samacharsecretary.com

होली खेलने से पहले सावधान! ये 4 चूक रंग छुड़ाना बना देती हैं मुश्किल

होली का त्योहार नजदीक आते ही मन में रंग और ढेर सारी मस्ती का ख्याल आता है। होली खेलना बहुत से लोगों को पसंद होती है, लेकिन इसके बाद की असली चुनौती तो तब शुरू होती है, जब शीशे में चेहरा लाल, नीला, हरा और काला नजर आए। ऐसे में दिमाग में बस एक ही सवाल आता है, “अब इस रंग को कैसे छुटाएं?” कई लोग होली खेलने की जल्दबाजी में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिससे रंग को छुड़ाना और भी मुश्किल हो जाता है। चलिए जानते हैं इसके बारे में। स्किन की देखभाल न करना होली खेलने से पहले हमेशा आप अपनी स्किन को अच्छी तरह से तैयार करें। अगर आप त्वचा की सही देखभाल नहीं करते हैं, तो होली के कलर्स में मौजूद केमिकल्स आपकी स्किन को डैमेज कर सकते हैं। इससे स्किन एलर्जी, पिंपल्स और रेडनेस जैसी समस्या पैदा हो सकती है। दरअसल, ड्राई स्किन रंग को ज्यादा सोख लेती है, जिससे उसे हटाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आप चेहरे से लेकर पूरे शरीर पर सरसों या नारियल तेल लगाएं। बालों में तेल न लगाना होली के रंग सिर्फ स्किन ही नहीं, बल्कि बालों को भी भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर आप होली खेलने से पहले बालों में तेल नहीं लगाने की गलती करते हैं, तो इससे बालों में मौजूद रंगों को छुटाना और भी मुश्किल हो जाता है। साथ ही, बाल कमजोर और बेजान हो जाते हैं और हेयरफॉल की समस्या बढ़ जाती है। वहीं, बालों में से रंगों को छुड़ाने के लिए 1-2 बार ही माइल्ड शैंपू से हेयर वॉश करें और बाल धोने से 15-20 मिनट पहले थोड़ी देर सरसों, नारियल या बादाम तेल से हेयर मसाज करें। सिंथेटिक कलर का इस्तेमाल करना सिंथेटिक कलर्स दिखने में भले ही खूबसूरत और अट्रैक्टिव हो, लेकिन यह स्किन और आंखों दोनों के लिए हानिकारक होते हैं। इन केमिकल्स वाले रंगों का असर स्किन से जल्दी नहीं उतरता है। इसलिए होली पर सिंथेटिक की बजाय, ऑर्गेनिक कलर्स का ही इस्तेमाल करें। यह स्किन से जल्दी निकल जाते हैं और त्वचा से जुड़ी समस्याओं से भी बचाते हैं। त्वचा पर देर तक रंग रहना कुछ लोग होली खेलने में इतने मस्त रहते हैं कि चेहरे पर रंगों को घंटों लगाए रहते हैं। त्वचा पर ज्यादा देर तक रंग लगे रहने से एलर्जी, खुजली, रैशेज और ड्राईनेस हो सकती है। पक्के रंगों के केमिकल्स स्किन इन्फेक्शन और जलन का कारण बनते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत हटाना जरूरी है।  

हार्ट अटैक: महिलाओं में दिखते हैं अलग संकेत, जिन्हें नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

महिलाएं अक्सर थकान, कमजोरी और लगातार बने रहने वाले दर्द को अपनी दिनचर्या का दोष मानकर नजरअंदाज करती रहती हैं, ये कमजोर या बीमार होते हार्ट के लक्षण भी हो सकते हैं। ऐसे में, तुरंत सतर्क होने और डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता होती है… पुरुषों और महिलाओं में हार्ट से जुड़ी बीमारियों के लक्षण अलग-अलग होते हैं। महिलाओं की बड़ी समस्या यही है कि लक्षणों को लंबे समय तक अनदेखा करने के कारण उन्हें सही समय पर उपचार नहीं मिल पाता। हालांकि, एस्ट्रोजन के चलते महिलाओं को एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच मिला होता है, लेकिन 50 वर्ष की उम्र के बाद इस सुरक्षा का असर कम हो जाता है। एक हालिया डाटा की मानें तो बीते कुछ वर्षों में महिलाओं में कार्डियक मामलों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। ऐसे में, हम समय रहते लक्षणों को लेकर गंभीरता बरतें तो ऐसी समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है। महिलाओं में हार्ट से जुड़ी समस्याएं अधिक सामने आने लगी हैं। हालांकि, पुरुषों और महिलाओं में इस समस्या के पीछे कारण और लक्षण अलग-अलग होते हैं। महिलाओं में अक्सर मेनोपाज यानी 45 से 50 की उम्र के बाद यह समस्या देखने में आती है। मेनोपाज से पहले एस्ट्रोजन की मात्रा भरपूर होती है। इससे रक्त वाहिकाएं स्वस्थ रहती हैं और अच्छा कोलेस्ट्राल (एचडीएल) संतुलित रहता है। यह हार्ट को सुरक्षित रखने वाला कोलेस्ट्राल होता है। इससे बैड कोलेस्ट्राल एलडीएल से भी सुरक्षा मिलती है। मेनोपाज के बाद एस्ट्रोजन अचानक कम हो जाता है, जिससे कोलेस्ट्राल का संतुलन बिगड़ जाता है। कई सारे कारणों पर रखनी होगी नजर महिलाओं में हार्ट की समस्या के पीछे अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं, जैसे पालिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम आदि से भी हार्ट की बीमारी का जोखिम बढ़ता है। जल्दी मेनोपाज या प्रेग्नेंसी भी इस परेशानी का कारण बन सकती है। हमें समझना होगा कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय की धमनियों की बनावट थोड़ी छोटी और रक्तवाहिकाएं पतली होती हैं। अक्सर ब्लाकेज इन पतली और छोटी धमनियों में होता है। इन छोटी-छोटी धमनियों का ब्लाकेज अक्सर पता नहीं चलता। यही कारण है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में लक्षण बहुत ही अलग तरह के होते हैं। ये बहुत स्पष्ट नहीं होते, पर खतरनाक जरूर होते हैं। रोजमर्रा की थकान, कमजोरी को टालें नहीं महिलाओं में रोजमर्रा की थकान होती है, उन्हें लगता है कि यह दिनचर्या की वजह से है, इसलिए ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करती रहती हैं। इसी तरह सीने में दर्द उठना और उसका गर्दन व कंधों तक फैलना भी एक बड़ा लक्षण होता है। हार्ट की समस्या होने पर चक्कर और बेहोशी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। अचानक कमजोरी महसूस करना, घबराहट या फिर लगना कि धड़कन बहुत अधिक तेज हो गई है तो इसे टालने के बजाय तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए। किन्हें है अधिक जोखिम? जिन महिलाओं का मेनोपाज हो चुका है या जिन लोगों के परिवार में हार्ट की बीमारी की हिस्ट्री है या फिर जिन्हें डायबिटीज, ब्लडप्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें हार्ट की हेल्थ को लेकर अधिक सतर्क होने की जरूरत है। धूमपान या अल्कोहल का सेवन, मानसिक तनाव भी बड़े रिस्क फैक्टर हैं। गर्भकाल के दौरान सीने में होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चूंकि, महिलाओं में हार्ट की समस्या को चिह्नित करना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए समय रहते इन लक्षणों को पहचानने और समस्या होने पर डॉक्टर से मिलने के लिए जरूर प्रयास करना चाहिए। रिस्क फैक्टर पर रहे नजर     अगर आपकी उम्र 45 वर्ष से अधिक है और बार-बार सीने में दबाव महसूस करती हैं।     अगर सांस फूल रही है, पसीना आ रहा है या कमजोरी महसूस होती है।     अगर उल्टी लगती है, दर्द गर्दन तक पहुंचता है, तो तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए। बचाव के लिए आदतों में करें सुधार     हार्ट की समस्या से बचने के लिए स्वस्थ और संतुलित भोजन की आदत बनाएं।     नियमित व्यायाम करें, वजन, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रण में रखें।     धूमपान या अल्कोहल, अल्ट्रा प्रोसेस्ड आहार आदि से दूरी बनाएं।     नींद को अच्छी तरह से पूरा करें। मानसिक तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।     अपना नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराते रहें।  

जब बोन मैरो करना बंद कर दे खून बनाना: एप्लास्टिक एनीमिया क्यों है साधारण एनीमिया से ज़्यादा गंभीर?

जब भी हम एनीमिया शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले शरीर में आयरन की कमी, थकान और चेहरे का पीलापन जैसे लक्षण आते हैं। पोषण संबंधी एनीमिया या आयरन की कमी एक आम समस्या है जिसे सही खान-पान से ठीक किया जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एप्लास्टिक एनीमिया इससे पूरी तरह अलग और कहीं ज्यादा खतरनाक स्थिति है? इसे सामान्य एनीमिया समझकर केवल आयरन की गोलियों से इलाज करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। आइए डॉ. नितिन अग्रवाल (एमडी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, एचओडी – डोनर रिक्वेस्ट मैनेजमेंट, DKMS फाउंडेशन इंडिया) से जानते हैं एप्लास्टिक एनीमिया कैसे एनीमिया से अलग है। क्या है एप्लास्टिक एनीमिया? एप्लास्टिक एनीमिया बोन मैरो के फ्लोयोर से जुड़ी एक समस्या है। इस कंडीशन में बोन मैरो नए ब्लड सेल्स बनाना बंद कर देती है। यह स्थिति न केवल हीमोग्लोबिन को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे शरीर पर असर डालती है। आम एनीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया में अंतर क्या है? जहां सामान्य एनीमिया में अक्सर केवल रेड ब्लड सेल्स या हीमोग्लोबिन की कमी होती है, वहीं एप्लास्टिक एनीमिया में तीन मुख्य समस्याएं एक साथ पैदा होती हैं-     कम हीमोग्लोबिन- जिससे बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होती है।     व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी- इनके घटने से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।     प्लेटलेट्स की कमी- प्लेटलेट्स कम होने से शरीर में चोट लगने पर खून बहना रुकना मुश्किल हो जाता है और इंटरनल ब्लीडिंग का जोखिम रहता है। क्यों होती है यह बीमारी? एप्लास्टिक एनीमिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मुख्य रूप से ऑटोइम्यून डिजीज, कुछ दवाएं, टॉक्सिक चीजों से कॉन्टेक्ट और वायरल इन्फेक्शन इसके जिम्मेदार हो सकते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज एप्लास्टिक एनीमिया के लक्षण शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करते हैं। इसके मुख्य संकेतों में शामिल हैं-     सांस लेने में तकलीफ और थकान।     दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना।     बार-बार या लंबे समय तक चलने वाले इन्फेक्शन और बुखार।     बिना किसी कारण के शरीर पर नीले निशान पड़ना।     नाक और मसूड़ों से खून आना या चोट लगने पर खून का न रुकना।     त्वचा का पीला पड़ना और त्वचा पर रैश होना।  

आपके फोन की स्पीड चुरा रहे हैं ये ऐंड्रॉयड ऐप्स, तुरंत बदलें ये सेटिंग्स

नई दिल्ली रोज लॉन्च हो रहे हाई-परफॉर्मेंस और बेहतर ग्राफिक्स वाले ऐंड्रॉयड गेम्स के चलते स्मार्टफोन्स का लिमिटेड स्टोरेज स्पेस और कम रैम चैलेंज बनता रहता है। ऐसे में स्मार्टफोन्स 6जीबी और 8जीबी रैम तक के साथ लॉन्च हो रहे हैं। ऐसे में ज्यादा रैम वाला मोबाइल खरीदना एक ऑप्शन हो सकता है, वहीं बहुत ये यूजर्स नया फोन खरीदना अफॉर्ड नहीं कर सकते। जरूरी नहीं कि आप नया फोन खरीदें क्योंकि कई ऐप्स की सेटिंग्स को चेंज करके आप फोन की स्पीड बढ़ा सकते हैं। कुछ ऐप्स को किल या अनइंस्टॉल करके फोन की स्पीड और बैटरी लाइफ भी बढ़ाई जा सकती है। जरूरी है कि हैवी गेम्स और ऐप्स को स्लो होते फोन के लिए जिम्मेदार मानने से पहले चेक करें कि कौन सी ऐप्स की वजह से आपका फोन स्लो हो गया है। फेसबुक से लेकर इंस्टाग्राम तक, कौन सी ऐप आपके फोन की कितनी बैटरी और रैम यूज करती है, इसे सेटिंग्स में जाकर आप चेक कर सकते हैं। इस तरह आप जान सकते हैं कि कौन सा ऐप आपका स्मार्टफोन स्लो कर रहा है: स्टेप 1: फोन की सेटिंग्स में जाकर स्टोरेज या मेमोरी पर टैप करें। स्टेप 2: यहां आपको दिखाई देगा कि किस तरह का कंटेंट सबसे ज्यादा मेमोरी यूज कर रहा है। इस लिस्ट में इंटरनल स्टोरेज कंजप्शन ही दिखाई देगा। स्टेप 3: मेमोरी पर टैप करने के बाद मेमोरी यूज्ड बाई ऐप्स में जाएं। स्टेप 4: अब दिखने वाली लिस्ट आपको एप यूसेज ऑफ रेम चार हिस्सों, 3 घंटे, 6 घंटे, 12 घंटे और 1 दिन में दिखाएगी। इसकी मदद से आप जान सकते हैं कि कौन सा ऐप कितना रैम यूज कर रहा है। इस लिस्ट में देखकर आप गैर-जरूरी ऐप को किल कर सकते हैं या अनइंस्टॉल कर सकते हैं। साथ ही कई पॉप्युलर ऐप्स के लाइट वर्जन डाउनलोड करने का ऑप्शन भी आपके पास है, जो कम स्टोरेज स्पेस और रैम यूज करता है। इस तरह आप स्मार्टफोन की प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ा सकते हैं।  

क्रैनबेरी: महिलाओं के लिए चमत्कारी फल, इसके हेल्थ बेनिफिट्स जानना है ज़रूरी

आज के समय में हेल्दी लाइफ स्टाइल को अपनाने की चाहत हर किसी की प्राथमिकता बन चुकी है। ऐसे में पौष्टिक और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले फूड्स को “सुपरफूड” का दर्जा दिया जाता है। इन्हीं में से एक है क्रैनबेरी। एक छोटा सा लाल रंग का खट्टा-मीठा फल, जो स्वाद के साथ-साथ कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह विटामिन सी, ई, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोन्यूट्रिएंट्स का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और कई तरह बीमारियों से बचाता है।इससे हमारे शरीर को कई फायदे मिलते हैं। तो आइए जानते हैं इनके फायदों के बारे में- यूटीआई से बचाव क्रैनबेरी महिलाओं में आम यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) को रोकने में काफी प्रभावी है। इसमें मौजूद प्रोस्यानिडिन्स नामक तत्व बैक्टीरिया को मूत्राशय की दीवारों से चिपकने नहीं देते, जिससे इन्फेक्शन नहीं होता है। दिल की सुरक्षा क्रैनबेरी में पाए जाने वाले पॉलीफेनोल्स हृदय की धमनियों को हेल्दी बनाए रखते हैं, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं और हृदय रोग का जोखिम कम करते हैं। पाचन क्रिया में सुधार इसमें मौजूद फाइबर आंतों की सफाई करता है और पाचन को सुचारु बनाए रखता है, जिससे कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर रहती हैं। इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को मजबूती देते हैं और शरीर को इंफेक्शंस से लड़ने में सहायक बनाते हैं। मुंह और दांतों की देखभाल क्रैनबेरी मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है, जिससे कैविटी, मसूड़ों की सूजन और सांस की बदबू में राहत मिलती है। स्किन को बनाएं ग्लोइंग और जवां जवां इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और उम्र के असर को कम करते हैं, जिससे स्किन ग्लो करती है। कैंसर से बचाव शोध के अनुसार, क्रैनबेरी में मौजूद तत्व ब्रेस्ट, कोलोन और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को रोक सकते हैं। वेट लॉस करने में सहायक कम कैलोरी और हाई फाइबर वाले इस फल को नियमित सेवन से भूख नियंत्रित रहती है,जिससे वजन कम करना आसान हो जाता है। कोलेस्ट्रॉल संतुलित रखे यह बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाता है और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ावा देता है, जिससे आपका दिल हेल्दी रहता है। क्रैनबेरी एक टेस्टी और शक्तिशाली सुपरफूड है, जिसे आप ड्राय फ्रूट, जूस, या स्मूदी में शामिल कर अपनी डाइट को हेल्दी बना सकते हैं। इसका नियमित सेवन आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा और आपको एक्टिव बनाए रखेगा।  

अल्सर से कैसा डर! सही जानकारी से बीमारी पर जीत

हमारा पेट नाजुक टिश्यू से बना है। थोड़ी-सी गड़बड़ी सेहत से जुड़ी कई समस्याएं खड़ी कर देती है। पेट में दर्द, जलन व सूजन का एहसास, सीने में जलन व उल्टी की शिकायत-सुनने में भले ही अजीब लगे, पर ऐसा ही होता है, जब पेट में अल्सर की शिकायत होती है। खुद को इसका शिकार बनने से कैसे रोक सकते हैं, बता रहे हैं हम… जीवनशैली और खान-पान में बदलाव का नतीजा है कि किशोर और युवाओं में पेट के अल्सर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सामान्य भाषा में कहें तो पेट में छाले व घाव हो जाने को अल्सर कहा जाता है। सोने का नियत समय न होना, ऑफिस में बेहतर प्रदर्शन का तनाव, जंक फूड का बढ़ता चलन और अधिक डाइटिंग से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। उस पर धूम्रपान, एल्कोहल और तंबाकू का सेवन पेट की परत को नुकसान पहुंचाने का कारण बन जाता है। क्या है पेप्टिक अल्सर:- पेट में घाव या छाले होने को चिकित्सकीय भाषा में पेप्टिक अल्सर कहते हैं। पेट में म्युकस की एक चिकनी परत होती है, जो पेट की भीतरी परत को पेप्सिन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड से बचाती है। इस एसिड की खासियत यह है कि जहां यह एसिड पाचन प्रक्रिया के लिए जरूरी होता है, वहीं शरीर के ऊतकों को नुकसान भी पहुंचाता है। इस एसिड और म्युकस परतों के बीच तालमेल होता है। इस संतुलन के बिगड़ने पर ही अल्सर होता है। आमतौर पर यह आहार नली, पेट और छोटी आंत के ऊपरी भाग की भीतरी झिल्ली में होता है।   गैस्ट्रिक अल्सर: यह पेट के अंदर विकसित होता है। इसोफैगियल अल्सरः यह भोजन नली (इसोफैगस) में होता है, जो भोजन को गले से पेट में ले जाती है। यह अल्सर कम देखने में आता है। ड्योडेनल अल्सर: यह छोटी आंत के ऊपरी भाग में होता है, जिसे ड्योडनम कहते हैं। इसके मामले अधिक सामने आते हैं। मानसून में रखें खास एहतियात:- पेप्टिक अल्सर का सबसे प्रमुख कारण एच. पायरोली बैक्टीरिया है, जिसका संक्रमण मल और गंदे पानी से फैलता है। बरसात के मौसम में गंदगी की समस्या दूसरे मौसमों के मुकाबले अधिक होती है। शारीरिक सक्रियता कम होने और रोग प्रतिरोधक तंत्र में होने वाले बदलाव भी इसके कारण बन सकते हैं। अधिक तला-भुना, मसालेदार भोजन और चाय-कॉफी लेना पेट में एसिड के स्तर को प्रभावित करता है। इसके संक्रमण से बचने का सबसे आसान और सस्ता तरीका साफ-सफाई का खास ध्यान रखना है। लक्षण:- पेट में दर्द होना इसका प्रमुख लक्षण है। खाली पेट होने पर यह दर्द और तेज हो जाता है। पेट का एसिड अल्सरग्रस्त कोशिकाओं पर असर डालने लगता है। रात के समय पेट में जलन बढ़ जाती है। कुछ मामलों में खून की उल्टी होना, मल का रंग गहरा हो जाना, जी मिचलाना, भार में तेजी से कमी आना या भूख प्रक्रिया में बदलाव आने जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। ये देते हैं अल्सर को बुलावा:- -हेलिकोबैक्टर पायरोली बैक्टीरिया का संक्रमण। -तनाव व डायबिटीज। -आनुवंशिक कारण। -अत्यधिक मात्रा में पेट में एसिड का स्राव। -तैलीय और मसालेदार भोजन अधिक खाना। -अधिक मात्रा में शराब, कैफीन और तंबाकू का सेवन। -ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार के लिये ली जाने वाली दवाएं। लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में दर्द निवारक दवाओं, एस्प्रिन और ज्वलनरोधक दवाओं का सेवन करना। समय रहते उपचार है जरूरी:- पेप्टिक अल्सर के कारण एनीमिया, अत्यधिक रक्तस्राव और लंबे समय तक बने रहने पर स्टमक कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। आंतरिक रक्तस्राव होने के कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है। पेट या छोटी आंत की दीवार में छेद हो जाते हैं, जिससे आंतों में गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पेप्टिक अल्सर पेट के ऊतकों को भी क्षतिग्रस्त कर सकता है, जो पाचन मार्ग में भोजन के प्रवाह में बाधा पहुंचाता है। इस कारण पेट जल्दी भर जाना, उल्टी होना और वजन कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दवा से मिलता है आराम:- पेप्टिक अल्सर का उपचार आसान है। कई मामलों में एंटीबायोटिक दवाएं, एंटा एसिड व दूसरी दवाओं से ही आराम आ जाता है। घरेलू उपचार भी इसमें काफी राहत पहुंचाते हैं। यह न खाएं:- -चाय, कॉफी और सोडा का सेवन न करें। इससे पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ जाता है, जो अल्सर को बढ़ाता है। -अधिक तेल और मसालेदार भोजन न खाएं। -ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनमें साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, अल्सर के दौरान इनके सेवन से पेट के घावों को नुकसान पहुंचता है। नीबू, मौसंबी, संतरा, अंगूर, अनन्नास, फलों का जूस, जैम और जैली में सिट्रिक एसिड अधिक होता है। -लाल मांस, मैदे से बनी चीजें, सफेद ब्रेड, चीनी, पास्ता और प्रोसेस्ड फूड भी कम से कम खाएं। -खान-पान में साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। खुले में रखे खाद्य पदार्थों को खाने से बचें। देर से कटा रखा हुआ सलाद न खाएं। खाने से पहले हाथ जरूर धोएं। क्या कहते हैं आंकड़े:- -जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ए होता है, उनमें कैंसरयुक्त स्टमक अल्सर होने की आशंका अधिक होती है, हालांकि इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं है। -स्वीडन में हुए एक शोध के अनुसार जो लोग सप्ताह में तीन बार दही का सेवन करते हैं, उन लोगों में अल्सर होने की आशंका उन लोगों से कम होती है, जो इसका सेवन नहीं करते। -विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पेप्टिक अल्सर के 50 प्रतिशत मामलों का कारण एच. पायलोरी बैक्टीरिया होता है। -डेनमार्क में हुए एक अध्ययन के अनुसार जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं, उनमें पेप्टिक अल्सर होने की आशंका कम होती है। -हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जो लोग प्रतिदिन एक नाशपति का सेवन करते हैं, उनमें छोटी आंत का अल्सर होने की आशंका 31 प्रतिशत कम होती है। इन्हें खाने से मिलेगी राहत:- खान-पान का ध्यान रख कर ना केवल पेट में अल्सर बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि हमेशा के लिए इसका शिकार होने से भी बचा जा सकता है। -केले में एंटी बैक्टीरियल तत्व प्रचुरता में होते हैं, जो पेट के अल्सर को बढ़ने से रोकते हैं। नाश्ते के बाद केला खाएं। -नाशपति में फ्लेवोनॉएड और एंटी-ऑक्सीडेंट काफी मात्रा … Read more

कम कीमत, दमदार फीचर्स: ₹5999 में आया 50MP कैमरा और 6000mAh बैटरी वाला नया फोन

नई दिल्ली भारतीय ब्रैंड Ai+ ने अपना नया और क‍िफायती स्‍मार्टफोन Ai+ Pulse 2 लॉन्‍च कर दिया है। इसमें 50 मेगापिक्‍सल का कैमरा और 6 हजार एमएएच बैटरी दी गई है। इसकी कीमत बेहद कम 5999 रुपये रखी गई है। वहीं, सैमसंग ने नया 60W का कॉम्‍पैक्‍ट पावर एडप्‍टर पेश किया है। iQOO Z11x की इंडिया में लॉन्‍च डेट सामने आ गई है। ओपो ने बताया है कि वह OPPO K14 5G को इसी महीने पेश करने जा रही है। सभी खबरों को वि‍स्‍तार से जानते हैं। Ai+ Pulse 2 लॉन्‍च हुआ 5999 रुपये में Ai+ Pulse 2 को भारत में 5999 रुपये में लॉन्‍च किया गया है। हालांकि कंपनी ने कहा है कि यह कीमत शुरुआती 24 घंटों के लिए प्रभावी रहेगी। इसकी सेल 11 मार्च को दाेपहर 12 बजे से फ्लिपकार्ट पर होगी। इस फोन में 6.745 इंच का HD+ वी-नॉच डिस्‍प्‍ले दिया गया है। 120Hz का रिफ्रेश रेट है। फोन की पीक ब्राइटनैस 400 निट्स है। इसमें 50 मेगापिक्‍सल का मेन रियर कैमरा दिया गया है। फ्रंट कैमरा 8MP का है। Ai+ Pulse 2 में Unisoc T7250 प्रोसेसर दिया गया है। फोन में 6 हजार एमएएच बैटरी है, जो 18वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसके 4GB + 64GB मॉडल की कीमत 5999 और 6GB + 128GB मॉडल के दाम 7999 रुपये हैं। Samsung 60W पावर एडप्‍टर लॉन्‍च Samsung ने अपना 60W पावर एडप्‍टर भारतीय मार्केट में भी पेश कर दिया है। इसे पिछले साल सबसे पहले लाया गया था। अब ये इंडियन मार्केट में भी मिलेगा। दावा है कि इसे स्‍मार्टफोन्‍स के साथ-साथ, लैपटॉप और ईयरबड्स को चार्ज करने के लिए बनाया गया है। यह पावर एडप्‍टर, गैलियम नाइट्रेड (GaN) टेक्‍नोलॉजी पर काम करता है। इससे इसका डिजाइन कॉम्‍पैक्‍ट रखने में मदद मिलती है जबकि इसकी क्षमता बढ़ जाती है। इसकी कीमत 3,499 रुपये है और यह Samsung.com के साथ-साथ Amazon, Flipkart आदि पर मिलेगा। OPPO K14 5G इंडिया लॉन्‍च डेट OPPO K14 5G को भारत में 9 मार्च को लॉन्‍च किया जाएगा। यह पिछले साल आए K13 5G की जगह लेगा। नए ओपो फोन में 7 हजार एमएएच की बैटरी मिलने वाली है। यह 45 वॉट की चार्जिंग को सपोर्ट करेगी। फोन में Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट दिया जाएगा जो पिछले साल दिए गए Snapdragon 6 Gen 4 के मुकाबले डिसेंट अपग्रेड है। इसके बाकी फीचर्स अभी सामने नहीं आए हैं। iQOO Z11x लॉन्‍च डेट iQOO Z11x को भारत में 12 मार्च को लॉन्‍च किया जाएगा। यह Z सीरीज में कंपनी का नया स्‍मार्टफोन होने वाला है और MediaTek Dimensity 7400 Turbo चिपसेट से पावर्ड होगा। दावा है कि यह 23 हजार रुपये की प्राइस रेंज में सबसे तेज फोन होगा। फोन में 7200 एमएएच की बैटरी दी जाएगी, जो पिछले साल आए मॉडल में दी गई बैटरी के मुकाबले बड़ा अपग्रेड होने वाला है। यह फोन 44 वॉट की फास्‍ट चार्जिंग के साथ आएगा। लेटेस्‍ट एंड्रॉयड 16 पर बेस्‍ड OriginOS 6 पर चलेगा। इसे एमेजॉन के साथ-साथ आईकू इंडिया की वेबसाइट पर सेल किया जाएगा।

Realme का नया स्मार्टफोन 10,001mAh बैटरी के साथ आ रहा है, भारत में इस दिन होगी लॉन्चिंग

नई दिल्ली  Realme भारत में एक नया स्मार्टफोन लेकर आ रहा है, जिसका नाम Realme Narzo Power 5G होगा. कंपनी ने बताया है कि यह फोन भारत में 5 मार्च को लॉन्च होगा और इसमें 10,001mAh की बैटरी दी जाएगी. साथ ही इसमें मीडिटेक डाइमेंसिटी 7300 चिपसेट का यूज किया है. बैक पैनल पर 50MP का कैमरा मिलेगा.  Amazon India पर इसकी एक माइक्रोसाइट तैयार की है, जहां अपकमिंग हैंडसेट की डिटेल्स को लिस्ट किया है. डिटेल्स में बताया है कि इसमें 10,001mAh की बैटरी और 38 दिन का स्टैंडबाय बैकअप मिलेगा.  डुअल चिपसेट का यूज करेगी लिस्ट डिटेल्स में बताया है कि इसमें डुअल चिप सिस्टम का यूज किया गया है. इसमें मीडियाटेक डाइमेंसिटी डाइमेंसिटी 7400 चिपसेट और Hyper Vision AI चिप का यूज किया गया है.  रियलमी ने किया पोस्ट  मिलेगा 144Hz रिफ्रेश रेट्स  रियलमी के इस अपकमिंग हैडंसेट में 6.8-inch curved AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. इसमें  6500 nits पीक ब्राइटनेसम मिलेगी. Realme Narzo Power 5G में 144Hz HyperGlow 4D कर्व प्लस डिस्प्ले दिया जाएगा. इसमें 144Hz का रिफ्रेश रेट्स मिलेगा, जिसकी मदद से  बेहतर गेमिंग एक्सपीरियंस मिलेगा.  Realme Narzo Power 5G  का कैमरा  Realme Narzo Power 5G में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकेगा. इसमें 50MP सोनी OIS कैमरा दिया गया है. कंपनी ने बताया है कि इसमें NEXT AI, Realme UI 7.0 का सपोर्ट मिलेगा. कंपनी ने बताया है कि यह सिर्फ 219 ग्राम का स्मार्टफोन होगा. इसमें 27W का रियर चार्जिंग सपोर्ट भी मिलेगा. 

स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर संकट: IDC बोला– 2026 में सबसे बड़ी गिरावट तय

अमेरिकी मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी, इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) ने चेतावनी दी है कि स्‍मार्टफोन मार्केट इस साल 2026 में अबतक की सबसे बड़ी गिरावट देखेगा। इसकी वजह मेमोरी और रैम की कीमतों में बढ़ोतरी को बताया गया है, जिससे स्‍मार्टफोन्‍स महंगे हो रहे हैं। आईडीसी ने कहा है कि स्‍मार्टफोन कंपनियों का शिपमेंट यानी डिवाइस की शिपिंग 10 साल से भी ज्‍यादा समय के निचले स्‍तर को देखने वाली है। हाल ही में देखा गया है कि स्‍मार्टफोन कंपनियों ने अपने तमाम प्रोडक्‍ट्स की कीमतों को बढ़ाया है। सैमसंग की A और F सीरीज के पुराने मॉडलों में 1 हजार रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। यह सब मेमोरी चिप्‍स और रैम की कीमत बढ़ने की वजह से हो रहा है। दिग्‍गज कंपनी वेस्‍टर्न डिजिटल (WD) ने हाल ही में बताया था कि उसके पास अगले 1 साल के मेमोरी चिप्‍स के ऑर्डर आ गए हैं। 12.9% घट सकता है स्‍मार्टफोन श‍िपमेंट IDC की रिपोर्ट (REF.) के अनुसार, इस साल स्मार्टफोन शिपमेंट में 12.9% फीसदी की कमी देखने को मिल सकती है। इसके कुल स्‍मार्टफोन्‍स की शिपिंग 1.12 अरब यूनिट रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस गिरावट के कारण सबसे ज्‍यादा प्रभावित होंगे, सस्‍ते एंड्रॉयड स्‍मार्टफोन बनाने वाले मैन्‍युफैक्‍चरर्स। छोटी कंपनियां कर रहीं बड़ा संघर्ष इस रिपोर्ट में बताया गया है कि स्‍मार्टफोन मार्केट में कीमतें बढ़ने से छोटी कंपनियां बड़ा संघर्ष कर रही हैं। वह मार्केट से बाहर हो रही हैं। वहीं, ऐपल और सैमसंग जैसे दिग्‍गज अपना मार्केट शेयर बनाए हुए हैं। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि प्रीमियम सेगमेंट में यूजर कुछ हजार के अंतर को गंभीरता से नहीं लेता। 20 हजार रुपये की प्राइस रेंज में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी मुश्किल पैदा कर देती है। कहां परेशानी झेलेंगी कंपनियां? एनाल‍िस्‍ट ने बताया IDC की रिपोर्ट में एनालिस्ट्स ने बताया है कि कॉम्‍पोनेंट की लागत बढ़ने से स्‍मार्टफोन कंपनियों का मार्जिन कम होगा। उन्‍हें इसका बोझ अपने ग्राहकों पर डालना होगा। और कीमत बढ़ने से डिमांड कमजोर हो रही है। आईडीसी की रिपोर्ट कहती है कि अपने प्रीमियम स्‍मार्टफाेन्‍स की बदौलत ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियां इस मुसीबत का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं।

हर हेयर वॉश के बाद टूटते हैं बाल? जानिए सही तरीका जिससे बाल बनें हेल्दी और चमकदार

हर कोई चाहता है कि उसके बाल सुंदर, मुलायम और हेल्दी दिखें। लेकिन बालों की सही देखभाल सिर्फ तेल लगाने या महंगे प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं है। बालों को सही तरीके से धोना भी उतना ही जरूरी है। बहुत से लोग हेयर वॉश को एक रूटीन मानते हैं और जल्दी में बाल धो लेते हैं, लेकिन गलत तरीके से किए गए हेयर वॉश से बालों को नुकसान पहुंच सकता है। यहां बताए गए कुछ आसान लेकिन असरदार टिप्स और ट्रिक्स की मदद से आप हेयर वॉश को एक हेल्दी हेयर केयर रूटीन का हिस्सा बना सकते हैं। तो आइए जानते हैं इनके बारे में- हेयर वॉश से पहले बालों को सुलझाएं हेयर वॉश से पहले बालों को अच्छी तरह सुलझा लें, जिससे गीले बालों को धोते समय टूटने की संभावना कम हो जाए। हमेशा गुनगुने पानी से शुरुआत करें गर्म पानी बालों की नमी छीन सकता है और ठंडा पानी बालों की सफाई अच्छे से नहीं कर पाता। गुनगुना पानी स्कैल्प के पोर्स खोलकर गंदगी हटाने में मदद करता है। इसलिए गुनगुने पानी से शुरुआत करें। स्कैल्प के अनुसार शैम्पू चुनें अगर स्कैल्प ऑयली है तो डीप-क्लीनिंग शैम्पू, और अगर ड्राई है तो हाइड्रेटिंग शैम्पू का चयन करें। सल्फेट-फ्री शैम्पू हमेशा बेहतर होते हैं। शैम्पू को सीधे न लगाएं शैम्पू को हाथ में लेकर पानी के साथ हल्का झाग बनाएं और फिर स्कैल्प पर लगाएं। इससे शैम्पू अच्छे से फैलता है और नुकसान नहीं करता। स्कैल्प की मसाज करें उंगलियों के पोरों से हल्के हाथों से स्कैल्प पर मसाज करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और बालों की ग्रोथ में मदद मिलती है। सिरों पर ज्यादा शैम्पू न लगाएं शैम्पू को पानी सहित स्कैल्प पर रखें, बालों की लंबाई पर झाग अपने आप फैल जाएगा। कंडीशनर को सही जगह लगाएं कंडीशनर को केवल बालों की लंबाई और सिरों पर लगाएं। स्कैल्प पर लगाने से चिपचिपापन और हेयर फॉल हो सकता है। सॉफ्ट टॉवल से सुखाएं गीले बालों को जोर से रगड़ें नहीं, बल्कि किसी सॉफ्ट टॉवल से धीरे-धीरे प्रेस करके सुखाएं। बार-बार हेयर वॉश से बचें हर दिन बाल धोने से बालों के नैचुरल ऑयल निकल जाते हैं। हफ्ते में 2–3 बार हेयर वॉश करना पर्याप्त होता है। सही हेयर वॉश तकनीक न केवल आपके बालों को साफ रखती है, बल्कि उन्हें हेल्दी, मजबूत और शाइनी भी बनाती है। ऊपर दिए गए टिप्स को अपनाकर आप बालों की खूबसूरती को बनाए रख सकते हैं और हेयर प्रॉब्लम्स से बच सकते हैं।