत्ते या उपले में हर्ब्स मिलाकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. क्या रोजाना करना चाहिए इसका प्रयोग? भले ही बालों के लिए यह तरीका काफी अच्छा और सुकून देने वाला लगे, लेकिन एक्सपर्ट Rretvika खुद इसे रोज की हेयर केयर रूटीन का हिस्सा नहीं मानती हैं. वह इसे सिर्फ एक रिलैक्स करने वाली प्रक्रिया के तौर पर अपनाती हैं. उन्होंने बताया कि वह इसे महीने में सिर्फ एक या दो बार ही करती हैं, हर बार बाल धोने के बाद नहीं. उनका कहना है कि गुग्गल या कपूर जैसे नेचुरल चीजों का धुआं अगर ज्यादा लिया जाए तो फेफड़ों के लिए अच्छा नहीं होता है. इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए. घर पर कैसे करें इस्तेमाल? भारतीय वेलनेस ब्रांड अनाहता ऑर्गेनिक के अनुसार, नैचुरल समब्रानी या लोबान कप का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें धूनी (होल्डर) में जलाया जाता है. इसे किसी खुली और हवादार जगह, जैसे बालकनी में जलाएं ताकि अच्छे से धुआं निकल सके. नहाने के बाद हल्के गीले बालों को इस धुएं के ऊपर रखें, लेकिन ध्यान रखें कि बाल और धूनी के बीच करीब 15 से 25 सेंटीमीटर की दूरी हो. आखिरी में मोटे कंघे से बालों में कंघी कर लें, ताकि धुआं और उसमें मौजूद नैचुरल ऑयल्स बालों में अच्छे से फैल जाएं.

रनिंग करते समय लोग कर रहे ये बड़ी गलती, डॉक्टर ने दी सलाह

रनिग ऐसी कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज है जिससे हार्ट के साथ-साथ शरीर के कई मसल्स ट्रेन होते हैं. आजकल काफी सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें जिम जाने का समय नहीं मिल पाता तो वे लोग जिम की जगह रनिंग को अपनी डेली एक्टिविटी में शामिल किए हुए हैं. वहीं आजकल फिटनेस का क्रेज भी हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है तो सुबह-सुबह पार्कों और सड़कों पर दौड़ते लोग आम बात हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह मेहनत आपको फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकती है? हैदराबाद के एक न्यूरोलॉजिस्ट ने X पर बताया है कि ज्यादातर रनर्स गलत तरीके से ट्रेनिंग कर रहे हैं जिसका नेगेटिव असर भी हो सकता है. तो आइए रनिंग के दौरान लोग कौन सी गलती कर रहे हैं और सही तरीका क्या है, इस बारे में जान लेते हैं. क्या गलती कर रहे हैं लोग? हैदराबाद के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने बताया, हम अक्सर रनिंग के दौरान अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं लेकिन असली फिटनेस तेज दौड़ने में नहीं, बल्कि धीमे दौड़ने में छिपी है. यदि आपकी हर दौड़ आपको थकाकर चूर कर रही है तो आप ट्रेनिंग नहीं बल्कि खुद को थका रहे हैं.' 'फिटनेस की दुनिया में बोला जाता है कि तेज रनिंग करना चाहिए लेकिन फिजियोलॉजिकल यानी फिजिकल साइंस के लिहाज से तेज रनिंग करना सही नहीं है. हाई हार्ट रेट और हर बार रिकॉर्ड तोड़ने की होड़ शरीर पर एक्स्ट्रा दबाव डालती है. असल में परफॉर्मेंस में सुधार तब आता है जब आप अपने शरीर को समझने लगते हैं, न कि उसे हर वक्त लिमिट से पुश करने की कोशिश करते हैं. क्या है 'जोन 2-3' रनिंग का फंडा? डॉ. सुधीर ने समझाया, 'धीमी गति से रनिंग या जो 2-3 रनिंग हमारे माइटोकॉन्ड्रियल एफिशिएंसी को बढ़ाती है. यह हमारे शरीर का असली एंड्योरेंस इंजन है. दरअसल, जब आप धीमी गति से दौड़ते हैं तो आपकी रेस्टिंग हार्ट रेट कम होती है और एरोबिक बेस मजबूत होता है. इससे चोट लगने का खतरा कम हो जाता है और आप ज्यादा लंबे समय तक कंसिस्टेंसी के साथ दौड़ पाते हैं. इसके विपरीत लगातार तेज दौड़ने से थकान बढ़ती है और एक समय के बाद प्रोग्रेस रुक जाती है.' एथलीट्स का सीक्रेट फॉर्मूला यह सिर्फ एक थ्योरी नहीं है, बल्कि दुनिया के टॉप एथलीट्स इसी तरीके से ट्रेनिंग करते हैं. वे अपनी कुल ट्रेनिंग का 70 से 80 फीसदी हिस्सा आसान दौड़ को देते हैं. वे अपनी पूरी ताकत सिर्फ खास मौकों या रेस के लिए बचाकर रखते हैं. डॉ. सुधीर का कहना है कि अगर आप दौड़ते समय आसानी से बातचीत नहीं कर पा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपकी स्पीड जरूरत से अधिक है. हार्ट ट्रेन करें, ईगो को नहीं सोशल मीडिया पर अपनी स्पीड की फोटो-वीडियो दिखाने की होड़ अक्सर लोगों को चोटिल कर देती है. तेज दौड़ना सुनने में अच्छा लगता है लेकिन धीमी दौड़ आपको वास्तव में बेहतर बनाती है. डॉक्टर की सलाह साफ है कि अपने हार्ट को ट्रेन करें, अपने ईगो को नहीं. दौड़ना एक लंबी प्रोसेस है, इसे शॉर्टकट या दिखावे के चक्कर में खराब न करें. सही पेस वही है जिसमें आपका शरीर थके नहीं, बल्कि रिचार्ज महसूस करे.

गर्मी में नींबू पानी से ज्यादा हाइड्रेटिंग है तरबूज का शरबत, विटामिन और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर यह ड्रिंक तुरंत देगा एनर्जी

भीषण गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और शरीर के तापमान को कम करने के लिए कुछ ना कुछ ठंडी हेल्दी ड्रिंक्स पीते रहना चाहिए लेकिन शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादातर लोग नींबू के शरबत पर ही निर्भर रहते हैं. लेकिन आपको बता दें कि हाइड्रेशन के मामले में तरबूज बहुत ही अच्छा माना जाता है.   तरबूज का शरबत के फायदे विटामिन A, C और पोटेशियम से भरपूर तरबूज का शरबत न केवल प्यास बुझाता है बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा कर तुरंत ताकत से भर देता है. बाजार के मिलावटी जूस के बजाय घर पर बना यह शुद्ध और ठंडा शरबत आपको दिन भर की थकान से राहत देगा. साथ ही इसे घर पर बनाना भी बेहद आसान है. यहां हम आपको इसकी रेसिपी शेयर कर रहे हैं. शरबत बनाने के लिए तैयार कर लें ये चीजें तरबूज: 3-4 कप (कटा हुआ और बीज निकले हुए) नींबू का रस: 1 बड़ा चम्मच पुदीना के पत्ते: 8-10 ताजी पत्तियां काला नमक: आधा छोटा चम्मच चीनी/शहद: 1 चम्मच (अगर तरबूज कम मीठा हो) चाट मसाला: एक चुटकी बर्फ के टुकड़े बनाने का तरीका तरबूज को छोटे टुकड़ों में काट लें और जितना संभव हो सके इसके बीज निकाल दें. कुछ छोटे क्यूब्स को सर्विंग के लिए अलग रख लें. एक मिक्सर जार में तरबूज के टुकड़े, ताजी पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस और काला नमक डालें. इसे अच्छी तरह ब्लेंड करके जूस तैयार कर लें. अगर आपको बिल्कुल साफ जूस पसंद है तो इसे छान लें. वरना इसके पल्प के साथ भी यह काफी टेस्टी लगता है. तैयार जूस में एक चुटकी चाट मसाला मिलाएं जो इसके स्वाद को दोगुना कर देगा. गिलास में बर्फ के टुकड़े और पहले से बचाकर रखे हुए तरबूज के छोटे क्यूब्स डालें. ऊपर से ठंडा-ठंडा जूस डालें और पुदीने की पत्ती से सजाकर तुरंत सर्व करें.

पसीने की बदबू से छुटकारा दिलाएगा मोगरे का देसी इत्र, बिना किसी खर्च के घर पर इस जादुई तरीके से करें तैयार

गर्मियों के बढ़ते तापमान में लोगों को बहुत पसीना आता है. पसीने की चिपचिपाहट और उससे आने वाली बदबू से लोग बहुत परेशान रहते हैं. इस बदबू से बचने के लिए लोग महंगे से महंगे ब्रांडेड सेंट, परफ्यूम और डियो खरीदते हैं. यही चीजें खरीदने में कुछ लोग तो हजारों रुपए खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ये तेज खुशबू वाले डियो पसीने की बदबू को दबाने के बजाय कई बार और भी अजीब महक देने लगते हैं? ऊपर से इनमें मौजूद केमिकल्स स्किन को नुकसान भी पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं इनकी महक बहुत जल्दी उड़ भी जाती है. ऐसे में अगर हम आपसे कहें कि इस चिलचिलाती गर्मी में आप 100% नेचुरल इत्र अपने घर पर बना सकते हैं, वो भी बिना किसी खर्च और केमिकल के. तो क्या आप यकीन करेंगे? आज हम आपको एक ऐसा जादुई तरीका बताने वाले हैं जिससे आप मोगरे के फूलों से देसी इत्र बना सकते हैं. ये न सिर्फ आपको दिनभर तरोताजा रखेगा, बल्कि पसीने की बदबू की छुट्टी भी कर देगा. इंग्रेडिएंट्स मोगरा का इत्र बनाने के लिए आपको       ताजे मोगरे (जैस्मिन) के फूल     सुई-धागा     कांच की ढक्कन वाली साफ और सूखी बोतल       थोड़ा सा सेलो टेप कैसे बनाएं मोगरे का इत्र? 1. मोगरे का इत्र बनाने के लिए सबसे पहले मोगरे के फूलों को सुई-धागे में पिरोकर एक लंबा गजरा बना लें. लेकिन आपको ध्यान देना रखना है कि फूल बिल्कुल ताजे हों, तभी खुशबू अच्छी आएगी. 2. अब एक कांच की बोतल लें और इस गजरे को उसके अंदर लटकाएं. गजरा इस तरह लटकाएं कि फूल बोतल की दीवार से न छुएं और नीचे भी न टिके. इसका मतलब साफ है कि गजरा बिल्कुल बीच में हवा में लटका होना चाहिए. 3. गजरे के धागे वाले हिस्से को बोतल के ढक्कन के बीच में सेलो टेप से चिपका दें. इससे फूल अपनी जगह पर टिके रहेंगे. 4. अब बोतल को अच्छी तरह बंद करके 2 दिन के लिए तेज धूप में रख दें. ये स्टेप बहुत जरूरी है क्योंकि धूप की गर्मी से फूलों की खुशबू बाहर निकलती है. 5. दो दिन बाद आप देखेंगे कि फूल सूखकर हल्के नारंगी हो गए हैं. बोतल के अंदर पानी जैसी बूंदें जमा हो गई हैं. यही बूंदें असली मोगरे का इत्र है. बस आपका इत्र तैयार है. कैसे करें स्टोर? इस इत्र को आप छोटी रोल-ऑन बोतल या स्प्रे वाली बोतल में भरकर रख सकते हैं. इस इत्र को थोड़ी सी मात्रा में लगाना भी काफी होता है, क्योंकि इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है.