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सस्पेंडेड हॉस्पिटल स्टाफ: महिला प्रसूता को भर्ती न करने से फर्श पर हुआ प्रसव

हरिद्वार/देहरादूुन हरिद्वार के एक अस्पताल में मानवता शर्मसार हो गई। जिले के महिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला को स्टाफ ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। जिसके चलते प्रसूता को अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें महिला फर्श पर दर्द से कराहते हुए नजर आ रही है। महिला द्वारा फर्श पर बच्ची को जन्म देने के मामले का महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। क्या है मामला जानकारी के अनुसार, महिला आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है। ब्रह्मपुरी निवासी गर्भवती महिला जिला महिला अस्पताल मंगलवार रात साढ़े नौ बजे अस्पताल आयी थी। आरोपों के अनुसार महिला चिकित्सक की लापरवाही एवं अमानवीय व्यवहार के चलते महिला को समय से लैबर रूम में नहीं ले जाया गया। इसके चलते गर्भवती महिला ने बेड पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। परिजनों और साथ आई आशा कार्यकर्ता का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर डॉ. सोनाली, जो कि संविदा पर नियुक्त थीं, ने महिला को भर्ती करने से साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि अस्पताल में प्रसव नहीं होता। महिला आयोग ने संज्ञान लिया मामला हरिद्वार में महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल का कहना है कि गर्भवती महिला के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने सीएमओ आरके सिंह और कमल जोशी को जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ताकि भविष्य में ऐसी घटना से बचा जा सके। अमानवीय व्यवहार पर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर की ओर से गर्भवती महिला के साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाकर बुधवार को पीएमएस के कार्यालय में धरना दिया। उन्होंने इस घटना को लेकर पीएमएस को माला पहनाकर विरोध जताया। आरोप है कि महिला डॉक्टर के अमानवीय व्यवहार के चलते गर्भवती महिला ने बेड में ही बच्चे को जन्म दे दिया।  

RSS का उद्देश्य क्या है? पीएम मोदी ने समझाया सेवा, अनुशासन और राष्ट्र भावना का महत्व

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100वें स्थापना दिवस के मौके पर संघ की ऐतिहासिक यात्रा और राष्ट्रनिर्माण में इसके योगदान पर अपने विचार साझा किेए। पीएम मोदी ने 'एक्स', पर पोस्ट करते हुए लिखा, "आज से 100 साल पहले विजयादशमी के दिन ही समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। लंबे कालखंड के दौरान असंख्य स्वयंसेवकों ने इस संकल्प को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसे लेकर मैंने अपने विचारों को शब्दों में ढालने का प्रयास किया है।" इस युग में संघ अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग पोस्ट करते हुए लिखा, 100 वर्ष पूर्व विजयदशमी के महापर्व पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना हुई थी। ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनर्स्थापन था,जिसमें राष्ट्र चेतना समय-समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए,नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है। ये हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने मिल रहा है। मैं इस अवसर पर राष्ट्रसेवा के संकल्प को समर्पित कोटि-कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं। मैं संघ के संस्थापक, हम सभी के आदर्श, परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। संघ की 100 वर्षों की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के भी जारी किए हैं। संघ के किनारे सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित हुए- पीएम मोदी पीएम ने लिखा, जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं, उसी तरह संघ के किनारे भी सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित हुए हैं। जैसे एक नदी जिन रास्तों से बहती हैं, उन क्षेत्रों को अपने जल से समृद्ध करती हैं, वैसे ही संघ ने इस देश के हर क्षेत्र, समाज के हर आयाम को स्पर्श किया है। जिस तरह एक नदी कई धाराओं में खुद को प्रकट करती है, संघ की यात्रा भी ऐसी ही है। संघ के अलग-अलग संगठन भी जीवन के हर पक्ष से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करते हैं। शिक्षा, कृषि, समाज कल्याण, आदिवासी कल्याण,महिला सशक्तिकरण, समाज जीवन के ऐसे कई क्षेत्रों में संघ निरंतर कार्य करता रहा है। विविध क्षेत्र में काम करने वाले हर संगठन का उद्देश्य एक ही है, भाव एक ही है….राष्ट्र प्रथम संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला- पीएम मोदी अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण रास्ता चुना और इस चलने के लिए जो कार्यपद्धति चुनी वो थी नित्य-नियमित चलने वाली शाखाएं। संघ शाखा का मैदान, एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की अहम् से वयं की यात्रा शुरू होती है। संघ की शाखाएं…व्यक्ति निर्माण की यज्ञवेदी हैं। राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति यही संघ की सौ वर्षों की यात्रा का आधार बने। इन्हीं स्तंभों पर खड़े होकर संघ ने लाखों स्वयंसेवकों को गढ़ा, जो विभिन्न क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ा रहे हैं। संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया- पीएम मोदी अपनी 100 वर्षों की इस यात्रा में, संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया, स्वाभिमान जगाया। संघ देश के उन क्षेत्रों में भी कार्य करता रहा है, जो दुर्गम हैं, जहां पहुंचना सबसे कठिन है। संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, आदिवासी रीति-रिवाज, आदिवासी मूल्यों को सहेजने-संवारने में अपना सहयोग देता रहा है, अपना कर्तव्य निभा रहा है। आज सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम, आदिवासी समाज के सशक्तिकरण का स्तंभ बनकर उभरे हैं।  

सिरमौर सड़क हादसा: कार गिरी गहरी खाई में, दो लोगों ने गंवाई जान

नाहन हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में दशहरा के दिन एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहां बारात में जा रही एक कार नैनाटिक्कर-ढंगयार मार्ग पर किला कलाच के पास दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सुल्तानपुर रेफर किए गए घायल घायलों को इलाज के लिए एमएमयू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सुल्तानपुर रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार सोलन जिला के अर्की उपमंडल के घेणा भूमती गांव से बारात पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के ढंगयार जा रही थी। गुरुवार सुबह लगभग 9 बजे किला कलाच के पास कार अनियंत्रित होकर करीब 150 मीटर गहरी खाई में गिर गई।   जयदेव और केशव की हालत काफी गंभीर इस हादसे में वीरेंद्र और लीला दत्त की मौके पर मौत हो गई, जबकि चालक केशव, जयदेव और कमलचंद घायल हो गए। इनमें से जयदेव और केशव की हालत नाजुक बताई जा रही है। इस मामले पर पुलिस थाना पच्छाद के प्रभारी जय सिंह ने बताया कि कार के अनियंत्रित होकर खाई में गिरने से यह दुखद घटना हुई। हादसे की जांच की जा रही है। 

सेक्स का लालच देकर फंसाया गया शख्स, मुंबई में रूह कंपा देने वाली घटना

 मुंबई मुंबई की चमक-दमक के पीछे छिपे अपराध की एक चौंकाने वाली परत एक बार फिर सामने आई है। वीपी रोड पुलिस ने एक ऐसे हनीट्रैप गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो शारीरिक संबंध का लालच देकर लोगों को फंसा कर उनसे मोटी रकम ऐंठ रहा था। इस गैंग की चपेट में आए एक 46 वर्षीय व्यापारी से जबरन 35,000 रुपये वसूले गए। पुलिस ने मामले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य महिला फरार है, जिसकी तलाश जारी है। मुंबई आया था कारोबारी, बन गया गैंग का शिकार घटना के अनुसार, महाराष्ट्र के जलगांव जिले से एक व्यापारी किसी व्यावसायिक काम के लिए मुंबई आया था। 30 सितंबर को वह छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पास खड़ा था, तभी एक महिला ने उससे संपर्क किया और महज 500 रुपये में यौन संबंध बनाने का झांसा दिया। व्यापारी के हामी भरते ही महिला ने उसे टैक्सी में बैठाया और गिरगांव इलाके के भारत भवन होटल के पास एक बिल्डिंग में ले गई। कमरे में ले जाकर रची गई साजिश कमरे में पहुंचने के बाद, वहां पहले से मौजूद एक दूसरी महिला ने व्यापारी से अपने कपड़े उतारने के लिए कहा। जैसे ही उसने अपना मोबाइल निकाला, महिला ने अचानक शोर मचाते हुए उस पर "वीडियो बनाने" का आरोप लगा दिया। उसी समय तीन अन्य महिलाएं कमरे में घुस आईं और मिलकर उसे धमकाने लगीं। ऐसे लूटी गई रकम – ऑनलाइन ट्रांसफर और कैश उगाही गैंग की महिलाओं ने व्यापारी का फोन जबरदस्ती अनलॉक करवाया और एक मोबाइल ऐप के जरिए उसके खाते से 22,000 रुपये ट्रांसफर कर लिए। इसके बाद उसके पास मौजूद 13,000 रुपये नकद भी छीन लिए और चेतावनी दी कि यदि उसने पुलिस से संपर्क किया तो उसकी निजी वीडियो वायरल कर दी जाएगी।   डर से चुप रहा पीड़ित, फिर जुटाया हौसला घबराया हुआ व्यापारी शुरुआत में इस घटना को लेकर चुप रहा। लेकिन कुछ दिनों बाद उसने साहस जुटाकर वीपी रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने जब मामले की तहकीकात शुरू की तो मोबाइल ट्रांजैक्शन और आसपास के सीसीटीवी फुटेज के जरिए तीन महिलाओं की पहचान कर उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार महिलाएं और जांच की दिशा गिरफ्तार महिलाओं की पहचान माजिदा नूर सरदार गाझी (35), रूपा विश्वनाथ दास (47) और नसिम्मा जमान शेख (38) के रूप में हुई है। तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद दो दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है। मामले में एक महिला अब भी फरार है, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। पुलिस उपायुक्त (जोन 2) मोहित गर्ग ने बताया कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। शक जताया जा रहा है कि यह गैंग इसी तरह की कई घटनाओं को अंजाम दे चुका है, लेकिन बदनामी के डर से अधिकतर पीड़ित सामने नहीं आते।  

फिलीपीन में भूकंप की तबाही: जान-माल का नुकसान, लोग सुरक्षित आश्रयों में रहने को मजबूर

फिलीपीन मध्य फिलीपीन में आए विनाशकारी भूकंप के बाद बचावकर्मियों ने ढहे मकानों और अन्य क्षतिग्रस्त इमारतों में खुदाई करने वाले वाली मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से जीवित लोगों की तलाश की। फिलीपीन में आए शक्तिशाली भूकंप के कारण कम से कम 72 लोगों की मौत हो गई है और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार की रात लगभग 10 बजे 6.9 तीव्रता का भूकंप आया जिससे सेबू प्रांत के बोगो शहर और आसपास के गांवों में कई मकान, नाइट क्लब और व्यापारिक इमारतें ढह गईं तथा इनके मलबे में कई लोग फंस गए। इस भूकंप के कारण मारे गए लोगों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। छिटपुट बारिश और क्षतिग्रस्त पुलों एवं सड़कों के कारण बचाव अभियान में बाधा पैदा हुई है। नारंगी और पीले रंग की हैट पहने बचावकर्मियों ने एक ढही इमारत के मलबे में जीवित लोगों की तलाश करने के लिए स्पॉटलाइट, एक खुदाई मशीन एवं खोजी कुत्तों की मदद ली। भूकंप का केंद्र बोगो से लगभग 19 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पांच किलोमीटर की गहराई में था। बोगो सेबू प्रांत का एक तटीय शहर है और इसकी आबादी लगभग 90,000 है। बोगो शहर के आपदा-शमन अधिकारी रेक्स यगोट ने बुधवार को ‘एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि भूस्खलन और चट्टानों से प्रभावित एक पहाड़ी गांव में झुग्गियों में खोज और बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए बचावर्मियों ने वहां एक खुदाई मशीन ले जाने का प्रयास किया।   एक अन्य आपदा न्यूनीकरण अधिकारी ग्लेन उर्सल ने कहा, ‘‘इस क्षेत्र में बचाव अभियान चलाना कठिन है क्योंकि यहां खतरनाक स्थितियां हैं।'' उन्होंने बताया कि कुछ जीवित लोगों को पहाड़ी गांव से अस्पताल लाया गया है। फिलीपीन ज्वालामुखी एवं भूकंप विज्ञान संस्थान ने कुछ देर के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की थी और लोगों को सेबू तथा निकटवर्ती प्रांतों लेयते एवं बिलिरान के तटीय क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी थी लेकिन कुछ ही घंटों बाद चेतावनी हटा ली गई। घबराए हुए हजारों लोगों ने चेतावनी वापस लिए जाने के बावजूद अपने घरों में लौटने से इनकार कर दिया और वे रुक-रुक कर हो रही बारिश के बावजूद रात भर घास के खुले मैदानों और उद्यानों में ही रहे। भूकंप प्रभावित शहरों और कस्बों में स्कूल एवं सरकारी कार्यालय बंद कर दिए गए हैं और इमारतों की सुरक्षा की जांच की जा रही है। ‘फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी' के निदेशक टेरेसिटो बैकोलकोल ने बताया कि मंगलवार रात आए भूकंप के बाद 600 से अधिक झटके महसूस किए गए। सेबू और अन्य प्रांत उस उष्णकटिबंधीय तूफान से अभी उबर रहे थे जिसने शुक्रवार को मध्य क्षेत्र में तबाही मचाई थी जिससे कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई थी।    

इतिहास बनने जा रहा है: भारत का रणनीतिक फैसला, पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय संकट पर लगेगा असर

नई दिल्ली  दुनियाभर में जारी संघर्ष और युद्धग्रस्त परिस्थितियों के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक देशों (UN TCCs) का सम्मेलन बुलाया है। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 14 से 16 अक्टूबर तक दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें लगभग 30 देशों के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व शामिल होंगे। सम्मेलन का उद्देश्य शांति स्थापना अभियानों के अनुभव, दृष्टिकोण और प्रतिबद्धताओं को साझा करना है। दिलचस्प बात यह है कि इस सम्मेलन में चीन और पाकिस्तान को शामिल नहीं किया गया है, जबकि भारत ने गाजा और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सैनिक तैनाती पर भी स्पष्ट रुख अपनाया है। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि भारत केवल संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों के तहत ही किसी विदेशी संघर्ष क्षेत्र में सैनिक तैनात करेगा। ट्रंप के लिए झटका उधर,अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी भारत का यह कदम झटका देने वाला होगा क्योंकि वह दुनियाभर में शांति दूत बनने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, हमास-इजरायल टकराव, भारत-पाक तनाव और कई अन्य विवादित क्षेत्रों में मध्यस्थता के लिए ट्रंप हमेशा सक्रिय रहते हैं। हाल ही में उन्होंने गाजा में शांति विराम के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को व्हाइट हाउस बुलाया। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का उद्देश्य शांतिदूत बनकर नोबेल पुरस्कार जीतने की कोशिश में भी छुपा हुआ है। इसी बीच, भारत में भी शांति और सुरक्षा पर बड़ी बैठक अमेरिका, चीन और पाक के लिए  बड़ा झटका साबित हो सकती है।   सम्मेलन का महत्व और भारत का योगदान भारत ने पिछले 75 वर्षों में 50 से अधिक मिशनों में 2,90,000 से अधिक शांति सैनिकों को भेजा, जिनमें से 182 सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत ने 2007 में लाइबेरिया में पहली बार ‘ऑल वुमन पुलिस कंटिंजेंट’ तैनात कर इतिहास रचा। इसके अलावा, फरवरी 2025 में भारत ने ग्लोबल साउथ महिला शांति सैनिकों का सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें 35 देशों ने हिस्सा लिया। भारत ने लगातार यह संदेश दिया है कि शांति सैनिकों की तैनाती केवल यूएन के झंडे तले ही की जाएगी। इसके साथ ही, भारत ने यूएन शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों की जवाबदेही, तकनीकी समाधानों का उपयोग, और शांति स्थापना अभियानों में संसाधनों का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्मेलन के मुख्य बिंदु क्षमता निर्माण और सतत शांति स्थापना अभियानों के लिए संसाधन जुटाना शांति स्थापना अभियानों में तकनीक और आधुनिक समाधान का उपयोग प्रतिनिधि दल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा पहल और तकनीकी समाधानों का अवलोकन करेंगे और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। भारत की वैश्विक छवि लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, एवीएसएम, वीएसएम, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (IS&T) ने कहा कि यह भारत के लिए गौरव की बात है कि वह इस बहुपक्षीय आयोजन की मेजबानी कर रहा है। उनका कहना था कि यह सम्मेलन साझा मंच तैयार करने का अवसर है, जहां विभिन्न देशों के अनुभव और प्रतिबद्धता संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत शांति स्थापना की जिम्मेदारी को मजबूत करेंगे। भारत का यह कदम उसकी सांस्कृतिक और नैतिक विदेश नीति, वैश्विक शांति और सुरक्षा में योगदान, और शांति सैनिकों की सुरक्षा एवं उचित प्रतिनिधित्व के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत लगातार यह सुनिश्चित करता रहा है कि शांति अभियानों में उसका योगदान निष्पक्ष, पारदर्शी और संयुक्त राष्ट्र के मानकों के अनुरूप हो।  

PoK में बिगड़ते हालात: आटा विवाद से आसिम मुनीर की सेना तक, जानें पूरी कहानी

इस्लामाबाद  PoK यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी हैं। अब प्रदर्शनकारियों ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई वाली सेना को भी आड़े हाथों लिया है। पाकिस्तान सरकार और सेना की तुलना चुड़ैल से की जा रही है, जो लोगों की हत्या करने पर तुली हुई है। प्रदर्शनकारी अब भ्रष्टाचार और राजनीतिक अधिकार नहीं दिए जाने के भी आरोप लगा रहे हैं। खबर है कि पाकिस्तानी बलों ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की थी, जिसमें कम से कम 12 आम नागरिकों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा घायल हो गए थे। पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में 3 पुलिसकर्मियों की भी मौत हो गई थी। साथ ही 9 घायल हो गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, आवामी ऐक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने भाषण दिया, 'हमारा संघर्ष किसी एक व्यक्ति से नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम से है।' उन्होंने कहा, 'यह जनता का संघर्ष है, यह आपका संघर्ष है और यह हम सभी का संघर्ष है। हम सभी मिलकर इस सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाएंगे।' उन्होंने पाकिस्तानी सेना और सरकार को लेकर कहा, 'एक चुड़ैल लोगों को मारने पर तुली हुई है।' मीर ने कहा, 'यह संघर्ष आखिरी सांस तक जारी रहेगा।' उन्होंने कहा, 'हम चुप नहीं रहेंगे। पीओके के लोग अब दबाव के आगे और नहीं झुकेंगे।' कैसे शुरू हुआ प्रदर्शन यह विरोध प्रदर्शन दो साल पहले क्षेत्र में आटे और बिजली की नियमित और रियायती आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू हुआ था लेकिन अब इसमें अतिरिक्त मांगें भी जुड़ गई हैं, जैसे कश्मीरी अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों में कटौती, आरक्षित विधानसभा सीटों का उन्मूलन और मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं। जेकेजेएएसी का आरोप है कि इस बार का विरोध प्रदर्शन इसलिये किया जा रहा है क्योंकि सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह से लागू करने में विफल रही है। प्रदर्शनकारियों ने 38 सूत्री मांगपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख मांगें शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की समाप्ति और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों की वापसी शामिल हैं। अन्य मांगों में कई सड़क परियोजनाओं का निर्माण, करों में राहत, आटे और बिजली पर सब्सिडी, शरणार्थियों के लिए नौकरी कोटा समाप्त करना, न्यायपालिका में सुधार और अन्य स्थानीय मांगें शामिल हैं।  

जब गोडसे ने कोर्ट में कहा ये शब्द, जज भी नहीं रोक पाए अपनी आँखों में आँसू

नई दिल्ली  नाथूराम गोडसे, देश के राजनीतिक इतिहास में इस एक नाम की चर्चा खूब होती है, महात्मा गांधी की जयंती और पुण्यतिथि पर तो खासकर। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि गांधी जी की हत्या के इतने सालों के बाद भी उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को लेकर समाज में दो विचार हैं। एक जो उसे दोषी मानता है, एक जो उसके किए पर उसे शाबाशी देता है। हर साल की तरह 2 अक्टूबर और 30 जनवरी को नाथूराम गोडसे को ट्रेंड में लाने का रिवाज भी है। महात्मा गांधी के साथ नीचे आपको नाथूराम गोडसे ट्रेंडिंग में लिखा दिख जाएगा। खैर, आज हम हम गांधी हत्याकांड से जुड़ा वो पन्ना खोलेंगे जिसके दम पर गोडसे के समर्थक दंभ भरते हैं। वो पन्ना नाथूराम गोडे की वो स्पीच है जो उसने दोषी सिद्ध होने के बाद कोर्ट में दी थी। कहते हैं कि उस वक्त गोडसे की स्पीच वहां बैठे एक जज के आंखों में भी आंसू ला दिए थे। कहा था कि उस समय अदालत में उपस्थित लोगों को जूरी बना दिया जाता और उनसे फैसला देने को कहा जाता, तो निस्संदेह वे प्रचंड बहुमत से नाथूराम के निर्दोष होने का निर्णय देते। तो चलिए आपको भी उस स्पीच की एक-एक बात बता देते हैं। नाथूराम गोडसे की ये स्पीच आपको यूट्यूब या गूगल सर्च पर आसानी से मिल जाएगी। ‘मैंने गांधी को क्यूं मारा’ किताब में भी इसका जिक्र है। तो चलिए शुरू करते हैं। नाथूराम गोडसे ने उस दिन कोर्ट में कहा कि मेरा नेताओं से मतभेद था तथा अब तक है। यह मेरे 28 फरवरी 1935 के सावरकर के नाम पत्र से भली-भांति विदित होता है। आज भी मेरे वही विचार हैं। गांधी जी से मेरी शत्रुता नहीं थी। लोग कहते हैं कि पाकिस्तान योजना में उनका मन शुद्ध था। मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरे मन में देश प्रेम के अतिरिक्त कुछ ना था। मुझे इस कारण हाथ उठाना पड़ा कि पाकिस्तान बनने पर जो भयंकर घटनाएं हुई उनके उत्तरदाई केवल गांधी जी थे। मुझे यह पता था कि हत्या के बाद लोगों के विचार मेरे विषय में बदल जाएंगे। समाज में मेरा जितना आदर है वह नष्ट हो जाएगा। मैं जानता था कि समाचार पत्र बुरी तरह मेरी निंदा करेंगे किंतु मैं नहीं जानता था कि अखबार इतने पतित हो जाएंगे कि सत्य का गला घोट देंगे। समाचार पत्रों ने कभी निष्पक्षता से नहीं लिखा। यदि वे देश के हित का अधिक ध्यान रखते और एक मनुष्य की व्यक्तिगत इच्छाओं को कम ध्यान देते तो देश के नेता पाकिस्तान स्वीकार न करते। समाचार पत्रों की यह नीति थी कि लीडरों की गलतियों को प्रकट ना होने दिया जाए। देश का विभाजन इससे सरल हो गया। ऐसे भ्रष्ट समाचार पत्रों के डर से मैंने अपने निश्चय की दृढ़ता को विचलित नहीं होने दिया। गोडसे आगे कहते हैं कि कुछ लोग कहते हैं कि यदि पाकिस्तान ना बनता, तो आजादी न मिलती। मैं इस विचार को ठीक नहीं मानता। लीडरों ने अपने पाप को छिपाने के लिए यह बहाना बनाया है। गांधीवादी कहते हैं कि उन्होंने अपनी शक्ति से स्वराज्य पाया। यदि उन्होंने अपनी शक्ति से स्वराज्य लिया है तो उन्होंने हारे हुए अंग्रेजों को पाकिस्तान की शर्त क्यों रखने दी? और शक्ति से क्यों ना रोका? मेरे विचार से महात्मा और उनके अनुयायियों की एक ही पॉलिसी रही और वो यह कि पहले यवनों की मांग पर विरोध दर्शाना फिर हिचक दिखाना और अंत में आत्मसमर्पण कर देना। इसी प्रकारपाकिस्तान की रूपरेखा स्वीकार कर ली गई। छल से स्वीकार किया पाकिस्तान नाथूराम ने कोर्ट में कहा कि 15 अगस्त 1947 को छल पूर्वक पाकिस्तान स्वीकार कर लिया गया। पंजाब, बंगाल, सीमा प्रांत और सिंध के हिंदुओं का कोई विचार नहीं किया गया। देश के टुकड़े करके एक मजहबी धर्मनिष्ठित मुस्लिम राज्य बना दिया गया। मुसलमानों को अपने अराष्ट्रीय कार्यों का फल पाकिस्तान के रूप में मिल गया। गांधीवादी नेताओं ने उन लोगों को देशद्रोही सांप्रदायिक कहकर पुकारा जिन्होंने पाकिस्तान का विरोध किया था पाकिस्तान स्वयं स्वीकार करके जिन्ना की सब बात मान ली। इस दुर्घटना से मेरे मन की शांति भंग हो गई। पाकिस्तान बनाने के बाद कांग्रेस सरकार पाकिस्तान के हिंदुओं की रक्षा करती तो मेरा क्रोध शांत हो जाता। मैं नहीं देख सकता था कि जनता को धोखा दिया जाए। करोड़ों हिंदुओं को मुसलमानों की दया पर छोड़कर गांधीवादी कहते रहे कि हिंदुओं को पाकिस्तान से नहीं आना चाहिए और वहीं रहना चाहिए। इस प्रकार हिंदू मुसलमानों के चंगुल में फंस गए और विकट विपत्तियों के शिकार हुए। गोडसे ने भरी कोर्ट में अपने बचाव में आगे कहा कि जब मुझे इन घटनाओं की याद आती है तो मैं कांप उठता हूं। प्रतिदिन सहस्त्रों हिंदुओं का संहार होता था। 15,000 सिखों को गोलियों से बून दिया गया। हिंदू स्त्रियों को नग्न करके जुलूस निकाले गए। उनको पशुओं की भांति बेचा गया। लाखों हिंदुओं को धर्म बचाकर भागना पड़ा। 40 मील लंबा हिंदू निराश्रितों का जत्था हिंदुस्तान की ओर आ रहा था। हिंदुस्तान शासन इस भयानक कृत्य का कैसे भयानक निवारण करता था।

कराची का रास्ता सर क्रीक से जाता है? जानें राजनाथ की चेतावनी और पाक की तैयारी

भुज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सर क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में कोई दुस्साहस किया, तो भारत इसका कड़ा और निर्णायक जवाब देगा। राजनाथ सिंह ने कहा, "पाकिस्तान ने सर क्रीक में अपनी सैन्य ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाया है। अगर पाकिस्तान कोई गलत हरकत करता है, तो हम उसे एक मजबूत संदेश देंगे। पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची का रास्ता सर क्रीक से होकर जाता है।" गुजरात के भुज में एक सैन्य अड्डे पर सैनिकों को संबोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने दशहरा के अवसर पर 'शस्त्र पूजा' करने से पहले यह बयान दिया। रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद भी सर क्रीक क्षेत्र में सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बार-बार बातचीत के प्रयास किए हैं, लेकिन पाकिस्तान की मंशा साफ नहीं है। उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता के 78 साल बाद भी सर क्रीक क्षेत्र में सीमा को लेकर विवाद बना हुआ है। भारत ने इस मुद्दे को बातचीत के जरिए हल करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान की नीयत में खोट है।" सर क्रीक क्या है और इसका क्या महत्व है? सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच गुजरात के कच्छ क्षेत्र और सिंध प्रांत के बीच स्थित एक 96 किलोमीटर लंबी खाड़ी (estuary) है, जो अरब सागर में मिलती है। यह क्षेत्र दलदली और ज्वारीय प्रभावों वाला है, जहां पानी का स्तर ज्वार-भाटे के साथ बदलता रहता है। यह भारत-पाकिस्तान सीमा का हिस्सा है और दोनों देशों के बीच एक विवादित क्षेत्र भी है। सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र अरब सागर के तटीय क्षेत्र में स्थित है, जो सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समुद्री व्यापार और नौसैनिक गतिविधियों के लिए रणनीतिक बिंदु है। इस क्षेत्र में नौसेना की गतिविधियों और समुद्री निगरानी के लिए यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है। सर क्रीक क्षेत्र में समुद्री संसाधन, जैसे मछली और संभावित तेल व गैस भंडार, मौजूद हो सकते हैं। यह क्षेत्र समुद्री आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के निर्धारण के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो मछली पकड़ने, खनन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और पाकिस्तान के बीच सर क्रीक की सीमा को लेकर विवाद है। भारत का कहना है कि सीमा को खाड़ी के बीच से होकर गुजरना चाहिए, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि सीमा को भारत की ओर अधिक होना चाहिए। यह विवाद 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद से चला आ रहा है। भारत ने हमेशा इस मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की वकालत की है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से बार-बार उकसावे की कार्रवाइयां देखने को मिली हैं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर गर्व रक्षा मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों की हालिया उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय सेना ने सभी सैन्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया। उन्होंने कहा, "मुझे गर्व है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी सैन्य लक्ष्यों को पूरा किया। हालांकि, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई अभी जारी है।" राजनाथ सिंह ने यह भी खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने लेह से लेकर सर क्रीक क्षेत्र तक भारत की रक्षा प्रणाली को भेदने की नाकाम कोशिश की थी। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने भारत की रक्षा प्रणाली को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया।"  

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा कदम: यूक्रेन को लेकर बदल रही नीति, रूस से रिश्तों पर नया मोड़

वाशिंगटन  ऐसा लगता है कि यूक्रेन को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नजरिया काफी बदल गया है। पहली नजर में तो ऐसा लगता है कि उन्होंने पूरी तरह से इस आशावादी रुख को अपना लिया है कि कीव ‘‘पूरे यूक्रेन को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए लड़ने और जीतने की स्थिति में है’’। इसके साथ यह संदेश भी आया कि इसे साकार करने के लिए यूरोपीय देशों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। ट्रंप के अनुसार यूक्रेन की जीत “समय, धैर्य और यूरोप तथा विशेष रूप से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के वित्तीय समर्थन” पर निर्भर करती है। अमेरिका की एकमात्र प्रतिबद्धता ‘‘नाटो को हथियार उपलब्ध कराना है ताकि नाटो उनके साथ जो चाहे कर सके।’’ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने संदेश के अंत में लिखा, ‘‘सभी को शुभकामनाएं!’’ यह शायद अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति शांति समझौते के अपने प्रयासों से पीछे हट रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि उन्होंने रूस के अपने समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अलग समझौते का विचार छोड़ दिया है। लेकिन यहीं पर अच्छी खबर समाप्त हो जाती है और यहीं पर यूरोपीय नेतृत्व वाले गठबंधन को इस महाद्वीप को और अधिक अस्थिर वातावरण में सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करने की आवश्यकता होगी। नाटो हवाई क्षेत्र में रूसी घुसपैठ के कई सप्ताह बाद, ड्रोनों ने – जिनके रूस से जुड़े होने की अत्यधिक संभावना है – कोपेनहेगन हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र में दो बार डेनमार्क के हवाई क्षेत्र को बाधित किया। ऐसा लगा जैसे कि यह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की द्वारा 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए उनके भाषण में की गई भविष्यवाणी का पूर्वाभास था। पुतिन की लगातार उकसावे वाली गतिविधियां कीव के यूरोपीय सहयोगियों के लिए एक खुली चुनौती हैं। इस गठबंधन के केंद्र में, यूरोपीय संघ ने निश्चित रूप से यह प्रदर्शित किया है कि वह इस चुनौती का सामना करने के लिए अपनी वाक्पटुता दिखाने को तैयार है। ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के संस्थानों ने अपने दृढ़ संकल्प के बारे में कभी कोई संदेह नहीं छोड़ा है कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के आक्रामक युद्ध को ‘‘यूक्रेन के लिए एक न्यायसंगत और स्थायी शांति के साथ समाप्त करने की आवश्यकता है’’। यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हाल में अपने संबोधन में इसका जिक्र किया था। सबसे पहले, इच्छुक देशों का गठबंधन एक सुसंगत निकाय नहीं है। इसके सदस्यों में नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य, साथ ही ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। लेकिन अमेरिका इसमें शामिल नहीं है। फरवरी में आठ देशों, यूरोपीय संघ और नाटो से बढ़कर, अप्रैल में 33 और सितंबर में 39 सदस्य हो गए। कीव को सैन्य उपकरणों से सहायता देने वाले 57 सदस्यीय यूक्रेन रक्षा संपर्क समूह, जिसकी 30वीं बैठक सितंबर की शुरुआत में हुई थी, के साथ इसका संबंध पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यह भी पूरी तरह साफ नहीं है कि यूरोपीय संघ और नाटो के नेता अपने संगठन के सभी सदस्यों की ओर से बोल रहे हैं या नहीं। उदाहरण के लिए यूरोपीय संघ और नाटो के सदस्यों में हंगरी और स्लोवाकिया ने रूस के विरुद्ध यूरोप की रक्षा के मामले में अस्पष्ट रुख अपनाया है। नाटो के यूरोपीय सदस्य अमेरिका के इस कदम से बेहद चिंतित हैं और यह चिंता गलत भी नहीं है कि अमेरिका ने नाटो को छोड़ दिया है। यूरोप को अपना धन बढ़ाने, अपनी सैन्य शक्ति विकसित करने तथा निर्णय लेने की ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है जो टालमटोल में न फंसी हो, ताकि वह उस छद्म युद्ध को जीत सके जिसे क्रेमलिन ने यूक्रेन और उसके सहयोगियों पर थोपा है। ऐसा करने से यह सुनिश्चित हो जायेगा कि यूरोपीय देश रूस को यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध को पश्चिम के साथ पूर्ण सैन्य टकराव में बदलने से रोकने में बेहतर स्थिति में हैं।