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धौलीगंगा बिजली परियोजना में संकट, भूस्खलन के बाद सुरंगों में 19 कर्मचारी फंसे

पिथौरागढ़ उत्तराखंड में फिर एक बड़ा हादसा हुआ है। पिथौरागढ़ में धौलीगंगा बिजली परियोजना की सामान्य एवं इमरजेंसी सुरंगों में भूस्खलन के कारण एनएचपीसी के 19 कर्मचारी फंस गए हैं। भूस्खलन से पॉवर हाउस का रास्ता बंद हो गया है। धारचूला के उप-जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि भूस्खलन के कारण भारी मलबा जमा हो गया है। मलबा हटाने के लिए मशीनें लगाई गई हैं। शाम तक रास्ता साफ होने की उम्मीद है। फिर सभी कर्मचारी बाहर आ सकेंगे। अधिकारी ने बताया कि भूस्खलन से नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर कॉर्पोरेशन (NHPC) के 19 कर्मी पॉवर हाउस में फंस गए हैं। भूस्खलन भारी बारिश के कारण हुआ है। धारचूला के पास ईलागढ़ क्षेत्र में धौलीगंगा बिजली परियोजना की सामान्य और आपातकालीन सुरंगों की ओर जाने वाला रास्ता बंद हो गया है। मलबा गिर रहा है। फिर भी सीमा सड़क संगठन की जेसीबी मशीनों रास्ता साफ करने के काम में जुटी हैं। धारचूला के उप-जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने आगे कहा कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। ये कर्मचारी बिजली घर का रास्ता खुलने के बाद बाहर आ जाएंगे। विद्युत परियोजना से बिजली उत्पादन का काम सामान्य रूप से जारी है। भूस्खलन की घटना धौलीगंगा पॉवर स्टेशन के मुहाने पर हुई है। डरने या किसी प्रकार के घबराने की बात नहीं है। जेसीबी मशीनों से मलबा हटाने का काम जारी है। फिलहाल सबकुछ सामान्य रूप से चल रहा है। पिथौरागढ़ की पुलिस अधीक्षक (SP) रेखा यादव ने बताया कि मजदूर फंसे हैं। बड़े-बड़े पत्थरों ने सुरंग के मुहाने को बंद कर दिया है। JCB मशीनों को मौके पर भेजा गया है। फंसे मजदूर और कर्मचारी कंपनी और स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में बने हुए हैं। कर्मचारियों के पास अंदर खाने-पीने का सामान भी काफी है। वहीं धारचूला के उप-जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने कहा कि चिंता की बात नहीं है। उम्मीद है कि रास्ता जल्द साफ कर दिया जाए। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन की JCB मशीनों भी काम में जुटी हैं।  

पाक पीएम शहबाज का बना मजाक, समिट में नर्वस होकर हड़बड़ा गए

नई दिल्ली शंघाई कोऑपरेशन (SCO) समिट 2025 के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन में हैं। चीन में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की और भारत-चीन रिश्तों को मजबूत करने पर बात की। इस समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल हुए। लेकिन शहबाज शरीफ का नाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार विवादों और अजीबोंगरीब घटनाओं से जुड़ा रहा है। शहबाज का बना मजाक 2022 में उज्बेकिस्तान में SCO समिट के दौरान शहबाज शरीफ एक अलग ही वजह से चर्चा में आ गए थे। जब वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिल रहे थे, तब उनका ट्रांसलेशन हेडफोन बार-बार गिर रहे थे। पुतिन खुद भी इस पर हंसी नहीं रोक पाए थे। शरीफ कई बार मदद मांगते नजर आए और बोले- "क्या कोई मेरी मदद करेगा?" यह वीडियो रूस की सरकारी एजेंसी RIA नोवोस्ती ने जारी किया और सोशल मीडिया पर यह खूब वायरल हो गया। खुद पाकिस्तान में मजा बना वीडियो पाकिस्तान के पूर्व डिप्टी स्पीकर कासिम खान सूरी ने समिट की तस्वीर साझा की और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के नेताओं जैसे बिलावल भुट्टो, मिफ्ताह इस्माइल और ख्वाजा आसिफ के बेबस चेहरे पर तंज कसा। विपक्षी नेता शिरीन मजारी ने भी इस घटना की आलोचना की। वहीं, यह मामला सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं कई देशों में भी चर्चा का विषय बन गया। अमेरिकी कॉमेडियन जिमी फॉलन ने अपने शो में इस घटना का मजाक उड़ाते हुए कहा, "हैरानी की बात यह है कि 22 करोड़ आबादी वाले देश का प्रधानमंत्री इस तरह की परेशानी में फंस गए।" महिला से छीन लिया छाता शहबाज शरीफ की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी कई बार विवादों में रही है। जून 2023 में पेरिस में हुए ग्लोबल फाइनेंसिंग पैक्ट समिट में उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे एक महिला स्टाफ से छाता छीनते नजर आए और उसे बारिश में भीगने छोड़ दिया। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस में वापसी की बधाई दी। लेकिन उनकी यह पोस्ट पाकिस्तान में बैन किए गए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई थी, जिसे तुरंत फ्लैग कर दिया गया। नकली तस्वीर की पोस्ट इससे पहले उन्होंने एक बार चीन को कूटनीतिक तोहफे के तौर पर जिस हथियार की तस्वीर साझा की वह नकली निकली। यह दरअसल, एडिट की गई तस्वीर थी जिसे लेकर उनकी खूब आलोचना हुई।

अजित डोभाल बीच मीटिंग छोड़कर क्यों निकले? SCO समिट में पाकिस्तान ने किया बवाल

नई दिल्ली SCO समिट में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन की यात्रा पर हैं। पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात हुई। चीन में SCO समिट हो रही है उस समय अजित डोभाल का एक्शन याद आ रहा है जब वो पाकिस्तान की एक हरकत के बाद बैठक छोड़कर बाहर आ गए थे। मामला साल 2020 का है जब कोविड-19 के कारण सभी मीटिंग वर्चुअल हो रही थीं। सितंबर में एससीओ समिट के दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक में शामिल हुए और इस बैठक की अध्यक्षता रूस कर रहा था। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने की ओछी हरकत बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि डॉ. मोईद यूसुफ ने एक राजनीतिक मानचित्र पेश किया जिसमें भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर और जूनागढ़ पर पाकिस्तान का दावा किया गया था। पाकिस्तान के प्रतिनिधि के ये हरकत एससीओ के नियमों का साफ उल्लंघन था, जो द्विपक्षीय विवादों को बहुपक्षीय मंचों पर लाने की मनाही करते हैं।   भारत ने जताई आपत्ति पाकिस्तान के प्रतिनिधि डॉ. मोईद यूसुफ की इस हरकत पर भारत ने तुरंत आपत्ति जताई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे रूस ने पाकिस्तान से प्रतिनिधि ने मानचित्र हटाने की बार-बार चेतावनियों को नडरअंदाज कर दिया। उसके बाद वो हुआ जो किसी ने नहीं सोचा था। बैठक छोड़कर कर बाहर निकल आए डोभाल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल बैठक छोड़कर बाहर आ गए। उनका ये कदम एक संदेश था कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल नहीं उठने देगा। इस घटना के बाद रूस की ओर से जारी किए गए बयान में कहा कि वह पाकिस्तान की भड़काऊ कार्रवाई का समर्थन नहीं करता, और रूसी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पात्रुशेव ने अजित डोभाल के इस कदम की तारीफ की। एक्सपर्ट्स ने भी पाकिस्तान इस कदम को "एससीओ चार्टर का घोर उल्लंघन और एससीओ सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के सभी स्थापित मानदंडों के विरुद्ध" बताया। अजित डोभाल का ट्रैक रिकॉर्ड अजित डोभाल का ट्रैक रिकॉर्ड किसी जासूसी थ्रिलर जैसा है। 1971 और 1978 के बीच 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक मुस्लिम मौलवी बनकर पाकिस्तान में गुप्त रूप से रहे। उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य योजनाओं की जानकारी भारत पहुंचाई जिससे भारत को रणनीतिक निर्णय लेने में मदद मिली। घेरलू विद्रोहों को शांत करने में अहम भूमिका भारत में, अजित डोभाल ने घरेलू विद्रोहों के दौरान शांति वार्ता में मदद की, जिसमें मिजो विद्रोही नेताओं के साथ बातचीत भी शामिल थी जिसके परिणामस्वरूप 1986 में मिजो शांति समझौता हुआ। डोभाल 1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर का भी हिस्सा थे, जिसमें उन्होंने स्वर्ण मंदिर परिसर में घुसपैठ करके उग्रवादियों के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा की थी। भारतीय बंधकों की सुरक्षित रिहाई साल 1999 में, उन्होंने कंधार विमान हाईजैक के दौरान बातचीत में मदद की और भारतीय बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की। 2014 में, उन्होंने इराक में आईएसआईएस द्वारा बंधक बनाई गई 46 भारतीय नर्सों की वापसी में कोर्डिनेट किया। और 2016 में, उन्होंने लाइन ऑफ कंट्रोल के पार आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की योजना की देखरेख की।  

टैरिफ पर सख्ती से अमेरिका ने खुद उठाया खतरा, भारत बना मजबूत खिलाड़ी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का कदम रणनीतिक और आर्थिक रूप से गलत साबित हुआ है। कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। वन वर्ल्ड आउटलुक के एक लेख के मुताबिक टैरिफ संबंधी उथल-पुथल के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह ट्रंप के भारत की अर्थव्यवस्था को "मृत" या कमजोर बताने की धारणा के बिल्कुल विपरीत है। आयात पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से भारत पर 'दंड' के तौर पर लगाए गए इस भारी भरकम टैरिफ के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने पांच तिमाहियों में उच्च विकास दर हासिल की है। यह बाहरी व्यापार विवादों से परे अंतर्निहित मजबूती का संकेत देती है। इस लेख में बताया गया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि अन्य उभरते बाजारों की तरह निर्यात आधारित नहीं है, क्योंकि इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा घरेलू खपत से आता है, जिसमें घरेलू और सरकारी खर्च शामिल हैं। 'एप्पल' जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में विनिर्माण निवेश को बढ़ा रही हैं, जो इसके मजबूत बाजार और क्षमताओं में विश्वास को दर्शाता है। परिणामस्वरूप, अमेरिका का दबावपूर्ण रुख उसे एक ऐसे प्रभावशाली साझेदार से अलग-थलग कर सकता है, जो महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक क्षमता रखता है। एंड्रयू विल्सन के लेख में कहा गया है कि उभरती आर्थिक वास्तविकताएं ऐसी नीतियों की जरूरत की ओर संकेत देती हैं, जो भारत की विकास गतिशीलता को पहचानें। अमेरिका-भारत साझेदारी को पारस्परिक लाभ के लिए स्थापित करें न कि कलह को बढ़ावा दें। अमेरिकी कंपनियों से भारत के संबंध कम करने और अमेरिका में निर्माण करने के डोनाल्ड ट्रंप के आह्वान के बावजूद एप्पल की ओर से उठाए गए कदम एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच चीन से दूर अपनी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने के लिए एप्पल ने व्यापक रणनीति अपनाई है। एप्पल भारत में अपने आईफोन उत्पादन क्षमताओं का विस्तार करने के लिए लगभग 2.5 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। इस तरह के कदम भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल उपलब्धता और नीतिगत माहौल में कॉर्पोरेट विश्वास को दर्शाते हैं, जो अमेरिकी कंपनियों में भारतीय श्रम या प्रभाव को सीमित करने के ट्रंप के बयानों का खंडन करते हैं। लेख में कहा गया है कि द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को कम करने से अमेरिका की पहुंच तेजी से बढ़ते बाजार और एक ऐसे साझेदार तक सीमित हो सकती है, जो अमेरिकी आर्थिक और तकनीकी शक्तियों का पूरक है। लेख के अनुसार, भारी भरकम शुल्क लगाने और दंडात्मक रुख के कारण, ट्रंप प्रशासन रणनीतिक रूप से भारत संग अपने संबंधों को नुकसान पहुंचाने का जोखिम उठा रहा है। भारत न केवल एक आर्थिक महाशक्ति है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक साझेदार भी है। अमेरिकी टैरिफ भारत में हजारों निर्यातकों और नौकरियों के लिए खतरा है। यह तनाव बढ़ा रहा है और दोनों देशों के बीच अविश्वास को बढ़ा रहा है। व्यापार और निवेश पर बातचीत और सहयोग से संबंधों को मजबूत करने के बजाए अमेरिका का टकराव वाला यह रवैया भारत को चीन या रूस जैसी अन्य वैश्विक शक्तियों के करीब ला सकता है। लेख में आगे कहा गया है कि दीर्घकालिक जोखिमों में अमेरिका की भू-राजनीतिक क्षमता में कमी और प्रौद्योगिकी सह-विकास, आपूर्ति शृंखला विविधीकरण और सेवा व्यापार जैसे क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों का चूकना शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की देरी पर जताया सख्त रुख

नई दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश अपलोड होने पर में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा ऐक्शन लिया है। शीर्ष अदालत ने जज के सचिव की स्टेनो बुक जब्त करने का निर्देश दे दिया, ताकि यह पता चल सके कि आदेश कब टाइप किया गया था और उसमें कब सुधार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करने के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को अपलोड करने में हुई देरी पर संज्ञान लेते हुए दिया। न्यायाधीश के सचिव की स्टेनो बुक जब्त करने का निर्देश दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आदेश कब टाइप किया गया था और उसमें कब सुधार किया गया था। मामले की जांच की जाए जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस बात पर गौर किया कि यह फैसला 31 जुलाई 2025 का था। 20 अगस्त तक इसे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया। बेंच ने कहा कि मामले की विवेकपूर्ण जांच की जाए और आदेश को टाइप एवं अपलोड किए जाने के बारे में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से रिपोर्ट हासिल की जाए। बेंच ने कहा कि 20 अगस्त को मामले पर विचार करते हुए उसने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से रिपोर्ट मांगी थी। 29 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि रजिस्ट्रार जनरल ने 22 अगस्त को न्यायाधीश के सचिव से स्पष्टीकरण मांगा था। उसने कहा कि सचिव ने 22 अगस्त को स्पष्टीकरण दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि सचिव ने आदेश अपलोड किए जाने के समय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। उन्होंने सिर्फ इतना बताया था कि न्यायाधीश एक अगस्त से 20 अगस्त के बीच कुछ चिकित्सा प्रक्रिया एवं सर्जरी से गुजरे थे। बेंच ने कहा कि सचिव की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने की तिथि पर आदेश अपलोड किया गया था। हालांकि, इस तथ्य का जिक्र उन्होंने ही किया था। उसने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह आदेश 31 जुलाई को पारित नहीं किया गया था, बल्कि वास्तव में यह हाई कोर्ट के आदेश के बाद दिया गया था। जब्त की जाए स्टेनो बुक बेंच ने कहा कि सचिव की स्टेनो बुक जब्त की जाए और पता लगाया जाए कि किस तारीख को आदेश टाइप किया गया और पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) पर इसमें सुधार किया गया। एक विवेकपूर्ण जांच की जाए और आदेश टाइप एवं अपलोड किए जाने के संबंध में एनआईसी से पीसी की रिपोर्ट ली जाए और उसे हलफनामे के साथ दाखिल किया जाए। शीर्ष अदालत ने एक व्यक्ति की अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। उसने हरियाणा राज्य सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की। बेंच ने निर्देश दिया कि इस बीच, अंतरिम उपाय के रूप में, फरीदाबाद में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, बशर्ते वह (याचिकाकर्ता) जांच में सहयोग करे। याचिकाकर्ता ने 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि हाई कोर्ट की ओर से 31 जुलाई को पारित आदेश उसकी वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है।  

ग्लोबल पावर लीडर्स साथ दिखे, पुतिन-शी-मोदी-शहबाज की तस्वीर पर सबकी नजरें

चीन  चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक आकर्षक नजारा देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य नेता एक मंच पर नजर आए। तियानजिन में आधिकारिक स्वागत समारोह के दौरान ये नेता एक फोटो फ्रेम में खड़े नजर आए। अब यह तस्वीर दुनिया भर में तेजी से वायरल हो रही है और राजनीतिक विश्लेषक इसे मायने तलाशने में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि इस एक तस्वीर ने अमेरिका समेत दूसरे शक्तिशाली देशों को मजबूत संदेश देने का काम किया है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है। इसकी स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान की ओर से की गई थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने, जबकि ईरान 2023 में शामिल हुआ। एससीओ का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग, आर्थिक विकास, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह संगठन सदस्य देशों के बीच सैन्य सहयोग, संयुक्त अभ्यास और खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर देता है। एससीओ का मुख्यालय बीजिंग में है और इसकी आधिकारिक भाषाएं रूसी और चीनी हैं। पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात इससे पहले, पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करने पर जोर दिया। वैश्विक व्यापार को स्थिर करने की दिशा में काम करने का भी संकल्प लिया। मोदी और जिनपिंग एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर हुई बातचीत के दौरान इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि विकास में साझेदार हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए। दोनों नेताओं ने अमेरिका की टैरिफ संबंधी नीति के कारण पैदा हुई आर्थिक उथल-पुथल के बीच वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में अपनी अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को भी स्वीकार किया।  

रघुराम राजन ने सुझाया तरीका, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को होगा लाभ

नई दिल्ली  आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सुझाव दिया है कि सरकार को उन तेल रिफाइनर कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगाना चाहिए, जिन्हें रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर बड़ा मुनाफा हो रहा है। उनका कहना है कि इस टैक्स से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल भारतीय एक्सपोर्टर्स (निर्यातकों) को मदद देने में किया जा सकता है, क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जिससे हमारे निर्यातक नुकसान झेल रहे हैं। रेवेन्यू में भी इजाफा होगा उन्होंने कहा कि ट्रंप के टैरिफ के कारण भारत के कई उद्योगों, खासकर छोटे और मझोले एक्सपोर्टर्स, पर दबाव बढ़ गया है और उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ा है। राजन का मानना है कि यह कदम दोहरा फायदा देगा। एक तरफ सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और दूसरी तरफ़ निर्यातकों को राहत मिल सकेगी। इससे भारत की निर्यात क्षमता को सहारा मिलेगा और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी। राजन ने क्या कहा राजन ने लिंक्डइन पर विंडफॉल टैक्स पर अपने विचार व्यक्त किए। वे कहते हैं, "क्या वे अब भी अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं? क्या हमें उस मुनाफे में से कुछ लेकर उन निर्यातकों को फायदा पहुंचाना चाहिए जो रूस से तेल खरीदने से नुकसान उठा रहे हैं।" वे कहते हैं, "क्यों न हम अपने रिफाइनरों पर उनके द्वारा खरीदे गए रूसी तेल के अनुपात में विंडफॉल टैक्स लगाएं और उसे अपने छोटे और मध्यम निर्यातकों को हस्तांतरित करें? इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारत में जो लोग रूसी तेल से लाभान्वित होते हैं, वे भी इसका भुगतान करें, न कि दूसरों को भुगतान करने दें।" रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और नायरा एनर्जी लिमिटेड के नेतृत्व वाली भारतीय रिफाइनर कंपनियां सितंबर में रूस से तेल खरीद में 10-20% या प्रतिदिन 150,000-300,000 बैरल की वृद्धि कर सकती हैं, रॉयटर्स ने गुरुवार (28 अगस्त 2025) को प्रारंभिक खरीद आंकड़ों से परिचित व्यापारियों का हवाला देते हुए बताया। रूस अधिक कच्चा तेल बेचने के लिए कीमतों में कटौती कर सकता है क्योंकि वे यूक्रेन के ड्रोन हमलों से क्षतिग्रस्त हुई रिफाइनरियों में उतना तेल संसाधित नहीं कर सकते। भारत के बिना, रूस को अपने निर्यात को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने में कठिनाई होगी। इससे तेल निर्यात राजस्व में कमी आएगी, जिससे क्रेमलिन के बजट और यूक्रेन में रूस के जारी युद्ध का वित्तपोषण होता है।  

US से तनातनी के बीच जिनपिंग का संदेश, मोदी और ट्रंप दोनों को निशाना

चीन शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई। इस दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को मित्र और अच्छे पड़ोसी बनना होगा। शी जिनपिंग ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा, “दुनिया परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। चीन और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताओं के देश हैं, दुनिया की दो सबसे बड़ी जनसंख्या वाले राष्ट्र हैं और ग्लोबल साउथ का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में ड्रैगन और हाथी को साथ आना जरूरी है।" उन्होंने इस साल को भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ बताते हुए रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संभालने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमें बहुपक्षवाद, बहुध्रुवीय विश्व और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अधिक लोकतंत्र का समर्थन करना होगा और एशिया सहित पूरी दुनिया में शांति व समृद्धि के लिए मिलकर काम करना होगा।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन से रिश्ते आगे बढ़ाना चाहता है। मोदी ने जोर देकर कहा कि 2.8 अरब लोगों का कल्याण भारत-चीन सहयोग से जुड़ा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले साल हुई डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद सीमा पर शांति और स्थिरता बनी हुई है। मोदी ने यह भी बताया कि जल्द ही भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू होंगी और कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को तियानजिन पहुंचे। यह उनकी सात साल में पहली चीन यात्रा है। 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव देखा गया था। दोनों नेताओं की मुलाकात करीब एक साल बाद हुई है। पिछली बार वे अक्टूबर 2024 में मिले थे, जिसके बाद LAC पर सैन्य तनाव कम करने के लिए समझौता हुआ था।  

हर आदमी के लिए जरूरी: कल से ये 8 नियम होंगे बदलेंगे

 नई दिल्ली सितंबर महीने से कई बड़े पैसों से जुड़े नियमों में बदलाव होने वाले हैं, जो सीधे आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेंगे। इनमें आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग की आखिरी तारीख, आधार कार्ड अपडेट, UPS में बदलाव की अंतिम तिथि और क्रेडिट कार्ड समेत से जुड़े नए नियम शामिल हैं। इन बदलावों को समय पर जानना जरूरी है। अगर आपने समय रहते जरूरी काम पूरे नहीं किए, तो परेशानी उठानी पड़ सकती है। आइए जानते हैं डिटेल में…  ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख जो लोग आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने से चूक गए थे, उनके लिए सरकार ने लेट फाइलिंग की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2025 तय की है। अगर आप इस तारीख तक रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो आपको लेट फीस और ब्याज देना होगा। आधार कार्ड अपडेट UIDAI ने आधार कार्ड अपडेट कराने की सुविधा की आखिरी तारीख 14 सितंबर 2025 रखी है। इसके बाद आधार अपडेट कराने पर आपको फीस देनी होगी। अगर आपके आधार में नाम, जन्मतिथि, पता या मोबाइल नंबर गलत है तो समय रहते अपडेट करा लें। NPS से UPS में स्विच करने की अंतिम मौका सरकार ने कर्मचारियों को NPS से UPS में बदलने का विकल्प दिया है। इसकी डेडलाइन 30 सितंबर 2025 है। यानी अगर आप नई पेंशन योजना (UPS) चुनना चाहते हैं तो इस तारीख तक फॉर्म भरना होगा। चांदी पर नया नियम सितंबर 1 से चांदी के ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए नया नियम लागू हो जाएगा। अब ग्राहकों के पास दो विकल्प होंगे – वे चाहें तो हॉलमार्क्ड सिल्वर खरीद सकते हैं या फिर नॉन-हॉलमार्क्ड सिल्वर भी ले सकते हैं। BIS ने सिल्वर ज्वेलरी के लिए भी हॉलमार्किंग सुविधा शुरू करने का फैसला किया है। लेकिन अभी यह नियम अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि स्वैच्छिक रहेगा। FD नियमों में बदलाव अभी कई बैंक स्पेशल फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) स्कीम चला रहे हैं, जिनकी आखिरी तारीख सितंबर 2025 है। यानी अगर आप FD में निवेश करना चाहते हैं और बेहतर ब्याज दर पाना चाहते हैं, तो इंडियन बैंक और IDBI बैंक की इन स्पेशल FD योजनाओं में 30 सितंबर से पहले निवेश करना जरूरी है। SBI के क्रेडिट कार्ड में बदलाव 1 सितंबर से SBI क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट्स प्रोग्राम में बदलाव हो गया है। अब ग्राहकों को हर तरह की खरीदारी पर पॉइंट्स नहीं मिलेंगे। डिजिटल गेमिंग, सरकारी वेबसाइट्स और कुछ चुने हुए मर्चेंट्स- इन पर किए गए लेन-देन पर रिवॉर्ड पॉइंट्स नहीं मिलेंगे। इस बदलाव का असर लाखों SBI कार्डधारकों पर पड़ेगा क्योंकि पहले ये सभी खर्चे रिवॉर्ड पॉइंट्स में शामिल होते थे। इंडिया पोस्ट के नए नियम 1 सितंबर 2025 से इंडिया पोस्ट ने एक बड़ा बदलाव किया है। अब रजिस्टर्ड पोस्ट को स्पीड पोस्ट में मिला दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब अलग से “रजिस्टर्ड पोस्ट” नाम की कोई सुविधा नहीं होगी। जो भी रजिस्टर्ड मेल भेजी जाएगी, वह अब स्पीड पोस्ट के जरिए ही डिलीवर होगी। इससे डिलीवरी पहले से तेज और आसान हो जाएगी। यानी अब ग्राहकों को अलग-अलग सेवा चुनने की जरूरत नहीं है, रजिस्टर्ड पोस्ट का काम भी अब स्पीड पोस्ट ही करेगा। LPG के दाम LPG सिलेंडर के दाम हर महीने की पहली तारीख को बदलते हैं। इस बार भी 1 सितंबर को दाम कम या ज्यादा हो सकते हैं। ये बदलाव तेल कंपनियों और ग्लोबल मार्केट के हिसाब से तय होते हैं।  

राष्ट्रपति की चीन यात्रा स्थगित, इंडोनेशिया में उठा बवाल

इंडोनेशियाई  इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो ने रविवार को SCO शिखर सम्मेलन 2025 के लिए अपनी चीन यात्रा रद्द कर दी। इसका कारण देश में सांसदों के वेतन वृद्धि के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शन हैं। इन प्रदर्शनों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है, और दर्जनों इमारतें व सार्वजनिक सुविधाएं नष्ट हो गई हैं। जकार्ता में उग्र प्रदर्शनों के चलते प्रबोवो ने अपनी चीन यात्रा रद्द की, जहां उन्हें 3 सितंबर को द्वितीय विश्व युद्ध के समापन की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित 'विजय दिवस' परेड में शामिल होना था। विरोध प्रदर्शन का कारण नौकरियों और वेतन को लेकर असंतोष के बीच सांसदों के वेतन में हालिया वृद्धि के खिलाफ ये प्रदर्शन शुरू हुए। शुक्रवार को एक पुलिस बख्तरबंद वाहन द्वारा मोटरसाइकिल टैक्सी ड्राइवर को टक्कर मारने और उसकी मौत के बाद स्थिति और बिगड़ गई। रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति ने शुक्रवार देर रात मृतक ड्राइवर के परिवार से मुलाकात की, संवेदना व्यक्त की और जांच की निगरानी का वादा किया। राष्ट्रपति के प्रवक्ता प्रसेत्यो हादी ने कहा कि राष्ट्रपति स्थिति पर नजर रखना चाहते हैं और सर्वोत्तम समाधान ढूंढना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने चीनी सरकार से माफी मांगी कि वह निमंत्रण में शामिल नहीं हो सकते। कई जगहों पर लूटपाट खबर है कि प्रदर्शनकारियों ने नासडेम पार्टी के नेता अहमद साहरोनी के घर में लूटपाट की, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को 'मूर्खतापूर्ण' कहा था। हास्य कलाकार से विधायक बने एको पैट्रियो के घर में भी सेंधमारी की खबर है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई। वहीं, टिकटॉक के प्रवक्ता ने शनिवार को कहा कि बढ़ती हिंसा के कारण वह स्वेच्छा से अपने लाइव कार्यक्रम को स्थगित कर रहा है। क्षेत्रीय संसद भवन में आग रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्रीय संसद भवन में आग लगा दी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और कम से कम पांच लोग घायल हुए। स्थानीय मीडिया ने जकार्ता में लूटपाट और कई परिवहन सुविधाओं को नुकसान की खबर दी। जकार्ता में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और राष्ट्रपति स्वयं इस पर नजर रख रहे हैं। अधिकारियों का शांति का आग्रह राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख लिस्टियो सिगित प्रबोवो ने शनिवार को टीवी पर सैन्य कमांडर अगुस सुबियान्टो के साथ कहा कि राष्ट्रपति ने 'अराजक कृत्यों' के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। लिस्टियो ने कहा कि नागरिकों को अभिव्यक्ति और एकत्र होने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारी कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, जिसमें इमारतों और पुलिस मुख्यालयों पर हमले शामिल हैं। वहीं, जकार्ता में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के दूतावासों ने अपने नागरिकों को भीड़ और विरोध क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी दी है।