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एपस्टीन लिंक के आरोपों पर एक्शन: हरदीप पुरी की बेटी पहुंचीं HC, 10 करोड़ की मानहानि याचिका दायर

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है। यह मुकदमा उन ऑनलाइन सामग्रियों और पोस्ट्स को हटाने की मांग के साथ लगाया गया है, जो उन्हें अमेरिकी बाल यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जोड़ती हैं। हिमायनी ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे एक्स, गूगल, मेटा और लिंक्डइन के साथ-साथ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है। मुकदमे में कहा गया कि भविष्य में ऐसी कोई भी मानहानिकारक सामग्री सामने आने पर उसे तुरंत हटाया जाए। यह केस वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी की ओर से तैयार किया गया है और लेक्स्टर लॉ एलएलपी के माध्यम से दायर किया गया। मामला जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। मुकदमे के अनुसार, 22 फरवरी 2026 से सोशल मीडिया पर विभिन्न पोस्ट्स और वीडियो वायरल होने लगे, जिनमें दावा किया गया कि हिमायनी पुरी का जेफरी एपस्टीन या उनकी आपराधिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यावसायिक, वित्तीय, व्यक्तिगत या अन्य संबंध थे। कुछ आरोपों में यह भी कहा गया कि जहां हिमायनी पुरी कार्यरत थीं, उस रियल पार्टनर्स एलएलसी ने एपस्टीन या उनके सहयोगियों से धन प्राप्त किया या संदिग्ध स्रोतों से फंडिंग ली। इसके अलावा, रॉबर्ट मिलार्ड के साथ मिलकर लेहमन ब्रदर्स के पतन में भूमिका निभाने का भी आरोप लगाया गया। आरोपी पर हिमायनी ने क्या कहा हिमायनी पुरी ने इन सभी दावों को पूरी तरह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और बेबुनियाद करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये आरोप उनकी प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए फैलाए जा रहे हैं। मुकदमे में बताया गया कि प्रतिवादी विभिन्न सनसनीखेज तरीकों से इन झूठे आरोपों को फैला रहे हैं, जिसमें संपादित वीडियो, भ्रामक कैप्शन और जाली थंबनेल शामिल हैं। ये सामग्रियां डिजिटल वायरलिटी और जन आक्रोश पैदा करने के लिए डिजाइन की गई हैं। हिमायनी पुरी का आरोप है कि उन्हें सुनियोजित अभियान के तहत निशाना बनाया जा रहा है, जिसका मकसद उन्हें भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करना है। मुकदमे में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है, क्योंकि इन झूठे दावों से उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर छवि को गंभीर क्षति पहुंची है। मुकदमे का मुख्य आधार यह है कि हिमायनी पुरी को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे केंद्रीय कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्य हरदीप सिंह पुरी की बेटी हैं। सूट में कहा गया है कि हिमायनी एक सक्षम, आत्मनिर्भर और पेशेवर महिला हैं, लेकिन उनके पिता की राजनीतिक स्थिति के कारण उन्हें क्रूर हमलों का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला एपस्टीन फाइल्स से जुड़े हालिया विवादों के संदर्भ में आया है, जिसमें हरदीप पुरी के नाम का भी जिक्र हुआ था, हालांकि हिमायनी ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है।  

प्रख्यात लेखिका ममता कालिया को साहित्य अकादमी सम्मान, ‘जीते जी इलाहाबाद’ को मिला बड़ा पुरस्कार

नई दिल्ली मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है। आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला। यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा। जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं। अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।  

शीतलहर के बीच हेमकुंड साहिब में भारी बर्फबारी, 23 मई से शुरू होंगे दर्शन

देहरादून उत्तराखंड में मौसम ने अचानक करवट बदली है। पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है। सोमवार को हेमकुंड साहिब के कपाट खोलने की तिथि की घोषणा हुई। ट्रस्ट ने घोषणा की कि सिखों के पवित्र धाम के कपाट 23 मई को खुलेंगे। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्धन के साथ तीर्थयात्रा की तैयारियों पर चर्चा के बाद यह निर्णय लिया। रविवार को अचानक बदले मौसम से पहाड़ बर्फ की चादर में लिपटे हुए हैं। बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में पांच फीट तक बर्फ जमा हो गई है। गोविंद घाट गुरुद्वारे के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि आगामी यात्रा सीजन को लेकर ट्रस्ट और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। मौजूदा मौसम और व्यवस्थाओं का आकलन करने के बाद दोनों पक्षों ने सहमति से 23 मई को कपाट खोलने का फैसला किया। सिख धर्म में खास महत्व हेमकुंड साहिब सिखों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहां दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पूर्व जन्म में तपस्या की थी। इसका उल्लेख गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित दशम ग्रंथ के ‘विचित्र नाटक’ अध्याय में भी मिलता है। पांच फीट तक बर्फ जमी इस समय बिगड़ते मौसम के बाद पहाड़ शीतलहर की चपेट में हैं। मैदानी इलाकों में बारिश-ओलावृष्टि के साथ पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है। हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में पांच फीट तक बर्फ जमा है। हेमकुंड साहिब हिमालय की मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। बर्फ से ढकी चोटियों और शांत वातावरण के बीच स्थित यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और ध्यान का अद्भुत अनुभव प्रदान करता है। हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। यह तीर्थ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है। यात्रा सीजन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और सेवा के लिए आते हैं, जिससे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।

EC की नई गाइडलाइन: 100 मिनट में शिकायतों का समाधान, निगरानी के लिए 5000 उड़नदस्ते मैदान में

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों के लिए 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी) में सख्त आदर्श आचार संहिता के निर्देश जारी किए हैं। 16 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन क्षेत्रों में एमसीसी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। चुनाव आयोग ने सुनिश्चित किया है कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हों, इसलिए केंद्रीय सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों पर MCC के प्रावधान लागू किए गए हैं। मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इस बार कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे, जहां लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे और लगभग 25 लाख कर्मी चुनाव प्रक्रिया में तैनात रहेंगे। चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,000 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड्स (उड़नदस्ते) और 5,200 से ज्यादा स्टेटिक सर्विलांस टीमों की तैनाती की है। शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों की शिकायतों के लिए 1950 टोल-फ्री नंबर और सी-विजिल ऐप के माध्यम से रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। राजनीतिक दलों को रैलियां, जुलूस या सभाओं के लिए पहले से पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है, लाउडस्पीकर आदि की इजाजत लेनी होगी। सार्वजनिक स्थलों जैसे मैदानों या हेलीपैड के उपयोग के लिए सुविधा पोर्टल पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवेदन करना होगा। EC का सख्त निर्देश मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से न जोड़ें व सरकारी मशीनरी, वाहनों या कर्मचारियों का दुरुपयोग न होने दें। निजी संपत्तियों पर बिना मालिक की अनुमति के पोस्टर, बैनर या झंडे नहीं लगाए जा सकेंगे। नागरिकों की निजता का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा व निजी आवासों के बाहर प्रदर्शन या धरना प्रतिबंधित रहेगा। चुनाव आयोग ने सभी स्तर के अधिकारियों से निष्पक्षता बरतने और सभी दलों के साथ समान व्यवहार करने का आह्वान किया है। मतदान की तिथियां चार चरणों में निर्धारित की गई हैं। 9 अप्रैल को केरल, असम और पुडुचेरी में एक ही चरण में, 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का पहला चरण और तमिलनाडु, जबकि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का दूसरा चरण होगा। सभी राज्यों में मतगणना 4 मई 2026 को होगी। साथ ही 6 राज्यों में उपचुनाव भी घोषित किए गए हैं। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के अनुसार चले, जिससे लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।  

अमेरिकी धार्मिक आयोग की रिपोर्ट में RSS-RAW पर सवाल, ट्रंप प्रशासन से कार्रवाई की सिफारिश

वाशिंगटन संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने ट्रंप प्रशासन से ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ और भारत की खुफिया एजेंसी 'रॉ 'पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। आयोग का आरोप है कि इनकी वजह से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता घटी है। भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में'विशेष चिंता का देश' बताते हुए आयोग ने वाशिंगटन सरकार से कहा है कि वह भारत के साथ हथियार बिक्री और व्यापार नीतियों पर भी ध्यान दे। अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने USCIRF की इस नई रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पिछले वर्षों में आई रिपोर्ट्स को भारत सरकार ने सिरे से खारिज करते हुए पक्षपाती करार दिया था। USCIRF ने हाल ही में जारी की गई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों को और पूजा स्थलों को निशाना बनाए जाने का भी आरोप लगाया। रिपोर्ट में कहा गया, "भारत के कई राज्यो में धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को लागू करने का प्रयास किया गया है। इन कानूनों में आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा का भी प्रावधान रखा गया है। भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों और धार्मिक शरणार्थियों को जेल में डालने या उन्हें देश से बाहर निकालने को भी सुगम बनाया है। इसके अलावा भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के ऊपर भीड़ द्वारा किए जाने वाले हमलों में भी वृद्धि हुई है।" गौरतलब है कि भारत के ऊपर आरोप वह अमेरिका लगा रहा है, जहां पिछले एक साल में हिंसा और नृजातीय भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं। ट्रंप प्रशासन के आने के बाद अमेरिका में भारतीय, अफ्रीकियों और एशिया के लोगों के प्रति भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं। ट्रंप के कई करीबी इस्लाम विरोधी माने जाते हैं। वक्फ संशोधन अधिनियम की आलोचना USCIRF ने अपनी रिपोर्ट में भारत सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन अधिनियम की भी आलोचना की है। बता दें, सरकार द्वारा यह अधिनियम इस्लामी धर्मार्थ संपत्तियों के नियमन और प्रबंधन में व्यापक बदलाव करने और इन्हें कानूनी रूप से ढालने के लिए लाया गया था। रिपोर्ट में इसके अलावा उत्तराखंड सरकार द्वारा लाए गए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम की भी आलोचना की गई है। USCIRF ने महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में हुए सांप्रदायिक झड़पों का उल्लेख किया और हिंसा के लिए विश्व हिंदू परिषद विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों (जो RSS से संबद्ध है) को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप प्रशासन को सिफारिश USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से सिफारिश की कि वह भारत सरकार पर धार्मिक मुद्दों को लेकर दबाव डाले। उन्होंने सुझाव दिया, "अमेरिकी सरकार को भारत को हथियार बेचने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि भारत सरकार की तरफ से क्योंकि अमेरिका के नागरिकों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ डराने-धमकाने और उत्पीड़न की घटनाएँ जारी हैं। आपको बता दें, 1998 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित किए गए एक अधिनियम के आधार पर बना यह आयोग दुनिया भर के देशों की धार्मिक स्थिति पर अपने हिसाब से रिपोर्ट तैयार करता है। इस रिपोर्ट के आधार पर यह अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और अमेरिकी कांग्रेस को सिफारिश देता है। यह एजेंसी कहती है कि वह स्वतंत्र रूप से काम करती है, लेकिन इसके नौ आयुक्तों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रतिनिधि सभा तथा सीनेट के वरिष्ठ राजनीतिक नेता करते हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया था पक्षपाती भारत सरकार लगातार इस आयोग की रिपोर्ट के पक्षपाती और राजनैतिक रूप से प्रेरित करार देती रही है। 2025 में जब इसकी वार्षिक रिपोर्ट आई थी तब विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह रिपोर्ट अलग-थलग घटनाओं को बढा-चढ़ाकर पेश करती है और भारत के विविधता में एकता वाले समाज पर सवाल उठाने का एक सुनियोजित एजेंडा पेश कर रही है। इसे किसी भी देश की धार्मिक स्वतंत्रता की चिंता नहीं है। आपको बता दें, इससे पहले भी 2019 में लागू किए गए नागरिकता संसोधन एक्ट की भी इस एजेंसी ने आलोचना की थी, जिसके बाद भारत सरकार ने इसकी टीम को वीजा देने से इनकार कर दिया था। यह एजेंसी दुनिया भर के देशों में होने वाली घटनाओं को बढ़ाचढ़ाकर पेश करती है, जबकि अमेरिका में होने वाली घटनाओं को कमतर करके दिखाती है। अगर स्वतंत्र एजेंसियों की रिपोर्ट को देखा जाए, तो अमेरिका में पिछले कुछ सालों में धार्मिक और नृजातीय भेदभाव और हिंसा के मामले बढ़े हैं। इसके अलावा अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं आम हैं।

PNG गैस कनेक्शन के बाद क्या करना होगा LPG सिलिंडर का? जानिए रिटर्न करने का तरीका

नई दिल्ली बीते कुछ दिनों से एलपीजी गैस सिलिंडर को लेकर जो हालात हैं, वो किसी से छुपे नहीं है। जहां एक तरफ लोगों में सिलिंडर को लेकर चिंता है, तो वहीं सरकार इसके लिए कई अलग-अलग रास्ते निकाल रही है। ऐसे में सरकार की तरफ से गैस बुकिंग से लेकर कई अन्य नियमों में बदलाव भी किया गया। वहीं, अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर एक फैसला लेते हुए नयी नियम लागू कर दिया है। इस नइ नियम के तहत अब जिन लोगों के घर पर पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी (गैस वाली पाइपलाइन) लगी है और अगर उस घर में एलपीजी सिलिंडर भी है तो उन्हें वो सरेंडर करना होगा। चलिए जानते हैं इसका तरीका क्या है और ये नया नियम क्या कहता है। क्या कहता है नया नियम?     नए नियम के मुताबिक, जिन घरों में पहले से गैस पाइपलाइन लगी है यानी पीएनजी का कनेक्शन लगा है। ऐसे घरों को अलग से एलपीजी सिलिंडर का कनेक्शन नहीं दिया जाएगा     साथ ही जिन लोगों के घरों में गैस पाइपलाइन लगी है और साथ ही अगर उस घर में एलपीजी सिलिंडर का कनेक्शन भी है, तो ऐसे लोगों को अपना एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करना होगा क्यों वापस करना होगा गैस सिलिंडर?     सरकार द्वारा ये फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि अमेरिका और इजरायल का ईरान से चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा का संकट खड़ा हो गया है     ऐसे में देश में सभी को गैस सिलिंडर मिल पाए जिसके लिए सरकार की तरफ से ये फैसला लिया गया है कैसे सरेंडर करें एलपीजी सिलिंडर? पहला स्टेप     आपको अपना गैस सिलंडर सरेंडर करने के लिए अपनी नजदीकी गैस एजेंसी से संपर्क करना है     आपको एजेंसी जाना है और उनसे गैस सिलिंडर सरेंडर करने वाला फॉर्म लेना है दूसरा स्टेप     फिर आपको ये फॉर्म भरना है और साथ में अपनी गैस पासबुक या कनेक्शन वाउचर जमा करना है     इसके बाद आपको अपना गैस सिलिंडर और उसके साथ रेगुलेटर भी देना है     फिर जब पूरी कागजी कार्रवाई हो जाती है तो आपको आपका सुरक्षा जमा रिफंड कर दिया जाएगा क्या ऑनलाइन भी सरेंडर कर सकते हैं गैस सिलिंडर?     हां, बिलकुल आप ऑनलाइन भी अपना एलपीजी गैस कनेक्शन सरेंडर कर सकते हैं     इसके लिए आपके पास जिस कंपनी का गैस कनेक्शन है उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाना है     फिर आप यहां से ऑनलाइन गैस कनेक्शन सरेंडर का प्रोसेस फॉलो कर सकते हैं  

ट्रंप को चार दोस्तों ने दिया धोखा, होर्मुज में अकेले पड़े! तेल संकट में डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति हुई विफल

वाशिंगटन दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है. ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी में दुनिया की महाशक्तियां और उनके पुराने सहयोगी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे, लेकिन हकीकत इसके उलट निकली।   दरअसल, ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से अपील की थी कि वे भी इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज तैनात करें।   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है और यहां से दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल और गैस की आपूर्ति होती है. ट्रंप का तर्क था कि चूंकि इन देशों का तेल और व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इनकी ही होनी चाहिए. ट्रंप ने ट्वीट किया था, "दुनिया के बाकी देश अपने जहाजों की सुरक्षा खुद क्यों नहीं करते? हम सालों से उनकी रक्षा कर रहे हैं।  जापान का दो टूक जवाब सबसे बड़ा झटका टोक्यो से लगा. जापान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज में किसी भी तरह के समुद्री सुरक्षा अभियान (Maritime Security Operations) पर विचार नहीं कर रही है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने भी खींचे हाथ ऑस्ट्रेलिया, जिसे प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का सबसे वफादार साथी माना जाता है, उसने भी ट्रंप की मांग को ठुकरा दिया है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने स्पष्ट किया कि वे होर्मुज में अपना युद्धपोत नहीं भेजेंगे. वहीं, दक्षिण कोरिया ने थोड़ी कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया लेकिन मंशा साफ कर दी. सियोल ने कहा कि वे इस अनुरोध की 'बारीकी से समीक्षा' करेंगे, लेकिन फिलहाल युद्धपोत भेजने की कोई योजना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेत है. जिस 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, वहां सुरक्षा के नाम पर ट्रंप का साथ देने के लिए कोई भी अपना युद्धपोत जोखिम में डालने को तैयार नहीं है। तेल और गैस संकट पर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने पुरी दुनिया के लिए अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का फैसला किया था। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे खुलवाने के लिए दूसरे देशों से साथ आने की अपील कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने 7 देशों का नाम लिया और कहा कि अमेरिका तो यहां से सिर्फ 1 फीसदी तेल ही लेता है। उन्होंने कहा कि ये रास्ता चीन समेत कई देशों के लिए जरूरी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन समेत अन्य देश जो इस समस्या से प्रभावित हैं वो इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजेंगे और रास्ता खुलवाने में अहम भूमिका निभाएंगे। अमेरिका के साथ मिलकर कई देश युद्धपोत भेजेंगे तो होर्मुज खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता का 100 फीसदी नष्ट कर दिया है, लेकिन उनके लिए एक- दो ड्रोन भेजना, बारूदी सुरंग फोड़ना या जलमार्ग के आसपास कहीं भी कम दूरी की मिसाइल दागना आसान है, चाहे वे कितनी ही बुरी तरह हार चुके हों। क्या है प्लान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत तट पर बमबारी करते रहेंगे और ईरानी पोत को निशाने पर लेते रहेंगे। अमेरिकी नौसेना ईरानी पोतों को पानी में डुबाने का सिलसिला जारी रखेगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी तरह से हम जल्द ही होर्मुज को खुलवा लेंगे और ये रास्ता सुरक्षित रास्ता और स्वतंत्र होगा। मालूम हो अमेरिका लंबे समय से इस रास्ते को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल अवरोध बिंदु बताता रहा है। पल्ला झड़ाया और मदद का वादा भी किया ट्रंप ने कहा, 'मैं इन देशों से मांग कर रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।' फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास तेल तक अपनी पहुंच है। ट्रंप ने कहा कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बहुत कम तेल मिलता है। हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या चीन इस गठबंधन में शामिल होगा। अब तक कोई नहीं हुआ तैयार तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद उनकी अपील पर अभी तक किसी देश ने ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है। ऑस्ट्रेलिया ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलवाने के लिए अपने पोत भेजने से इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की कैबिनेट की सदस्य कैथरीन किंग ने एक इंटरव्यू में कहा, 'हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपना जहाज नहीं भेजेंगे। हम जानते हैं कि वह इलाका कितना अहम है, लेकिन न तो हमसे ऐसा करने के लिए कहा गया है और न ही हम इसमें अपना योगदान दे रहे हैं। जापानी संसद में प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा कि जापान की युद्धपोत तैनात करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा, 'जहाज भेजने को लेकर हमने अब तक कोई फैसले नहीं लिए हैं। हम अभी पता लगा रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानून के दायरे में रहकर क्या किया जा सकता है।' कुछ देश अभी विचार कर रहे हैं दक्षिण कोरिया ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन के साथ चर्चाएं जारी हैं। साथ ही कहा गया है कि कोई भी कदम गहन समीक्षा के बाद ही उठाया जाएगा। ट्रंप टाल सकते हैं चीन यात्रा रविवार को ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि वह उम्मीद कर रहे हैं की राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन मदद के लिए तैयार हो सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सहयोग नहीं किया गया, तो वह अपनी यात्रा टाल सकते हैं। ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि चीन को भी मदद करनी चाहिए, क्योंकि चीन को स्ट्रेट्स से 90 फीसदी तेल मिलता है।'    

सिलेंडर संकट के बीच सरकार का बड़ा ऐलान, पीएनजी पर शिफ्ट करने पर 500 रुपये की फ्री गैस मिलेगी

नई दिल्ली. ईरान संकट के बीच सिलेंडर के संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने लोगों को बड़ा ऑफर दिया है। सरकार ने पाइप नेचुरल गैस (PNG) को रसोई और व्यापार का मुख्य आधार बनाने के लिए एक बड़ी प्रोत्साहन योजना को हरी झंडी दी है. इस पहल के तहत प्रमुख सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों ने उपभोक्ताओं के लिए ‘वेलकम ऑफर’ पेश किए हैं, ताकि लोग बिना किसी आर्थिक बोझ के एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट हो सकें. इस योजना के तहत Indraprastha Gas Ltd. (IGL) और GAIL Gas Ltd जैसे बड़े नाम घरेलू उपभोक्ताओं को सीधे 500 रुपये मूल्य की मुफ्त गैस दे रहे हैं. वहीं, व्यावसायिक क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए BPCL ने सिक्योरिटी डिपॉजिट को पूरी तरह खत्म कर दिया है. सरकार ने कहा कि स्थिति चिंताजनक है लेकिन फिलहाल सबकुछ नियंत्रण में है। CGD Entity (गैस कंपनी) Offers (ऑफर/छूट का विवरण) Indraprastha Gas Ltd. (IGL) 31 मार्च 2026 से पहले रजिस्टर करने या गैस शुरू करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को ₹500 मूल्य की मुफ्त गैस। Mahanagar Gas Ltd. (MGL) DPNG उपभोक्ताओं के लिए ₹500 का रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ; कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट (SD) में ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की छूट। GAIL Gas Ltd घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ₹500 मूल्य की मुफ्त गैस की पेशकश। BPCL सभी कमर्शियल (व्यावसायिक) कनेक्शनों के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) पूरी तरह माफ। सिलेंडर की कालाबाजारी पर 1100 स्‍थानों पर छापेमारी पेट्रोलियम मंत्रालय की ज्‍वाइंट सेकेटरी सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि देश में एलपीजी (LPG) की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं भी ‘ड्राई-आउट’ (स्टॉक खत्म होने) की खबर नहीं है. सरकार ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि घरेलू गैस की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी, इसलिए लोग पैनिक बुकिंग या जमाखोरी से बचें. कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यों के साथ मिलकर 1100 से अधिक स्थानों पर औचक निरीक्षण किए गए हैं. पीएनजी वालों से सिलेंडर छोड़ने की अपील सरकार का मुख्य जोर अब उपभोक्ताओं को पाइप नेचुरल गैस (PNG) पर शिफ्ट करने पर है. 14 तारीख को जारी नए सरकारी आदेश के अनुसार, जिन लोगों के पास एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन हैं, उनसे एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने की अपील की गई है ताकि जरूरतमंदों तक सिलेंडर पहुंच सके. अधिकारियों ने साफ कहा है कि सिलेंडर की होम डिलीवरी जारी रहेगी, इसलिए वितरकों के पास भीड़ लगाने की आवश्यकता नहीं है.  

अवैध कॉल सेंटर पर ED की सख्त कार्रवाई, बंगाल में 10 ठिकानों पर एक साथ रेड

   कोलकाता पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी की टीमों ने राज्य के अलग-अलग कई इलाकों में छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई एक अवैध कॉल सेंटर चलाने और लोगों से धोखाधड़ी करने के मामले से जुड़ी है। अधिकारियों ने बताया कि सिलीगुड़ी, हावड़ा, बिधाननगर और दुर्गापुर जैसे इलाकों में करीब 10 जगहों पर तलाशी ली गई। इस मामले में सुरश्री कर, सम्राट घोष और सुभजीत चक्रवर्ती के नाम मुख्य रूप से सामने आए हैं। एजेंसी इन लोगों और इनके साथियों के ठिकानों पर जरूरी सबूत तलाश रही है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने कॉल सेंटर के जरिए बहुत से मासूम लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे बड़ी रकम ठगी है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि इस मामले का कोई संबंध चुनावी फंडिंग या राजनीति से है या नहीं। जांच एजेंसी हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रही है। ईडी के अधिकारी जब्त किए गए दस्तावेजों और सामानों की जांच कर रहे हैं ताकि इस गिरोह की पूरी सच्चाई सामने आ सके। यह छापेमारी एसे समय में हुई है जब बंगाल में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। चुनाव आयोग ने हाल ही में राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की है। बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। चुनाव के नतीजों का एलान 4 मई को असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के साथ होगा।

नेतन्याहू ने जो वीडियो शेयर किया था, उससे खारिज हुई मौत की अफवाह, Grok ने उसे डीपफेक बताया!

यरुशलम इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. पिछले हफ्ते से इंटरनेट पर उनके बारे में अजीब तरह की अफवाहें चल रही थीं. कुछ यूजर्स दावा कर रहे थे कि नेतन्याहू की मौत हो गई है या उन्हें ईरानी अटैक में मार दिया गया है। इन अफवाहों की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें दावा किया गया कि नेतन्याहू के हाथ में 6 उंगलियां दिखाई दे रही हैं. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे AI जनरेटेड वीडियो बताया और सवाल उठाए कि कहीं यह असली व्यक्ति की जगह डिजिटल डबल तो नहीं है. यही से नेतन्याहू जिंदा हैं या नहीं जैसी थ्योरी फैलने लगी। चूंकि वो अब तक लाइव नहीं आए हैं, इसलिए इस तरह के अफवाहों को बल मिल रहा है. इसी बीच उनके X हैंडल से एक नया वीडियो पोस्ट किया गया है. हालांकि इंटरनेट पर लोग इस वीडियो पर भी सवाल उठा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये वीडियो AI जेनेरेटेड तो नहीं है, लेकिन इसमें नेतन्याहू के बॉडी डबल का यूज किया गया है. हालांकि Elon Musk का Grok इस वीडियो को भी नकली बता रहा है। क्या नया वीडियो Deepfake है? रविवार को नेतन्याहू के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक नया वीडियो सामने आया. इस वीडियो में वह एक कैफे में खड़े दिखाई देते हैं और कॉफी पीते हुए मजाकिया अंदाज में उन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हैं। वीडियो में वह कहते हैं कि लोग कह रहे हैं कि वह मर चुके हैं, लेकिन वह खुद कॉफी पीते हुए दिखाई दे रहे हैं। Grok ने नए वीडियो को बताया Deepfake यानी नकली एलन मस्क की कंपनी xAI के AI चैटबॉट Grok ने इस वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने जब Grok से पूछा कि यह वीडियो असली है या नहीं, तो चैटबॉट ने जवाब दिया कि यह AI से बना Deepfake वीडियो हो सकता है। Grok ने कहा कि वीडियो में कई ऐसे संकेत हैं जो AI जनरेशन की ओर इशारा करते हैं. कुछ यूजर्स ने वीडियो में अजीब लिप सिंक, कप में कॉफी का असामान्य स्तर और बैकग्राउंड के कुछ अस्वाभाविक हिस्सों की ओर भी ध्यान दिलाया. इसी वजह से इंटरनेट पर बहस और तेज हो गई कि यह वीडियो असली है या AI से बनाया गया। कैफे की तस्वरीरें भी की गई हैं जारी हालांकि इस बीच उस कैफे की तरफ से तस्वीरें भी जारी की गईं, जहां नेतन्याहू को कॉफी लेते हुए देखा गया था. कैफे ने कहा कि प्रधानमंत्री सच में वहां आए थे और तस्वीरें उसी समय की हैं. इससे यह दावा भी किया गया कि नेतन्याहू बिल्कुल जिंदा और सक्रिय हैं। दरअसल यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं. इसी माहौल में नेतन्याहू की मौत से जुड़ी अफवाहें भी तेजी से फैलने लगीं कि ईरान द्वारा किए गए हमले मे उनकी मौत हो गई है। AI की वजह से हो रही कन्फ्यूजन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि AI के दौर में असली और नकली वीडियो में फर्क करना कितना मुश्किल होता जा रहा है. Deepfake तकनीक से बनाए गए वीडियो इतने असली लग सकते हैं कि आम लोगों के लिए सच और झूठ में फर्क करना आसान नहीं रहता। अब सोशल मीडिया पर बहस जारी है. कुछ लोग कह रहे हैं कि वीडियो असली है और AI चैटबॉट ने गलती की है, जबकि कुछ यूजर्स अभी भी इसे Deepfake मान रहे हैं।