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भारत-बांग्लादेश रिश्तों में संवेदनशील क्षण, खालिदा जिया के जनाजे में शामिल हुए जयशंकर

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख बेगम खालिदा जिया का आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके जनाजे में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल होने के लिए राजधानी ढाका पहुंचे हैं। इस दौरान जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश पत्र सौंपा। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने जयशंकर और तारिक रहमान की मुलाकात की तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा- 'माननीय भारतीय विदेश मंत्री ने ढाका में, भारत सरकार और लोगों की ओर से संवेदनाएं व्यक्त कीं। बांग्लादेश पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के निधन पर शोक मना रहा है। उन्होंने लोकतंत्र में उनके योगदान को स्वीकार किया और आगामी चुनाव (फरवरी 2026) के माध्यम से बांग्लादेश में लोकतांत्रिक बदलाव के बाद बांग्लादेश-भारत संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद जताई।' तस्वीरों में जयशंकर अपने बांग्लादेशी समकक्ष तौहीद हुसैन के साथ बातचीत करते हुए भी नजर आ रहे हैं। खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर को लंबी बीमारी के बाद ढाका के एवरकेयर अस्पताल में हुआ था। वह 80 वर्ष की थीं। लिवर सिरोसिस, डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन पर बांग्लादेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है और बीएनपी ने सात दिन का शोक घोषित किया है। आज दोपहर जोहर की नमाज के बाद ढाका के मानिक मिया एवेन्यू और संसद परिसर के साउथ प्लाजा में नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। जनाजे में लाखों लोग उमड़े, जिसमें बीएनपी समर्थक, आम नागरिक और विदेशी प्रतिनिधि शामिल थे। इसके बाद उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पति पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास जिया उद्यान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। भारत-बांग्लादेश संबंधों के बीच मौजूदा तनाव के बावजूद विदेश मंत्री जयशंकर का ढाका दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि जयशंकर भारत सरकार और जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतिम संस्कार में शामिल हुए। उन्होंने तारिक रहमान से मुलाकात कर पीएम मोदी का व्यक्तिगत शोक पत्र सौंपा। पीएम मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया था और 2015 में ढाका में हुई उनकी मुलाकात को याद किया था। मोदी ने कहा था कि बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। जनाजे में पाकिस्तान की ओर से भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने भी शोक संदेश जारी किया। खालिदा जिया बांग्लादेश की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और देश की राजनीति में दशकों तक प्रभावशाली रहीं। उनके बेटे तारिक रहमान हाल ही में 17 साल के निर्वासन के बाद लंदन से वापस लौटे हैं और अब बीएनपी की कमान संभाल रहे हैं।

एक जयशंकर बनाम पूरी दुनिया? सवाल पर विदेश मंत्री का मोदी से जुड़ा जवाब

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते हैं। पुणे में एक कार्यक्रम वैश्विक राजनीति और रणनीति पर बात करते हुए जयशंकर ने भगवान श्री कृष्ण और भगवान हनुमान को दुनिया का सबसे महान रजानयिक बताया। इसी कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत के लिए एक जयशंकर काफी है या फिर हमें और जयशंकर की जरूरत है? इस सवाल का जवाब मुस्कराकर देते हुए जयशंकर ने कहा कि आपका सवाल ही गलत है। विदेश मंत्री ने कहा, "आपका सवाल यह होना चाहिए कि एक मोदी हैं। क्योंकि असली फर्क नेता और उसके विजन, आत्मविश्वास से पड़ता है। देश अपने नेताओं के विजन से पहचाने जाते हैं। उनके उस विजन को अमल में लाने वाले कई लोग होते हैं, लेकिन आखिरकार नेता ही मुख्य होता है।" पुणे बुक फेस्टिवल में पश्चिमी राजनयिकों पर अपनी बात रखते हुए जयशंकर ने महाभारत और रामायण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "ज्यादातर किताबें पश्चिमी लोगों के द्वारा लिखी गई हैं… मैं यह पढ़-पढ़कर थक गया हूं कि वह बहुत रणनीतिक हैं, जबकि भारत के पास रणनीति और राजकौशल की कोई परंपरा नहीं है। हम अपनी आस्थाओं और संस्कृतियों के साथ बड़े हुए हैं लेकिन हम अपने ही शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते… इसलिए दुनिया भी उन्हें नहीं जानती है।" उन्होंने कहा, "आम तौर पर हम महाभारत और रामायण को सत्ता, संघर्ष और परिवार की कहानी मानते हैं। हम इनकी रणनीति, युक्ति और गेम प्लान के बारे में स्पष्ट रूप से सोच नहीं पाते। दरअसल, एक बार जब मुझसे किसी ने पूछा था कि आपके हिसाब से सबसे महान राजनियक कौन हैं, तो मैंने कहा था कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान। इनमें से एक महाभारत के महान राजनयिक हैं, तो दूसरे रामायण के।" गठबंधन के दौर में है दुनिया: जयशंकर वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल को लेकर अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया गठबंधन की राजनीति जैसी है। उन्होंने कहा, "आज किसी के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है। किसी गठबंधन के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं ह। ऐसे में रोज नए समीकरण बनते हैं, सौदे होते हैं, कोई ऊपर होता है, कोई नीचे, हर दिन कोई नया मुद्दा उभरकर सामने आता है। बहुध्रवीय दुनिया कई पार्टियों के जैसी है। कभी आप एक के साथ होते हैं, तो कभी दूसरे मुद्दे पर दूसरे के साथ… लेकिन इस सब बातों के बीच बस एक ही सिद्धांत है… मेरे देश की मदद करना, जो भी मेरे देश के हित में हो, मदद कर रहा हो… बस वही मेरा विकल्प है।"

शेख हसीना का भारत दौरा: एस जयशंकर बोले— भारत अपने फैसले खुद लेता है

नई दिल्ली  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि उनकी उपस्थिति उनकी निजी पसंद है और यह पिछले साल बांग्लादेश में घटी विशेष परिस्थितियों से जुड़ी है। शेख हसीना पर भारत का रुख हसीना को पिछले महीने मानवता के खिलाफ अपराध मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद बांग्लादेश ने उनके प्रत्यर्पण की मांग की है। एक कार्यक्रम में जब जयशंकर से पूछा गया कि क्या हसीना भारत में जितनी चाहें उतनी देर रह सकती हैं, तो उन्होंने जवाब दिया: "वह एक खास परिस्थिति में भारत आई थीं और वही परिस्थितियां तय करेंगी कि आगे क्या होगा।" उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत हमेशा बांग्लादेश का एक अच्छा पड़ोसी और शुभचिंतक है, और वह पड़ोसी देश में लोकतांत्रिक माहौल मजबूत होते देखना चाहेगा।   रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत-रूस संबंध पिछले 70-80 साल से सबसे स्थिर बड़े रिश्तों में रहे हैं। जयशंकर ने स्पष्ट संदेश दिया: "भारत सभी बड़े देशों से रिश्ते रखता है। किसी भी देश को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि उसे हमारे फैसलों पर वीटो जैसा असर मिलेगा।" उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि पुतिन की यात्रा से भारत-अमेरिका व्यापार समझौता प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति की बुनियाद है स्वतंत्र विकल्प और रणनीतिक स्वतंत्रता।" अमेरिका से व्यापार वार्ता पर राष्ट्रीय हित सर्वोपरि वर्तमान अमेरिकी प्रशासन के साथ व्यापार समझौते की बातचीत पर, विदेश मंत्री ने भारत का रुख स्पष्ट रखा। उन्होंने कहा कि भारत अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही बातचीत करेगा। जयशंकर ने कहा, "डिप्लोमेसी किसी को खुश करने के लिए नहीं होती, यह देश के हितों की रक्षा के लिए होती है।" उन्होंने जोर दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देश के किसानों, मजदूरों, छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ा जाएगा।  

जयशंकर ने गुटेरेस को धन्यवाद दिया, भारत के विकास और प्रगति में निरंतर समर्थन के लिए सराहना

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की. साथ ही ये कहा कि वह वर्तमान वैश्विक व्यवस्था और बहुपक्षवाद पर इसके प्रभावों के बारे में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के आकलन की सराहना करते हैं. इसके अलावा भारत के विकास के लिए निरंतर समर्थन के लिए भी उनका धन्यवाद भी किया. जयशंकर ने (स्थानीय समय) सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "आज न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव @antonioguterres से मिलकर अच्छा लगा. वर्तमान वैश्विक व्यवस्था और बहुपक्षवाद पर इसके प्रभावों के उनके आकलन की सराहना करता हूं. विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण की भी सराहना करता हूं" जयशंकर ने कहा कि उन्होंने गुटेरेस को "भारत के विकास और प्रगति के लिए स्पष्ट और निरंतर समर्थन" के लिए धन्यवाद दिया और भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं. संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गुटेरेस से मुलाकात के दौरान जयशंकर के साथ संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. ​​हरीश, संयुक्त राष्ट्र में उप-स्थायी प्रतिनिधि राजदूत योजना पटेल और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के अधिकारी भी मौजूद थे. जयशंकर ने कहाकि उन्होंने गुटेरेस को "भारत के विकास और प्रगति के लिए स्पष्ट और निरंतर समर्थन" के लिए धन्यवाद दिया. इसके साथ ये कहाकि भारत, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के इंडिया में स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं. गौर करें तो जयशंकर जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए कनाडा में थे. यहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात कर अन्य वैश्विक समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. इससे पहले मंगलवार को गुटेरेस ने दिल्ली धमाके पर कहा था कि "वहां जो कुछ हुआ" उसके लिए भारत सरकार और लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की थी. वहीं उनके उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि इस घटना की पूरी जांच होनी चाहिए. संयुक्त राष्ट्र की दैनिक ब्रीफिंग में लाल किले के पास हुए हमले के बारे में पूछे जाने पर हक ने कहा, "हम निश्चित रूप से भारत सरकार और भारत के लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं कि वहां क्या हुआ है, और इसकी भी पूरी जांच होनी चाहिए." फरहान हक ने लाल किले पर हुए हमले को केवल "वहां जो हुआ" बताया.

उतार-चढ़ाव भरे भारत-US संबंधों के बीच जयशंकर से मिले अमेरिकी राजदूत, बढ़ेगी साझेदारी?

नई दिल्ली  भारत-अमेरिका में उतार-चढ़ाव वाले चल रहे संबंधों के बीच अमेरिका के मनोनीत राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से शनिवार को नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में मुलाकात की। इस दौरान, दोनों ने भारत-अमेरिका संबंधों और इसके बढ़ते वैश्विक महत्व पर बातचीत की। 'एक्स' पर एक पोस्ट में, जयशंकर ने कहा, "आज नई दिल्ली में अमेरिका के मनोनीत राजदूत सर्जियो गोर से मिलकर प्रसन्नता हुई। भारत-अमेरिका संबंधों और इसके वैश्विक महत्व पर चर्चा हुई। उन्हें उनकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं।" विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी आज सुबह भारत में अमेरिका के मनोनीत राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। एक्स पर एक पोस्ट में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज सुबह भारत में अमेरिका के मनोनीत राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। उनके बीच भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और इसकी साझा प्राथमिकताओं पर उपयोगी चर्चा हुई। विदेश सचिव ने मनोनीत राजदूत गोर को उनके कार्यभार के लिए शुभकामनाएं।'' इससे पहले, जयशंकर ने 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) सत्र के साइडलाइन में गोर से मुलाकात की थी, जहां दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर चर्चा की थी। मुलाकात के बाद, अमेरिकी विदेश विभाग ने एक्स पर साझा किया, "दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत और भारत में राजदूत नामित सर्जियो गोर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत के विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। वे अमेरिका-भारत संबंधों की सफलता को और बढ़ावा देने के लिए तत्पर हैं।" इससे पहले, सीनेट में अपनी पुष्टिकरण सुनवाई के दौरान, गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गहरी दोस्ती पर प्रकाश डाला और इसे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में एक अनूठी ताकत बताया था। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में थोड़ी गिरावट आई है। ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया हुआ है, जिसकी वजह से व्यापार पर असर पड़ा है। ट्रंप भारत द्वारा रूस से तेल आयात करने की वजह से खफा हैं, जबकि भारत ने साफ कर दिया है कि वह ऐसे कदम उठाता रहेगा, जोकि राष्ट्र हित में होंगे।  

जयशंकर बोले, भारत और रूस का साझा मकसद है आपसी सहयोग बढ़ाना

मॉस्को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को रूस की राजधानी मॉस्को में अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत और रूस का साझा लक्ष्य आपसी रिश्तों में 'अधिकतम पूरकता' हासिल करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी चर्चाएं सार्थक रहीं और इस वर्ष के अंत में होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शिखर सम्मेलन को अधिकतम परिणामोन्मुख बनाएंगी। जयशंकर ने कहा, "आज की बैठक हमें राजनीतिक रिश्तों पर चर्चा करने का अवसर देती है, साथ ही व्यापार, आर्थिक निवेश, रक्षा, विज्ञान-तकनीक और जन-से-जन संपर्क जैसे द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा का भी। पिछले वर्ष हमारे नेताओं की 22वीं वार्षिक शिखर सम्मेलन और फिर कजान में मुलाकात हुई थी। अब हम इस साल के अंत में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं।" उन्होंने बताया कि बुधवार को रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ अंतर-सरकारी आयोग की बैठक बहुत उपयोगी रही और कई मुद्दों पर समाधान निकाले गए। उन्होंने कहा, "अब मैं चाहता हूं कि उन चर्चाओं को आगे बढ़ाया जाए ताकि वार्षिक शिखर सम्मेलन में अधिकतम परिणाम हासिल किए जा सकें।" विदेश मंत्री ने हाल ही में हुई अन्य उच्चस्तरीय बैठकों का भी उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रेल और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा नीति आयोग प्रमुख सुमन बेरी की मॉस्को यात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक हालात और वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य के बीच भारत-रूस रिश्तों की निकटता और गहराई स्पष्ट झलकती है। जयशंकर ने लावरोव का गर्मजोशी से स्वागत किया और मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर उनकी नियमित मुलाकातों ने दोनों देशों के बीच सतत संपर्क बनाए रखने में मदद की है। बुधवार को जयशंकर ने मॉस्को में 26वें भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) की सह-अध्यक्षता भी की। इसके बाद उन्होंने एक्स पर लिखा, "भारत-रूस बिजनेस फोरम में शामिल होकर खुशी हुई। हमारे आर्थिक संबंधों की गहराई पर विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं की राय और आकलन उपयोगी रहे।" उन्होंने कहा, "किसी भी स्थायी रणनीतिक साझेदारी में मजबूत और टिकाऊ आर्थिक आधार जरूरी है। इस संदर्भ में मैंने हमारे कारोबारियों से अधिक व्यापार करने, नए निवेश और संयुक्त उपक्रमों पर विचार करने तथा आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने का आह्वान किया।"

विदेश मंत्री जयशंकर ने बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति से की मुलाकात, एससीओ की अध्यक्षता के लिए समर्थन व्यक्त किया

 बीजिंग  विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को बीजिंग में चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने 'एक्स' पर ट्वीट किया, 'चीन की शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की अध्यक्षता के लिए भारत का समर्थन व्यक्त किया। हमारे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार पर फोकस किया और विश्वास व्यक्त किया कि मेरी यात्रा के दौरान हुई चर्चाएं सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी।' दोनों देशों के संबंधों में सुधार उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान में हुई बैठक के बाद से दोनों देशों के संबंधों में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा, 'भारत शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में चीन की सफल अध्यक्षता का समर्थन करता है। पिछले अक्तूबर में कजान में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में लगातार सुधार हो रहा है। मुझे विश्वास है कि इस यात्रा में मेरी चर्चाएं इसी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी।' पांच वर्षों में चीन की पहली यात्रा  जयशंकर सिंगापुर की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद चीन पहुंचे हैं। यह पांच वर्षों में उनकी चीन की पहली यात्रा है। सोमवार को उनके अपने चीनी समकक्ष वांग यी से द्विपक्षीय बैठक करने की उम्मीद है। जयशंकर और वांग यी की पिछली मुलाकात फरवरी में जोहान्सबर्ग में जी-20 बैठक के दौरान हुई थी, जहां दोनों पक्षों ने आपसी विश्वास और समर्थन का आह्वान किया था। एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक जयशंकर आज तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विदेश मंत्री तियानजिन में आयोजित एससीओ विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक (सीएफएम) में भाग लेने के लिए पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का दौरा करेंगे। विदेश मंत्री सीएफएम के दौरान द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। गलवां के बाद पहली यात्रा 2020 में गलवां में हुई घातक सैन्य झड़प को लेकर संबंधों में आई खटास के बाद विदेश मंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। जयशंकर की यह यात्रा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की यात्राओं के बाद हो रही है, जिन्होंने जून में एससीओ बैठकों के लिए चीन की यात्रा की थी।    

तेल डील पर अमेरिका की धमकी! जयशंकर ने दिया कड़ा संदेश: समय आने पर देंगे जवाब

वाशिंगटन भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों पर 500% टैरिफ लगाने की योजना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत उस समय उचित कदम उठाएगा, जब यह सामने आएगा। जयशंकर ने इसे "पुल को पार करने" की तरह बताया, जिसका मतलब है कि भारत इस मामले में तभी कोई ठोस रुख अपनाएगा, जब स्थिति स्पष्ट होगी। जयशंकर अमेरिका के चार दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि भारत ने अमेरिका के उस सांसद के सामने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर कर दी है, जिसने रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% शुल्क लगाने वाला विधेयक पेश किया है। जयशंकर ने वाशिंगटन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ऐसे घटनाक्रम, जो भारत के हित में हों या उस पर प्रभाव डाल सकते हों, हम उन्हें बेहद करीब से ट्रैक करते हैं।" उन्होंने बताया कि भारत सरकार और भारतीय दूतावास अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के संपर्क में हैं। ग्राहम वही सीनेटर हैं, जिन्होंने यह सख्त विधेयक पेश किया है। विधेयक पेश करते समय उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन का नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि ये देश मिलकर पुतिन का 70% तेल खरीद रहे हैं। जयशंकर ने कहा, "मुझे लगता है कि हमने अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और हितों को ग्राहम के साथ स्पष्ट रूप से साझा किया है। अब यह देखना होगा कि यह बिल कितना आगे बढ़ता है। जब समय आएगा, तो हम उस पुल को पार करेंगे।" ट्रंप का समर्थन बना नई चुनौती इस विधेयक को और जटिल बना रहा है अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन। राष्ट्रपति ट्रंप इस विधेयक को समर्थन दे चुके हैं। यह विधेयक उन देशों पर 500% आयात शुल्क लगाने की मांग करता है, जो अब भी रूस से व्यापार कर रहे हैं- इनमें भारत और चीन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत के लिए दबाव बनाना चाहता है। अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। 500% शुल्क भारतीय व्यापार के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा। व्यापार समझौते की दौड़ इस बीच, भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य ट्रंप द्वारा अप्रैल में घोषित 26% जवाबी टैरिफ से बचना है। अगर यह समझौता हो जाता है, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में बड़ी राहत मिल सकती है। भारत की रूस से बढ़ती तेल खरीद भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद लगातार बढ़ रही है। मई 2025 में यह आयात 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो पिछले 10 महीनों में सबसे अधिक है। अब स्थिति यह है कि भारत ने पश्चिम एशियाई देशों से ज्यादा तेल रूस से खरीदना शुरू कर दिया है। यह रुझान फरवरी 2022 के बाद से शुरू हुआ, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया और पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए। इसके बाद रूस ने भारत और चीन जैसे देशों को रियायती दरों पर तेल बेचना शुरू किया, जिसे भारतीय रिफाइनरियों ने हाथों-हाथ लिया। भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 40-45% हिस्सा कच्चे तेल से पूरा करता है, जिसमें रूस की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।  

भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर का क्रेडिट ट्रंप कई बार खुद को दे चुके, सीजफायर की बात भारत-पाक के DGMO… एस जयशंकर

 नई दिल्ली / वाशिंगटन पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है। इस दौरान भारत के एक्शन से बौखलाए पाकिस्तान ने जहर उगलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस बीच भारत में खून की नदियां बहाने की गिदड़भभकियां देने वाले पाक के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने अब यू टर्न ले लिया है। उन्होंने बुधवार को भारत से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की मांग की है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करता रहा है, लेकिन वह हर बार इससे पल्ला झाड़ लेता था। बिलावल भुट्टो के भारत को लेकर बदले सुर दरअसल, इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बिलावल भुट्टो ने कहा कि हम आतंकवाद से लड़ने के लिए भारत के साथ ऐतिहासिक और अभूतपूर्व साझेदारी बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-पाकिस्तान एक दूसरे के विरोधी नहीं है। बिलावल भुट्टो ने आगे कहा कि भारत और पाकिस्तान को पड़ोसी बनकर रहना चाहिए और लोगों को आतंकियों से बचाने के लिए आगे आना चाहिए। सिंधु जल संधि के सस्पेंड होने से बिलावट भुट्टो ने भारत के खिलाफ कई बार कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था, लेकिन अब वे सभी लंबित विवादों के सामाधान के लिए भारत के सामने हाथ जोड़ रहे हैं।  इसके साथ ही भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को खारिज किया है कि अमेरिका ने ट्रेड का हवाला देकर दोनों देशों के बीच युद्धविराम करवाया है. हालांकि भारत की ओर से लगातार कहे जाने के बावजूद ट्रंप इस युद्धविराम का क्रेडिट लेने के मोह को छोड़ नहीं पा रहे हैं. ट्रंप को जहां भी मौका मिलता है वो इस बात को जरूर कहते हैं कि उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम करवाकर परमाणु संपन्न दो पड़ोसियों के बीच युद्ध रुकवा दिया है. ट्रंप इस बात को कई बार दोहरा चुके हैं.  वाशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा ने विदेश मंत्री से पूछा कि जब ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का ऐलान किया तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी, पीएमओ में क्या चल रहा था.क्या आपने अपनी असहमति की जाहिर करने के लिए तुरंत अमेरिकी प्रशासन से संपर्क किया? और इस पर व्हाइट हाउस का क्या कहना था? इसके अलावा विदेश मंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका-भारत के संबंधों को निर्धारित करने में अब भी पाकिस्तान की कोई भूमिका है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद? इस प्रश्न के जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि, "देखिए, आज भी भारत-अमेरिका के संबंधों में भारत-अमेरिका ही सेंट्रल फैक्टर हैं. हम एक बड़े देश हैं, हम दुनिया पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से हैं. हमारी जनसंख्या सबसे अधिक है. हमारा प्रभाव बढ़ रहा है. हमारे अंदर ये आत्म विश्वास होना चाहिए. और ये प्रश्न पूछने के दौरान भी झलकना चाहिए." सीजफायर के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि, "उस समय क्या हुआ इसके रिकॉर्ड बहुत स्पष्ट हैं, सीजफायर को दो देशों के डीजीएमओ द्वारा तय किया गया था. इसलिए इसको मैं यहीं छोड़ता हूं." आतंकवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये एक फैक्ट है कि कई देश आतंकवाद पर वो नजरिया नहीं रखते हैं जब इसका शिकार कोई दूसरा देश होता है, लेकिन अगर इस आतंकवाद का शिकार वे स्वयं होते हैं तो उनका नजरिया और स्टैंड अलग होता है.  बता दें कि भारत ने कई मौकों पर इस बात पर जोर दिया है कि हाल के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ लड़ाई को बंद करवाने में  न तो अमेरिका और न ही किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका थी. नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि भारत द्वारा 9-10 मई को पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमला किए जाने के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ के समक्ष युद्धविराम की पेशकश की थी. इसके बाद ही दोनों देश लड़ाई बंद करने पर सहमत हुए. 18 जून को जब पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 35 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी तो इस बातचीत की जानकारी देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी यही बात कही थी.  उन्होंने पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुए बातचीत के बारे में देश को जानकारी देते हुए कहा था कि, 'इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी स्तर पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते या भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका द्वारा मध्यस्थता के किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई, सैन्य कार्रवाई रोकने पर चर्चा भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों सशस्त्र बलों के बीच संचार के मौजूदा चैनलों के माध्यम से सीधे हुई और इसकी पहल पाकिस्तान के अनुरोध पर की गई थी." इस दौरान भारत ने यह भी कहा कि भारत-पाकिस्तान के किसी भी मुद्दे पर इंडिया कभी भी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा.