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बड़ी चौपड़ के कॉम्पलेक्स में लगी भीषण आग, दिवाली का लाखों का सामान जलकर हुआ राख

जयपुर जयपुर में दिवाली से ठीक पहले लगी भीषण आग ने कई कारोबारियों की महीनों की मेहनत और त्योहार के सीजन से जुड़ी उम्मीदों को एक झटके में राख कर दिया। जिस सामान को व्यापारियों ने अच्छे कारोबार की उम्मीद में लाखों रुपए खर्च कर जुटाया था, वही माल गुरुवार सुबह उनकी आंखों के सामने आग की लपटों में जलता रहा। कोई व्यापारी अपने हाथों से आंसू पोंछता रहा तो किसी परिवार के लिए नुकसान का सदमा इतना भारी पड़ा कि तबीयत बिगड़ गई। बड़ी चौपड़ स्थित मणिहारों का कटला-सेठी कॉम्पलेक्स में सुबह करीब 7 बजे दूसरी मंजिल पर चूड़ियों के गोदाम में आग लगी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट से लगी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 25 दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। कपड़े, प्लास्टिक का सामान, कॉस्मेटिक आइटम, चूड़ियां और दिवाली सीजन से जुड़ा सामान आग में जल गया। करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन धुआं शाम तक उठता रहा। दिवाली के लिए भरा था माल, आंखों के सामने राख हो गया व्यापारी कमल अग्रवाल के लिए यह आग सिर्फ दुकानों में लगी आग नहीं थी, बल्कि दिवाली की उन उम्मीदों पर भी भारी पड़ी थी, जिनके भरोसे उन्होंने पहले से लाखों रुपए का सामान जुटा रखा था। कमल की कॉम्पलेक्स में तीन दुकानें खुद की हैं, जबकि दो दुकानें किराये पर हैं। दिवाली सीजन को देखते हुए पांचों दुकानों में बड़ी मात्रा में सामान स्टॉक किया गया था। इनमें बंदरवाल, दिवाली सजावट का सामान, धागों की गट्टियां और टेलरिंग से जुड़े सीजनल आइटम शामिल थे। आग की चपेट में उनकी तीन दुकानें आ गईं। बड़ी मात्रा में माल जलकर राख हो गया। आग की खबर मिलते ही कमल अपनी पत्नी और बेटे प्रणव अग्रवाल के साथ मौके पर पहुंचे। दुकानें जलती देखकर कमल भावुक हो गए। कुछ देर तक वह एक कोने में बैठे रहे और लगातार आंसू पोंछते नजर आए। जिस माल को उन्होंने सीजन में बिक्री के लिए सजाकर रखा था, वह उनकी आंखों के सामने धुएं में बदल रहा था। नुकसान देखकर पत्नी की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल ले जाना पड़ा कॉम्पलेक्स के सेक्रेटरी राम कटारिया के मुताबिक दिवाली को देखते हुए कमल ने काफी मात्रा में सामान भरकर रखा था। आग से हुए नुकसान को देखकर कमल की पत्नी भी रोने लगीं। परिवार और रिश्तेदार उन्हें संभालते रहे, लेकिन कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बीपी लो हो गया। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। कमल की हालत भी खराब होने पर परिजनों ने उन्हें घर भेज दिया। बेटे प्रणव ने बताया कि परिवार सीजनल कारोबार करता है। दिवाली पर अच्छे व्यापार की उम्मीद थी, इसलिए पहले से बड़ी मात्रा में सामान खरीदा गया था। आग वाले हिस्से में जाने की अनुमति नहीं होने के कारण परिवार अपने माल की स्थिति भी ठीक से नहीं देख सका। व्यापारी बेबस थे, पुलिसकर्मी रास्ता बनाकर अंदर पहुंचे एक तरफ व्यापारी अपने कारोबार को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखने को मजबूर थे, वहीं दूसरी तरफ पुलिस, दमकल, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमें आग से जूझ रही थीं। तीन मंजिला कॉम्पलेक्स के बरामदों में लोहे की जालियां लगी थीं। रास्ता संकरा था और सामान भी भरा हुआ था। ऐसे में आग वाले हिस्से तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था। माणक चौक थाने में तैनात नरेंद्र सिंह शेखावत और विक्रम सिंह ने रास्ता बनाने के लिए दीवार और लोहे की जाली तोड़ी। इसके बाद सीढ़ियों के जरिए दूसरी मंजिल तक पहुंचकर दमकलकर्मियों के लिए रास्ता बनाया गया। धुआं आंखों में चुभता रहा, दम घुटता रहा, फिर भी नहीं रुकी टीम दूसरी मंजिल पर जमा सामान आग बुझाने की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था। घने धुएं के बीच दमकलकर्मी, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ जवान लगातार ऑपरेशन में जुटे रहे। कई जगह शटर और दूसरे अवरोध तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा। धुआं इतना घना था कि जवानों की आंखों में तेज जलन होने लगी। कुछ को सांस लेने में भी परेशानी हुई। तबीयत प्रभावित होने पर कुछ दमकलकर्मियों को थोड़ी देर के लिए बाहर बैठाया गया, लेकिन इसके बाद वे फिर ऑपरेशन में जुट गए। करीब सात घंटे से ज्यादा चले अभियान में टीम आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास करती रही। नीचे के दुकानदारों को भी सताने लगा अपना माल जलने का डर दूसरी मंजिल से उठती लपटों और धुएं ने नीचे की दुकानों में बैठे व्यापारियों की चिंता भी बढ़ा दी। ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल के दुकानदार अपने स्टाफ के साथ सामान बाहर निकालने में जुट गए। बड़े-बड़े कार्टून दुकानों और गोदामों से बाहर लाए जाने लगे। डर था कि अगर आग नीचे तक पहुंची तो दिवाली के लिए जमा किया गया उनका माल भी राख हो जाएगा। एक तरफ दमकल की गाड़ियां आग बुझा रही थीं, दूसरी तरफ व्यापारी अपनी दुकानों से बचा हुआ सामान बाहर निकाल रहे थे। आग बुझी, लेकिन कारोबारियों का संकट अभी बाकी अग्निकांड के बाद व्यापारियों में कॉम्पलेक्स प्रबंधन को लेकर आक्रोश है। व्यापारियों ने प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आग ने सिर्फ सामान नहीं जलाया, बल्कि दिवाली के पूरे सीजन की तैयारियों को भी झटका दिया है।

महापौर की गाड़ी के ऊपर जलाए कागज, आग लगाने की कोशिश से भोपाल नगर निगम में मचा बवाल

 भोपाल  भोपाल नगर निगम कार्यालय परिसर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक नाराज कर्मचारी ने हंगामा करते हुए महापौर मालती राय की गाड़ी में आग लगाने का प्रयास किया। कर्मचारी ने कुछ कागजों में आग लगाकर उन्हें महापौर की गाड़ी की छत पर रख दिया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए जलते कागजों को तुरंत हटा दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आग बुझाने के दौरान एक कर्मचारी रामसिंह यादव के हाथ झुलस गए। बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी अपनी मांगों के निराकरण नहीं होने और अन्य समस्याओं को लेकर नाराज था। वह कुछ समय से बीमार चल रहा है और अस्पताल में भर्ती रहकर इलाज भी करा रहा था। जानकारी के अनुसार, सोमवार को वह सीधे अस्पताल से नगर निगम कार्यालय पहुंचा था। हाथ में पर्चे लेकर की नारेबाजी कार्यालय पहुंचने के बाद कर्मचारी ने हाथ में पर्चे लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वह महापौर मालती राय की गाड़ी के पास पहुंच गया। यहां उसने कुछ कागजों में आग लगाई और उन्हें गाड़ी की छत पर रख दिया। गाड़ी में आग लगने की आशंका को देखते हुए वहां मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल जलते हुए कागजों को हटा दिया। इस दौरान आग बुझाने की कोशिश में कर्मचारी रामसिंह यादव के हाथ झुलस गए। समय रहते आग पर काबू पा लेने से वाहन को बड़े नुकसान से बचा लिया गया। पर्चों पर कर्मचारी संगठन का नाम कर्मचारी ने परिसर में जो पर्चे फेंके, उन पर कर्मचारी नगर निगम भोपाल के साथ सम्राट अशोक संगठन का नाम लिखा हुआ है। पर्चों पर सुनील गायकवाड़, कर्मचारी अध्यक्ष, नगर निगम भोपाल का नाम भी अंकित है। घटना के बाद नगर निगम कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल कर्मचारी के हंगामे और महापौर की गाड़ी में आग लगाने के प्रयास के मामले में आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है।  

Jalandhar Fire: गद्दे की फैक्ट्री धधकी, आसमान में छाया काला धुआं; आग बुझाने पहुंचीं 10 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां

 जालंधर  थाना बस्ती बावा खेल के बस्ती पीर दाद रोड पर स्थित गद्दे बनाने की एक फैक्ट्री में वीरवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे परिसर में धुआं फैल गया। गनीमत रही कि समय रहते फैक्ट्री के अंदर मौजूद करीब 12 लोगों को बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। जानकारी के मुताबिक वीरवार सुबह करीब नौ बजे फैक्ट्री के अंदर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। आसपास के लोगों ने जब फैक्ट्री से निकलता धुआं देखा तो तुरंत वहां मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। कुछ ही देर में आग तेजी से फैल गई। गद्दे और उनमें इस्तेमाल होने वाला सामान ज्वलनशील होने के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। फैक्ट्री के अंदर केमिकल होने के कारण आग काफी भड़क गई है, जिससे इसे बुझाने में दिक्कत हुई। आग लगने के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात कही जा रही है। केशव नामक व्यक्ति ने बताया कि एक व्यक्ति घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। आग लोगों के घरों तक पहुंच गई। पुलिस प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन पुलिस एक घंटे के बाद मौके पर पहुंची। किसी भी फैक्टरी के संचालक ने घटना स्थल का आकर जायजा नहीं लिया गया। इस घटना के दौरान एक लैंटर भी गिर गया। व्यक्ति ने प्रशासन से फैक्ट्री को रिहायशी इलाके से बाहर निकालने की अपील की। केशव के अनुसार, 10 साल पहले भी एक फैक्टरी में आग लगने की घटना सामने आई थी। तक फैक्ट्री कर्मी ने कहा था कि इस यूनिट को इलाके से बाहर ले जाया जा रहा है और इसे गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन फैक्ट्री में आज भी गद्दे बनाने का काम चल रहा है। केशव के अनुसार फैक्टरी में भारी मात्रा में एलपीजी कॉमर्शियल सिलेंडर मौजूद है। आग की लपटें और घना धुआं देखकर आसपास के लोगों में भी दहशत फैल गई। धुआं इतना अधिक था कि करीब दो किलोमीटर दूर तक इसे आसानी से देखा जा रहा था। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। आग की भयावहता को देखते हुए करीब 10 दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। दमकल कर्मियों ने कई दिशाओं से पानी की बौछार कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, आग से फैक्ट्री में कितना नुकसान हुआ है, इसका अभी आकलन नहीं हो सका है। थाना बस्ती बावा खेल की पुलिस भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तेज गति से जारी है जांच

एसआईटी ने की अग्निकांड स्थल की पड़ताल, घायलों से भी मिला जांच दल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तेज गति से जारी है जांच घायलों से मिली जानकारी व साक्ष्य के आधार पर कई लोगों से होगी पूछताछ: अमृत अभिजात एफएसएल की टीम ने मौके से जुटाए महत्वपूर्ण साक्ष्य, निर्धारित समय में आएगी जांच रिपोर्ट: प्रवीण कुमार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर अलीगंज अग्निकांड की समग्र जांच तेज गति से जारी है। मंगलवार को दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) घटनास्थल पर पहुंचा। टीम ने इसके बाद केजीएमयू में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की और उनसे घटना के संबंध में जानकारी ली। उत्तर प्रदेश विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम ने भी घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। एसआईटी के सदस्य अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और एडीजी (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार सुबह घटनास्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने करीब एक घंटे से अधिक समय तक बारीकी से पूरी बिल्डिंग का निरीक्षण किया। अमृत अभिजात ने कहा कि घटनास्थल की विभिन्न प्रकार से फोटो ली गई हैं। साक्ष्य जुटाकर जांच को तेजी से अंजाम दिया जा रहा है। अग्निकांड से संबंधित व्यक्तियों व विभागों से भी पूछताछ होगी। उसके बाद जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। एडीजी प्रवीण कुमार ने बताया कि हम लोगों ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया है। साथ में फॉरेंसिक की टीम ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनके आधार पर कुछ लोगों से पूछताछ की जाएगी। घटना से संबंधित हर विभाग के दायित्व को जांच दायरे में शामिल किया गया है। अग्निकांड पीड़ितों से भी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद निर्धारित समय सीमा में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। घटनास्थल से निकलने के बाद एसआईटी ने केजीएमयू में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की। अयोध्या मामले में एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी  अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में कथित दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। एसआईटी के प्रमुख सदस्य एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को यह प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रकरण से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। एफएसएल ने जुटाए घटनास्थल से नमूने घटनास्थल पर एफएसएल डायरेक्टर आदर्श कुमार और विशेषज्ञों की टीम ने महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। इसमें मलबा, जले हुए उपकरण और तार समेत अन्य नमूने शामिल हैं। गौरतलब है कि हादसे की सूचना मिलते ही सीएम योगी ने अलीगढ़ दौरा बीच में रद्द कर घटनास्थल का मुआयना किया था। उन्होंने केजीएमयू में पीड़ितों से भी मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया। एसआईटी को 7 दिन में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी है। अब तक मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।

अलीगंज अग्निकांड पर सीएम योगी ने दौरा रद्द कर दिए राहत-बचाव के सख्त निर्देश

लखनऊ लखनऊ के अलीगंज की तीन मंजिला इमारत में भीषण आग की घटना से प्रदेश भर में हड़कंप मच गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की सूचना मिलते ही अपना हाथरस और आगरा दौरा रद्द कर दिया है। अलीगढ़ का दौरा बीच में छोड़कर वह वापस लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं। सीएम योगी ने हादसे में मारे गए बच्चों और उनके परिवारीजनों के प्रति गहरा दुख जताया है। 23 जून यानी कल उन्हें हाथरस और फिर आगरा के दौरे पर जाना था। सीएम योगी को लखनऊ अग्निकांड सूचना आयोजित जनसभा के दौरान ही मिली। उन्होंने कहा कि मैं चाहता था कि अलीगढ़ में रुकूं लेकिन लखनऊ में एक हादसा हुआ है। वहां आग लगने से कुछ बच्चों की मौत हुई है। मैं यहां से वहीं जा रहा हूं। अलीगढ़ के दौरे के लिए आगे योजना बनाऊंगा। सीएम योगी ने बताया कि आग की घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल डीजीपी और अपर मुख्य सचिव गृह को वहां राहत और बचाव कार्यों को लेकर निर्देश दिए हैं। एक दर्जन से अधिक हो सकती हैं मौतें लखनऊ अग्निकांड में मौतों की संख्या को लेकर अभी तक स्थित स्पष्ट नहीं है लेकिन विभिन्न स्रोतों से मिल रही जानकारी के मुताबिक संख्या एक दर्जन से अधिक हो सकती है। अलीगंज के पुरनिया इलाके में मारे गए लोगों की उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है। इससे इलाके में लोगों के बीच शोक की स्थिति है। खुद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी मीडिया के सवालों का जवाब देते वक्त रो पड़े। डिप्टी सीएम ने कहा कि हादसे में झुलसे लोगों को अस्पताल भेजा गया है। उनके इलाज की मॉनीटरिंग वह स्वयं कर रहे हैं। पेंट शॉप थी ग्राउंड फ्लोर पर अधिकारियों का कहना है कि इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर पेंट शॉप थी। जबकि ऊपरी मंजिल पर गेमिंग जोन था। वहां कर्मचारी गेमिंग साफ्टवेयर पर काम भी करते थे। आग लगते ही इमारत की ऊपरी मंजिल पर अफरा तफरी मच गई। कुछ लोग अंदर फंसे हुए थे। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव की कोशिश की लेकिन आग इतनी भयावह थी कि कई लोग उसमें फंसे रह गए। हर तरफ से चीख-पुकार ही सुनाई पड़ रही थी। पीएम मोदी ने जताया दुख पीएम नरेंद्र मोदी ने लखनऊ हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों और घायलों के परिवारीजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। सीएम योगी ने कहा कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। घटना की तह तक जाया जाएगा।

अलीगंज के पुरनिया इलाके में आग से हड़कंप, कई लोगों के फंसे होने की आशंका

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक दुकान में अचानक भीषण आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरी इमारत धुएं और लपटों की चपेट में आ गई. दुकान के ऊपर एक कोचिंग सेंटर चल रहा था, जिसकी वजह से स्थिति काफी भयानक हो गई. आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. कोचिंग सेंटर में मौजूद छात्र-छात्राओं और अन्य लोगों के बीच दहशत फैल गई. धुएं और आग की लपटों ने पूरी इमारत को घेर लिया, जिससे अंदर मौजूद लोगों के सामने बाहर निकलने की चुनौती खड़ी हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हालात इतने गंभीर हो गए कि कुछ लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इमारत के छज्जों और छत से छलांग लगानी पड़ी. आग और धुएं के बीच फंसे लोगों को देखकर आसपास मौजूद लोगों में भी चिंता बढ़ गई. घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए. स्थानीय लोगों ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसी दौरान दमकल विभाग और पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई. सूचना मिलते ही दमकल और पुलिस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया. आग का धुआं बना खतरा, इमारत में मची चीख-पुकार दमकल कर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. वहीं पुलिस और अन्य बचाव दल इमारत के भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे हुए हैं. पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और सभी आवश्यक कदम उठाने को कहा है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों को इलाज उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही प्रशासन को हर स्तर पर सतर्कता बरतने को कहा गया है ताकि राहत कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए. मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों की सतत मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए हैं. सीएम के निर्देश के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना में घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास जारी है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. दमकल और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है. अलीगंज के पुरनिया इलाके में हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में आग, कुछ दस्तावेज जलने की आशंका

नई दिल्ली  दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में गेट नंबर 4 के पास रविवार सुबह एक 'स्कैनिंग रूम' में आग लग गई। दमकल विभाग की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फिलहाल, किसी के हताहत होने या घायल होने की कोई खबर नहीं है। जानकारी के अनुसार, कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में गेट नंबर 4 के पास दूसरी मंजिल पर बने 'स्कैनिंग रूम' में आग लगी थी। आग को लेकर दमकल विभाग ने क्या कहा दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें आग लगने की सूचना सुबह करीब 5:22 बजे मिली, जिसके बाद दमकल की आठ गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। सुबह 6:05 बजे डिविजनल ऑफिसर मुकेश वर्मा ने 'स्टॉप मैसेज' जारी कर पुष्टि की कि आग पर काबू पा लिया गया है। हालांकि, पता चला है कि इस आग की घटना में कुछ दस्तावेज जलकर खाक हो गए हैं। ये दस्तावेज किस तरह के थे, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई। मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की गई थी जान दिल्ली के मालवीय नगर में भी बीते दिनों एक रेस्टोरेंट में आग लगी थी। इस घटना में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई। मरने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। 15 से अधिक लोग घटना में घायल हुए थे, जिनमें से कई का अस्पताल में अभी इलाज जारी है। शॉर्ट सर्किट से लगी थी आग: पुलिस सूत्र दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी, हालांकि जांच टीम को घटना के दौरान किसी भी एलपीजी सिलेंडर में धमाका होने का कोई सबूत नहीं मिला। दूसरी ओर इस अग्निकांड की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने शनिवार को रेस्टोरेंट के कुक को गिरफ्तार किया। मालवीय नगर अग्निकांड में जांच तेज दिल्ली पुलिस के अनुसार, शनिवार को गिरफ्तार आरोपी की पहचान कुक केशव नेगी के रूप में हुई है, जो दिलशाद गार्डन का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि आग लगने में कुक की लापरवाही थी। जांच के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघन और इमारत के फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी गंभीर कमियां मिली थीं।  

फायर NOC नहीं तो कार्रवाई तय! जबलपुर में सैकड़ों भवनों को भेजा गया नोटिस

जबलपुर   दिल्ली के होटल में लगी आग की वजह से पूरे देश में चिंता है. मध्य प्रदेश सरकार ने भी सभी बड़े नगर निगमों से फायर सेफ्टी से जुड़ी जानकारियां एकत्रित की है. जबलपुर नगर निगम के महापौर का दावा है कि हमने लगभग 350 ऊंची इमारत को फायर सेफ्टी का नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही एक 3 सदस्य टीम रोज जबलपुर की अलग-अलग इमारत का जायजा ले रही है।  अग्नि दुर्घटनाओं से बचने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग दिल्ली के एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद पूरे देश में अग्नि दुर्घटनाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है. जबलपुर नगर निगम के फायर सेफ्टी ऑफिसर कुशाग्र सिंह ने बताया कि "राज्य सरकार की ओर से इस विषय में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रखी गई है. जिसमें अग्नि दुर्घटनाओं से बचने को लेकर सभी से चर्चा की जा रही है।  फायर सेफ्टी की जांच कर रही है टीम जबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह का कहना है कि "जबलपुर में भी कई इमारतें ऐसी हैं, जो अग्नि दुर्घटनाओं को लेकर संवेदनशील हैं. हमने ऐसी लगभग 350 इमारतों के लिए नोटिस जारी किए हैं और जानकारी मांगी है कि आखिर उन्होंने अपनी इमारत में फायर सेफ्टी के इंतजाम क्यों नहीं किए हैं।  जगत बहादुर ने बताया कि "जबलपुर नगर निगम के फायर डिपार्टमेंट की 3 सदस्यों की एक टीम रोज शहर के अलग-अलग हिस्सों में फायर सेफ्टी की जांच कर रही है और जहां भी हमें ऐसा लगता है कि कोई लापरवाही बरती जा रही है, वहां तुरंत नोटिस जारी करके सुविधा बढ़ाने के लिए कहा जाता है।  किन फायर सेफ्टी एनओसी जरूरी? जबलपुर नगर निगम के फायर सेफ्टी ऑफिसर कुशाग्र सिंह का कहना है कि "नियम के अनुसार फायर सेफ्टी का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) या तो उस इमारत को लेना है, जिसका निर्माण 5000 वर्ग फीट से ज्यादा का है या फिर उस इमारत को जिसकी ऊंचाई 15 मीटर से ज्यादा है. बाकी निर्माण कार्य फायर सेफ्टी एनओसी के दायरे में नहीं आते।  अवैध पार्किंग रास्ते हो जाते हैं जाम सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दिल्ली में जो घटना हुई, वह एक घनी बस्ती के भीतर बनी इमारत में लगी आग की वजह से बचाव कार्य नहीं किए जा सका. जबलपुर के फायर सेफ्टी अधिकारी कुशाग्र सिंह का कहना है कि "यह स्थिति जबलपुर में भी है. जबलपुर के कई इलाको में घनी बशाहट है. सड़के तो चौड़ी हैं, लेकिन सड़कों पर अवैध पार्किंग की वजह से जाने आने के रास्ते जाम हो जाते हैं. ऐसी हालत में दिन में अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव कठिन हो जाता है।  'घना बस्तियों में आग पर कंट्रोल करना मुश्किल' जबलपुर में 2 माह पहले सतना बिल्डिंग के पीछे इसी तरह की एक इमारत में आग लग गई थी. गनीमत थी कि उस इमारत में कोई रह नहीं रहा था. इस बिल्डिंग में कपड़े का कारखाना था. बिल्डिंग तक पहुंचाने के लिए मात्र 10 फीट की रोड थी और बिल्डिंग में केवल एक ही तरफ से एंट्रेंस था. ऐसे हालात जबलपुर में हर साल बनते हैं और घनी बस्तियों में लगी आग को नियंत्रित कर पाना कठिन हो जाता है।  जबलपुर में कुछ साल पहले एक अस्पताल में भी आग लगी थी और इसमें कुछ बच्चों की जान चली गई थी. इस घटना के बाद से ही शहर में संवेदनशीलता बढ़ गई है और लोगों ने फायर एग्जिट को लेकर अच्छा काम किया है. इसलिए ज्यादातर नई इमारत में अग्नि दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य किया जा रहे हैं। 

रस्सी और सीढ़ियों से रेस्क्यू: इंदौर में आग लगने से अपार्टमेंट में फंसे छह परिवार सुरक्षित निकाले गए

इंदौर इंदौर की स्कीम-136 के एक अपार्टमेंट की तल मंजिल के इलेक्ट्रिक वाहन के शोरूम में आग लग गई। अपार्टमेंट के ऊपर दो मंजिल पर छह परिवार रहते हैं। आग के कारण वे सीढ़ियों से नीचे नहीं आ पा रहे थे। इस कारण उन्हें आसपास के लोगों ने सीढ़ी और रस्सी की मदद से सुरक्षित निकाला। आग लगने की घटना सुबह सवा आठ बजे हुई। तब शोरूम नहीं खुला था। आग के कारण शोरूम में रखे सभी दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। जानकारी मिलने के बाद मौके पर पुलिस जवान भी पहुंचे और उन्होंने भी आग में फंसे परिवारों को निकालने में मदद की।  धुआं फ्लैट में घुसा तो खुली नींद सुबह जब आग लगी, तब फ्लैट में परिवार के कई सदस्य सो रहे थे। जैसे ही फ्लैट में धुआं घुसा तो रहवासियों की नींद खुली और वे जाग गए। नीचे देखा तो शोरूम जल रहा था और नीचे उतरने की जगह भी नहीं थी। अपार्टमेंट से सटी एक अन्य मल्टी में रहने वाले रहवासी आग में फंसे परिवारों की मदद के लिए आए। बचाव के लिए आए रहवासियों ने बीस से ज्यादा लोगों को छत पर आने के लिए कहा। इस बीच उन्होंने अपने घरों से रस्सी और सीढ़ी लाकर मुंडेर पर लगा दी। एक-एक कर परिवारों को सुरक्षित निकाला, हालांकि आग फ्लैट वाले हिस्से तक नहीं पहुंच पाई। इस कारण परिवारों की गृहस्थी का सामान भी सुरक्षित रहा। रहवासी श्याम दुबे ने बताया कि हमने धुआं देखा तो तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। इस बीच रहवासी खुद बचाव कार्य में जुट गए और 20 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला। पुलिसकर्मी नरेंद्र मंडेलिया भी मौके पर आ गए थे और उन्होंने भी कई लोगों को आग से सुरक्षित निकाला। आग लगने की वजह पता नहीं चल पाई है। 

करोंद में आग का तांडव: बिल्डिंग से उठीं ऊंची लपटें, AC और फर्नीचर जलकर खाक

भोपाल भोपाल के करोंद इलाके में बुधवार को अचानक आग लग गई। जानकारी के अनुसार, आग चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में लगी, जहां KFC आउटलेट और इलेक्ट्रॉनिक शोरूम मौजूद हैं। आग की ऊंची लपटें और काला धुआं देखकर इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।  बताया जा रहा है कि, आग बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर में लगी। इसके चलते फर्नीचर भी जल गया।  राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन इस आग के चलते आर्थिक नुकसान जरूर हुआ है। इसका आंकलन किया जाएगा। बड़ा हादसा टला आग लगते ही फायर ब्रिगेड को कॉल किया गया। पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। नगर-निगम की दमकल गाड़ी भी मौके पर पहुंची थी। गनीमत रही कि, बिल्डिंग में ज्यादा लोग मौजूद नहीं थे। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन अब हादसे की जांच कर रहा है। आग की वजह से इलाके में हड़कंप मच गया। अफरा-तफरी के माहौल के बीच आग पर काबू पाया गया। इससे कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपए का नुकसान हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगने के दौरान बिल्डिंग में भीड़ नहीं थी। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन नुकसान का आंकलन लगा रहा है। क्रोमा के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम के जनरेटर से भड़की आग नगर निगम के फायर प्रभारी सौरभ पटेल ने बताया कि बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम है। इसके पास में रखे जनरेटर में आग लगी थी। इस वजह से कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी थी, वहां पर केएफसी का आउटलेट भी है। हालांकि, उसे नुकसान नहीं पहुंचा। 20 मिनट में काबू में आई आग की वजह जनरेटर में शार्ट सर्किट होने को बताया जा रहा है। आग लगने की जानकारी मिलते ही पास में पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड पहुंची और उसे बुझाने लगी। इसी दौरान नगर निगम की दमकल भी आ गई। दोनों ने मिलकर आग को काबू में लिया। इस वजह से आग ज्यादा नहीं फैली। बिल्डिंग के सामने लगी भीड़ करोंद में पीपुल्स हॉस्पिटल के सामने स्थित यह बिल्डिंग है। अचानक लगी आग से इलाके में हड़कंप मच गया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और दूर तक फैलता काला धुआं देखकर इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। इससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। निशातपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। जनरेटर में लगी थी आग नगर निगम के फायर प्रभारी के अनुसार, बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम था। इसके पास रखे जनरेटर में आग लगी थी। इसके चलते कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी वहीं केएफसी का आउटलेट है लेकिन इसे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है। करोंद इलाके में यह बिल्डिंग पीपुल्स हॉस्पिटल के बिलकुल सामने है। आग की ऊंची लपटें दूर से ही देखी जा सकती थीं। आग लगाने की सूचना मिलने पर आसपास के लोग भी पहुंचे। निशातपुरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को संभाला।