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PM मोदी बोले – मां को गाली देने वालों को भी माफ करता हूं, शिव का भक्त हूं

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने खुद को भगवान शिव का भक्त बताया। उन्होंने कहा कि कोई मुझे कितनी भी गाली दे, मैं सारा जहर निगल जाता हूं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि मेरा रिपोर्ट कंट्रोल सिर्फ देश की 140 करोड़ जनता है, वही मेरा मालिक है। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भूपेन हजारिका का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार भूपेन हजारिका जैसे असम के महान सपूतों के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने कहा, "मेरे लिए तो जनता-जनार्दन ही मेरा भगवान है। मेरे भगवान के पास जाकर मेरी आत्मा की आवाज नहीं निकलेगी तो और कहां निकलेगी। यही मेरे मालिक हैं, यही मेरे पूजनीय हैं, यही मेरा रिमोट कंट्रोल हैं और कोई मेरा रिमोट कंट्रोल नहीं है। 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं।" प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के दरांग में 6,300 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी। उन्होंने गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना की भी आधारशिला रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार असम आया हूं। गौरतलब है कि पिछले दिनों इंडिया गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा के समय बिहार के दरभंगा में एक मंच से विपक्षी दलों के कुछ कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी और उनके मां को गाली दी थी जिसका वीडियो सामने आया था। इस मामले में बिहार भाजपा की तरफ से एक प्राथमिकी दर्ज करवाई थी जिसमे कहा गया था कि वोटर अधिकार यात्रा के एक कार्यक्रम के दौरान मंच से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली दी गई। इस मामले में दरभंगा जिले की पुलिस ने सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के भवानीपुर पंचायत (वार्ड सं० 1) के भपुरा गंव निवासी अनीश कुरैशी के पुत्र मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा को गिरफ्तार किया था। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत वर्तमान में दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला देश है और असम इसके सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक है। कभी विकास के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रहा असम अब काफी बदल गया है और 13% की विकास दर के साथ उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यह प्रभावशाली उपलब्धि यहां के लोगों के दृढ़ संकल्प और समर्पण का प्रमाण है। यह असम के लोगों की कड़ी मेहनत और भाजपा की डबल इंजन सरकार के योगदान से प्रेरित सहयोगात्मक प्रयासों का भी परिणाम है। यही कारण है कि हिमंत बिस्वा सरमा जी और उनकी टीम को असम के लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है।"  

PM बनते ही सुशीला कार्की का बड़ा संदेश, हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई तय

नेपाल  नेपाल की राजनीति एक बार फिर अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। हाल ही में हुए संसद भंग और सड़कों पर भड़की हिंसा के बीच देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की ने रविवार को अंतरिम प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला। कार्की ने साफ कहा कि उनकी सरकार केवल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है न कि सत्ता में लंबे समय तक टिके रहने के लिए। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद कार्की ने अपने पहले संबोधन में Gen-Z को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि नेपाल में हाल में हुए हिंसक प्रदर्शन की जांच कराई जाएगी। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद कार्की ने अपने पहले संबोधन में कहा, “तोड़फोड़ की घटना में शामिल लोगों की जांच होगी। मेरा दल और मैं सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हम छह महीने से ज्यादा नहीं रुकेंगे और नई संसद के चुने जाने के बाद जिम्मेदारी सौंप देंगे। जनता के सहयोग के बिना हम सफल नहीं होंगे।” नेपाल में यह राजनीतिक संकट तब गहराया जब सत्ता में चल रही गठबंधन सरकार आंतरिक मतभेदों और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण गिर गई। संसद भंग होने के बाद विपक्षी दलों और नेपाल के युवाओं जिन्हें Gen-Z कहा गया, ने व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई जगहों पर हिंसक झड़पें और सरकारी संपत्तियों की तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। इन्हीं हालातों को नियंत्रित करने और अगले आम चुनाव तक व्यवस्था चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और संवैधानिक निकायों की सिफारिश पर कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया। कौन हैं सुशीला कार्की? सुशीला कार्की नेपाल की राजनीति और न्यायपालिका दोनों में ही एक चर्चित चेहरा रही हैं। वह 2016 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं और अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े फैसलों के लिए जानी गईं। कार्की की नियुक्ति को नेपाल की राजनीति में साफ-सुथरी छवि और महिला नेतृत्व को आगे लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। कार्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता बहाल करना और देश को चुनाव तक ले जाना है। हाल के वर्षों में नेपाल ने बार-बार सरकार बदलने का रिकॉर्ड बनाया है। केवल पिछले 10 वर्षों में देश में एक दर्जन से अधिक प्रधानमंत्रियों ने पदभार संभाला। इससे जनता का विश्वास कमजोर हुआ है और लोकतांत्रिक संस्थाएं दबाव में आई हैं। साथ ही, नेपाल इस समय आर्थिक संकट, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई से भी जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई सरकार को सिर्फ राजनीतिक संक्रमण संभालने तक सीमित न रहकर जनहित से जुड़े तात्कालिक मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। कार्की ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है। उन्होंने नागरिक समाज और युवाओं से अपील की कि वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिम्मेदारी निभाएं। नेपाल की जनता अब इस इंतजार में है कि क्या सुशीला कार्की का कार्यकाल वास्तव में राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक कदम साबित होगा या फिर यह भी नेपाल की राजनीति के अस्थिर अध्यायों में से एक बनकर रह जाएगा।  

ओवैसी ने सरकार पर साधा निशाना, पूछा – ‘जान की कीमत कम, पैसा ज्यादा?’

नई दिल्ली एशिया कप में रविवार रात होने वाले भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। पाहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बीच इस मैच पर सवाल उठाते हुए विपक्ष और पीड़ित परिवारों ने बहिष्कार की मांग की है। वहीं एआईएमआईएम चीफ और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ने भी सवाल उठाए हैं। AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “क्या हमारे 26 नागरिकों की जान की कीमत कुछ हजार करोड़ रुपये से कम है? प्रधानमंत्री ने कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते, बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते। फिर एक क्रिकेट मैच से बीसीसीआई को कितनी कमाई होगी, 2000 करोड़, 3000 करोड़? क्या पैसों की कीमत जान से ज्यादा है?” ओवैसी ने असम और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी सवाल किया कि क्या उनके पास यह ताकत नहीं है कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर सकें? कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने मैच रद्द करने की मांग की और कहा कि सरकार के "नो टॉक्स विद टेरर" वाले रुख से यह निर्णय मेल नहीं खाता। AAP नेताओं ने शनिवार को पाकिस्तान का पुतला जलाया। पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने क्लबों और रेस्टोरेंट्स का बहिष्कार करने की अपील की, जो मैच का लाइव प्रसारण करेंगे। शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने नागरिकों से मैच न देखने की अपील की। उन्होंने कहा, “क्रिकेट पर आतंक को तरजीह न दें, पाहलगाम के 26 परिवारों के साथ खड़े हों।” शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए कहा, “युद्ध और क्रिकेट साथ-साथ कैसे हो सकते हैं? इन्होंने देशभक्ति को भी धंधा बना दिया है।” भाजपा का पलटवार बीजेपी नेता दिलीप घोष ने कहा, “कांग्रेस के शासन में भी मैच खेले जाते थे। हमने पाकिस्तान को जंग में हराया है, क्रिकेट में भी हराएंगे। मैदान छोड़ना सही नहीं।” केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मैच और तनाव को अलग-अलग मुद्दे समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “खेल का भी महत्व है। खिलाड़ियों ने मेहनत की है। जो फैसला लिया गया है, सोच-समझकर लिया गया है।” आपको बता दें कि यह मैच पहले भारत में होना था, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को देखते हुए टूर्नामेंट को UAE स्थानांतरित किया गया। मैच रविवार रात 8 बजे दुबई में शुरू होगा।

सुशीला कार्की ने संभाली पीएम की कमान, नई कैबिनेट के गठन पर जारी मंथन

काठमांडू नेपाल की नवनियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की रविवार सुबह 11 बजे सिंह दरबार में आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। पूर्व मुख्य न्यायाधीश कार्की को शुक्रवार रात को अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती हैं। वह मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने में अपने सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श कर रही हैं। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार छोटा होगा। वहीं दूसरी ओर पीएम कार्की गृह, विदेश और रक्षा समेत लगभग दो दर्जन मंत्रालय अपने पास रख सकती हैं। मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच शनिवार को समय निकालकर वह सरकार विरोधी प्रदर्शन में घायलों से मिलने सिविल अस्पताल भी गईं थीं। शुक्रवार को शपथ लेने के तुरंत बाद भी वह अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना था। मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं 15 मंत्री काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, कार्की ने अपने मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने की तैयारी के लिए जेन जी आंदोलन के करीबी सलाहकारों और प्रमुख हस्तियों के साथ परामर्श शुरू कर दिया है। उनके एक सहयोगी ने दावा किया है कि कार्की रविवार सुबह अपने मंत्रिमंडल के गठन के लिए गहन चर्चा शुरू करेंगी। सभी 25 मंत्रालयों पर अधिकार रखने के बावजूद वह कथित तौर पर 15 से अधिक मंत्रियों के साथ एक सुव्यवस्थित मंत्रिमंडल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन नामों पर चल रहा है विचार काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री पदों के लिए जिन नामों पर विचार किया जा रहा है उनमें कानूनी विशेषज्ञ ओम प्रकाश आर्यल, पूर्व सेना अधिकारी बालानंद शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आनंद मोहन भट्टाराई, माधव सुंदर खड़का, अशीम मान सिंह बसन्यात और ऊर्जा विशेषज्ञ कुलमन घीसिंग शामिल हैं। चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. भगवान कोइराला, डॉ. संदुक रुइत, डॉ. जगदीश अग्रवाल और डॉ. पुकार चंद्र श्रेष्ठ जैसे प्रमुख लोगों के नामों पर विचार चल रहा है। नामों को लेकर हो रही है ऑनलाइन वोटिंग काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेशन जेड के सदस्य भी समानांतर परामर्श कर रहे हैं। इसके लिए वह ऑनलाइन वोटिंग का भी सहारा ले रहे हैं। अगर इन नामों पर आम सहमति बन जाती है, तो मंत्रिमंडल रविवार शाम तक शपथ ले सकता है, हालांकि चर्चा के नतीजों के आधार पर इसे सोमवार तक के लिए भी टाला जा सकता है। 5 मार्च 2026 को होंगे संसदीय चुनाव नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को नव नियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सिफारिश पर देश की संसद (प्रतिनिधि सभा) को भंग कर दिया था। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार सदन का विघटन 12 सितंबर 2025 की रात 11 बजे से प्रभावी हुआ। अंतरिम सरकार बनने के साथ ही अधिकारियों ने देश में नए सिरे से संसदीय चुनाव कराने का भी एलान कर दिया। नेपाल में अब 5 मार्च 2026 को आम चुनाव कराए जाएंगे। सोमवार से खुलेंगे स्कूल काठमांडू महानगरपालिका क्षेत्र के स्कूलों में सोमवार से कक्षाएं शुरू होंगी। शनिवार को जारी सूचना में महानगर ने कहा कि शिक्षक और कर्मचारी रविवार को ही स्कूल में उपस्थित होंगे, लेकिन पढ़ाई सोमवार से शुरू होगी। रविवार को स्कूलों में प्रशासनिक काम, क्षति का मूल्यांकन और विवरण संकलन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, जो स्कूल संचालन योग्य स्थिति में होंगे वहां कक्षाएं होंगी। युवाओं के आंदोलन के कारण 8 सितंबर से स्कूल बंद थे। नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हो रहा जनजीवन कई दिनों की अशांति के बाद नेपाल में अब धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो रहा है। काठमांडो घाटी समेत देश के अन्य हिस्सों से शनिवार को कर्फ्यू और प्रतिबंधात्मक आदेश हटा लिया गया। दुकानें, किराना स्टोर, सब्जी बाजार और शॉपिंग मॉल दोबारा खुल गए हैं। सड़कों पर भी वाहनों की चहल-पहल बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना ने प्रतिबंधात्मक आदेश या कर्फ्यू को शनिवार से आगे नहीं बढ़ाया है। प्रतिबंध हटने के साथ ही सार्वजनिक परिवहन सेवा पुनः शुरू हो गई। काठमांडू से देश के कई भागों के लिए लंबी दूरी की बसों का संचालन भी शुरू हो गया है। हालांकि, काठमांडू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिश्वो अधिकारी के अनुसार, हालांकि काठमांडू घाटी के अधिकांश क्षेत्र अब प्रतिबंधों से मुक्त हैं, लेकिन संभावित विरोध प्रदर्शनों को रोकने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिबंध जारी रहेंगे। प्रमुख सरकारी भवनों समेत कई स्थानों पर सफाई अभियान चलाया गया, जिन्हें हाल ही में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की तरफ से तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया गया था। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ शुरू हुए जेन-जी के आंदोलन के दौरान कम से कम 51 लोग मारे गए थे। पीएम ओली समेत उनके मंत्रियों को पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इसके बाद नेपाल की सेना ने सुरक्षा व्यवस्था को अपने हाथों में ले लिया था।

लंदन की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब: दक्षिणपंथी गुटों ने उठाई ये मांगें

लंदन ब्रिटेन की राजधानी लंदन में शनिवार को एक लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए। हालिया इतिहास का यह सबसे बड़ा दक्षिणपंथी संगठनों का प्रदर्शन है। एंटी इमिग्रेशन कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में करीब 1.10 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इस दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमले की भी खबरें सामने आईं। यह रैली यूनाइट द किंगडम मार्च के नाम से आयोजित की गई थी। इसके जवाब में स्टैंड अप टू रेसिज्म नामक काउंटर-प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें लगभग 5,000 लोगों ने भाग लिया। मेट्रोपॉलिटन पुलिस को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि दोनों गुट आमने-सामने न आ जाएं। पुलिस ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरों को तोड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने की कोशिश की। इस दौरान कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। हालात काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया और घुड़सवार दस्ते भी उतारे गए। शनिवार को लंदन में प्रदर्शन के अलावा कई बड़े फुटबॉल मैच और कॉन्सर्ट भी थे, जिसके चलते पुलिस ने 1,600 से अधिक अधिकारियों को तैनात किया। 500 अन्य शहरों से बुलाए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने यूनियन फ्लैग और सेंट जॉर्ज क्रॉस के झंडे लहराए। कुछ ने अमेरिकी और इजरायली झंडे भी थामे हुए थे। “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” कैप पहने कई लोग प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कई पोस्टरों पर लिखा था – “उन्हें घर भेजो”। टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है। उन्होंने मार्च को अभिव्यक्ति की आजादी का जश्न बताया। उन्होंने हाल ही में मारे गए अमेरिकी दक्षिणपंथी नेता चार्ली किर्क को भी श्रद्धांजलि दी। रॉबिन्सन ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “हजारों लाखों लोग आज लंदन की सड़कों पर एकजुट होकर अपनी आजादियों के लिए खड़े हैं।” रॉबिन्सन अपने समर्थकों के बीच खुद को पत्रकार और व्हिसलब्लोअर बताते हैं और कहते हैं कि वे सरकार की गलतियों को उजागर करते हैं। उनके समर्थकों में टेस्ला और एक्स के मालिक एलन मस्क जैसे प्रभावशाली नाम भी शामिल हैं। हालांकि, रीफॉर्म यूके जैसी बड़ी एंटी-इमिग्रेंट पार्टी उनसे दूरी बनाए रखती है, क्योंकि रॉबिन्सन के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। रैली में शामिल एक समर्थक सैंड्रा मिशेल ने कहा – “हम अपना देश वापस चाहते हैं। हम अपनी आजादी और अभिव्यक्ति का अधिकार वापस चाहते हैं। अवैध प्रवासियों को रोका जाना चाहिए। हम टॉमी पर भरोसा करते हैं।” पुलिस कमांडर क्लेयर हेन्स ने कहा, “हम इस प्रदर्शन को वैसे ही संभालेंगे जैसे किसी और प्रदर्शन को। बिना किसी पक्षपात के। लोगों को कानूनसम्मत अधिकार दिए जाएंगे, लेकिन अव्यवस्था फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।” उन्होंने माना कि पहले भी कुछ प्रदर्शनों में एंटी-मुस्लिम नारेबाजी और भड़काऊ घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि लंदन की विविध समुदायों को भयभीत होकर घरों में रहने की जरूरत नहीं है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिटेन में प्रवासियों के मुद्दे ने राजनीतिक बहस पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। इस साल अब तक 28,000 से अधिक प्रवासी छोटे नावों से इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन पहुंचे हैं। देशभर में सड़कों और मोहल्लों में लाल-सफेद झंडों की मौजूदगी बढ़ी है। समर्थकों का कहना है कि यह राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है, लेकिन एंटी-रेसिज्म कैंपेनरों का मानना है कि यह विदेशियों के प्रति नफरत का संदेश है।  

भरूच: फैक्ट्री में लगी आग से मचा हड़कंप, आसमान में उठे धुएं के गुबार

भरूच भरुच जिले के जीआईडीसी (GIDC) पानोली में स्थित संघवी ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (Sanghvi Organics Pvt Ltd) में शनिवार को एक बड़ी आग लग गई। दूर से ही धुएं के मोटे गुबार और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में दहशत फैल गई। अधिकारियों ने बताया कि दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं और आग बुझाने का काम फिलहाल जारी है। हालांकि, आग लगने की वजह और नुकसान का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आग पर काबू पाने के लिए मौके पर 15 से अधिक दमकल गाड़ियां मौजूद हैं। किसी के हताहत या घायल होने की खबर नहीं है। इस नई घटना से कुछ महीने पहले 2 अप्रैल को गुजरात में बनासकांठा जिले के डीसा में भी एक और भयानक आग लगी थी। वह आग एक गोदाम में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में एक बड़े धमाके से लगी थी, जिसमें कम से कम 21 लोग मारे गए थे, जिनमें से कई मध्य प्रदेश के प्रवासी मजदूर थे। उस समय के चश्मदीदों ने बताया था कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आस-पास के घरों तक हिल गए और धुएं का गुबार आसमान में छा गया। गोदाम के कुछ हिस्से गिर गए, जिससे मजदूर मलबे में फंस गए। बाद में, पुलिस ने पुष्टि की कि यह यूनिट बिना किसी वैध लाइसेंस और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए चलाई जा रही थी। इस त्रासदी के बाद फैक्ट्री के मालिक खूबचंद ठक्कर और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मेरे दिमाग की कीमत 200 करोड़ – नितिन गडकरी का बयान बना सुर्ख़ियों में

नई दिल्ली इथेनॉल को लेकर विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विरोधियों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, मेरा दिमाग की ही कीमत हर महीने 200 करोड़ की है। मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है और मैं कभी नीचे नहीं गिर सकता हूं। उन्होंने कहा कि वह जो कुछ भी करना चाहते हैं वह किसानों के हित के लिए है। इसका कमाई से कोई लेना-देना नहीं है। नागपुर में एग्रीकोज वेलफेयर सोसाइटी के एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, आपको क्या लगता है कि ये सब मैं पैसे के लिए कर रहा हूं? मैं कोई दलाल नहीं हूं, ईमानदारी से कमाना जानता हूं। उन्होंने कहा, बहुत सारे राजनेता लोगों को लड़ाकर खुद फायदा उठाना जानते हैं, लेकिन हम उनमें नहीं हैं। गडकरी ने कहा, मेरा भी घर-परिवार है। मैं कोई संत नहीं हूं। मुझे हमेशा लगता है कि विदर्भ में 10 हजार किसानों की आत्महत्या शर्म की बात है। जब तक कि हमारे किसान समृद्ध नहीं हो जाते, हम अपने प्रयास कम नहीं करेंगे। गडकरी ने अपने बेटे की कंपनी को लेकर कहा कि वह केवल आइडिया देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस करता है। उसने हाल ही में ईरान से 800 कंटेनर सेब ऑर्डर किए और यहां से 100 कंटेनर केले भेज दिए। गडकरी ने कहा, मेरे बेट ने गोवा से 300 कंटेनर मछलियां सर्बिया को सप्लाई कीं। उन्होंने कहा, बेटे ने ऑस्ट्रेलिया में दूध के प्रोडक्ट की फैक्ट्री लगाई है। वह अब अबू धाबी और अन्य जगहों पर भी कंटेनर भेजता है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा आईटीसी के साथ मिलकर 26 चावल मिलें चलाता है। गडकरी ने कहा, मुझे पांच लाख टन चावल के आटे की जरूरत पड़ती है। इसलिए वह मिल चलाता है और मैं उससे आटा खरीद लेता हूं। उन्होंने कहा कि ये कुछ उदाहरण है जिससे पता चलता है कि बिजनेस में इंटरेस्ट रखने वाले लोग कृषि क्षेत्र में कैसे अवसर पैदा कर सकते हैं।

‘लड़ो या मर जाओ’ नारे के बीच लंदन में विरोध तेज, मस्क ने बढ़ाई आग

लंदन ब्रिटेन में इमिग्रेशन के खिलाफ आंदोलन की आग विकराल रूप ले चुकी है। शनिवार को लंदन में एंटी इमिग्रेशन कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में लाखों लोग सड़कों पर उतर पड़े। इसी बीच अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने भी आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि अब ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन की जरूरत है। प्रदर्शनकारियों के पास केवल दो विकल्प हैं, लड़ो या मर जाओ। एलन मस्क ने कहा कि ब्रिटेन का पहले से ही क्षरण शुरू हो गया है और आने वाले समय में यह पूरे देश के विनाश का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर माइग्रेशन की वजह से संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि बड़ी हिंसा होने वाली है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों के पास केवल लड़ने या मरने का विकल्प शेष है। एलन मस्क ने कहा, मेरा यही संदेश है कि हिंसा की आग तुम तक पहुंचेगी जरूर। ऐसे में तुम्हें लड़ना होगा। तुम चाहो या ना पाओ, हिंसा होकर रहेगी। एलन मस्क ने कहा, मुझे लगता है कि अब कीर स्टार्मर की अगुआई वाली लेबर सरकार को गिराने की जरूरत है। आपेक पास चार साल का वक्त नहीं है। आने वाले चुनाव में अभी बहुत वक्त है। पहले ही कुछ होना चाहिए। संसद भंग होनी चाहिए और दोबारा वोटिंग होनी चाहिए। मस्क ने कहा, हमारे दोस्त चार्ली किर्क को मार दिया गया और वामपंथी इसका जश्न मना रहे हैं। हमें एक मिनट ठहरकर सोचना होगा कि हिंसा रोकने का कोई उपाय नहीं है। ऐसे में लड़ने के लिए तैयार रहना ही एक मात्र रास्ता है। लंदन की इस रैली को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा का आह्वान बताया गया, लेकिन इस दौरान आव्रजन का मुद्दा छाया रहा। प्रदर्शनकारियों ने बार-बार 'हमें अपना देश वापस चाहिए' जैसे नारे लगाए।इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प होने की भी खबरें आईं।रॉबिन्सन यूनाइटेड किंगडम में एक प्रमुख दक्षिणपंथी नेता हैं और इंग्लिश डिफेंस लीग (ईडीएल) का नेतृत्व करते हैं जो मुख्य रूप से प्रवासन के मुद्दों से संबंधित है। बता दें कि हाल ही में नेपाल में दो दिन के आंदोलन ने ही वहां की वामपंथी सरकार उखाड़कर फेंक दी है। अब ब्रिटेन के इस प्रदर्शन को भी नेपाल जैसा ही बताया जा रहा है।

नया नियम: लोन डिफॉल्ट पर बैंक कर सकेंगे आपके मोबाइल को लॉक — जानें क्या होगा असर

मुंबई  लोन पर लिए गए मोबाइल फोन्स को जल्द ही लॉक करने की मंजूरी मिल सकती है. RBI लोन देने वालों को ये सुविधा देने पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स की मानें, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अपने फेयर प्रैक्टिस कोड्स को अपडेट कर सकता है. लोन डिफॉल्ट के बढ़ते मामलों को देखते हुए बैंक ये सुविधा लेंडर्स को दे सकता है.  इसके बाद से लोगों की डेटा प्राइवेसी और अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. 2024 में आई होम क्रेडिट फाइनेंस की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में एक तिहाई कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स को छोटे लोन पर लिया जाता है. इसमें स्मार्टफोन्स भी शामिल हैं.  1.4 अरब की आबादी वाले इस देश में 1.16 अरब मोबाइल कनेक्शन हैं. ऐसा नहीं है कि पहले लेंडर्स पहले ऐसा नहीं करते थे. पहले भी कई लेंडर्स लोन पर लिए गए फोन्स को लॉक करने के लिए ऐप का इस्तेमाल करते थे. पिछले साल RBI ने लेंडर्स की प्रैक्टिस पर रोक लगा दिया था. लोन ना चुकाने पर लेंडर्स कंज्यूमर्स का फोन लॉक कर देते थे.  RBI दे सकता है मंजूरी इसके लिए वे एक ऐप का इस्तेमाल करते थे, जो फोन में इंस्टॉल किया जाता था. लेंडर्स से बातचीत के बाद RBI इस प्रक्रिया को मंजूरी दे सकता है. इसके लिए केंद्रीय बैंक एक गाइडलाइन जारी कर सकता है, जो आने वाले कुछ महीनों में जारी होगी.  बैंक चाहता है कि छोटे लोन देने वालों के पास भी उन्हें रिकवर करने की शक्ति हो. साथ ही बैंक का फोकस लोगों की डेटा को सुरक्षित रखना भी है. इसलिए बैंक एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार कर रहा है, जिससे लेंडर्स को यूजर्स का डेटा एक्सेस करने से रोका जा सके. हालांकि, इस पूरे मामले में RBI ने आधिकारिक तौर पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है.  कैसे लॉक होगा लोन पर चल रहा फोन?  इसके लिए बैंक और NBFC एक ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ऐप को डिवाइस खरीदने के वक्त कंज्यूमर के फोन में इंस्टॉल किया जाएगा. Google Device Lock Controller, Samsung Finance+ ऐप (सिर्फ सैमसंग यूजर्स के लिए) और दूसरे ऐप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.  कब लॉक किया जाएगा फोन?  रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐप को इंस्टॉल करने से पहले लेंडर्स को कंज्यूमर की परमिशन लेनी होगी. लेंडर्स किसी भी यूजर के पर्सनल डेटा को एक्सेस नहीं कर पाएंगे. किसी फोन को तभी लॉक किया जा सकेगा, जब कंज्यूमर्स लोन अमाउंट नहीं चुकाएंगे.

‘कुशल प्रशासक’ वाला बयान बना बवाल, ABVP ने सुखाड़िया विवि में किया प्रदर्शन

नई दिल्ली उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा के हालिया बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को बप्पा रावल सभागार में आयोजित सेमिनार में मिश्रा ने कहा, “हम इतिहास में महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और अकबर जैसे शासकों को सुनते हैं। हम कई अच्छे राजाओं को याद रखते हैं, और कुछ औरंगजेब जैसे भी थे, जो एक कुशल प्रशासक था।” एबीवीपी का विरोध इस टिप्पणी पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा विरोध जताया। एबीवीपी उदयपुर महानगर मंत्री पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को ऐतिहासिक तथ्यों पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने इस बयान को विद्यार्थियों और इतिहास प्रेमियों के लिए अनुचित बताया। “विकसित भारत 2047” विषय पर सेमिनार प्रो. मिश्रा यह बयान “भारतीय ज्ञान प्रणाली: विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप” विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में दे रही थीं। कार्यक्रम गुरु नानक कन्या स्नातक महाविद्यालय और एसोसिएशन ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर भी जोर दिया और कहा कि भारतीय परंपराएं जीवन जीने का सही मार्ग दिखाती हैं। विवाद का केंद्र बनी एक टिप्पणी हालांकि उनका भाषण मुख्य रूप से सकारात्मक बिंदुओं पर केंद्रित था, लेकिन औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ कहने वाली टिप्पणी चर्चा का केंद्र बन गई। शहर के शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान शैक्षणिक मंचों पर संवेदनशील होते हैं और अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है।