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पचपदरा रिफाइनरी में आग से मची अफरातफरी, कल पीएम मोदी करने वाले थे उद्घाटन, सीएस पहुंचे मौके पर

बालोतरा  राजस्थान के बालोतरा जिले स्थित पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार को अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब अगले ही दिन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफाइनरी के उद्घाटन का कार्यक्रम निर्धारित है। आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और रिफाइनरी प्रबंधन में हलचल तेज हो गई।   प्रोसेसिंग यूनिट में लगी आग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग रिफाइनरी की एक प्रोसेसिंग यूनिट में लगी है। घटना के बाद परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। आग किस कारण से लगी, इसका अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। तकनीकी टीम और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने और कारणों की जांच में जुटी हुई हैं। दूर तक दिखाई दिया धुएं का गुबार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग काफी तेज थी और उसका घना धुआं करीब एक किलोमीटर दूर से भी साफ दिखाई दे रहा था। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया। धुएं का बड़ा गुबार आसमान में उठता दिखाई दिया, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।   राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 20 से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के लिए तुरंत मोर्चा संभाला। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आग को अन्य यूनिटों तक फैलने से रोका जा सके। 2013 में रखी गई थी रिफाइनरी की आधारशिला रिफाइनरी की आधारशिला सबसे पहले 22 सितंबर, 2013 को सोनिया गांधी ने राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान रखी थी, जिसकी शुरुआती अनुमानित लागत 37,230 करोड़ रुपये थी। सरकार बदलने के बाद, PM मोदी ने 16 जनवरी, 2018 को इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू किया और इसकी लागत को संशोधित करके 43,129 करोड़ रुपये कर दिया। लोकार्पण की तैयारियों के बीच 'अग्निपरीक्षा' जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर को रिफाइनरी की एक विशेष यूनिट में अचानक स्पार्किंग या अज्ञात कारणों से आग भड़क उठी। कल होने वाले प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर पूरी रिफाइनरी को छावनी में तब्दील किया गया है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं। ऐसे में इस तरह की घटना ने तकनीकी टीम और प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए हैं। फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय, बुझाने के प्रयास तेज आग लगते ही रिफाइनरी का इन-हाउस फायर सेफ्टी सिस्टम तुरंत सक्रिय हो गया। मौके पर मौजूद दर्जनों दमकल गाड़ियां और हाइड्रेंट सिस्टम के जरिए आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। धुएं की तीव्रता इतनी अधिक है कि इसे कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। रिफाइनरी के उच्चाधिकारी और जिला प्रशासन के आला अफसर मौके पर पहुँच चुके हैं और स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी प्रोटोकॉल पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल यहां भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके लिए एसपीजी (SPG) और राजस्थान पुलिस ने सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रखा है। लोकार्पण से ठीक पहले हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:     क्या यह कोई तकनीकी खामी है या सुरक्षा में चूक?     क्या कल के कार्यक्रम के समय में कोई बदलाव होगा? (हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है)।     रिफाइनरी के संवेदनशील जोन में आग लगने का वास्तविक कारण क्या है? अधिकारियों में मचा हड़कंप, कारणों का खुलासा नहीं फिलहाल प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और उसे अन्य यूनिट्स तक फैलने से रोकने की है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। एचपीसीएल (HPCL) और राजस्थान रिफाइनरी के तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। गनीमत यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन करोड़ों की मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।   उद्घाटन कार्यक्रम पर पड़ सकता है असर बताया जा रहा है कि 21 अप्रैल को सुबह करीब 11:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस रिफाइनरी का औपचारिक उद्घाटन किया जाना था। ऐसे में आग लगने की इस घटना ने प्रशासन और प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि इस हादसे का उद्घाटन कार्यक्रम पर भी असर पड़ सकता है।   अधिकारियों की नजर स्थिति पर फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाना और किसी भी तरह के बड़े नुकसान को टालना है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही आग पर नियंत्रण पाने की उम्मीद है। सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी प्रोटोकॉल पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल यहां भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके लिए एसपीजी (SPG) और राजस्थान पुलिस ने सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रखा है। लोकार्पण से ठीक पहले हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:     क्या यह कोई तकनीकी खामी है या सुरक्षा में चूक?     क्या कल के कार्यक्रम के समय में कोई बदलाव होगा? (हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है)।     रिफाइनरी के संवेदनशील जोन में आग लगने का वास्तविक कारण क्या है? अधिकारियों में मचा हड़कंप, कारणों का खुलासा नहीं फिलहाल प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और उसे अन्य यूनिट्स तक फैलने से रोकने की है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। एचपीसीएल (HPCL) और राजस्थान रिफाइनरी के तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। गनीमत यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन करोड़ों की मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

नेशनल फायर सर्विसेज वीक के 82वें संस्करण का समापन, अवॉर्ड सेरेमनी में सम्मानित किए गए कर्मी

बटाला लोकल फायर ब्रिगेड ने भारत सरकार, पंजाब सरकार और कमिश्नर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के डायरेक्शन में और स्टेशन इंचार्ज नीरज शर्मा की लीडरशिप में, 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चले “82वें नेशनल फायर सर्विसेज वीक” के खत्म होने पर आज “फीस्ट ऑफ ऑनर” ऑर्गनाइज़ किया। इस मौके पर चीफ गेस्ट असिस्टेंट कमिश्नर राजिंदर शर्मा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, गेस्ट सुपरिंटेंडेंट राजू, सैनिटरी इंस्पेक्टर विकास, सुपरिंटेंडेंट पलविंदर मिंग, हेड ड्राफ्ट्समैन अजैब सिंह, बिल्डिंग इंचार्ज धीरज कुमार (सभी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से) के साथ फायर ऑफिसर राकेश शर्मा, हरबख्श सिंह, सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स और फायर ब्रिगेड और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सभी स्टाफ मौजूद थे। इस मौके पर फायर ऑफिसर राकेश शर्मा ने क्लोजिंग सेरेमनी में मौजूद सभी का स्वागत किया और बताया कि इस साल की थीम, “सेफ स्कूल, सेफ हॉस्पिटल और फायर सेफ्टी के प्रति जागरूक समाज, बुरी आग की घटनाओं को रोकना” के अनुसार, इसकी शुरुआत एक श्रद्धांजलि समारोह से हुई और बाद में स्कूलों, फैक्ट्रियों, प्लांट्स, घरों, प्रिंट मीडिया के जरिए इलाके के लोगों को जागरूक किया गया। बाद में असिस्टेंट कमिश्नर राजिंदर शर्मा और सुपरिंटेंडेंट पलविंदर सिंह ने तारीफ करते हुए कहा कि हर साल की तरह इस साल भी फायर ब्रिगेड बटाला पूरे पंजाब में नंबर वन रहा, जिसने पूरे हफ्ते जागरूकता फैलाई। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों बटाला शहर के आसपास आग लगने की घटनाएं हुई थीं, जिसमें फायर ब्रिगेड के जवानों ने बड़ी हिम्मत, मेहनत और समझदारी से जान-माल के नुकसान को कम किया। इस दौरान कई कीमती जानें बचाईं, और लोगों से अपनी सेफ्टी के प्रति जागरूक रहने की भी अपील की। ​​आए हुए मेहमानों को यादगार तोहफे दिए गए।  

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में लगी भीषण आग, लखनऊ जैसी स्थिति, आसमान में काले धुएं का गुबार

 गाजियाबाद लखनऊ के बाद अब गाजियाबाद के इंदिरापुरम में भीषण आग की घटना सामने आई है. यहां के कनावनी इलाके में स्थित झुग्गियों में आज अचानक आग लग गई, जिसने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया. आग इतनी तेजी से फैली कि कई झुग्गियां इसकी चपेट में आ गई हैं. आसमान पूरी तरह से काले धुएं के गुबार से भर गया है और तेजी से उठती लपटों को देख पूरे इलाके में अफरा-तफरी मची हुई है. अपनी जान बचाने के लिए लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं।  जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर विभाग को इसकी जानकारी दी. मौके पर दमकल की कई गाड़ियां पहुंच चुकी हैं और आग पर काबू पाने का काम जारी है. दमकल कर्मी लगातार मशक्कत कर रहे हैं ताकि आग को और ज्यादा फैलने से रोका जा सके. फिलहाल मौके पर फायर ब्रिगेड की टीमें तैनात हैं और लपटों को बुझाने की कोशिश की जा रही है। 

कृषि विभाग ने किसानों से की अपील, खलिहानों को आग से बचाने के लिए ज्वलनशील पदार्थों से करें परहेज

ज्वलनशील पदार्थों से करें खलिहानों का बचाव आगजनी की घटनाओं के पश्चात कृषि विभाग ने किसानों से की अपील बेमौसम बरसात पर भी किसानों को किया जा रहा जागरूक, दाने भीग गए हैं तो उनमें मात्र 10 प्रतिशत तक नमी बचने के बाद ही करें भंडारित  लखनऊ प्रदेश के कुछ जनपदों में खेत-खलिहानों में आगजनी की घटनाओं पर कृषि विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। कृषि विभाग ने जनपदों में तैनात कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस समय किसान बेमौसम बारिश से परेशान हैं। वहीं कुछ जनपदों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में किसानों के पास पहुंचकर उन्हें जागरूक करें कि वे खलिहानों का सिगरेट, बीड़ी व अन्य ज्वलनशील पदार्थों से बचाव करें।  कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन दिनों निरंतर किसानों से संपर्क में रहें। उन्हें किसी प्रकार की परेशानी हो, इसके लिए भी लगातार किसानों से संवाद स्थापित करें।  कृषि विभाग ने किसानों से अपील की कि वर्तमान में सरसों, चना, मसूर, मटर जैसी फसलों की कटाई एवं मड़ाई पूर्ण करते हुए भण्डारण इत्यादि किया जा रहा है। सर्वाधिक क्षेत्र में उगाई गई गेहूं की फसल को कुछ दिनों से विभिन्न क्षेत्रों में हो रही वर्षा से क्षति की आशंका है। ऐसे में किसान इस समय फसलों की कटाई एवं मड़ाई के समय सावधानी बरतें।  विभाग ने किसानों से कहा कि खेतों में यदि खड़ी फसल है और भीग गई है तो एक या दो दिन सूखने का मौका दें। यदि फसल की कटाई हो गई है और लांक खेत में पड़ी है तो खेत में पानी न रुकने दें अथवा बोझा बांधकर खड़ा कर दें। यदि फसल कटकर खलिहान में पड़ी है और भीग गई है तो उसे खोलकर हवा व धूप लगने दें जिससे जल्द ही सूख जाए, तत्पश्चात मड़ाई करें। यदि दाने भीग गए हैं तो उसे मात्र 10 प्रतिशत तक नमी बचने के बाद ही भंडारित करें। बीज उत्पादक कृषक हार्वेस्टर कंबाइन से कटाई कराते समय सफाई का विशेष ध्यान रखें। वर्तमान में नमी के दृष्टिगत भण्डारण के समय भण्डार स्थल अथवा बखारी, बोरा, दीवाल आदि को धूमरीकरण/फ्यूमिगेशन अवश्य कर लें, जिससे भण्डारगृह साफ सूखा एवं कीटमुक्त रहे। थोड़ी सी सावधानी व उचित प्रबंधन से वर्षा से होने वाले संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आग का कहर किसान की फसल जलकर खाक

 राजनगर     राजनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम राजामोटा ग्राम पंचायत सूरजपुर की किसान मेदा पाल पति मइयादीन पाल उम्र 45 साल निवासी राजामोटे थाना बमीठा की थाना उपस्थित आकर मौखिक रिपोर्ट किया कि में उक्त पते की रहने वाली हू । घरु एवं खेती किसानी का काम करती हू । मेरी राई की फसल मेरे खेत कुआ के पास मे गल्ले में इकट्ठी रखी थी। जो आज दिनाक 03/04/ 26 के शाम करीबन 4.30 बजे राई की कटी फसल में आग लग गई। जिसे मैने एवं परिवार के लोगों व गांव के लोगो द्वारा आग बुझाई गई। आग लगने से कटी राई की फसल पूरी तरह जल गई है जिससे करीबन 20 से 22 क्वटल राई कीमत करीब 1 लाख रुपये का नुकसान हो गया है। राइ के गल्ले में आग कैसे लगी मुझे कोई जानकारी  नही  लग पाई है  आग लगने के संबंध में किसी पर कोई शक सदेह नही है  थाना जाकर  रिपोर्ट दर्ज कर ली गईं हैं पुलिस जांच में जुटी.

जबलपुर के NICU वार्ड में लगी आग, डॉक्टर ने फायर एक्सटिंग्विशर से 27 बच्चों की जान बचाई

जबलपुर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिशु रोग विभाग में डॉक्टर ने ही फायर एक्सटिंग्विशर उठाकर शॉर्ट सर्किट लगी आग को काबू में पा लिया. जिस समय एनआईसीयू में आग लगी थी उस दौरान वार्ड में 27 नवजात भर्ती थे. हालांकि इस घटना के तुरंत पहले एक बच्चे की मौत हो गई थी. उनके परिजनो ने अस्पताल में भारी हंगामा भी मचाया था. आगजनी की घटना गुरुवार देर रात की है. एनआईसीयू वार्ड से निकलने लगा धुआं जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में शिशु रोग विभाग में उसे समय अफरा तफरी फैल गई. जब एक पंख से धुआं निकलने लगा और देखते ही देखते आज बढ़ने लगी. यह पंखा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के NICU वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में लगा हुआ था. देखते ही देखते वेटिंग एरिया के साथ ही NICU के भीतर भी धुआ पहुंच गया. वार्ड में भर्ती थे 27 बच्चे जिस समय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बच्चा वार्ड में आग फैली उस समय वार्ड में 27 बच्चे भर्ती थे, इसलिए परिजन भी घबरा गए और लोगों ने बार्ड के भीतर जाना शुरू कर दिया. समस्या को देखते हुए तुरंत बच्चा वार्ड की बिजली को बंद कर दिया गया ताकि आज आगे न फैल सके. हालांकि मौके पर पहुंचे सिक्योरिटी और अग्निशमन दल ने तुरंत ही आग पर काबू पा लिया. इस बीच में तुरंत बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया. हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद दोबारा उन्हें एनआईसीयू में भर्ती कर दिया गया. लेकिन शिफ्टिंग की वजह से नवजात बच्चों की माताएं परेशान नजर आए और अफरा तफरी में वह अपने बच्चों को ढूंढती हुई देखी गई. लेकिन इसी दौरान अस्पताल में इलाज करवा रहे एक बच्चे की मौत हो गई. पीड़ित परिजन ने अस्पताल में जमकर हंगामा मचाया. मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवार को लोगों को समझाया दी. ड्यूटी डॉक्टर ने वक्त रहते बुझाई आग मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अरविंद शर्मा ने बताया कि, ''जैसे ही पंखे से धुआं निकला मौके पर मौजूद ड्यूटी डॉक्टर ने ही फायर एक्सटिंग्विशर उठाकर आग बुझा दी.'' मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बिल्डिंग 70 साल पुरानी है कुछ दिनों पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने करोड़ों रुपया खर्च करके फायर सेफ्टी के समान लिए थे लेकिन अस्पताल की बिजली की वायरिंग अभी भी पुरानी है और उसमें ऐसी घटनाएं होने की संभावना बनी रहती है. काफी पुरानी हो चुकी है अस्पताल की बिल्डिंग जबलपुर का मेडिकल कॉलेज अस्पताल महाकौशल की सबसे बड़ी स्वास्थ्य इकाई है, इसमें केवल जबलपुर ही नहीं महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के लोग इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं. इसलिए इस इमारत में हमेशा हजारों लोग मौजूद रहते हैं. लेकिन इमारत अब इतनी पुरानी हो गई है कि मरीज के बढ़ते दबाव को यहां महसूस किया जा सकता है. मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में पहले भी आग की घटनाएं हुई हैं, जहां बच्चों की जलने से मौत हो गई. हालांकि जबलपुर के ड्यूटी डॉक्टर्स की सूझबूझ की वजह से जबलपुर का हादसा टल गया. आग की स्थिति में यदि तुरंत काबू पा लिया जाए तो आग को फैलने से रोका जा सकता है.

पालम में बिल्डिंग में आग लगने से 8 की मौत, घर में कितने लोग थे और कैसे मची आपात स्थिति?

नई दिल्ली  इंदौर के बाद आज दिल्ली में आग ने कोहराम मचाया है. दिल्ली में आज सुबह अग्निकांड ने कई जिंदगियां लील लीं. दिल्ली के पालम इलाके में एक इमारत में भीषण आग लगने से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई. इसमें तीन बच्चे शामिल हैं. इस घटना में कई लोग घायल हो गए. आग लगने की यह घटना सुबह करीब 6-7 बजे की है. करीब 30 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर आग बुझाने व राहत कार्य में जुटीं. जिस बिल्डिंग में आग लगी, वह इलाके में पालम कॉलोनी की गली नंबर 2 में है। दमकल सेवा के मुताबिक, पालम मेट्रो स्टेशन के पास की गली नंबर 2 में मौजूद बिल्डिंग के एक घर में आग लगने की कॉल मिली थी. इसमें कुछ लोग फसने की आशंका भी थी. दमकल की 30 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया. इसमें राजेंद्र कश्यप का पूरा परिवार रहता है. परिवार के तकरीबन 15 लोग हैं. राजेंद्र कश्यप मार्केट के प्रधान भी है और यह पूरी बिल्डिंग उनकी ही है। इसके बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर ब्यूटी पार्लर, चूड़ी की दुकान और दूसरे व्यवसाय चलते हैं. ऊपर के फ्लोर में उनके परिवार के लोग रहते हैं. रविवार सुबह 6:30 बजे के आसपास आग लगी. जब बिल्डिंग में आग लगी तब राजेंद्र कश्यप घर पर नहीं थे. इस बिल्डिंग के ऊपर वाले फ्लोर में ही उनका परिवार रहता है। दिल्ली आग पर अधिकारी ने क्या कहा? अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के पालम इलाके में एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं, और दो अन्य घायल हो गए.  अधिकारियों ने यह भी बताया कि अभी भी कई लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। पालम में आग कैसे लगी? बताया गया कि आज यानी बुधवार की सुबह 6:30 बजे के आसपास आग लगी थी. आग लगते ही हड़कंप मच गया. आग देखते ही घबरा कर परिवार के कई लोग ऊपर से कूद गए. लेकिन बाकी परिवार के लोग अंदर फस गए. इनमें महिलाएं भी शामिल थीं. फायर ब्रिगेड की टीम जब तक पहुंची, तब तक आज बहुत ज्यादा लग गई थी. आसपास के लोग भी कोशिश कर रहे थे. फिलहाल, इस घटना में आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो चुकी है. मरने वालों में 3 बच्चे हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस घटना में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है. आग की लपटों से बचने की हताश कोशिश में दो लोगों ने इमारत से छलांग लगा दी, जिससे उन्हें चोटें आईं. उन्हें इलाज के लिए पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कहां आग लगी? शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस इमारत में एक बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और चार मंजिलें हैं, साथ ही छत पर एक अस्थायी टिन का शेड भी बना हुआ है. बताया जा रहा है कि बेसमेंट, ग्राउंड और पहली मंजिल का इस्तेमाल कपड़े और कॉस्मेटिक्स के भंडारण के लिए किया जा रहा था, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल का इस्तेमाल रहने के लिए किया जाता था। दिल्ली पुलिस की एक टीम भी मौके पर पहुंच गई है और बचाव और सुरक्षा कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए इलाके को घेर लिया है. इसके अलावा, घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता और अस्पताल पहुंचाने की सुविधा के लिए सेंट्रलइज्ड एक्सीडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज (CATS) की एक एम्बुलेंस और एक मेडिकल टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के सही कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. फिलहाल, उनकी प्राथमिकता आग को पूरी तरह से बुझाना और इमारत के अंदर फंसे किसी भी व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है. राहत और बचाव कार्य जारी हैं और अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। यह घटना उसी दिन हुई, जब इससे पहले मध्य प्रदेश में भी एक और भीषण आग लगने की खबर आई थी. इंदौर में भी आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई थी. यह आग तब लगी, जब इलेक्ट्रिक कार को रात में चार्जिंग से लगाया गया था. सुबह करीब 4 बजे शॉर्ट सर्किट से आग लगी और घर में धमाका हुआ।

इंदौर में आग हादसा: घर में 8 शव मिले, रेस्क्यू टीम ने शुरू किया बचाव कार्य

इंदौर  इंदौर के तिलक थाना क्षेत्र के छोटा राजवाड़ा के पास प्रीति नगर में एक घर में भीषण आग लई। इस हादसे में मकान मालिक मनोज पुगलिया सहित 8 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कार में आग लगने के बाद वह फैलते हुए पूरे घर को चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरा घर जलकर खाक हो गया। घर से अभी तक 8 लाशें निकाली गई हैं। एसीपी कुंदन मंडलोई ने इस हादसे में मकान मालिक सहित 8 लोगों की जानकारी दी है। इंदौर शहर के छोटा राजवाड़ा क्षेत्र स्थित प्रीति नगर में देर रात एक भीषण आगजनी की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। तिलक नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए इस हादसे में एक कार में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक घटना में मकान मालिक मनोज पुगलिया सहित कुल 8 लोगों की मौत हो गई, जिससे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। आग सबसे पहले घर के बाहर खड़ी एक कार में लगी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग सबसे पहले घर के बाहर खड़ी एक कार में लगी। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। आशंका जताई जा रही है कि शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी इसकी वजह हो सकती है। कार में लगी आग तेजी से फैलती हुई पूरे घर तक पहुंच गई और कुछ ही मिनटों में मकान धू-धू कर जलने लगा। आग इतनी भीषण थी कि घर में मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिल सका। कैसे लगी आग दरअसल, पुगलिया परिवार में यह लाशें बिछी हैं. इस परिवार ने घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार को चार्जिंग पर लगाया था. मंगलवार रात से ईवी की चार्जिंग चल रही थी. चार्ज में लगाकर सभी सो गए थे. अचानक बुधवार तड़के तीन-चार बजे के आसपास चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हो गया. इलेक्ट्रिक कार तुरंत आग का गोला बन गई. आग तेजी से घर की ओर फैल गई और घर के अंदर रखे गैस सिलेंडरों तक पहुंच गई. इसके बाद जो धमाके हुए, उसका शोर पूरे इंदौर शहर में सुनाई दिया। कैसे धमाकों से दहला इंदौर जी हां, ईवी चार्जिंग वाले प्वाइंट से लगी यह आग देखते ही देखते घर में रखे गैस सिलेंडरों तक पहुंच गई. इसके बाद एक के बाद एक जोरदार धमाके से फट गए. धमाके इतने तेज थे कि पूरा इलाका दहल गया. घर का एक हिस्सा ढह गया. अंदर सो रहे लोग सोते ही रह गए और किसी को संभलने का भी मौका नहीं मिला. बताया जा रहा है कि इस परिवार में कोई फंक्शन था. इसके कारण कई रिश्तेदार आए थे। 8 लोग जिंदा जलकर मरे बहरहाल, इस हादसे में अब तक 8  लोगों की जलकर मौत हो चुकी है. ये लोग जिंदा ही आग में जल गए. वहीं 3 लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचा ली, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को निकलने का मौका ही नहीं मिला. संकरी गलियों और तेज लपटों की वजह से फायर ब्रिगेड को भी राहत कार्य में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. घर में लगी आग बुझाने की कोशिश जारी है। प्रशासन मौके पर मौजूद इस बीच पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है. पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और गैस सिलेंडर का विस्फोट मुख्य कारण लग रहा है. इलेक्ट्रिक कार की बैटरी में भी आग लगने की आशंका जताई जा रही है. पूरे मामले की जांच चल रही है. इंदौर के लोग इस हादसे से काफी सदमे में हैं।

ओडिशा के हॉस्पिटल में भयानक आग, ICU में भर्ती 10 मरीजों ने गंवाई जान

 भुवनेश्वर ओडिशा के कटक स्थित SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया. अस्पताल के मेडिसिन विभाग की इमारत में स्थित ट्रॉमा केयर ICU में भीषण आग लग गई. इस हादसे में अब तक कम से कम 10 मरीजों की मौत की खबर है। सोमवार सुबह करीब 3 बजे ट्रॉमा केयर यूनिट की पहली मंजिल पर आग लगी. कुछ ही मिनटों में पूरी ICU वार्ड में धुआं भर गया. उस समय वार्ड में कई गंभीर मरीज लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। अस्पताल के कर्मचारी और अग्निशमन कर्मियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया. हालांकि, कई नाजुक हालत वाले मरीज धुएं और आग की तेज लपटों की चपेट में आ गए। अस्पताल प्रशासन और दमकल विभाग की मुस्तैदी से दर्जनों मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. जो मरीज बच गए और जिनकी हालत गंभीर थी, उन्हें तुरंत 'न्यू मेडिसिन ICU' में शिफ्ट किया गया ताकि उनका इलाज जारी रह सके. आग पर काबू पाने के लिए दमकल की तीन गाड़ियों को लगाया गया, जिन्होंने घंटों की मशक्कत के बाद आग बुझाई। मुख्यमंत्री ने लिया जायजा हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन माझी घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.  मौके पर स्वास्थ्य सचिव, कटक जिला कलेक्टर और डीसीपी भी राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए मौजूद रहे। हादसे में 10 लोगों की मौत मुख्यमंत्री मांझी ने कहा, 'उस वार्ड में 23 मरीज भर्ती थे. बचाव अभियान से पहले ही वार्ड के अंदर 7 लोगों की मौत हो गई. बचाए जाने के बाद 3 लोगों की मौत चोटों और धुएं के कारण हुई. कुल मिलाकर 10 लोगों की मौत हुई. कम से कम पांच मरीज गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज करा रहे अस्पताल के दो कर्मचारी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। सीएम ने मृतकों के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा भी की. कैसे लगी आग? शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि ICU के एयर कंडीशनिंग सिस्टम या किसी मेडिकल उपकरण में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की वजह से ये आग लगी होगी. सरकार ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. जांच में ये भी पता लगाया जाएगा कि क्या अस्पताल में फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल के पालन में कोई लापरवाही बरती गई थी।

नोएडा में फैक्ट्री में आग, 30 घायल, 250 लोगों को लपटों से बचाया गया

नोएडा  नोएडा में एक बड़ा अनर्थ होने से बच गया है। मीटर बनाने वाली एक फैक्ट्री में भीषण आग में 250 लोगों की जिंदगी बाल-बाल बच गई। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने लपटों के बीच फंसे कर्मचारियों को निकाल लिया। हालांकि, कई लोग मामूली रूप से झुलस गए तो कुछ धुएं में बेहोश हो गए थे और कुछ भगदड़ में जख्मी हो गए। ऐसे 30 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गुरुवार तड़के सेक्टर-चार स्थित में विद्युत मीटर बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। आग लगने से फंसे करीब 250 कर्मियों को दमकल विभाग ने बचाया। साथ ही घायल हुए 30 से अधिक लोगों को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भेजा। दमकल कर्मियों ने करीब 30 गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पा लिया। फैक्ट्री में 24 घंटे चलता है काम अपर पुलिस आयुक्त सुरक्षा और कानून व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि गुरुवार सुबह फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिली। मौके पर दमकल विभाग के कर्मियों के अलावा कई थानों के पुलिस बल को भी भेजा गया। मौके पर पहुंचने पर पता लगा कि फैक्ट्री में बिजली मीटर बनाने का कार्य 24 घंटे चलता है। फैक्ट्री में 250 से अधिक कर्मचारी फंसे हुए थे। जिनका टीम ने सीढ़ी और हाइड्रॉलिक लिफ्ट की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला। जख्मी और बेहोश हुए लोग जिलाअस्पताल में भर्ती आग लगने के बाद फैक्ट्री में मची भगदड़ से कुछ कर्मचारी मामूली रूप से घायल हो गए। जिन्हें जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिलाया गया। वहीं धुएं से बेहोश हुए कर्मचारियों को भी अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना के बाद फैक्ट्री और उसके आसपास भारी संख्या में भिड़ एकत्रित हो गई। पुलिसकर्मियों ने लोगों को वहां से हटाया, ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा उत्पन्न न हो। शॉर्ट सर्किट से तीसरी मंजिल पर लगी आग वहीं, सूचना मिलने पर कर्मियों के परिजन भी फैक्ट्री और अस्पताल पहुंच गए। अपने परिजन को सुरक्षित देख राहत की सांस ली। शुरुआती जांच में पता चला है कि फैक्ट्री की तीसरी मंजिल पर शॉर्ट सर्किट के चलते लगी थी। दमकल विभाग के अधिकारी फैक्ट्री की फायर एनओसी के संबंध में जांच कर रहे हैं।