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भारत-इजरायल संबंधों में नया अध्याय! नेतन्याहू ने PM मोदी की यात्रा को बताया खास और ऐतिहासिक

इजरायल प्रधानमंत्री Narendra Modi 25-26 फरवरी को इजरायल के दौरे पर जा रहे हैं। इस यात्रा से पहले भारत में इजरायल के राजदूत Reuven Azar ने कहा है कि भारत और इजरायल सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि “सच्चे दोस्त” हैं, जो मिलकर भविष्य को आकार दे रहे हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह दौरा भारत और इजरायल के “विशेष संबंधों” को और मजबूत करेगा। नेतन्याहू ने कहा कि उनकी और पीएम मोदी की व्यक्तिगत मित्रता भी दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दे रही है। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी इजरायल की संसद Knesset को संबोधित करेंगे और यरुशलम में एक इनोवेशन कार्यक्रम में भाग लेंगे। दोनों नेता Yad Vashem भी जाएंगे, जो होलोकॉस्ट पीड़ितों की स्मृति में बना आधिकारिक स्मारक है। भारत-इजरायल संबंध पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हुए हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में दोनों देश एक-दूसरे के पूरक हैं।यह दौरा न सिर्फ द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देगा, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति में दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा। राजदूत अजार ने कहा कि जब भारत और इजरायल साथ आते हैं तो वह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं होती, बल्कि यह विश्वास, तकनीक और साझा चुनौतियों की समझ पर आधारित साझेदारी होती है। राजदूत अजारने बताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे। मौजूदा सुरक्षा समझौतों को अपडेट किया जाएगा ताकि संवेदनशील परियोजनाओं पर मिलकर काम किया जा सके। भारत और इजरायल वर्षों से रक्षा क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। अब बदलती वैश्विक परिस्थितियों और खतरों को देखते हुए दोनों देश नई तकनीकी साझेदारी पर ध्यान देंगे।AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े समझौते होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने हाल ही में द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर किए हैं और इस साल फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम हो रहा है। इजरायल चाहता है कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां वहां निवेश करें। वित्तीय सहयोग को भी आसान बनाने पर जोर रहेगा।  

‘भारत टैक्सी’ से नई क्रांति: अमित शाह बोले—अब टैक्सी ड्राइवर खुद होंगे मालिक, खत्म होगी बिचौलियों की भूमिका

नई दिल्ली दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की भारत टैक्सी सर्विस से जुड़े ड्राइवरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों के बीच हुई इस बैठक का उद्देश्य Central Government Cooperative Models को मजबूत करना है। इसी के साथ शाह ने कहा कि इस नई व्यवस्था में गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर महज एक कर्मचारी नहीं, बल्कि खुद मालिक की भूमिका में होगा।   सहकारी मॉडल से बदलेगी ड्राइवरों की किस्मत जानकारी के लिए बता दें कि यह सर्विस 5 फरवरी को लॉन्च की थी। 'भारत टैक्सी' देश का ऐसा पहला ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म है जो Cooperative Principlesपर काम करता है। शाह ने चालकों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य बिचौलियों को खत्म कर सीधा लाभ उन लोगों तक पहुँचाना है जो जमीन पर पसीना बहाते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मॉडल के तहत होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा सीधे ड्राइवरों की जेब में जाएगा। समस्याओं और सुझावों पर हुई खुली चर्चा कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री ने केवल अपनी बात नहीं रखी, बल्कि ड्राइवरों की चुनौतियों को भी करीब से समझा। उन्होंने 'भारत टैक्सी' के सारथियों से उनकी समस्याओं पर फीडबैक लिया और भविष्य में इस सेवा को और बेहतर बनाने के लिए उनके सुझाव मांगे। शाह ने दोहराया कि सहकारिता क्षेत्र का विस्तार करना प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को आर्थिक आजादी मिल सके।

डच सियासत में नया अध्याय: रॉब जेटन ने ली पीएम पद की शपथ, युवा नेतृत्व पर भरोसा

नीदरलैंड नीदरलैंड में नई गठबंधन सरकार ने आधिकारिक रूप से शपथ ग्रहण कर ली है। देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में Rob Jetten ने पदभार संभाला। यह नई सरकार कई दलों के गठबंधन से बनी है और राजनीतिक स्थिरता तथा सहमति की नई शुरुआत का संकेत देती है। पिछले कुछ वर्षों में डच संसद में गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान देखने को मिली थी, जिससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।प्रधानमंत्री जेटन ने संकेत दिया है कि उनकी प्राथमिकता संसद में सहयोग और सहमति का माहौल बनाना होगा। वे देश के भीतर राजनीतिक संतुलन स्थापित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीदरलैंड की मजबूत भूमिका बहाल करना चाहते हैं।   नई सरकार का लक्ष्य यूरोपीय संघ में नीदरलैंड की प्रभावशाली भूमिका को फिर से स्थापित करना है। जेटन ने कहा है कि वे यूरोपीय सहयोग को मजबूत करने के लिए अपने समकक्ष नेताओं से जल्द बातचीत करेंगे।सरकार ने स्पष्ट किया है कि रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन को डच समर्थन जारी रहेगा। यह समर्थन राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग के रूप में बना रहेगा। नई कैबिनेट में विभिन्न गठबंधन दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। विदेश नीति, रक्षा और वित्त जैसे अहम मंत्रालयों में अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का संतुलित तरीके से सामना किया जा सके।   कौन हैं रॉब जेटन?  रॉब जेटन  डेमोक्रेट्स 66 (D66) पार्टी से जुड़े हैं और पहले जलवायु व ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं। यूरोपीय सहयोग, हरित नीतियों और सहमति की राजनीति उनके प्रमुख एजेंडा हैं। वे यूक्रेन समर्थन और मजबूत EU भूमिका के पक्षधर हैं। Rob Jetten नीदरलैंड के एक प्रमुख उदारवादी नेता हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई। रॉब जेटन का जन्म 1987 में हुआ। उन्होंने सार्वजनिक प्रशासन (Public Administration) की पढ़ाई की और छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे।  रॉब जेटन के नेतृत्व में गठित यह सरकार डच राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है। युवा नेतृत्व, यूरोपीय सहयोग पर जोर और वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय रुख इन सबके जरिए नीदरलैंड आने वाले वर्षों में अपनी अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा।  

ऐतिहासिक समझौते की आहट: कार्नी विजिट से पहले भारत-कनाडा रिश्तों में नई उड़ान

कनाडा भारत के कनाडा में उच्चायुक्त Dinesh Patnaik ने उम्मीद जताई है कि भारत और कनाडा अगले एक वर्ष के भीतर व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले आया है। दोनों देशों ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुए G20 Summit के दौरान बातचीत को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, CEPA का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। भारत-कनाडा के बीच CEPA पर बातचीत 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन कई बार रुक गई। अब बदलते वैश्विक हालात और रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए दोनों देश तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। दिनेश पटनायक ने कहा कि दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में कई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं, इसलिए अनुभव के आधार पर समझौता जल्दी संभव है।    किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?     प्रधानमंत्री कार्नी की यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों पर विशेष जोर रहने की संभावना है:     यूरेनियम और ऊर्जा सहयोग     महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)     आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)     डिजिटल व्यापार     कृषि और निवेश     नई दिल्ली और मुंबई में वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं से बैठकें प्रस्तावित हैं।  पूरक अर्थव्यवस्थाएं, कम प्रतिस्पर्धा पटनायक ने कहा कि कनाडा कमोडिटी निर्यातक देश है, जबकि भारत बड़ा उपभोक्ता बाजार है। इसलिए दोनों देशों के उद्योगों में सीधी प्रतिस्पर्धा कम है और सहयोग की संभावनाएं अधिक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फाइटोसैनिटरी नियम, सरकारी खरीद या कस्टम प्रक्रियाएं जैसे सामान्य मुद्दे इस बार बड़ी बाधा नहीं बन रहे। CEPA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, कृषि, डिजिटल कॉमर्स और हाई-टेक क्षेत्रों में व्यापक सहयोग का रास्ता खुलेगा। यह समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देगा और दोनों देशों को रणनीतिक रूप से करीब लाएगा।

हैरान कर देने वाली मन्नत: ‘अगले साल तक सास मर जाए’, नोट पर लिखकर मंदिर में चढ़ाया

बेंगलुरु कर्नाटक के बेलगावी जिले के एक मंदिर से हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। यहां के मंदिर के दानपात्र से पैसों की गिनती के दौरान एक चिट्ठी मिली, जिस पर भगवान से एक अजीबोगरीब दुआ मांगी गई। अधिकारी जब दानपात्र में पैसों की गिनती कर रहे थे, तब उन्हें 100 रुपये के नोट के अंदर मुड़ी हुई एक चिट्ठी मिली, जिसे पढ़कर हर कोई दंग रह गया। सुख-समृद्धि के बजाय मांगी सास की मौत मंदिर में जहां लोग आमतौर पर भगवान से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं, वहीं बेलगावी के इस मंदिर में किसी ने अपनी ही सास की मृत्यु की दुआ मांग डाली। 100 रुपये के नोट के भीतर छिपी इस चिट्ठी में लिखा था – 'हे भगवान, मेरे दुख दूर करो और अगली यात्रा से पहले मेरी सास की मृत्यु हो जाए।' नाम गुप्त, पर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल दानपात्र में मिली इस चिट्ठी पर लिखने वाले का नाम दर्ज नहीं था, जिससे यह पता नहीं चल सका कि यह 'अनोखी प्रार्थना' किसने की है। इस घटना ने मंदिर प्रशासन और दर्शनार्थियों, दोनों को ही अचरज में डाल दिया है। फिलहाल, इस चिट्ठी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

पीएम मोदी बोले- ‘राजाजी उत्सव’ देशभक्ति और सेवा भावना का प्रतीक

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को 'राजाजी उत्सव' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'राजाजी उत्सव' को एक अद्भुत पहल बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति भवन से जुड़ी पोस्ट की रीपोस्ट करते हुए लिखा कि 'राजाजी उत्सव' एक अद्भुत पहल है, जो राष्ट्र के प्रति राजाजी के समृद्ध योगदान के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आप इस उत्सव में अवश्य शामिल हों और इससे प्रेरणा लें! इससे पहले 22 फरवरी को पीएम मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा कि देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है। इस दिशा में 'राजाजी उत्सव' के रूप में हमारे राष्ट्रपति भवन ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान मैंने लाल किले से पंच प्राणों की बात कही थी। उनमें से एक है गुलामी की मानसिकता से मुक्ति। आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है।" उन्होंने बताया कि सी. राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे उन लोगों में थे, जिन्होंने सत्ता को पद की तरह नहीं, सेवा की तरह देखा। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, आत्मसंयम और स्वतंत्र चिंतन आज भी हमें प्रेरित करता है। पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां तो लगी रहने दी गईं, लेकिन देश के महान सपूतों को जगह नहीं दी गई। ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा भी राष्ट्रपति भवन में लगी हुई थी। उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक चलेग चलेगी।"

तिरुपति लड्डू केस में बड़ा फैसला, जांच खत्म; स्वामी की अर्जी पर सुनवाई से इंकार

आंध्र प्रदेश तिरुपति लड्डू विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तिरुपति मंदिर में मिलावटी घी से लड्डू बनाए जाने के मामले में एसआईटी ने जांच पूरी कर ली है। राज्य सरकार ने अगर अगल से जांच करवाई है तो इसमें भी कुछ गलत नहीं है। स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय जांच समिति के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था। पर्याप्त आधार नहीं स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय समिति के गठन को चुनौती दी थी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि याचिका के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। एक सदस्यीय समिति और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई एसआईटी की जांच एक दूसरे को ओवरलैप नहीं कर रही हैं। दोनों जांचों का दायरा अलग-अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक जांच और चार्जशीट से जुड़ी आपराधिक प्रक्रिया में कोई टकराव नहीं हैं। ऐसे में दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं। एसआईटी की जांच में क्या पाया गया एसआईटी की जांच में कहा गया है कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जिस घी का इस्तेमाल होता था उसमें केमिकल और पामोलिन तेल का इस्तेमाल किया जाता था। ईडी पता लगाएगी कि इस तरह का मिलावटी घी बेचकर किसने कितने पैसे कमाए हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहीं भी चर्बी वाले घी की बात नहीं कही गई थी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) नेताओं पर तिरुपति में लड्डू (प्रसाद) बनाने में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट के मामले में दूसरों पर दोष मढ़कर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करने का शनिवार को आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने पलनाडु जिले के विनुकोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि वाईएसआरसीपी नेताओं ने तिरुपति लड्डू में मिलावट की जांच में कई बाधाएं खड़ी कीं और यहां तक ​​कि उच्चतम न्यायालय का रुख भी किया। आंध्र सरकार ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए भी एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की है। आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति गठित की जो दोषी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त सीबीआई नीत विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद इस समिति का गठन किया गया है।  

गैस टैंकर हादसे से लगा 33 घंटे का जाम, अब सरकार देगी राहत—FASTag में वापस आएगा टोल पैसा

मुंबई मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 3 फरवरी को लगे भीषण जाम में अगर आप भी फंसे थे आपके लिए एक खुशखबरी है। कभी भी आपके अकाउंट में टोल टैक्स रिफंड हो सकता है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक गैस टैंकर दुर्घटना के बाद भीषण यातायात जाम में फंसे एक लाख से अधिक वाहन चालकों को कुल मिलाकर 5.16 करोड़ रुपये का टोल रिफंड मिलेगा। जानकारी के मुताबिक कुल 1.2 लाख यात्रियों को टोल रिफंड होगा। 33 घंटे का भीषण जाम तीन फरवरी को एक्सप्रेसवे के खोपोली खंड पर एक गैस टैंकर पलट गया, जिससे 33 घंटे तक यातायात ठप रहा और कई किलोमीटर तक यातायात अवरूद्ध रहा, जिससे कई वाहन चालकों और यात्रियों को पानी, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा। दुर्घटना के बाद, प्रशासन ने टोल वसूली को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया था। हालांकि, तब तक कई वाहन चालकों के फास्टैग खातों से टोल शुल्क पहले ही काटे जा चुके थे। अधिकारी ने बताया, 'टोल वसूली रोकने का आदेश जारी होने के बावजूद वाहन मालिकों से वसूल की गई पूरी राशि वापस करने का निर्णय लिया गया है। 5.16 करोड़ रुपये की यह वापसी राशि एमएसआरडीसी द्वारा भुगतान की जाएगी। यह राशि अगले कुछ दिनों में, प्रभावित वाहन मालिकों के फास्टैग खातों में सीधे जमा कर दी जाएगी।' रिपोर्ट के मुताबिक आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर से फास्टैग कटौती का डेटा मांगा गया था। एमएसआरडीसी ने आईआरबी से पूछा था कि आखिर टोल कलेक्शन रोकने का आदेश होने के बाद भी टोल क्यों वसूल जा रहा था। इस भीषण ट्रैफिक जाम में सभी यात्रियों और खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को बड़ी मुसीबत उठानी पड़ी थी। कई लोग वापस जाने का विचार कर रहे थे लेकिन उनके पास गाड़ी मुड़ाने का भी ऑप्शन नहीं था। वहीं जब टोल कलेक्शन की बात सामने आई तो लोगों को गुस्सा और बढ़ गया। कब मिल सकता है टोल का रिफंड टोल रिफंड करने को लेकर कुछ नियम हैं। अगर ज्यादा लंबा जाम होता है और ज्यादा देर तक यह खुल नहीं पाता है तब टोल रिफंड किया जा सकता है। अगर फास्टैग की गड़बड़ी की वजह से गलत पैसे कटते हैं तब भी पैसे रिफंड किए जाते हैं। इसके अलावा बिना टोल प्लाजा से गुजरे ही अगर टोल कटता है तो इसे रिफंड किया जाता है। एक बार गुजरने पर दो बार डिडक्शन होने पर भी रिफंड करने का नियम है।  

वीरगंज हिंसा: धार्मिक स्थल पर विवाद भड़का, पुलिस लाठीचार्ज के बाद सेना संभालेगी मोर्चा

वीरगंज नेपाल के सीमावर्ती शहर वीरगंज में दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प और पथराव के बाद स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए परसा जिला प्रशासन ने सोमवार सुबह 9:45 बजे से अगले आदेश तक वीरगंज महानगर क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए नेपाल पुलिस के साथ-साथ नेपाल सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) को सड़कों पर तैनात किया गया है। उल्लेखनीय है कि एक धार्मिक स्थल के पास विवाद से रविवार को भड़की हिंसा में आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने हालात को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था। ​पर्सा के डीएसपी हरिबहादुर बस्नेत के अनुसार, विवाद वीरगंज वार्ड नं. 11 स्थित श्रीपुर में एक धार्मिक स्थल के पास शुरू हुआ। आरोप है कि सड़क पर खड़े स्थानीय युवकों के साथ बिना किसी ठोस कारण के मारपीट की गई, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई और दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया। इस हिंसा में ललन महतो, अमर महतो और धीरज साह सहित करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार नारायणी अस्पताल में चल रहा है।​ पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। घटना का मुख्य आरोपी नेकपा (एमाले) मधेस प्रदेश कमेटी के सदस्य मोहम्मद निजाम फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी की, लेकिन वह वहां नहीं मिला। प्रशासन उनकी तलाश में सघन छापेमारी कर रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम चुनाव के समय साजिश के तहत यह वाक्या हुआ,जिससे सांप्रदायिक तनाव कायम हो गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्फ्यू के दौरान किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन या बैठक करना पूर्णतः वर्जित है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सुरक्षा बल सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे।​ वीरगंज के हालातों का सीधा असर भारतीय सीमा पर भी पड़ा है। अचानक कर्फ्यू से लग्न और होली के बाजार प्रभावित हुआ है। दोनो ओर लोग फंस गए हैं। रक्सौल और वीरगंज के बीच मैत्री पुल के रास्ते होने वाली आम आवाजाही पूरी तरह ठप है।भारतीय सीमा पर तैनात एसएसबी और स्थानीय पुलिस हाई अलर्ट मोड पर है। बॉर्डर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है ।ताकि सीमा पार से कोई अवांछित तत्व शांति भंग न कर सके।  

दाल के लिए मची अफरा-तफरी, पड़ोसी देश में सप्लाई ठप, कीमतें आसमान पर

फैसलाबाद पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की खबरें नई नहीं हैं। खस्ताहाल पाकिस्तान दुनिया की कई वैश्विक संस्थानों से कर्ज लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर पा रहा है। अब हाल ही में यह खबरें सामने आई हैं कि पाकिस्तान में दाल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि पाकिस्तान अब अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर हो चुका है। पाकिस्तान में दाल का उत्पादन लगातार घट रहा है, जिससे देश को जरूरतें पूरी करने के लिए हर साल करीब 98 करोड़ डॉलर आयात पर खर्च करने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विशेषज्ञों ने इस हालात पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि अगर उत्पादन नहीं बढ़ा तो आयात पर निर्भरता और बढ़ेगी। पंजाब पल्सेज इंपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और ग्रेन मार्केट के चेयरमैन राणा मुहम्मद तैय्यब ने बताया कि 1998 से पहले पाकिस्तान दाल का प्रमुख निर्यातक देश था। लेकिन परवेज मुशर्रफ के दौर में लगाए गए निर्यात बैन के बाद किसानों का उत्साह कम हो गया, क्योंकि दाल कम मुनाफे वाली फसल बन गई। जानकारों के मुताबिक देश में हर साल करीब 16.2 लाख टन दाल की खपत होती है, जिसमें से लगभग 10.7 लाख टन आयात की जाती है। यानी पाकिस्तान को देश में खपत होने वाली करीब 80 प्रतिशत दाल आयात करनी पड़ती है। बारिश ने भी तरसाया तैय्यब ने जलवायु परिवर्तन के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि थल जैसे वर्षा आधारित इलाकों में समय पर बारिश हो जाए तो पैदावार 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, लेकिन बारिश कम होने पर भारी नुकसान होता है और किसान अगले सीजन में दाल बोने से हिचकते हैं। जानकारों ने जताई चिंता ये मुद्दे विश्व दाल दिवस के मौके पर आयूब एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के पल्सेज रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित एक सेमिनार में उठाए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान की सालाना जरूरत करीब 15 लाख टन है, लेकिन लोकल उत्पादन इसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रहा है। इसी कारण हर साल करीब 10 लाख टन दाल आयात करनी पड़ती है। AARI के पल्सेज सेक्शन के चीफ साइंटिस्ट खालिद हुसैन ने कहा कि दाल मानव पोषण और मिट्टी की उर्वरता दोनों के लिए जरूरी है। लेकिन सीमित मुनाफा और निर्यात बैन के कारण किसान इसकी खेती से बच रहे हैं। दाल उत्पादन बढ़ाने के मकसद से एक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है, लेकिन उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।