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अमेरिका में बदले नियम, भारतीयों की नौकरियों पर गहराया खतरा — ट्रंप सरकार का नया झटका

वाशिंगटन  अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए बुरी खबर आई है। ट्रंप सरकार ने एक नया नियम लागू किया है, जिससे हजारों भारतीयों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। यह नियम अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा जारी किया गया है और 30 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हो गया है। क्या है नया नियम? डीएचएस ने घोषणा की है कि अब EAD (Employment Authorization Document) यानी रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज़ का ऑटोमेटिक एक्सटेंशन (स्वत: विस्तार) बंद कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर किसी विदेशी नागरिक का ईएडी समय पर रिन्यू नहीं हुआ, तो वह अब अमेरिका में काम जारी नहीं रख पाएगा। पहले तक विदेशी कर्मचारी अपने ईएडी नवीनीकरण आवेदन लंबित रहने के बावजूद 540 दिनों तक नौकरी कर लेकिन अब यह सुविधा खत्म कर दी गई है। नए नियम के तहत अगर किसी व्यक्ति का रिन्यूअल आवेदन समय से पहले मंजूर नहीं होता, तो उसे तुरंत काम बंद करना होगा। अब होगी बार-बार जांच नए नियम के तहत विदेशियों को बार-बार जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। अब तक एक बार आवेदन करने पर लंबे समय तक अनुमति मिल जाती थी, लेकिन अब हर बार समय से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। डीएचएस ने कहा है कि विदेशी नागरिकों को अपने ईएडी समाप्त होने से कम से कम 180 दिन पहले आवेदन करना चाहिए, ताकि देरी की स्थिति में उनका रोजगार प्रभावित न हो। भारतीय पेशेवरों पर सबसे बड़ा असर यह बदलाव सबसे ज्यादा भारतीय नागरिकों को प्रभावित करेगा, जो अमेरिका में आईटी सेक्टर, इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से H-4 वीजा धारक, ग्रीन कार्ड आवेदक और OPT के तहत काम कर रहे छात्र इस नियम से प्रभावित होंगे। भारत से अमेरिका जाने वाले हजारों पेशेवर पहले से ही वीजा और ग्रीन कार्ड प्रोसेस की देरी से परेशान हैं, और अब यह नया नियम उनकी मुश्किलें और बढ़ा देगा। विशेषज्ञों की राय अमेरिकी इमीग्रेशन विशेषज्ञ हेनरी लिंडपेरे का कहना है कि यह कदम अमेरिका में रोजगार प्राधिकरण नवीनीकरण प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा, “इस नियम से बड़ी संख्या में विदेशी कामगारों, खासकर भारतीय पेशेवरों को नुकसान होगा। अगर आवेदन प्रक्रिया में थोड़ा भी विलंब हुआ, तो लोग अपनी नौकरी खो सकते हैं।” क्यों लिया गया यह फैसला? अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम सिस्टम को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए उठाया गया है। आलोचकों का मानना है कि यह निर्णय प्रवासियों के खिलाफ सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है और इससे अमेरिका की कंपनियों में स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी हो सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप का मोदी पर बड़ा बयान: कहा- भारत ने हमारी बात सुनी, कम की रूस से तेल खरीद

न्यूयॉर्क  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि भारत ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय कमी की है, और इस मुद्दे पर भारत “बहुत अच्छा” व्यवहार कर रहा है। ट्रंप ने यह टिप्पणी दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद की। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि भारत ने रूस से तेल आयात घटाने का भरोसा दिलाया है, जबकि चीन अभी भी बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है। उन्होंने कहा,“चीन के तेल आयात पर हमारा ज्यादा नियंत्रण नहीं है, लेकिन मैं कह सकता हूं कि भारत इस मोर्चे पर बहुत अच्छा रहा है। हमने तेल पर ज्यादा चर्चा नहीं की, बल्कि युद्ध खत्म करने पर सहयोग की बात की।” यह बयान एपेक शिखर सम्मेलन (APEC Summit) के दौरान आया, जहां ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बातचीत हुई।ट्रंप ने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद में कटौती करेगा जो रूस के लिए यूक्रेन युद्ध के दौरान राजस्व का बड़ा स्रोत रहा है। भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और उपभोक्ता सुरक्षा पर आधारित है। विदेश मंत्रालय के   प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा “भारत तेल और गैस का एक प्रमुख आयातक देश है। हमारी प्राथमिकता हमेशा भारतीय उपभोक्ता के हितों की रक्षा करना रही है। हमारी नीति स्थिर दाम और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इसी कारण हम अपनी ऊर्जा सोर्सिंग को विविध बनाते हैं।”उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और मौजूदा प्रशासन इस सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।     यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर ऊर्जा प्रतिबंध लगाए हैं और अन्य देशों से भी रूसी तेल खरीद घटाने का आग्रह किया है। हालांकि, भारत ने हमेशा यह कहा है कि उसके निर्णय घरेलू आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता हित को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन नई दिल्ली पर भरोसा कर रहा है, और भारत का संतुलित रवैया अमेरिका के रणनीतिक हितों के अनुरूप माना जा रहा है।  

PM Kisan Yojana Scam: अपात्र किसानों पर कार्रवाई, सरकार करेगी पूरी रकम की वसूली

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। प्रदेशभर में 44,040 दंपती ऐसे पाए गए हैं जिन्होंने गलत जानकारी देकर योजना का दोहरा लाभ उठाया। ऐसे सभी लाभार्थियों की अगस्त महीने से किस्तें रोक दी गई हैं। कृषि विभाग ने अब इनसे रकम की वसूली की तैयारी शुरू कर दी है। पीएम किसान सम्मान निधि नारनौल के नोडल अधिकारी रविंद्र कुमार यादव ने बताया कि योजना की शर्तों के मुताबिक, किसी एक परिवार से केवल एक सदस्य को ही दो हजार रुपये प्रतिमाह का लाभ मिलता है। मगर जांच में पाया गया कि 44,044 दंपती ने गलत जानकारी देकर दोहरा भुगतान प्राप्त किया। विभाग ने निर्णय लिया है कि जिन दंपतियों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनसे पूरी राशि वापस ली जाएगी। राशि की वसूली के बाद ही भविष्य में योजना का लाभ दिया जाएगा। नूंह जिला सबसे आगे दोहरी सम्मान निधि लेने के मामलों में नूंह जिला सबसे आगे है, जहां 7,802 दंपती ऐसे पाए गए हैं जिन्होंने गलत तरीके से किस्तें लीं। भिवानी में 3,632 और जींद में 3,284 दंपती फर्जीवाड़े में शामिल मिले हैं। इसके अलावा कैथल में 2,870, महेंद्रगढ़ में 2,384 और सिरसा में 2,456 दंपतियों के मामले सामने आए हैं। इन सभी मामलों की प्रदेश और जिला स्तर पर जांच की जा रही है।   विभाग की कार्यवाही नारनौल के नोडल अधिकारी रविंद्र कुमार यादव ने बताया कि विभाग फर्जीवाड़े में शामिल दंपतियों को चिह्नित कर नोटिस जारी करने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि यदि कोई लाभार्थी अब भी दोहरा लाभ ले रहा है, तो वह स्वयं कार्यालय में आकर जानकारी दे ताकि उसकी किस्त बंद की जा सके और आगे की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।  

भारत की ब्लू इकोनॉमी में बड़ा बदलाव, पीएम मोदी ने साझा किया विजन

नई दिल्ली   पीएम मोदी ने  मैरीटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव को संबोधित करने के बाद गुरुवार को निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वे पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि भारत निवेश के लिए एक सही स्थान है। उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा, "हमारे पास वर्ल्ड-क्लास पोर्ट्स, एक लंबी कोस्टलाइन, स्ट्रेटेजिक ग्लोबल ट्रेड रूट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इनोवेशन और इरादा है। हमारे युवाओं की वजह से हमारा इकोसिस्टम इनोवेशन के लिए पूरी तरह तैयार है। आइए, हमारे साथ जुड़िए!" पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पास ब्लू इकोनॉमी ग्रोथ के लिए एक एंबिशियस विजन है। उन्होंने सोशल नेटवर्किंग सर्विस प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक पोस्ट में इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि वे इस कार्यक्रम का हिस्सा बने। उन्होंने बताया कि वे कई बड़े सीईओ से मिले और इस सेक्टर के बड़े स्टेकहोल्डर्स से बात की। देश के मैरीटाइम सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, सुधारों और लोगों की भागीदारी के साथ इस सेक्टर में कई बड़े बदलाव हुए हैं। इन बदलावों के साथ मैरीटाइम सेक्टर मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल ट्रस्ट और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गया है। पीएम मोदी ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का मंत्र देते हुए कहा कि बिल्स ऑफ लैडिंग बिल से लेकर इंडियन पोर्ट्स बिल (2025) तक पांच महत्वपूर्ण बिलों ने मैरीटाइम गवर्नेंस को मॉडर्न बनाया है, व्यापार को आसान बनाया है, राज्यों को मजबूत किया है और भारत को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के साथ जोड़ा है। उन्होंने बताया कि इस ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से समुद्री सेक्टर के लिए 70,000 करोड़ रुपए का एक अम्ब्रेला पैकेज मंजूर किया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि शिपबिल्डिंग असिस्टेंस स्कीम, मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड और शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम से 4.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का इन्वेस्टमेंट आएगा और 2,500 से अधिक जहाज बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने लिंक्डन पर जानकारी देते हुए पोस्ट किया कि शिपिंग और जलमार्ग विकास के नए इंजन बन रहे हैं, जहां भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या 1,205 से बढ़कर 1,549 हो गई, और फ्लीट का ग्रॉस टनेज 10 एमजीटी से बढ़कर 13.52 एमजीटी हो गया है। कोस्टल शिपिंग कार्गो भी लगभग दोगुना होकर 87 से 165 एमएमटी हो गया है।

सहमति से संबंध खत्म होने पर अपराध नहीं मानेंगे, कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश

बेंगलुरु  बलात्कार के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया और आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। अदालत का कहना है कि आपसी सहमति से शुरू हुआ रिश्ता अगर निराशा के साथ खत्म होता है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। दरअसल, एक महिला ने याचिकाकर्ता पर रेप के आरोप लगाए थे। वहीं, कोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। जस्टिस एम नागप्रसन्न मामले की सुनवाई कर रहे थे। 25 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा, 'अगर वर्तमान अभियोजन पक्ष को ट्रायल में चलते रहने की अनुमति दी गई, तो यह न्याय की विफलता की ओर एक औपचारिक प्रक्रिया के अलावा कुछ नहीं होगा। यह कानून का दुरुपयोग होगा।' क्या था मामला  रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड में जानकारी दी गई थी कि एक महिला और पुरुष डेटिंग ऐप के जरिए मिलते हैं। उन दोनों के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बात शुरू होती है और वो एक रेस्त्रां में मिलने का फैसला करते हैं। इसके बाद दोनों ने एक होटल में संबंध भी बनाए। अब महिला ने बाद में आरोप लगाए हैं कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। महिला की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई, जिसे हाईकोर्ट में आरोपी ने चुनौती दी। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने जानबूझकर आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच हुई चैट को नजरअंदाज किया था। कोर्ट ने पाया कि चैट से संकेत मिलते हैं कि दोनों के बीच आपसी सहमति से फैसले लिए गए थे। इस दौरान उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें सहमति से संबंध और बलात्कार के बीच अंतर बताया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका को स्वीकार कर लिया और एफआईआर को खारिज कर दिया।

ट्रंप का बड़ा ऐलान: अमेरिका करेगा परमाणु विस्फोट की तैयारी, बोले— अब कोई हमें चुनौती नहीं दे सकता

वाशिंगटन   अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनका देश तीन दशकों में पहली बार परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू कर सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह परीक्षण रूस और चीन के ‘‘समान स्तर'' पर किया जाएगा। ट्रंप ने अपने बयान में अमेरिकी नीति में संभावित बड़े बदलाव की बहुत कम जानकारियां दी हैं। ट्रंप ने यह घोषणा बृहस्पतिवार को दक्षिण कोरिया में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात से कुछ मिनट पहले अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल' पर की। अमेरिकी सेना पहले से ही परमाणु मुखास्त्र ले जाने में सक्षम मिसाइलों के परीक्षण करती रही है, लेकिन 1992 से अमेरिका ने परमाणु विस्फोट परीक्षणों पर रोक लगा रखी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अब बदलाव जरूरी है क्योंकि अन्य देश हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किन देशों की बात कर रहे हैं, लेकिन यह बयान शीत युद्ध काल जैसी परमाणु होड़ की याद दिलाता है।   उन्होंने कहा, ‘‘अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि हमारे परमाणु हथियारों का समान स्तर पर परीक्षण शुरू करें। यह प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।'' अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन के अधिकारियों ने भी परमाणु मिसाइल परीक्षणों पर ट्रंप की घोषणा पर सवालों का जवाब नहीं दिया।   

पुराना वादा, नया बवाल: फडणवीस सरकार के खिलाफ हाईवे पर उमड़े हजारों किसान

मुंबई  महाराष्ट्र में कृषि ऋण माफी की मांग को लेकर जारी आंदोलन महायुति सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। दरअसल, राज्य सरकार ने चुनाव से पहले किसानों से कर्ज माफी का वादा किया था। फिलहाल, इसे लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है। कडू ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गुरुवार को मुलाकात के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। कडू ने बुधवार शाम कहा कि प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजमार्ग खाली कर पास के मैदान में चले जाएंगे। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब मुंबई उच्च न्यायालय ने नागपुर शहर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 44 को अवरुद्ध कर रहे प्रदर्शनकारियों को शाम छह बजे तक स्थल खाली करने का निर्देश दिया। इसके बाद मंत्री पंकज भोयर और आशीष जायसवाल ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की। भोयर ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि वे मुख्यमंत्री का संदेश लेकर आए हैं, जिसमें उन्हें मुंबई आकर चर्चा करने के लिए कहा गया है। हाईवे खाली कर मैदान में जाने का वादा मंत्रियों और प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक बच्चू कडू, किसान नेता राजू शेट्टी तथा अन्य किसानों के बीच लंबी बातचीत के बाद कडू ने मीडिया और किसानों को बताया कि वे राष्ट्रीय राजमार्ग (जिसे नागपुर-वार्धा रोड भी कहा जाता है) खाली कर पास के मैदान में चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगे की रूपरेखा मुख्यमंत्री फडणवीस से गुरुवार को मुंबई में होने वाली बैठक के बाद तय की जाएगी। कोर्ट ने जताई थी आपत्ति न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की एक अवकाशकालीन पीठ ने मीडिया की खबरों से इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया और कहा था कि कडू और उनके समर्थक बिना अनुमति के आंदोलन जारी रखे हुए हैं। अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन तथ्य यह है कि एक सार्वजनिक सड़क, विशेष रूप से एक राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रदर्शनकारियों द्वारा अवरुद्ध किया गया है, जो निश्चित रूप से भारत के पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने के नागरिकों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। अदालत ने कहा, 'ऐसी स्थिति में न्यायपालिका की भूमिका सक्रिय प्रकृति की होनी चाहिए, क्योंकि वह हमारे संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षक है।' महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश उर्फ ​​बच्चू कडू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी ‘महा एल्गार मोर्चा’ में शामिल हो रहे हैं। उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि 26 अक्टूबर को पुलिस ने कडू को 28 अक्टूबर को नागपुर के मौजा परसोडी में केवल एक दिन के लिए आंदोलन करने की अनुमति दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा, 'प्रथमदृष्टया यह स्पष्ट है कि बिना किसी अनुमति के आंदोलन/विरोध अब भी जारी है और आम जनता के सामने समस्याएं बढ़ गई हैं।' पीठ ने कडू को आदेश दिया कि वह और उनके समर्थक तुरंत आंदोलन स्थल से हट जाएं। उच्च न्यायालय ने कहा कि लोगों के हटने का काम शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए, जिससे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। तो पुलिस करेगी कार्रवाई इसने कहा कि यदि सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचाया जाता है तो कडू और उनके समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि कडू और प्रदर्शनकारी सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से नहीं हटते हैं, जहां प्रदर्शन जारी है, तो पुलिस अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों को हटाने और यातायात को सामान्य स्थिति में लाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है। पीठ ने नागपुर शहर के पुलिस आयुक्त को गुरुवार सुबह अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसने कहा कि यदि विरोध प्रदर्शन में कोई विशेष रूप से सक्षम व्यक्ति मौजूद है तो उसे सम्मानपूर्वक हटाया जायेगा। न्यायमूर्ति व्यास ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44, जिसे आमतौर पर वर्धा रोड कहा जाता है, पर यातायात अवरुद्ध होने के कारण आम जनता को अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ा, क्योंकि पूर्व विधायक ओमप्रकाश उर्फ ​​बच्चू कडू के नेतृत्व में ऋण माफी की मांग को लेकर 10,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन/विरोध प्रदर्शन किया था। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन के कारण 20 किलोमीटर तक यातायात जाम हो गया है और यहां तक ​​कि एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों की भी आवाजाही नहीं हो पा रही हैं। इसने कहा कि नागपुर हवाई अड्डा उसी राजमार्ग पर स्थित है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय कैंसर संस्थान तक पहुंचने के लिए भी किया जाता है। अदालत ने कहा कि एक अस्पताल और कई स्कूल राजमार्ग पर स्थित हैं और यह मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेसवे से जुड़ा हुआ है। सुनवाई के दौरान सरकार का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता देवेंद्र चौहान ने किया। हाईकोर्ट के फैसले पर कडू ने कहा, 'हम उच्च न्यायालय का अपमान नहीं करना चाहते, लेकिन हर रोज 12 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। हम इंतजार कर रहे हैं कि न्यायालय इसका संज्ञान ले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाए हम देख रहे हैं कि हाईकोर्ट ने एक दिन में फैसला दे दिया…। हम हमारी जगह पर रहेंगे। पुलिस हम सभी को गिरफ्तार कर सकती है।'

परमाणु डेटा चोरी कांड! अख्तर कुतुबुद्दीन के ठिकाने से मिली हैरान करने वाली सामग्री

मुंबई  देश के प्रमुख परमाणु शोध संस्थान भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर से गिरफ्तार फर्जी आतंकी के पास से चीजें बरामद की गई हैं, वे चिंता बढ़ाने वाली हैं। मुंबई पुलिस के सूत्रों का कहना है कि फेक वैज्ञानकि बने अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी के पास संदेहास्पद परमाणु डेटा मिला है। इसके अलावा 14 नक्शे भी पाए गए हैं। ये नक्शे परमाणु केंद्र और आसपास के ही बताए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि जो दस्तावेज उससे बरामद हुए हैं, उसका कहीं गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ है। इसके अलावा यह जानने की भी कोशिश है कि जो जानकारी उसके पास है, वह कितनी संवेदनशील है।   अख्तर कुतुबुद्दीन अंसारी को वर्सोवा से पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था। वह खुद को वैज्ञानिक बताता था और कई नाम रखे हुए थे। उसके पास से कई फर्जी पासपोर्ट, आधार कार्ड और पैन कार्ड मिले हैं। इसके अलावा उसके पास से भाभा रिसर्च सेंटर के कई फर्जी आईडी भी मिले हैं। माना जा रहा है कि इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे ही वह एंट्री करता रहा होगा। एक आईडी में उसने अपना नाम अली राजा हुसैन रखा हुआ है। इसके अलावा एक अन्य आईडी में उसका नाम एलेक्जेंडर पाल्मर है। फिलहाल उसके कॉल रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि उसने बीते कुछ महीनों में कई फर्जी कार्ड बनवाए थे। इंटरनेशनल नेटवर्क से बात होने का शक, जांच में जुटी पुलिस पुलिस को संदेह है कि फर्जी वैज्ञानिक बने अख्तर की शायद किसी इंटरनेशनल नेटवर्क से बात होती थी। शक है कि उसने इस बातचीत के दौरान संवेदनशील जानकारियां साझा की हैं। उसके बारे में पता चला है कि वह लंबे समय से अकसर अपनी पहचान बदलता रहा है। अलग-अलग जगहों पर वह नई पहचान के साथ रहता था। उसे दुबई से 2004 में प्रत्यर्पित किया गया था। वहां भी उसने खुद को एक वैज्ञानिक बताया था और दावा करता था कि उसके पास कुछ गोपनीय दस्तावेज मौजूद हैं। यही नहीं एक बार डिपोर्ट होने के बाद भी उसने दुबई, तेहरान समेत कई जगहों की यात्रा की थी। इन यात्राओं के लिए उसने फर्जी पासपोर्ट्स का ही इस्तेमाल किया था। 30 साल पहले बेचे घर के नाम पर बनवाए पासपोर्ट मूल रूप से जमशेदपुर के रहने वाले अख्तर हुसैनी ने अपना पैतृक घर 1996 में बेच दिया था। इसके बाद उसने कई फर्जी दस्तावेज पुराने संपर्क में रहे लोगों की मदद से बनवाए थे। उसके भाई आदिल ने अख्तर का परिचय मुनज्जिल खान से कराया था, जो झारंखड का ही रहने वाला है। पुलिस को संदेह है कि इसी शख्स ने अख्तर और उसके भाई के लिए दो फर्जी पासपोर्ट तैयार करा दिए थे। इनमें अख्तर का नाम नसीमुद्दीन सैयद आदिल हुसैनी था और उसके भाई का नाम हुसैनी मोहम्मद आदिल था। दोनों के पासपोर्ट पर 30 साल पहले ही बेच दिए गए जमशेदपुर के मकान का पता था। पुलिस का कहना है कि दोनों भाई इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश की यात्रा पर भी जाते थे।

इनसाइड स्टोरी: सुखोई विमान तैनात एयरबेस अचानक क्यों हुआ बंद, और किसने रची योजना?

नई दिल्ली भारत ने ताजिकिस्तान में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आयनी एयरबेस से अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह समाप्त कर ली है। यह कदम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते की समाप्ति के बाद उठाया गया है। मामले से वाकिफ लोगों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह वही एयरबेस है जहां भारत ने लगभग दो दशक पहले, अफगानिस्तान में तालिबान विरोधी नॉर्दर्न अलायंस का समर्थन करते हुए पहली बार अपने सैनिक और वायुसेना कर्मियों को तैनात किया था। सूत्रों के अनुसार, भारत और ताजिकिस्तान के बीच इस एयरबेस के विकास और संयुक्त संचालन के लिए किया गया द्विपक्षीय समझौता लगभग चार साल पहले समाप्त हो गया था, और इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इसी के बाद से धीरे-धीरे भारतीय कर्मियों की वापसी शुरू हुई, जो 2022 तक ही पूरी हो गई थी। यह एयरबेस राजधानी दुशांबे से लगभग 10 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। 100 मिलियन डॉलर खर्च कर किया था एयरबेस का विकास पूर्व सोवियत काल में बने इस एयरबेस को भारत ने 2000 के दशक में विकसित और आधुनिक बनाया था। सूत्रों के अनुसार, भारत ने इस पर करीब 100 मिलियन डॉलर (लगभग 830 करोड़ रुपये) खर्च किए थे। इन सुधारों में रनवे को मजबूत और लंबा करना शामिल था ताकि कॉम्बैट जेट्स और भारी परिवहन विमानों की लैंडिंग हो सके। इसके अलावा, फ्यूल डिपो, हैंगर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और हार्डनड शेल्टर जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई थीं। तैनात थे भारतीय वायुसेना और थलसेना के कर्मी 2014 के बाद कुछ समय के लिए भारत ने अपने Su-30MKI लड़ाकू विमानों को भी आयनी एयरबेस पर तैनात किया था। उस समय करीब 200 तक भारतीय सैन्य कर्मी यहां तैनात रहते थे जिनमें वायुसेना और थलसेना दोनों के अधिकारी शामिल थे। नॉर्दर्न अलायंस को मिली थी मदद भारत की इस मौजूदगी का मूल उद्देश्य था तालिबान विरोधी नॉर्दर्न अलायंस को रसद और उपकरणों की आपूर्ति में तेजी लाना, साथ ही हवाई समर्थन और निगरानी मिशन चलाना। इसके साथ ही, भारत ने ताजिकिस्तान के फरखोर में एक सैन्य अस्पताल भी स्थापित किया था, जहां घायल नॉर्दर्न अलायंस के लड़ाकों का इलाज किया जाता था। इसी अस्पताल में 9/11 हमलों से दो दिन पहले नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख नेता अहमद शाह मसूद को घातक हमले में घायल होने के बाद लाया गया था, जहां उनका निधन हो गया था। रणनीतिक दृष्टि से अहम थी यह मौजूदगी 2001 में तालिबान शासन के पतन और काबुल में नई सरकार बनने के बाद भी भारत ने आयनी एयरबेस पर अपनी मौजूदगी बनाए रखी। यह कदम मध्य एशिया में भारत के प्रभाव को बढ़ाने और पाकिस्तान पर सामरिक दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा था, क्योंकि यह एयरबेस अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह वही संकीर्ण पट्टी है जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से सटी हुई है। अफगानिस्तान से नागरिकों की निकासी में हुई थी मदद 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल कर लिया था, तब भारत ने आयनी एयरबेस का उपयोग अपने नागरिकों और राजनयिकों को सुरक्षित निकालने के लिए किया था। उस दौरान भारतीय सेना और वायुसेना के साथ-साथ नागरिक विमानों का भी इस्तेमाल किया गया था। अब पूरी तरह समाप्त हुई भारतीय उपस्थिति सूत्रों ने बताया कि भारत की सारी सैन्य और तकनीकी संपत्तियां, साथ ही वहां तैनात कर्मी, 2022 तक वापस बुला लिए गए थे। समझौता समाप्त होने के बाद आयनी एयरबेस का संचालन अब पूरी तरह ताजिकिस्तान सरकार के अधीन है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की मध्य एशिया नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहां नई परिस्थितियों के तहत भारत को कूटनीतिक और आर्थिक माध्यमों से अपनी मौजूदगी मजबूत करनी होगी। भारत का पहला विदेशी एयरबेस: एक रणनीतिक सपना साल 2002। अफगानिस्तान में तालिबान का साया मंडरा रहा था। भारत ने ताजिकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया। आयनी एयरबेस राजधानी दुशांबे से महज 10 किलोमीटर दूर है। यह सोवियत युग का एक पुराना हवाई अड्डा था। भारत ने इसे नया जीवन दिया। लगभग 70-80 मिलियन डॉलर (करीब 500 करोड़ रुपये) खर्च करके रनवे को 3,200 मीटर लंबा बनाया, हैंगर बनवाए, ईंधन डिपो स्थापित किए। माना जाता है कि यह भारत का पहला विदेशी एयरबेस था- कोई स्थायी फाइटर स्क्वाड्रन नहीं, लेकिन दो-तीन Mi-17 हेलीकॉप्टर ताजिकिस्तान को गिफ्ट में दिए गए थे, जिन्हें भारतीय वायुसेना (IAF) के पायलट उड़ा रहे थे। रणनीतिक महत्व? आयनी अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर से सटा है, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से महज 20 किलोमीटर दूर है। यानी अगर पीओके पर पाक का कब्जा नहीं होता तो ताजिकिस्तान हमारा पड़ोसी देश होता। आयनी एयरबेस से भारतीय Su-30 MKI जैसे फाइटर जेट्स पेशावर या इस्लामाबाद तक को निशाना बना सकते थे। चीन के शिनजियांग प्रांत से भी सटी सीमा इसे दुश्मनों के लिए दोहरी चुनौती बनाती। 2001 में तालिबान के अफगानिस्तान कब्जे के दौरान भारत ने इसी बेस से अपने नागरिकों को निकाला था। यह न सिर्फ ह्यूमैनिटेरियन मिशनों के लिए था, बल्कि पाकिस्तान-चीन गठजोड़ को नजरअंदाज करने का तरीका। लेकिन शुरुआत से ही इस पर रूस की छाया थी। ताजिकिस्तान रूस-नीत कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (CSTO) का सदस्य है। मानाजाता है कि भारत ने रूस की मंजूरी से ही यहां कदम रखा। 2011 में ताजिकिस्तान ने रूस को ही बेस सौंपने की बात कही। फिर भी, भारत ने 2021 तक लीज बढ़ाने की कोशिश की- यहां तक कि सुखोई (Su-30) जेट्स भी तैनात किए थे। ताजिकिस्तान की रणनीतिक स्थिति ताजिकिस्तान कभी सोवियत संघ का हिस्सा था। वह अफगानिस्तान, चीन, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान की सीमाओं से जुड़ा है। यह क्षेत्र रूस, चीन और भारत जैसे तीनों परमाणु शक्तियों के लिए प्रभाव क्षेत्र का केंद्र बना हुआ है। भारत की वापसी यह संकेत देती है कि मध्य एशिया धीरे-धीरे रूस और चीन के प्रभाव क्षेत्र में और गहराई से समाहित हो रहा है। बता दें कि रूस-नेतृत्व वाले CSTO में रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, आर्मेनिया और बेलारूस जैसे देश भी शामिल हैं। इसके अलावा, ताजिकिस्तान को चीन, यूरोपीय संघ, भारत, ईरान और अमेरिका से भी सीमा सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहायता मिलती है। ताजिकिस्तान में रूस का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य ठिकाना भी … Read more

सोने के आभूषणों पर पाबंदी: उत्तराखंड पंचायत ने शादी समारोह के लिए जारी किया नया फरमान

देहरादून  सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं. सोने पर महंगाई की मार के बीच उत्तराखंड की एक पंचायत ने इसे लेकर नया फरमान जारी किया है. अनुसूचित जनजाति क्षेत्र जौनसार इलाके की एक पंचायत की ओर से जारी किया गया यह फरमान महिलाओं के आभूषण पहनने को लेकर है. इस पंचायत ने शादी और अन्य समारोह में महिलाओं के तीन से अधिक आभूषण पहनने पर रोक लगा दी है. महिलाओं के आभूषण पहनने से संबंधित यह नियम कंदाड़ और इद्रोली गांव में लागू भी हो गया है. महिलाओं को जो तीन आभूषण पहनने की छूट दी गई है, उनमें झुमके, नाक की नथ और मंगलसूत्र शामिल हैं. दो गांवों की संयुक्त पंचायत ने इस नियम की अवहेलना करने पर संबंधित व्यक्ति से 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने का भी प्रावधान किया है. इस नए सामाजिक नियम को लेकर कंदाड़ के निवासी अर्जुन सिंह ने सोने की बढ़ती कीमतों को आधार बताया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अर्जुन सिंह का कहना है कि कई महिलाएं सोने के आभूषण खरीदने का दबाव बनाती हैं. सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, इस वजह से परिवार में झगड़े की स्थिति बन जा रही है. इसे देखते हुए ही यह कदम उठाया गया है. उन्होंने महिलाओं की शराब और फिजूलखर्ची पर रोक की डिमांड पर कहा कि इस पर भी विचार किया जाएगा और चरणबद्ध तरीके से रोक लगाई जाएगी. महिलाओं ने भी पंचायत के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कुछ असहमतियां भी जताई हैं. जौनसार निवासी अमला चौहान ने कहा कि समानता लाना ही अगर इसका उद्देश्य है, तो केवल महिलाओं के आभूषण पहनने पर ही क्यों. उन्होंने पुरुषों के ब्रांडेड शराब पीने पर भी रोक लगाने की वकालत की. अमला ने कहा कि सोना एक निवेश है, जो मुश्किल समय में काम आता है. शराब और अन्य फिजूलखर्ची का क्या? एक अन्य महिला निशा रावत ने शादियों में महंगे उपहार के ट्रेंड पर भी चिंता जताई और कहा कि ब्रांडेड शराब, चिकन… ये सब दिखावे की चीजें हैं. उन्होंने कहा कि शादियों में पहले घर की बनी शराब परोसी जाती थी, लेकिन ब्रांडेड शराब और महंगे उपहार का चलन बढ़ गया है. खर्च कम करने की ही बात है, तो शराब और मांस पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए. इन सबको लेकर एक स्थानीय भीम सिंह ने कहा कि आभूषण को लेकर नियम का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन शराब और फिजूलखर्ची को लेकर महिलाओं की मांग भी जायज है. पंचायत को इस पर भी विचार करना चाहिए. गौरतलब है कि जौनसार का इलाका अनुसूचित जनजाति की बहुलता वाला क्षेत्र है. इस इलाके में सामाजिक स्तर पर पंचायत का बहुत महत्व है. रहन-सहन से लेकर सामाजिक मसलों तक, इलाके के लोग पंचायत के निर्णय को पूरी गंभीरता से लेते हैं और मानते हैं.