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कर्ज़ की दलदल में पाकिस्तान: कितने अरब डॉलर और कैसी है बचाव की उम्मीद?

इस्लामाबाद पाकिस्तान भारी विदेशी कर्ज में डूबा हुआ है। हाल ही में पाकिस्तान से आई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 23 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज चुकाना होगा। अब पाकिस्तान को अपने मित्र देशों से मदद की उम्मीद है। पाकिस्तान एक जुलाई से 30 जून तक के वित्त वर्ष का अनुसरण करता है। पाकिस्तान की आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार, इस साल मार्च के अंत में पाकिस्तान पर कुल 76010 अरब रुपए का कर्ज था। इसमें 51520 अरब रुपए (करीब 180 अरब अमेरिकी डॉलर) का घरेलू कर्ज और 24490 अरब रुपए (87.4 अरब डॉलर) का विदेशी कर्ज शामिल है। पांच मित्र देशों पर नजर पाकिस्तान पर जो 87.4 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज है, उसके दो हिस्से हैं। एक तो सरकारी विदेशी कर्ज है। वहीं, दूसरा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिला कर्ज शामिल है। खबर के अनुसार, 2025-26 में कुल 23 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। इसमें से 12 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि ‘मित्र देशों’ द्वारा रखी गई अस्थायी जमा के रूप में है। उम्मीद की जा रही है कि ये मित्र देश इस 12 अरब डॉलर की राशि की वापसी की तारीख को आगे बढ़ा देंगे। इस अस्थायी जमा राशि में सऊदी अरब से पांच अरब डॉलर, चीन से चार अरब डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात से दो अरब डॉलर और कतर से करीब एक अरब डॉलर शामिल हैं। कर्ज भुगतान के लिए बजट वहीं, पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष में बहुपक्षीय, द्विपक्षीय ऋणदाताओं, अंतरराष्ट्रीय बान्डधारकों और वाणिज्यिक उधारदाताओं को करीब 11 अरब अमेरिकी डॉलर का बाह्य ऋण चुकाना होगा। कर्ज का भुगतान वर्तमान में वार्षिक बजट का सबसे बड़ा व्यय है। पाकिस्तान ने 2025-26 में घरेलू एवं और बाह्य ऋण को चुकाने के लिए 8200 अरब रुपए आवंटित किए हैं। यह 17573 अरब रुपए के कुल संघीय बजट का 46.7 प्रतिशत है।  

कर्ज़ की दलदल में पाकिस्तान: कितने अरब डॉलर और कैसी है बचाव की उम्मीद?

इस्लामाबाद पाकिस्तान भारी विदेशी कर्ज में डूबा हुआ है। हाल ही में पाकिस्तान से आई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 23 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज चुकाना होगा। अब पाकिस्तान को अपने मित्र देशों से मदद की उम्मीद है। पाकिस्तान एक जुलाई से 30 जून तक के वित्त वर्ष का अनुसरण करता है। पाकिस्तान की आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार, इस साल मार्च के अंत में पाकिस्तान पर कुल 76010 अरब रुपए का कर्ज था। इसमें 51520 अरब रुपए (करीब 180 अरब अमेरिकी डॉलर) का घरेलू कर्ज और 24490 अरब रुपए (87.4 अरब डॉलर) का विदेशी कर्ज शामिल है। पांच मित्र देशों पर नजर पाकिस्तान पर जो 87.4 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज है, उसके दो हिस्से हैं। एक तो सरकारी विदेशी कर्ज है। वहीं, दूसरा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिला कर्ज शामिल है। खबर के अनुसार, 2025-26 में कुल 23 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। इसमें से 12 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि ‘मित्र देशों’ द्वारा रखी गई अस्थायी जमा के रूप में है। उम्मीद की जा रही है कि ये मित्र देश इस 12 अरब डॉलर की राशि की वापसी की तारीख को आगे बढ़ा देंगे। इस अस्थायी जमा राशि में सऊदी अरब से पांच अरब डॉलर, चीन से चार अरब डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात से दो अरब डॉलर और कतर से करीब एक अरब डॉलर शामिल हैं। कर्ज भुगतान के लिए बजट वहीं, पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष में बहुपक्षीय, द्विपक्षीय ऋणदाताओं, अंतरराष्ट्रीय बान्डधारकों और वाणिज्यिक उधारदाताओं को करीब 11 अरब अमेरिकी डॉलर का बाह्य ऋण चुकाना होगा। कर्ज का भुगतान वर्तमान में वार्षिक बजट का सबसे बड़ा व्यय है। पाकिस्तान ने 2025-26 में घरेलू एवं और बाह्य ऋण को चुकाने के लिए 8200 अरब रुपए आवंटित किए हैं। यह 17573 अरब रुपए के कुल संघीय बजट का 46.7 प्रतिशत है।  

न्यायपालिका पर उठते सवाल: CJI पर एक्शन की सीमाएं और जस्टिस वर्मा की 6 आपत्तियाँ

नई दिल्ली केंद्र सरकार की ओर से महाभियोग की तैयारी के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। 14 मार्च को उनके दिल्ली स्थित आवास पर बड़े पैमाने पर कैश पाए जाने की खबर मिली थी। इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित जांच समिति ने दोषी पाया था। उस रिपोर्ट के बाद उनका इलाहाबाद ट्रांसफर किया गया और राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी गई थी। अब इस रिपोर्ट के आधार पर ही महाभियोग चलाने की तैयारी है, लेकिन जस्टिस वर्मा ने रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इसके खिलाफ 6 अहम दलीलें दी हैं। 'मेरा मीडिया ट्रायल हुआ, छवि ही खराब हो गई' जस्टिस यशवंत वर्मा ने सबसे बड़ा आरोप मीडिया ट्रायल का लगाया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से उन पर लगे आरोपों को सार्वजनिक किया गया और इसके चलते मेरा मीडिया ट्रायल हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे मेरी छवि खराब हुई है और मेरे करियर पर भी असर पड़ा है। जस्टिस वर्मा ने दलील दी है कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच की ओर से तय नियमों का भी इस तरह जानकारी सार्वजनिक करके उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में कमेटी की फाइनल रिपोर्ट छपी है और इस तरह गोपनीयत का उल्लंघन किया गया। इन हाउस जांच पर उठाए सवाल, बोले- कमजोर होती है संसद जस्टिस वर्मा ने एक तर्क यह भी दिया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1999 में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए अपनाई गई इन-हाउस प्रक्रिया अनुचित रूप से आत्म-नियमन के निर्धारित दायरे से परे चली जाती है। याचिका में कहा गया है कि इससे एक समानांतर और असंवैधानिक तंत्र तैयार होता है। यह संविधान के अनुच्छेद 124 और 218 के तहत निर्धारित अनिवार्य ढांचे को कमजोर करती है, जिनके अनुसार न्यायाधीशों को हटाने का विशेष अधिकार केवल संसद को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से संसद का अधिकार कमजोर होता है। चीफ जस्टिस की पावर पर भी उठा दिए सवाल जस्टिस वर्मा ने अपनी अर्जी में चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट की पावर तक पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं भी सुप्रीम कोर्ट या चीफ जस्टिस को यह ताकत नहीं दी गई कि वह अपने जजों या फिर हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ ऐक्शन ले। गवाहों के बयानों की रिकॉर्डिंग नहीं कराई, फुटेज पर भी सवाल उन्होंने एक दलील यह भी दी है कि मेरे खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। कुछ अप्रमाणित आरोपों के आधार पर ही मेरे खिलाफ जांच शुरू की गई। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि जांच समिति ने उन्हें पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। इसके अलावा गवाहों के बयानों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इन गवाहों के बयानों के एक हिस्से को ही बताया गया, जबकि उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करानी चाहिए थी। इसके अलावा जांच समिति की ओर से सीसीटीवी फुटेज आदि न जुटाने पर भी जस्टिस वर्मा ने सवाल उठाए हैं। 'मेरे घर से कैश मिला तो कितना था और किसका था, यह नहीं बताया गया' जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा कि जब इस मामले का मुख्य आधार यही है कि मेरे घर से कैश पाया गया तो यह भी पता लगाना चाहिए था कि यह कितना था और कहां से आया था। उन्होंने कहा कि जांच समिति यह बताने में नाकाम रही है कि यह कैश कहां से आया था और कितना था। 'पहले मेरा पक्ष सुनते, फिर करनी थी महाभियोग की सिफारिश' उनकी एक दलील यह भी है कि फाइनल रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए मुझे वक्त नहीं मिला। जस्टिस वर्मा का कहना है कि मुझे हटाने की सिफारिश से पहले जवाब लेना चाहिए था। इसके लिए मुझे कोई वक्त ही नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुझे चीफ जस्टिस या फिर वरिष्ठ जज के आगे पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए था। उसके बाद ही महाभियोग जैसी सिफारिश होनी चाहिए।  

मुंबई में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ीं: Ola-Uber ड्राइवरों की ये हैं प्रमुख मांगें

मुंबई मुंबई में ओला  और उबर ड्राइवरों की हड़ताल आज लगातार चौथे दिन भी जारी रही, जिससे शहर के लाखों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र गिग वर्क्स मंच के नेतृत्व में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन के कारण लगभग 90% ऐप-आधारित कैब सड़कों से नदारद हैं। इस हड़ताल से जूझ रहे ड्राइवर आज शुक्रवार, 18 जुलाई को सुबह 10 बजे मुंबई के ऐतिहासिक आज़ाद मैदान में धरना प्रदर्शन करने वाले हैं। मुंबई एयरपोर्ट पर यात्रियों की सबसे ज़्यादा मुश्किल इस हड़ताल का सबसे बुरा असर मुंबई एयरपोर्ट पर देखने को मिल रहा है। यहां यात्रियों को अपनी फ्लाइट पकड़ने या घर पहुंचने के लिए लंबे इंतज़ार और बहुत ज़्यादा किराए का सामना करना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया पर एक यात्रा सलाह (Travel Advisory) जारी की है। इसमें यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लें और परिवहन के लिए कोई दूसरा इंतज़ाम करें। हड़ताल के कारण शहर भर में बसों, ऑटो-रिक्शा और मेट्रो सेवाओं में भीड़ बढ़ गई है। ओला-उबर ड्राइवर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? जानें उनकी मुख्य मांगें मुंबई और महाराष्ट्र में ओला-उबर ड्राइवर उचित वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें ये हैं: ➤ किराए में बराबरी: ड्राइवर चाहते हैं कि उनका किराया पारंपरिक काली-पीली टैक्सियों के बराबर हो। ➤ बाइक टैक्सियों पर प्रतिबंध: वे बाइक टैक्सी सेवाओं (जैसे रैपिडो) पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। ➤ परमिट की सीमा: ऑटो और टैक्सी परमिट की संख्या सीमित की जाए। ➤ कम कमीशन: कैब एग्रीगेटर (ओला-उबर) उनसे जो कमीशन लेते हैं, उसे कम किया जाए। ➤ कल्याण बोर्ड और एक्ट: वे ऐप-आधारित ड्राइवरों के लिए एक कल्याण बोर्ड बनाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए 'महाराष्ट्र गिग वर्कर्स एक्ट' लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। सरकार से बातचीत विफल, हड़ताल जारी रहने के आसार राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ हाल ही में हुई बैठक के बावजूद, अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। टाइम्स नाउ न्यूज के अनुसार, सरनाईक ने कहा, "हमने सब कुछ समझाया, लेकिन विरोध अभी भी जारी है। यह सही नहीं है।"  

राजनीतिक भूचाल: संजय राउत बोले- महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था खत्म, लगे राष्ट्रपति शासन

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को भाजपा के विधायक गोपीचंद पडलकर और शरद पवार की एनसीपी के नेता जितेंद्र अव्हाड के समर्थकों में झड़प गई थी। इस हिंसक झड़प का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें दिखता है कि कई नेता मुक्के चला रहे हैं और दूसरे का कॉलर पकड़ा हुआ है। विधानसभा के अंदर इस तरह के बवाल से सवाल खड़े हुए हैं। आमतौर पर महाराष्ट्र की राजनीति को समन्वय और सद्भाव के लिए जाना जाता है। दूसरे दलों के नेताओं से भी लोग यहां बहुत सद्भाव से मिलते रहे हैं। ऐसे में इस तरह की झड़प की खूब चर्चा है। इस बीच विपक्ष ने राष्ट्रपति शासन की ही मांग कर दी है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत का कहना है कि प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। संजय राउत ने शुक्रवार को कहा, 'महाविकास अघाड़ी के नेता आज राज्यपाल से मिलेंगे और बताएंगे कि विधानसभा में क्या हुआ है। राज्य में राष्ट्रपति शासन ही लग जाना चाहिए। राज्यपाल को विधानसभा में हुई गैंगवार की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजनी चाहिए।' बता दें कि इस मामले में असेंबली के स्पीकर राहुल नार्वेकर फैसला सुनाने वाले हैं। उन्हें इस घटना की रिपोर्ट दी गई थी और अब वह दोपहर को 1:30 बजे फैसला देंगे। यही नहीं संजय राउत ने तो यहां तक कहा कि लोग हथियारों के साथ विधानसभा में घुसे और उनका इरादा गैंगवार का था। इस घटना से पूरी साजिश खुलकर आ गई है, जिसके तहत एनसीपी के विधायक जितेंद्र अव्हाड को ये लोग मार डालना चाहते थे। आखिर किन लोगों की मंजूरी से ये लोग विधानसभा के अंदर चले गए। राज्य में राष्ट्रपति शासन के लिए यह मामला काफी है। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के शासन में महाराष्ट्र विधानसभा की स्थिति बेहद खराब हो गई है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में झड़प की देश भर में चर्चा हो रही है और इसका वीडियो वायरल है। इस मामले में पुलिस अब तक दोनों विधायकों के एक-एक समर्थक को अरेस्ट कर चुकी है।  

महाराष्ट्र विधानसभा में हंगामे पर कुणाल कामरा का कटाक्ष, बोले- “करेंगे दंगे चारों ओर”

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा में हुए हंगामे और हाथापाई की घटना पर स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने चुटकी ली है। इसका मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया और इसके कैप्शन में 'लॉब्रेकर्स' लिखा। वीडियो में उन्होंने विधानसभा में हुई झड़प के क्लिप्स का इस्तेमाल किया और अपने विवादास्पद गाने 'हम होंगे कामयाब' को बैकग्राउंड में रखा। वीडियो में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के फुटेज भी शामिल किए गए हैं, जो सत्ताधारी महायुति गठबंधन पर कटाक्ष मालूम पड़ता है। कुणाल कामरा ने बीते मार्च में अपने स्टैंडअप शो 'हम होंगे कामयाब' वाला गाना गाया था, जिसमें एकनाथ शिंदे को 'गद्दार' कहा गया था। इस शो के बाद भारी हंगामा मच गया। शिवसेना की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के खार इलाके में हेबिटेट कॉमेडी क्लब में तोड़फोड़ की, जहां कामरा का शो आयोजित हुआ था। मालूम हो कि भारी हंगामे के बावजूद उन्होंने माफी मांगने से इनकार किया था और हिंसा की निंदा की थी। अब कामरा का यह नया वीडियो उनकी राजनीतिक टिप्पणियों का ही हिस्सा माना जा रहा है। हाथापाई मामले में आव्हाड और पडलकर के समर्थक गिरफ्तार महाराष्ट्र विधान भवन परिसर हाथापाई मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड और भाजपा के विधायक गोपीचंद पडलकर के एक-एक समर्थक को गिरफ्तार किया गया है। गुरुवार को विधान भवन के अंदर आव्हाड और पडलकर के समर्थकों के बीच विवाद हो गया था। इससे एक दिन पहले दोनों विधायकों के बीच तीखी बहस हुई थी। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने आव्हाड के समर्थक नितिन देशमुख और पडलकर के समर्थक ऋषिकेश टाकले को गिरफ्तार कर उनका बयान दर्ज कर लिया है। दोनों को दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस थाने ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों को बाद में अदालत में पेश किया जाएगा। दोनों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।  

अमरनाथ यात्रा के दौरान बड़ा हादसा: ट्रक की टक्कर से यात्री गंभीर रूप से घायल

ऊधमपुर ऊधमपुर से करीब 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित बट्टल बालियां चैक के समीप एक तेज गति से चल रहे ट्रक द्वारा अनियंत्रित होकर एक अमरनाथ यात्रा पर जा रही इनोवा गाड़ी को हिट कर देने से गाड़ी में सवार 5 श्रद्धालु घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए जीएमसी ऊधमपुर में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के अनुसार ऊधमपुर से तेज गति जा रहा एक ट्रक जैसे ही बट्टल बालियां चैक पर पहुंचा कि चालक द्वारा उस पर से नियंत्रण खो दिया, जिससे ट्रक दूसरे साइड से अमरनाथ यात्रा पर जा रही एक इनोवा गाड़ी नंबर (यू.पी,81,वी.एन-3701) को हिट कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया तथा खुद एक साथ लगते घर का गेट तोड़ घर में घुस गया। गनीमत यह रही उस समय घर के बाहर कोई नहीं था। वहीं इनोवा गाड़ी में सवार 08 श्रद्धालुओं में से 05 श्रद्धालुओं को गंभीर चोटें आईं जोकि उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जिन्हें तुरंत पुलिस व सीआरपीएफ की मदद से जीएमसी में भर्ती करवाया गया, जहां पर घायलों का उपचार जारी था। वहीं पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है तथा इस संबंध में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई आरंभ कर दी है। 

शमी की पत्नी और बेटी पर केस दर्ज, हत्या की साजिश में दोनों पर लगे आरोप

 बीरभूम भारतीय स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी की अलग हो चुकीं पत्नी हसीन जहां नए विवाद में फंसती नजर आ रही हैं। खबरें हैं कि उनके और बेटी अर्शी जहां के खिलाफ हत्या की प्रयास का केस दर्ज कराया गया है। हालांकि, इस पर हसीन की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। उनपर पड़ोसी पर हमला करने के आरोप हैं। एक वीडियो के जरिए ऐसा दावा किया जा रहा है। एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि हसीन जहां अपने पड़ोसियों से झगड़ा कर रही हैं। वीडियो पश्चिम बंगाल के बीरभूम का बताया जा रहा है। खबरें हैं कि हसीन जहां और उनकी बेटी अर्शी जहां ने एक जमीन विवाद में पड़ोसियों के साथ मारपीट भी की। दावा किया जा रहा है कि हसीन जहां गैर कानूनी ढंग से जमीन पर कब्जा करना चाहती हैं, जिसका पड़ोसी विरोध कर रहे थे। NCMIndiaa की तरफ से एक्स पर वीडियो शेयर किया गया है। इसमें कहा गया है, 'BNS की धाराओं 126(2), 115(2), 117(2), 109, 351(3) और 3(5) के तहत मोहम्मद शमी की अलग हो चुकीं पत्नी हसीन जहां और उनकी पहली शादी से हुई बेटी अर्शी जहां के खिलाफ पड़ोसी डालिया खातून ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सूरी टाउन में केस दर्ज कराया है।' आगे कहा गया, 'झगड़ा तब शुरू हुआ, जब हसीन जहां ने सूरी के 5 नवंबर वार्ड में विवादित प्लॉट पर निर्माण शुरू किया। यह कथित तौर प उनकी बेटी के नाम पर है। आरोप हैं कि हसीन और उनकी बेटी ने डालिया खातून के साथ बेरहमी से मारपीट की है।' मोहम्मद शमी से विवाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी को मंगलवार को निर्देश दिया कि वह अपनी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां और बेटी को कानूनी लड़ाई के दौरान हर महीने चार लाख रुपये गुजारा भत्ता दें। जहां ने जिला सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें क्रिकेटर को 2023 में अपनी पत्नी को 50,000 रुपये और अपनी बेटी को 80,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।

निमिषा प्रिया मामला: बचाव के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

नई दिल्ली यमन में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिजन उनके बचाव में जुटे हैं। अब तक इसे लेकर कोई गुड न्यूज नहीं मिल सकी है, जबकि कई सामाजिक संस्थाएं भी इसमें ऐक्टिव हैं। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल निमिषा की सजा को स्थगित कर दिया गया है। उन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि निमिषा प्रिया सकुशल भारत लौट आएं। इस बीच याचिकाकर्ता ने ब्लडमनी के सवाल पर कहा कि पहले तो उन्हें माफी मिल जाए। उसके बाद ही ब्लडमनी की बात होगी। केंद्र सरकार के प्रयासों और उसके जवाब से अदालत भी संतुष्ट दिखी। बेंच ने अब इस केस की अगली सुनवाई 14 अगस्त को करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स की सरकार हर संभव मदद कर रही है। बता दें कि निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत दी जानी थी। केरल के एक ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने मध्यस्थता का एक प्रयास किया था। इसके चलते फिलहाल सजा को टाला गया है। पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच डील का मौका इससे मिला है। लेकिन अब तक राहत की खबर का इंतजार ही है। निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर रहे तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। वहीं निमिषा का पक्ष है कि तलाल आबदो मेहदी उनका उत्पीड़न कर रहा था और उनसे शादी के फर्जी दस्तावेज तक बनवा लिए थे। उनसे बिजनेस में बेजा हक मांग रहा था और उत्पीड़न करते हुए पासपोर्ट तक जब्त कर लिया था। वह पासपोर्ट लेने के लिए ही उससे मिली थीं और उसे ड्रग्स दिया था ताकि मौका पाकर पासपोर्ट ले लें। हालांकि ड्रग्स की ओवरडोज से तलाल की मौत ही हो गई। इसी मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत दी गई है। हालांकि यमन में ब्लड मनी का एक नियम है, जिसके भरोसे उम्मीद की जा रही है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।  

निमिषा प्रिया मामला: बचाव के प्रयासों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का जवाब

नई दिल्ली यमन में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिजन उनके बचाव में जुटे हैं। अब तक इसे लेकर कोई गुड न्यूज नहीं मिल सकी है, जबकि कई सामाजिक संस्थाएं भी इसमें ऐक्टिव हैं। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा है कि फिलहाल निमिषा की सजा को स्थगित कर दिया गया है। उन्हें बचाने के लिए प्रयास जारी हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि हम चाहते हैं कि निमिषा प्रिया सकुशल भारत लौट आएं। इस बीच याचिकाकर्ता ने ब्लडमनी के सवाल पर कहा कि पहले तो उन्हें माफी मिल जाए। उसके बाद ही ब्लडमनी की बात होगी। केंद्र सरकार के प्रयासों और उसके जवाब से अदालत भी संतुष्ट दिखी। बेंच ने अब इस केस की अगली सुनवाई 14 अगस्त को करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने कहा कि यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स की सरकार हर संभव मदद कर रही है। बता दें कि निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में सजा-ए-मौत दी जानी थी। केरल के एक ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार के माध्यम से सरकार ने मध्यस्थता का एक प्रयास किया था। इसके चलते फिलहाल सजा को टाला गया है। पीड़ित परिवार और निमिषा के परिजनों के बीच डील का मौका इससे मिला है। लेकिन अब तक राहत की खबर का इंतजार ही है। निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर रहे तलाल आबदो मेहदी की हत्या का दोषी ठहराया गया है। वहीं निमिषा का पक्ष है कि तलाल आबदो मेहदी उनका उत्पीड़न कर रहा था और उनसे शादी के फर्जी दस्तावेज तक बनवा लिए थे। उनसे बिजनेस में बेजा हक मांग रहा था और उत्पीड़न करते हुए पासपोर्ट तक जब्त कर लिया था। वह पासपोर्ट लेने के लिए ही उससे मिली थीं और उसे ड्रग्स दिया था ताकि मौका पाकर पासपोर्ट ले लें। हालांकि ड्रग्स की ओवरडोज से तलाल की मौत ही हो गई। इसी मामले में निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत दी गई है। हालांकि यमन में ब्लड मनी का एक नियम है, जिसके भरोसे उम्मीद की जा रही है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।