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तालिबान सरकार के फैसले से विवाद, मौलाना–मौलवी को कानूनी छूट पर सवाल

 विदेश.  तालिबान का नया नियम: मौलाना–मौलवी पर नहीं चलेगा मुकदमा, फैसले पर मचा बवाल अफगानिस्तान में तालिबानी प्रशासन ने अपनी अदालतों के लिए एक निर्देश जारी कर दिया है जिसको लेकर बवाल शुरू हो गया है। अफगानिस्तान की सरकार ने 'क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट' के तहत निर्देश जारी करते हुए कहा है कि देश में मुल्ला और मौलवियों पर केस नहीं चलाए जाएंगे।इसके अलावा इस कोड के आर्टिकल 9 के तहत अफगान सोसाइटी को चार वर्गों में बांट दिया गया है। इसमें सबसे ऊपर मुल्ला और मौलवी होंगे। इस निर्देश में कहा गया है कि मुस्लिम धर्म गुरु अगर कोई भी अपराध करते हैं तो उनपर मुकदमा नहीं दर्ज किया जाएगा। वहीं अगर अन्य कैटिगरी के लोगों के खिलाफ अपराध साबित होता है तो उन्हें कड़ा दंड मिलेगा। ऐसे में एक ही अपराध के लिए अलग-अलग वर्गों के लोगों को अलग-अलग दंड भी दिया जाएगा। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर देवबंदी इस्लामिक नाम के अकाउंट से कहा गया कि तालिबान प्रशासन ने चतुर्वर्ण व्यवस्था लागू कर दी है। नशनल रजिस्टेंस फ्रंट की मीडिया सेल ने कहा कि तालिबान ने गुलमी को कानूनी बना दिया है। अब कोर्ट अलग-अलग लोगों को स्टेटस के हिसाब से सजा सुनाएगी। ऐसे में उच्च वर्ग वालों की सुरक्षा की जाएगी और गरीबों को सजा दी जाएगी। बता दें कि तालिबान प्रशासन पहले ही भेदभाव और महिलाओं पर अत्याचार के लिए बदनाम था। पहली बार जब अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ था तब भी इस तरह के नियम लगाए गए थे। 2021 में तालिबान की वापसी के बाद एक बार फिर से इसपर चर्चा होने लगी। बता दें कि लगभग एक महीने पहले एक 13 साल के किशोर को परिवार के 13 सदस्यों की हत्या के आरोप में मौत की सजा दी गई थी। उसकी मौत की सजा के लगभग 80 हजार लोग गवाह बने थे। तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।  

भारी बर्फबारी से हिमाचल में जनजीवन अस्त-व्यस्त, लाहौल-स्पीति में स्कूलों पर ताला

देश. हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर बर्फबारी ने जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और शिमला जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात के चलते सड़क, बिजली और आवाजाही पर असर पड़ा है। बर्फबारी से जहां लाहौल-स्पीति में शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं, वहीं अप्पर शिमला क्षेत्र में सड़कें बंद होने से आवाजाही बाधित हुई है। शिमला से सटे पर्यटन स्थलों कुफरी और नारकण्डा में भी बर्फ गिरी है। एनएच-5 बंद इससे शिमला-रामपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-05) भी बाद दोपहर कुफरी में दोबारा बंद करना पड़ा है। पिछले कुछ दिनों में मौसम खुलने पर इस राष्ट्रीय राजमार्ग को बहाल किया गया था, लेकिन दोबारा बर्फबारी ने प्रशासन की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। सड़क बंद होने से सेब उत्पादक क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में आवाजाही प्रभावित हो रही है। प्रशासन द्वारा सड़क को बहाल करने का कार्य जारी है। चौपाल-देहा-शिमला मुख्य मार्ग भी बंद शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र में भी लगातार बर्फबारी जारी है। इसके चलते चौपाल-देहा-शिमला मुख्य मार्ग को एक बार फिर वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। सड़क पर बर्फ जमने और फिसलन बढ़ने के कारण प्रशासन ने एहतियातन यातायात रोक दिया है। चौपाल और आसपास के गांवों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों को जरूरी कामों के लिए भी आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लाहौल-स्पीति में बिगड़े हालात, कई सड़कें बंद लाहौल-स्पीति में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। लाहौल-स्पीति जिले में लगातार हो रही भारी बर्फबारी के कारण जनजीवन लगभग ठहर सा गया है। घाटी के भीतर कई संपर्क सड़कें बंद हैं और गांवों का आपसी संपर्क प्रभावित हुआ है। लाहौल-स्पीति में स्कूल कॉलेज बंद मौसम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए लाहौल-स्पीति जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया है। स्कूलों के साथ कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और आंगनबाड़ी केंद्र 28 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित लाहौल-स्पीति के कई हिस्सों में भारी हिमपात दर्ज किया गया है। ताजा बर्फबारी से तापमान में तेज गिरावट आई है, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। घाटी में बिजली और संचार सेवाएं भी कई जगह प्रभावित हुई हैं। सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग की टीमें बर्फ हटाने के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रहे हिमपात के कारण बहाली कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। इन जिलों में भी ट्रैफिक पर असर किन्नौर और कुल्लू जिले के ऊंचे इलाकों में भी बर्फबारी का असर देखने को मिल रहा है। किन्नौर के कल्पा, सांगला और आसपास के क्षेत्रों में हल्का से मध्यम हिमपात हुआ है। कुल्लू जिले के मनाली और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में भी मौसम खराब बना हुआ है। खराब मौसम के चलते कई ग्रामीण सड़कों पर यातायात बाधित है। 60 की स्पीड से चलेंगी जमा देने वाली हवाएं मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी, बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने राज्य में कुछ स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। साथ ही शीतलहर और घने कोहरे का असर भी आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खराब बना रह सकता है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान राज्य के चंबा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के अलग-अलग हिस्सों में गरज चमक के साथ भारी बारिश या बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इन जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग का कहना है कि कभी कभी हवा की स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। उना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के अलग-अलग हिस्सों में कोल्ड डे रहने का येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान अलग-अलग हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी दी गई है। हवा की स्पीड 40 से 50 किलोमीटी प्रति घंटे रह सकती है। कल कैसा रहेगा मौसम? 28 जनवरी को ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब रहने का अनुमान है। कल कुछ जिलों में घने कोहरे का भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। 29 जनवरी को मौसम के साफ रहने की संभावना है, लेकिन 30 जनवरी से 2 फरवरी के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से फिर मौसम बिगड़ सकता है। इसके अलावा 27 से 30 जनवरी के बीच कुछ स्थानों पर घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी भी दी गई है। Himachal Pradesh Weather पर्यटकों के लिए एडवाइजरी प्रशासन ने पर्यटकों को एडवाइजरी जारी की है कि वे गैरजरूरी यात्रा से बचें। पर्यटकों से ऊंचाई वाले और बर्फबारी प्रभावित इलाकों की ओर नहीं जाने को कहा गया है। पिछले हफ्ते हुई भारी बर्फबारी के बाद प्रशासन ने बड़ी मशक्कत से सड़कों को बहाल किया था लेकिन ताजा हिमपात से हालात फिर बिगड़ने लगे हैं। हिमाचल प्रदेश में कई सड़कें एक बार फिर बंद हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा है।

मोदी सरकार की सफाई: यूजीसी रूल्स पर उठे बवाल के बीच धर्मेंद्र प्रधान का भरोसेमंद बयान

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स 2026 का देश भर में विरोध हो रहा है। सवर्ण बिरादरियों से जुड़े संगठन ने इन नियमों पर सख्त आपत्ति जताई है और प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार की पहली प्रतिक्रिया आ गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और किसी को इसका बेजा इस्तेमाल भी नहीं करने दिया जाएगा। उनका यह बयान अहम है क्योंकि इस समय यूजीसी नियमों को लेकर देश भर में डिबेट तेज चल रही है। इसके चलते भाजपा की मुश्किलें बढ़ने की बात कही जा रही है, जिसका एक मजबूत वोट बैंक सवर्ण समाज के लोग रहे हैं। मैं एक बात बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। कोई भेदभाव नहीं होगा। यूजीसी, भारत सरकार और राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी होगी। यह मसला तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही है। मैं स्पष्ट कह रहा हूं कि किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। इसके अलावा भेदभाव के नाम पर किसी को भी यह अधिकार नहीं होगा कि वह कानून का बेजा इस्तेमाल करे। उन्होंने कहा कि हर चीज संविधान के दायरे में होगी। बता दें कि यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा के ही कई नेताओं ने रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में अपने पदों से इस्तीफा दिया है। लखनऊ औऱ दिल्ली में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसके पीछे उन्होंने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी रूल्स को वजह बताया है। प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- वापस लिए जाएं यूजीसी रूल्स, रामगोपाल क्या बोले इस बीच राजनीति भी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इस नियम को वापस लिया जाए या फिर संशोधन किया जाए। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने यूजीसी रूल्स का समर्थन किया है। बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने अब तक इस मसले पर खुलकर कुछ भी नहीं कहा है।  

उत्तराखंड सरकार की बड़ी पहल: 46 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव

उत्तराखंड. चार धाम यात्रा से पहले बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन की तैयारी की जा रही है। यही नहीं प्रदेश के कुछ और प्रमुख मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाया जा सकता है।  बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। हेमंत द्विवेदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा है कि ‘राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों के स्टेक होल्डर और पुजारियों का मानना ​​है कि मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाना बेहद जरूरी है। हम आगामी बीकेटीसी की बैठक में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 46 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने का प्रस्ताव लाने जा रहे हैं।’ बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। आदि शंकराचार्य ये व्यवस्था बनाकर गए थे उन्होंने आगे कहा कि 'हमने कोई नया फरमान जारी नहीं किया है ये तो आदि शंकराचार्य के कालखंड से होता चला आ रहा है। यहां की धार्मिक परंपराएं और प्राचीन मान्याताओं और आस्थाओं के अनुरूप आदि शंकराचार्य ये व्यवस्था बनाकर गए थे। समय की मांग के हिसाब से राज्य के अंदर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध मजार, थूक जिहाद और लैंड जिहाद के जरिए यहां पर धीरे-धीरे माहौल खराब किया गया है। ऐसे में मंदिरों के स्टेक होल्डर और पुजारियों की लंबे समय से मांग थी कि पूरी तरह से गैर हिंदुओं को बैन किया जाए।' वहीं लंबे समय से केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों में आते रहे सिख और जैन श्रद्धालुओं के बारे में उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, सिख, जैन और बौद्ध हिंदू धर्म का हिस्सा हैं। गंगा सभा की भी तैयारी मालूम हो कि हाल में हरिद्वार में हर की पौड़ी और आसपास के घाटों का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी अगले साल आयोजित होने वाले अर्धकुंभ से पहले कुंभ क्षेत्र में आने वाले सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थानों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को बैन करने की मांग की है। यही नहीं हाल में हर की पौड़ी क्षेत्र में ‘अहिंदुओं का प्रवेश निषेध' लिखे पोस्टर लगाए गए हैं। गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं पर रोक का इस इमाम ने किया समर्थन, दी तगड़ी दलील उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की तैयारी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी हितधारकों के साथ इस पर सहमति बना ली है। जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है। हालांकि सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत जारी रहेगा। इस घटनाक्रम पर मुस्लिम उलेमा की अलग-अलग राय सामने आई है। मुस्लिमों का वहां कोई काम नहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धर्म और आस्था का विषय है। यदि मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते हैं तो इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर जगह के अपने नियम होते हैं। वैसे भी मुस्लिमों का गंगोत्री में कोई काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई मुस्लिम वहां जाता है तो इससे टकराव होगा।  

शंकराचार्य मामले में बढ़ा सियासी असर, योगी के पक्ष में खड़े Dy कमिश्नर प्रशांत सिंह ने छोड़ी सरकारी नौकरी

नई दिल्ली शंकराचार्य के मुद्दे पर अब अयोध्या से एक इस्तीफा, जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने राज्यपाल को भेजा इस्तीफा, दो पन्ने का भेजा इस्तीफा, जीएसटी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का बयान, पीएम मोदी व सीएम योगी के समर्थन में दे रहा हूं इस्तीफा, शंकराचार्य ने सीएम योगी पर की थी अभद्र टिप्पणी, कहा जिस प्रदेश का नमक खाता हूं जिस प्रदेश से मुझे सैलरी मिलती है मैं उसका पक्षधर हूं,सीएम योगी लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए मुख्यमंत्री है, उनका अपमान मै बर्दाश्त नहीं कर सकता, पिछले तीन दिन से मैं आहत था, मेरा इस्तीफा जब मंजूर हो जाएगा तो मैं अपने संसाधनों से सामाजिक कार्य में लग जाऊंगा।

अमेरिका में बर्फीला प्रलय! आइसक्वेक के बाद ट्रैवल सिस्टम ठप, हजारों उड़ानें कैंसिल, 30 लोगों ने गंवाई जान

न्यूयॉर्क अमेरिका में इन दिनों आइसक्वेक यानी हिम भूकंप आने से भारी तबाही मच गई है। अमेरिका के पूर्वोत्तर भाग में सोमवार को बर्फीले तूफान के कारण कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है। तूफान के आखिरी चरण के असर से और बर्फबारी हुई और दक्षिण के कुछ हिस्सों में जमा देने वाली बारिश से परेशानी बनी हुई है और लाखों लोग सोमवार को बिजली के बिना ठंड में ठिठुरते रहे। अर्कांसस से न्यू इंग्लैंड तक 2,100 किलोमीटर के क्षेत्र में एक फुट से अधिक ऊंचाई तक बर्फ जम जाने के कारण सोमवार को सड़क यातायात बाधित हुआ, उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और स्कूल बंद हैं। राष्ट्रीय मौसम सेवा ने बताया कि पिट्सबर्ग के उत्तरी इलाकों में 20 इंच तक बर्फ पड़ी और तापमान शून्य से 31 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। अधिकारियों ने बताया कि इस तूफान के कारण कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई। पावरआउटेज डॉट कॉम के मुताबिक देश में सोमवार दोपहर तक 7,50,000 से अधिक जगहों पर बिजली गुल रही। इस बीच मिसिसिपी के कुछ हिस्से 1994 के बाद राज्य के सबसे भीषण बर्फीले तूफान से जूझ रहे हैं। मिसिसिपी विश्वविद्यालय ने इसके ऑक्सफोर्ड परिसर के बर्फ से ढक जाने के कारण कक्षाएं पूरे सप्ताह के लिए रद्द कर दी हैं। उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटअवेयर डॉट कॉम’ के मुताबिक अमेरिका में सोमवार को 8,000 से अधिक उड़ानों में देरी हुई और उन्हें रद्द किया गया। विमानन विश्लेषण कंपनी सिरीअम के अनुसार, रविवार को अमेरिका की 45 प्रतिशत उड़ानें रद्द कर दी गईं। कोरोना वायरस महामारी के बाद से उड़ानें इतनी बड़ी संख्या में पहली बार रद्द की गई हैं।

कहां जाएं शिकायत लेकर सवर्ण? UGC रूल्स को चुनौती, SC में पहुंचा मामला

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स के खिलाफ बढ़ रहे विरोध के बीच यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि ऐसे नियम गलत हैं। इसके तहत सवर्ण छात्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। अर्जी में सवाल उठाया गया है कि आखिर जनरल कैटेगरी के छात्रों को पीड़ित की परिभाषा में जगह क्यों नहीं दी गई है। यदि उनके साथ किसी तरह का भेदभाव या फिर दुर्व्यवहार होता है तो वहां शिकायत करेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को लागू किया था। यह सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू होना है।   याचिका में कहा गया कि नए नियम उन समुदायों के छात्रों को अपने खिलाफ होने वाले शोषण के खिलाफ शिकायत करने के अधिकार से वंचित किया गया है, जो एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से ताल्लुक नहीं रखते हैं। अर्जी में कहा गया कि आखिर सवर्ण छात्रों के साथ किसी तरह का भेदभाव होता है तो वह कहां जाएंगे। इसके अलावा अहम सवाल यह भी है कि यदि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के किसी छात्र की शिकायत को गलत पाया गया तो उनके खिलाफ कोई ऐक्शन क्यों नहीं होगा। दरअसल नए नियमों शिकायत के झूठे मामलों में कार्रवाई का प्रावधान ही हटा दिया गया है। लखनऊ से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन, UGC दफ्तर के बाहर हल्लाबोल अदालत से मांग की गई है कि इन नियमों को वापस लिया जाए। मौजूदा प्रारूप के तहत इन्हें लागू नहीं किया जा सकता। अर्जी में कहा गया कि ये नियम तो सवर्णों के साथ ही एक तरह से भेदभाव वाले हैं और यह भेदभाव एक तरह से सरकार ने ही किया है। बता दें कि यह मामला देश भर में लगातार तूल पकड़ रहा है। दिल्ली में यूजीसी दफ्तर के बाहर इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हो रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस मसले पर विरोध प्रदर्शन और बढ़ सकते हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।  

यूसीसी केवल कानून नहीं, समाज में समरसता लाने का सशक्त माध्यम: सीएम पुष्कर सिंह धामी

देहरादून,  उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून को एक साल पूरा होने पर इसे ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की एक सशक्त नींव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है। यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए उन्हें समान और न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है।” उन्होंने लिखा, “पिछले एक साल में यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है। राज्य सरकार की ओर से 23 भाषाओं में सहायता और एआई-आधारित सपोर्ट की सुविधा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक इस सकारात्मक परिवर्तन का लाभ उठा सके।” इससे पहले, सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में एक अहम संशोधन किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी। इसमें, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 को लागू किया गया है। धारा 12 के अंतर्गत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। संसोधन के जरिए विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी व विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक की ओर से समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। अनुसूची-2 में ‘विधवा’ शब्द के स्थान पर ‘जीवनसाथी’ शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है। विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।  

सरकारी बैंकों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन: पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग तेज

नई दिल्ली, देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मंगलवार को सरकारी बैंकों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। बैंक कर्मचारी फाइव डे वर्किंग की मांग कर रहे हैं। हालांकि, निजी बैंक इस हड़ताल से प्रभावित नहीं होंगे। कई सरकारी बैंकों ने पहले ही स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दे दी है कि हड़ताल की वजह से बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) ने इस देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यह संगठन नौ बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है, जो सरकारी बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। यह फैसला 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में कोई समाधान न निकलने के बाद लिया गया था। इसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंक शामिल हैं। हड़ताल के कारण कैश जमा और निकासी, चेक क्लियरेंस और बैंक के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे निजी बैंक सामान्य रूप से काम करेंगे, क्योंकि उनके कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे यूपीआई पेमेंट और इंटरनेट बैंकिंग, सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है। फिर भी, कुछ इलाकों में एटीएम में नकदी की उपलब्धता थोड़ी प्रभावित हो सकती है। एसबीआई ने एक आधिकारिक जानकारी में कहा है कि सामान्य कामकाज बनाए रखने के लिए व्यवस्था की गई है, लेकिन कर्मचारियों की भागीदारी के कारण काम पर असर पड़ सकता है। एसबीआई के बयान में कहा गया है कि हड़ताल के दिन शाखाओं और कार्यालयों में कामकाज सुचारू रखने की कोशिश की गई है, फिर भी कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैंक यूनियनों की मुख्य मांग है कि हर शनिवार को छुट्टी घोषित की जाए। यह प्रस्ताव मार्च 2024 में 12वें द्विपक्षीय समझौते में शामिल किया गया था, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।  

एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा: उड़ान भरते ही क्रैश हुआ प्राइवेट जेट, चीख-पुकार से दहला इलाका

बैंगोर – अमेरिका अमेरिका में भीषण बर्फीले तूफान और खराब मौसम के बीच एक बड़ा विमान हादसा सामने आया है। रविवार शाम करीब 7:45 बजे बैंगोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक प्राइवेट जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 600  उड़ान भरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के मुताबिक हादसे के वक्त विमान में 8 लोग सवार थे। फिलहाल सवार लोगों की स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। खराब मौसम और बर्फबारी बनी चुनौती यह दुर्घटना उस समय हुई जब अमेरिका का एक बड़ा हिस्सा कुदरत के कहर से जूझ रहा है। बैंगोर सहित अमेरिका के कई राज्यों में भारी बर्फबारी और जमा देने वाली बारिश हो रही है। लगातार गिरती बर्फ के कारण रनवे पर परिचालन मुश्किल हो रहा है। बैंगोर एयरपोर्ट बोस्टन से लगभग 200 मील उत्तर में स्थित है और यहाँ से फ्लोरिडा और वॉशिंगटन जैसे शहरों के लिए सीधी उड़ानें चलती हैं।   जांच के घेरे में चैलेंजर 600 बॉम्बार्डियर चैलेंजर 600 एक लोकप्रिय बिजनेस जेट है जिसे 9 से 11 यात्रियों के सफर के लिए डिजाइन किया गया है। इसे 1980 में लॉन्च किया गया था। यह अपनी चौड़ी बॉडी और आरामदायक केबिन के लिए जाना जाता है।नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और FAA ने संयुक्त रूप से हादसे की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दुर्घटना तकनीकी खराबी की वजह से हुई या खराब मौसम इसका मुख्य कारण था।   अमेरिका में जनजीवन अस्त-व्यस्त बर्फीले तूफान ने पूरे अमेरिका में कोहराम मचा रखा है। बर्फबारी की वजह से हवाई और सड़क यातायात लगभग रुक गया है। दक्षिण-पूर्वी अमेरिका में लाखों घरों और व्यावसायिक केंद्रों की बिजली गुल हो गई है जिससे लोग अंधेरे और कड़ाके की ठंड में रहने को मजबूर हैं। बैंगोर सहित कई बड़े हवाई अड्डों पर सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।