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होर्मुज प्रतिबंध को लेकर तनाव बढ़ा, डोनाल्ड ट्रंप बोले—ईरान की ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए। होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।" इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, "जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।"

नारी शक्ति पर नरेंद्र मोदी का भरोसा: ‘आरक्षण का संकल्प अटूट, हर रुकावट होगी पार’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विपक्ष की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ‘नारी शक्ति का अपराधी’ करार दिया है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस ऐतिहासिक सुधार को रोकने के लिए शुरू से ही षड्यंत्र रचे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन दलों ने महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का एक बड़ा अवसर खो दिया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, विपक्ष को डर है कि यदि महिलाएं सशक्त हो गईं, तो उनकी परिवारवादी राजनीति खतरे में पड़ जाएगी। इसीलिए उन्होंने इस विधेयक का समर्थन न करके देश की 50% आबादी के सपनों को रौंदने का काम किया है। परिसीमन का झूठ, अंग्रेजों वाली राजनीति संसद में चर्चा के दौरान PM Modi ने परिसीमन के मुद्दे पर फैलाई जा रही भ्रांतियों का भी जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ वाली नीति अपनाते हुए परिसीमन के नाम पर देश में दरार पैदा करने का प्रयास किया है। पीएम ने स्पष्ट किया कि आरक्षण लागू होने से सभी राज्यों की पहुंच और शक्ति समान स्तर पर बढ़ेगी, लेकिन विपक्ष ने अपनी स्वार्थी राजनीति के चलते इसमें अड़ंगा डाला। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सुधरने का एक मौका था, जिसे उन्होंने अपनी नकारात्मक सोच के कारण गँवा दिया है, जिसका परिणाम अब जनता के सामने है। विकास विरोधी चेहरा कांग्रेस का पुराना इतिहास कांग्रेस को ‘एंटी-रिफॉर्म’ पार्टी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि इस दल ने हमेशा देश के विकास में रुकावटें डाली हैं। चाहे वह सीएए (CAA) कानून हो या सीमा विवादों का समाधान, कांग्रेस हमेशा विरोध की तख्ती लेकर विकास को लटकाती आई है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस की इसी नकारात्मकता के कारण भारत आज उस ऊंचाई पर नहीं है जहां उसे होना चाहिए था। उन्होंने चेतावनी दी कि अब देश की बेटियां विपक्ष के इस अड़ियल रवैये का जवाब देंगी और उनकी हर साजिश को बेनकाब करेंगी। अचूक संकल्प: बिल पास करवाकर रहेगी सरकार: PM Modi भले ही वर्तमान में विधेयक को आवश्यक बहुमत न मिल पाया हो, लेकिन PM Modi ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि भाजपा और एनडीए का आत्मबल अजय है। उन्होंने कहा, “भले ही हमें संसद में 66% वोट न मिले हों, लेकिन देश की नारी शक्ति का 100% आशीर्वाद हमारे पास है।” प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे विज्ञापन छपवाकर उन्हें क्रेडिट देने को तैयार हैं, बस वे बिल का समर्थन करें। उन्होंने वादा किया कि हर रुकावट को खत्म करके यह बिल पास करवाया जाएगा और नारी शक्ति को उनका हक दिलाकर ही दम लिया जाएगा।

West Asia संकट पर मंथन: ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक की कमान संभालेंगे राजनाथ सिंह

नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुनिश्चित करने में जुटी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज मंत्रियों के समूह के साथ बैठक कर पेट्रोल, डीजल और खाद की उपलब्धता की समीक्षा करेंगे। सरकार का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखना है।   पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने मंत्रियों का एक विशेष समूह (जीओएम) गठित किया है। इस समूह की एक अहम बैठक आज फिर आयोजित की जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार शाम चार बजे इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के ताजा हालातों और भारत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर चर्चा होगी। बैठक में एलपीजी सप्लाई, पेट्रोल डीजल, फर्टिलाइजर्स आदि की सप्लाई को लेकर समीक्षा की जाएगी।   इससे पहले 8 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में इस समूह की तीसरी बैठक हुई थी। उस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। उस दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि सरकार देश के भीतर जरूरी सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने विशेष रूप से रसोई गैस, ईंधन और किसानों के लिए खाद की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया था। सरकार का प्रयास है कि देशभर में जरूरी सामानों की सप्लाई सुचारु रहे ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया था कि सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को पहले से ही मजबूत कर रही है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लगातार निगरानी रखना और समय पर सही निर्णय लेना बहुत आवश्यक हो गया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के प्रभाव से देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर स्तर पर तालमेल बिठाकर काम कर रही है। इस समूह की दूसरी बैठक दो अप्रैल को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुई थी। उस बैठक में भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन मंथन हुआ था और खतरों को कम करने की रणनीति बनाई गई थी। रक्षा मंत्री ने तब कहा था कि भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके लिए 24 घंटे निगरानी रखना और सोच-समझकर प्रतिक्रिया देना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य है कि देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति पर कोई बुरा असर न पड़े। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

संशोधन बिल गिरा तो नरेंद्र मोदी का कड़ा रुख—‘हर गांव तक ले जाएंगे सच’

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक के गिर जाने पर गहरी नाराजगी और निराशा व्यक्त की है। महिला आरक्षण से जुड़े इस महत्वपूर्ण बिल का समर्थन न करने को लेकर पीएम मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को अपने इस फैसले के लिए 'जिंदगी भर पछताना पड़ेगा।' संसद भवन में CCS की बैठक के दौरान की टिप्पणी खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने ये टिप्पणियां दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक के दौरान कीं। बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि विपक्षी दलों को इस बिल को समर्थन न देने की भारी 'कीमत चुकानी होगी।' उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अब अपने इस कदम का बचाव करने और इस पर पर्दा डालने के लिए तरह-तरह के बहाने ढूंढ रहे हैं। हर गांव तक संदेश पहुंचाने का आह्वान प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को सीधे जनता के बीच ले जाने पर जोर दिया है। पीएम ने कहा: उन्हें (विपक्ष को) इसकी कीमत चुकानी होगी। हमें देश के हर गांव तक यह बात पहुंचानी होगी कि विपक्ष की मानसिकता पूरी तरह से महिला विरोधी है। वे पहले से ही अपनी इस गलती को छिपाने के लिए कारण ढूंढने में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाएगी और विपक्ष के इस कदम को पूरे देश में 'महिला विरोधी' कृत्य के तौर पर पेश करेगी। 131वां संविधान संशोधन बिल क्या था? केंद्र सरकार द्वारा 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किए गए 131वें संविधान संशोधन बिल के मुख्य रूप से तीन बड़े और दूरगामी उद्देश्य थे। लोकसभा सीटों का विस्तार: इस बिल के तहत लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। इसमें राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्यों के चुने जाने की व्यवस्था थी। समय से पहले परिसीमन: संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन करके परिसीमन प्रक्रिया में बदलाव लाना। मौजूदा नियम के मुताबिक अगला परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर होना था। लेकिन यह बिल उस रोक को हटाकर 2011 की जनगणना के आधार पर ही तुरंत नया परिसीमन लागू करने का रास्ता साफ कर रहा था। महिला आरक्षण का तत्काल क्रियान्वयन: 2023 में पास हुए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है। सरकार इसको इसी नए परिसीमन के लागू होते ही धरातल पर उतारना चाहती थी। यह बिल कैसे गिर गया? 17 अप्रैल को लोकसभा में दो दिनों की लंबी बहस के बाद जब इस बिल पर वोटिंग हुई, तो यह तकनीकी और राजनीतिक कारणों से जरूरी आंकड़ा नहीं जुटा सका। संविधान संशोधन की शर्त: किसी भी संविधान संशोधन बिल को पास करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले कुल सदस्यों के दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत की आवश्यकता होती है। वोटिंग के आंकड़े: वोटिंग के दौरान लोकसभा में कुल 528 सांसद उपस्थित थे। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 230 वोट डाले गए। दो-तिहाई बहुमत (लगभग 352 वोट) का अनिवार्य जादुई आंकड़ा न छू पाने के कारण यह ऐतिहासिक बिल 54 वोटों की कमी से गिर गया। इस प्रमुख बिल के गिरने के ठीक बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने घोषणा की कि सरकार परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े अन्य दो संबंधित बिलों पर भी अब आगे नहीं बढ़ेगी। विपक्ष ने क्यों किया इसका कड़ा विरोध? विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया कि वे महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन उनका असली विरोध बिल में शामिल 'परिसीमन' के पेंच को लेकर था। दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान की आशंका: विपक्ष का सबसे बड़ा तर्क यह था कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ, तो दक्षिण भारतीय राज्यों को भारी नुकसान होगा। इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतरीन काम किया है, इसलिए नए परिसीमन से लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व घट जाएगा और उत्तर भारतीय राज्यों का दबदबा बढ़ जाएगा। सियासी फायदे का आरोप: विपक्षी धड़े ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह 'महिला आरक्षण' जैसे संवेदनशील मुद्दे की आड़ में जल्दबाजी में परिसीमन थोपना चाहती है, ताकि देश के चुनावी नक्शे को बदलकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके। विपक्ष के इसी एकजुट विरोध के कारण सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही और 2014 के बाद पहली बार मोदी सरकार को संसद में किसी इतने बड़े विधायी प्रस्ताव पर हार का सामना करना पड़ा।  

बिल पर असफलता के बाद CM राज्यसभा पहुंचे, संसद के बजट सत्र में बना रिकॉर्ड

नई दिल्ली संसद का शनिवार को संपन्न हुआ बजट सत्र कई बातों को लेकर संसदीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। इसी दौरान महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार लोकसभा की मंजूरी दिलवाने में विफल रही। सत्र के दौरान एक दुर्लभ बात उस समय भी देखने को मिली जब राष्ट्रपति अभिभाषण का धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के बिना ही पारित हो गया। हालांकि राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इसी सत्र के दौरान लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध लाए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई और निचले सदन ने बाद में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव पर चर्चा और इसे खारिज किए जाने तक बिरला ने अध्यक्ष के तौर पर सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं किया। राज्यसभा में इस सत्र के दौरान एक नया इतिहास तब दर्ज किया गया जब कोई मनोनीत सदस्य उप सभापति पद पर निर्वाचित हुआ। मनोनीत सदस्य हरिवंश को शुक्रवार को निर्विरोध उपसभापति निर्वाचित किया गया। इससे पहले भी हरिवंश लगातार दो बार उच्च सदन के उप सभापति पद पर निर्वाचित हो चुके हैं। मगर उस दौरान वह जनता दल (यू) सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए मुख्यमंत्री यह भी एक ऐतिहासिक घटनाक्रम रहा जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया हो और उन्होंने पद छोड़ दिया। नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिया। उन्होंने बजट सत्र के दूसरे चरण में उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली। देश में संभवत: पहली बार आम बजट रविवार को पेश किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी, 2026 यानी रविवार को अगले वित्त वर्ष के लिए बजट पेश किया। उन्होंने अपना लगातार नौवां बजट पेश किया। इसी सत्र में एक नया इतिहास यह भी बना कि सत्र का समापन होने से ठीक पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम की केवल धुन बजाए जाने के स्थान पर इसके पूरे छह अंतरों का पहले से रिकॉर्ड किया गया गान बजाया गया। लोकसभा में गुरुवार और शुक्रवार को महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर एकसाथ चर्चा की गई। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान में यह पारित नहीं हो पाया। इस कारण से सरकार ने अन्य दो विधेयक पारित करवाने के लिए नहीं रखा। मोदी सरकार के लगभग 12 वर्ष के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई सरकारी विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ था और इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला था। इसका दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू हुआ और सरकार ने पहले घोषणा की थी कि यह दो अप्रैल तक चलेगा। मगर 2 अप्रैल को संसद के दोनों सदनों में घोषणा की गई कि अगली बैठक 16 अप्रैल को होगी। सत्र को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।  

भाषा नियम पर सियासत गरमाई—रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, यूनियन ने जताया विरोध

मुंबई महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि 1 मई 2026 से, यानी महाराष्ट्र दिवस से राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया जाएगा। इसके तहत चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए। अगर कोई चालक इस भाषा में बुनियादी दक्षता नहीं दिखा पाता, तो उसके लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा। परिवहन विभाग के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें चालकों की मराठी भाषा की जांच की जाएगी।  यह कदम यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और स्थानीय भाषा के सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए, ताकि मुसाफिरों की सुविधा बढ़े और कोई गलतफहमी न हो। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नियम मोटर वाहन नियमों के तहत आता है और इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। इस फैसले पर महाराष्ट्र ऑटोरिक्शा चालक-मालक संघटना संयुक्त कृती समिती ने तीखा विरोध जताया है। संगठन के अध्यक्ष शशांक राव ने कहा कि हम सरकार के इस निर्णय का पुरजोर विरोध करते हैं। उन्होंने इसे चालकों पर अनुचित बोझ बताया और मांग की कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। शशांक राव ने आगे कहा, “हमारा संगठन परिवहन मंत्री के उस फैसले का विरोध करता है, जिसमें 1 मई 2026 से लाइसेंस प्राप्त रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बना दिया गया है।” संगठन का कहना है कि कई चालक अन्य राज्यों से आकर महाराष्ट्र में काम करते हैं। उन्हें अचानक इतना कम समय देकर नई भाषा सीखने की मजबूरी उनके जीवनयापन पर असर डाल सकती है। वहीं, यूनियन ने सरकार से अपील की है कि चालकों को पर्याप्त समय और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस नियम का पालन कर सकें। विरोध जताते हुए संगठन ने कहा कि मराठी भाषा सीखना जरूरी हो सकता है, लेकिन अचानक सख्ती और लाइसेंस रद्द करने की धमकी से चालकों में आक्रोश फैल गया है।

ईरान के लिए ट्रंप का कड़ा संदेश: ‘डील करो, नहीं तो होगी बमबारी

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने दोहरे तेवर में नजर आए हैं. एक तरफ वे ईरान के साथ युद्ध खत्म होने पर व्हाइट हाउस में "पार्टी" करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ खुली चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तय समय तक समझौता नहीं हुआ, तो फिर से बमबारी शुरू हो सकती है।  एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ कहा कि वह ईरान के साथ चल रहे सीजफायर को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं भी हो सकते. उन्होंने कहा, "शायद मैं इसे एक्सटेंड न करूं. अगर ऐसा हुआ तो ब्लॉकेड जारी रहेगा और हमें फिर से बम गिराने पड़ सकते हैं।  राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि 21 अप्रैल की डेडलाइन बेहद अहम है. अगर इस तारीख तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो सीजफायर खत्म हो सकता है. इसका मतलब साफ है कि मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की तरफ बढ़ सकता है. हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि डील हो जाएगी. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह होने वाला है" लेकिन ईरान का कहना है कि उनकी बातों पर भरोसे कम है।  होर्मुज के आसपास ब्लॉकेड रहेगा जारी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि चाहे सीजफायर बढ़े या नहीं, अमेरिका का ईरान पर लगाया गया नौसैनिक ब्लॉकेड जारी रहेगा. यह ब्लॉकेड ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इससे उसके तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ता है. यानी भले ही बातचीत जारी हो, लेकिन दबाव की राजनीति भी साथ-साथ चलती रहेगी।  अमेरिका-ईरान में बातचीत की कोशिशें जारी इस बीच खबर है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि जल्द ही पाकिस्तान में एक नई बातचीत के दौर के लिए मिल सकते हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश में हैं. ईरानी सूत्रों की तरफ से खबरें चल रही हैं कि सोमवार को ये बातचीत इस्लामाबाद में होगी और रविवार शाम तक दोनों देशों के नेता पाकिस्तान पहुंचेंगे. पिछले दौर की बातचीत बिना नतीजे के खत्म हुई थी, ऐसे में इस बार का राउंड और भी अहम माना जा रहा है।  ट्रंप का "डबल गेम" ट्रंप की रणनीति को समझना मुश्किल नहीं है. एक तरफ वह बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाए रखते हैं.  फिलहाल हालात बेहद नाजुक हैं. 21 अप्रैल की डेडलाइन करीब है और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं। 

बड़ी खबर: होर्मुज में भारतीय टैंकर पर फायरिंग, समुद्री इलाके में बढ़ा तनाव

नई दिल्ली भारतीय नौसेना इस घटना की डिटेल्स का पता लगाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिलहाल कोई भारतीय नौसेना का जहाज मौजूद नहीं है। भारत के पास गल्फ ऑफ ओमान में 2 डिस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक टैंकर तैनात हैं। ओमान के उत्तर में भारतीय क्रूड ऑयल टैंकर पर ईरानी नौसेना ने गोलीबारी की है, जिसमें लगभग 20 लाख बैरल इराकी तेल लदा था। यह जानकारी उन लोगों ने दी जो इस मामले से वाकिफ हैं। इस घटना से ठीक पहले दो भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया था। इस घटना में दो जहाज (जग अर्णव और सनमार हेराल्ड) शामिल थे। इनमें से केवल एक पर सीधा हमला हुआ। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, जग अर्णव पर फायरिंग की गई, जिससे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। वहीं, आसपास मौजूद सनमार हेराल्ड को निशाना नहीं बनाया गया और वह सुरक्षित रहा। अब तक की रिपोर्ट में क्या पता चला भारतीय नौसेना इस घटना की डिटेल्स का पता लगाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिलहाल कोई भारतीय नौसेना का जहाज मौजूद नहीं है। भारत के पास गल्फ ऑफ ओमान में 2 डिस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक टैंकर तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि भारत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से की गई इस फायरिंग को गंभीरता से ले रहा है। भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खुली और स्वतंत्र नौवहन की नीति का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि फायरिंग वाले टैंकर के बगल में एक और भारतीय क्रूड ऑयल टैंकर मौजूद था, लेकिन उस पर कोई हमला नहीं हुआ। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल पारगमन गलियारों में से एक है। यहां से वैश्विक क्रूड शिपमेंट्स का करीब 20% गुजरता है। भारत उन देशों में शामिल है जिनके सबसे ज्यादा जहाज इस स्ट्रेट से गुजरते हैं, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता को दर्शाता है। ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही जंग के बीच भारत को मित्र राष्ट्र की सूची में रखा है। इसलिए ईरान भारतीय जहाजों को इस स्ट्रेट से गुजरने की इजजात दे रहा है, जबकि अन्य देशों के जहाजों को ड्रोन-मिसाइल हमलों की धमकी देकर रोका जा रहा है।  

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत, DA में 2% की वृद्धि को मिली कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली जिस पल का लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इंतजार कर रहे थे, वो पल आज आ गया है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 2% बढ़ोतरी को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इससे पहले अक्टूबर में DA को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था, जो 1 जुलाई 2025 से लागू हुआ था. बाद में इसका एरियर भी दिया गया था, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को फायदा मिला था।  केंद्र सरकार समय-समय पर अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनर्स की महंगाई राहत (DR) बढ़ाती रहती है. आपको बता दें कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) साल में दो बार बढ़ाती है. अब कितनी मिलेगी सैलरी? मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है. अभी 58% डीए के हिसाब से उसे हर महीने 29,000 रुपये डीए मिल रहा है. अगर इसमें 2% की बढ़ोतरी होती है, तो डीए 60% हो जाएगा और उसे 30,000 रुपये मिलने लगेंगे. यानी हर महीने 1,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी, साथ ही जनवरी से एरियर का भी फायदा मिलेगा।  यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्मचारी संगठनों की ओर से प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग में वेतन स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग की गई. नेशनल काउंसिल–जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) ने अपने प्रस्ताव में 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक हो सकती है. सरकार के इस फैसले से करीब 1.19 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा मिलेगा।  अब कितनी बढ़ेगी सैलरी? बता दें कि अगर किसी केंद्रीय कर्मचारी का बेसिप पे 36 हजार 500 रुपए है तो 60 फीसदी के हिसाब से अब उसका डीए   21 हजार 900 रुपए हो जाएगा. बड़ी बात यह है कि अब कर्मचारियों को जनवरी से एरियर भी मिलेगा. नया नियम 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा. इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को केवल अगले महीने की बढ़ी हुई सैलरी ही नहीं मिलेगी, बल्कि पिछले तीन महीनों यानी जनवरी फरवरी और मार्च का बकाया एरियर  भी एकमुश्त दिया जाएगा।  लंबे समय से इंतजार कर रहे थे कर्मचारी केंद्र सरकार के इस कदम से उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो पिछले कुछ समय से इस घोषणा का इंतजार कर रहे थे और बढ़ती महंगाई के बीच अपनी आय बढ़ाने की मांग कर रहे थे. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन संरचना में बड़े बदलावों की मांग कर रहे हैं।  क्यों बढ़ाया जाता है महंगाई भत्ता? बढ़ती महंगाई के कारण सरकारी कर्मचारियों के खर्चों की भरपाई के लिए सरकार साल में दो बार जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाती है. इसकी गणना श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो यह बताते हैं कि जरूरी चीजों के दाम कितने बढ़े हैं. आसान शब्दों में जैसे-जैसे बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, आपकी सैलरी की वैल्यू बनाए रखने के लिए सरकार इस भत्ते में बढ़ोतरी करती है।  साल में दो बार बढ़ता है डीए सरकार आमतौर पर साल में दो बार जनवरी और जुलाई के लिए DA (महंगाई भत्ता) बढ़ाती है, और इसकी घोषणा अक्सर त्योहारों के समय जैसे होली या दिवाली के आसपास की जाती है. पिछले साल मार्च के अंत में DA बढ़ोतरी की घोषणा हुई थी, जबकि जुलाई की बढ़ोतरी का ऐलान अक्टूबर में किया गया था।  इस साल कर्मचारियों को उम्मीद थी कि होली यानी मार्च की शुरुआत तक DA बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसी वजह से यह मामला पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा देरी वाला भी माना जा रहा था, क्योंकि आमतौर पर सरकार मार्च के अंत तक DA बढ़ोतरी की घोषणा कर देती है. हालांकि, एक्सपर्ट के अनुसार, यह देरी मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और मंजूरी के अलग-अलग चरणों की वजह से हो रही थी।  सॉवरेन मेरिटाइम फंड को भी मंजूरी कैबिनेट ने प्रस्ताव में ‘परिवार’ की परिभाषा को बढ़ाकर आश्रित माता-पिता को भी शामिल करने की बात कही गई है. साथ ही वेतन में ज्यादा अंतर पर लीमिट तय करने, ज्यादा इंक्रीमेंट देने और महंगाई से जुड़े भत्तों को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. कैबिनेट ने 13,000 करोड़ रुपये के फंड के साथ एक सॉवरेन मेरिटाइम फंड (Sovereign Maritime Fund) को भी मंजूरी दी है. इसका मकसद भारतीय जहाजों के लिए सस्ता और स्थिर बीमा कवर उपलब्ध कराना है. इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 2028 तक बढ़ा दिया गया है और इसके लिए 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी मंजूर किया गया है।  58% से बढ़कर 60% हो जाएगा DA केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल DA के तौर पर मूल वेतन के 58% की दर से राशि मिलती है. अब 2% बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने के बाद अब ये 60% हो जाएगा. कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी का 60% DA मिलेगा, जबकि पेंशनर्स को उनके मूल पेंशन का 60% DR मिलेगा।  महंगाई भत्ते या महंगाई राहत का सीधा संबंध महंगाई से होता है. सरकार, साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में इसमें बदलाव किया जाता है, यानी बढ़ाया जाता है. इसका कैलकुलेशन AICPI-IW यानी औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर की जाती है, जिसे श्रम ब्यूरो (श्रम मंत्रालय) हर महीने जारी करता है. AICPI-IW के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से DA में 2% की बढ़ोतरी तय मानी जा रही थी. हालांकि कुछ वर्ग को 3% बढ़ोतरी की भी उम्‍मीद थी। 

आज रात 8.30 बजे पीएम मोदी का संबोधन, ‘नारी शक्ति बिल’ पर हो सकती है अहम बात

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8.30 बजे देश को संबोधित करेंगे। उनका ये संबोधन ऐसे समय हो रहा है, जब एक दिन पहले ही लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत न हो पाने की वजह से एनडीए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में पास नहीं करवा पाई है। पिछले 12 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब मोदी सरकार का कोई बिल वोटिंग के बाद संसद में गिर गया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस बिल को लेकर ही देश को संबोधित कर सकते हैं। विपक्ष ने जमकर किया था विरोध बता दें कि एक दिन पहले ही लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बाद महिला आरक्षण को लेकर लाया गया बिल गिर गया था। तब विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इस बिल का विरोध किया था। इस दौरान संसद में हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली थी। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल के दौरान परिसीमन का खेल खेलना चाहती है। इससे दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। पीएम मोदी ने की थी ये खास अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर वोटिंग से पहले ट्वीट पर एक संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है। महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें। सरकार ने किया था ये अनुरोध. शुक्रवार को लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। इसके चलते संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण मिलने का इंतज़ार अभी जारी है। इस बिल का उद्देश्य था कि साल 2029 से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाए और लोकसभा की सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाए। लेकिन इस प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया। वोटिंग के दौरान कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया। इनमें से 298 सदस्यों ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया। संविधान संशोधन बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है, जिसके लिए कम से कम 352 वोट चाहिए थे, जो इस बिल को नहीं मिल सके। बिल पास न होने के बाद सरकार ने ओम बिरला से यह भी अनुरोध किया कि वे दो अन्य प्रस्तावित कानूनों पर फिलहाल आगे कार्रवाई न करें। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम पर प्रधानमंत्री ने आगे कहा था कि आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं। अब कुछ ही देर लोकसभा में मतदान होने वाला है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं, अपील करता हूं। कृपया करके सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें, महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें। मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा। कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है। कृपया करके नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का साथ दें।