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राष्ट्रपति मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद, संरक्षण कार्यों की ली विस्तृत जानकारी

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद और चीता संरक्षण की ली जानकारी राष्ट्रपति ने चीता मित्रों के प्रयासों को सराहा ग्वालियर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने दो दिवसीय कूनो नेशनल पार्क के प्रवास के दौरान सोमवार को चीता मित्रों से संवाद कर चीता संरक्षण के प्रयासों की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने चीता मित्रों से चर्चा करते हुए उनके द्वारा चीतों की सुरक्षा और आमजन के बीच चीतों के व्यवहार को लेकर किये जा रहे जन-जागरूकता के प्रयासों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सभी चीता मित्रों से वन-टू-वन चर्चा कर परियोजना के लिए उनके द्वारा मानसेवी रूप से किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को चीता मित्रों ने अवगत कराया कि कूनो नेशनल पार्क से लगे सभी ग्रामों में चीता मित्र मौजूद है, जिनके द्वारा चीतो की सुरक्षा के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। चीतो के आबादी क्षेत्र में आवागमन की स्थिति पर किये जाने वाले कार्यों के संबंध में सभी को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी जा रही है कि स्वभाविक रूप से चीते किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते है। चीता जब आबादी क्षेत्र अथवा खेतों में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को अवगत कराया जाये, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुँचे। भारत में चीतों की पुनर्बसाहट के लिए यह परियोजना अति महत्वपूर्ण है। इस दौरान चीता मित्र कुलदीप आदिवासी सिलोरी, संग्राम आदिवासी एवं कु. राजनदंनी आदिवासी हथेडी, श्रीमती मल्हा आदिवासी सेसईपुरा, शिवम आदिवासी पालपुर, विनोद आदिवासी पैरा, रामलखन आदिवासी कराहल, लालाराम आदिवासी सेसईपुरा, दौलतराम आदिवासी सेसईपुरा और सतीश आदिवासी मोरावन मौजूद रहें। इस अवसर पर वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव, पीसीसीएफ शुभरंजन सेन, कमिश्नर सुरेश कुमार, आईजी सचिन अतुलकर, कलेक्टर सुशीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल, सीसीएफ उत्तम कुमार, डीएफओ आर थिरूकुराल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहें। उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को लगभग साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया है। नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं बोत्सवाना से चीतों को लाया गया है, वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में तथा 03 चीते मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण में मौजूद है। भारत में जन्मे चीतो की संख्या 32 है, चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ रहा है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु चीता मित्रों से संवाद के उपरांत हेलीकॉप्टर से ग्वालियर के लिये रवाना हुई। हेलीपेड पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मीनिस्टर इन वेटिंग एवं जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने आदरपूर्वक विदाई दी।  

राष्ट्रपति मुर्मु ने ओंकारेश्वर तीर्थ और ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर किया अभिषेक

भोपाल  राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को म.प्र. यात्रा के पहले दिन तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर तीर्थ और द्वादश ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर अभिषेक भी किया। उन्होंने ममलेश्वर और ओंकारेश्वर भगवान के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति  मुर्मु ने 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ममलेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश से पहले नंदी प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में मुख्य पुजारियों द्वारा वैदिक रीति-रिवाज और विशेष मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने देशवासियों के कल्याण, सुख-समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। ओंकारेश्वर तीर्थ के दर्शन के पहले राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद खंडवा कलेक्टर  ऋषव गुप्ता ने स्मृति चिह्न भेंट किया। क्षेत्रीय सांसद  ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी राष्ट्रपति  मुर्मु को स्मृति चिन्ह के रूप में नर्मदेश्वर शिवलिंग, शंख और भगवान ओंकारेश्वर तीर्थ का छायाचित्र भेंट किया। इस अवसर पर जनजाति कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, क्षेत्रीय विधायक  नारायण पटेल, इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, आईजी  अनुराग सिंह व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

राष्ट्रपति मुर्मु का बैतूल प्रथम आगमन पर परम्परागत लोक नृत्य की प्रस्तुति से किया स्वागत

भोपाल राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का गुरुवार को बैतूल प्रथम आगमन पर गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने परंपरागत लोक नृत्य की प्रस्तुति कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन में शामिल हुईं। राष्ट्रपति  मुर्मु के साथ ब्रह्मकुमारी संस्था के सदस्यों ने सामूहिक फोटो क्लिक करवाया। राष्ट्रपति  मुर्मु के आगमन पर घोड़ाडोंगरी विधायक  गंगा उईके, भैंसदेही विधायक श्री महेंद्र सिंह चौहान, मुलताई विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख, आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति ने रुद्राक्ष का पौधा रोपा राष्ट्रपति  मुर्मु ने बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में पवित्र एवं औषधीय गुणों से भरपूर रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग श्री दुर्गादास उइके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।  

राष्ट्रपति मुर्मू ने दिया विकसित भारत का मंत्र, जनजातीय महासम्मेलन में सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

बैतूल  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के बैतूल में आयोजित ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महासम्मेलन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार करती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। राष्ट्रपति बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन का शुभारंभ करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सराहना की। राष्ट्रगीत के साथ शुरुआत, दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने दीप प्रज्ज्वलित कर महासम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। मंच पर उन्हें मोमेंटो भेंट कर उनका सम्मान किया गया।इस अवसर पर कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसके बाद महासम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। राष्ट्रपति बोलीं- जनजातीय समाज ने परंपरा काे संभालकर रखा उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा है। उनके जीवन में संवेदना, सहयोग, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों की गहरी जड़ें हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदाय का प्रकृति के प्रति जुड़ाव और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण का दृष्टिकोण आज के समय में पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। बोलीं- राष्ट्र निर्माण में सबकी भूमिका अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी को याद करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश का हर हिस्सा भारत की आत्मा का अभिन्न अंग है और राष्ट्र निर्माण में सभी समुदायों की समान भागीदारी जरूरी है। राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देगा। साथ ही उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी से मिलकर काम करने की अपील की। मंच पर मौजूद रहे राज्यपाल और विशिष्ट अतिथि इस विशाल महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। मंच पर उनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, प्रदेश के राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल और संस्था के ओडिशा प्रभारी डॉ. नथमल मौजूद रहे। साथ ही, माउंट आबू से आईं लीना बहन और शैलजा बहन सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

कूनो में राष्ट्रपति मुर्मु का विशेष कार्यक्रम, आदिवासी समुदाय से मुलाकात और चीता सफारी की तैयारी पूरी

ग्वालियर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार, 22 जून को चीतों की धरती श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में आ रही हैं। राष्ट्रपति यहां सहरिया आदिवासियों की संस्कृति से रूबरू होंगी और उनसे चर्चा भी करेंगी। इसके अलावा कूनो नेशनल पार्क में दो नंबर बाड़ा और तीन-ए बाड़ा में तैयारियां जारी हैं क्योंकि यहां राष्ट्रपति को सफारी का अनुभव कराए जाने का प्रस्तावित है। तीन-ए बाड़ा में यहां जन्मी चीता मुखी व उसके चार शावक चीते हैं। कूनो में जोर शोर से तैयारियां की जा रही हैं चार हैलीपेड तैयार किए जा चुके हैं और आदिवासियों को चिन्हित भी किया जा रहा है जिन्हें राष्ट्रपति से मिलवाया जाएगा। इसके अलावा चीता मित्र भी इस दौरान मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति 21 जून को ग्वालियर होकर कूनो पहुंच जाएंगी और रात्रि विश्राम यहीं कर 22 जून को यहां विजिट प्रस्तावित है। बता दें, राष्ट्रपति दौपद्री मुर्मु इन दिनों मप्र के प्रवास पर हैं जिस क्रम में उनका ग्वालियर चंबल आगमन प्रस्तावित है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में उनके आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सहित मैदानी इंतजाम किए जा रहे हैं। चार हैलीपेड तैयार कर दिए गए हैं और 200 बैरीकेड से हद तैयार की जा रही है। श्योपुर पुलिस प्रशासन की ओर से नो फ्लाइंग जोन के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। आदिवासियों को प्रशिक्षण भी मिलेगा सहरिया आदिवासियों के गांवों की श्योपुर जिले में काफी संख्या है, इन आदिवासियों को पहले चीते को लेकर जागरूक भी किया जा चुका है और कई चीता मित्र की भूमिका भी निभा रहे हैं। ऐसे में कुछ आदिवासियों को चिन्हित कर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति सहरिया आदिवासियों से चर्चा कर सकती हैं। वन विभाग की ओर से वन रक्षकों को भी चीता मित्रों से संपर्क करने के लिए निर्देश मिले हैं। मुखी चीता को सफारी में देख सकती हैं राष्ट्रपति जानकारी के अनुसार मादा चीता मुखी को सफारी के दौरान राष्ट्रपति को दिखाया जा सकता है क्योंकि यह पहली भारतीय मादा चीता है। दोनों बाड़ों में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।  

मुर्मु के स्वागत को तैयार वृंदावन, गोवर्धन में सुरक्षा कड़ी, दौड़-भाग में प्रशासन

वृंदावन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तीन दिवसीय प्रवास पर गुरुवार की शाम वृंदावन आ रही हैं। राष्ट्रपति अपनी धार्मिक यात्रा की शुरुआत इस्कॉन मंदिर से करेंगी तो अंतिम दिन गिरिराजजी की सात कोसीय परिक्रमा करने के साथ दौरा संपन्न होगा। राष्ट्रपति वृंदावन के विभिन्न आश्रम, मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचेंगी। ऐसे में राष्ट्रपति जिस रूट से गुजरेंगी, वहां तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। स्वागत के लिए वृंदावन को सजाया जा रहा है। तीन दिन के प्रवास पर गुरुवार को वृंदावन आएंगी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु राष्ट्रपति 19 मार्च गुरुवार की शाम करीब पांच बजे वृंदावन पहुंचेंगी। यहां होटल रेडिशन में पहुंचने के बाद राष्ट्रपति सबसे पहले साढ़े छह बजे इस्कॉन मंदिर से अपनी धार्मिक यात्रा शुरू करेंगी। राष्ट्रपति का दौरा प्रेममंदिर, नीबकरौरी आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम का भी रहेगा। दीवारों पर रंग और रोगन के साथ चित्रकारी सभी कार्यक्रम स्थलों तक साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की कमान नगर निगम ने संभाली है। दीवारों पर रंग और रोगन करने के साथ चित्रकारी हो रही है। डिवाइडरों पर रंग लगाने के साथ जीर्ण-शीर्ण पड़े फुटपाथों पर नई टाइलें बिछाई जा रही हैं। तैयारियों का जायजा लेने पहुंच रहे अधिकारी राष्ट्रपति जहां भी कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगी। यहां की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंगलवार को मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ, डीआइजी शैलेष कुमार पांडेय, डीएम सीपी सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार ने वृंदावन का दौरा किया। जहां-जहां राष्ट्रपति जाएंगी, वहां व्यवस्थाएं देखीं। राष्ट्रपति आगमन से पहले गोवर्धन में हाई अलर्ट, अफसरों ने संभाली कमान गोवर्धन। गोवर्धन में राष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को मंडलायुक्त, एडीजी, डीएम समेत आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंडलायुक्त, एडीजी, डीआइजी व डीएम, एसएसपी ने दानघाटी मंदिर में तैयारी देखी। फिर गोल्फ कार्ट से परिक्रमा मार्ग का भ्रमण कर सफाई व्यवस्था देखी।

‘चोर’ बंदरों से बचाने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू का चश्मा, वृंदावन में लगाए जाएंगे लंगूरों के कटआउट

 मथुरा उत्तर प्रदेश में मथुरा के वृंदावन में बंदरों की शरारतें लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए प्रशासन के सामने इन ‘चश्मा चोर’ बंदरों से निपटना बड़ी चुनौती बन गया है। झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं बंदर वृंदावन के बाजारों और मंदिरों के आसपास सक्रिय बंदर खासतौर पर चश्मा पहनने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं. वे झपट्टा मारकर चश्मा छीन लेते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजें, खासकर फ्रूटी जैसे पैकेट की मांग करते हैं. यह अनोखी सी डील यहां आम बात बन चुका है। बंदरों की हरकतों पर कंट्रोल जरूरी राष्ट्रपति के 19 मार्च से शुरू हो रहे तीन दिवसीय दौरे के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की असुविधा से बचना चाहती हैं. कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति वृंदावन के प्रमुख स्थलों- उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल का दौरा करेंगी और 21 मार्च को गोवर्धन की परिक्रमा भी प्रस्तावित है. ऐसे में बंदरों की हरकतों पर नियंत्रण जरूरी हो गया है। सुरक्षा में लंगूरों को लाना संभव नहीं, तो… पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों को तैनात किया जाता था, लेकिन अब वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत ऐसा करना संभव नहीं है. इसी वजह से इस बार प्रशासन ने एक नया तरीका अपनाया है- लंगूरों के कटआउट. माना जाता है कि बंदर लंगूरों से डरते हैं, इसलिए उनके जैसे दिखने वाले कटआउट लगाकर उन्हें दूर रखने की कोशिश की जा रही है। गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट इसके अलावा वन विभाग की करीब 30 सदस्यीय टीम को भी तैनात किया गया है. ये कर्मचारी गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे साधनों के साथ संवेदनशील इलाकों में निगरानी करेंगे. बंदरों की अधिक मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाएगा, ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. प्रशासन को उम्मीद है कि इन उपायों से राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई अप्रिय स्थिति नहीं बनेगी।  

समुद्री ताकत का प्रदर्शन: विशाखापत्तनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू देखेंगी राष्ट्रपति मुर्मू

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार से आंध्र प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी और 18 फरवरी को यहां आयोजित होने वाले 'अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा' (आईएफआर) का अवलोकन करेंगी। राष्ट्रपति का आज शाम यहां पहुंचने का कार्यक्रम है। पीआईबी द्वारा सोमवार को जारी की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, "भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 17 और 18 फरवरी को आंध्र प्रदेश का दौरा करेंगी तथा 18 फरवरी को विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम 'अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा' का अवलोकन करेंगी।" इस कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के भी शामिल होने की संभावना है। भारतीय नौसेना द्वारा 15 से 25 फरवरी तक विशाखापत्तनम में आईएफआर की मेजबानी की जा रही है। यह पहली बार है जब भारत इसकी मेजबानी 'मिलन अभ्यास' और 'आयन्स कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स' के साथ कर रहा है। इसका उद्देश्य सामूहिक समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक सहयोग को सुदृढ़ करना है। विशाखापत्तनम शहर दूसरी बार आईएफआर की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले यह यहां 2016 में किया गया था। इस समुद्री सम्मेलन में 100 से अधिक देश अपने जहाजों, पनडुब्बियों, विमानों और प्रतिनिधिमंडलों के साथ भाग लेंगे, जो वैश्विक नौसैनिक शक्ति, सहयोग और भारत के विस्तारित समुद्री दृष्टिकोण को प्रदर्शित करेंगे। 

राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी बस्तर पंडुम का शुभारंभ

रायपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे पर रहेंगी. वह सुबह 9.10 बजे भुवनेश्वर से उड़ान भरकर मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगी. इसके बाद राष्ट्रपति लाल बाग मैदान में आयोजित बस्तर पण्डुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगी. 10.55 से 11.10 बजे तक वह बस्तर पण्डुम में लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन करेंगी, जबकि 11.10 से 12.15 बजे तक कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ करेंगी. राष्ट्रपति मुर्मू करीब तीन घंटे छत्तीसगढ़ में प्रवास के बाद दोपहर 1.30 बजे रायपुर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगी. सीएम विष्णुदेव साय का बस्तर दौरा  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह 10.05 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत करेंगे. वह 11 बजे बस्तर पण्डुम 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद दोपहर 12.30 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से रायपुर के लिए रवाना होंगे और रायपुर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति मुर्मू को विदाई देंगे. सीएम साय 1.45 बजे नए मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे. शाम 4.15 बजे वह दोबारा रायपुर एयरपोर्ट जाएंगे और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का स्वागत करेंगे. इसके बाद शाम 6 बजे एक निजी होटल जाएंगे और वहां से सीधे नए सीएम हाउस पहुंचकर कुछ देर विश्राम करेंगे. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे. वह 7 फरवरी को शाम 4.40 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचकर निजी होटल के लिए रवाना होंगे. 8 फरवरी को सुबह 11 बजे से बैठकों का दौर शुरू होगा, जहां शाम 5 बजे तक नक्सलवाद को लेकर हाई लेवल मीटिंग की जाएगी. इस दौरान केंद्र और राज्य के अधिकारियों के साथ LWE और विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक में रणनीति तैयार की जाएगी. शाम 5 से 6.10 बजे तक वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होंगे और होटल में ही रात्रि विश्राम करेंगे. 9 फरवरी को अमित शाह बस्तर पण्डुम के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे. वह सुबह 11 बजे विशेष विमान से रायपुर से दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगे और सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल जाएंगे. दोपहर 12.05 से शाम 4 बजे तक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम 4.20 बजे जगदलपुर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे.

राष्ट्रपति मुर्मू का अभिभाषण: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और 4 करोड़ घर गरीबों के लिए — देश के सपनों की दिशा

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में गरीबों के लिए चार करोड़ पक्के मकान बनाए हैं और बीते एक वर्ष में गरीबों को 32 लाख नए घर मिले हैं। मुर्मू ने बजट सत्र के पहले दिन अपने अभिभाषण में कहा कि जल जीवन मिशन के तहत पांच वर्षों में साढ़े 12 करोड़ नए परिवारों तक पाइप से पानी पहुंचाया गया और बीते एक वर्ष में करीब एक करोड़ नए परिवारों तक नल से जल की सुविधा पहुंची है। उन्होंने कहा कि उज्‍ज्‍वला योजना के माध्यम से अब तक 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिले हैं और पिछले वर्ष भी यह अभियान तेजी से आगे बढ़ा है।   उन्होंने कहा, ‘पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत देश के 20 लाख से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण और बैंक से मदद दी जा रही है। पीएम स्वनिधि योजना के तहत भी रेहड़ी-फुटपाथ पर काम करने वाले 72 लाख लोगों को 16 हज़ार करोड़ रुपए की मदद मिल चुकी है।’ इसके अलावा उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का भी अपने अभिभाषण में जिक्र किया। राष्ट्रपति ने इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विश्व ने भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा जब देश ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकियों के अड्डों को ध्‍वस्‍त कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके साथ ही कड़ा संदेश दिया कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा। संसद के बजट सत्र की शुरुआत में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा, ‘भारत ने सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग उत्तरदायित्व और विवेक के साथ किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर से विश्व ने भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा है। हमारे देश ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकियों के अड्डों को ध्‍वस्‍त कर दिया।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने कड़ा संदेश दिया कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा। सिंधु जल समझौते को स्थगित किया जाना भी आतंकवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई का हिस्सा है। देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम हो रहा है।’ पहले 25 करोड़ को मिला था सामाजिक सुरक्षा कवच, अब 95 लाख उन्होंने संसद की संयुक्त बैठक में अपने चौथे अभिभाषण में कहा कि पारदर्शिता और ईमानदारी व्यवस्थाओं को मजबूत बना रही है तथा पौने सात लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लोगों तक पहुंचाये गये हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को सशक्त बनाने का अभियान तेज हुआ है। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए समर्पित है और इसी का नतीजा है कि एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। मुर्मू ने इस बात का उल्लेख किया कि 2014 तक सिर्फ 25 करोड़ लोगों को ही सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता था, लेकिन आज 95 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा का कवच मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और घोटाला से मुक्त प्रशासन देने में सफल रही है जिससे एक-एक पाई भारत के विकास में खर्च हो रही है। हंगामे पर बरसी भाजपा, संसद में तार-तार हुई मर्यादा मुर्मू के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस समेत विपक्ष के सांसदों की ओर से हंगामा जारी रहा। इसे लेकर भाजपा ने कहा कि आज फिर कांग्रेस पार्टी के नेताओं और विपक्ष ने संसदीय मर्यादा को तार-तार किया, उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। नड्डा ने कहा, 'राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में अभिभाषण में जब वंदे मातरम के 150वां साल मनाये जाने का जिक्र करते हुये बंगाल की धरती से स्वतंत्रता के उद्घोष और अमर मनीषी बंकिम बाबू के कृतित्व को याद कर नमन कर रहीं थीं, तभी अराजकतावादी कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने हंगामा कर दिया और नारे लगाना शुरू कर दिया। ऐसा कर के उन्होंने राष्ट्रगीत वंदेमातरम् और बंकिम चंद्र का भी अपमान किया। इस दृश्य को पूरे देश ने देखा है।' आखिर कांग्रेस और विपक्ष को वंदे मातरम से इतनी नफरत क्यों? नड्डा ने कहा कि मुझे समझ में नहीं आता कि वंदे मातरम्, बंकिम बाबू और पश्चिम बंगाल की धरती से कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को इतनी नफरत क्यों है, आश्चर्य की बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस भी विपक्षी हंगामे में साझेदार बन रही थी। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने संसद की गरिमा को जिस तरह ठेस पहुंचाया है। वह अति निंदनीय है। इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए वो कम है। इन लोगो को संसद और देश से माफ़ी मांगनी चाहिए।