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भूल जाएगा संयम: सेना प्रमुख ने पाकिस्तान को दिया सख्त संदेश

अनूपगढ़ सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को आतंकवाद रोकने की सख्त चेतावनी दी है और कहा है कि अगर पाकिस्तान दुनिया के नक्शे पर बना रहना चाहता है तो उसे हर हाल में आतंकवाद रोकना होगा, वरना हम संयम भूल जाएंगे और पाकिस्तान का नक्शे पर से नामोनिशां मिटा देंगे। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि यह सोचना और तय करना अब पाकिस्तान का काम है कि उसे भूगोल और इतिहास में रहना है या नहीं? उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि पश्चिमी पड़ोसी को हर हाल में राज्य प्रायोजित आतंकवाद रोकना ही होगा। राजस्थान के अनूपगढ़ में एक सैन्य चौकी पर बोलते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना इस बार कोई संयम नहीं दिखाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि अगर इस्लामाबाद आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता है और आतंकियों की सप्लाई बंद नहीं करता है, तो 'ऑपरेशन सिंदूर-2.0' दूर नहीं होगा और उस दौरान हम संयम भूल जाएंगे। ऑपरेशन सिंदूर-2.0 के लिए तैयार रहें जवान: सेना प्रमुख सेना प्रमुख ने कहा, "इस बार हम ऑपरेशन सिंदूर 1.0 जैसा संयम नहीं बरतेंगे। इस बार हम कुछ ऐसा करेंगे जिससे पाकिस्तान को सोचना पड़ेगा कि वह भूगोल में अपनी जगह बनाए रखना चाहता है या नहीं। अगर पाकिस्तान भूगोल में अपनी जगह बनाए रखना चाहता है, तो उसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद रोकना होगा।" इसके साथ ही उन्होंने जवानों से भी तैयार रहने को कहा। सेना प्रमुख ने कहा, “अगर ईश्वर ने चाहा, तो आपको जल्द ही मौका मिलेगा। शुभकामनाएँ।” 5 पाक लड़ाकू विमानों को मार गिराने का एयर चीफ का दावा सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी की यह चेतावनी एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें सिंह ने कहा था कि भारतीय सेना ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका निर्मित एफ-16 और चीन के जेएफ-17 सहित चार से पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। वायु सेना प्रमुख ने कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान में अपने ठिकाने भले ही कितनी दूर और कहीं भी बना लें भारतीय वायु सेना के पास उन्हें नष्ट करने की क्षमता है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने वायु सेना दिवस से पहले शुक्रवार को अपने सालाना संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में यह बात कही।  

राजनीति से अंधेरे की दुनिया तक: चुनाव हारे, गांजा गैंग संभाला, 26/11 के कमांडो की कहानी

मुंबई  मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले के दौरान जवाबी कार्रवाई में शामिल NSG कमांडो को गांजा तस्करी के आरोप में राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी बजरंग सिंह गांजा तस्करी का छोटा-मोटा धंधा नहीं करता था, बल्कि क्विंटल में नशे का सामान राज्य की सीमा तक सप्लाई करवाता था। अब सवाल है कि आखिर एनएसजी कमांडो के रूप में देश की सेवा करने वाला एक हट्टा-कट्टा नौजवान इस काले कारोबार में कैसे उतर गया। बजरंग सिंह को बुधवार को चुरू से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि सिंह तेलंगाना और ओडिशा से गांजा मंगवाकर राजस्थान में सप्लाई करवाता था। वह सीकर जिले का रहने वाला है और इस तरह की गतिविधियों के चलते उसपर 25 हजार रुपये का इनाम रखा गया था। राजस्थान का आतंक रोधी दस्ता और एंटी नारकोटिक्स फोर्स दो महीने से उसके पीछे पड़ी थी। कैसे एनएसजी तक पहुंचा था बजरंग बजरंग सिंह ने 10वीं के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी। हालांकि खेल-कूद में उसकी रुचि थी और अच्छा खासा कद भी था। ऐसे में वह बीएसएफ में चला गया। कॉन्स्टेबल के तौर पर वह पंजाब, असम, राजस्थान, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में रहा। उसकी लगन और बहादुरी को देखते हुए उसे एनएसजी कमांडो बना दिया गया। सात साल तक उसने कमांडो के तौर पर सेवा दी। मुंबई में आतंकी हमले के दौरान भी वह सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में शामिल था। राजनीति की तरफ रुख और फिर आपराधिक गतिविधियां राजनीति की तरफ रुख करने के बाद ही उसने अपराध की दुनिया में भी कदम रख दिया। राजनीति करने के लिए ही उसने नौकरी छोड़ी और अपने गांव आ गया। उसने अपनी पत्नी को मुखिया का चुनाव भी लड़ाया लेकिन वह हार गई। इसी बीच वह कुछ अपराधियों की भी संगत में आ गया। नौकरी वह पहले ही छोड़ चुका था, ऐसे में पैसे की उसे जरूरत थी। ऊपर से राजनीतिक महत्वाकांक्षा। बजरंग को अलग-अलग राज्यों के बारे में भी जानकारी थी और उसके संपर्क भी लोगों से बन गए थे। इसी का फायदा उठाकर उसने गांजे के तस्करी शुरू की। एक साल के अंदर ही वह गांजा तस्करी का सरगना बन गया। सिंह छोटी-मोटी तस्करी नहीं करता था बल्कि राज्य की सीमा से क्विंटलों गांजा की तस्करी करवाता था। उसके खिलाफ कई केस दर्ज हुए। 2023 में उसे गांजा तस्करी के ही आरोप में हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। बजरंग सिंह ज्यादातर समय किसी सुदूर गांव में ही रहता था। पुलिस ने उसके बारे में उसके ही रसोइए से पता लगाया। रसोइया इस काले कारोबार में शामिल नहीं था। उसे विश्वास में लेने के बाद पुलिस की टीम बजरंग के ठिकाने तक पहुंच गई। पुलिस ने उसे तत्काल गिरफ्तार भी नहीं किया। लंबे समय तक पीछा करने के बाद मौका देखकर उसे दबोचा गया।  

छोटा समुदाय, बड़ा योगदान: जैन समाज का 24% टैक्स रिकॉर्ड, जानें राजनाथ का बयान

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में जैन समुदाय की आबादी महज 0.5 फीसदी है, लेकिन कुल टैक्स कलेक्शन में उनका योगदान 24 फीसदी के बराबर है। उन्होंने यहां तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘जीतो (जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन) कनेक्ट 2025’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि जैन समुदाय को दुनिया में एक मेहनती और समृद्ध समाज माना जाता है। उन्होंने कहा कि जैन समुदाय का दर्शन भारतीय संस्कृति में गहराई से रचा-बसा है तथा इसका इतिहास भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा में एक अनमोल अध्याय है। राजनाथ सिंह ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था में जैन समुदाय का योगदान उल्लेखनीय है। उनकी जनसंख्या 0.5 प्रतिशत है, लेकिन कुल कर संग्रह का लगभग 24 प्रतिशत उनसे आता है।’ उन्होंने कहा कि चाहे औषधि क्षेत्र हो, विमानन हो या शिक्षा क्षेत्र हो, जैन समुदाय सभी में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि खिलौनों से लेकर टैंकों तक भारत सब कुछ बना रहा है और वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया के कारखाने के रूप में उभरेगा। ‘जीतो कनेक्ट’ दुनिया भर के जैन समुदाय के सदस्यों को एक साथ लाता है ताकि नेटवर्किंग, ज्ञान साझा करने और व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। इससे पहले गुरुवार को डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज मिलिट्री स्टेशन में शस्त्र पूजा की थी। उन्होंने कहा था कि अपनी सभ्यता को अजेय और अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए शस्त्र के अलावा शास्त्र की भी जरूरत होगी। उन्होंने डिफेंस फोर्सेज की सराहना करते हुए कहा कि उनकी ओर से ऑपरेशन सिंदूर में शानदार काम किया गया। उन्होंने कहा कि एक तरफ हमने हमला किया तो वहीं पाकिस्तानी अटैक्स को आसमान में ही रोक लिया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लेह से सर क्रीक सेक्टर तक हमले करने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय बलों के तत्काल ऐक्शन लेने से मजबूती से काउंटर किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने दुनिया को संदेश दिया है कि कैसे दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।  

नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में डोनाल्ड ट्रंप: क्या मिलेगा उन्हें सम्मान?

ओस्लो  दुनिया के सबसे प्रतिष्ठा प्राप्त सम्मानों में से एक नोबेल पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी। इसके तहत चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य, अर्थशास्त्र और शांति के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए सम्मान दिए जाते हैं। लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि आखिर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए डोनाल्ड ट्रंप को सम्मान दिया जाता है या नहीं। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2018 से अमेरिका के लोगों के साथ-साथ विदेशों में नेताओं द्वारा कई बार नामित किया गया है। उन्होंने अपने नए कार्यकाल के तहत इसी साल 19 जनवरी को कमान संभाली थी। उसके बाद से वह 7 युद्धों को रुकवाने का दावा कर चुके हैं। वहीं नोबेल समिति के एक सदस्य ने पिछले दिनों कहा था कि इस बार डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर विचार होना मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन उपलब्धियों के नाम पर उनके लिए दावा किया जा रहा है, वे नोबेल नॉमिनेशन की आखिरी तारीख के बाद की हैं। दिसंबर में एक रिपब्लिकन सांसद ने अब्राहम समझौते की मध्यस्थता के लिए भी ट्रंप के नाम का प्रस्ताव दिया था। इस समझौते ने इजराइल और कुछ अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बना दिया था। अब देखना होगा कि दिसंबर की उस उपलब्धि के नाम पर डोनाल्ड ट्रंप को सम्मान मिलता है या नहीं। नोबेल पुरस्कारों का ऐलान 10 अक्तूबर तक होना है। इसके अलावा ओस्लो से कुछ सूत्रों ने कहा कि जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की नीति पर काम कर रहे हैं और बाहरी लोगों के लिए वैमनस्यता का भाव दिखा रहे हैं, उसके चलते भी उन्हें पुरस्कार मिलना मुश्किल है। नोबेल पुरस्कारों का क्या है इतिहास नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 19वीं सदी के स्वीडन के व्यवसायी और वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने की थी। उनके पास 300 से ज़्यादा पेटेंट थे, लेकिन पुरस्कारों से पहले उनकी प्रसिद्धि का कारण नाइट्रोग्लिसरीन को एक ऐसे यौगिक के साथ मिलाकर डायनामाइट का आविष्कार करना था। इसके चलते बड़े-बड़े धमाके करना आसान हो गया। डायनामाइट निर्माण, खनन और हथियार उद्योग में बेहद लोकप्रिय हो गया और इसने नोबेल को बहुत अमीर बना दिया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने अपनी विशाल संपत्ति का इस्तेमाल वार्षिक पुरस्कारों के लिए धन जुटाने में करने का निर्णय लिया। चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में पहला नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल के निधन के पांच साल बाद 1901 में प्रदान किया गया था। वर्ष 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने अर्थशास्त्र के लिए छठा पुरस्कार शुरू किया। हालांकि नोबेल पुरस्कार के शुद्धतावादी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अर्थशास्त्र का पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल नहीं है। फिर भी इसे हमेशा अन्य पुरस्कारों के साथ ही प्रदान किया जाता है। नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन प्रक्रिया पुरस्कारों की संबंधित समितियों द्वारा किसी भी नामांकन की घोषणा नहीं की जाती है।

वायुसेना चीफ ने बताया- अमेरिका और चीन दोनों के फाइटर जेट ऑपरेशन सिंदूर में गिराए

नई दिल्ली   भारतीय वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह ने शुक्रवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान के लगभग 12 विमानों को नुकसान पहुंचाया। इसमें अमेरिका और चीन के फाइटर जेट्स भी शामिल हैं। वायुसेना प्रमुख सिंह ने कहा कि भारत ने अमेरिका के एफ-16 और चीन के जेएफ-17 क्लास के पांच फाइटर जेट्स को मार गिराया। मालूम हो कि पाकिस्तान के पास बड़ी संख्या में चीन और अमेरिका के फाइटर जेट्स मौजूद हैं, जिसका उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया था। अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सात मई को पाकिस्तान और पीओके में ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी। पहली रात लश्कर और जैश के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने चीन, अमेरिका और तुर्की के हथियारों की मदद से भारत पर हमले की नाकाम कोशिशें कीं। इसके बाद भारत ने पाक के कई एयरबेस को भी तबाह कर दिया। भारतीय वायु सेना के वार्षिक दिवस पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "जहां तक वायु रक्षा का सवाल है, हमारे पास एक लंबी दूरी के हमले के सबूत हैं। साथ ही, पांच फाइटर जेट्स, जो एफ-16 और जेएफ-17 कैटेगरी के बीच के उच्च तकनीक वाले हैं, ऐसा हमारी प्रणाली बताती है।" एफ-16 अमेरिका में निर्मित फाइटर जेट है, जबकि जेएफ-17 चीन में निर्मित है। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा, "…जहां तक ​​पाकिस्तान के नुकसान का सवाल है…हमने बड़ी संख्या में उनके एयरफील्ड्स पर हमला किया है और हमने बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों पर हमला किया है। इन हमलों के कारण, कम से कम चार स्थानों पर रडार, दो स्थानों पर कमांड और नियंत्रण केंद्र, दो स्थानों पर रनवे क्षतिग्रस्त हो गए, फिर तीन अलग-अलग स्टेशनों में उनके तीन हैंगर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हमारे पास एक सी-130 श्रेणी के विमान के संकेत हैं और कम से कम 4 से 5 फाइटर जेट्स। सबसे अधिक संभावना एफ-16 की हैं, क्योंकि वह स्थान एफ-16 था और उस समय जो कुछ भी रखरखाव में था।" एफ-16 फाइटर जेट्स की क्या हैं खूबियां अमेरिका का एफ-16 फाइटर जेट एक सिंगल इंजन वाला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है, जिसे अब लॉकहीड मार्टिन नामक कंपनी बनाती है। 1976 से अब तक 4600 से ज्यादा लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जा चुका है। यह सभी मौसम में काम करता है और दुश्मन देश के ठिकाने पर सटीक हमले करने के लिए जाना जाता है। पाकिस्तान ने अब तक अमेरिका से कुल 85 एफ-16 फाइटर जेट्स खरीदे हैं, जिसमें से 75 काम कर रहे हैं। हवा से सतह पर मार करने की क्षमता के साथ, एफ-16 500 मील (860 किलोमीटर) से अधिक की उड़ान भर सकता है। अपने हथियारों को बेहतर सटीकता के साथ गिरा सकता है और दुश्मन के विमानों से अपनी रक्षा कर सकता है। इसके बाद अपने प्रारंभिक प्वाइंट पर वापस लौट सकता है। चीन से खरीदे गए जेएफ-17 फाइटर जेट्स के फीचर्स चीन द्वारा निर्मित किए गए जेएफ-17 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल पाकिस्तान, म्यांमार, अजरबैजान समेत कई अन्य देश करते हैं। इसमें जेएफ का मतलब ज्वाइंट फाइटर है। यह एक चौथी पीढ़ी का हल्का सिंगल इंजन वाला, बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसे चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (सीएसी) और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (पीएसी) ने संयुक्त रूप से बनाया है। जेएफ-17 का इस्तेमाल कई भूमिकाओं के लिए किया जा सकता है, जिसमें दूसरे फाइटर जेट्स को इंटरसेप्ट करना, जमीनी हमला करना, एंटी शिप और हवाई टोही शामिल है।  

ट्रंप का बड़ा कदम: अमेरिका के शत्रु पर सशस्त्र कार्रवाई का आदेश, दस्तावेज़ों में उजागर हुई रणनीति

वाशिंगटन  अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन -ड्रग कार्टेल- के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सशस्त्र युद्ध का ऐलान कर दिया है। एक गोपनीय दस्तावेज़ में खुलासा हुआ है कि ट्रंप ने ड्रग तस्करों को ‘गैरकानूनी योद्धा’ बताते हुए पेंटागन को निर्देश दिए हैं कि वे इन कार्टेल्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इस रणनीति के तहत कैरेबियन सागर में पहले ही तीन ड्रग तस्करों वाली नावों पर हमले किए जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक और कानूनी विवाद भी छिड़ गए हैं। वाशिंगटन से आई खबर के मुताबिक, यह घोषणा कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना के हाल के हमलों के बाद आई है, जहां ड्रग तस्करों के तीन नावों को निशाना बनाया गया। इनमें से दो नावें वेनेजुएला से थीं, जिन पर अमेरिकी सेना ने गोलियां चलाईं और कई लोगों की मौत हुई। ट्रंप ने इन हमलों को आत्मरक्षा का एक जरूरी कदम बताया और कहा कि यह ड्रग्स की तस्करी को रोकने के लिए किया गया सैन्य अभियान है। हालांकि, इस ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ ने अमेरिका के अंदर कानूनी और राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। कई सांसदों का कहना है कि ऐसी सशस्त्र कार्रवाई के लिए पहले कांग्रेस की मंजूरी लेना जरूरी था। वहीं, पेंटागन ने सीनेट को हमलों की जानकारी दी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि कौन-कौन से कार्टेल निशाने पर हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में नाराजगी फैल गई है। ट्रंप ने मैक्सिकन गैंग्स और वेनेजुएला के ट्रेन डे अरागुआ जैसे कार्टेल्स को आतंकी संगठन घोषित किया है और कहा है कि ये गैंग पश्चिमी गोलार्ध में ड्रग तस्करी कर अमेरिका को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं। राष्ट्रपति की इस नई रणनीति से स्पष्ट है कि ड्रग्स के खिलाफ अमेरिकी लड़ाई अब सिर्फ कानून या पुलिस की कार्रवाई नहीं बल्कि सैन्य और सशस्त्र संघर्ष का रूप लेने जा रही है।   ट्रंप का यह कदम ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडे के तहत विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाने के बावजूद अब एक नए युद्ध की शुरुआत की तरह दिखता है, जिसने देश में राजनीतिक बहस और कानूनी सवालों को जन्म दिया है। अमेरिकी प्रशासन की यह रणनीति ड्रग तस्करी के खिलाफ कड़े कदम उठाने के उद्देश्य से है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता और कानूनी वैधता अभी विवादों में है।  

पाक के F-16 और JF-17 जेट्स को किया ढेर, एयरफोर्स चीफ ने खोले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के राज

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना (आईएएफ) अपने 93वें वायुसेना दिवस पर जोरदार उत्सव की तैयारी कर रही है. इस मौके पर एयर चीफ एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स ने पांच पाकिस्तानी F-16, JF-17 को मार गिराया था. विंग कमांडर जयदीप सिंह, जो वायुसेना के पीआरओ हैं ने प्रेस ब्रीफिंग में इसकी पूरी जानकारी दी.  उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को हिंडन एयर फोर्स बेस पर एक भव्य परेड होगी. 6 अक्टूबर को फुल ड्रेस रिहर्सल होगी. इस समारोह में वायुसेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख और थलसेना प्रमुख भी शामिल होंगे. यह दिवस वायुसेना की ताकत, आत्मनिर्भरता और देश सेवा को दर्शाएगा. ऑपरेशन सिंदूर में पाक का नुकसान      जमीन पर: चार जगहों पर रडार, दो जगहों पर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, दो जगहों पर रनवे, तीन जगहों पर हैंगर और 4-5 एफ-16 (क्योंकि हैंगर एफ-16 का था) तथा एक एसएएम सिस्टम नष्ट.     हवा में: एक लंबी दूरी के स्ट्राइक के सबूत हैं. एडब्ल्यूएसीएस या सिगइंट एयरक्राफ्ट के और 4-5 फाइटर एफ-16 या जे-10 क्लास के. इससे पाकिस्तान को जमीन और हवा में कुल फाइटर विमानों का नुकसान करीब 9-10 हो गया. परेड और आकर्षण: ध्वज फ्लाइपास्ट और स्टेटिक डिस्प्ले विंग कमांडर सिंह ने कहा कि परेड में कई रोमांचक चीजें होंगी. सबसे खास होगा ध्वज फ्लाइपास्ट. इसमें एमआई-17 हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सिंदूर का झंडा लेकर उड़ेगा. यह ऑपरेशन इस साल का सबसे बड़ा अभियान था. स्टेटिक डिस्प्ले में राफेल, Su-30MKI, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल दिखाए जाएंगे. रडार और हथियार भी प्रदर्शित होंगे. वायुसेना ने कुल 18 नई इनोवेशन भी पेश की हैं. ये इनोवेशन वायुसेना की आत्मनिर्भरता, समस्या समाधान क्षमता और भविष्य की सोच को दिखाते हैं. विंग कमांडर ने कहा कि ये दिखाते हैं कि हम खुद पर भरोसा करते हैं. नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं. ऑपरेशन सिंदूर: इतिहास का नया अध्याय ब्रीफिंग का मुख्य फोकस था ऑपरेशन सिंदूर. यह पहलगाम हमले के बाद का सबसे महत्वपूर्ण अभियान था. विंग कमांडर ने बताया कि सरकार ने सेनाओं को पूरी आजादी दी थी. यह युद्ध इतिहास में दर्ज होगा, क्योंकि यह एक लक्ष्य के साथ शुरू हुआ और राष्ट्र ने सीजफायर का फैसला लिया. हमारी मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम ने खेल पलट दिया. लॉन्ग रेंज एसएएम मिसाइलों ने दुश्मन को पीछे धकेल दिया. सबसे लंबा टारगेट किल 300 किलोमीटर से ज्यादा का था. विंग कमांडर ने गर्व से कहा कि यह इतिहास में दर्ज होगा. हमने सटीक हमले किए, न्यूनतम नुकसान के साथ. सिर्फ एक रात में दुश्मन को घुटनों पर ला दिया. 1971 के बाद पहली बार इतना विनाशकारी अभियान ऑपरेशन सिंदूर में दिखा. वायुसेना ने साबित किया कि वह अचूक, अभेद्य और सटीक है. सभी सेनाओं – वायु, थल और नौ – ने मिलकर योजना बनाई और अमल किया. विंग कमांडर ने कहा कि गलत सूचनाओं की भरमार थी, लेकिन हमारे मीडिया ने सेनाओं की बहुत मदद की. जनता का मनोबल न गिरे, इसके लिए चैनलों ने योगदान दिया. वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के हमलों का वीडियो भी जारी किया है. जरूरत पड़ने पर कैमरा फीड से और जानकारी ली जा सकती है. मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के अलावा, वायुसेना ने कई मानवीय सहायता मिशन चलाए. असम, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और अन्य जगहों पर मदद पहुंचाई. विंग कमांडर ने कहा कि हमने लोगों की जिंदगी बचाई और राहत दी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रियता रही. यूएई, मिस्र, फ्रांस, सिंगापुर जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास किए. इन देशों के कमांडरों ने तारीफ की और कहा कि वे अभ्यास जारी रखना चाहते हैं. ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला ने अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया. विंग कमांडर ने कहा कि यह साल अच्छा रहा, लेकिन आगे के समय के बारे में सोचना होगा. भविष्य की चुनौतियां और आत्मनिर्भरता विंग कमांडर ने चेतावनी दी कि अगला युद्ध पिछले जैसा नहीं होगा. हमें वर्तमान और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहना होगा. दुनिया भर की घटनाओं पर नजर रखनी है. 2047 तक का रोडमैप तैयार है, जिसमें आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) मुख्य है. एलसीए मार्क-1ए के ऑर्डर दिए जा चुके हैं. एलसीए मार्क-2 और आईएमआरएच भी पाइपलाइन में हैं. कई रडार और सिस्टम विकसित हो रहे हैं. विंग कमांडर ने कहा कि हम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो रणनीतिक तकनीक ले सकते हैं. गैप भरने के लिए काम चल रहा है. भविष्य का युद्ध हमेशा एकीकृत होगा – सभी सेनाओं और एजेंसियों के साथ. ऑपरेशन सिंदूर से हमने सबक सीखे. इससे वायु शक्ति की अहमियत फिर साबित हुई.  क्या आएगा Su-57 फाइटर जेट?  एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) और रूसी सुखोई-57 पर पूछा गया. एयर चीफ एपी सिंह ने कहा कि यह एडीए और डीआरडीओ के क्षेत्र में है. मुझे लगता है कि यह दशक में उड़ान भरेगा. तेजस मार्क-1ए जैसा कठिन काम है. सुखोई-57 पर सभी विकल्प तौलेंगे. रक्षा में प्रक्रिया है, जो भी फैसला होगा, सबसे अच्छा होगा. ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन एयरफोर्स ने पांच पाकिस्तानी F-16, JF-17 को मार गिराया था.

करूर भगदड़ पर केंद्र को घेरा स्टालिन, बोले- मणिपुर दंगे और कुंभ मौतों पर क्यों चुप है BJP

तमिलनाडु  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शुक्रवार को रामनाथपुरम में सभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु तीन बड़ी प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में था, जिसने हजारों लोगों को प्रभावित किया। तब केंद्रीय वित्त मंत्री न तो यहां आईं और न ही कोई धनराशि मुहैया कराई। लेकिन, इस बार वह तुरंत करूर पहुंच गईं। बीजेपी ने मणिपुर दंगों, गुजरात की घटनाओं या कुंभ मेला में हुई मौतों के लिए कोई जांच आयोग नहीं भेजा। अब करूर में तुरंत एक टीम भेजी जा रही है। ऐसा तमिलनाडु के लिए किसी वास्तविक चिंता के कारण नहीं, बल्कि केवल इसलिए है क्योंकि अगले साल चुनाव होने वाले हैं।' सीएम स्टालिन ने कहा, 'भाजपा सोचती है कि वे इससे (करूर में भगदड़ से हुई मौतों) कुछ राजनीतिक लाभ उठा सकते हैं या इसका इस्तेमाल किसी को धमकाने के लिए किया जा सकता है। बीजेपी ऐसी स्थिति में है जहां वह किसी और का खून चूसकर जीवित रहती है।' उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार राज्य के हितों की उपेक्षा करती है, राज्यों के अधिकार छीनती है। वो यहां तक सोचती है कि राज्यों का अस्तित्व नहीं होना चाहिए। उसे AIADMK का समर्थन प्राप्त है। विपक्ष के रूप में दृढ़ता से खड़े होने के बजाय AIADMK ने बीजेपी के साथ गुलामी का बंधन साइन कर लिया है और खुद को महज एक कठपुतली बना लिया है। AIADMK पर सीएम ने साथा निशाना एमके स्टालिन ने कहा, 'जो लोग दोषी हैं और अपने गलत कामों से बचना चाहते हैं, वे भाजपा को अपने कर्मों को शुद्ध करने का साधन मानते हैं। भाजपा पलानीस्वामी का इस्तेमाल कैसे कर रही है? उन्होंने उन्हें रैली से रैली, मंच से मंच और सड़क से सड़क तक यात्रा करने का काम सौंपा है ताकि और सहयोगी उनके साथ लाए जा सकें।' उन्होंने कहा कि जो लोग वास्तव में तमिलनाडु और तमिल लोगों की चिंता करते हैं, वे कभी भी भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। क्योंकि भाजपा कुछ और नहीं, बल्कि RSS की विभाजनकारी नीतियों को देश भर में लागू करने वाला राजनीतिक अंग और शक्ति केंद्र है। आगामी चुनावों में भी यह फिर से द्रविड़ मॉडल सरकार होगी जो जीतेगी और शासन जारी रखेगी। कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा भी उठाया एमके स्टालिन ने कहा, 'हमारे मछुआरों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि श्रीलंकाई नेवी ने उन पर हमला किया है। हम लगातार इसकी निंदा और विरोध करते हैं, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं किया। हमने तमिलनाडु विधानसभा में कच्चातिवु को वापस लेने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया और उसे केंद्र सरकार को भेजा। उस प्रस्ताव का उपयोग करके केंद्र सरकार को श्रीलंकाई सरकार से अपील करना चाहिए था, लेकिन वो ऐसा करने से इनकार कर रही है।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्रीलंका गए और उन्होंने भी इसका अनुरोध करने से मना कर दिया। श्रीलंका के विदेश मंत्री कहते हैं कि वे कच्चातिवु नहीं देंगे।

पाकिस्तान दहल उठा बम विस्फोट से, पेशावर में 9 लोगों ने गंवाई जान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में गुरुवार को हुए बम धमाके में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह जानकारी दी है। पेशावर के कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर मियां सईद ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस हमले में पुलिस को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा, “प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि विस्फोटक सामग्री पुलिस मोबाइल के मार्ग पर लगाई गई थी।” घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह धमाका ऐसे समय हुआ है जब पेशावर और इसके आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में आतंकी गतिविधियों में तेजी आई है। पिछले कुछ वर्षों में यह शहर कई बड़े हमलों का गवाह रहा है। धमाके के तुरंत बाद भारी संख्या में सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी कर दी। सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ऑपरेशन) मसूद बंगश ने कहा कि फोर्सेज मौके पर जांच कर रही हैं और सबूत इकट्ठे किए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही 30 सितंबर को बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में एक भीषण धमाके ने दहशत फैला दी थी। उस हमले में कम से कम 10 लोग मारे गए और 32 घायल हुए थे। धमाका फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) मुख्यालय के पास व्यस्त सड़क पर हुआ था। बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री बख्त मोहम्मद काकर ने मौतों की पुष्टि की थी। पुलिस के अनुसार, आठ शवों को क्वेटा के सिविल अस्पताल लाया गया था। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगटी ने इसे आतंकी हमला करार देते हुए कहा, “आतंकी कायराना हमलों से राष्ट्र की एकता और संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते। लोगों और सुरक्षाबलों की कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जाएंगी। हम बलूचिस्तान को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई में चार हमलावरों को मार गिराया। बुगटी ने यह भी कहा कि प्रदेश में आतंकियों के खिलाफ विशेष ऑपरेशन जारी है।  

भारी बारिश से ओडिशा बेहाल, भूस्खलन ने रोकी रफ्तार, यातायात पर पड़ा असर

गजपति ओडिशा में डीप डिप्रेशन के कारण भारी बारिश हुई, जिसने पूरे राज्य में जनजीवन को प्रभावित किया है. सड़कों पर पानी भरा, भूस्खलन हुए, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग लापता बताए जा रहे हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, गुरुवार शाम को गहरे दबाव की स्थिति गंजम जिले के गोपालपुर तट के पास से गुजरी, जिसके बाद बारिश और तेज हो गई. मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है. भूस्खलन से नुकसान, कई सड़कें बंद गजपति जिले में भारी बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ. पुलिस अधीक्षक जतिंद्र कुमार पांडा ने बताया कि आर. उदयगिरी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में भूस्खलन के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई. वहीं, रायगढ़ ब्लॉक के पास पेकट गांव में 70 वर्षीय कार्तिक शबारा और उनके बेटे राजिब शबारा भूस्खलन में लापता हुए हैं,  रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन रायगढ़ को नुआगढ़ और आर. उदयगिरी से जोड़ने वाली सड़कें बंद हो गई हैं. इसके अलावा, महेंद्रगिरि पहाड़ियों पर फंसे 24 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है. नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाणिज्य और परिवहन मंत्री बिभूति भासन जेना को गजपति जिले में बचाव कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया है. उन्होंने विशेष राहत आयुक्त को जिला प्रशासन को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री ने गजपति जिले के कलेक्टर से बात कर स्थिति की जानकारी ली. गजपति में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. रेल और सड़क यातायात प्रभावित भारी बारिश और भूस्खलन के कारण दक्षिण ओडिशा में रेल सेवाएं प्रभावित हुईं हैं. ईस्ट कोस्ट रेलवे (ECoR) के अनुसार, कोट्टावलसा-किरंदुल और कोरापुट-रायगढ़ रेल लाइनों पर पत्थर गिरने से ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं हैं. विशाखापत्तनम-किरंदुल नाइट एक्सप्रेस रद्द कर दी गई, जबकि किरंदुल-विशाखापत्तनम ट्रेन को कोरापुट तक शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है. संतरागाछी-यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस का समय भी बदल दिया गया. वहीं, कोरापुट जिले में एक पुल के डूबने से राष्ट्रीय राजमार्ग 326 पर यातायात ठप है, जो ओडिशा को आंध्र प्रदेश से जोड़ता है. बारिश से अभी नहीं राहत, मौसम विभाग का अलर्ट IMD ने सात जिलों – पुरी, गंजम, गजपति, रायगढ़, कोरापुट, कालाहांडी और कंधमाल के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है. जहां 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश की आशंका है. वहीं, 16 जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' और बाकी सात जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है. IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि शुक्रवार सुबह तक कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होगी. मछुआरों को समुद्र में ना जाने की सलाह बता दें कि गोपालपुर में 73 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं. मौसम विभाग ने मछुआरों को 3 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है. प्रशासन की तैयारी राज्य सरकार ने संवेदनशील जिलों में आपदा प्रबंधन टीमें और मशीनरी तैनात की हैं. बंदरगाहों पर 'स्थानीय सावधानी संकेत (LC-3)' लागू किया गया है, जो जहाजों के लिए चेतावनी प्रणाली है.