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धार्मिक संकट बढ़ा: बांग्लादेश के हिंदू मंदिरों पर लूट और तोड़फोड़, दुर्गा पूजा पर खतरा

ढाका  बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हमले बढ़ते जा रहे हैं। जमालपुर जिले के सरिशाबारी उपजिला के तऱ्यापारा मंदिर में शनिवार रात एक शख्स ने लूट के बाद सात मूर्तियों को तोड़फोड़ दिया। यह घटना दुर्गा पूजा से ठीक पहले दूसरी बार सामने आई है।पुलिस ने आरोपी हबीबुर रहमान (35) को गिरफ्तार किया है। सरिशाबारी पुलिस थाना के अधिकारी राशेदुल हसन ने बताया कि पुलिस को सूचना मिलने पर तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष गोएश चंद्र बरमन ने कहा कि रविवार सुबह महालया के दिन मूर्तियों को टूटे हुए देखकर पुलिस को सूचना दी गई और CCTV फुटेज से आरोपी की पहचान की गई।मंदिर और पुलिस के अनुसार, मूर्तियाँ शनिवार रात कलाकारों द्वारा तैयार की गई थीं और उसी रात आरोपी ने मंदिर में घुसकर मूर्तियों के सिर और अन्य हिस्से तोड़ दिए।यह घटना चिंता का विषय है क्योंकि अगस्त 2024 में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यकों पर हमलों में वृद्धि देखी गई है।   इस सप्ताह की शुरुआत में कुस्टिया जिले के मिर्पुर उपजिला के श्वरुपदाह पलपारा श्री श्री राधा काली मंदिर में भी मूर्तियों को तोड़ा गया और सुरक्षा कैमरा व मेमोरी कार्ड चोरी हो गए थे। मंदिर समिति के पूर्व सचिव बदाल कुमार डे ने कहा, "पिछले तीन साल से हम दुर्गा पूजा की तैयारी कर रहे हैं। यह घटना हमें डर में डाल गई है।"इससे पहले, बांग्लादेश की अवामी लीग ने अंतरिम सरकार के गृह सलाहकार जहंगीर आलम चौधरी की हिंदू धर्म के खिलाफ विवादित टिप्पणी की निंदा की थी। शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश में हिंसा और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई है।

बाढ़ की मार और बढ़ते अनाज दाम: पाकिस्तान में खाद्य संकट का खतरा गंभीर

इस्लामाबाद   पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बाढ़ के बाद खाद्य संकट को रोकने के लिए सरकार ने गेहूं की स्टॉकिंग और उसकी जियोटैगिंग (स्थान डेटा) की प्रक्रिया शुरू की है। पूर्वी नदियों में आई बाढ़ से फसलों और केंद्रीय जिलों में स्टॉक को नुकसान पहुंचा है। प्रांतीय प्रशासन ने गेहूं के प्रांतों के बीच आंदोलन पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे खैबर पख्तूनख्वा में गेहूं की कीमतें 68% तक बढ़ गईं। इसके चलते सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में विरोध प्रदर्शन भी हुए। सरकार का मकसद पंजाब में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना और भविष्य में किसी खाद्य संकट से बचना है। पंजाब प्राइस कंट्रोल और कमोडिटी मैनेजमेंट विभाग ने प्रांत के गोदामों में गेहूं के स्टॉक का जियोटैगिंग और भौतिक सत्यापन शुरू किया है। सचिव किरन खुर्शीद ने चार सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया है, जो डिप्टी सेक्रेटरी शाजिया रहमान के नेतृत्व में जिला स्तर के डेटा को इकट्ठा करेगी। किरन खुर्शीद ने कहा, "जियोटैगिंग सिर्फ एक हस्तक्षेप है, समाधान नहीं। बाढ़ के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं नष्ट हुआ है और अब सरकार की जिम्मेदारी है कि नागरिकों तक सप्लाई सुनिश्चित की जाए।"उन्होंने बताया कि विभाग ने आठ निदेशालयों की संपत्ति, संसाधन और गतिविधियों को डिजिटलाइज करने के लिए  स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट विंग  भी बनाया है। इसका उद्देश्य सभी जानकारी को एक डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराना है ताकि निर्णय लेने में आसानी हो।   रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब गृह विभाग ने प्राइस कंट्रोल विभाग की सिफारिश पर सेक्शन 144 लागू किया है, जिससे 10,184 मीट्रिक टन गेहूं को फीड बनाने के लिए मिलों में इस्तेमाल करने से रोका गया।मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता खाद्य संकट को रोकना और नागरिकों तक गेहूं की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से लगभग 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और प्रशासन को उनके लिए गेहूं की उपलब्धता गारंटीकृत करनी होगी। सचिव खुर्शीद ने कहा कि गेहूं की निगरानी सिंध और खैबर पख्तूनख्वा की सीमाओं पर भी की जा रही है, ताकि व्यापारी इसे उच्च कीमत पर न बेच सकें। उन्होंने बताया कि जोर-शोर से होर्डिंग और मुनाफाखोरी पर कार्रवाई  की जा रही है। अब तक 107 मुनाफाखोरों को गिरफ्तार किया गया, 12,043 लोगों पर जुर्माना लगाया गया और सात मामलों में केस दर्ज किए गए। इस कार्रवाई से मिलों में गेहूं का स्टॉक 1,65,000 मीट्रिक टन बढ़ा। साथ ही, 3,60,000 मीट्रिक टन गेहूं पीसा गया, जिससे आटे की सप्लाई बनी रही और कीमत 40 किलो के पैकेट के लिए PKR 3,800 से घटकर PKR 3,000 हो गई। सरकारी उपायों से अल्पकालिक स्तर पर सप्लाई स्थिर हुई है, जबकि अधिकारियों द्वारा लंबी अवधि में गेहूं की स्थिर आपूर्ति की योजना भी बनाई जा रही है।

पाकिस्तान को सस्ते ब्याज पर कर्ज, सऊदी अरब ने बढ़ाया आर्थिक सहारा

इस्लामाबाद सऊदी अरब पाकिस्तान की दिल खोलकर मदद कर रहा है। वह केवल चार प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर के साथ पाकिस्तान को मिलने वाले सस्ते विदेशी ऋणों का प्रमुख सोर्स बना हुआ है। रविवार को मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, रियाद ने हाल के वर्षों में इस्लामाबाद को दिए दो अलग-अलग नकद ऋणों पर चार प्रतिशत ब्याज दर वसूली। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के अनुसार, मूल रूप से एक वर्ष के लिए दिये गए इस ऋण को पाकिस्तान द्वारा चुकाया जाना अभी बाकी है। सऊदी, बिना कोई अतिरिक्त ब्याज लगाए इन ऋणों को वार्षिक रूप से आगे बढ़ा रहा है। खबर के मुताबिक, सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान को दिये गए ये ऋण चीन से मिलने वाले ऋण की तुलना में लगभग एक-तिहाई सस्ते हैं। साथ ही, विदेशी वाणिज्यिक उधार से आधी लागत पर हैं। खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया, सऊदी अरब द्वारा दी गयी दो अरब अमेरिकी डॉलर की नकद जमा सुविधा की अवधि दिसंबर में पूरी होने वाली है और वित्त मंत्रालय इसे फिर से आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कार्यक्रम के तहत बाह्य वित्तपोषण की कमी को पूरा करने के लिए प्राप्त 3 अरब अमेरिकी डॉलर के एक और सऊदी ऋण की अवधि अगले वर्ष जून में पूरी हो जाएगी। आईएमएफ ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के तीन ऋणदाता, सऊदी अरब, चीन और संयुक्त अरब अमीरात तीन साल के कार्यक्रम के पूरा होने तक अपनी नकद जमा राशि बनाए रखेंगे। खबर के मुताबिक, इन देशों ने पाकिस्तान को कुल 12 अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया हुआ है, जो पाकिस्तानी केंद्रीय बैंक के 14.3 अरब अमेरिकी डॉलर के सकल विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा है। सूत्रों ने बताया कि सऊदी अरब के ऋण पर चार प्रतिशत ब्याज दर है जबकि पाकिस्तान चार अरब अमेरिकी डॉलर के चार ऋणों पर लगभग 6.1 प्रतिशत ब्याज भुगतान कर रहा है।  

राहुल-प्रियंका-सोनिया श्री नारायण गुरु समाधि पर पहुँचे, बोले- इंसानियत की पहचान करुणा है

वायनाड (केरल),  कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड में एसएनडीपी योगम कलपेट्टा यूनियन हॉल में श्री नारायण गुरु समाधि कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि समानता और सभी प्राणियों के प्रति करुणा जैसे विचार आज समाज में और राजनीति में बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि श्री नारायण गुरु को याद करना और आज उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना मेरे लिए सम्मान की बात है। वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने आज प्रसिद्ध सामाजिक सुधारक श्री नारायण गुरु की समाधि दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें समानता और न्याय के मार्गदर्शक बताया। मुख्यमंत्री ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि गुरु ने ऐसे समय में समाज का नेतृत्व किया जब जातिवाद और अंधविश्वास बहुत ज्यादा था और उन्होंने आधुनिक केरल की नींव रखी। विजयन ने कहा कि गुरु के संदेश आज भी जातिगत भेदभाव और सांप्रदायिक बंटवारे के खिलाफ लड़ाई को प्रेरित करते हैं। उन्होंने जनता से केरल को एक ऐसा आदर्श समाज बनाने की अपील की, जहां हर कोई भाईचारे में रहे, और जाति या धर्म के आधार पर विवाद न हो। गुरु ने 19वीं और 20वीं सदी में समानता, एकता और मानव गरिमा का परचम बुलंद किया था।  

भारत की ओर रुख: L1 वीजा छोड़ अमेरिका से लौटी महिला ने साझा किया अपने फैसले का कारण

बेंगलुरु  कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की एक महिला ने अमेरिका में अपना L1 वीजा छोड़ने के अपने फैसले को अब तक का सबसे बेहतरीन कदम बताया। उन्होंने यह फैसला H-1B वीजा की तीन लॉटरी में असफल होने के बाद लिया। बता दें कि L1 वीजा, एक तरह का इंट्रा-कंपनी ट्रांसफर वीजा है, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने कर्मचारियों को भारत से अमेरिकी शाखाओं में शिफ्ट करने की अनुमति देता है।    यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्केले की पूर्व छात्रा राधिका अग्रवाल ने X पर एक पोस्ट में अपना अनुभव शेयर किया, जो अब वायरल हो रहा है। उन्होंने लिखा, "अमेरिकी वीजा सिस्टम के साथ मेरा एक पूरा अनुभव रहा: H-1B लॉटरी में तीन बार चूक, इस दौरान एक क्रॉस-बॉर्डर लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप, आखिरकार L1 वीजा की मंजूरी और फिर 2019 में घर वापस लौटने का फैसला, उस L1 वीजा को छोड़ देना जिसे मैं इतनी शिद्दत से चाहती थी।" अग्रवाल ने स्वीकार किया कि वह अब भी पूरी तरह से यह नहीं बता पाती कि उन्होंने यह अवसर क्यों छोड़ा, लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि यह सही निर्णय था। उन्होंने कहा, "मैं आज भी पूरी तरह से यह नहीं समझा सकती कि मैंने 6 साल पहले घर वापस आने के लिए L1 क्यों छोड़ा, लेकिन मैं अब कह सकती हूं कि यह मेरा अब तक का सबसे बेहतरीन फैसला था।" उन्होंने अपने इस फैसले के 4 मुख्य कारण गिनाए-     भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम से सीखने का मौका।     जीवन के महत्वपूर्ण पलों में अपने माता-पिता के करीब रहना।     बाहरी जैसा महसूस किए बिना एक मजबूत समुदाय का हिस्सा बनना।     वीजा की स्थिति की चिंता किए बिना करियर में जोखिम लेने की आजादी। अग्रवाल ने उन लोगों को भी प्रोत्साहित किया जो भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने लिखा, "यदि आप नए H-1B घोषणा (या सामान्य माहौल) को देख रहे हैं और सोच रहे हैं कि 'क्या मुझे वापस चले जाना चाहिए?' तो यह आपके लिए एक संकेत है कि इसका जवाब 'हां' है।" पिछले छह वर्षों में अग्रवाल ने भारत में विशेष रूप से कंज्यूमर टेक और कंज्यूमर ब्रांड्स के क्षेत्र में संस्थापकों, ऑपरेटरों और निवेशकों का एक मजबूत नेटवर्क बनाया है। उन्होंने उन लोगों को अपनी पृष्ठभूमि के साथ उनसे संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जो भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह उन्हें अपने नेटवर्क के लोगों से जोड़कर उनके लिए यह बदलाव आसान बना देंगी। यूजर्स की प्रतिक्रियाएं उनकी पोस्ट पर कई उपयोगकर्ताओं ने प्रतिक्रिया दी। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “मैंने भी अपना L1A छोड़ा था, इसलिए मैं आपकी बात पूरी तरह समझ सकता हूं। लेकिन जब आप यह फैसला अपनी मर्जी से लेते हैं और जब आपको यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इसमें बहुत बड़ा अंतर होता है। बहुत से लोगों के लिए निराशा का कारण बाद वाली स्थिति होती है। उनमें से कुछ के पास लोन है, कुछ के बच्चे हैं, और कुछ रिश्ते में हैं। उन्हें फैसले लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।" एक अन्य उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की, "आपकी यात्रा बताती है कि करियर के विकल्पों को व्यक्तिगत मूल्यों और जीवन की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ना कितना महत्वपूर्ण है। यह देखना प्रेरणादायक है कि आपने घर वापस आकर कैसे तरक्की और समुदाय पाया।” एक उपयोगकर्ता ने H-1B धारकों के लिए दांव को बहुत ऊंचा बताया। उन्होंने कहा, "अधिकांश H-1B धारकों के लिए यह जीवन या मृत्यु का मामला है, क्योंकि अमेरिका में नौकरी खोने और घर लौटने के सामाजिक परिणाम बहुत अधिक हैं – परिवार और समाज से बहिष्कृत होने का डर। यह 100k डॉलर का मामला नहीं है, बल्कि उन्हें सामाजिक परिणामों से भी लड़ना पड़ता है।" H-1B वीजा की फीस यह सब ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B कार्यक्रम के आवेदनों पर 100,000 अमेरिकी डॉलर (88 लाख रुपये से अधिक) का वार्षिक शुल्क लगाने का आदेश दिया था। घोषणा में कहा गया था कि मौजूदा वीज़ा धारकों सहित कर्मचारियों को तब तक प्रवेश से वंचित रखा जाएगा जब तक कि उनके नियोक्ता यह राशि भुगतान नहीं करते। सार्वजनिक चिंता और भ्रम के बाद, व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि नया शुल्क केवल नए आवेदकों पर लागू होता है, वर्तमान धारकों पर नहीं।

बचत का बड़ा मौका: कल से शुरू हो रहा ‘बचत उत्सव’, पीएम मोदी का बड़ा बयान

नई दिल्ली  कल यानी सूर्योदय के साथ ही नेक्सट जनरेशन जीएसटी दरें लागू हो जाएंगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के नाम संबोधन में यह बात कही। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कल, नवरात्री के पहले दिन से ‘बचत उत्सव’ शुरू हो रहा है। इस बचत उत्सव से त्योहारों के सीजन में सबका मुंह मीठा होगा। पीएम ने अपने संबोधन में कहा है कि आज की जरूरतों और भविष्य को ध्यान में रखते नेक्सट जनरेशन रिफॅार्म लागू किया जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि इनकम टैक्स और जीएसटी में मिली छूट की वजह से अब लोग 2.5 लाख रुपये की सालाना बचत कर पाएंगे। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्वदेशी सामानों के प्रयोग पर भी जोर दिया। 99% सामान अब 5% टैक्स के दायरे में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि जो सामान पहले 12 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आते थे। उसमें से 99 प्रतिशत सामान अब 5 प्रतिशत के दायरे में आ गए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कल से हो रहे बदलावों से अब महिलाओं, युवाओं, मिडिल क्लास, नियो मिडिल क्लास को बड़ी बचत होगी। उनके लिए अपने सपनों को पूरा करना अब और आसान हो जाएगा। क्या-क्या हो रहा 22 सितंबर से सस्ता रसोई में इस्तेमाल के सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और उपकरणों से लेकर वाहन तक लगभग 375 वस्तुएं सोमवार यानी 22 सितंबर से सस्ती हो जाएंगी। घी, पनीर, मक्खन, नमकीन, केचप, जैम, सूखे मेवे, कॉफी और आइसक्रीम जैसी आम इस्तेमाल की चीजें और टीवी, एयर कंडीशनर (एसी), वॉशिंग मशीन जैसे महंगे उत्पाद भी सस्ते हो जाएंगे। सीमेंट होगा सस्ता अधिकांश दवाओं और फॉर्मूलेशन और ग्लूकोमीटर और डायग्नॉस्टिक किट जैसे मेडिकल उपकरणों पर जीएसटी दर को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे आम आदमी को दवाएं सस्ती मिलेंगी। सीमेंट पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे घर बनाने वालों को भी फायदा होगा। जीएसटी दर में कटौती से सबसे बड़ा फायदा वाहन खरीदारों को होगा, क्योंकि छोटी और बड़ी कारों पर कर दरें क्रमशः 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत कर दी गई हैं। अब रह जाएंगे सिर्फ 2 जीएसटी स्लैब कल 22 सितंबर से 4 की जगह अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब ही प्रभावी रहेंगे। बीते दिनों हुई जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब को समाप्त करने का फैसला किया गया था। कल से अब 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब ही रह जाएंगे। कुछ लक्जरी सामान और तम्बाकू प्रोडक्ट्स पर सरकार ने 40 प्रतिशत टैक्स लगाया है। देश के नाम अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश के लोगों से स्वदेशी चीजें अपनाने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने कहा कि रोजमर्रा की चीजों में बहुत सी चीजें विदेशी जुड़ गई हैं, हमें इनसे भी मुक्ति पानी होगी। मेड इन इंडिया सामान खरीदना होगा। जिसमें हमारे देश के नौजवानों की मेहनत लगी है। हमें हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाना है। हर दुकान को स्वदेशी से सजाना है। गर्व से कहो मैं स्वदेशी खरीदता हूं। गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में ट्रंप सरकार के आने के बाद व्यापारिक डील में परेशानी सामने आ रही है।

फिलीपींस में भारी विरोध प्रदर्शन: जनता ने सरकार के फैसलों के खिलाफ किया जोरदार विरोध

मनिला नेपाल के बाद अब फिलीपींस में भी सरकार के खिलाफ लोगों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त हो गया है। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। रविवार को फिलीपींस की राजधानी मनिला में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जताया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ इतनी अधिक थी कि पुलिस के लिए उनको संभाल पाना मुश्किल हो गया। फिलीपींस में क्यों सड़क पर उतरे लोग फिलीपींस में यह विरोध एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले के खिलाफ था, जिसमें सांसदों, सरकारी अधिकारियों और व्यापारियों पर आरोप है कि उन्होंने बाढ़-नियंत्रण परियोजनाओं में भारी घूसखोरी की और गरीब व आपदा-प्रवण देश में सरकारी धन को लूटा। किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए पुलिस और सेना को अलर्ट पर रखा गया है। मनिला के एक ऐतिहासिक पार्क और राजधानी क्षेत्र के मुख्य EDSA हाईवे के पास लोकतंत्र स्मारक के निकट हुए अलग-अलग प्रदर्शनों की सुरक्षा के लिए हज़ारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। अंतरराष्ट्रीय चेतावनी जारी फिलीपींस में भारी विरोध प्रदर्शन और हिंसा को देखते हुए अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के दूतावासों ने अपने नागरिकों को प्रदर्शन से दूर रहने की सलाह दी है। प्रदर्शनकारियों ने फिलीपींस के झंडे लहराए और एक बड़ा बैनर दिखाया जिस पर लिखा था, "अब और नहीं, बहुत हो गया, इन्हें जेल भेजो"। छात्र नेता अल्थिया ट्रिनिडाड ने कहा, "मुझे दुख होता है कि हम गरीबी में जीते हैं, हमारे घर और भविष्य बर्बाद हो जाते हैं, जबकि ये लोग हमारे टैक्स के पैसे से आलीशान कारें, विदेश यात्राएं और बड़ी व्यापारिक डील्स करते हैं।" बाढ़ परियोजनाओं में बड़ा घोटाला लोगों को आरोप है कि फिलीपींस की बाढ़ परियोजनाओं में बड़ा घोटाला किया गया। वह बुलाकान प्रांत की निवासी हैं, जो बाढ़ से प्रभावित इलाका है और जहा, बाढ़-नियंत्रण परियोजनाओं को या तो घटिया बताया गया है या कहा गया है कि वे वास्तव में कभी हुई ही नहीं। कैथोलिक बिशप सम्मेलन के प्रमुख कार्डिनल पाब्लो वर्जिलियो डेविड ने कहा, "हमारा उद्देश्य अस्थिरता नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मज़बूत करना है।" हिंसा न फैलाने की अपील कैथोलिक बिशप सम्मेलन के प्रमुख कार्डिनल पाब्लो वर्जिलियो डेविड ने लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और जवाबदेही की मांग करने की अपील की। आयोजकों ने कहा कि उनका ध्यान भ्रष्ट लोक निर्माण अधिकारियों, सांसदों और निर्माण कंपनियों के मालिकों को बेनकाब करने पर है। वे राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर से इस्तीफे की मांग नहीं कर रहे हैं। कैसे हुआ घोटाला? राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर ने जुलाई में अपने राष्ट्र संबोधन में इस बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था।इसके बाद उन्होंने एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया, जिसने उन 9,855 परियोजनाओं की जांच शुरू की, जिनकी कीमत 545 अरब पेसो (लगभग 9.5 अरब डॉलर) बताई गई थी। उन्होंने इस भ्रष्टाचार को “भयानक” करार दिया और लोक निर्माण सचिव का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। 

मराठा आंदोलन के बाद महाराष्ट्र में आरक्षण पर सुप्रिया सुले का सख्त रुख

मुंबई  महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के कुछ दिन बाद ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि आरक्षण केवल उन लोगों के लिए होना चाहिए जिन्हें इसकी असल में आवश्यकता है, उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति शिक्षित है और उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी है तो फिर उसके लिए आरक्षण की मांग करना उचित नहीं है. सुले ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उनका बच्चा मुंबई के अच्छे स्कूल में पढ़ रहा है तो शायद चंद्रपुर के किसी गरीब बच्चे को ऐसी शिक्षा की ज्यादा आवश्यकता है. सुप्रिया सुले ने लोगों से इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने की भी अपील की, उन्होंने कहा कि आइए हम सब इस पर बहस करें. हर मंच पर, कॉलेजों और समाज में इसे लेकर बातचीत होनी चाहिए. हमें जानना चाहिए कि आम जनता इस पर क्या सोचती है. आर्थिक आधार Vs. जाति आधार सुप्रिया सुले ने यह भी पूछा कि आरक्षण आर्थिक बैकग्राउंड पर आधारित होना चाहिए या जाति पर. इस दौरान दर्शकों के बीच सर्वे किया गया, जिसमें ज्यादातर लोग आर्थिक आधार पर आरक्षण के पक्ष में दिखाई दिए. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुले ने कहा कि उन्हें युवा पीढ़ी खासकर जेन जेड के साथ जुड़ाव महसूस होता है और यही उन्हें प्रेरित करता है कि वह हर हितधारक की राय जानें. मराठा आंदोलन के बाद की प्रतिक्रिया सुले की यह टिप्पणी महाराष्ट्र में हाल ही में हुए मराठा आरक्षण आंदोलन के कुछ दिनों बाद आई है. कार्यकर्ता मनोज जरांगे और उनके समर्थकों ने मराठाओं के लिए नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर पूरे महाराष्ट्र में बड़े विरोध प्रदर्शन किए थे. महाराष्ट्र सरकार ने उनकी ज्यादातर मांगें मान लीं, जिसमें योग्य मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र प्रदान करना भी शामिल था. इसके बाद इस महीने की शुरुआत में आंदोलन को वापस ले लिया गया, जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण लाभों का सास्ता साफ हो गया.  

VHP का विवादित फैसला: सिर्फ हिंदुओं को गरबा में प्रवेश, केंद्रीय मंत्री अठावले ने चेताया

नई दिल्ली  नवरात्रि शुरू होने से पहले ही विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के गरबा कार्यक्रमों को लेकर दिए गए बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. VHP ने आयोजकों को सलाह दी है कि केवल हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाए और पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार कार्ड चेक किए जाएं. इस पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सख्त आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि इस तरह के आह्वान से समाज में हिंसा फैल सकती है और त्योहार का माहौल खराब हो सकता है. विश्व हिंदू परिषद शनिवार को बयान जारी किया था, जिसमें आयोजकों से कहा गया था कि गरबा कार्यक्रमों में केवल हिंदुओं को ही आने दिया जाए. साथ ही यह भी कहा गया कि लव जिहाद जैसी घटनाओं से बचने के लिए आधार कार्ड की जांच होनी चाहिए. VHP ने कहा कि लव जिहाद जैसी घटनाएं न हों पाए इसलिए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाना आवश्यक है.   गरबा-डांडिया कार्यक्रमों पर नया विवाद नवरात्रि का त्योहार 22 सितंबर से शुरू हो रहा है और यह 1 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई नवरात्रि मंडलों में इस बार बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने गरबा और डांडिया कार्यक्रमों के आयोजकों से कहा है कि पंडालों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाए. संगठनों ने आयोजकों को कुछ नियम बताए हैं, जिसमें गरबा में आने वाले युवाओं से आधार कार्ड दिखाने को कहा जाए, प्रवेश से पहले सभी को तिलक लगवाकर देवी की पूजा करनी होगी, पंडाल के गेट पर वराह अवतार की तस्वीर रखी जाए और पूजा करने के बाद ही प्रवेश दिया जाना शामिल है. VHP और बजरंग दल का आरोप मुंबई के मालाड वेस्ट के डायमंड मार्किट के नवरात्रि उत्सव मंडल ने इस साल पूरे प्रांगण में ऐसे पोस्टर्स और बैनर्स लगाए है, जिसमें मुस्लिमों के बैन, लव जिहाद और हिन्दू वाहिनी के मैसेजेस लिखे हुए है. इन पोस्टर्स में साफ लिखा गया है कि लव जिहाद करने वाले मुस्लिमों की एंट्री बैन है, जो भी गरबा प्रेमी गरबा खेलने इस पंडाल में आएगा उसे एक तिलक लगाया जाएगा, मुख्यद्वार पर इस तिलक को गौमूत्र के साथ चंदन और कुमकुम में मिलाकर बनाया जाएगा. बजरंग दल और विहिप का आरोप है कि गैर हिंदू खासकर मुस्लिम युवक नकली नाम से गरबा में आते हैं और हिंदू लड़कियों से दोस्ती कर उन्हें लव जिहाद के जाल में फंसाते हैं. पकड़े जाने पर पुलिस को सौंपा जाएगा संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई मुस्लिम युवक गरबा में पकड़ा गया तो उसे तुरंत पुलिस को सौंपा जाएगा. गरबा नवरात्रि पंडाल के आसपास मटन और मीट की दुकानों को बंद रखने की मांग भी की है और कहा है कि मीट की दुकानें जबरन बंद कराएंगे. विपक्षी दलों का विरोध जहां कुछ लोग इन नियमों का समर्थन कर रहे हैं वहीं विपक्षी दलों और समाज के एक हिस्से ने इसे भेदभाव और विभाजन की राजनीति बताया है, उनका कहना है कि संविधान सबको समान अधिकार देता है, ऐसे में किसी धार्मिक कार्यक्रम में जाति-धर्म देखकर रोक लगाना गलत है. कई पंडाल समितियों ने पुलिस से अनुमति ली है, लेकिन अगर किसी जगह तनाव बढ़ा तो प्रशासन हस्तक्षेप कर सकता हैॉ. फिलहाल पुलिस और स्थानीय अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जा सके.  

नमो युवा रन 2025: CM धामी का जोरदार उद्घाटन, युवा उत्साह में चार चाँद

देहरादून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से शुरू हुए सेवा पखवाड़े के अंतर्गत, रविवार को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के घंटाघर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘नमो युवा रन' को हरी झंडी दिखाई और साथ ही प्रतिभागियों के साथ दौड़ में सम्मिलित होकर युवाओं का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर धामी ने कहा कि ‘नमो युवा रन' केवल एक खेल आयोजन नहीं है, बल्कि यह युवाओं में ऊर्जा, स्वास्थ्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना का प्रतीक है। इस प्रकार की गतिविधियां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किए गए ‘फिट इंडिया मूवमेंट' को नई दिशा और व्यापक जनभागीदारी प्रदान कर रही हैं। उन्होंने उपस्थित युवाओं का आह्वान किया कि वे स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से देशभर में सेवा, समर्पण और जनकल्याण की भावना को नई गति मिल रही है और ‘सेवा पखवाड़ा' के माध्यम से समाज के हर वर्ग को सकारात्मक योगदान देने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं की ऊर्जा राष्ट्रहित में और अधिक सार्थक होती है। इसमें अन्य गणमान्य व्यक्ति ने भाग लिया।