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देवेंद्र फडणवीस का भावुक बयान- अजित दादा जैसा कद दोबारा नहीं मिलेगा, अपूरणीय क्षति

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे जो महाराष्ट्र के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन राज्य को उनका नेतृत्व उस रूप में कभी नहीं मिल पाया। उनके जाने से एक खालीपन पैदा हो गया है और अब वैक्यूम शब्द का असली मतलब समझ में आ रहा है। विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस खालीपन को भर पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि “दादा” जैसा नेता फिर कभी देखने को नहीं मिलेगा। फडणवीस ने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान अजित पवार हमेशा सबसे पहले विधान भवन पहुंचते थे और अपनी सीट पर मौजूद रहते थे। सदन की कार्यवाही कितनी भी लंबी क्यों न चले, वह अंत तक अपनी जगह पर डटे रहते थे। यह बहुत पीड़ादायक है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करते और अगले साल 13वां बजट पेश कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेते, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया। इस बार बजट पेश करने की जिम्मेदारी खुद संभाल रहे फडणवीस ने कहा कि बजट के मामले में अजित पवार कभी भी कठिन फैसले लेने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब वित्त विभाग ने ‘लड़की बहिन’ योजना पर भारी आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए दोबारा विचार करने का सुझाव दिया था, तब भी अजित पवार अपने फैसले पर कायम रहे और यह सुनिश्चित किया कि योजना शुरू की जाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “लड़की बहन योजना शुरू होने के बाद अजित पवार ने गुलाबी जैकेट पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने हमें भी वह जैकेट पहनाई थी। अब ये बातें सिर्फ यादें बनकर रह गई हैं। यह शोक प्रस्ताव लाना मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन मेरे लिए यह बहुत भावुक क्षण है।” महाकवि भास के नाटक स्वप्नवासवदत्तम की एक पंक्ति का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा कि अजित पवार का जाना केवल राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनके लिए गहरा व्यक्तिगत दुख भी है। उन्होंने कहा, “कहते हैं समय हर घाव भर देता है, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी कम नहीं होते, चाहे कितना भी समय बीत जाए। यह वैसा ही दर्द है। किसी नेता के जाने के बाद हम अक्सर कहते हैं कि एक ‘खालीपन’ बन गया है, लेकिन जब अजित दादा जैसे नेता चले जाते हैं, तब सच में उस शब्द का मतलब समझ में आता है। उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता।” मुख्यमंत्री ने एक प्रेरक पंक्ति भी दोहराई, “काम को जिंदगी दो और मौत को आराम।” उन्होंने अजित पवार को ऐसा नेता बताया, जिसने अपने जीवन का हर पल काम के लिए समर्पित किया और हर काम की योजना बनाई। फडणवीस ने कहा, “हम दोनों का जन्म 22 जुलाई को हुआ था। वह मुझसे 11 साल बड़े थे, इसलिए सच मायनों में मेरे ‘दादा’ थे। हमारी दस साल से अधिक समय तक गहरी दोस्ती रही। हम 1999 में मिले थे लेकिन 2014 के बाद हमारे बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया। मैं एनसीपी को राजनीतिक सहयोगी मानता था, लेकिन अजित दादा को हमेशा भावनात्मक रूप से करीब माना।” उन्होंने 2019 में सरकार गठन से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे, जो हर स्थिति में अपनी बात खुलकर रखते थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “2019 में सरकार बनाने का फैसला हुआ था, लेकिन बाद में उनके वरिष्ठ नेताओं ने अपना निर्णय बदल दिया, फिर भी क्योंकि उन्होंने मुझसे वादा किया था, उन्होंने उसे निभाने का फैसला किया। कई लोग इसे ‘सुबह-सुबह की शपथ’ कहते थे, लेकिन इस बात से दादा को चिढ़ होती थी। उनका कहना था कि ‘सुबह-सुबह’ का मतलब छह बजे होता है, जबकि हमने नौ बजे शपथ ली थी। उन्हें इस फैसले की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जब सुप्रीम कोर्ट ने हमारे खिलाफ फैसला दिया, तब हम दोनों ‘वर्षा’ बंगले पर मौजूद थे। मैंने उनसे कहा था कि वे अपना निर्णय खुद लें, क्योंकि उन्हें अपने साथ जुड़े लोगों के भविष्य के बारे में भी सोचना है।” फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार समय के बेहद पाबंद नेता थे और उनका राजनीतिक सफर भी लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “दादा हमेशा समय का पूरा ध्यान रखते थे, लेकिन इस बार वे अपनी ही टाइमिंग से चूक गए। सबने उन्हें लंबी पारी खेलते देखा, लेकिन वे बहुत जल्दी हमें छोड़कर चले गए।” उन्होंने बताया कि अजित पवार छह बार उपमुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वे अक्सर मजाक में कहते थे, “मैं किसी दिन मुख्यमंत्री बनूंगा लेकिन अभी के लिए उपमुख्यमंत्री ही ठीक है।”

हालात बिगड़े, भारत की एडवाइजरी जारी: ईरान छोड़ें भारतीय नागरिक

ईरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराने के बाद भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर नागरिकों से देश छोड़ने की अपील की है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि लोग किसी भी तरह से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकल जाए। दूस्तवास ने इस संबंध में कई अन्य निर्देश भी दिए हैं। भारत सरकार ने जनवरी में जारी अपनी पिछली एडवाइजरी को दोहराया है जिसमें लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई थी। एडवाइज़री में लिखा था, “सभी भारतीय नागरिकों और PIO को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, विरोध या प्रदर्शन वाली जगहों से बचना चाहिए, ईरान में भारतीय एम्बेसी के संपर्क में रहना चाहिए और किसी भी डेवलपमेंट के लिए लोकल मीडिया पर नजर रखनी चाहिए।” हेल्पलाइन नंबर भी जारी दूतावास ने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह देते हुए, उनसे अपने इमिग्रेशन और ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स अपने पास रखने और किसी भी मदद के लिए इंडियन एम्बेसी से संपर्क करने को कहा है। भारतीय दूतावास ने इस संबंध में भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। फंसे हुए नागरिक इन मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर मदद मांग सकते हैं: +989128109115; +989128109109, +989128109102, +989932179359। कभी भी हमला कर सकता है अमेरिका गौरतलब है कि बीते महीने ईरान में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद से ही अमेरिका खामेनेई शासन को सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां दे रहा है। बीते महीने से लेकर अब तक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सप्ताह एक बार फिर यह बयान दिया है कि वह ईरान पर हमले का विचार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ दोनों पक्षों के बीच परमाणु वार्ता भी जारी है। हालांकि इससे कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। अगले दौर की वार्ता कब? इन सब के बीच ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अगला दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा। बद्र अल-बुसैदी ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है कि 'समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की दिशा में सकारात्मक पहल की गई है'। ओमान ने इससे पहले जिनेवा में हुई वार्ता की भी मेजबानी की थी।  

गुजरात का बुलडोजर अभियान तेज़: राजकोट में 1400+ अवैध ढांचों पर कार्रवाई

राजकोट गुजरात के राजकोट में रविवार को नगर निगम के अधिकारियों ने शहर में अवैध कब्जे हटाने का एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई में 1,489 अवैध इमारतों को गिराया जाएगा। अधिकारियों ने जानकारी दी कि डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी के आदेश मिलने के बाद, राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने जंगलेश्वर इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।   क्या बोले अधिकारी? म्युनिसिपल कमिश्नर तुषार सुमेरा ने बताया कि पुलिस की मदद से जंगलेश्वर में अजी नदी के किनारे और म्युनिसिपल टाउन प्लानिंग रोड पर बनी 1,489 संपत्तियों को हटाया जाएगा। निगम ने शनिवार से ही लोगों से घर खाली करवाना शुरू कर दिया था। सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम इस अभियान को पूरा करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भक्तिनगर सर्कल के पास सेठ हाई स्कूल में 2,500 से ज्यादा निगम अधिकारी और पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि कई लोग शांति से घर खाली कर रहे हैं और उन्हें अपना सामान ले जाने की छूट दी गई है। यह काम नियमों के मुताबिक ही किया जाएगा। कमिश्नर सुमेरा ने बताया कि मौके पर एक कंट्रोल रूम बनाया गया है और वे खुद पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं। क्या बोले लोग? हालांकि, प्रशासन के इस कदम से वहां दशकों से रह रहे लोगों में काफी गुस्सा है। जंगलेश्वर गली नंबर तीन के रहने वाले हारुनभाई सुमरा ने बताया कि वे 43 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। वे और उनकी बहन दोनों दिव्यांग हैं और मजदूरी करके पेट पालते हैं। उन्होंने कहा, 'हमें सिर्फ दो दिन पहले बताया गया कि हमारा घर गिरा दिया जाएगा। अब हम कहां जाएंगे? हमें शायद सड़कों पर रहना पड़े।' वहीं, एक अन्य निवासी हालिनबेन ने कहा कि उनका परिवार 50 साल से यहां रह रहा है और उन्हें घर खाली करने का आदेश मिला है। उन्होंने कहा, 'आठ लोगों के परिवार को कोई भी किराए पर घर देने के लिए तैयार नहीं है। हम सड़क पर रहने की तैयारी कर रहे हैं।'

हाई कोर्ट जज की सख्त टिप्पणी: गुरु का आदर न करने वालों पर तीखा प्रहार

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट के जज जीआर स्वामीनाथन नए विवाद में पड़ गए हैं। खबर है कि एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कह दिया कि आध्यात्मिक गुरुओं को नहीं मानने वाले दुष्ट होते हैं। मदुरै की तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर 'कार्तिगई दीपम्' जलाने के मामले में जस्टिस स्वामीनाथन विवादों में आ गए थे। उन्होंने 1 दिसंबर 2025 में उन रिट याचिकाओं को स्वीकार किया था, जिसमें दीप जलाने की अनुमति मांगी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जज ने कहा, 'तमिलनाडु में कुछ लोग खुद को रेशनलिस्ट (तर्कवादी) कहते हैं। वो हमें बदमाश, मूर्ख और क्रूर कहते हैं, क्योंकि हम गुरु को भगवान के रूप में देखते हैं। मैं कहता हूं कि ऐसा कहने वाले ही बदमाश, मूर्ख और क्रूर हैं।' वह तमिलनाडु में एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में पहुंचे थे और कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'मेरी सेवा चार साल की और बची है। मुझे लगता है कि मुझे आगे आना चाहिए और हिम्मत के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।' इस दौरान उन्होंने मुश्किल समय में आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें हिम्मत और समर्थन गुरु के आशीर्वाद से मिला है। जज बताते हैं कि वह अभी तेनकासी के पास एक योगी के संपर्क में हैं। जब वेदों को लेकर दिया बयान कुछ समय पहले जस्टिस स्वामीनाथ ने वेदों को लेकर भी बयान दे दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था, 'अगर हम वेदों की रक्षा करेंगे, तो वेद हमारी रक्षा करेंगे।' इस बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था। आरोप लगाए जा रहे थे कि जज संविधान के ऊपर धार्मिक बातों को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्या था दीप जलाने का मामला जस्टिस स्वामीनाथन ने एक दिसंबर, 2025 को उन रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था जिनमें एक दरगाह के निकट तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ 'दीपथून' पर कार्तिकई दीपम् को प्रज्वलित करने के लिए उचित व्यवस्था करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो जस्टिस स्वामीनाथन ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित किया जिसमें श्रद्धालुओं को स्वयं दीपक जलाने की अनुमति दी गई और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया।  

कोर्ट में बढ़ी तल्खी: अडानी-अंबानी का नाम लेते ही CJI सूर्यकांत ने वकील को चेताया

नई दिल्ली भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान नाराज हो गए। खबर है कि इसकी वजह वकील की तरफ से पेश की गई दलील थी, जिसमें उन्होंने अदालत पर सुनवाई नहीं करने के आरोप लगाए थे। नौबत यहां तक आ गई कि सीजेआई ने वकील को दो टूक कह दिया कि वह अदालत में पेश होने और सामग्री पेश करने के दौरान सावधान रहें। वाकया सोमवार का है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का दौर चल रहा था। उस दौरान एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्पारा की बात पर सीजेआई ने आपत्ति जताई थी। लाइव लॉ के अनुसार, एडवोकेट नेदुम्पारा ने कहा अडानी और अंबानी के लिए बेंच बन रहीं हैं, लेकिन NJAC की चुनौती पर सुनवाई नहीं हो रही है। इतना कहते ही सीजेआई ने उन्हें जमकर फटकार लगाई और चेतावनी भी दे दी। सीजेआई ने कहा, 'मिस्टर नेदुम्पारा, आप जो भी मेरी कोर्ट में पेश कर रहे हैं, उसे लेकर जरा सावधान रहें। आपने मुझे चंडीगढ़ में देखा है, दिल्ली में देखा है…। मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं, सावधान रहें। ऐसा बिल्कुल भी मत सोचिएगा कि आप जिस तरह की बदतमीजी कर रहे हैं, वैसा ही करते रहेंगे। मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं।' इससे पहले एक जनहित याचिका पर जताई थी आपत्ति बीते गुरुवार को सीजेआई एक जनहित याचिका देखकर भी नाराज हुए थे। उन्होंने कहा था, 'अगर भारत के शीर्ष न्यायालय के सामने याचिकाओं का ऐसा स्तर है, तो भगवान याचिका के कानून को बचाए।' साथ ही उन्होंने इसपर सुनवाई करने से भी इनकार कर दिया था। इससे पहले वह वकीलों की तरफ से AI यानी आर्टिफिशिलय इंटेलिजेंस की मदद से याचिकाएं लिखने पर भी नाराज हो गए थे। आज इन मामलों पर होगी सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई होनी है। कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर विचार करेगा। इसके साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई की जाएगी। एक अन्य प्रमुख मामले में, अदालत मेटा और व्हाट्सएप की उन याचिकाओं पर गौर करेगी जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा उनकी गोपनीयता नीति के कारण लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी गई है।  

पाकिस्तान का दोहरा चेहरा! अफगानिस्तान में मस्जिद और मदरसे को बनाया निशाना

इस्लामाबाद पाकिस्तान अकसर इस्लाम के नाम पर पूरी दुनिया को कश्मीर मसले पर साथ लाने की कोशिश करता है। इसके अलावा फिलिस्तीन विवाद पर भी वह ऐसी ही बातें करता रहा है, लेकिन अफगानिस्तान पर हमले के दौरान उसने सारी मर्यादाएं तार-तार कर दीं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से चल रहे तनाव के बीच बमबारी की है। इस दौरान उसने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के बरमाल जिले में बम गिराए हैं। ये बम मस्जिद और मदरसों पर भी गिरे हैं। अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान के इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन माली नुकसान काफी अधिक है। पाकिस्तान ने एक मस्जिद और मदरसे को भी निशाना बनाया है और बमबारी की है। खबर के मुताबिक अब्दुल्ला जान नाम के शख्स ने बताया, 'पाकिस्तान ने बीती रात हमला किया था। उसके लड़ाकू विमानों ने हमारे घर पर हमला किया। घर खाली था और वहां अंदर कोई नहीं था। उन्होंने घर बर्बाद कर दिया। कोई मरा नहीं है, लेकिन हमें 5 से 6 मिलियन अफगानी करेंसी का नुकसान हुआ है।' अफगानिस्तान की मुद्रा अफगानी कहलाती है। अरगोन के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर मिर्जा अली खान सईद ने कहा कि पहले आधी रात को हमला हुआ। फिर रात को करीब 2 बजे पाकिस्तान ने अटैक किए। इन हमलों में किसी की मौत नहीं हुआ है। लेकिन घर पूरी तरह बर्बाद हो गया। बरमाल जिले में एक मदरसे को भी टारगेट किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान का यह हमला पूरी तरह से युद्ध अपराध है। उन्होंने कहा कि इस इलाके में ना ही कोई मिलिट्री बेस है और ना ही सेना की कोई मूवमेंट है। इसके बाद भी पाकिस्तान ने हमारे एयरस्पेस का उल्लंघन किया। आम नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश हुई और मजहबी ढांचे भी टारगेट हुए हैं। मौके पर रहे एक शख्स मोहम्मद जुबैर ने कहा कि हालात बहुत बुरे हैं। महिलाएं और बच्चे खौफजदा है। हवा में धूल और धुआँ फैल चुके हैं। हर जगह लोग बस यही चाहते हैं कि किसी तरह सुरक्षित ठिकाने में चले जाएं। पहले भी किए थे ऐसे हमले, 8 क्रिकेटर भी आए थे निशाने पर एक अन्य शख्स नसीम गुल ने कहा कि यह हमला बहुत भीषण और बर्बर था। हम अफगानिस्तानी लीडरशिप से कहेंगे कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए। वह हमारे ऊपर ऐसे हमले कई बार कर चुका है। एक अन्य शख्स शाहिदुल्लाह ने कहा कि यह हमला क्रूर था। बच्चे चिल्ला रहे थे और यहां-वहां भाग रहे थे। घर पर कोई नहीं था, लेकिन उन्होंने खाली मकान पर भी बम बरसा दिए। दरअसल यह पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों को भी टारगेट किया है। 5 महीने पहले भी उसने ऐसे ही हमले किए थे। इन हमलों में 11 अफगानिस्तानी नागरिक मारे गए थे। इसके अलावा 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 8 क्रिकेट खिलाड़ी थे।  

करोड़ों किसानों को राहत: इस तारीख को खाते में आ सकती है 22वीं किस्त

 नई दिल्ली देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए खुशखबरी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की 21वीं किस्त सफलतापूर्वक जारी होने के बाद, अब सभी की नजरें 22वीं किस्त पर टिकी हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन वित्तीय कैलेंडर और पिछले साल के रुझानों को देखें तो फरवरी का आखिरी सप्ताह किसानों के बैंक खातों में खुशियां लेकर आ सकता है। पीएम किसान योजना के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। 21वीं किस्त 19 नवंबर को जारी की गई थी। पिछले साल 19वीं किस्त 24 फरवरी को जारी हुई थी। इसी आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि 24 फरवरी 2026 के आसपास सरकार 22वीं किस्त के 2,000 रुपये जारी कर सकती है। सावधान! इन 3 वजहों से रुक सकता है आपका पैसा भले ही किस्त जारी हो जाए, लेकिन नियमों में सख्ती के कारण कुछ किसानों को इस लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है। यदि आपने निम्नलिखित कार्य पूरे नहीं किए हैं, तो आपकी राशि अटक सकती है: ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य: जिन किसानों ने अभी तक अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनके खाते में पैसे नहीं भेजे जाएंगे। इसे पीएम किसान पोर्टल या नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर से तुरंत पूरा करें।

कंधमाल (ओडिशा) में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़, दो माओवादी मारे गए, एक की पहचान रश्मि के रूप में हुई

बरहामपुर  ओडिशा में गंजम-कंधमाल बॉर्डर के पास जंगल में  सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए. एसपी हरीशा बीसी ने बताया कि यह एनकाउंटर कंधमाल जिले के राइकिया पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में कराडा जंगल इलाके में हुआ. मरने वालों की पहचान एरिया कमेटी मेंबर जगेश और सीपीआई (माओवादी) की पार्टी मेंबर रश्मि के तौर पर हुई है. दोनों पर कुल 27.50 लाख रुपये का इनाम था. पुलिस ने बताया कि मरने वाले सीपीआई (माओवादी) के कालाहांडी कंधमाल बौध नयागढ़ (KKBN) डिवीजन से था और जिले में एक्टिव था और उस पर कई हिंसक घटनाओं में शामिल होने का आरोप है. सुरक्षाकर्मियों ने मौके से कई हथियार और सामान जब्त किए हैं. यह एनकाउंटर तब शुरू हुआ जब सिक्योरिटी फोर्स ने 31 मार्च तक माओवादियों को जड़ से खत्म करने के लिए पूरे राज्य में चलाए जा रहे अभियान के तहत इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज कर दिया. सूत्रों ने बताया कि माओवादी कंधमाल जिले के कुछ हिस्सों में छिपे हुए थे. इससे पुलिस ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया. पिछले हफ़्ते, राइकिया पुलिस की इंद्रगढ़ पंचायत में माओवादियों से झड़प हुई, जिसके बाद भारी फायरिंग हुई और चरमपंथियों को पीछे हटना पड़ा. सुरक्षा बलों ने अब पूरे जिले में सर्च ऑपरेशन बढ़ा दिया है और उन जंगली इलाकों पर फोकस किया है जहां माओवादियों के फिर से इकट्ठा होने का शक है. अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि चल रही कार्रवाई का मकसद माओवादी नेटवर्क को खत्म करना और इलाके में शांति बहाल करना है. ओडिशा के गंजम-कंधमाल सीमा के जंगल में रविवार को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो नक्सलियों को मार गिराया। इसमें एक महिला नक्सली है। मुठभेड़ कंधमाल जिले के राइकीया थाना क्षेत्र के कराडा जंगल में हुई।ढकंधमाल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरीश बीसी ने बताया कि मारे गए नक्सलियों की पहचान जगेश (एरिया कमेटी सदस्य) और रश्मि (भाकपा-माओवादी की सदस्य) के रूप में हुई है। दोनों पर कुल 27.50 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, दोनों केकेबीएन (कालाहांडी-कंधमाल-बौध-नयागढ़) डिवीजन से जुड़े थे और जिले में कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहे थे। सुरक्षाबलों ने मौके से कई हथियार और अन्य सामान बरामद किए हैं। एसपी ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर पिछले दो दिनों से इलाके में नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो नक्सली मारे गए।  खुफिया सूचना पर चला सर्च ऑपरेशन अधिकारियों ने बताया कि इलाके में माओवादी गतिविधियों की पुख्ता सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने पिछले दो दिनों से संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। रविवार सुबह कराडा वन क्षेत्र में करीब नौ से दस माओवादियों का एक दल दिखाई दिया। आरोप है कि समूह के दो से तीन सदस्यों ने सुरक्षा बलों पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद दो माओवादी मारे गए, जबकि अन्य घने जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए। हथियार और आपत्तिजनक सामग्री बरामद मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने हथियार, गोला-बारूद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। इलाके में अभी भी व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि फरार माओवादियों का पता लगाया जा सके। कंधमाल एसपी हरीश बीसी ने बताया कि इस कार्रवाई में किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। पुलिस का कहना है कि केकेबीएन डिवीजन के सक्रिय सदस्यों के मारे जाने से क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। गंजाम और कंधमाल की सीमा पर लंबे समय से माओवादी गतिविधियां चिंता का विषय रही हैं। सुरक्षा बलों की इस सफलता को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दिल्ली कोर्ट का बयान, AI समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रोटेस्ट से भारत की अंतरराष्ट्रीय इमेज को खतरा

नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं का शर्टलेस प्रोटेस्ट असहमति जताने का सही तरीका नहीं था। कोर्ट ने कहा कि यह ‘सार्वजनिक व्यवस्था पर एक सीधा हमला’ था, जिसने भारत की डिप्लोमैटिक इमेज को भी नुकसान पहुंचाया। कोर्ट ने चारों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेजा ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की कोर्ट ने  यह टिप्पणी करते हुए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए यूथ कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों में बिहार से युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, बिहार से युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश से युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिंह यादव शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश के संबंधों का संकेत दिल्ली पुलिस की हिरासत में पूछताछ की अर्जी को मंजूर करने के कारण बताते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि आरोपी बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के दूर-दराज के इलाकों से हैं, जिससे उनके फरार होने की आशंका बहुत अधिक है। कोर्ट ने कहा कि ''प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों से बाहरी साजिश के संबंधों का संकेत मिलने से यह स्थिति और भी गंभीर'' हो जाती है। मजिस्ट्रेट रवि द्वारा पारित आदेश के एक अंश में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन ने न केवल आयोजन की शुचिता को खतरे में डाला, बल्कि देश की डिप्लोमैटिक इमेज को भी नुकसान पहुंचाया। क्या हैं आरोप अदालत के आदेश में कहा गया, ''आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने वैश्विक प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एआई समिट 2026 के दौरान भारत मंडपम के हाई सिक्योरिटी वाले परिसर में घुसने की सुनियोजित साजिश रची।'' इसमें कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर 'भड़काऊ नारों वाली टी-शर्ट पहन रखी थी, जिन पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के दौरान प्रधानमंत्री झुक गए (पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड) जैसे आपत्तिजनक नारे लिखे थे। आदेश में कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी का निर्वहन करने में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों पर शारीरिक हमले किए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, जैसा कि रिकॉर्ड में मौजूद 'मेडिको-लीगल' मामलों (एमएलसी) से प्रमाणित होता है। ऐसा आचरण सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमले के समान मजिस्ट्रेट ने कहा, ''ऐसा आचरण वैध तरीके से असहमति जताने के दायरे से स्पष्ट रूप से परे है और सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमले के समान है। यह न केवल आयोजन की गरिमा को खतरे में डालता है, बल्कि विदेशी हितधारकों के समक्ष देश की कूटनीतिक छवि को भी प्रभावित करता है…।'' मजिस्ट्रेट ने कहा कि जांच से पता चलता है कि आरोपियों के कई सहयोगी संभवत: फरार हैं, जो डिजिटल सबूतों, वित्तीय सुरागों आदि से छेड़छाड़ कर सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कथित अपराधों के लिए गहन जांच जरूरी है, क्योंकि वे एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्वजनिक व्यवस्था और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 121 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाना) और धारा 61 (2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत तीन साल से अधिक की सजा का प्रावधान रखते हैं। अदालत ने कहा कि चारों आरोपियों को 25 फरवरी तक पांच दिन की पुलिस हिरासत में रखे जाने की अनुमति दी जाती है।

बांगलादेशी सेना में हुआ बड़ा बदलाव, भारत में रुके अफसर को वापस बुलाया पद संभालने के लिए

ढाका  बांग्लादेश सेना के शीर्ष स्तर परबड़ा फेरबदल हुआ, जिसमें एक नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) की नियुक्ति भी शामिल है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट से यह जानकारी प्राप्त हुई। इस फेरबदल से प्रमुख रणनीतिक कमानों के साथ-साथ देश की प्रमुख सैन्य खुफिया एजेंसी भी प्रभावित हुई है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सेना मुख्यालय द्वारा जारी किए गए ये बदलाव प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के 17 फरवरी को सत्ता संभालने के कुछ दिनों बाद हुए हैं। 'प्रोथोम आलो' ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को सीजीएस के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि वह पहले सेना प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान (ARTDOC) के प्रमुख या जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के रूप में कार्यरत थे। भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के रक्षा सलाहकार, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के उच्च पद और दर्जे के साथ एक पैदल सेना डिवीजन के जीओसी के रूप में कार्यभार संभालने के लिए वापस बुलाया गया है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने 12 फरवरी को हुए महत्वपूर्ण चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। 60 वर्षीय रहमान ने 17 फरवरी को शपथ ली, जिससे मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के अंतरिम शासन का अंत हुआ। बांग्लादेशी विदेश मंत्री से मिले भारतीय उच्चायुक्त ढाका में नियुक्त उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने  कहा कि बांग्लादेश की नई सरकार के साथ संवाद को आगे बढ़ाने के लिए भारत उत्सुक है। उन्होंने नई दिल्ली की ओर से ढाका के साथ फिर से सक्रिय रूप से बातचीत की इच्छा व्यक्त की। तारिक रहमान के 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ दिनों बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात के बाद उच्चायुक्त वर्मा पत्रकारों से बात कर रहे थे। वर्मा ने मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, 'विदेश मंत्री के साथ आज की बैठक में मैंने अपना रुख दोहराया कि हम बांग्लादेश में नयी सरकार के साथ संवाद के लिए उत्सुक हैं।' बैठक में विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद भी शामिल थीं। उच्चायुक्त के अनुसार, उन्होंने बताया कि 'हम परस्पर हित और पारस्परिक लाभ के आधार पर सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्योन्मुखी सोच के साथ मिलकर काम करते हुए हर क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं।' यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों में गिरावट आई थी और 1971 के बाद यह अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।