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जयशंकर का बड़ा कदम: होर्मुज संकट के बीच दुनिया के पावरफुल देशों को किया परेशानी में, चीन की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली  ईरान में चल रहे युद्ध ने तमाम मिथकों को तोड़ने के साथ ही UN की कमजोरियों को एक बार फिर से उजागर कर दिया है. संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में वेस्‍ट एशिया में अस्थिरता लाने वालों के खिलाफ एक मुकम्‍मल निंदा प्रस्‍ताव तक पारित नहीं किया जा सका. इस बात पर भी विचार नहीं किया गया कि एक स्‍वतंत्र और संप्रभु राष्‍ट्र के खिलाफ एकतरफा सैन्‍य कार्रवाई कहां तक उचित है. इसके अलावा ग्‍लोबल पीस के लिए जिम्‍मेदार संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद होर्मुज स्‍ट्रेट जैसे समुद्री मार्ग को भी बाधित होने से नहीं बचा सका. ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में इन दिनों उथल-पुथल की स्थिति है. होर्मुज जलडमरूमध्‍य की समस्‍याओं ने इस तनाव को ग्‍लोबल एनर्जी क्राइसिस में तब्‍दील कर दिया है. जिन देशों का इस टकराव से कोई लेना-देना नहीं है, उन्‍हें भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति बाधित होने की वजह से कई देशों में आपात स्थिति पैदा हो गई है. इतना सबकुछ हो रहा है, लेकिन संयुक्‍त राष्‍ट्र और निर्णय लेने वाली इसकी सर्वोच्‍च संस्‍था UNSC मूकदर्शक बना हुआ है. दुनिया अमेरिका, इजरायल और ईरान के ट्राएंगल में बुरी तरह से फंस गई है. एक तरह से ईरान जंग की बंधक बन चुकी है. ऐसे हालात में भारत ने एक बार फिर से UNSC में तत्‍काल सुधार की बात कही है. फ्रांस में इन दिनों G-7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इसमें हिस्‍सा ले रहे हैं. G-7 के मंच से जयशंकर ने UNSC में रिफॉर्म करने पर जोर दिया है. भारत लंबे समय से UNSC की स्‍थाई सदस्‍यता हासिल करने का दावा पेश करता आ रहा है. हालांकि, भारत के इस प्रयास को चीन पलीता लगाता रहा है।  एस जयशंकर ने फ्रांस में आयोजित G7 Foreign Ministers’ Meeting के दौरान वैश्विक शासन व्यवस् (Global Governance) था में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधार की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ढांचा वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप नहीं है और इसमें व्यापक बदलाव जरूरी हैं. फ्रांस में 26-27 मार्च को आयोजित इस बैठक में जयशंकर ने शांति स्थापना अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने, मानवीय सहायता आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और वैश्विक संकटों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर भी बल दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक में ग्लोबल गवर्नेंस सुधार प्रमुख मुद्दा रहा. ईरान जंग और होर्मुज संकट को देखते हुए उनका यह स्‍टैंड अपने आप में बेहद महत्‍वपूर्ण है. अब दुनिया के सबसे पावरफुल देशों पर जिम्‍मेदारी है कि वे इस बाबत क्‍या करते हैं।  भारत फिर बना ग्‍लोबल साउथ की आवाज जयशंकर ने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों से जुड़े मुद्दों को उठाया, जिनमें ऊर्जा संकट, उर्वरक की कमी और खाद्य सुरक्षा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों से ही संभव है. भारत लंबे समय से UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है. वर्तमान में UNSC के पांच स्थाई सदस्य (China, France, Russia, United Kingdom और United States of America) को वीटो शक्ति प्राप्त है, जिसे लेकर लंबे समय से असंतुलन की आलोचना होती रही है।  वेस्‍ट एशिया क्राइसिस पर फोकस बैठक के दौरान वेस्ट एशिया संकट भी प्रमुख चर्चा का विषय रहा. Strait of Hormuz में तनाव के चलते वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है. यह मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति के लिए अहम है. हालिया घटनाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेजी देखी गई है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ा है. इस बैठक में जयशंकर वेस्ट एशिया की स्थिति पर समन्वित रणनीति बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित और खुला रह सके. भारत के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है।  G-7 काफी अहम G-7 में शामिल प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका) वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर समन्वय के लिए इस मंच का उपयोग करती हैं. इस बार भारत के अलावा सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया और ब्राजील को भी आमंत्रित किया गया है. बैठक के इतर जयशंकर अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक संकटों से निपटने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। 

भारत ने होर्मुज से अपने जहाज को सुरक्षित निकाला, ईरान को किया मनाने में सफल; जयशंकर ने बताया तरीका

नई दिल्ली ईंधन संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने दो भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने की अनुमति दी थी। अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस फैसले के पीछे की वजह का खुलासा किया है। उन्होंने यह भी साफ किया है कि जहाज गुजरने देने के बदले भारत ने ईरान से कोई सौदा नहीं किया है। अमेरिका और इजरायल से संघर्ष के बीच ईरान ने स्ट्रेट पर रोक लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जयशंकर ने कहा, 'फिलहाल मैं उनसे (विदेशी पक्षों से) बातचीत कर रहा हूं और मेरी इस बातचीत के कुछ सकारात्मक नतीजे भी निकले हैं। यह प्रक्रिया अभी जारी है। अगर मुझे इसके नतीजे मिल रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से मैं इसे आगे भी जारी रखूंगा।' उन्होंने कहा, 'भारत के नज़रिए से यह बेहतर है कि हम तर्क-वितर्क करें, आपसी समन्वय बनाएं और किसी समाधान तक पहुंचें।' क्या हुआ है कोई सौदा? उन्होंने कहा कि दिल्ली और तेहरान के बीच लेनदेन का इतिहास रहा है…। उन्होंने कहा कि इसके आधार पर ही उनके साथ बातचीत हुई। विदेश मंत्री ने कहा, 'यह एक्सचेंज का मुद्दा नहीं है। भारत और ईरान का संबंध है। और यह एक संघर्ष है, जिसे हम दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।' उन्होंने कहा, 'अभी तो बस शुरुआत है। हमारे और भी कई जहाज वहाँ मौजूद हैं। इसलिए, हालांकि यह एक स्वागत योग्य घटनाक्रम है, लेकिन बातचीत अभी भी जारी है क्योंकि उस दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है।' दो और देशों से की बात जयशंकर ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रियों से पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। जयशंकर ने शनिवार रात यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत की। माना जाता है कि जयशंकर की दोनों विदेश मंत्रियों के साथ हुई बातचीत में भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल था। क्यों जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। खास बात है कि 60 प्रतिशत कच्चा तेल भारत का होर्मुज मार्ग से आता है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा LNG इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

होर्मुज में तनाव के बीच भारत सक्रिय, जयशंकर ने फिर की ईरानी विदेश मंत्री से बात

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों को लेकर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ टेलीफोन पर अहम बातचीत की है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है। यह बातचीत ऐसे महत्वपूर्ण समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में जारी भारी संकट के बीच भारतीय जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर आगे बढ़े हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने हाल के संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए हैं, जिससे अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ गई है। ईरान का रुख: आत्मरक्षा और ब्रिक्स से अपील बातचीत के दौरान, ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर को अमेरिका और 'जायोनी शासन' (इजरायल) द्वारा ईरान के खिलाफ की गई आक्रामकता और अपराधों से उत्पन्न ताजा स्थिति की विस्तार से जानकारी दी। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरानी सरकार, वहां की जनता और सशस्त्र बल हमलावरों के खिलाफ अपनी रक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं। अंतरराष्ट्रीय निंदा और ब्रिक्स की भूमिका उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों को ईरान के खिलाफ इस सैन्य आक्रामकता की निंदा करनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'ब्रिक्स' को एक महत्वपूर्ण मंच बताया और आग्रह किया कि इस नाजुक मोड़ पर वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए ब्रिक्स को एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। भारत का रुख: शांति और सामूहिक प्रयास विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय दोनों तरह के सहयोग को और अधिक विकसित करने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि क्षेत्र में स्थायी स्थिरता और सुरक्षा कायम करना सबकी साझा जिम्मेदारी है और इसके लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। ईरान युद्ध और तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। इस स्थिति के बीच, भारत अपने 28-30 भारतीय-ध्वज वाले मालवाहक (मर्चेंट) जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए लगातार बातचीत कर रहा है। इसी प्रयास के तहत हाल ही में तीन जहाजों ने सफलतापूर्वक होर्मुज को पार किया है। इनमें शेनलॉन्ग (जो लाइबेरिया के झंडे वाला जहाज है, लेकिन इसका कप्तान भारतीय है), और दो भारतीय झंडे वाले जहाज- पुष्पक और परिमल शामिल हैं।  

West Asia Crisis: संसद में बोले जयशंकर—समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति, भारतीयों को वापस लाने पर क्या कहा?

नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट पर विदेश मंत्री जयशंकर ने राज्यसभा में बयान दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी हालात पर नजर रख रहे हैं और भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। इस बीच, विपक्ष ने संसद में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों और ऊर्जा संकट पर राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया के हालात पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर काफी गंभीर है। भारत ने 20 फरवरी को ही एक बयान जारी कर अपनी चिंता जाहिर कर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है। जयशंकर ने कहा यह विवाद लगातार बढ़ रहा है जिससे इलाके की सुरक्षा की स्थिति खराब हो गई है। इसका असर आम जिंदगी और कामकाज पर पड़ रहा है। इस संकट में भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है और एक नाविक अभी भी लापता है। तेहरान में भारतीय दूतावास हाई अलर्ट पर भारतीयों की सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास छात्रों को सुरक्षित जगहों पर भेजने में मदद कर रहा है। ईरान में मौजूद व्यापारियों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने में सहायता दी गई है। तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय और हाई अलर्ट पर है। अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक वापस लौटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं। सरकार अपने लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश कर रही है। ईरान ने जताया आभार विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि फिलहाल ईरान के बड़े नेताओं से संपर्क करना मुश्किल है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का शुक्रिया अदा किया है। भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत 'लवन' को कोच्चि पोर्ट पर रुकने की इजाजत दी थी, जिसके लिए ईरान ने आभार जताया है।

डोनाल्‍ड ट्रंप ने समझा भारत की अहमियत, जयशंकर ने की पूरी बात, दोनों हाथ में लड्डू

नई दिल्ली  क्रिटिकल या रेयर अर्थ मिनरल्‍स एक स्‍ट्रैटजिक मैटेरियल है. ग्रीन एनर्जी से लेकर इलेक्ट्रिक व्‍हीकल और फाइटर जेट से लेकर स्‍मार्टफो तक में इसका उपयोग होता है. इसके बिना इन सभी का उत्‍पादन संभव नहीं है. पिछले साल अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के जवाब में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्‍स के निर्यात पर नकेल कस दी थी. बीजिंग के इस कदम से भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक की ऑटो इंडस्‍ट्री से लेकर अन्‍य उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ा था. बता दें कि चीन ग्‍लोबल लेवल पर 90 फीसद से भी ज्‍यादा क्रिटिकल मिनरल्‍स का निर्यात करता है. इस सेक्‍टर में पड़ोसी देश का एकाधिकार है. अब अमेरिका ने चीन के इस वर्चस्‍व को तोड़ने की दिशा में मजबूत और सार्थक पहल की है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आह्वान पर वॉशिंगटन में 55 देशों के विदेश मंत्री जुटे. रेयल अर्थ मिनरल्‍स की सप्‍लाई को बाधाओं से दूर रखने के लिए 50 देशों का ब्‍लॉक बनाने का प्रस्‍ताव रखा गया है. इसमें भारत की भूमिका अहम होने वाली है. भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बैठक में शिरकत की. रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर ग्‍लोबल पहल भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. भारत में क्रिटिकल मिनरल्‍स का भंडार है. इस ब्‍लॉक में शामिल होने से घरेलू स्‍तर पर रेयर अर्थ मिनरल्‍स की माइनिंग से लेकर उसकी प्रोसेसिंग तक में टेक्‍नोलॉजिकल सहयोग मिलेगा. दूसरी तरफ, चीन पर निर्भरता भी कम होगी, जिससे डोमेस्टिक इंडस्‍ट्री को महत्‍वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा. इससे भविष्‍य में भारत को रणनीतिक बढ़त भी हासिल होगी. बता दें कि वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में रेयर अर्थ मिनरल्‍स कॉरिडोर बनाने का उल्‍लेख किया है. दरअसल, भारत ने अमेरिका में आयोजित पहले क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल के दौरान नई पहल फोरम ऑन रिसोर्स जियोस्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट (FORGE) को समर्थन देने की घोषणा की है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह मंच वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की सप्‍लाई चेन को सुरक्षित, विविध और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम है. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर वाशिंगटन पहुंचे हैं, जहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा आयोजित इस मंत्रीस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया. इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. जयशंकर ने इसे परिणाम देने वाला बताया. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर्स और जिम्मेदार व्यापार जैसी पहलों के जरिए सप्‍लाई चेन को मजबूत करने पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि FORGE इनिशिएटिव अमेरिका-नेतृत्व वाले मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप की उत्तराधिकारी है और इसका उद्देश्य दुर्लभ खनिजों के प्रोडक्‍शन और प्रोसेसिंग में विविधता लाना है. ग्‍लोबल कॉन्‍फ्रेंस का क्‍या है लक्ष्‍य? वॉशिंगटन सम्मेलन का मुख्य लक्ष्य लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे रेयर अर्थ मिनरल्‍स की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता कम करना है. यूरोपीय संघ सहित कई देशों की भागीदारी को वैश्विक आपूर्ति कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. दौरे के दौरान जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से द्विपक्षीय बैठकें भी कीं. इन बैठकों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग और तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने क्वाड के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई. जयशंकर ने कहा कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में उपयोगी साबित हुआ है. अमेरिका ने चीन के प्रभुत्व वाले महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) सप्‍लाई नेटवर्क को चुनौती देने के लिए सहयोगी देशों के साथ एक विशेष व्यापार ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार 4 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक में इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस सिस्‍टम समेत अन्‍य निर्माण के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और स्थिर बनाना है. भारत सहित 55 देशों की भागीदारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि इस बैठक में भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित कुल 55 देशों ने हिस्सा लिया. इन देशों के पास माइनिंग या प्रोसेसिंग (रिफाइनिंग) से जुड़ी क्षमताएं हैं और वे ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में विविधता लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. रुबियो ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन कुछ ही देशों में अत्यधिक केंद्रित है और यह स्थिति अब भू-राजनीतिक दबाव का साधन बन चुकी है. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ मिलकर रणनीतिक समाधान अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बैठक के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने मैक्सिको के साथ द्विपक्षीय योजना और यूरोपीय संघ व जापान के साथ त्रिपक्षीय समझौते की घोषणा की, ताकि सप्‍लाई चेन को मजबूत किया जा सके. इसके अलावा अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान ने जी-7 और मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप जैसे मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया.

विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिका में तीन दिन, ऊर्जा व सुरक्षा पर गहन चर्चा

नई दिल्ली   भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज से तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह यात्रा 2 से 4 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान वह अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में भाग लेंगे। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव, और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा और नई तकनीकों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। अमेरिका यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई थी। जयशंकर ने उम्मीद जताई थी कि सर्जियो गोर भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।  इसके अलावा, 25 जनवरी को जयशंकर ने अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी, जिसमें माइक रोजर्स, एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस शामिल थे। इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंध, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।इससे पहले, 13 जनवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत में नागरिक परमाणु ऊर्जा, व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग की समीक्षा की गई थी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया था और कहा था कि दोनों देशों ने व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स और आने वाले महीनों में संभावित उच्चस्तरीय बैठक को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की है। जयशंकर की यह अमेरिका यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।

मिडिल ईस्ट में रणनीति का कमाल: नेटन्याहू के आने से पहले जयशंकर ने बुलाए अरब देश

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले भारत के EAM एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को टारगेट करते हुए डबल मास्टरस्ट्रोक चला है. उन्होंने नेतन्याहू के दौरे से पहले अरब देशों को पहले ही दिल्ली बुलाकर एक बड़ा मैसेज दिया है. जयशंकर की गजब की कूटनीति का नतीजा है कि अरब देशों ने भारत को फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ मानना शुरू कर दिया है. आगे जानें जयशंकर के बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट की वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद किस तरह बढ़ रहा है? भारत ने आज यानी 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक’ (IAFMM) की मेजबानी की है. यह बैठक पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद हुई है. इसमें अरब लीग के सभी 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक जयशंकर की दिसंबर 2025 की इजरायल यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा के ठीक बीच में हो रही है. इस बैठक के दौरान भारतीय EAM का एक ऐसा बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट देखने को मिला, जिसकी वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद और भी बढ़ गया है. फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ भारत दिल्ली पहुंची फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और भावनात्मक कार्ड खेला है. उन्होंने जयशंकर से मुलाकात के बाद सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा है कि ‘भारत ही वह महान देश है जो इजरायल-फिलिस्तीन जंग को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इजरायल से दोस्ती और अरब देशों से रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘मध्यस्थ’ बनाते हैं’. फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग की है. इजरायल का जिगरी दोस्त दिसंबर 2025 में जब जयशंकर इजरायल में थे, तो वहां सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के एक हमले में यहूदियों की मौत पर उन्होंने गहरी संवेदना जताई थी. भारत और इजरायल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर से दोहराया है. भारत और इजरायल के बीच ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस को लेकर एक गुप्त समझौता भी परवान चढ़ रहा है. जयशंकर का बैलेंसिंग एक्ट एक तरफ भारत इजरायल के साथ अत्याधुनिक हथियारों का सौदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 22 अरब देशों को एक साथ मेज पर बिठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों (Energy Security) को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के उन चंद देशों में से है, जो युद्ध के दो धुर विरोधियों से एक साथ हाथ मिला सकते हैं. ‘मिडिल ईस्ट’ का नया पावर सेंटर: भारत     अरब देशों के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता UAE कर रहा है. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत जियो पॉलिटिक्स का एक बड़ा और अहम प्लेयर है.     भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. जयशंकर इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना रहे हैं, जहाँ अरब देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी है.     सिल्क रूट को टक्कर: ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) को फिर से जिंदा करने के लिए अरब देशों का साथ लेना इस बैठक का गुप्त एजेंडा है.  

आतंक के मुद्दे पर जयशंकर का कड़ा रुख, पोलैंड के डिप्टी पीएम को पाकिस्तान की सच्चाई बताई

नई दिल्ली भारत ने पोलैंड को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि सीमा पार आतंकवाद के मामले में वह सीधे या अप्रत्यक्ष तरीके से पाकिस्तान का समर्थन ना करे। इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखने पर भी गलत तरीके से निशाना बनाए जाने को लेकर गहरी चिंता जताई है। बता दें कि पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लॉ सिकोर्सकी इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं। पड़ोस के आतंकियों की सहायता बंद करें विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसे भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं देनी चाहिए। डा. जयशंकर ने भारत यात्रा पर आये पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ सोमवार को यहां वार्ता के दौरान शुरुआती बयान में कहा कि पोलैंड इस क्षेत्र के लिए कोई अजनबी नहीं हैं और वह सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करनी चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। विशेष रूप से अपने-अपने पड़ोस के संबंध में आकलनों का आदान-प्रदान उपयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर भारत के विचार पहले भी स्पष्ट रूप से साझा कर चुके हैं और उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनकर भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह आज एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं। दोनों की हैं अलग-अलग चुनौतियां विदेश मंत्री ने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं इसे देखते हुए विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी निरंतर प्रगति कर रहे हैं लेकिन इन पर निरंतर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। भारत और पोलैंड के बीच परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में ये संबंध उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा सशक्त आर्थिक और लोगों के बीच संपर्कों से आगे बढकर मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। डा. जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बातचीत के दौरान 2024 से 28 तक कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। इसके अलावा व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर है जिसमें पिछले एक दशक में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे पोलैंड के नागरिकों के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़े बाजार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ वहां के व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं। रूस से व्यापारिक संबंधों को लेकर निशाना बनाना ठीक नहीं भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच, मॉस्को के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर नई दिल्ली को "चुनिंदा और अनुचित तरीके से निशाना बनाए जाने" पर पोलैंड के समक्ष गहरी चिंता व्यक्त की है। यह निशाना टैरिफ और अन्य दबावकारी हथकंडों के माध्यम से साधा जा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वारसॉ को सीमा पार आतंकवाद से संबंधित मामलों में पाकिस्तान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार का समर्थन न देने की कड़ी चेतावनी दी है।

ट्रेड डील पर चर्चा तेज, जयशंकर ने अमेरिका में सांसद स्टीव डैनिस से मुलाकात की

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी सांसद स्टीव डैनिस ने नई दिल्ली में रविवार को मुलाकात की है। ईएएम एस जयशंकर ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर जल्द ही कोई खुशखबरी मिलने की उम्मीद बढ़ रही है। एस जयशंकर ने बताया कि अमेरिकी सीनेटर के साथ भारत और अमेरिका के आपसी संबंधों और रणनीति को लेकर चर्चा हुई। अमेरिकी राजदूत का यह कहना कि भारत अमेरिका के लिए सबसे जरूरी साझेदार है और फिर अमेरिकी सांसद का भारतीय विदेश मंत्री से मिलना इस बात का संकेत दे रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक्स पर तस्वीरों के साथ कैप्शन में एस जयशंकर ने लिखा, "आज सुबह दिल्ली में सीनेटर स्टीव डैनिस से मिलकर खुशी हुई। हमारे आपसी रिश्ते और इसके रणनीतिक महत्व पर खुलकर बातचीत हुई।" इससे पहले विदेश मंत्री ने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत का मुद्दा व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग था। इससे पहले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के बीच ट्रेड वार्ता को लेकर कहा था कि दोनों पक्ष लगातार सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। असल में, ट्रेड पर अगली बातचीत मंगलवार को होगी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, इसलिए बातचीत को अंतिम लाइन तक पहुंचाना आसान काम नहीं है, लेकिन हम वहां पहुंचने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। हालांकि, ट्रेड हमारे रिश्ते के लिए बहुत जरूरी है। हम सिक्योरिटी, काउंटर टेररिज्म, एनर्जी, तकनीक, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे दूसरे बहुत जरूरी क्षेत्रों में भी मिलकर काम करते रहेंगे। अमेरिकी राजदूत ने भारत को यूएस का सबसे जरूरी साझेदार बताया और कहा था, "भारत से ज्यादा जरूरी कोई पार्टनर नहीं है। आने वाले महीनों और सालों में, राजदूत के तौर पर मेरा लक्ष्य एक बहुत बड़ा एजेंडा पूरा करना है। हम यह काम सच्चे रणनीतिक साझेदार के तौर पर करेंगे, जिसमें हर कोई ताकत, सम्मान और नेतृत्व लाएगा।" उन्होंने पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती को लेकर कहा कि मैं यह कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ राष्ट्र दोस्ती सच्ची है। अमेरिका और भारत सिर्फ अपने फायदों से ही नहीं, बल्कि सबसे ऊंचे स्तर पर बने रिश्तों से भी जुड़े हैं। सच्चे दोस्त अलग-अलग राय रख सकते हैं, लेकिन आखिर में हमेशा अपने मतभेद सुलझा लेते हैं।

जयशंकर का पाकिस्तान को चेतावनी, “आतंकवाद फैलाने पर भारत चुप नहीं रहेगा

 चेन्नई विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद बढ़ावा देने वाला खराब पड़ोसी बताया है और कहा है कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए पूरा अधिकार है. आईआईटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा और आतंकवाद से निपटने के तरीके पर किसी बाहरी दबाव या सलाह को स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्री ने कहा कि जब कोई पड़ोसी देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा हक है. हम जो जरूरी होगा, वही करेंगे. आप हमसे ये उम्मीद नहीं कर सकते कि हम आपके साथ पानी साझा करें और आप हमारे देश में आतंकवाद फैलाते रहें. विदेश मंत्री ने साफ कहा कि आतंकवाद पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी, ये फैसला सिर्फ भारत करेगा. उन्होने आगे कहा कि हम अपने अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, ये हमारा फैसला है. कोई हमें ये नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं. अपनी सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा, हम करेंगे. पाकिस्तान का नाम लिए बिना एस. जयशंकर ने कहा कि कई देशों को मुश्किल पड़ोसियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन भारत की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि आतंकवाद को वहां राज्य की नीति की तरह इस्तेमाल किया गया है. अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो हमारे पास अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को पानी के बंटवारे जैसे समझौतों से भी जोड़ा. जयशंकर ने कहा कि भारत ने दशकों पहले पानी साझा करने का समझौता किया था लेकिन ऐसे समझौते अच्छे पड़ोसी संबंधों पर टिके होते हैं. उन्होंने कहा कि अगर दशकों तक आतंकवाद चलता रहा, तो अच्छे पड़ोसी वाले रिश्ते नहीं रह सकते. और अगर अच्छे रिश्ते नहीं होंगे, तो उनके फायदे भी नहीं मिल सकते. आप ये नहीं कह सकते कि ‘हमसे पानी भी साझा करो और हम आतंकवाद भी करते रहेंगे.’ ये दोनों बातें साथ नहीं चल सकतीं. गौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान के रिश्ते अप्रैल 2025 में उस वक्त और बिगड़ गए, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में कई पर्यटकों की हत्या कर दी थी.