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आज से संसद का बजट सत्र शुरू, मनरेगा–SIR पर घमासान तय, विपक्ष ने बैठक में बनाई सरकार घेरने की रणनीति

नई दिल्ली संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है, जिसके हंगामादार होने के आसार हैं। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने मंगलवार को कहा कि मनरेगा, मोदी सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट, वायु प्रदूषण और जनहित के कई अन्य विषयों को उठाया जाएगा। बताया जा रहा है कि विपक्ष SIR पर और चर्चा चाहता है। सरकार की ओर से आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बजट सत्र को लेकर चर्चा की गई, हालांकि कांग्रेस ने इसे लेकर विरोध दर्ज कराया कि सरकार ने कोई विधायी एजेंडा सामने नहीं रखा है।   सरकार का कहना है कि एजेंडा बाद में दिया जाएगा, क्योंकि सत्र का पहला भाग राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए जाने वाले धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और केंद्रीय बजट पर चर्चा पर केंद्रित होगा। राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार संविधान से मिले अधिकारों को खत्म कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष विदेश नीति का विषय भी उठाएगा। हमारी विदेश नीति कहां पहुंच गई? कोई हमारे साथ खड़ा नहीं है। हमें यह भी नहीं पता चल रहा कि किसके साथ चलें, कौन हमारे साथ चलेगा।’’ प्रमोद तिवारी का कहना था कि सरकार की आर्थिक नीति की बात करें तो रुपया सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका की ओर से लगातार टैरिफ जारी है और रूसी तेल (की खरीद) का मुद्दा भी है। दिल्ली और दूसरी जगहों पर हमने वायु प्रदूषण का जो सबसे भयानक रूप देखा है, उसे देखते हुए हम यह मुद्दा भी उठाएंगे… हम इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठाएंगे।’’ सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेता ने क्या कहा कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस योजना की जगह नया कानून लाकर न केवल इसके नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, बल्कि ‘ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार खत्म किया जा रहा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, वोट चोरी और बेरोजगारी के मुद्दों को भी इस सत्र के दौरान उठाया जाएगा। कांग्रेस सांसद कोडिकुनिल सुरेश ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बहाल किया जाए। तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) के सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायालू ने कहा कि भारत जिन अलग-अलग मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर कर रहा है, उन पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने हैदराबाद की तर्ज पर अमरावती को "कानूनी दर्जा" देने की भी मांग की। बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ओडिशा में किसानों की परेशानी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का विषय उठाएगी।  

टोल प्लाजा पर अब नहीं होगी देरी! FASTag को लेकर 1 फरवरी से बदलने जा रहा बड़ा सिस्टम

नई दिल्ली भारत में FASTag सिस्टम को और सरल बनाने की दिशा में National Highways Authority of India (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ऐलान किया है कि 1 फरवरी 2026 से कार, जीप और वैन के लिए जारी किए जाने वाले नए FASTag पर Know Your Vehicle (KYV) वेरिफिकेशन प्रोसेस लागू नहीं होगी। इस बदलाव का मकसद FASTag जारी होने और उसके इस्तेमाल के दौरान होने वाली देरी, बार-बार दस्तावेज मांगने की परेशानी और यूजर्स की शिकायतों को कम करना है। अब तक FASTag जारी होने के बाद वाहन की पुष्टि के लिए KYV जरूरी होता था। इस प्रक्रिया में कई बार वैध दस्तावेज होने के बावजूद वाहन चालकों को बार-बार RC अपलोड करनी पड़ती थी, फोटो भेजने पड़ते थे और टैग को दोबारा वेरिफाई कराने की जरूरत पड़ती थी। इससे FASTag एक्टिवेशन में देरी होती थी और यूजर्स को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। नए नियमों के तहत NHAI ने यह जिम्मेदारी पूरी तरह बैंकों को सौंप दी है। अब बैंक FASTag जारी करने से पहले ही वाहन से जुड़ी सभी जानकारियों की जांच करेंगे। वाहन का सत्यापन VAHAN डेटाबेस के जरिए किया जाएगा और अगर वहां जानकारी उपलब्ध नहीं होती है, तो Registration Certificate (RC) के आधार पर जांच पूरी की जाएगी। इसका मतलब यह है कि टैग एक्टिव होने के बाद अलग से किसी KYV प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ेगी। KYV क्या था और इसे क्यों हटाया गया? Know Your Vehicle (KYV) FASTag सिस्टम का एक अतिरिक्त वेरिफिकेशन चरण था, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता था कि टैग सही वाहन से जुड़ा है और किसी गलत या डुप्लीकेट टैग का इस्तेमाल नहीं हो रहा। हालांकि, व्यवहार में यह प्रक्रिया अक्सर देरी और तकनीकी दिक्कतों की वजह बन रही थी, जिस कारण NHAI ने इसे हटाने का फैसला लिया। नए नियमों में क्या बदला है? 1 फरवरी 2026 के बाद नए कार FASTag पर KYV अनिवार्य नहीं होगा। सभी जरूरी जांच टैग जारी करने से पहले ही पूरी कर ली जाएगी। पहले से जारी FASTag धारकों को भी अब नियमित तौर पर KYV कराने की जरूरत नहीं होगी। केवल उन्हीं मामलों में दोबारा जांच होगी, जहां कोई विशेष शिकायत सामने आए, जैसे टैग का गलत वाहन से जुड़ना, दुरुपयोग, ढीला टैग या गलत तरीके से जारी किया गया FASTag। आम वाहन चालकों को क्या फायदा होगा? नए नियमों से FASTag खरीदने और इस्तेमाल करने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएगी। अब टैग लेते ही उसे सीधे इस्तेमाल किया जा सकेगा। बार-बार दस्तावेज अपलोड करने या बैंक और कस्टमर केयर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ शिकायत आधारित मामलों में ही अतिरिक्त जांच की जाएगी, जिससे अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।  

धार्मिक विवाद: गंगोत्री में गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध, इमाम ने दी ठोस वजह

देहरादून उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की तैयारी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी हितधारकों के साथ इस पर सहमति बना ली है। जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है। हालांकि सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत जारी रहेगा। इस घटनाक्रम पर मुस्लिम उलेमा की अलग-अलग राय सामने आई है। मुस्लिमों का वहां कोई काम नहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धर्म और आस्था का विषय है। यदि मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते हैं तो इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर जगह के अपने नियम होते हैं। वैसे भी मुस्लिमों का गंगोत्री में कोई काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई मुस्लिम वहां जाता है तो इससे टकराव होगा। मक्का और मदीना में भी तो ऐसे ही नियम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने आगे कहा कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। खासकर जिन जगहों पर हिन्दुओं की आस्था और सनातन का विषय है तो वहां से मुसलमानों को बचना बेहतर है। हमारे यहां मक्का और मदीना में भी गैर-मुसलमानों के प्रवेश की इजाजत नहीं है। यह वहां का नियम है। इस पर भी तो किसी को आपत्ति नहीं है। पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने तिरुपति बाला जी मंदिर में भी यही नियम हैं। इसी तरह अन्य धर्म स्थल हैं जहां गैर समुदाय के लोगों के जाने की मनाही है। सभी पवित्र जगहों के अपने नियम कायदे हैं। यह आस्था का विषय है। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस पर कोई राजनीति भी नहीं की जानी चाहिए। सभी को दूसरे धर्मों के पवित्र स्थलों के नियम कायदों का पालन करना चाहिए। गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने का फैसला बता दें कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित हो जाएगा। इस मुद्दे पर बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति ने आम सहमति बना ली है। प्रस्ताव अब बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। वहीं गंगोत्री मंदिर समिति ने पूरी तरह निर्णय कर लिया है। यमुनोत्री मंदिर समिति का फैसला अभी नहीं आया है। वहीं हरिद्वार में हर की पौड़ी का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित किए जाने की मांग की है। सियासत गर्म, कांग्रेस ने किया विरोध, भड़के इमरान मसूद इस प्रकरण पर सियासत गर्म है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि मंदिर समितियों की बात सुनने के बाद उक्त मुद्दे पर फैसला लेगी। वहीं फैसले का कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस ने कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के काम कर रही है। वहीं कांग्रेस के स्थानीय सांसद इमरान मसूद ने कहा कि गंगोत्री धाम हिंदुओं का पवित्र स्थल है वहां पहले से कोई मुसलमान नहीं जाता है लेकिन पहचान साबित करने जैसी शर्तें लगाकर समाज में जहर धोला जा रहा है।

ममता बनर्जी दे रही BJP को जवाब, अखिलेश का डबल स्ट्राइक; कांग्रेस की चिंता बढ़ी

कोलकाता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार (27 जनवरी) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि इस देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हमलों का मुकाबला सिर्फ ‘दीदी’ ही कर सकती हैं। अपनी पत्नी और लोकसभा सांसद डिंपल यादव के साथ अखिलेश यादव कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ पहुंचे, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी से लगभग 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की।   बैठक के बाद ममता बनर्जी के साथ मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि ममता बनर्जी ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ भाजपा की नीतियों और राजनीतिक दबावों का सामना किया है, वह पूरे देश के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा, “सिर्फ दीदी ही हैं जो भाजपा के हर राजनीतिक हमले का मजबूती से जवाब दे सकती हैं।” उन्होंने कहा, “भाजपा वाले हमारे देश के सेकुलरिज्म से खिलवाड़ कर रहे हैं और वह भी इलेक्शन कमीशन से मिलकर। यहां तो हो ही रहा है लेकिन उत्तर प्रदेश में इससे ज्यादा वोट काटने का काम कर रहे हैं।” NRC और वोटर लिस्ट संशोधन पर आरोप अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में हुए मतदाता सूची संशोधन के दौरान करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए, जिससे आम लोगों को परेशान किया गया।अखिलेश ने कहा, “मतदाता सूची के बहाने लोगों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।” लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में समर्थन समाजवादी पार्टी प्रमुख ने साफ कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में ममता बनर्जी को पूरा समर्थन देगी। उन्होंने कहा, “हम ममता बनर्जी के साथ हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर सहयोग करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह मुलाकात विपक्षी दलों के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी चुनावों से पहले संभावित रणनीतिक तालमेल का संकेत मानी जा रही है। हालांकि, बैठक में किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई, लेकिन दोनों नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि भाजपा के खिलाफ साझा मोर्चे की जमीन तैयार की जा रही है। कांग्रेस पर भी निशाना और संदेश अखिलेश का यह बयान तब आया है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस TMC के खिलाफ ताल ठोक रही है। राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि अखिलेश ने कोलकाता से कांग्रेस को भी बड़ा संदेश दिया है। यानी उन्होंने एक बयान से दो दलों को साधने की कोशिश की है। पहले तो ममता और टीएमसी का साथ देने और उसे अपना समर्थन दिया है, वहीं दूसरी ओर अखिलेश ने कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर और उन्हें तवज्जो देकर ही चुनावी राजनीति में आगे कदम बढ़ाए। चूंकि अगले साल यूपी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ऐसे बयान से अखिलेश ने कांग्रेस को संदेश कम टेंशन ज्यादा देने की कोशिश की है।  

UGC Equity नियमों की सिफारिश किस समिति ने की? दिग्विजय सिंह की कमेटी और उसके 29 सांसद सदस्य

नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा है। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।   दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं। इसे यूं कहें तो इस समिति में सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है। समिति के सदस्यों में कौन-कौन? संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं। लोकसभा से 21 चेहरे कौन-कौन? इस समिति में लोकसभा सांसदों में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजित गंगोपाध्याय (भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद), पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता, प्रवक्ता और ओडिशा की पुरी सीट से सांसद संबित पात्रा भी हैं। इनके अलावा बांसुरी स्वराज (भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसदष, अमर शरदराव काले (एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद), बृजमोहन अग्रवाल (छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से सांसद), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी(आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद) दर्शन सिंह चौधरी (भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद) के नाम भी शामिल हैं।   अन्य चेहरों का हाल इनके अलावा अन्य सांसदों में डीएन कुरियाकोसे(कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद) वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद), हेमांग जोशी (भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद), जितेंद्र कुमार दोहरे (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद), जियाउर्रहमान बर्क (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद), राजीव राय( समाजवादी पार्टी के नेता, यूपी की घोसी सीट से सांसद), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद), कामाख्या प्रसाद तासा (भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद), करण भूषण सिंह (भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद), रचना बनर्जी (TMC नेता और पूर्व अभिनेत्री, पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (भाजपा नेता, गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. (तमिलनाडु में डीएमके नेता और चेन्नई दक्षिण सीट से सांसद) के नाम शामिल हैं।  

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़: एंटोनियो कोस्टा हैं पुर्तगाल में गांधी, बोले- मुझे गर्व है प्रवासी भारतीय होने पर

नई दिल्ली भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों में एक नए ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो गई है। इस मौके पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच न केवल कूटनीतिक बल्कि व्यक्तिगत और भावनात्मक रिश्ते भी देखने को मिले। इस मौके पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद थीं।   'भारत से मेरा रिश्ता व्यक्तिगत है': एंटोनियो कोस्टा समझौते की घोषणा के दौरान, यूरोपीय नेता एंटोनियो कोस्टा ने अपनी भारतीय जड़ों को याद करते हुए एक भावुक बयान दिया। उन्होंने गर्व से कहा- 'मैं यूरोपियन काउंसिल का प्रेसिडेंट हूं, लेकिन मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं। तो, जैसा कि आप सोच सकते हैं, मेरे लिए इसका एक खास मतलब है।' कोस्टा ने अपने गोवा कनेक्शन का जिक्र करते हुए कहा- 'मुझे अपनी जड़ों पर गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आता है। इसलिए, यूरोप और भारत के बीच का कनेक्शन मेरे लिए बहुत पर्सनल है।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने को अपना सौभाग्य मानते हैं। कोस्टा ने कहा, 'इस खास मौके पर हमारा स्वागत करने के लिए प्यारे प्रधानमंत्री मोदी, आपका धन्यवाद। कल गणतंत्र दिवस समारोह में आपके मुख्य अतिथि बनकर हम सम्मानित महसूस कर रहे थे। भारत की क्षमताओं और विविधता का यह बहुत प्रभावशाली प्रदर्शन था। आज एक ऐतिहासिक क्षण है। हम व्यापार, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में अपने रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।' पीएम मोदी ने बताया 'पुर्तगाल का गांधी' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंटोनियो कोस्टा का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके विचारों और सादगी की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें 'पुर्तगाल का गांधी' कहकर संबोधित किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- मुझे अपने दो करीबी दोस्तों, प्रेसिडेंट कोस्टा और प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन का इस अभूतपूर्व भारत की यात्रा में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। कोस्टा जी अपनी सलर जीवनशैली और समाज के प्रति प्यार के आधार पर 'लिस्बन के गांधी' के नाम से जाने जाते हैं। प्रेसिडेंट उर्सुला जर्मनी की पहली रक्षा मंत्री ही नहीं, यूरोपीय यूनियन कमीशन की भी पहली महिला अध्यक्ष बनकर पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा हैं।' कौन हैं एंटोनियो कोस्टा? एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री (2015-2023) और एक वरिष्ठ यूरोपीय नेता हैं। वर्तमान में वे यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। कोस्टा का जन्म 1961 में लिस्बन में हुआ था, लेकिन उनका खून भारतीय है। उनके पिता, ओरलैंडो द कोस्टा गोवा के एक प्रसिद्ध लेखक और कवि थे। गोवा में उनके पिता के परिवार के लोग उन्हें प्यार से 'बाबुश' बुलाते हैं, जिसका कोंकणी में अर्थ होता है- छोटा बच्चा या प्यारा लड़का। वे उन गिने-चुने पश्चिमी नेताओं में से हैं जिनके पास OCI कार्ड है। उन्हें 'लिस्बन का गांधी' क्यों कहा जाता है? उन्हें यह उपाधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में उनकी भारत यात्रा के दौरान दी थी, लेकिन इसके पीछे की वजह उनके लिस्बन के मेयर रहने के दौरान किए गए काम और उनकी जीवनशैली है। गांधीजी की तरह ही कोस्टा को अपनी सादगी के लिए जाना जाता है। जब पुर्तगाल आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब मेयर रहते हुए उन्होंने फिजूलखर्ची कम करने और बहुत ही साधारण जीवन जीने की मिसाल पेश की थी। उन्होंने सरकारी तामझाम से दूर रहकर जनता के बीच काम करना पसंद किया। 'इतेंदेंते' का कायाकल्प – यह सबसे बड़ा कारण है। लिस्बन में 'इतेंदेंते' नाम का एक इलाका था, जो ड्रग्स, वेश्यावृत्ति और अपराध के लिए बदनाम था। लोग वहां जाने से डरते थे। कोस्टा ने वहां पुलिस भेजने के बजाय एक गांधीवादी कदम उठाया। उन्होंने अपना मेयर कार्यालय ही उस बदनाम इलाके में शिफ्ट कर दिया। उनका मानना था कि अगर प्रशासन वहां बैठेगा, तो सुधार अपने आप होगा। यह कदम सफल रहा और वह इलाका लिस्बन का एक सुरक्षित और जीवंत पर्यटन केंद्र बन गया। इस 'हृदय परिवर्तन' वाली नीति ने उन्हें 'गांधी' की छवि दी। उनकी राजनीति को आक्रामक नहीं, बल्कि धैर्यवान और सबको साथ लेकर चलने वाला माना जाता है। यूक्रेन संकट पर पीएम मोदी से मांगी मदद यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा- हमारी समिट में, हमने यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए प्रयासों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान करती है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है। हम न्यायपूर्ण और स्थायी शांति तक पहुंचने के सभी प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। यूक्रेन ने मुश्किल समझौते की कीमत पर भी अपनी तत्परता दिखाई है। मुझे पता है, प्रिय प्रधानमंत्री कि हम बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति के लिए स्थितियां बनाने में आपकी मदद पर भरोसा कर सकते हैं…  

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेताया: एसिड अटैक पीड़िताओं का रिपोर्ट तुरंत प्रस्तुत करें

नई दिल्ली देश में एसिड अटैक की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए इस तरह की घटनाओं का वर्ष वार ब्योरा मांगा है। तेजाब हमले की घटनाओं पर न्यायालय ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों से उन मामलों की संख्या बताने को कहा जिनमें आरोपपत्र दायर किए जा चुके हैं। इसके अलावा यह जानकारी भी मांगी है कि कितने मामलों में फैसला हो चुका है और कितने लंबित हैं।   सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा है कि इसका पूरा विवरण दिया जाए कि एसिड अटैक से जुडडी कितनी अपील दायर की गई हैं। पीड़ियों के ब्यौरे में शैक्षणिक योग्यता, वैवाहिक स्थिति, उपचार, पुनर्वास और मुआवजे की भी पूरी जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों की भी लिस्ट दी जाए जिसमें किसी पीड़िता को जबरन एसिड पिला दिया गया हो। एक बार सारे आंकड़े सामने आ जाएंगे तो आगे कदम उठाने में आसानी होगी और जल्द से जल्द पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास होगा। बता दें कि अदालत में एक एसिड अटैक पीड़िता की अपील पर सुनवाई हो रही थी।  

सियासी संकट गहरा, CM सिद्धारमैया ने राज्यपाल को केंद्र के खिलाफ सुनाई आपत्ति

बेंगलुरु कर्नाटक की राजनीति में ग्रामीण रोजगार को लेकर हंगामा जारी है। मनरेगा (MGNREGA) को हटाने के आरोप में कांग्रेस सरकार और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। बेंगलुरु में राजभवन चलो आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म करके वीबी-जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) योजना लागू करना चाहती है, जिससे ग्रामीण गरीबों का रोजगार छिन जाएगा। बाद में कांग्रेस नेताओं ने एक सरकारी बस में सवार होकर लोक भवन (पूर्व में राजभवन) पहुंचे, जहां उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन सौंपा।   विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी की व्यवस्था को खत्म कर रही है और पंचायतों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि वीबी-जी राम जी में 'राम' शब्द का मतलब दशरथ राम या सीता राम नहीं है। इसका अर्थ है 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)'। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के समय लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, जिसे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने शुरू किया था, आजीविका और रोजगार का अधिकार देता था। उन्होंने मौजूदा सरकार पर इसे नष्ट करने का आरोप लगाया। सिद्धारमैया ने आगे आरोप लगाया कि एमजीएनआरईजीए जनता का अधिकार था, लेकिन अब नहीं रहा। इसमें दिव्यांगजनों सहित लगभग पांच करोड़ लोगों को ग्रामीण इलाकों में रोजगार मिल रहा था। अब केंद्र सरकार तय करेगी कि कौन सा काम किया जाएगा, जबकि पहले यह पंचायतें तय करती थीं। उन्होंने कहा कि पंचायतों की भूमिका बुरी तरह सीमित कर दी गई है। पहले हर पंचायत को करीब एक करोड़ रुपये मिलते थे, अब उन्हें इससे वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम तब तक लड़ेंगे जब तक वीबी-जी राम जी योजना रद्द नहीं हो जाती और एमजीएनआरईजीए दोबारा लागू नहीं हो जाता। वीबी-जी राम जी रोजगार की गारंटी नहीं देता, जैसा कि एमजीएनआरईजीए देता था। भाजपा पर ग्रामीण भारत पर हमला करने का आरोप लगाते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, राष्ट्र का विकास नहीं हो सकता। एमजीएनआरईजीए को खत्म करके भाजपा ने महात्मा गांधी की हत्या दूसरी बार कर दी है। उन्होंने राज्य के हर गांव में लोगों से आंदोलन करने का आह्वान किया। वहीं, कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एमजीएनआरईजीए को समाप्त करना चाहती है। मैं कर्नाटक सरकार से आग्रह करता हूं कि पंचायत केंद्रों का नाम बदलकर महात्मा गांधी केंद्र कर दिया जाए। उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि एमजीएनआरईजीए को रद्द करके भाजपा ने अपने लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर ली है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग वीबी-जी राम जी को स्वीकार नहीं करेंगे और रोजगार गारंटी कानून खत्म करने के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे।  

धन्यवाद से विवाद तक: Grok ने बदल दिया PM मोदी के संदेश का मतलब

नई दिल्ली एआई पर पूरी तरह से भरोसा करना किस तरह से परेशान करने वाला हो सकता है। इसकी बानगी सोमवार को देखने को मिली। गणतंत्र दिवस के मौके पर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पीएम मोदी को गर्मजोशी भरा बधाई संदेश दिया था। इसके जवाब में पीएम मोदी ने मालदीव की भाषा में ही उनका धन्यवाद किया। विवाद तब खड़ा हो गया, जब ग्रोक एआई ने इसका गलत अनुवाद पेश किया और एक मित्रवत पोस्ट को राजनीतिक रूप से संवेदनशील पोस्ट में बदल दिया।   मूल रूप से मालदीव की स्थानीय धिवेही भाषा में लिखे गए पीएम मोदी के इस पोस्ट का ऐसा अनुवाद किया कि सोशल मीडिया यूजर्स भी हक्के-बक्के रह गए। दरअसल, यह पूरा मामला मुइज्जू के बधाई संदेश पर पीएम मोदी की धन्यवाद टिप्पणी पर हुआ। पीएम मोदी के बधाई संदेश का अनुवाद खोलने पर ग्रोक ने इसे बताया, "सुकुरिया, रायथुन मजलिस। भारत के 77वें स्वतंत्रता दिवस के समारोह मालदीव में आयोजित किए गए और मालदीव सरकार ने इसमें भाग लिया। यह सुकुरिया सरकार जनता के भारत-विरोधी अभियानों में भी शामिल रही है। यहां तक कि दो भारत-विरोधी अभियानों में भी वह विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रही है।” लाइव हिन्दुस्तान ने भी इस गलत अनुवाद को देखा था। हालांकि बाद में ग्रोक ने इसे बदल दिया। वर्तमान में गोर्क द्वारा इसका अनुवाद अलग दिखाया जा रहा है, जो कि इस प्रकार है, "धन्यवाद, राष्ट्रपति मुइज्जू। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आपने जो हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ सम्मान और आदर के साथ दी हैं, उन्हें मैं कृतज्ञतापूर्वक स्वीकार करता हूँ। हम दोनों देशों के नागरिकों के हित में साथ मिलकर किए जा रहे कार्यों को आगे भी जारी रखेंगे। मैं सभी मालदीव नागरिकों के लिए खुशहाल और समृद्ध भविष्य की कामना करता हूँ।” ग्रोक द्वारा इस तरह से गलत अनुवाद दिखाने को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच में काफी तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक यूजर ने ग्रोक को प्रोपेगेंडा से भरा हुआ बताया। वहीं, दूसरे ने बाकी एआई चैटबोट से इसकी तुलना करते हुए कहा कि ग्रोक केवल एक चैटबोट नहीं बल्कि हेरफेर और प्रोपेगेंडा से भरा हुआ है। आपको बता दें, यह प्रतिक्रिया इसलिए और भी ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रही है, क्योंकि कुछ समय पहले तक भारत और मालदीव के रिश्ते सही नहीं थे। वर्तमान राष्ट्र्पति मुइज्जू ने चुनाव में जीत के पहले इंडिया आउट का कैंपेन भी चलाया था। वह लगातार भारत विरोधी बयान भी देते आए हैं। हालांकि, कुछ समय से दोनों देशों के रिश्ते फिर से सामान्य होते नजर आए हैं।  

सिर्फ कानून नहीं, नए भारत की सोच है UCC — सामाजिक समरसता पर बोले धामी

देहरादून उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून को एक साल पूरा होने पर इसे 'समान नागरिक संहिता दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की एक सशक्त नींव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है। यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए उन्हें समान और न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है।" उन्होंने लिखा, "पिछले एक साल में यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है। राज्य सरकार की ओर से 23 भाषाओं में सहायता और एआई-आधारित सपोर्ट की सुविधा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक इस सकारात्मक परिवर्तन का लाभ उठा सके।" इससे पहले, सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में एक अहम संशोधन किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी। इसमें, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 को लागू किया गया है। धारा 12 के अंतर्गत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। संसोधन के जरिए विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी व विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक की ओर से समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। अनुसूची-2 में 'विधवा' शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है। विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।