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हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस याचिका को सूचीबद्ध करने की मंजूरी दे दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नए नियमों के तहत सामान्य वर्ग से आने वाले छात्रों को शिकायत निवारण जैसी सुरक्षा नहीं मिलेगी। साथ ही इन्हें लागू होने से रोकने के निर्देश देने की मांग की। बुधवार को तत्काल सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने याचिका पेश की गई। इस पर उन्होंने कहा, 'हमें पता है क्या हो रहा है। यह पक्का करें कि सारी कमियां दूर हो जाएं। हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।' खास बात है कि इन नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिका दाखिल की जा चुकी हैं। 13 जनवरी को University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 जारी किए गए थे। साथ ही सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए थे। नियमों की अनदेखी पर संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई थी। नियम जारी होने के बाद से ही छात्रों का प्रदर्शन जारी है। याचिका में क्या मांग याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इन नियमों को मौजूदा स्थिति में लागू करने से रोका जाए। साथ ही यह भी घोषित करने का अनुरोध किया गया है कि जाति के आधार पर निवारण व्यवस्था बनाना भेदभाव है। इसमें कहा गया है कि इस फ्रेमवर्क से गैर आरक्षित वर्गों के खिलाफ दुश्मनी को बढ़ावा मिलेगा। न्यायालय से आग्रह किया है कि 'जाति-आधारित भेदभाव' की जाति-निरपेक्ष और संवैधानिक रूप से अनुकूल परिभाषा अनिवार्य की जानी चाहिए, जो जातिगत पहचान की परवाह किए बिना उन सभी व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करे जिनके साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता है। यूजीसी के नए नियम यूजीसी ने 2026 के ये नियम राधिका वेमुला और आबेदा सलीम तड़वी (रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताएं) द्वारा 2019 में दायर एक जनहित याचिका के बाद बनाए थे। इस याचिका में उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने की मांग की गई थी। मार्च 2025 में, केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि यूजीसी ने जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए नियमों का मसौदा तैयार कर लिया है। उस समय न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि उसका इरादा परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक 'बहुत मजबूत और पुख्ता तंत्र' सुनिश्चित करना है।  

सिलाई मशीन के पीछे छिपा खतरनाक मंसूबा — फैजान चाहता था कश्मीर को भारत से अलग, गुजरात में गिरफ्तारी

अहमदाबाद गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉवड (ATS) ने नवसारी पुलिस के साथ मिलकर एक बड़े आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। सोमवार को पुलिस ने 22 साल के एक शख्स को गिरफ्तार किया जो आतंकी संगठनों से प्रेरित होकर जिहाद की राह पर निकल चुका था। वह ना सिर्फ कई लोगों की हत्याओं की साजिश रच चुका था, बल्कि भारत के खिलाफ जंग छोड़ने और जम्मू-कश्मीर को अलग कर देने तक का इरादा रखता था।   आरोपी की पहचान फैजान सलमानी के रूप में हुई है, जो नवसारी के जाराकवाड इलाके में अक्सा मस्जिद के पास रहता था। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला वाला है। वह नवसारी में रहकर दर्जी का काम करता था। डिप्टी एसपी हर्ष उपाध्याय को सूचना मिली थी कि फैजान आतंक फैलाने के लिए उत्तर प्रदेश में कुछ लोगों की हत्या की साजिश रच रहा था। गोपनीय सूचना के बाद एटीएस के अधिकारियों ने आरोपी को दबोच लिया। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी आतंकियों की विचारधारा से बहुत प्रेरित था और सशस्त्र संघर्ष के जरिए जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने का सपना पाल रहा था। जिहादी साजिशों से भरा फोन जांच के दौरान फैजान का फोन भी जिहादी सामग्रियों से भरा हुआ मिली। वह जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा के समर्थन वाले वीडियो और अन्य दस्तावेज मिले हैं। उसके फोन में भारत के कई अहम ठिकानों, प्रतीक चिह्नों और नक्शों से छेड़छाड़ वाली तस्वीरें मिली हैं। वह कई ऐसे लोगों को धमकियां दे चुका था जिन पर पैगंबर के अपमान का आरोप है। वह 'मोहम्मद अबु बकर' नाम के एक शख्स के साथ भी चैट कर रहा था। वह अभी फरार बताया जा रहा है। इस चैट में जैश के प्रोपेगेंडा वीडियो, भड़काऊ भाषण और वीडियो मिले हैं। फैजान बकर के साथ कई महीनों से संपर्क में था। क्या-क्या इरादे रखता था फैजान पूछताछ के दौरान फैजान ने कबूल किया कि उसने छह महीने पहले यूपी से एक पिस्टल और छह कारतूस खरीदे थे। उसने कहा यह हथियार उसने उन लोगों की हत्याओं के लिए खरीदा था जिनकी तस्वीरें और फोटोग्राफ जिहादी ग्रुपों में शेयर किए गए थे। एटीएस अधिकारियं ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक फैजान अपने हैडलर्स के साथ मिलकर भारत के खिलाफ जंग छेड़ने, हिंसा भड़काने और युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने में शामिल था। फैजान के खिलाफ यूएपीए, बीएनएस और आर्म्स ऐक्ट के तहत केस दर्ज किए गए हैं।

एक कॉल, जो आख़िरी बन गई—बेटी की आवाज़ याद कर टूट गए पिंकी के पिता

मुंबई. मध्य मुंबई में प्रभादेवी के निवासी शिवकुमार ने बेटी से आखिरी बार हुई बातचीत को याद करते हुए कहा कि उसने कहा था कि पापा, मैं कल विमान में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ बारामती जाऊंगी। उन्हें वहां छोड़ने के बाद मैं नांदेड़ जाऊंगी और होटल पहुंचने के बाद आपसे बात करूंगी। महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार को हादसे का शिकार हुए फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली के पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने आज उनसे बात करने का वादा किया था, और यह कहते हुए वह रो पड़े कि अब उनकी बातचीत कभी नहीं हो पाएगी। विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और पिंकी समेत पांच लोगों की मौत हो गई। मध्य मुंबई में प्रभादेवी के निवासी शिवकुमार ने बेटी से आखिरी बार हुई बातचीत को याद करते हुए कहा कि उसने कहा था कि पापा, मैं कल (बुधवार को) विमान में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ बारामती जाऊंगी। उन्हें वहां छोड़ने के बाद मैं नांदेड़ जाऊंगी और होटल पहुंचने के बाद आपसे बात करूंगी। पिंकी दिल्ली में स्थित वीएसआर वेंचर्स द्वारा संचालित लियरजेट 46 में अटेंडेंट थीं, जो बारामती हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में चालक दल के दो सदस्यों समेत कुल पांच लोग सवार थे। शिवकुमार ने कहा कि पिंकी इससे पहले राष्ट्रपति, मुख्यमंत्रियों और कई राजनीतिक नेताओं के साथ विमान में उड़ान भर चुकी थीं। उन्होंने कहा कि पिंकी चौथी बार अजित पवार के साथ विमान में रवाना हुई थीं। शिवकुमार ने नम आंखों के साथ कहा कि मैंने कल शाम उससे बात की थी और उसने मुझे बताया था कि वह उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ बारामती जाएगी और फिर नांदेड़ रवाना होगी। मैंने उससे कहा था कि तुम्हारी ड्यूटी खत्म होने के बाद कल बात करेंगे। लेकिन वह कल अब कभी नहीं आएगा। शिवकुमार भी अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय नेता समाधान सर्वंकर ने उन्हें विमान हादसे के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मैंने टीवी खोला। खबर देखकर मैं स्तब्ध रह गया। दोनों बाप बेटी की 16 जनवरी को मुलाकात हुई थी, जब पिंकी नगर निकाय चुनाव में वोट डालने के लिए ठाणे से प्रभादेवी पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि पिंकी पिछले पांच साल से अटेंडेंट के तौर पर काम कर रही थी। शिवकुमार ने कहा कि पिंकी ने अपना करियर एयर इंडिया से शुरू किया था और कुछ वर्ष बाद वह एक निजी चार्टर्ड फ्लाइट कंपनी में काम करने लगी थी। शिवकुमार ने कहा कि अजित पवार के साथ हालिया उड़ान के दौरान मेरी बेटी ने उनसे शिकायत की थी कि वह पूरे महाराष्ट्र की यात्रा कर रहे हैं लेकिन राकांपा कार्यकर्ताओं की ओर ध्यान नहीं दे रहे। जब पवार ने उससे पूछा कि उसे ऐसा क्यों लगा तो पिंकी ने उन्हें बताया कि मैं (शिवकुमार) 35 साल से राकांपा का कार्यकर्ता हूं। उन्होंने कहा कि इस बातचीत के बाद पवार ने उन्हें कॉल की थी। शिवकुमार ने कहा कि मैं कार चला रहा था, तब कॉल नहीं उठा पाया। इसके बाद मुझे संदेश मिला कि पवार मुझसे बात करना चाहते थे। वह कॉल भी कभी दोबारा नहीं आएगी।

डबल-डेकर फ्लाइओवर पर बवाल: अचानक घटाई गई लेन को लेकर सवाल, MMRDA का स्पष्टीकरण

मुंबई. मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा मीरा-भायंदर इलाके में में बनाए गए एक नए डबल-डेकर फ्लाइओवर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि यह फ्लाइओवर चार लेन से अचानक दो लेन में तब्दील होकर सिमट जा रहा है। अचानक चार लेन से दो लेन में सड़क की चौड़ाई कम करने से वहां दुर्घटनाओं को खुला न्योता दिया जा रहा है। इससे वहां यातायात की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, MMRDA ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह कोई डिजाइन की खामी नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित इंजीनियरिंग निर्णय है, जिसे भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘Gems of Mira Bhayander’ नामक अकाउंट ने एक वीडियो पोस्ट कर सवाल उठाया कि मेट्रो लाइन-9 परियोजना का हिस्सा यह फ्लाइओवर जाम कम करने के बजाय कहीं हालात और खराब तो नहीं करेगा? पोस्ट में कहा गया कि चार लेन वाला फ्लाइओवर अचानक दो लेन में तब्दील हो जाता है। इससे वहां ट्रैफिक कंजेशन हो सकता है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि MMRDA ने इस डिजायन को आखिर कैसे पास कर दिया? MMRDA का पक्ष MMRDA अधिकारियों के अनुसार, फ्लाइओवर को भायंदर (पूर्व) की ओर फिलहाल दो लेन के लिए ही डिजाइन किया गया है, जबकि भायंदर (पश्चिम) की ओर भविष्य में दो अतिरिक्त लेन जोड़ने का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह डिजाइन राइट ऑफ वे की सीमाओं और वेस्टर्न रेलवे लाइन के ऊपर भविष्य में विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसमें कोई खामी नहीं है। लोगों और विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने MMRDA के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा, “यह पुल दुर्घटनाओं को न्योता है। 2022 में सायरस मिस्त्री की मौत भी एक खराब पुल डिजाइन के कारण हुई थी। MMRDA वही गलती दोहरा रहा है और इसे मानने को तैयार नहीं है। आखिर कितनी जानें जोखिम में डालेंगे?” वहीं, अधिवक्ता कृष्णा गुप्ता ने निर्माण गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि “MMRDA आम लोगों की जान से खेल रहा है। जिस ठेकेदार जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स को पहले BMC ने ब्लैकलिस्ट किया था, उसे फिर भी बड़े प्रोजेक्ट मिल रहे हैं। इससे पहले बनाए गए दो डबल-डेकर पुल एक साल के भीतर ही गड्ढों से भर गए थे।” कौन-से हिस्से पर विवाद? विवाद मुख्य रूप से 1.5 किमी लंबे दीपक हॉस्पिटल–फाटक रोड सेक्शन (भायंदर पूर्व) को लेकर है। वहीं, SK स्टोन सर्कल–शिवार गार्डन (1.1 किमी) काशीगांव मेट्रो स्टेशन–साईं बाबा हॉस्पिटल (754 मीटर) जैसे अन्य हिस्से पहले ही यातायात के लिए खोल दिए गए हैं। MMRDA का कहना है कि फ्लाइओवर में स्पष्ट साइनबोर्ड, रंबल स्ट्रिप्स, क्रैश बैरियर जैसे सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और यातायात पुलिस की सलाह को भी अंतिम चरण में शामिल किया जा रहा है। भविष्य में चौड़ीकरण के लिए नगर निगम से समन्वय की बात भी कही गई है। आदित्य ठाकरे का तंज इस पूरे मामले पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए एक्स पर लिखा, “MMRDA और इस ‘मास्टरपीस’ डिजाइन का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। अगले साल इसे दूसरे देशों को सिखाने के लिए MoU होगा। पुल वही पूरा होगा—2047 में!”उन्होंने आगे कहा कि चार लेन से दो लेन में अचानक कटौती “बेहद मूर्खतापूर्ण और अव्यवस्थित डिजाइन” है, जो यातायात में अराजकता ही फैलाएगी। फिलहाल, यह फ्लाइओवर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और जन-सुरक्षा के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है। जहां MMRDA इसे भविष्य-उन्मुख योजना बता रहा है, वहीं नागरिक और विशेषज्ञ इसे खतरनाक प्रयोग करार दे रहे हैं।

सालभर में उत्तराखंड में UCC ने बदल दी जिंदगी की तस्वीर, शादी और रिश्तों पर असर

देहरादून  उत्तराखंड में UCC यानी समान नागरिक संहिता लागू हुए एक साल पूरा हो गया है. 27 जनवरी को राज्य में ‘यूसीसी दिवस’ के रूप में मनाया गया – और, ठीक एक दिन पहले 26 जनवरी को कानून में संशोधन प्रस्ताव लाया गया, जिसे राज्यपाल की मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.  2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी की तरफ से सत्ता में लौटने पर राज्य में यूसीसी लागू करने का वादा किया गया था. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सत्ता में लौटने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. जनसंवाद, विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और विधायी प्रक्रिया के बाद 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक उत्तराखंड विधानसभा से पारित हुआ.  11 मार्च, 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करके 27 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना.  हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक का एक भी केस नहीं यूसीसी दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पहले जब उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया गया था, तब कई लोगों ने मजाक उड़ाया. पुष्कर सिंह धामी ने कहा, विपक्ष ने कहा था कि ये सिर्फ घोषणा भर है, और इसे लागू करना संभव नहीं है… लेकिन, सरकार ने कमेटी गठन से लेकर राष्ट्रपति की स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया 27 जनवरी, 2025 तक पूरी करके UCC लागू भी कर दिया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक, बीते एक साल में हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक का एक भी मामला सामने नहीं आया है. पुष्कर सिंह धामी कहते हैं, अगर भविष्य में कहीं ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आंकड़ों के मुताबिक, पहले जहां औसतन हर रोज 67 विवाह पंजीकरण होते थे, कानून लागू होने के बाद ये संख्या बढ़कर रोजाना 1400 से भी ज्यादा पहुंच गई है. उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026, राज्यपाल (रिटा.) लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की मंजूरी मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. बीजेपी सरकार ने यूसीसी 2024 में आवश्यक संशोधनों के लिए ये अध्यादेश लाया है – फरवरी-मार्च के बजट सत्र में इसे विधेयक के रूप में सरकार विधानसभा में पास कराएगी. अध्यादेश को 6 महीने के भीतर सदन से पास करना जरूरी होता है.  संशोधन में जो बदलाव हुए हैं संशोधन के तहत दो बड़े बदलाव सबसे महत्वपूर्ण हैं. एक, विवाह में पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने पर अब कठोर सजा का प्रावधान जोड़ा गया है. और, 2010 से 2025 (26 जनवरी तक) के बीच शादी करने वाले सभी दंपतियों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है.  1. विवाह के वक्त पहचान छुपाने या गलत जानकारी देने को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है, जबकि विवाह और लिव-इन संबंधों में बल प्रयोग, जबरदस्ती, धोखाधड़ी या कोई भी गैरकानूनी तरीका अपनाने पर सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं. 2. नए प्रावधानों में समय सीमा का पालन करने पर भी ज्यादा जोर दिया गया है. समय-सीमा का पालन न करने पर अब सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है. 3. संशोधन में ये भी प्रावधान है कि अगर सब-रजिस्ट्रार निर्धारित समय-सीमा के भीतर एक्शन नहीं लेता, तो मामला अपने आप रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल के पास चला जाएगा. और, रजिस्ट्रार जनरल को विवाह, तलाक, लिव-इन संबंधों और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण रद्द करने की शक्ति दी गई है. 4. अध्यादेश में ये भी तय किया गया है कि रजिस्ट्रार जनरल का पद अब केवल अपर सचिव स्तर के अधिकारी को ही दिया जाएगा.  5. लिव-इन संबंध खत्म होने पर रजिस्ट्रार की तरफ से टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी करने का प्रावधान किया गया है – और 'विडो' शब्द की जगह 'स्पाउज' शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा. यूसीसी के संशोधित स्वरूप को नए आपराधिक कानूनों के हिसाब से भी अपडेट किया गया है. अब आईपीसी और CrPC यानी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के नियमों को जोड़ा गया है.

बजट सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: विकास और विरासत दोनों अहम

 नई दिल्ली संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया. राष्ट्रपति के संसद पहुंचते ही उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इस दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उनका स्वागत किया. राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में देश की विरासत, इतिहास और सांस्कृतिक एकता को याद किया. उन्होंने कहा कि देश ने श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस मनाया. वहीं, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और आदिवासी समाज के लिए उनके योगदान को याद किया. संसद के बजट सत्र की शुरुआत, राष्ट्रपति मुर्मू ने विरासत और विकास का दिया संदेश संसद के बजट सत्र की बुधवार से शुरुआत हो गई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सदन के संयुक्त सत्र को संबोधित किया और विरासत से लेकर विकास का संदेश दिया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी. इस बीच विपक्ष ने मनरेगा, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है. देशभर में मनाया जा रहा वंदे भारत के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव- राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बजट सत्र की शुरुआत के मौके पर दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रही हैं. राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया और कहा कि पिछला साल भारत की तेज प्रगति और विरासत के उत्सव के रूप में यादगार रहा. उन्होंने कहा कि देशभर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है. नागरिक इस महान प्रेरणा के लिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रति नमन कर रहे हैं. मैं सभी सांसदों को बधाई देती हूं कि संसद में इस विषय पर विशेष चर्चा की गई. राष्ट्रपति ने कहा कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत किया. उन्होंने कहा कि भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती के आयोजन ने पूरे देश को संगीत और एकता के सूत्र में बांध दिया. राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जब देश अपने पूर्वजों के योगदान को याद करता है, तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है. यही प्रेरणा विकसित भारत की ओर हमारी यात्रा को और तेज़ करती है. अपने भाषण में राष्ट्रपति ने कहा कि संसद के इस सत्र को संबोधित करते हुए उन्हें बेहद प्रसन्नता हो रही है. उन्होंने कहा कि बीता साल भारत की तेज़ प्रगति और समृद्ध विरासत के उत्सव के रूप में यादगार रहा. राष्ट्रपति ने बताया कि देशभर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देशवासी इस महान रचना के लिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रति नमन कर रहे हैं. उन्होंने संसद के सभी सांसदों को बधाई दी कि संसद में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा की गई, जो देश की सांस्कृतिक चेतना को और मजबूत करती है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संसद पहुंचे. बजट सत्र के दौरान सरकार की प्राथमिकताएं, आर्थिक दिशा और आने वाले समय की नीतियों की झलक राष्ट्रपति के अभिभाषण में देखने को मिली. यह सत्र दो चरणों में होगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा, इसमें कुल 30 बैठकें होंगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी. सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल को खत्म होगा.  बजट सत्र के लिए रणनीति बनाने के लिए आज सुबह 10 बजे विपक्षी पार्टियों की बैठक होगी. सत्र के बेहतर ढंग से संचालन के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई है.  वहीं, कांग्रेस पार्टी ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में अपनी संसदीय रणनीति समूह की बैठक कर मनरेगा, विशेष गहन संशोधन (SIR) और पर्यावरणीय मुद्दों को उठाने का फैसला लिया है. इस बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी शामिल हुए.  दो चरणों में चलेगा 30 बैठकों का सत्र बजट सत्र की रूपरेखा काफी लंबी है. पहले चरण में 13 फरवरी तक राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर चर्चा की जाएगी. इसके बाद एक अंतराल (ब्रेक) होगा. सदन की कार्यवाही दोबारा 9 मार्च को शुरू होगी और 2 अप्रैल तक चलेगी. रविवार होने के बावजूद 1 फरवरी को बजट पेश करने की स्पेशल तैयारी की गई है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं. विपक्ष ने तैयार किया मुद्दों का पिटारा कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने की तैयारी में हैं. सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक के बाद सांसद सैयद नसीर हुसैन ने बताया कि उनके लिए मनरेगा (MGNREGA) सबसे बड़ा मुद्दा है. इसके अलावा विपक्ष लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, विदेश नीति और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार विधेयक से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग करेगा. विशेष गहन संशोधन (SIR) की कवायद और पर्यावरण से जुड़े संकट भी सदन में गूंजेंगे. सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की. इसमें संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित कई दलों के नेता मौजूद रहे. सरकार की कोशिश है कि दोनों सदनों की कार्यवाही बिना किसी बड़े गतिरोध के चले. विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बुधवार सुबह एक अलग मीटिंग बुलाई है, जिससे सदन के अंदर एक संयुक्त रणनीति के तहत सरकार को चुनौती दी जा सके.

Middle East तनाव: ईरान पर खतरा बढ़ा, F-35 और US बेड़े की मौजूदगी, सऊदी झटका और ट्रंप की उकसावे वाली नीति

तेहरान  ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है. फिलहाल दोनों देशों में सीधी जंग तो नहीं, लेकिन हालात उससे कम भी नहीं हैं. सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक टकराव चल रहा है. अमेरिका, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन और मानवाधिकारों के आरोप लगा रहा है, वहीं ईरान अमेरिका को मध्य-पूर्व में दखल देने वाला और प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला देश कहता है. पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में विमानवाहक पोत, युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. जिसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले को पूरी जंग मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा. दोनों देशों के बीच बयानबाजी सैन्य तैयारियां, प्रतिबंध, साइबर और खुफिया कार्रवाइयां इस टकराव को और तेज कर रही हैं. ईरान की ओर बढ़ रही विनाश की खेप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आएगी. ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान को चेतावनी दी कि वह प्रदर्शनकारियों की हत्या या अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने जैसी किसी भी कार्रवाई से बचे. उन्होंने ईरान को व्यापार समझौता करने या परिणाम भुगतने की चेतावनी दी. सऊदी अरब ने दिया अमेरिका को झटका ईरान भी अमेरिका के इस कदम को लेकर अपनी तैयारी पूरी रख रहा है. ईरान की ओर से UAE से बातचीत की गई थी, जिसके बाद इस देश ने स्पष्ट कहा कि यह अपनी हवा, जमीन या पानी किसी भी हमला-सक्रियता के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. ऐसी ही बातचीत ईरान की सऊदी अरब से भी हुई है. इस देश ने भी अमेरिका को झटका देते हुए कहा है कि तेहरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए वो अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेश्चकियान से बातचीत के बाद ये बात कही है. दोनों देश साफ कर चुके हैं कि वे किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने देश को लॉन्चपैड नहीं बनने देगा. सैन्य अभ्यास की तैयारी में है अमेरिका समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिकी एयर फोर्स के सेंट्रल कमांड ने बयान में कहा कि यह अभ्यास मिडिल ईस्ट में लड़ाकू हवाई ताकत को तैनात करने, फैलाने और बनाए रखने की क्षमता दिखाएगा. यहां बताना जरूरी है कि सेंट्रल कमांड ही इस इलाके में अमेरिकी सेनाओं की जिम्मेदारी संभालती है. लेकिन अभ्यास की तारीख या सटीक जगह का खुलासा नहीं किया गया है. इससे रहस्य और बढ़ गया है. क्या यह ईरान की सीमा के करीब होगा? या सिर्फ दिखावा है? अमेरिकी जंगी बेड़े में क्या-क्या मौजूद?     अमेरिका के जंगी बेड़े में USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर और उसके साथ चलने वाले युद्धपोत मौजूद हैं.     अमेरिका के मशहूर फाइटर जेट F-35 को यहां तैनात किया गया है, जो अपनी सटीक मारक क्षमता और छिपकर वार करने में सिद्धहस्त है.     इसके अलावा Growler इलेक्ट्रॉनिक विमान और विध्वंसक युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद हैं. जो ईरान पर कभी भी हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं.     अमेरिका ने डेमो ऑफ फोर्स यानी ताकत दिखाने के लिए तैयारी पूरी कर ली है, वहीं ईरान ने जवाबी चेतावनियों, युद्ध-तैयारी, समुद्री और तट सुरक्षा बढ़ाई है. अमेरिका के जमावड़े पर क्या है ईरान का रिएक्शन? ईरान ने अमेरिका की चेतावनियों का कड़ा जवाब दिया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी तरह का हमला क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाएगा. ईरान ने चेताया कि किसी भी सैन्य प्रयास का जवाब पहले से भी ज्यादा दर्दनाक और निर्णायक होगा. तेहरान के एक केंद्रीय चौक में एक विशाल पोस्टर भी दिखाई दिया, जिसमें दिखाई गया- ‘आप हवा बोओगे, तूफान काटोगे’, जिसका सीधा संकेत अमेरिकी कैरियर ग्रुप को है. ईरान-अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव? वैसे तो परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर ईरान-अमेरिका में पहले से ही असहमति है, लेकिन ट्रंप ने इस कार्यकाल में ईरान पर परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए दबाव डाला है. पिछले दिनों ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों की मौत पर दुनिया भर में ईरान की आलोचना हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को मारता रहा, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में हजारों लोगों की मौत हुई है. प्रदर्शन तो फिलहाल शांत है लेकिन अमेरिका का सैन्य जमावड़ा क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है.

अजित पवार के निधन की खबरों पर सस्पेंस, बारामती विमान हादसे से जुड़ा बताया जा रहा मामला

  नई दिल्ली महाराष्ट्र के बारामती में हुए भीषण विमान हादसे में राज्य के डिप्टी सीएम और एनसीपी नेता अजित पवार का निधन हो गया. यह हादसा उस वक्त हुआ, जब उनका चार्टर्ड विमान बारामती में लैंडिंग की कोशिश कर रहा था. DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने पुष्टि की है कि विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई है और कोई भी जीवित नहीं बचा. इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को फोन कर हालात की जानकारी ली. हादसे की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. महाराष्ट्र सरकार की ओर से बताया गया कि पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने मुख्यमंत्री से संपर्क कर हादसे पर दुख जताया. प्रधानमंत्री मोदी ने अजित पवार के निधन पर गहरा शोक जाहिर किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अजित पवार जननेता थे और उनका लोगों से गहरा जुड़ाव था. वह महाराष्ट्र के लोगों की सेवा में हमेशा आगे रहने वाले मेहनती नेता के रूप में जाने जाते थे. प्रशासनिक मामलों की उनकी समझ और गरीब व वंचित वर्ग को सशक्त करने का उनका जज़्बा सराहनीय था. उनका असमय निधन बेहद चौंकाने वाला और दुखद है. उनके परिवार और असंख्य समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं. ओम शांति. इस बीच, शरद पवार परिवार में भी शोक का माहौल है. जानकारी के मुताबिक, सुप्रिया सुले, अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हो रहे हैं. तीनों शरद पवार के आवास पर एक साथ मौजूद थे. अजित पवार के निधन पर नेताओं ने जताया शोक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर दुख जताया. राष्ट्रपति ने एक पोस्ट में कहा, "महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार समेत कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है. अजित पवार का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है. उन्हें महाराष्ट्र के विकास में, विशेषकर सहकारी क्षेत्र में, विशेष योगदान के लिए सदैव याद रखा जाएगा. मैं उनके परिवार, समर्थकों एवं प्रशंसकों के प्रति गहन शोक-संवेदना व्यक्त करती हूं. ईश्वर इस दुर्घटना में मारे गए अन्य सभी लोगों के परिवारों को भी इस आघात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें."     महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, श्री अजित पवार समेत कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। अजित पवार जी का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्हें महाराष्ट्र के विकास में, विशेषकर सहकारी क्षेत्र में, विशेष योगदान के लिए सदैव…      राजनीतिक जगत से लगातार शोक संदेश आ रहे हैं. शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने कहा, "बारामती के विकास में अजित पवार की बड़ी भूमिका रही. पूरे पवार परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं." कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने भी उनके निधन को महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बड़ा नुकसान बताया. शिवसेना (UBT) MP अरविंद सावंत ने कहा, "मैंने हमेशा वही किया जो उन्होंने (अजित पवार) कहा" वह एक हिम्मत वाले आदमी थे. बारामती इलाके के विकास में उनका बड़ा रोल था. मैं पूरे पवार परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं जाहिर करता हूं." सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, "महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का विमान दुर्घटना में निधन, अत्यंत दुःखद ! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं. भावभीनी श्रद्धांजलि."     महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम श्री अजीत पवार जी का विमान दुर्घटना में निधन, अत्यंत दुःखद !     ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।     शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने एक्स पोस्ट में कहा, "अजीत पवार साहब की विमान दुर्घटना में मौत की ख़बर बेहद अफ़सोसनाक है. ख़ुदा उनके परिवार को इस दुख की घड़ी में सब्र अता करे, भारत सरकार दुर्घटना की गहन जॉंच करवाये ताकि दुर्घटना के कारणों का पता चल सके." पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा, "महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत की खबर से गहरा सदमा लगा है. यह एक बेहद दुखद घटना है. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं." डीएमके सांसद टी शिवा ने कहा, "यह बहुत दुखद है. मेरे पास अपने शोक को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं. वह एक बेहद ऊर्जावान नेता थे." केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इसे "बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर" बताया. वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "यह देश के लिए अपूरणीय क्षति है." केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "यह सच में एक बुरी घटना है…खबरें आ रही हैं कि अजित पवार भी विमान में थे. अगर यह सच है, तो यह बहुत बुरा दिन है…यह दिल दहला देने वाली घटना है. भगवान पीड़ित परिवारों को हिम्मत दे…वह सिर्फ़ महाराष्ट्र के डिप्टी CM ही नहीं, बल्कि देश के जाने-माने नेता भी थे. यह एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती." DGCA के मुताबिक, "विमान में कुल 5 लोग सवार थे, जिनमें 3 यात्री और 2 क्रू मेंबर शामिल थे. यात्रियों में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार, उनके एक पीएसओ और एक अटेंडेंट मौजूद थे. वहीं क्रू में पायलट-इन-कमांड (PIC) और फर्स्ट ऑफिसर (FO) शामिल थे."

अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत, बारामती में शोक की लहर, रोते-बिलखते पहुंचे समर्थक

 बारामती महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का बुधवार को एक विमान क्रैश में निधन हो गया. यह हादसा उनके गृह जिले बारामती में हुआ. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक विमान में सवाल सभी छह लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि बारामती में लैंडिंग के वक्त यह हादसा हुआ. अजीत पवार बारामती से ही विधायक हैं. यह पूरा इलाका पवार परिवार का गढ़ कहा जाता है. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. आसमान में धुंए के गुब्बारे देखे गए. शुरू में कहा गया कि इस क्रैश में अजीत पवार गंभीर रूप से जख्मी हुए. उनको बारामती के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. लेकिन थोड़ी देर बार उनको मृत बता दिया गया. विमान में अजीत पवार अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे. इस हादसे में पायलट की भी मौत हो गई है. यह विमान सुबह 8 से 9 बजे के बीच मुंबई से उड़ान भरा था. यह एक चार्टर प्लेन था. डॉक्टरों की एक टीम उनका इलाज कर रही थी लेकिन उनको नहीं बचाया जा सका. हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया. अजीत पवार बारामती में आज कई कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले थे. बारामती की सांसद और उनकी बहन सुप्रिया सुले बारामती के लिए रवाना हो गई हैं. दिल्ली से पवार परिवार बारामती के लिए रवाना हो रहे हैं. उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद हादसा रिपोर्ट के बाद मुंबई से उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद यह हादसा हुआ. यह एक प्राइवेट जेट था. हादसे के बाद पूरे बारामती में शोक की लहर है. अजीत पवार कई बार राज्य के डिप्टी सीएम रहे थे. राज्य की राजनीति में वह एक बहुत बड़े कद के नेता थे. मौजूदा वक्त में उनके कद का बहुत कम सक्रिय नेता हैं. पवार परिवार में शोक की लहर अजीत पवार इस वक्त एनसीपी के प्रमुख थे. उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से राजनीति के गुर सीखे थे. लेकिन करीब तीन साल पहले अजीत पवार और शरद पवार के रास्ते अलग-अलग हो गए थे. एनसीपी दोफाड़ हो गई और मूल एनसीपी पर उनका कब्जा हो गया. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं. उनकी चचेरी बहन सप्रिया सुले बारामती से सांसद हैं. वह एनसीपी-शरद गुट की नेता है. महाराष्ट्र की राजनीति खासकर मराठा राजनीति पर पवार परिवार का गहरा प्रभाव है. पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर महाराष्ट्र में अजीत पवार को दादा कहा जाता था. महाराष्ट्र की राजनीति में वह एक अपने चाचा की तरह ही सभी दलों के प्रिय नेता थे. सभी दलों में उनके दोस्त हैं. हर कोई उनके निधन पर शोक जता रहा है. बीते विधानसभा में चुनाव में अपने दम पर अपनी पार्टी को खड़ा कर साबित कर दिया था कि वह राजनीति के माहिल खिलाड़ी हैं. एनसीपी संगठन पर पकड़ अजीत पवार एनसीपी संगठन के नेता था. शरद पवार के उत्तराधिकारी के तौर पर अजीत पवार के साथ उनकी चचेरी बहन सुप्रिया सुले दावेदार थीं. लेकिन, शरद पवार ने एनसीपी के अध्यक्ष के तौर पर सुप्रिया सुले के हाथ में कमान दे दी. इसके बाद करीब तीन साल पहले एनसीपी दोफाड़ हो गया. अजीत पवार गुट ने राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हो गया. वह देवेंद्र फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम बने. पीएम मोदी ने ली हादसे की जानकारी हादसे के बाद पीएम नरेंद्र ने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से बात की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस हादसे की जानकारी ली है. पीएम ने इस बारे में सीएम से बातचीत की है.

श्रीनगर में सैलानियों का सैलाब, सुहावने मौसम ने खींचा पर्यटकों को

जम्मू, जम्मू-कश्मीर में मंगलवार सुबह से बर्फबारी तेज हो गई है। साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में कुछ जगहों पर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना है। ट्रैफिक विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “नवयुग टनल के अंदर और आसपास ताजा बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (एनएच-44) बंद है। जम्मू से श्रीनगर और इसके विपरीत किसी भी गाड़ी को जाने की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा, मुगल रोड, एसएसजी रोड और सिंथन रोड पहले से ही बंद हैं।” लोगों को सलाह दी गई है कि जब तक ये सड़कें पूरी तरह से ठीक नहीं हो जातीं और ट्रैफिक के लिए सुरक्षित घोषित नहीं हो जातीं, तब तक इन सड़कों पर यात्रा न करें। सर्दियों की तेज ठंड का 40 दिन का समय, जिसे स्थानीय रूप से ‘चिल्लई कलां’ कहा जाता है, 21 दिसंबर को शुरू हुआ था और 30 जनवरी को खत्म होगा। चिल्लई कलां के आखिर में हुई बर्फबारी ने कश्मीरियों की आने वाले महीनों में पानी के स्रोतों के बने रहने की चिंताओं को दूर कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में एक पर्यटक ने कहा, “कश्मीर में आकर बहुत अच्छा लग रहा है और बर्फ गिर रही है। लोगों को जरूर यहां आना चाहिए और इस जगह को देखना चाहिए। बर्फबारी की वजह से मौसम बहुत अच्छा हो गया है। हम अपने परिवार के साथ घूमने आए हैं, लेकिन कई रास्ते बंद होने की वजह से हम लोगों को परेशानी भी हो रही है।” एक और पर्यटक ने कहा, “बहुत समय बाद फिर से बर्फबारी हो रही है। यह हमारे लिए बहुत खुशी का पल है, हम इसी के लिए यहां आए थे, ट्रैफिक पुलिस हमारी बहुत सहायता कर रही है। लोगों को परेशानी न हो इसका विशेष ध्यान दिया जा रहा है।” एक पर्यटक ने कहा, “मैंने कश्मीर के बारे में बहुत कुछ सुना था और इसे देखा भी था। यह जगह सच में जन्नत है। कल तक बर्फ नहीं थी, और मुझे लगा कि मेरी किस्मत खराब है। लेकिन आज सुबह मैंने हर जगह भारी बर्फबारी देखी, सब कुछ बर्फ से ढक गया है। सच में, कश्मीर जन्नत है।”