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भारत और कतर की बढ़ती पकड़ से घबराए तुर्की-पाक, इस्लामी नेतृत्व पर मंडरा रहा टकराव

काबुल  दक्षिण एशिया और इस्लामी जगत में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारत और कतर ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिसने न केवल अफगानिस्तान बल्कि पूरे मुस्लिम वर्ल्ड में नए संकेत दे दिए हैं. भारत सरकार ने मंगलवार को काबुल में अपने मिशन को अपग्रेड कर फिर से ‘दूतावास’ का दर्जा देने की घोषणा की है. वहीं कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने अफगानिस्तान में मिर्दिफ अली अल काशूती को अफगानिस्तान का नया राजदूत नियुक्त किया है. ये दोनों फैसले ऐसे समय में आए हैं, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच अगली वार्ता तुर्की में होने वाली है और इस्लामी जियो पॉलिटिक्स में नए शक्ति समीकरण बनते दिख रहे हैं. भारत ने काबुल में खोला दूतावास भारत सरकार ने अफगानिस्तान में काबुल स्थित अपने तकनीकी मिशन को तत्काल प्रभाव से दूतावास में अपग्रेड करने का फैसला लिया है. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस महीने अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के भारत दौरे के दौरान काबुल में भारतीय तकनीकी मिशन को दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की थी. मुत्तकी 9 से 16 अक्टूबर तक भारत में थे. इस दौरान वह दक्षिण एशिया के सबसे प्रभावशाली इस्लामिक इदारे ‘दारुल उलूम देवबंद’ का भी दौरा किया था. तालिबान की वैचारिक जड़ें जो प्रतीकात्मक रूप से इस भारतीय इदारे से भी जुड़ी मानी जाती हैं. मुत्तकी के दौरे के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें अफगानिस्तान में भारत की विकास और मानवीय सहायता की भूमिका भी शामिल थी. वहीं अब अफगानिस्तान में दोबारा से दूतावास शुरू करने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह फैसला भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को ‘हर क्षेत्र में और गहराई तक’ ले जाने की दिशा में एक अहम कदम है. भारत पहले ही अफगानिस्तान में कई विकास परियोजनाओं और स्वास्थ्य सहायता कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है और अब दूतावास के दोबारा एक्टिव होने से ये संबंध औपचारिक रूप से और मजबूत होंगे. कतर ने काबुल में नियुक्त किया पूर्ण राजदूत उधर, कतर ने भी इस्लामी कूटनीति में अपनी पकड़ और भूमिका को और मज़बूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इस खाड़ी देश ने मिर्दिफ अल काशूती को अफगानिस्तान में पूर्ण राजदूत बनाने का फैसला किया है. वह पिछले तीन वर्षों से काबुल स्थित कतर दूतावास में वरिष्ठ राजनयिक के रूप में काम कर रहे थे. कतर ने यह नियुक्ति ऐसे वक्त पर की है जब वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, और दोनों देशों की अगली बैठक तुर्किये में होने वाली है. इस्लामिक वर्ल्ड की धुरी नहीं तुर्की-पाकिस्तान एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत और कतर के ये कदम एक बड़े भू-राजनीतिक संदेश का हिस्सा हैं. यह संकेत है कि इस्लामी वर्ल्ड की धुरी अब सिर्फ तुर्की या पाकिस्तान के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी. तुर्की खुद को इस्लामी दुनिया का नेता बनाने की कोशिश करता रहा है. वहीं पाकिस्तान अफगानिस्तान में अपनी प्रभावशाली भूमिका बनाए रखना चाहता है. हालांकि भारत और कतर की बढ़ती उपस्थिति से इन दोनों देशों का चिंतित होना लाजमी माना जा रहा है. भारत ने जहां मुत्तकी के दौरे और देवबंद जैसी इस्लामी संस्था के माध्यम से एक ‘धार्मिक संवाद की कूटनीति’ को आगे बढ़ाया है. वहीं कतर ने अपनी ‘मध्यस्थ डिप्लोमेसी’ के जरिये इस्लामिक देशों में तुर्की की बढ़ती दखलअंदाजी को संतुलित करने की कोशिश की है. यह दोनों घटनाएं बताती हैं कि दक्षिण एशिया में इस्लामी विश्व की नई धुरी बन रही है, जिसमें भारत, कतर और अफगानिस्तान की भूमिका अहम होती जा रही है. ऐसे में तुर्की और पाकिस्तान के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि ‘खलीफा बनने की कोशिश’ के दिन अब आसान नहीं रहे.  

चीन को नहीं रास आई भारत की प्रगति, WTO में दर्ज कराई आपत्ति

नई दिल्ली आधुनिक भारत की अर्थव्‍यवस्‍था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्‍यवस्‍था बन चुकी है, क्‍योंकि देश की घरेलू खपत अन्‍य देशों की तुलना में ज्‍यादा है. एग्रीकल्‍चर हो या ईवी, भारत हर सेक्‍टर्स में तरक्‍की के नए मुकाम हासिल कर रहा है. ईवी प्रोडक्‍ट्स के मामले में भारत घरेलू निर्माण पर फोकस है. यही बात ड्रैगन को पसंद नहीं आ रही है, जिस कारण उसने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के पास शिकायत कर डाली है. चीन का आरोप है कि भारत की इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी सब्सिडी योजनाएं आयात की तुलना में घरेलू उत्‍पादों को प्राथमिकता दे रही हैं, जो वैश्विक व्‍यापार नियमों का उल्लंघन करती हैं. चीन का कहना है कि भारत के विशाल ईवी बाजार तक पहुंच चाहने वाले चीनी वाहन निर्माताओं को संभवतः दरकिनार किया जा रहा है.  चीन ने भारत से रखी ये मांग WTO के एक कम्युनिकेशन लेटर के मुताबिक, बीजिंग ने WTO सेटलमेंट मैकनिज्‍म के तहत तीन भारतीय कार्यक्रमों के तहत सेटमेंट करने की रिक्‍वेस्‍ट की है. चीन ने उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, ऑटोमोबाइल और ऑटो उद्योग के लिए पीएलआई योजना, और इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक अलग पॉलिसी की मांग रखी है.  चीन ने भारत पर और क्‍या लगाए आरोप  चीन का दावा है कि ये उपाय घरेलू स्‍तर पर बन रहे वस्‍तुओं के उपयोग पर 'पात्रता और प्रोत्साहनों के वितरण की शर्तें' लगाते हैं, जो चीनी उत्‍पादों के साथ भेदभाव है. चीन का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध सब्सिडी और प्रतिपूरक उपायों (SCM) समझौते, टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौते (गैट) 1994, और व्यापार-संबंधी निवेश उपायों पर समझौते (ट्रिम्स) के तहत भारत के दायित्वों का उल्लंघन करते हैं.  WTO फाइलिंग में कहा गया है कि ये उपाय चीन को मिलने वाले लाभों को रद्द या कम कर देते हैं. चीन विवाद को सुलझाने के पहले कदम के रूप में परामर्श के लिए एक डेट की मांग कर रहा है. भारत के इन योजनाओं का क्‍या है मतलब?  भारत के प्रोत्साहन कार्यक्रमों का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करते हुए स्थानीय इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उत्पादन को बढ़ावा देना है. मई 2021 में शुरू की गई PLI-ACC योजना में 50 GWh घरेलू बैटरी क्षमता विकसित करने के लिए ₹18,100 करोड़ का परिव्यय शामिल है. सितंबर 2021 में ₹25,938 करोड़ की लागत से स्वीकृत ऑटो-केंद्रित PLI योजना का लक्ष्य ऑटोमोटिव टेक्‍नोलॉजी का घरेलू उत्पादन और रोजगार पैदा करना है.  भारत का बढ़ा व्‍यापार घाटा  लेकिन BYD जैसे चीनी ईवी निर्माताओं को यूरोपीय संघ में घटते मुनाफे और विनियामक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें 27% टैरिफ भी शामिल है. हालांकि फिर भी चीन का आयात बढ़ा है. 2024-25 में चीन को भारत के निर्यात में 14.5% की गिरावट के आई, लेकिन चीन से आयात में 11.5% की वृद्धि हुई है. इससे बीजिंग के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 99.2 बिलियन डॉलर हो गया. 

दिवाली की बधाई पर ट्रंप को मोदी का जवाब –दो लोकतंत्र कर रहे हैं दुनिया का नेतृत्व

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए दिवाली पर बधाई संदेश देने के लिए शुक्रिया अदा किया है. पिछले दिनों दिवाली के मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को फोन करके बधाई दी थी. नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप, आपके फ़ोन कॉल और दिवाली की हार्दिक शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद. प्रकाश के इस पर्व पर, हमारे दो महान लोकतंत्र दुनिया को उम्मीद की रोशनी दिखाते रहें और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट रहें." ट्रंप ने दिवाली पर दी थी बधाई… व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रोशनी के त्योहार दिवाली मनाने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "आज, मैं दिवाली, 'रोशनी का त्योहार' मनाने वाले हर अमेरिकी को अपनी शुभकामनाएं देता हूं." ट्रंप ने आगे कहा, "कई अमेरिकियों के लिए, दिवाली अंधकार पर प्रकाश की विजय का एक शाश्वत स्मरण है. यह परिवारों और दोस्तों को एक साथ लाकर समुदाय का जश्न मनाने, उम्मीद से ताकत हासिल करने और नवीनीकरण की स्थायी भावना को अपनाने का भी वक्त है." उन्होंने आगे कहा, "लाखों नागरिक दीये और लालटेन जलाते हैं, और हम इस शाश्वत सत्य पर प्रसन्न होते हैं कि अच्छाई की हमेशा बुराई पर विजय होती है. दिवाली मनाने वाले प्रत्येक अमेरिकी के लिए, ईश्वर करे कि यह त्यौहार स्थायी शांति, समृद्धि, आशा और शांति लाए."

ट्रंप के सपनों को झटका! चीन ने उतारा हाई-टेक ‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम

चीन अमेरिका महज सपने बुन रहा था, लेकिन चीन ने उसे हकीकत का जामा पहना दिया। यूं कहें तो पूरी दुनिया ने एक ऐसी अभूतपूर्व शक्ति परिवर्तन का साक्ष्य देखा, जिसकी कोई कल्पना भी न कर सकता। दशकों से अमेरिका यह सोच रहा था कि वह पृथ्वी को मिसाइल रक्षा के एक नए युग में ले जाएगा। मानवता को तबाही से बचाने वाला एक अंतरिक्ष-आधारित किलेबंदी तैयार करेगा। लेकिन वाशिंगटन अभी-अभी योजनाएं गढ़ ही रहा था कि बीजिंग ने इसे साकार कर दिखाया। और दुनिया को स्पष्ट संदेश दे दिया कि तय कर लो, सुपरपावर कौन है? दरअसल चीन ने 'बिग डेटा प्लेटफॉर्म' नामक एक वास्तविक, कार्यशील वैश्विक मिसाइल रक्षा नेटवर्क का प्रोटोटाइप विकसित कर लिया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने किसी अनुमति या पूर्णता के इंतजार के बिना इसे सीधे तैनात कर दिया। अब इस प्रोटोटाइप के सक्रिय होते ही एक चमत्कारिक परिवर्तन हो चुका है। जहां अमेरिका के पास केवल एक अवधारणा है, वहीं चीन के पास ठोस हकीकत। अमेरिका ने अपने इस दृष्टिकोण को 'गोल्डन डोम' नाम दिया था। एक ग्रहीय सुरक्षा कवच, जो अंतरिक्ष-आधारित और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से संचालित हो, तथा पृथ्वी के किसी भी कोने से प्रक्षेपित किसी भी मिसाइल का पता लगाकर उसे नष्ट करने में सक्षम हो। 2025 में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित यह प्रणाली वैश्विक सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव का वादा कर रही थी। लेकिन जब पेंटागन बजट और डेटा प्रवाह पर बहसों में उलझा था, चीन के इंजीनियर मैदान में कूद पड़े थे। चीन के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान, नानजिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी में ली जुदोंग की टीम के अनुसार, यह सफलता महज मिसाइलों या उपग्रहों में नहीं, बल्कि डेटा प्रसंस्करण की क्रांति में छिपी है। उनका सिस्टम पृथ्वी के किसी भी भाग से एक साथ चीन पर दागी गईं 1000 मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है। अंतरिक्ष, समुद्र, वायु और भूमि पर फैले सेंसरों के विशाल जाल के सहारे, यह वास्तविक समय में खतरों को संग्रहित, विश्लेषित और प्राथमिकता निर्धारित करता है। हर प्रक्षेप पथ, हर वारहेड, हर छलावे की पहचान होती है, उसे सूचीबद्ध किया जाता है और प्रभाव से पहले ही केंद्रीय कमांड को सूचना भेजी जाती है। पीएलए की यह प्रणाली केवल रडार या उपग्रहों पर निर्भर नहीं है; यह विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से, अलग-अलग समयों में और विविध सैन्य मंचों से प्राप्त डेटा को एकीकृत करती है। उधर, प्रशांत महासागर के उस पार अमेरिकी गोल्डन डोम अभी भी एक सपना मात्र है, जो आंतरिक विवादों में फंसा पड़ा है। इसकी अनुमानित लागत 140 अरब पाउंड से लेकर खरबों पाउंड तक बताई जा रही है। जुलाई में अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल गुएटलिन ने कबूल किया था कि किसी को, यहां तक कि उन्हें भी 'गोल्डन डोम' के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

2200 km/h स्पीड, 65% स्वदेशी और ब्रह्मोस का जुड़ाव — तेजस MK1A की ताकत क्या है?

नई दिल्ली  भारत की रक्षा ताकत एक बार फिर दुनिया को चौंकाने वाली है. हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस Mk1A (Tejas Mk1A) अब पहली उड़ान के लिए तैयार है. शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में महाराष्ट्र के नासिक से यह देश का सबसे आधुनिक स्वदेशी लड़ाकू विमान आसमान में उड़ान भरेगा. यह वही ‘तेजस’ है, जो पूरी तरह भारतीय इंजीनियरिंग, तकनीक और आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है. भारतीय वायुसेना इसे अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है. और माना जा रहा है कि इसे बीकानेर के नाल एयरबेस पर तैनात किया जाएगा, ताकि पाकिस्तान की सीमा के पास भारत की हवाई शक्ति और भी मजबूत हो सके. भारत का ‘गेमचेंजर’ फाइटर- तेजस MK1A तेजस एमके-1ए पुराने मिग-21 का एडवांस वर्जन है, जिसमें अल्ट्रा-मॉडर्न एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बेहतर रडार लगाए गए हैं. इसकी अधिकतम रफ्तार 2,200 किमी/घंटा है. यानी कुछ ही मिनटों में यह दुश्मन की सीमा तक पहुंच सकता है. इसमें लगी आधुनिक ब्रह्मोस मिसाइल, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड स्ट्राइक क्षमता इसे “सुपर-पावर जेट” बनाती है. इसके अलावा यह दुनिया के सबसे हल्के लेकिन घातक फाइटर जेट्स में शामिल है, जो किसी भी मौसम में मिशन पूरा कर सकता है. 65% स्वदेशी तकनीक, भारत की ताकत का नया प्रतीक तेजस एमके-1ए की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका 65 प्रतिशत स्वदेशी योगदान है. एचएएल ने बताया कि इसके अधिकांश पार्ट्स भारतीय कंपनियों ने तैयार किए हैं. रडार से लेकर एवियोनिक्स और स्ट्रक्चर तक. यह भारत की तकनीकी ताकत दिखाने वाला कदम है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की बड़ी उपलब्धि है. मिग-21 की जगह लेगा ‘तेजस’ भारतीय वायुसेना ने हाल ही में अपने पुराने मिग-21 बेड़े को रिटायर किया है. अब उसकी जगह तेजस एमके-1ए लेगा. वायुसेना और एचएएल के बीच 62,370 करोड़ रुपए का अनुबंध हुआ है. इसके तहत 97 स्वदेशी लड़ाकू विमान भारत को मिलेंगे. इनमें 68 सिंगल-सीटर और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर जेट शामिल हैं. इंजन और उत्पादन में मिली रफ्तार अमेरिकी कंपनी GE ने एचएएल को अब तक चार GE-404 जेट इंजन सप्लाई किए हैं. वित्त वर्ष के अंत तक कुल 12 इंजन मिलने की उम्मीद है. इन इंजनों की मदद से तेजस के उत्पादन और वायुसेना को डिलीवरी में तेजी आएगी. आने वाले कुछ सालों में भारतीय वायुसेना के पास दर्जनों तेजस फाइटर जेट्स होंगे. हर एक दुश्मन के लिए डर की वजह. पाकिस्तान की ‘नींद उड़ाने’ को तैयार तेजस एमके-1ए की तैनाती के बाद भारत की सीमाएं पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होंगी. इसकी रफ्तार, हथियार क्षमता और स्टेल्थ डिजाइन पाकिस्तान की वायुसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तेजस का हर स्क्वॉड्रन “आत्मनिर्भर भारत की उड़ती ढाल” साबित होगा. भारत के आसमान में ‘स्वदेशी शेर’ की दहाड़ तेजस एमके-1ए सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी ताकत, वैज्ञानिक क्षमता और सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. जब यह शुक्रवार को नासिक के आसमान में उड़ान भरेगा, तो यह भारत के एयरोस्पेस इतिहास का एक नया अध्याय लिखेगा.  

टैक्स बचाने की नई रणनीति पर काम कर रहा एप्पल, इनकम टैक्स में कर सकता है बदलाव

नई दिल्ली  एप्पल कंपनी भारत में अपने कारोबार को बढ़ावा दे रही है। कंपनी के आईफोन अब भारत में बहुत तेजी से बन रहे हैं। कंपनी ने इस वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में ही 10 अरब डॉलर (करीब 88,730 करोड़ रुपये) के आईफोन का निर्यात किया है। यह एक रेकॉर्ड है। अब अमेरिका की यह कंपनी भारत सरकार से अनोखी मांग कर रही है। कंपनी की मांग से ऐसा लगता है कि इसकी लॉबी भारत सरकार पर हावी हो रही है। एप्पल भारत सरकार से इनकम टैक्स कानून में बदलाव की मांग कर रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक कंपनी चाहती है कि उसे अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को दिए जाने वाले हाई-एंड आईफोन बनाने वाली मशीनों के मालिकाना हक पर टैक्स न देना पड़े। सूत्रों का कहना है कि यह एक ऐसी समस्या है जो एप्पल के भारत में भविष्य के विस्तार में बाधा डाल सकती है। भारत एप्पल के अनुरोध की सावधानी से समीक्षा कर रहा है। भारत में मौजूदगी बढ़ा रही कंपनी यह मांग ऐसे समय में आई है जब एप्पल चीन से बाहर निकलकर भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक साल 2022 से भारत में आईफोन की हिस्सेदारी दोगुनी होकर 8% हो गई है। जबकि दुनिया भर में आईफोन की कुल शिपमेंट में चीन का हिस्सा अभी भी 75% है, वहीं भारत का हिस्सा 2022 से चार गुना बढ़कर 25% हो गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल बाजार है। क्या है एप्पल का प्लान? एप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स फॉक्सकॉन और टाटा ने पांच प्लांट खोलने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है। लेकिन इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा आईफोन असेंबली के लिए महंगी मशीनें खरीदने में चला जाता है।एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर एप्पल अपनी व्यावसायिक प्रथाओं को बदले बिना नई दिल्ली को साल 1961 के उस कानून को बदलने के लिए राजी नहीं कर पाता जो भारत में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के विदेशी मालिकाना हक को कवर करता है, तो उसे अरबों डॉलर का अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। चीन में नहीं देना होता टैक्स चीन में एप्पल आईफोन बनाने वाली मशीनें खरीदता है और उन्हें अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को देता है। भले ही वह उन मशीनों का मालिक हो, फिर भी उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन भारत में ऐसा संभव नहीं है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और दो अन्य उद्योग सूत्रों ने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत एप्पल के ऐसे मालिकाना हक को एक तथाकथित 'व्यावसायिक संबंध' माना जाएगा। इससे अमेरिकी कंपनी के आईफोन मुनाफे पर भारतीय टैक्स लग जाएगा। एप्पल को होगा फायदा सूत्रों ने बताया कि एप्पल के अधिकारियों ने हाल के महीनों में भारतीय अधिकारियों से इनकम टैक्स के इस कानून में बदलाव के लिए बातचीत की है। कंपनी को डर है कि मौजूदा कानून उसके भविष्य के विकास में बाधा डाल सकता है। एक सूत्र ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स एक हद से ज्यादा पैसा नहीं लगा सकते। उन्होंने कहा अगर पुराने कानून में बदलाव किया जाता है तो एप्पल के लिए विस्तार करना आसान हो जाएगा।

बेंगलुरु का ट्रैफिक जाम खत्म करेगा बिजनेस कॉरिडोर प्रोजेक्ट, जानिए क्या है योजना

बेंगलुरु देश का बड़ा औद्योगिक शहर बेंगलुरु किलोमीटरों तक लगने वाले जाम के चलते चर्चा में रहा है। शहर का जनजीवन भी इस जाम की समस्या से प्रभावित हुआ है और अब इससे निपटने के लिए बेंगलुरु बिजनेस कॉरिडोर बनाने की तैयारी है। इस 117 किलोमीटर के कॉरिडोर से टेक सिटी को जाम मुक्त करने का प्लान है। यह दिल्ली के रिंग रोड जैसा होगा, जो पूरे बेंगलुरु को बाहर से होते हुए ही कनेक्ट करेगा। कर्नाटक कैबिनेट की ओर से इसकी मंजूरी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट को बेंगलुरु डिवेलपमेंट अथॉरिटी की ओर से पूरा किया जाएगा और इसकी टाइमलाइन दो साल की रखी गई है। इस प्रोजेक्ट का ऐलान करते हुए कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का कहना है कि बेंगलुरु का जाम खत्म करने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम होगा। उन्होंने कहा, 'बेंगलुरु चोक हो रहा है। हम चाहते हैं कि ट्रैफिक की समस्या कम हो। मैं जानता हूं कि इस प्रोजेक्ट से 1900 परिवार प्रभावित होंगे। लेकिन सरकार उन्हें उम्मीद से बढ़कर मुआवजा देगी। हमारा यह फैसला कर्नाटक सरकार की ओर से लिए गए सबसे बड़े निर्णयों में से एक है।' शिवकुमार ने कहा कि यह कॉरिडोर बन जाएगा तो बेंगलुरु का 40 पर्सेंट ट्रैफिक कम हो जाएगा। इससे हाइवेज और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की ओर गुजरने वाले बड़े वाहन शहर के बाहरी इलाके से ही निकल जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि कुछ जमीन मालिकों ने भूमि देने से इनकार किया तो हम अदालत में मुआवजा जमा करेंगे और काम को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के विकास के लिए अहम इस परियोजना को हम किसी भी कीमत पर नहीं रोकेंगे। इस प्रोजेक्ट में 10000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन के लिए सरकार ने किसानों को 5 विकल्प दिए हैं। इसके तहत किसानों को विकसित भूमि भी मिलेगी। यदि वे चाहेंगे तो उन्हें रिहायशी और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स में भी जगह दी जाएगी। कर्नाटक सरकार का मानना है कि यह परियोजना बेंगलुरु के विकास के लिए गेमचेंजर होगी।

23 अक्टूबर से बदल रहा बांकेबिहारी मंदिर का समय, जानें नए दर्शन समय की पूरी जानकारी

मथुरा वृंदावन में 23 अक्तूबर बृहस्पतिवार को भाई दूज पर्व से जन-जन के आराध्य भगवान श्री बांकेबिहारी जी महाराज के मंदिर में दैनिक दर्शन समय व भोगराग में बदलाव हो जाएगा। ठाकुरजी की शीतकालीन सेवाओं का दौर आरंभ होने पर सुबह-शाम की दर्शन समयसारिणी के साथ ही प्रभु को परोसे जाने वाले भोग पदार्थों में भी मौसम के अनुरूप परिवर्तन कर दिया जाएगा। ठाकुर जी की विलक्षण सेवाविधि पर प्रकाश डालते हुए सेवायत आचार्य विप्रांश बल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि विश्वविख्यात श्री बांकेबिहारी मंदिर में होली बाद भाई दूज से दिवाली तक ग्रीष्मकालीन एवं दिवाली बाद भाई दूज से होली तक शीतकालीन सेवाओं की परिपाटी निभाई जाती है। सेवायत के अनुसार उसी परंपरा का पालन करते हुए भैयादूज पर्व से भगवान को होने वाले सर्दीले अहसास का ध्यान रखते हुए उन्हें परोसी जानी वाली भोग सामग्री में गर्म तासीर वाले पदार्थों मेवाओं व केसर की मात्रा बढ़ा दी जाएगी।  ठाकुरजी को दोनों वक्त अर्पित किए जाने के लिए तैयार चंदन में पर्याप्त केसर मिलाया जाएगा। माखन-मिश्री दूधभात और रात्रि दूध में भी उत्तम किस्म की पंचमेवा तथा केसर मिलाई जाने लगेगी। सर्दी से बचाने के लिए ठाकुरजी को हल्की सिल्क की पोशाकों की जगह शनील, बेलवेट, मोटी मखमल की अस्तरदार पोशाकें पहनाई जाएंगी। गर्म तासीर के इत्रों से होगी मालिश सर्द मौसम में आराध्य को गर्मी का आनंद देने के लिए सुबह, दोपहर, संध्या व रात्रि में अर्थात पूरे दिन में चार बार केसर, कस्तूरी, हिना, ऊद, मस्क, अंबर आदि गर्म तासीरी इत्रों से मालिश की जाएगी। दोपहर एवं रात्रि में शयन के वक़्त श्रीबांकेबिहारी जी महाराज को शनील की मोटी रजाई ओढ़ाई जाएगी। कुछ दिनों बाद ठंड का प्रकोप बढ़ने पर शयन बेलाओं में भगवान को मखमल-शनील का मोटा टोपा पहनाया जाने लगेगा। इसी के साथ चांदी की सिगड़ी में कच्चे कोयले की धीमी अग्नि सुलगाकर प्रभु को तप्तसुख पहुंचाया जाएगा।  

OTP पर निर्भर सुरक्षा: Mappls ने लॉन्च किया इंजन लॉक, चोरी पर पड़ेगा बड़ा अंकुश

नई दिल्ली ZOHO के मैसेजिंग ऐप Arattai की तरह ही अब स्वदेसी मैप Mappls को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रमोट किया है. इसके बाद से ही इसके शेयर में करीब 10 परसेंट का उछाला आया है. लेकिन यहां हम कंपनी के शेयर नहीं बल्कि Mappls का एक ऐसा खास फीचर बताने जा रहे हैं, जो आपकी कार चोरों से दूर रखने का काम करेगा.  Mappls ऐप के अंदर Immobiliser नाम का फीचर दिया है. इस फीचर का इस्तेमाल करके आप आसानी से अपनी कार के इंजन को रिमोटली बंद कर सकते हैं. इसके लिए आपको पासवर्ड या OTP एंटर करना होगा.  MapMyIndia ने तैयार किया Mappls  Mappls को MapMyIndia ब्रांड ने तैयार किया है. मैप माय इंडिया के मार्केट में कई GPS कार ट्रैकर मौजूद हैं, जिनमें से कुछ प्रोडक्ट के अंदर आपको कार चोरी होने से बचाने की सर्विस मिलती है.  स्वदेसी Mappls ऐप के साथ ये ट्रैकर कंपेटेबल होते हैं. ऐसे में यूजर्स चाहें तो पूरा सेटअप कराने के बाद अपनी कार के इंजन को घर बैठे ऑफ कर सकते हैं. इसमें फ्यूल ऑफ आदि हो जाता है. कार के ECU को कंट्रोल करता है इम्मोबिलाइजर     दरअसल, कार के अंदर इम्मोबिलाइजर होता है, जो इंजन को ऑन करने में मदद करता है. दरअसल, कार की चाबी के अंदर एक ट्रांस्पोंडर चिप होती है.      ये चिप इंजन के कंट्रोल यूनिट (ECU) को एक खास कोड भेजता है. जब ECU कोड को वेरिफाई करता है और कोड सही होने के बाद सिस्टम इंजन को ऑन होने की परमिशन देता है.     अगर कोड गलत या मिशिंग होता है तो कार का ECU सिस्टम फ्यूल सप्लाई को रोक देता है, जिससे कार का इंजन ऑन नहीं होता है.   इम्मोबिलाइजर ऐसे काम करता है  सबसे पहले तो अपनी कार में Mappls या किसी अन्य कंपनी का GPS ट्रैकर इंस्टॉल कराना होगा, जिनमें गाड़ी का इंजन स्विच ऑफ करने करने का फीचर मिलता है. जीपीएस ट्रैकर कार में लगे इम्मोबिलाइजर को कमांड देता है, जिसके बाद कार का इंजन, फ्यूल सप्लाई और स्टार्टर बंद हो जाते हैं.  मोबाइल ऐप पर मिलता है एक्सेस  मोबाइल ऐप Mappls पर जीपीएस ट्रैकर का एक्सेस मिलता है. इसकी मदद से आप कार की लोकेशन, इंजन ऑन होने पर नोटिफिकेशन्स देख सकते हैं. अगर कोई चोरी-छिपे कार को ऑन करता है तो मोबाइल पर तुरंत अलर्ट आ जाता है.  रिएक्टिवेशन का भी फीचर  कार के इंजन को अगर आपने रिमोटली ऑफ किया था और जब आपको सुरक्षित तौर पर कार रिकवर हो जाती है. तो आपको रिएक्टिवेशन को ऑन करना होगा. इसके बाद आप कार के इंजन को ऑन करके उसे चला सकते हैं.

गाय की डकार पर टैक्स, हरियाली बढ़ाने पर राहत! डेनमार्क की पर्यावरण बचाने वाली नई नीति

कोपेनहेगन जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए डेनमार्क सरकार ने एक अनोखा कानून बनाया है. इसका नाम है “फ्लैटुलेंस टैक्स” यानी गायों द्वारा छोड़ी गई गैस पर टैक्स. यह कानून 18 नवंबर 2024 को घोषित किया गया था. इसके अनुसार, 2030 से डेनमार्क के किसानों को अपनी गायों और सूअरों की डकार और गैस उत्सर्जन पर टैक्स देना होगा. 2030 में किसानों को प्रति टन मीथेन पर 300 डेनिश क्रोनर (लगभग 24,100 रुपये) टैक्स देना होगा. 2035 तक यह राशि बढ़कर 750 क्रोनर (लगभग 10,000 रुपये) हो जाएगी.  पेड़ लगाने पर मिलेगी 60 फीसदी की छूट हालांकि, अगर किसान पेड़ लगाकर उत्सर्जन (emissions) कम करेंगे तो उन्हें 60% की छूट मिलेगी. यह टैक्स गाय और भैंसों से निकलने वाली मीथेन गैस को कम करने के लिए लगाया गया है. मीथेन एक ग्रीनहाउस गैस है, जो कार्बन डाइऑक्साइड से कई गुना ज्यादा खतरनाक है. एक गाय रोजाना करीब 500 लीटर मीथेन छोड़ सकती है.  न्यूजीलैंड ने भी 2022 में लगाया था टैक्स संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में जानवरों से होने वाला उत्सर्जन कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 12% है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हम इस सदी के पहले आधे हिस्से में ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना चाहते हैं, तो 2030 तक मीथेन उत्सर्जन को 45% तक घटाना जरूरी है. इससे पहले न्यूजीलैंड ने भी 2022 में किसानों पर इसी तरह का टैक्स लगाने का ऐलान किया था, लेकिन 2024 में किसानों के विरोध के बाद इसे रद्द कर दिया गया.