samacharsecretary.com

फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में जबरन घुसने की कोशिश, यात्रियों में फैली सनसनी

बेंगलुरु एअर इंडिया एक्सप्रेस की बेंगलुरु-वाराणसी फ्लाइट से एक सुरक्षा संबंधी घटना का मामला सामने आया है. सोमवार को फ्लाइट संख्या IX1086 सुबह 8 बजे बेंगलुरु से वाराणसी के लिए उड़ान भरती है. फ्लाइट जब मिड-एयर थी तो एक यात्री जिसे टॉयलेट जाना था वह कथित तौर पर जबरन कॉकपिट में घुसने की कोशिश की. जिससे हड़कंप मच गया. यात्री से लेकर केबिन क्रू तक पहले घबरा गए. हालांकि, मामले को फिर समय रहते सुलझा लिया गया.  अधिकारियों ने इस मामले की पुष्टि करते हुए जानकारी दी है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ कोई समझौता नहीं किया गया, मामले को संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है.  मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, एअर इंडिया एक्सप्रेस ने बयान जारी करते हुए कहा, 'हमें मालूम है कि मीडिया में खबरें चल रही हैं कि हमारी बेंगलुरु से वाराणसी आने वाली एक फ्लाइट में यात्री ने कॉकपिट में घुसने की कोशिश की, वह टॉयलेट जाना चाहता था.' एअर इंडिया एक्सप्रेस ने आगे कहा, 'हम लोगों को आश्वासन देने चाहते हैं कि हमारी सुरक्षा प्रणाली मज़बूत और इसमें कोई कमी नहीं की गई. वर्तमान में इस मामले की जांच की जा रही है.' फ्लाइट अपने तम समय सुबह 10 बजे अपने टाइम पर वाराणसी पहुंची. इस घटना की वजह से फ्लाइट में कोई विलंब नहीं हुआ.  यह ताजा मामला पिछले महीने जून 2024 में हुई एक समान घटना की याद दिलाती है, जब एक 25 साल के शख्स को कोझिकोड से बहरैन जा रही एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट के दरवाजे को खोलने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उस घटना के दौरान विमान को मुंबई में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी और आरोपी ने केबिन क्रू पर भी हमला किया था. इंडियन एविएशन के नियम क्या कहते हैं? इंडियन एविएशन के नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री जबरन कॉकपिट में घुसने की कोशिश करता है तो उसे सबसे गंभीर 'प्रोटोकॉल के विरुद्ध' माना जाता है. इस मामले में सजा दो साल से तक हो सकती है, साथ ही पूरे जीवन आपको नो-फ्लाई लिस्ट में भी डाला जा सकता है.

अरुणाचल को 5100 करोड़ की सौगात, पीएम मोदी ने नॉर्थईस्ट को अष्टलक्ष्मी करार दिया

ईटानगर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में 5,125 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत की है। इनमें शि-योमी जिले में दो प्रमुख पनबिजली परियोजनाओं और तवांग में एक सम्मेलन केंद्र शामिल हैं। उद्घाटन के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब अरुणाचल देश का पावर सेंटर बनने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि जिन परियोजनाओं की शुरुआत की गई वे डबल इंजन सरकार के दोहरे लाभ का उदाहरण हैं। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जिन इलाकों को वह पिछड़ा कहकर छोड़ देती थी, आज उनका ही विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्य हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है। तवांग मठ से नामसाई पैगोडा तक अरुणाचल प्रदेश शांति और सद्भाव की भूमि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद 70 से अधिक बार पूर्वोत्तर का दौरा किया है, केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान इस क्षेत्र की अनदेखी की गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश को पिछले 10 साल में केंद्र से एक लाख करोड़ रुपये मिले, जो कांग्रेस शासन के दौरान मिले धन से 16 गुना ज़्यादा हैं। मुझे पता था कि दिल्ली में बैठकर पूर्वोत्तर का विकास नहीं हो सकता, इसलिए मंत्रियों और अधिकारियों को कई बार इस क्षेत्र में भेजा। पीएम मोदी ने कहा, जहां काम करना मुश्किल होता था, उन्हें कांग्रेस पिछड़ा कहकर भूल जाती थी। ऐसा करके कांग्रेस अपनी नाकामियों को छिपा ले जाती थी। यही कारण है कि लोगों का निरंतर पलायन हुआ। हमारी सरकार ने इस अप्रोच को बदल दिया। जिनको कांग्रेस पिछड़ा जिला कहती थी, हमने उन्हें ऐस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट बनाया और विकास को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा, बॉर्डर के जिन गांवों को कांग्रेस लास्ट विलेज कहती थी, उन्हें हमने फर्स्ट विलेज मांगा। उन गांवों में विकास की नई रफ्तार है। बाइब्रेंट विलेज की सफलता ने लोगों का जीवन आसान बनाया है। अरुणाचल प्रदेश के गांवों में भी बिजली और इंटरनेट की सुविधाएं पहुंची हैं। पहले बॉर्डर से शहरों की ओर पलायन होता था लेकिन अब बॉर्डर के गांव टूरिजम के नए केंद्र बन गए हैं। जैसे-जैसे नए इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ रही है, वैसे-वैसे यहां टूरिजम बढ़ रहा है। बीते दशक में यहां टूरिस्ट की संख्या में दो गुनी वृद्धि हुई है। अरुणाचल का सामर्थ्य कल्चर से जुड़े टूरिजम से भी ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने कहा, दुनिया में कनसर्ट टूरिजम की भी बाढ़ आ रही है। तवांग में बनने जा रहा आधुनिक कन्वेंशन सेंटर अरुणाचल के टूरिजम में एक नया आयाम जोड़ेगा। इसे वाइब्रेंट विलेज अभियान से भी बहुत मदद मिलेगी। यह अभियान मील का पत्थर शाबित हो रहा है। आज दिल्ली और ईटानगर दोनों जगह बीजेपी सरकार है। केंद्र और राज्य दोनों की ऊर्जा विकास में लग रही है। कांग्रेस पर करारा हमला बोलेते हुए पीएम मोदी ने कहा, महंगाई बढ़ रही थी, चारों ओर घोटाले हो रहे थे और तब भी कांग्रेस सरकार टैक्स का बोझ बढ़ाती जा रही थी। उस समय दो लाख की कमाई पर भी इनकम टैक्स चुकाना पड़ता था। उस समय की सरकार बच्चों की टॉफी पर भी 20 पर्सेंट से ज्यादा टैक्स लेती थी। तब मैंने कहा था कि मैं आपकी कमाई और बचत दोनों को बढ़ाने का काम करूंगा। बीते सालों हमने 12 लाख तक की आय पर इनकम टैक्स जीरो कर दिया और आज से जीएसटी को भी हमने सिर्फ दो स्लैब तक सीमित कर दिया है। 5 फीसदी और 18 फीसदी। बहुत सारी चीजें टैक्स फ्री हो गई हैं। आप आराम से अब अपना नया घर बना सकते हैं। मोटरबाइक खरीदना है, बाहर खाने-पीने जाना है, घूमने जाना है, यह सब पहले से सस्ता हो गया। यह जीएसटी बचत उत्सव बहुत यादगार बनने वाला है। हमें संकल्प लेना है कि हम स्वदेशी अपनाएं। खरीदें वही जो देश में बना हो, बेचें वही जो देश में बना हो। गर्व से कहें कि यह स्वदेशी है।

गुरपतवंत पन्नू के प्रमुख सहयोगी की गिरफ्तारी, निज्जर के बाद बढ़ाई थी सक्रियता

ओटावा  भारत विरोधी खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू का खास पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। खबर है कि कनाडा पुलिस ने उसके सबसे बड़े सहयोगियों में से एक इंदरजीत सिंह गोसाल को गिरफ्तार किया है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह गिरफ्तारी किस मामले में हुई है। इससे पहले नवंबर 2024 में भी हिंदू मंदिर में हुई हिंसा से जुड़े केस में गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोसाल को SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस के फाउंडर गुरपतवंत सिंह पन्नू का राइट हैंड माना जाता है। खबर है कि हरदीप सिंह निज्जर के बाद गोसाल ही कनाडा में एसएफजे के बड़े मोहरे के रूप में काम कर रहा था। निज्जर की जून 2023 में कनाडा के सरी में हत्या कर दी गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की अगुवाई वाली सरकार ने इस कांड के तार भारत से जोड़ने की कोशिश की थी। कनाडा में रिपोर्ट ने मचाई थी खलबली सितंबर की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कम से कम दो खालिस्तानी चरमपंथी समूहों को देश के भीतर से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। ‘2025 असेस्मेंट ऑफ मनी लॉन्डरिंग एंड टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क इन कनाडा’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कनाडा के अंदर से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले खालिस्तानी चरमपंथी समूहों की पहचान बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के रूप में की गई। ओटावा की खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 1980 के दशक के मध्य से कनाडा में राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक चरमपंथ का खतरा खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा भारत के पंजाब में खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश के माध्यम से उत्पन्न हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में आपराधिक संहिता के तहत सूचीबद्ध और राजनीति से प्रेरित हिंसक चरमपंथ में शामिल कई आतंकवादी संगठन जैसे हमास, हिज्बुल्ला और खालिस्तानी हिंसक चरमपंथी समूह बब्बर खालसा इंटरनेशनल तथा इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन कनाडा के अंदर से ही वित्तीय सहायता प्राप्त करते पाए गए हैं।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तिरुनेलवेली में 1100 एकड़ जमीन अब वक्फ प्रॉपर्टी नहीं

तिरुनेलवेली तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में एक मस्‍जि‍द गांव की 1,100 एकड़ जमीन पर दावा ठोक रही थी. कह रही थी क‍ि यह वक्‍फ प्रॉपर्टी है और इसे सिर्फ मुस्‍ल‍िम धर्म के कार्यों में इस्‍तेमाल क‍िया जाना चाह‍िए. मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो मद्रास हाईकोर्ट ने एक झटके में खार‍िज कर द‍िया. साफ कहा क‍ि वक्‍फ प्रॉपर्टी सिर्फ 2.34 एकड़ जमीन है, जो 1712 में मदुराई सामस्थानम के तत्कालीन शासक ने दान की थी. कांस्य पत्रक पर इसके सबूत हैं, लेकिन बाकी जमीन बिल्‍कुल मस्‍ज‍िद की नहीं है. इस मामले में मस्जिद ने दावा किया था कि यह विशाल क्षेत्र वक्फ संपत्ति में आता है और इसका उपयोग धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए. मस्जिद की ओर से यह तर्क दिया गया था कि पूरे 1,100 एकड़ क्षेत्र पर उनके धार्मिक अधिकार हैं. इसके विपरीत, जमीन पर अधिकार रखने वाले अन्य पक्षों ने इसे विवादित बताया और अदालत में चुनौती दी. मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की गहन सुनवाई के बाद इतिहास और दस्तावेजों को आधार मानते हुए निर्णय दिया. अदालत ने कहा कि जब इतिहास कांस्य पत्रों में बोलता है, तो झूठे दावे स्वतः ही पिघल जाते हैं. 1712 का कांस्य पत्रक स्पष्ट रूप से दिखाता है कि केवल 2.34 एकड़ जमीन का ही मस्जिद को अधिकार है और बाकी भूमि किसी अन्य पक्ष की है या सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई थी. मस्‍ज‍िद के ल‍िए झटका अदालत ने इस फैसले में यह भी दिखाया कि वक्फ संपत्ति की वास्तविकता और इसके कानूनी दावे को इतिहास और प्रमाण पत्रों के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए. इस प्रकार, बड़े दावे और आरोपों के बावजूद न्यायालय ने ऐतिहासिक दस्तावेजों को सर्वोच्च माना. मस्जिद के लिए यह फैसला एक झटका है, क्योंकि उसका दावा जमीन के बड़े हिस्से पर था. अब मस्जिद केवल उसी जमीन का उपयोग कर सकती है, जो 1712 में दिये गए मण्यम के तहत प्रमाणित है. अदालत के फैसले से यह भी संदेश गया कि धार्मिक संस्थाओं द्वारा किए गए वक्फ दावे कानूनी और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर ही मान्य होंगे. प्रमाणों के आगे नहीं ट‍िक पाया विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वक्फ संपत्ति और ऐतिहासिक दस्तावेजों के महत्व को उजागर करता है. यह दिखाता है कि लंबे समय से किए जा रहे दावे भी कानूनी प्रक्रिया और प्रमाणों के सामने टिक नहीं पाते. इस फैसले के बाद तिरुनेलवेली जिले में भूमि विवादों पर भी प्रभाव पड़ सकता है. अन्य वक्फ संस्थाओं और धार्मिक संगठनों को यह संकेत मिलेगा कि उनके दावे के लिए ऐतिहासिक प्रमाण और कानूनी दस्तावेज अनिवार्य हैं. झूठे दावे सच नहीं हो जाते मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला वक्फ संपत्ति के मामलों में इतिहास और दस्तावेजों की अहमियत को रेखांकित करता है और भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायालय के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन कर सकता है. अदालत ने कहा कि झूठे दावे और अतिशयोक्ति की कोई जगह नहीं है, और प्रमाणों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा। यह निर्णय धार्मिक संस्थाओं के लिए एक चेतावनी भी है कि वे अपने दावों में ईमानदारी और सटीकता दिखाएं.

हिमाचल के मंत्री ने रचाई दूसरी शादी, दुल्हन अमरीन का प्रोफेशन जानकर चौंक जाएंगे

 चंडीगढ़ हिमाचल प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री और छह बार के मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने शादी कर ली है। सोमवार को चंडीगढ़ में वह अमरीन शेखों के साथ परिणय सूत्र में बंधे। विक्रमादित्य की यह दूसरी शादी है। दुल्हन अमरीन शेखों पंजाब यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने अंग्रेजी और मनोविज्ञान में डबल मास्टर डिग्री ली है। साथ ही मनोविज्ञान में पीएचडी भी की है। वह विक्रमादित्य सिंह की पुरानी दोस्त हैं। शेखों भी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करक चुकी हैं। अमरीन सरदार जोतिंदर सिंह शेखों और ओपिंदर कौर की बेटी हैं। चंडीगढ़ में हुई शादी 36 साल के विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे वीरभद्र सिंह की विरासत के मालिक हैं। विक्रमादित्य सिंह इस समय शिमला ग्रामीण सीट से विधायक और सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में ताकतवर मंत्री हैं। पीडब्ल्यूडी के अलावा वह शहरी विकास मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। 2024 में वह मंडी लोकसभा सीट पर कंगना रनौत के खिलाफ चुनाव लड़े थे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। विक्रमादित्य सिंह की पहली शादी 2019 में हुई थी। विक्रमादित्य सिंह ने तब राजस्थान के आमेट की राजकुमारी सुदर्शना चुंडावत से शादी की थी। लेकिन दोनों के बीच रिश्ता अधिक लंबा नहीं चला। मतभेद के बाद 2024 में दोनों ने संबंध खत्म कर लिया।

एक क्लिक में पाएं PAN कार्ड की डुप्लीकेट कॉपी, देखें स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

नई दिल्ली कोई भी जरूरी डॉक्यूमेंट अगर खो जाए, तो उसे फिर से बनवाने में बहुत परेशानी होती है। हालांकि Pan Card के साथ ऐसा नहीं है। अगर आपका Pan Card भी खो गया है या घर में कहीं इधर-उधर हो जाने की वजह से ऐन मौके पर मिल नहीं रहा है, तो आप घर बैठे एक क्लिक में अपना पैन कार्ड बनवा सकते हैं। इसका प्रोसेस बेहद सिंपल है और आज हम आपको इसी के बारे में डिटेल में बताने वाले हैं कि आखिर आप किस तरह से अपना डुप्लीकेट पैन कार्ड बनवा सकते हैं। कैसे मिलेगा डुप्लीकेट Pan Card? अगर आप किसी भी वजह से तुरंत अपना डुप्लीकेट पैन कार्ड पाना चाहते हैं, तो बता दें कि इसके तीन तरीके हैं। तीनों के बारे में डिटेल में समझने से पहले बता दें कि इन तरीकों को फॉलो करके आप अपने पैन कार्ड की सॉफ्ट कॉपी मिल जाएगी और यह किसी भी सरकारी काम में इस्तेमाल करने के लिए वैलिड होगी। सॉफ्ट कॉपी होने की वजह से आपको इसे पाने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और अगर Pan Card से जुड़ा आपका कोई काम अटका हुआ है, तो आप उसे तुरंत पूरा करवा पाएंगे। अगर NSDL के जरिए बना है Pan Card अगर आपका पैन कार्ड NSDL के जरिए बना है, तो आपको Google पर NSDL Pan Card Download सर्च करना होगा। पहले लिंक पर क्लिक करने के बाद पैन कार्ड डाउनलोड करने के लिए दिए सिस्टम में Pan को चुन लें। इसका मतलब है कि आप पैन नंबर उपलब्ध करवा कर अपना डुप्लीकेट पैन कार्ड डाउनलोड करना चाहते हैं। इसके बाद आपको अपना पैन नंबर, आधार नंबर दी गई जगहों में भरना होगा। आपके पैन के साथ लिंक्स फोन नंहर और मेल आईडी आपको अगले स्टेप में दिखाई देंगे। जिस पर भी आप ओटीपी पाना चाहते हैं, उसे चुन कर ओटीपी का अनुरोध कर दें। ओटीपी डालने के बाद आपको 8.26 रुपये भरने होंगे। इसके बाद आपका पैन कार्ड आप आसानी से डाउनलोड कर पाएंगे। अगर UTI के जरिए बना है Pan Card अगर आपका पैन कार्ड UTI के जरिए बना है, तो गूगल पर UTI PAN DOWNLOAD सर्च करके पहले लिंक पर चले जाएं। इसके बाद का प्रोसेस काफी हद तक ऊपर बताए प्रोसेस जैसा ही है। पहले लिंक पर जाने के बाद आपको Download e-Pan पर टैप करना होगा। इसके बाद अपना पैन नंबर आधार नंबर और ओटीपी की डिटेल्स भरकर आप अपना ई-पैन कार्ड पा सकेंगे। अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से बना है Pan Card अगर आपका पैन कार्ड इनकम टैक्स की वेबसाइट से बना है, तो इनकम टैक्स की साइट पर जाकर Instant E Pan पर टैप करें। वहां अपने पैन और आधार नंबर की डिटेल्स देकर आप आसानी से अपना पैन कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इस तरह आपको अपने पैन कार्ड की सॉफ्ट कॉपी आसानी से मिल जाएगी लेकिन अगर आप पीवीसी पैन कार्ड बनवाना चाहते हैं, तो इस लिंक पर जाकर पूरा प्रोसेस समझ सकते हैं।  

बाढ़ से उबरते ही सूखे की मार! देहरादून के लोग अब हर बूंद पानी के लिए तरस रहे

देहरादून कुछ दिन पहले बाढ़ से त्राहीमाम कर रहे देहरादून में अब पानी का 'सूखा' पड़ गया है। आपदा में नदी व स्रोतों से शहर के लिए आने वाली पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होकर बहने के कारण अभी भी करीब एक लाख की आबादी के बीच पेयजल समस्या बरकरार है। छह दिन से लगातार पेयजल आपूर्ति ठप होने से लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। हाल यह है कि कई इलाकों में लोगों को नहाने और खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं मिल रहा और वह बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। बीते सोमवार-मंगलवार मध्य रात को देहरादून में आई आपदा से शहर में 2.35 लाख की आबादी के लिए बांदल नदी, बीजापुर कैनाल शिखर फाल, ग्लोगी फाल, कार्लीगार्ड स्रोत, केलाघाट स्रोत और कोल्हूखेत स्रोत से आने वाली विभिन्न पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिससे शहर के 47 हजार से अधिक घरों में पेयजल संकट खड़ा हो गया था। हालांकि बारिश थमने के बाद जल संस्थान ने पाइपलाइनों के पुनर्स्थापन के कार्य शुरू कर दिए हैं। इससे बांदल नदी से दिलाराम चौक और आसपास के इलाकों की आपूर्ति एक समय के लिए बहाल हो गई है। ग्लोगी फाल से पुरकुल और आसपास के इलाकों को जाने वाला पानी भी एक समय के लिए शुरू हो गया है। अन्य स्रोतों से आने वाली आपूर्ति में मरम्मत कार्य चल रहा है। जल्द ही उनकी भी आपूर्ति शुरू होगी। व्यवस्थित रूप से नहीं बंट रहे टैंकर पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने पर जल संस्थान टैंकर से सभी इलाकों में पानी दे रहा है। लेकिन टैंकरों की कमी के चलते वह व्यवस्थित रूप से नहीं बंट पा रहे। जल संस्थान रोजाना प्रभावित इलाकों में टैंकरों के 500 से अधिक चक्कर लगवा रहा है। लेकिन, इसके बावजूद बहुत से लोगों को टैंकर नहीं मिल रहा।मजबूरी में उन्हें फिलिंग स्टेशन पर पहुंचकर खुद टैंकर ले जाना पड़ रहा है। इन इलाकों में समस्या अभी भी बरकरार दून विहार, नयागांव, आर्य नगर, साकेत कालोनी, डीएल रोड, पुरुकुल, चंद्रोटी, हाथी बड़कला, शहंशाही, पुराना राजपुर, डाकपट्टी, जाखन, बाडीगार्ड, अनारवाला, कुठालगेट और आसपास के इलाकों में अभी पेयजल आपूर्ति की भारी किल्लत है। दिलाराम, झंडा बाजार, कालीदास रोड, इंदिरा विहार, पलटन बाजार, चकराता रोड, इसी रोड, ओल्ड डालनवाला, बकरालवाला, मालसी, सिनोला, किरसाली, धोरण, कालागांव, वीर गब्बर सिंह बस्ती, बारीघाट, बामण गांव, खालागांव, भगवंतपुर, सलान गांव, उतड़ी गांव आदि आसपास के इलाकों में एक समय के लिए आपूर्ति शुरू हो गई है।  

राज्य चुनाव अधिकारियों को चुनाव आयोग ने दी SIR तैयारी की अंतिम तारीख

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने अपने राज्य चुनाव अधिकारियों को 30 सितंबर तक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए तैयार रहने को कहा है। चुनाव आयोग के इस निर्देश से साफ है कि अगले महीने से पूरे देश में मतदाताओं के सत्यापन और मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। चुनाव आयोग अक्टूबर-नवंबर की शुरुआत में मतदाता सूची की सफाई का काम शुरू कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारियों (सीईओ) के एक सम्मेलन में, चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें अगले 10 से 15 दिनों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए तैयार रहने को कहा था। लेकिन अधिक स्पष्टता के लिए, 30 सितंबर की समय सीमा तय की गई थी। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिख रही लिस्ट सीईओ को निर्देश दिया गया है कि वे अपने राज्यों की मतदाता सूचियां तैयार रखें। ये वोटर लिस्ट पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित हुई थीं। कई राज्य सीईओ ने अपनी पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूचियां अपनी वेबसाइटों पर पहले ही डाल दी हैं। दिल्ली के सीईओ की वेबसाइट पर 2008 की मतदाता सूचियां हैं, जब राष्ट्रीय राजधानी में आखिरी बार गहन पुनरीक्षण हुआ था। उत्तराखंड में, पिछली एसआईआर 2006 में हुई थी और उस वर्ष की मतदाता सूची अब राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध है। बिहार के बाद पूरे देश में SIR राज्यों में अंतिम एसआईआर ही कट-ऑफ तिथि होगी, ठीक उसी तरह जैसे बिहार की 2003 की मतदाता सूची का उपयोग चुनाव आयोग द्वारा गहन पुनरीक्षण के लिए किया जा रहा है। अधिकांश राज्यों में अंतिम एसआईआर 2002 और 2004 के बीच हुई थी और पिछले गहन पुनरीक्षण के अनुसार वर्तमान मतदाताओं का मिलान लगभग पूरा हो चुका है। चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार के बाद, पूरे देश में एसआईआर किया जाएगा। इन राज्यों में अगले साल चुनाव असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं। इस गहन पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जन्म स्थान की जांच करके विदेशी अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना है। यह कदम बांग्लादेश और म्यांमार सहित विभिन्न राज्यों में अवैध विदेशी प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। 

मां वैष्णो देवी नवरात्रि उत्सव: भक्तों के लिए शानदार इंतजाम और रोशनी से जगमगाए मंदिर

कटड़ा   कल से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं, ऐसे में कटरा प्रशासन द्वारा भवन को फूलों से सजाया जा रहा है। नवरात्रों के दौरान मां भगवती के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को बता दें कि हालांकि इस बार नवरात्र समारोह नहीं हो रहा है, पर वैष्णो देवी भवन पर होने वाले कार्यक्रम हर वर्ष की तरह होंगे।  बता दें कि इससे पहले भी 2024 के दौरान मॉडल कोड आफ कंडक्ट होने के चलते नवरात्र महोत्सव को प्रशासन द्वारा स्थगित किया गया था। गौरतलब है कि यह चौथी बार है जब इसका आयोजन नहीं किया जाएगा। इससे पहले साल 2014 में कश्मीर में आई बाढ़ , 2020 में कोरोना महामारी और 2024 में आम चुनावों के कारण इसे सादगी से मनाया गया था। इस वर्ष 2025 में बारिश और प्राकृतिक आपदा को इस का मुख्य कारण बताया जा रहा है।  

यात्रियों के लिए खुशखबरी: नेपाल एयरलाइंस ने काठमांडू-चीन रूट पर कम किराए वाली सीधी फ्लाइट शुरू की

काठमांडू  नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी ने राजधानी काठमांडू से चीन के ग्वांगझू के लिए बृहस्पतिवार से सीधी उड़ानें शुरू करने की रविवार को घोषणा की। नेपाल एयरलाइंस कॉर्पोरेशन (एनएसी) के प्रवक्ता मनोज कुमार शाह ने बताया कि पहली बार काठमांडू से गुआंगझू के बीच उड़ान सेवा शुरू करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अधिकारी ने बताया कि एनएसी इस मार्ग पर सप्ताह में तीन उड़ानें संचालित करेगा। पहली उड़ान बृहस्पतिवार और दूसरी 28 सितंबर को निर्धारित है। एनएसी ने बताया कि इसके बाद हर रविवार, मंगलवार और शनिवार को ग्वांगझू के लिए सीधी उड़ानें होंगी। एनएसी ने काठमांडू से ग्वांगझू का एकतरफ़ा किराया 30,000 नेपाली रुपये और वापसी का किराया 50,000 नेपाली रुपये तय किया है। हिमालय एयरलाइंस भी नेपाल से इस मार्ग पर नियमित उड़ानें संचालित कर रही है, जबकि चीनी एयरलाइन कंपनी चाइना सदर्न भी ग्वांगझू-काठमांडू मार्ग पर नियमित उड़ानों का संचालन कर रही है।