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भारत में आया 100 इंच का 4K QLED स्मार्ट टीवी – एक ही स्क्रीन पर सिनेमा और गेमिंग का धमाकेदार कॉम्बो

नई दिल्ली 100 का इंच का QLED स्मार्ट टीवी लॉन्च हो गया है। Haier Appliances ने S90 Series QLED टीवी पेश किए हैं। टीवी HDR10+, Dolby Vision IQ और 1000 Nits पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करते हैं। घर में ही थिएटर का फील पाने की इच्छा रखने वालों के लिए ये स्मार्ट टीवी काफी सही हो सकता है। इसका स्क्रीन साइज आपके एक्सपीरियंस को और भी मजेदार बना देगा। ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के साथ-साथ गेमिंग के लिए भी यह अच्छा है। स्मार्ट टीवी की कीमत और सभी स्पेसिफिकेशन जानने के लिए नीचे पढ़ें। स्मार्ट टीवी के सभी खास फीचर्स कंपनी के इस टीवी में 100 इंच का स्क्रीन मिलता है। इसका पिक्सल रेजलूशन 3840 x 2160, रिफ्रेश रेट 144Hz और पीक ब्राइटनेस 1000 nits है। इसमें कई गेमिंग फीचर्स मिलते हैं, जिसमें VRR, ALLM, Game Menu, AMD FreeSync Premium Pro शामिल हैं। बड़ी स्क्रीन वाला यह टीवी 55W के स्पीकर और Dolby Atmos सपोर्ट के साथ आता है। यह गूगल टीवी Android 14 पर रन करता है। इसमें 4GB RAM के साथ 64GB इंटरनल स्टोरेज दिया गया है। टीवी एआई स्मार्ट वॉइस के साथ आता है। इसमें dolby Vision, सपोर्ट, गेम, एमर्जी सेविंग जैसे कई मोड मिलते हैं। कनेक्टिविटी के लिए इसमें मिलते हैं कई फीचर्स स्मार्ट टीवी को गूगल टीवी रिमोट और वन टच बटन के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा टीवी के अन्य फीचर्स में हाईस्मार्ट IoT हब, हाईकास्ट, क्रोमकास्ट बिल्ट-इन, ब्लूटूथ स्पीकर मोड शामिल है। केनेक्टिविटी के लिए इस स्मार्ट टीवी में 4 HDMI, 3 USB 2.0, Ethernet LAN, Wi-Fi 6, Bluetooth 5.2 मिलता है। गूगल टीवी पर चलने वाला S90 सीरीज में कई स्ट्रीमिंग ऐप्स मिलते हैं। इसमें लाइव टीवी और यूट्यूब शामिल है। यह HaiSmart इकोसिस्टम के जरिए एक स्मार्ट होम हब के रूप में भी काम करता है, जो कनेक्टेड डिवाइस को कंट्रोल कर सकता है। इसमें वायरलेस स्क्रीन प्रोजेक्शन के लिए HaiCast और स्क्रीन बंद होने पर भी ऑडियो के लिए ब्लूटूथ स्पीकर मोड शामिल हैं। कितनी है स्मार्ट टीवी की कीमत? Haier S90 Series 100 4K QLED स्मार्ट टीवी की कीमत 3,22,990 रुपये है। कंपनी इसके साथ 3 साल की वारंटी दे रही है।

गौमुखासन: रीढ़ की हड्डी मजबूत करने के साथ पाएँ और भी कई फायदे

योग में कई आसन हैं जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं, लेकिन गौमुखासन को विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। यह आसन शरीर को सशक्त बनाने के साथ-साथ मानसिक स्थिरता भी प्रदान करता है। “गौमुख” का अर्थ है “गाय का मुख”, क्योंकि इस आसन में शरीर की आकृति गाय के मुख जैसी प्रतीत होती है। तो आइए जानें इस प्रभावशाली आसन के कुछ प्रमुख लाभों के बारे में- कंधों की जकड़न दूर करता है यह आसन कंधों की जकड़न को खोलता है और उनके आसपास की मांसपेशियों को फ्लेक्सिबल बनाता है, जिससे अकड़न और दर्द में राहत मिलती है। रीढ़ की हड्डी मजबूत बनाता है गौमुखासन पीठ को सीधा रखने से रीढ़ मजबूत होती है और बॉडी पॉश्चर सुधरती है। सांस की क्षमता बढ़ाता है इसे करने से होने वाले छाती के फैलाव से फेफड़ों को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती हैं, जिससे रेस्पिरेटरी कैपेसिटी बेहतर होती है। डायबिटीज के लिए लाभकारी यह आसन पैंक्रियाज को एक्टिव बनाता है, जिससे इंसुलिन का रिलीज संतुलित होता है। हिप्स और थाई को फ्लेक्सिबल बनाता है पैरों की विशेष स्थिति से जांघों और कूल्हों की मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं। गठिया और साइटिका में राहत यह आसन जोड़ों और नसों पर पॉजिटिव इफेक्ट डालता है, जिससे जोड़ों के दर्द और साइटिका में आराम मिलता है। स्ट्रेस और एंजाइटी को दूर करता है नियमित अभ्यास से मेंटल स्ट्रेस में कमी आती है और मन शांत रहता है। नर्वस सिस्टम को सुदृढ़ बनाता है यह आसन नाड़ियों को सक्रिय करता है, जिससे पूरा नर्वस सिस्टम ऐक्टिव रहता है। हॉर्मोनल संतुलन बनाए रखता है यह शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम पर असर डालकर हॉर्मोनल संतुलन में सहायक होता है। यूरीन संबंधी समस्याओं में लाभकारी यूरिनरी ट्रैक को शक्ति देता है और इन्फेक्शन की संभावना कम करता है। ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है इसका नियमित अभ्यास एकाग्रता बढ़ाता है, जिससे ध्यान साधना अधिक प्रभावी बनती है। गौमुखासन न केवल शारीरिक लचीलापन और मजबूती देता है, बल्कि मानसिक संतुलन और एनर्जी को भी बनाए रखता है। इसे डेली सही तरीके से करने पर शरीर और मन दोनों में अमेजिंग चेंजेस दिखाई देते हैं। शुरुआत में इसे किसी एक्सपर्ट की देखरेख में करें जिससे सही पोज और संतुलन प्राप्त किया जा सके।  

WiFi की स्पीड घटने का असली कारण: घर के हरे-भरे पौधे

 नई दिल्ली जरा सोचकर देखें कि आप आप अपने घर में आराम से बैठे हैं, नेटफ्लिक्स पर अपनी पसंदीदा सीरीज देख रहे हैं, अचानक वीडियो बफर होने लगता है। आप राउटर को चेक करते हैं, इंटरनेट स्पीड टेस्ट करते हैं, लेकिन कुछ समझ नहीं आता। ऐसी सिचुएशन में कोई सर्विस प्रोवाइडर को डांटने लगता है, तो कोई अपने राउटर को बदलने पर विचार करने लगता है। लेकिन शायद ही लोगों का ध्यान घर में रखे हुए पौधों पर जाता होगा, जो घर के अंदर की सुंदरता को बढ़ाते हैं। लेकिन क्या वाकई पौधे आपके वाई-फाई की रफ्तार को धीमा कर रहे हैं? चलिए, जान लेते हैं। ब्रिटेन की कंपनी Broadband Genie एक चौंकाने वाला दावा किया कि घर में रखे बड़े पौधे या बहुत सारे छोटे पौधे आपके वाई-फाई की स्पीड को कम कर सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पौधों की मिट्टी में नमी होती है और उनकी घनी पत्तियां वाई-फाई सिग्नल को सोख लेती हैं या उसे इधर-उधर मोड़ देती हैं। खासकर, छोटे फ्लैट या कमरे में ढेर सारे पौधे हों, तो इनका ऐसा असर ज्यादा दिख सकता है। हालांकि, यह असर आमतौर पर बहुत छोटा होता है, लेकिन अगर आपका राउटर पौधे के आसपास लगा है, तो स्पीड में फर्क पड़ सकता है। पौधे के अलावा, ये भी रोक सकते हैं सिग्नल पौधे वाई-फाई सिग्नल को थोड़ा कमजोर कर सकते हैं, लेकिन घर में सबसे बड़ा रुकावट दीवारें बनती हैं। ये सिग्नल को ज्यादा रोकते हैं। इसके अलावा, अगर आप किसी ऐसी जगह रहते हैं जहां पड़ोसियों के घर पास-पास हैं, तो उनके वाई-फाई नेटवर्क भी आपके सिग्नल में दखल दे सकते हैं। अगर आप वाई-फाई एनालाइजर ऐप का इस्तेमाल करें, तो आपको अपने आसपास 5-6 नेटवर्क दिख सकते हैं। ये आपके वाई-फाई सिग्नल में अवरुद्ध पैदा कर सकते हैं। इंटरनेट की स्पीड 36% तक बढ़ सकती है Broadband Genie का कहना है कि अपने राउटर को पौधों के पास या उनके पीछे न छिपाएं। Broadband Genie के एक प्रयोग में पाया गया कि राउटर को पौधों से दूर ले जाने पर इंटरनेट की स्पीड 36% तक बढ़ सकती है। कंपनी के एक्सपर्ट पीटर एम्स का कहना है, 'हमें यह देखकर हैरानी हुई कि राउटर को पौधों से दूर ले जाने से इतना बड़ा फर्क पड़ सकता है इसलिए, अपने राउटर को ऐसी जगह रखें जहां सिग्नल को पौधे, दीवारें या अन्य चीजें कम से कम रोकें।' स्पीड कम है तो ये उपाय अपनाकर देखें अगर आपके घर में वाई-फाई की स्पीड कम है, तो आप मेश नेटवर्क या वाई-फाई एक्सटेंडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये डिवाइस सिग्नल को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, आप वायर्ड कनेक्शन यानी Ethernet Cable का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आजकल पावरलाइन नेटवर्क किट भी उपलब्ध हैं, जो आपके घर की बिजली की वायरिंग का इस्तेमाल करके इंटरनेट सिग्नल पहुंचाते हैं।

पेमेंट का नया दौर: QR कोड की छुट्टी, अब अंगूठा लगाएंगे और हो जाएगा भुगतान

नई दिल्ली भारत में कई लोगों को स्मार्टफोन से QR Code स्कैन करके UPI पेमेंट करते हुए देखा होगा, लेकिन जिनके पास मोबाइल ना हो वे क्या करें. ऐसे ही लोगों के लिए अब Proxgy स्टार्टअप ने ThumbPay नाम का प्रोडक्ट अनवील किया है, जो बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन की मदद से पेमेंट करने की सुविधा देता है. यानी आप सिर्फ अंगूठा लगाकर दुकान, पेट्रोल पंप और शोरूम आदि पर पेमेंट कर सकेंगे. यह सिस्टम आधार ऑथेंटिकेशन को UPI से कनेक्ट करता है. इसके लिए फोन, कार्ड या वॉलेट को कनेक्ट करने की जरूरत नहीं होगी. कस्टमर्स को पेमेंट करने के लिए सिर्फ डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाना होगा.  ThumbPay में पेमेंट का प्रोसेस ?  ThumbPay से पेमेंट करने के लिए कस्टमर्स को डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाना होगा, जिसके बाद उसकी स्कैनिंग होगी. आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम (AEPS) सिस्टम पहले अंगूठे की मदद से शख्स को वेरिफाई करेगा. ऑथेंटिकेशन कंप्लीट होने के बाद UPI सिस्टम बैंक टू बैंक पेमेंट कंप्लीट करेगा. इसके लिए कस्टमर्स को QR Code, स्मार्टफोन और कैश रखने की जरूरत नहीं होगी.  सिक्योरिटी और हाइजीन का भी रखा ध्यान कंपनी ने बताया है कि इस डिवाइस में सर्टिफाइड फिंगरप्रिंट स्कैनर लगाया है, जो फ्रॉड डिटेक्शन के साथ आता है. इसमें वेरिफिकेशन्स के लिए एक छोटा कैमरा भी दिया है. इसमें हाइजीन के लिए UV स्टेरेलाइजेशन भी दिया जाता है.  ThumbPay में QR कोड और NFC पेमेंट का सपोर्ट डिवाइस को और बेहतर बनाने के लिए इसमें QR कोड और NFC पेमेंट का सपोर्ट दिया है. UPI साउंडबॉक्स और 4G का सपोर्ट मिलेगा. इसमें वाईफाई कनेक्शन की भी सुविधा है.   ThumbPay की कीमत ThumbPay की कीमत करीब 2 हजार रुपये है. यह बैटरी पावर के साथ भी काम कर सकेगा, जिसकी मदद से इसे बड़े शोरूम, छोटी दुकानों और गांवों की दुकानों में भी यूज किया जा सकेगा.  असल में यह आधार से कनेक्टेड बैंक खाते से सीधे जुड़ता है. इसके बाद कोई भी शख्स जिसका आधार कार्ड से बैंक अकाउंट लिंक है, वो इस डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाकर कर पेमेंट कर सकते हैं.  दुकान वालों के लिए कब से होगा उपलब्ध  जानकारी के मुताबिक, इस डिवाइस ने पायलट ट्रायल को कंप्लीट कर लिया है. अब इसको UIDAI और NPCI की तरफ से कंप्लाइंस चेक मिलना है. एक बार सिक्योरिटी का अप्रूवल मिलने के बाद Proxgy इसे स्टेप बाई स्टेप तरीके से डिस्ट्रीब्यूट करेगी. 

Chrome को टक्कर देने आया Comet ब्राउज़र, अरविंद श्रीनिवास ने किया भारतीय यूजर्स के लिए लॉन्च

नई दिल्ली Google Chrome वेब ब्राउजर को अब भारत में कड़ी टक्कर मिल सकती है. दरअसल Perplexity के CEO अरविंद श्रीनिवास ने ऐलान किया है कि अब भारतीय यूजर्स के लिए भी Perplexity Comet ब्राउजर एवेलेबल हो जाएगा. आपको बता दें कि पिछले कुछ महीने में कॉमेट ब्राउजर काफी सुर्खियां बटोर रहा है.  परप्लेक्सिटी के कॉमेट ब्राउजर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमे कंपनी Agentic AI का सपोर्ट दिया है. इस ब्राउजर में इनबिल्ट असिस्टेंट दिया गया है जो आपके दिए गए कमांड के बेसिस पर खुद से टास्क परफॉर्म करता है. उदाहरण के तौर पर आप इस ब्राउजर में दिए गए असिस्टेंट को कमांड दे कर टिकट बुक करा सकते हैं.  एजेंटिक वेब ब्राउजर्स की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि ये आपके लिए खुद से आपके टैब्स को टेकओवर लेकर उसमें काम कर सकते हैं. आपको इसे सिर्फ कमांड देना है और ये खुद से वेबसाइट्स के साथ इंट्रैक्ट कर सकता है.  Perplexity Comet अब तक इन्वाइट बेस्ड ब्राउजर है यानी सभी को इसका ऐक्सेस नहीं मिला है. अब भारत में इसे विंडोज और मैक कंप्यूटर्स और लैपटॉप्स में यूज किया जा सकेगा. हालांकि एंड्रॉयड और आईफोन में कॉमेट ब्राउजर के लिए और इंतजार करना होगा, क्योंकि अभी सिर्फ साइन अप कर सकते हैं. जब एवेलेबल होगा तब ही आप इसे मोबाइल फोन में डाउनलोड कर सकेंगे.  Perplexity CEO अरविंद श्रीनिवास ने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा है कि भारत के सभी Perplexity Pro यूजर्स के लिए Comet ब्राउजर रोलआउट किया जा रहा है. यानी परप्लेक्सिटी के फ्री यूजर्स को कॉमेट ब्राउजर नहीं मिलेगा.  गौरतलब है कि अमेरिका में कंपनी ने सबसे पहले Perplexity AI ने कॉमेट ब्राउजर को इन्वाइट ऑनली जारी किया था. शुरुआत में इसे खूब सराहना मिली और लोगों ने भी खूब पसंद किया. क्योंकि ये यूजर्स को इफिशिएंट और फास्ट बना रहा है. कई यूजर्स ने इसे डिफॉल्ट भी बना लिया, लेकिन धीरे धीरे इसे लेकर लोग शिकायत कर रहे हैं.  Perplexity का कॉमेट ब्राउजर क्रोम की तरह ही ज्यादा एनर्जी कंज्यूम कर रहा है यानी आपके कंप्यूटर का ज्यादा सीपीयू इसी ब्राउजर के लिए यूज होगा. प्राइवेसी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि Perplexity Comet का असिस्टेंट आपके ब्राउजर और टैब को पूरी तरह कंट्रोल में ले सकता है. इतना ही नहीं आगे ये भी प्लान है कि कंप्यूटर के नेटिव सेटिंग्स के साथ भी Perplexity का कॉमेट असिस्टेंट काम कर सकता है.  कैसे करें यूज? अगर आपके पास Perplexity Pro सब्सक्रिप्शन है तो आप कॉमेट ब्राउजर की वेबसाइट पर जा कर इसे डाउनलोड कर सकते हैं. लॉगइन करने के बाद आप इसे यूज कर सकते हैं.

प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स सामान्य, लेकिन समझदारी से करें मैनेज: क्या खाएं, क्या नहीं

प्रेग्नेंसी के दौरान फूड क्रेविंग्स बेहद आम हैं और ज्यादातर महिलाओं में पहली तिमाही के अंत से दूसरी तिमाही में यह बढ़ जाती हैं; मीठा, नमकीन, खट्टा और मसालेदार चीजों की चाह सामान्य है, लेकिन पोषण संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव, स्वाद और गंध की संवेदनशीलता, मॉर्निंग सिकनेस और पोषक तत्वों की कमी क्रेविंग को बढ़ाते हैं, इसलिए हेल्दी विकल्प चुनना मां और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित रहता है। क्रेविंग्स क्यों होती हैं गर्भावस्था में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बदलने से स्वाद और गंध की समझ प्रभावित होती है, जिससे कुछ चीजें अधिक आकर्षक लगती हैं और कुछ से अरुचि हो जाती है। शरीर को अतिरिक्त पोषक तत्वों (आयरन, कैल्शियम, ओमेगा-3, विटामिन C) की जरूरत पड़ती है; कमी होने पर शरीर संकेत के रूप में खास खाद्य पदार्थों की चाह पैदा कर सकता है। मॉर्निंग सिकनेस, थकान और मूड स्विंग जैसी स्थितियां भी त्वरित ऊर्जा और “कंफर्ट फूड” की इच्छा बढ़ा सकती हैं। क्या खाएं: स्मार्ट स्वैप्स मीठा खाने की क्रेविंग: डार्क चॉकलेट की छोटी मात्रा, खजूर, दही के साथ फलों की स्मूदी, घर की बनी सेब-ओट क्रम्बल जैसे विकल्प लें। नमकीन/क्रंची: भुने चने, मखाने, भुने बादाम-काजू, होल-ग्रेन क्रैकर्स के साथ हुमस या दही डिप चुनें। खट्टा: नींबू पानी, मौसमी/संतरा, कच्चे आम की हल्की चटनी, घर का प्रोबायोटिक दही; बाजारू अत्यधिक नमक वाले अचार और पैक्ड चटनी सीमित रखें। मसालेदार: घर का हल्का मसाला, तला-भुना और बहुत तीखा कम करें; दिल और पाचन पर बोझ घटेगा। कार्ब क्रेविंग: मल्टीग्रेन रोटी, ब्राउन राइस, ओट्स, सूजी-दलिया उपमा, सब्जियों से भरपूर मिलेट खिचड़ी जैसे कॉम्प्लेक्स कार्ब चुनें। जिन चीजों से बचें या सीमित करें कोल्ड डेली मीट, अधपका मांस/अंडा/मछली, अनपास्चराइज्ड डेयरी और प्रीमेड डेली सलाद में संक्रमण का जोखिम रहता है; इन्हें अवॉयड करें। सोडा, हाई-शुगर ड्रिंक्स, डीप-फ्राइड स्नैक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स वजन बढ़ने, एसिडिटी और ब्लड शुगर स्पाइक बढ़ा सकते हैं। कैफीन सीमित रखें; दैनिक अनुशंसित सीमा के भीतर रहें और देर शाम कैफीन से बचें ताकि नींद प्रभावित न हो। नॉन-फूड क्रेविंग (मिट्टी, चाक, डिटर्जेंट आदि) को पिका कहा जाता है—यह खतरनाक है; ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। दिनभर की सरल आदतें ब्रेकफास्ट जरूरी: प्रोटीन + फाइबर (अंडा/दही/पनीर + फल/ओट्स/मिलेट) से दिन की शुरुआत करें, इससे मीठी और जंक क्रेविंग घटती हैं। छोटी-छोटी फ्रीक्वेंट मील्स: 2-3 घंटे में हल्का और संतुलित खाएं, ब्लड शुगर स्थिर रहेगी और उल्टी/मिचली कम होगी। हाइड्रेशन: पानी, नारियल पानी, सूप, छाछ/लस्सी (कम नमक-शक्कर) लें; डिहाइड्रेशन क्रेविंग्स बढ़ा सकता है। स्मार्ट प्रेप: कटे फल, भुने नट्स, दही, हुमस, सलाद बॉक्स जैसे हेल्दी स्नैक पहले से तैयार रखें ताकि अचानक क्रेविंग पर बेहतर विकल्प हाथ में हों। जरूरी पोषक तत्वों पर फोकस आयरन: पालक, सरसों के साग, मेथी, चना/राजमा, गुड़-किशमिश; विटामिन C के साथ लें ताकि अवशोषण बेहतर हो। कैल्शियम: दूध, दही, पनीर, तिल; अगर डेयरी नहीं लेते तो कैल्शियम-फोर्टिफाइड विकल्प देखें। ओमेगा-3: सालमन/श्रिम्प जैसी लो-मर्करी मछली; मछली न लेने पर अखरोट, अलसी, चिया और ओमेगा-3 एग्स helpful हैं। प्रोटीन: दालें, पनीर, अंडे, दुबला मांस/चिकन, टोफू; हर मील में प्रोटीन का हिस्सा रखें। कब लें डॉक्टर की सलाह लगातार उल्टी/भोजन से अरुचि के कारण वजन घट रहा हो, पानी नहीं ठहर रहा हो या कमजोरी-चक्कर आ रहे हों। नॉन-फूड आइटम्स की क्रेविंग हो, फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षण दिखें, या गेस्ट्रिक/एसिडिटी अत्यधिक बढ़ जाए। मधुमेह, थायराइड, हाई बीपी जैसी स्थितियां हों—डायटीशियन/गायनो के साथ पर्सनलाइज्ड प्लान बनाएं। त्वरित 7 हेल्दी टिप्स घर की स्मूदी से फल-सब्जियां बढ़ाएं। “कुकीज की क्रेविंग” पर पहले फल/नट्स लें; फिर भी मन न माने तो छोटी सर्विंग। ब्रेकफास्ट कभी न छोड़ें। रोज 2-3 डेयरी सर्विंग्स या समकक्ष कैल्शियम लें। लो-मर्करी मछली सप्ताह में 1-2 बार; नहीं खाते तो प्लांट ओमेगा-3 लें। आयरन-समृद्ध भोजन के साथ विटामिन C जोड़ें। रात में भारी, तला-भुना और बहुत मसालेदार भोजन कम करें; नींद बेहतर होगी। डिस्क्लेमर: हर गर्भावस्था अलग होती है; कोई भी विशेष आहार परिवर्तन, सप्लीमेंट, या प्रतिबंध शुरू करने से पहले प्रसूति-विशेषज्ञ/डायटीशियन की सलाह लेना सुरक्षित रहता है।  

तत्काल टिकट अब फटाफट: टाइमिंग, मास्टर लिस्ट और पेमेंट ट्रिक्स

नई दिल्ली आईआरसीटीसी से तत्काल टिकट बुकिंग कई यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि टिकट खुलते ही कुछ ही मिनटों में भर जाते हैं। ऐसे में तेज़ इंटरनेट और स्मार्ट ट्रिक अपनाकर आप कंफर्म टिकट पाने की संभावना बढ़ा सकते हैं। यहां हम आपको कुछ महत्वपूर्ण टिप्स बता रहे हैं, जिनसे आप फटाफट तत्काल टिकट बुक कर पाएंगे। तत्काल टिकट बुकिंग का सही समय तत्काल टिकट केवल ट्रेन यात्रा से एक दिन पहले ही बुक की जा सकती है। एसी श्रेणी (1AC, 2AC, 3AC) के लिए बुकिंग सुबह 10 बजे से शुरू होती है। स्लीपर क्लास के लिए तत्काल बुकिंग दोपहर 11 बजे से शुरू होती है। एक पीएनआर नंबर पर अधिकतम 4 यात्री ही जोड़े जा सकते हैं। पहले से सेव रखें जरूरी डिटेल्स यात्रियों का नाम, उम्र और लिंग जैसी जानकारी पहले से सेव करके रखें। आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट पर मास्टर लिस्ट फीचर का इस्तेमाल करें। इससे बुकिंग के दौरान केवल क्लिक करके तुरंत यात्री डिटेल भरी जा सकती है। मास्टर लिस्ट बनाने के फायदे मास्टर लिस्ट में आप अपने परिवार या अक्सर यात्रा करने वाले लोगों का नाम, उम्र, लिंग और आईडी प्रूफ सेव कर सकते हैं। इससे हर बार डिटेल टाइप करने की ज़रूरत नहीं पड़ती और टिकट बुक करने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है। पेमेंट ऑप्शन पहले से रखें सेव बुकिंग के दौरान पेमेंट प्रोसेस में समय बचाने के लिए अपना पसंदीदा पेमेंट मोड पहले से सेव रखें। आप नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, यूपीआई और मोबाइल वॉलेट जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर लगातार एक ही कार्ड या यूपीआई अकाउंट से भुगतान करते हैं, तो उसे फास्ट पेमेंट ऑप्शन में सेव कर लें। तेज इंटरनेट कनेक्शन है जरूरी तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान हर सेकंड मायने रखता है। धीमा इंटरनेट बुकिंग फेल या टिकट वेटिंग लिस्ट में जाने की संभावना बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि आपके पास हाई स्पीड वाई-फाई या 4G/5G इंटरनेट कनेक्शन हो। अतिरिक्त टिप्स बुकिंग ओपन होने से कुछ मिनट पहले ही आईआरसीटीसी वेबसाइट या ऐप में लॉग-इन कर लें। ऑटॉफिल विकल्प का इस्तेमाल करें, जिससे डिटेल भरने का समय कम लगे। बार-बार OTP एंटर करने की झंझट से बचने के लिए अपने अकाउंट को पहले से वेरिफाई रखें। आईआरसीटीसी की तत्काल टिकट बुकिंग भले ही काफी चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन अगर आप ये तैयारी पहले से कर लें तो आपके कंफर्म टिकट मिलने की संभावना कहीं ज्यादा बढ़ जाती है।  

स्वास्थ्य चेतावनी! अत्यधिक दुबलेपन से 3 गुना बढ़ जाता है असमय मौत का जोखिम

नईदिल्ली  अक्सर सभी ने सुना ही होगा कि अधिक वजन के कारण लोगों को कई समस्याएं होती हैं और आगे चलकर यही समस्याएं जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन सकती हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में दावा किया गया है कि थोड़ा अधिक वजन होना आपकी जिंदगी को छोटा नहीं कर सकता लेकिन बहुत ज़्यादा पतला होना आपकी जिंदगी को कम जरूर कर सकता है. दरअसल, शरीर के वजन और आपकी सेहत के बीच का संबंध अक्सर हम जितना समझ पाते हैं, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है. 85,000 से अधिक वयस्कों पर की गई डेनिश स्टडी में पाया गया है कि आसान भाषा में समझें तो 18.5 से कम बीएमआई वाले लोगों की समय से पहले मृत्यु होने की संभावना 22.5 और 24.9 के बीच बीएमआई वाले लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थी. पतले लोगों में समय से पहले मौत का खतरा आमतौर पर 18.5 से 24.9 बीएमआई को हेल्दी माना जाता है लेकिन रिसर्च में यह भी सामने आया कि इस रेंज के नीचे आने वाले लोगों की जान भी जोखिम में होती है. दरअसल, जिनका BMI 18.5 से 19.9 था, उनमें मौत का खतरा दोगुना पाया गया और वहीं जिनका बीएमआई 20 से 22.4 था, उनमें रिस्क 27 फीसदी तक था. हालांकि ये निष्कर्ष आश्चर्यजनक लगते हैं क्योंकि 18.5 और 24.9 के बीच बीएमआई को आमतौर पर स्वस्थ्य माना जाता है. ओवरवेट लोग अधिक खतरे में नहीं स्टडी में सामने आया है कि ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त (BMI 25 से 35) लोग जिनके बारे में माना जाता था कि उन्हें वजन के कारण जोखिम अधिक है, उन्हें मौत का खतरा अधिक नहीं था. सिर्फ जिनका बीएमआई 40 से अधिक था, उनमें ही मौत का जोखिम 2 गुना पाया गया था. यानी जिनका वजन थोड़ा ज्यादा है, उन्हें यह नहीं मान लेना चाहिए कि वे मौत के खतरे में है. रिसर्च के नतीजे इस बात को चैलेंज करते हैं कि पतला होना हमेशा सेहतमंद होता है और मोटापा हमेशा जोखिम में डालता है. क्यों खतरनाक है बहुत दुबला होना? एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत दुबले लोगों के शरीर में फैट स्टोर काफी कम होता है और जब कोई गंभीर बीमारी या ट्रीटमेंट (जैसे कि कैंसर की कीमोथेरेपी के दौरान वजन गिरता है) होता है तब शरीर को रिकवरी के लिए स्टोर किए गए फैट की जरूरत होती है. जिन लोगों के पास पर्याप्त फैट नहीं होता, उनका शरीर जल्दी कमजोर पड़ जाता है और जरूरी अंग सही से काम नहीं कर पाते. इस कारण अधिक पतला होना भी सेहतमंद नहीं बल्कि जानलेवा साबित हो सकता है. BMI हमेशा सही पैमाना नहीं रिसर्चर्स का कहना है कि BMI सिर्फ हाइट और वेट पर आधारित एक केल्कुलेशन है. यह शरीर की फैट डिस्ट्रिब्यूशन, डाइट, लाइफस्टाइल या जेनेटिक फैक्टर्स को शामिल नहीं करता और यही कारण है कि BMI हर व्यक्ति के लिए सटीक पैमाना नहीं हो सकता. डेनिश रिसर्चर्स का मानना है कि अब सेफ BMI रेंज 22.5 से 30 तक मानी जा सकती है. यानी थोड़ा-बहुत ओवरवेट होना उतना नुकसानदायक नहीं जितना पहले माना जाता था. रिसर्च का मुख्य संदेश यही है कि बहुत दुबला होना खतरनाक है और पतलापन हमेशा सेहतमंद नहीं होता. थोड़ा ज्यादा वजन होना हमेशा जानलेवा नहीं है. सेहत का असली पैमाना हेल्दी डाइट, एक्टिव लाइफस्टाइल और मेडिकल चेकअप होना चाहिए. BMI को सिर्फ एक इंडिकेटर मानना चाहिए.

Paytm ने लॉन्च किया Postpaid सर्विस, UPI यूजर्स को मिलेंगे बड़े लाभ

 नई दिल्ली फिनटेक कंपनी पेटीएम (Paytm) ने अपने यूजर्स के लिए एक शानदार नई सुविधा 'पेटीएम पोस्टपेड' (Paytm Postpaid) लॉन्च की है। अब आप यूपीआई (UPI) पेमेंट के लिए क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे छोटी-मोटी खरीदारी करना और भी आसान हो जाएगा। इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अभी खर्च कर सकते हैं और इसका भुगतान अगले महीने आराम से कर सकते हैं। कैसे काम करती है यह सुविधा? 'पेटीएम पोस्टपेड' सेवा नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (SSFB) के साथ मिलकर शुरू की गई है। इस सेवा का उद्देश्य लोगों को उनके रोजमर्रा के खर्चों में तुरंत क्रेडिट देना है। पेमेंट का तरीका: आप किसी भी यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन करके पेमेंट कर सकते हैं, चाहे वह ऑनलाइन शॉपिंग हो, मोबाइल रिचार्ज हो, बिल भुगतान हो या कोई बुकिंग हो। क्रेडिट की अवधि: इस सेवा में आपको 30 दिनों तक की शॉर्ट-टर्म क्रेडिट मिलती है, जिससे आप अपनी जरूरतों के हिसाब से तुरंत खर्च कर सकें। चयनित यूजर्स: फिलहाल, यह सुविधा सीमित यूजर्स के लिए शुरू की गई है, जिन्हें उनके खर्च करने के तरीके के आधार पर चुना गया है। आने वाले समय में इसे और ज्यादा लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यूजर्स और मर्चेंट्स को क्या मिलेगा फायदा? पेटीएम के सीओओ अविजीत जैन ने बताया कि यह सेवा भारतीय लोगों को उनके रोजमर्रा के खर्चों में वित्तीय लचीलापन देगी। यह न केवल यूजर्स के लिए भुगतान को आसान बनाती है, बल्कि व्यापारियों (मर्चेंट्स) को भी तुरंत पैसा मिलने और यूनिवर्सल स्वीकृति सुनिश्चित करती है।

नया Aadhaar App जल्द होगा लॉन्च, मोबाइल नंबर अपडेट करना होगा पहले से आसान

नई दिल्ली आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसी यूनिक आइडेंटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) अब एक नया ऐप लेकर आ रही है. इस ऐप की जानकारी खुद UIDAI के सीईओ भुवनेशर कुमार ने दी है. उन्होंने इस ऐप के प्रोग्रेस और इसके फीचर्स के बारे में बताया है. साथ ही उन्होंने मोबाइल नंबर अपडेट कराने का प्रोसेस भी बताया है.  UIDAI के सीईओ भुवनेशर कुमार ने इंडियाटुडे के साथ बातचीत में बताया कि नया आधार ऐप तैयार हो गया है, जो जल्द ही लॉन्च किया जाएगा. लॉन्चिंग टाइमलाइन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2-3 महीने के अंदर नया आधार ऐप लॉन्च हो जाएगा.  नए आधार ऐप को लेकर टेस्टिंग कंप्लीट हो चुकी हैं. इसके डेमो पूरा हो चुका है.   UIDAI के सीईओ ने बताया कि इस नए ऐप के अंदर आइडेंटी शेयरिंग का फीचर मिलेगा. ये डिटेल्स शेयरिंग आधार कार्ड होल्डर्स की परमिशन के बाद होगी. अभी तक लोगों को आधार संबंधित डिटेल्स आदि शेयर करने के लिए फोटोकॉपी लेकर जानी पड़ती है. न्यू ऐप के बाद ये काम डिजिटली तरीके से होगा.  मोबाइल नंबर नहीं करा सकेंगे अपडेट  भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि आधार से लिंक मोबाइल नंबर को बदलना आसान है, लेकिन यह एक सेंसटिव मामला भी है. आधार कार्ड पर न्यू मोबाइल नंबर को अपडेट कराने के लिए आधार सेंटर्स जाना जरूरी होगा. सेंटर्स पर पहले बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को कंप्लीट करना होगा, उसके बाद ही मोबाइल नंबर को अपडेट करा पाएंगे.  फेक आधार कार्ड को पहचानना आसान  फेक आधार कार्ड को लेकर भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि फर्जी आधार कार्ड को पहचानने के लिए एक खास फीचर मिलता है. सभी आधार कार्ड के ऊपर एक क्विक रिस्पोंस कोड (QR Code) मिलता है, जिसे स्कैन करके आधार कार्ड की सही जानकारी तक पहुंचा जा सकता है.