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युद्ध के साए में इज़राइल का हथियार निर्यात, गाजा-ईरान तनाव के बीच 14 अरब डॉलर की बिक्री

तेल अवीव इजरायल दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में से एक है, लेकिन वह जंग लड़ते हुए भी बड़ा व्यापार कर रहा है. गाजा में लंबी जंग और ईरान के साथ तनाव के बावजूद, 2024 में इजरायल ने रिकॉर्ड 14.7 अरब डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये) के हथियार बेचे. सबसे हैरानी की बात ये है कि इनमें से आधे से ज्यादा यूरोपीय देशों ने खरीदे. इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में यह आंकड़ा जारी किया. यह चौथा साल लगातार है जब इजरायल के हथियार निर्यात ने नया रिकॉर्ड बनाया.  2024 में हथियार बिक्री का रिकॉर्ड: आंकड़े क्या कहते हैं? इजरायल के रक्षा उद्योग ने 2024 में 13% की बढ़ोतरी के साथ 14.7 अरब डॉलर का टर्नओवर किया. यह 2023 की तुलना में 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा है. मुख्य खरीदार यूरोप था, जिसने कुल निर्यात का 54% (करीब 8 अरब डॉलर) लिया. 2023 में यह हिस्सा सिर्फ 35% था. एशिया-पैसिफिक दूसरे नंबर पर रहा, लेकिन यूरोप ने सबको पछाड़ दिया. सबसे ज्यादा बिके हवाई रक्षा सिस्टम, जैसे आयरन डोम के हिस्से. इनकी बिक्री 48% रही. इसके अलावा मिसाइलें, ड्रोन, रडार और साइबर हथियार भी लोकप्रिय रहे. इजरायल एयर इंडस्ट्रीज (आईएआई), राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और एल्बिट सिस्टम्स जैसी कंपनियों ने बड़ा योगदान दिया. जंग के बीच व्यापार कैसे फला-फूला? गाजा में 2023 से चल रही जंग ने इजरायल को भारी नुकसान दिया. हजारों सैनिक घायल हुए, लेकिन इसने इजरायली हथियारों की ताकत दिखाई. यूरोपीय देशों को लगा कि इजरायल के हथियार असली जंग में काम करते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध से यूरोप को हथियारों की भारी जरूरत पड़ी. इजरायल ने मौका लपका और तेजी से डिलीवरी दी. ईरान के साथ तनाव ने भी मदद की. ईरान ने अप्रैल 2024 में इजरायल पर मिसाइल हमला किया, लेकिन इजरायल ने उसे रोक लिया. इससे उसके डिफेंस सिस्टम की डिमांड बढ़ी. यूरोप में भी रूस का खतरा है, इसलिए वे इजरायली तकनीक चाहते हैं. बावजूद बॉयकॉट कॉल्स के (गाजा जंग पर निंदा के कारण) बिक्री बढ़ी. यूरोपीय देश क्यों खरीद रहे? यूरोप इजरायल का सबसे बड़ा पार्टनर बन गया. जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन जैसे देशों ने बड़े ऑर्डर दिए. उदाहरण के लिए…     जर्मनी: आयरन डोम जैसे सिस्टम के लिए अरबों डॉलर खर्च.     पोलैंड: ड्रोन और मिसाइल सिस्टम.     रोमानिया: रडार और एयर डिफेंस. यूरोपीय संघ (ईयू) ने गाजा पर सख्त बातें कीं, लेकिन व्यापार जारी रहा. ईयू इजरायल का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, जिसने 2024 में 45.5 अरब डॉलर का व्यापार किया. हथियारों पर दबाव है, लेकिन अभी कोई बड़ा प्रतिबंध नहीं. कुछ देशों ने कहा कि अगर गाजा जंग न रुकी, तो ट्रेड बेनिफिट्स काट देंगे. इजरायल के लिए फायदे और चुनौतियां यह बिक्री इजरायल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है. रक्षा उद्योग 7% जीडीपी देता है. 50 हजार नौकरियां पैदा करता है. जंग के खर्च (करीब 60 अरब डॉलर) को पूरा करने में मदद मिलती है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय निंदा बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में 'नरसंहार' का आरोप लगाया. अमेरिका ने 18 अरब डॉलर की मदद दी, लेकिन यूरोप में बॉयकॉट मूवमेंट तेज हो रहा. नेतन्याहू सरकार ने कहा कि यह आत्मनिर्भरता का सबूत है. वे और निर्यात बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, खासकर एशिया और अफ्रीका में.  दुनिया पर असर: शांति या हथियार दौड़? यह खबर दिखाती है कि जंग के बीच भी पैसा कमाया जा सकता है. लेकिन गाजा में 40000 से ज्यादा मौतें हो चुकीं हैं. ईरान तनाव बढ़ रहा है. यूरोप के हथियार खरीदने से मिडिल ईस्ट में संतुलन बिगड़ सकता है. हथियार व्यापार को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक नियम सख्त करने चाहिए. इजरायल की यह सफलता तकनीकी ताकत दिखाती है, लेकिन नैतिक सवाल भी खड़े करती है. क्या जंग के बीच हथियार बेचना सही है?

ट्रेड डील के बाद भारत आएंगे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, द्विपक्षीय संबंधों पर होगा फोकस

नई दिल्ली अगले महीने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भारत का दौरा कर सकते हैं. यह दौरा 7 से 9 अक्टूबर तक मुंबई में होने वाले ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान होगा. भारत दौरे के दौरान कीर स्टारमर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे. यह यूके के पीएम बनने के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा. दिलचस्प बात यह है कि यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच FTA पर हस्ताक्षर होने के लगभग दो महीने बाद हो रहा है, जिससे दोनों देशों के व्यापार और आर्थिक संबंधों में और मजबूती आने की उम्मीद है. इस यात्रा से पहले ब्रिटेन ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है. वहीं भारत और अमेरिका के बीच में टैरिफ को लेकर तनाव देखा जा रहा है. साथ ही भारत और ब्रिटेन ने जुलाई 2025 में ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता इसलिए अहम है क्योंकि यह किसी पश्चिमी देश के साथ भारत का पहला बड़ा व्यापारिक समझौता है. इस FTA के तहत ब्रिटेन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले औसत 15% टैरिफ को घटाकर लगभग 3% तक लाएगा. इससे कृषि, समुद्री उत्पाद, प्लास्टिक, केमिकल और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टर्स के भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा. अनुमान है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार हर साल 33 अरब डॉलर तक बढ़ेगा. इन क्षेत्रों में भी साथ होंगे भारत-यूके इसके साथ ही, दोनों देशों ने डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन पर भी सहमति जताई है. इससे भारतीय कर्मचारियों और नियोक्ताओं को ब्रिटेन में तीन साल तक सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट मिलेगी. भारतीय कंपनियों के लिए यह समझौता करीब 4,000 करोड़ रुपये की बचत कराएगा. भारत-यूके रिश्तों में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी अहम है. जुलाई 2024 में दोनों देशों ने टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव (TSI) की घोषणा की थी. इसका मकसद क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, एडवांस्ड मटीरियल्स और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना है. यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर तनाव बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कई सेक्टरों में 50% तक टैरिफ लगा दिया है. साथ ही, नए H-1B वीजा पर 88 लाख रुपये की फीस और ईरान के चाबहार बंदरगाह पर छूट हटाने जैसे फैसलों ने भारतीय चिंताएं बढ़ा दी हैं.

सरकारी कर्मचारियों को दिवाली गिफ्ट! DA बढ़ोतरी और GST राहत से बढ़ेगी जेब की चमक

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए इस दिवाली (Diwali 2025) खुशखबरी आ सकती है. सरकार अक्टूबर 2025 में महंगाई भत्ता (Dearness Allowance/DA) में बढ़ोतरी का एलान कर सकती है. खबरों के अनुसार, जुलाई-दिसंबर 2025 की पीरियड के लिए डीए में 3 प्रतिशत की वृद्धि तय हो गई है, जिससे मौजूदा 55% डीए बढ़कर 58% हो जाएगा. यह 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत अंतिम DA रिवीजन होगा, क्योंकि जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने वाला है. इस बढ़ोतरी से करीब 1.2 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधे लाभ मिलेगा. विशेषकर त्योहारों के मौसम में सैलरी बढ़ने से खर्च करने की क्षमता भी बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा. सरकार हर साल अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के डीए में दो बार बढ़ोतरी करती है – जनवरी और जुलाई में. हालांकि, इसका आधिकारिक एलान कुछ माह बाद किया जाता है. मार्च 2025 में जनवरी-जून पीरियड के लिए सरकार ने पहले ही डीए में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिससे यह 53% से बढ़कर 55% हो गया. अब जुलाई-दिसंबर 2025 के लिए 3% की वृद्धि के बाद यह बढ़कर 58 प्रतिशत हो जाएगा. महंगाई भत्ता (DA) कैसे तय होता है? महंगाई भत्ते का कैलकुलेशन औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर किया जाता है. यह डेटा हर महीने लेबर ब्यूरो द्वारा जारी किया जाता है. पिछले 12 महीनों के CPI-IW औसत को लेकर एक फॉर्मूला लागू किया जाता है, जो 7वें वेतन आयोग के तहत बनाया गया है: DA (%) = [(12 माह का औसत CPI-IW – 261.42) ÷ 261.42] × 100 इस फॉर्मूले के आधार पर कोई भी सरकारी कर्मचारी या पेंशनर अपने महंगाई भत्ते की गणना कर सकता है. जुलाई 2025 में कितना बढ़ा था DA लेबर ब्यूरो ने जून 2025 के CPI-IW डेटा के अनुसार सूचकांक 145.0 दर्ज किया, जो मई 2025 की तुलना में एक अंक अधिक है. इसके आधार पर जुलाई 2025 से DA बढ़कर 58% तय किया गया है. हाल ही में सरकार और कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन, Government Employees National Confederation (GENC), के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई. मंत्री ने बताया कि राज्य सरकारों के साथ भी बातचीत जारी है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा की संभावना है. त्योहारों के मौसम को देखते हुए यह कदम कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी साबित हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग के साथ ही महंगाई भत्ते (DA) में 3 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है. इससे देशभर के 1.2 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों को सीधा लाभ मिलेगा. GST राहत के बाद यह कदम उन्हें और वित्तीय राहत प्रदान करेगा. महंगाई भत्ते का महत्व महंगाई भत्ता सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स को इसलिए देती है ताकि वे महंगाई के प्रभाव को कम कर सकें. रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और DA सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन का मूल्य स्थिर रहे. इस बढ़ोतरी का असर न सिर्फ कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब पर पड़ेगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी लाएगा. दशहरा और दिवाली के आसपास DA वृद्धि का ऐलान आम तौर पर इसलिए किया जाता है ताकि लोग त्योहारों के मौसम में अपने खर्चों को संभाल सकें और उत्सवों का आनंद ले सकें. कितने लोगों को मिलेगा लाभ इस DA वृद्धि से लगभग 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 66 लाख पेंशनर्स को फायदा मिलेगा. इससे उनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी और महंगाई से राहत भी मिलेगी. इसके अलावा, पहले ही सरकार ने लोगों को जीएसटी में कटौती के रूप में अच्छी-खासी राहत दी है. 7वें वेतन आयोग के तहत यह अंतिम DA वृद्धि है, और जनवरी 2026 से लागू होने वाला 8वां वेतन आयोग नए नियम और दरों के साथ लागू होगा. इस वृद्धि का फायदा कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधे मिलेगा और यह दिवाली उनके लिए और खास बना देगा. न्यूनतम मूल वेतन में संभावित बड़ा इजाफा 8वीं वेतन आयोग की संभावित सिफारिशों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) में वृद्धि है. वर्तमान में यह ₹18,000 है, और नई संरचना इसे ₹26,000 तक बढ़ा सकती है. इस बदलाव से कर्मचारियों को मुद्रास्फीति और बढ़ती जीवनयापन लागत के बीच राहत मिलेगी. कर्मचारियों का मानना है कि यह वृद्धि लंबे समय से लंबित थी, क्योंकि पिछली वेतन आयोग की सिफारिश कई सालों पहले लागू हुई थी. न्यूनतम वेतन में यह बड़ा इजाफा सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करेगा. महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) में सुधार की संभावना 8वीं वेतन आयोग के साथ महंगाई भत्ता (DA) में भी संशोधन की उम्मीद है. वर्तमान में कर्मचारियों और पेंशनरों को 55% DA मिलता है. हाल ही में मुद्रास्फीति दरों के अनुसार 2% की वृद्धि की गई थी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून-दिसंबर 2025 की अवधि के लिए अगली DA वृद्धि 3% हो सकती है. यह संशोधित DA अक्टूबर या नवंबर में घोषित किया जा सकता है, जिससे त्योहारों के मौसम में कर्मचारियों और पेंशनरों को वित्तीय राहत मिलेगी. कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत का पैकेज अगर 8वीं वेतन आयोग और DA में सुधार दोनों लागू होते हैं, तो यह सरकारी वेतन पर निर्भर लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय राहत साबित होगी. लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ये कदम कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दोहरी राहत, वेतन वृद्धि और DA इजाफा. न केवल शॉर्ट टर्म वित्तीय राहत देगा बल्कि कर्मचारियों की लॉन्ग टर्म आर्थिक स्थिरता में भी योगदान करेगा. हालांकि, इस पूरे पैकेज की वास्तविक तिथि इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग का गठन कब होता है और सरकार की वित्तीय स्थिति क्या रहती है.  

आधार कार्ड सिक्योरिटी: बायोमेट्रिक लॉक करने के ये 5 स्टेप्स करें फॉलो

नई दिल्ली  ऑनलाइन एक्सेस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ, धोखाधड़ी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। अक्सर, लोग गोपनीय जानकारी लेकर धोखाधड़ी करते हैं। अब, आपका आधार कार्ड चोरी नहीं होगा। आधार बायोमेट्रिक लॉक फीचर चालू हो गया है। यह फीचर एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। आप बिना किसी परेशानी के आसानी से अपने आधार बायोमेट्रिक को लॉक कर सकते हैं। आधार बायोमेट्रिक को लॉक करने से यह पक्का हो जाएगा कि आपके फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन का इस्तेमाल बिना आपकी इजाज़त के वेरिफिकेशन के लिए नहीं किया जा सकता। यह आधार से जुड़े वित्तीय लेन-देन और सरकारी सेवाओं में धोखाधड़ी रोकने में खास तौर पर मददगार होगा।   अपना आधार बायोमेट्रिक कैसे लॉक करें?     इसके लिए, सबसे पहले myAadhaar पोर्टल में लॉग इन करें।     इसके बाद आपको अपना आधार नंबर, कैप्चा और OTP की ज़रूरत होगी।     अगले पेज पर, बायोमेट्रिक को लॉक/अनलॉक करने का ऑप्शन चुनें।     इसके लिए, बायोमेट्रिक को लॉक/अनलॉक करने के तरीकों और उनके काम करने के तरीके को ध्यान से पढ़ें।     फिर आप सहमति बॉक्स पर टिक करें और फिर से नेक्स्ट पर क्लिक करें।     आखिर में, आपको एक मैसेज मिलेगा कि आपका बायोमेट्रिक सफलतापूर्वक लॉक हो गया है।  

अमेरिकी कंपनियों में टेंशन: ट्रंप की वीज़ा पॉलिसी से खुद अमेरिका को झटका!

वॉशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप सरकार की ओर से एच-1बी वीजा की फीस को बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दिया गया है। इससे दुनिया भर के उन लोगों को झटका लगेगा, जो नौकरी या फिर अन्य स्किल्ड कामों के लिए अमेरिका जाते हैं। ऐसे लोगों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है, जो अब तक 6 से 7 लाख रुपये तक की फीस अदा करते थे। अब उन्हें लगभग 80 लाख रुपये की फीस चुकानी होगी। ऐसे में ज्यादातर लोगों के लिए अमेरिका में काम करना मुश्किल होगा। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप सरकार का यह फैसला जितना भारतीयों की चिंता बढ़ाने वाला है, उतना ही अमेरिका को भी नुकसान पहुंचाएगा। हालात यह हैं कि सिलिकॉन वैली में स्थापित कंपनियां अलर्ट मोड में आ गई हैं। हालात यह हैं कि कंपनियों का अपने कर्मचारियों से कहना है कि वे अमेरिका छोड़कर ना जाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे निकल गए तो फिर वापस आने में मुश्किल होगी और उन्हें नए वीजा नियमों के तहत फीस चुकानी होगी। इन चिंताओं का असर वाइट हाउस तक दिखा और अंत में उसने एक स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें उसने बताया कि यह फीस नए वीजा आवेदनों पर ही लागू होगी और एक बार ही भुगतान होगा। दरअसल चिंता अमेरिकी अर्थशास्त्रियों के बीच भी है। उनका कहना है कि भारत जैसे देशों पर इसका असर कम ही दिखेगा। इसका सीधा नुकसान तो सबसे पहले अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ही उठाना पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी टेक कंपनियां एच-1बी वीजा पर निर्भर रही हैं। इसी के तहत भारत और अन्य देशों के इंजीनियरों, साइंटिस्ट और कोडर्स को ये कंपनियां हायर करती रही हैं। अब यदि वीजा महंगा हो रहा है तो इन कंपनियों के लिए विदेशी टैलेंट की भर्ती करना मुश्किल होगा। इन्वेस्टमेंट बैत बेरेनबर्ग से जुड़े एक अर्थशास्त्री अटकन बाकिस्कन ने कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों को ही मुश्किल में डालने वाला फैसला है। इससे अमेरिका में ब्रेन ड्रेन के हालात पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला तो एंटी-ग्रोथ पॉलिसी मेकिंग वाला है। अमेरिकी ग्रोथ ही घटने का अनुमान, दिखेगा सीधा असर विश्लेषक फर्म बेरनबर्ग ने अमेरिकी आर्थिक वृद्धि का अनुमान 2% से घटाकर 1.5% कर दिया है और चेतावनी दी है कि यदि ऐसी ही वीजा पॉलिसी जारी रही तो इतनी ग्रोथ रेट भी मुश्किल होगी।बेरनबर्ग के अर्थशास्त्री अटकन बाकिस्कन ने कहा कि संशोधित एच-1बी वीज़ा नीति के कारण अमेरिकी श्रमबल में कमी आ सकती है, जिससे नवाचार और दीर्घकालिक आर्थिक उत्पादन प्रभावित होगा। बाकिस्कन ने कहा, 'नई एच-1बी नीति के कारण श्रमबल के बढ़ने की बजाय घटने की संभावना अधिक है।' नामी कंपनियां चुका सकती हैं फीस, पर छोटे संस्थान होंगे बेहाल ब्रोकरेज फर्म XTB की रिसर्च डायरेक्टर कैथलीन ब्रूक्स ने बताया कि Amazon, Microsoft, Meta, Apple, और Google जैसी प्रमुख टेक कंपनियां एच-1बी वीज़ा पर सबसे अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। ये कंपनियां वीज़ा लागत वहन कर सकती हैं। लेकिन अन्य कंपनियों को मुश्किल होगी, जैसे हेल्थ सर्विसेज में काम करने वाली कंपनियां और एजुकेशन सेक्टर से जुड़े संस्थानों को परेशानी होगी। ऐसी संस्थाओं को भविष्य में कर्मचारियों की नियुक्ति करने में ही मुश्किल आएगी। बता दें कि एच-1बी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों में भारतीयों की संख्या 70 फीसदी है।  

शिक्षा विभाग ने किया ऐलान, पश्चिम बंगाल के स्कूल रहेंगे बंद, जानिए क्यों!

कोलकाता कोलकाता और दक्षिण बंगाल के अन्य जिलों में भारी बारिश के कारण जन-जीवन ठप्प हो जाने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित समय से दो दिन पहले ही दुर्गा पूजा की छुट्टियां घोषित कर दी। बिजली के करंट से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जलभराव वाली सड़कों से दूर रहने और स्कूलों में छुट्टियां करने या ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश के बाद, राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने घोषणा की कि सभी सरकारी शिक्षण संस्थान 24 और 25 सितंबर को बंद रहेंगे।   24 और 25 सितंबर को सभी शिक्षण संस्थान बंद शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने एक्स हैंडल पर ट्वीट कर कहा कि राज्य में अभूतपूर्व आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है। मौजूदा स्थिति में छात्रों को राहत देने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मुख्यमंत्री की सलाह के अनुसार, कल और परसों, यानी 24 और 25 सितंबर को सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा मंत्री ने कही ये बातें मंत्री ने कहा कि अनुरोध है कि इस आपदा के दौरान, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी अपने ज़रूरी और अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए घर से काम करें। मंत्री ने आगे कहा, "चूँकि दुर्गा पूजा की छुट्टियाँ 26 सितंबर से शुरू होने वाली हैं, इसलिए प्रभावी रूप से ये छुट्टियाँ कल (बुधवार) से शुरू होंगी। मैं सभी को पूजा की शुभकामनाएं देता हूं। इस आपदा में अपनी जान गंवाने वाले मेरे साथी नागरिकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। कई इलाकों में भारी बारिश कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में मंगलवार को सामान्य जनजीवन लगभग ठप्प हो गया क्योंकि रात भर हुई भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर बाढ़ आ गई, जिससे यातायात, सार्वजनिक परिवहन और दैनिक गतिविधियाँ ठप्प हो गईं। शहर में बिजली का झटका लगने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। शहर के कुछ हिस्सों में कुछ ही घंटों में 330 मिमी से ज़्यादा बारिश हुई, जबकि शहर और उसके उपनगरों के ज़्यादातर हिस्सों में औसतन 250 मिमी से ज़्यादा बारिश हुई।

उत्तराखंड में रेवेन्यू सरप्लस: CM पुष्कर सिंह धामी ने CAG की रिपोर्ट को सराहा

उत्तराखंड  भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹5,310 करोड़ का राजस्व अधिशेष दर्ज कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने इस अवधि में राजस्व अधिशेष दर्ज किया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट में दर्ज यह उपलब्धि उत्तराखंड की सुशासन की नीतियों का परिणाम है. हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से प्रेरणा लेकर राज्य को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. उत्तराखंड की आर्थिक आत्मनिर्भरता मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्ध भविष्य की दिशा में रखा गया एक मजबूत कदम है. सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन की नीति पर आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड को एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है. सीएजी रिपोर्ट की प्रमुख बिंदुएं:- राजस्व अधिशेष : वित्तीय वर्ष 2022-23 में उत्तराखंड ने ₹5,310 करोड़ का अधिशेष दर्ज किया. समग्र प्रगति : यह उपलब्धि राज्य की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार का संकेत देती है. आर्थिक मजबूती का प्रमाण : कभी बिमारु श्रेणी से जोड़े जाने के बाद अब उत्तराखंड ने सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत किया है. सकारात्मक आर्थिक परिवर्तन : पूर्व में वित्तीय अनुशासन की चुनौतियों के बावजूद सतर्क प्रबंधन व पारदर्शी नीतियों के बल पर राज्य ने यह उपलब्धि हासिल की.  

सुप्रीम कोर्ट में गूंजी जोजरी नदी की पुकार, प्रदूषण से ग्रामीण परेशान

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को राजस्थान की जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। नदी में प्रदूषण की वजह से यहां की कृषि योग्य भूमि बंजर हो गई है। इसके चलते स्थानीय लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और कहा था कि नदी में औद्योगिक कचरे से सैकड़ों गांव प्रभावित हो रहे हैं। आरोप है इनसे निकलने वाला औद्योगिक कचरा नदी में डाला जा रहा है। इसका असर सैकड़ों गांवों पर पड़ा है। कचरे की वजह से जहरीले हो चुके जोजरी नदी के पानी ने पर्यावरण और आम जनमानस को नुकसान पहुंचाया है। नदी का पानी जानवरों के लिए भी जहरीला हो गया है, जिससे न केवल स्वास्थ्य बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा कही जाने वाली जोजरी नदी आज जहरीली हो गई है। जोधपुर से पाली और बालोतरा तक बहने वाली इस नदी में लगभग 400 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी और कचरा डाला जा रहा है। इसकी वजह से नदी का पानी पीने योग्य नहीं है। जोजरी नदी राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित 83 किलोमीटर लंबी मौसमी नदी है। इसका उद्गम नागौर जिले से होता है। यह उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए जोधपुर जिले के खेड़ालदा खुर्द के पास लूनी नदी में मिलती है। नदी का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 3,600 वर्ग किलोमीटर तक में फैला हुआ है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

भारी बारिश ने ली जानें: कोलकाता में करंट की चपेट में आए 5, शहर में हाई अलर्ट जारी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया गया है. कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रात भर भारी बारिश देखने को मिली. कई जगहों पर घुटनों तक पानी भर गया और यातायात ठप हो गया. बारिश सोमवार आधी रात के बाद शुरू हुई. बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव हो गया. कोलकाता में कई घरों एवं आवासीय परिसरों में बारिश का पानी घुस गया. कोलकाता में बारिश के कारण हादसा भी हुआ है. कोलकाता में बारिश के कारण कई बिजली की तारें पानी में गिर गईं. उनमें से करंट उतरने के कारण अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है. सीईएससी को कोलकाता के कुछ खास इलाकों में बिजली लाइनें काटने का निर्देश दिया गया है. शहर में और अधिक बारिश होने की आशंका रात भर हुई भारी बारिश के कारण, महानायक उत्तम कुमार और रवींद्र सरोबर स्टेशनों के बीच मध्य खंड में जलभराव हो गया है. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, शहीद खुदीराम से मैदान स्टेशन के बीच मेट्रो सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं. दक्षिणेश्वर और मैदान स्टेशनों के बीच मेट्रो सेवाएं सीमित कर दी गई हैं. शहर में और अधिक बारिश होने की आशंका है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्व में कम दबाव का क्षेत्र बना है. ये उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ सकता है, जिससे दक्षिण बंगाल के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है. बुधवार तक दक्षिण बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर और पश्चिम मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना, झारग्राम और बांकुड़ा जिलों में भारी बारिश की संभावना है. कोलकाता नगर निगम ने दी जानकारी 25 सितंबर के आसपास पूर्व-मध्य और उससे सटे उत्तरी बंगाल की खाड़ी में एक और नया निम्न दबाव का क्षेत्र बन सकता है. वहीं कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने बताया कि शहर के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में ज्यादा तेज बारिश हुई. गरिया कामदहारी में कुछ ही घंटों में 332, जोधपुर पार्क में 285, कालीघाट में 280, तोपसिया में 275 , बल्लीगंज में 264, उत्तरी कोलकाता के थंटानिया में 195 मिलीमीटर बारिश हुई.

कश्मीरी हिंदुओं के लिए नौकरी छूट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया

जम्मू-कश्मीर  विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के लिए ग्रुप C और D की नौकरियों में छूट की मांग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया है. केंद्र सरकार की नौकरियों की भर्ती के लिए आयु में छूट की मांग की गई थी. इस मामले पर सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिककर्ता से पूछा कि हमें इसमें हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए? ये सभी नीतिगत निर्णय हैं. विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के एक संगठन पनुन कश्मीर ट्रस्ट ने की ओर से ये याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि जहां सिख विरोधी दंगों और 2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों को इस तरह की छूट दी गई थी. उसी तरह की छूट इन्हें भी दी जानी चाहिए. याचिका में क्या कहा गया? पनुन कश्मीर ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी. ये याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई थी. विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के लिए ग्रुप सी और डी की आने वाली केंद्र सरकार की नौकरियों में भर्तियों में उम्र सीमा में छूट को लेकर ये याचिका दायर की गई थी.याचिका में कहा गया है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों और 2002 के गुजरात दंगों के पीड़ितों को ऐसी छूट दी गई है,लेकिन विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को इस तरह की कोई भी छूट नहीं मिली. याचिका में यह भी कहा गया कि 1990 में घाटी में लक्षित नस्लीय सफाई और जबरन विस्थापन की वजह से बहुत से कश्मीरी उपेक्षित रहे. ऐसे में उपेक्षित कश्मीरी हिंदुओं को अभी तक इस तरह केसमान सकारात्मक उपायों का लाभ नहीं मिल सका और इससे वंचित रहे. याचिका में उल्लेख किया गया है कि कश्मीरी हिंदुओं को जनवरी 1990 में अपनी पैतृक भूमि से भागने के लिए मजबूर किया गया था. इस वजह से तीन दशकों से ज्यादा समय तक उनके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है. याचिका में यह भी कहा गया कि विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की दूसरी पीढ़ी, जिन्होंनेशरणार्थी शिविरों और जगह-जगह बस्तियों में अपना समय बिताया है. अब उन्हें सरकारी नौकरियों में आयु सीमा के प्रतिबंधों की वजह से रोजगार में बाधाएं झेलनी पड़ रही हैं और उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में उन्हें ग्रुप सी और डी की नौकरियों में छूट दिया जाना चाहिए.