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कनाडा के गुरुद्वारे में खालिस्तान दफ्तर की शुरुआत, सर्रे में दूतावास के रूप में उद्घाटन

कनाडा  कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सर्रे शहर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा और प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन  SFJ (सिख्स फॉर जस्टिस)  ने कथित तौर पर 'खालिस्तान की एंबेसी' (Khalistan Embassy) खोल दी है। यह दफ्तर गुरुद्वारे के प्रांगण में बने सामुदायिक केंद्र (community center) में स्थापित किया गया है।बताया जा रहा है कि इस कथित एंबेसी के लिए कनाडा और अमेरिका से चंदा जुटाया गया था। ये वही नेटवर्क हैं जो कई सालों से विदेशों में बैठकर खालिस्तान आंदोलन को हवा दे रहे हैं। भारतीय समुदाय और विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की यह वही इमारत है जिसे  ब्रिटिश कोलंबिया सरकार की ओर से सरकारी फंडिंग मिली थी।  हाल ही में सरकार ने इस इमारत में लिफ्ट लगाने के लिए  $1,50,000 (करीब 90 लाख रुपए) की सहायता राशि दी थी। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय नागरिकों, भारतीय समुदाय और विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सरकारी फंड का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।  यह न केवल कनाडा की राष्ट्रीय एकता के खिलाफ है बल्कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को भी बढ़ावा देता है।  खालिस्तानी विचारधारा समाज में नफरत और विभाजन फैलाने का काम कर रही है।   अतीत से जुड़ी मिसाल  यह कोई पहली बार नहीं है जब खालिस्तानी समूह ने इस तरह की गतिविधि की हो। 1980 के दशक में जगजीत सिंह चौहान , जो खुद को ‘खालिस्तान का राष्ट्रपति’ बताते थे, ने  इक्वाडोर में भी 'खालिस्तान एंबेसी' खोली थी। बाद में वह भारत लौट आए और शांतिपूर्वक जीवन बिताया।  सरकार की चुप्पी  पर सवाल   ब्रिटिश कोलंबिया सरकार और कनाडा सरकार ने इस गतिविधि को क्यों नहीं रोका? क्या सरकारी फंड का दुरुपयोग नहीं हुआ?  क्या इससे समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतों को बल नहीं मिलेगा? 

ब्रह्मोस मिसाइल से और घातक होगी सेना: ऑपरेशन सिंदूर के बाद तैयारी तेज

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया। भारतीय सेना अब भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए बड़ा ऑर्डर दे रही है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जल्द ही हाई लेवल मीटिंग में भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए बड़ी संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी जा सकती है। साथ ही, भारतीय वायु सेना के लिए भी इन मिसाइलों के जमीनी और हवाई वैरिएंट खरीदे जाएंगे। पाकिस्तान के वायु ठिकानों और सेना के कैंपों पर हमले के लिए इन मिसाइलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया। नौसेना इन मिसाइलों को अपने वीर-कैटेगरी के युद्धपोतों पर तैनात करने वाली है, जबकि वायु सेना इन्हें अपने रूसी मूल के सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों पर लगाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों स्वदेशी हथियारों की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने हमारे स्वदेशी हथियारों की ताकत देखी। हमारे एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें और ड्रोन ने आत्मनिर्भर भारत की शक्ति दिखाई, खासकर ब्रह्मोस मिसाइलों ने। आतंकी मुख्यालयों पर किया हमला भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पंजाब प्रांत में स्थित मुख्यालयों पर हमला किया। भारतीय वायु सेना ने इसके लिए ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया। इसने टारगेट को बहुत सटीकता से तबाह कर दिया। ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को भी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों और उनके ठिकानों को बचाने की कोशिश में जवाबी कार्रवाई की थी।  

रूस से तेल खरीद पर कायम रहेगा भारत: अमेरिका की नाराज़गी के बावजूद ये हैं 5 ठोस कारण

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के साथ ही रूस से तेल एवं गैस खरीदने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की थी। इस धमकी के बाद वाइट हाउस को उम्मीद थी कि भारत दबाव में आ जाएगा और रूसी तेल के कंटेनर भारतीय बंदरगाहों की ओर आना बंद कर देंगे। लेकिन ट्रंप प्रशासन की उम्मीदों के उलट, भारत ने अपने रुख को और सख्त करते हुए रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखा। भारत ने अमेरिका के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूसी तेल के शिपमेंट लेना बंद कर दिया है। भारत ने सोमवार को ट्रंप की चेतावनी का जवाब देते हुए कहा कि रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी "अनुचित और अव्यवहारिक" है। भारत के इस कड़े जवाब के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही थी- और वैसा ही हुआ। ट्रंप का बयान और भारत का जवाब अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि खरीदे गए तेल का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा है। उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है। इस वजह से, मैं भारत द्वारा अमेरिका को भुगतान किए जाने वाले टैरिफ को काफी हद तक बढ़ाने जा रहा हूं।" इसके जवाब में, भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "भारत को निशाना बनाना अनुचित और अव्यवहारिक है। किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तरह, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।" भारत ने क्यों अपनाया सख्त रुख- 5 बड़े कारण भारतीय शेयर बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, नई दिल्ली का रुख केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से परे है। भारत दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रख रहा है, जिसमें राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा और स्वायत्तता सुनिश्चित करना शामिल है। विशेषज्ञों ने भारत के इस दृढ़ रुख के पांच प्रमुख कारण बताए: 1. ट्रंप-भारत-रूस त्रिकोण बसव कैपिटल के सह-संस्थापक संदीप पांडे ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया था कि पाकिस्तान उनके करीब है, क्योंकि उन्होंने आईएमएफ सहायता को रोकने के लिए अपने वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं किया। इसलिए ऐसा लगता है कि भारत ने यह निर्णय लिया है कि अमेरिका उसका 'मित्र' है, जबकि रूस उसका 'भाई' है। जब नई दिल्ली को चुनना होगा, तो वे मित्र के बजाय भाई को चुनेंगे।” 2. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई दिल्ली का कड़ा रुख भारत का जीडीपी काफी हद तक कृषि पर आधारित है। यदि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत कृषि क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए खोला जाता है, तो महंगाई, विकास दर जैसे कारक भारत सरकार के नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। संदीप पांडे ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि-प्रधान है, जहां राष्ट्रीय जीडीपी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा कृषि क्षेत्र से आता है। इस क्षेत्र को अमेरिका जैसे विदेशी खिलाड़ी के लिए खोलने से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि महंगाई और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण कारक सरकार के नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। इससे अमेरिका को भारतीय अर्थव्यवस्था तक पहुंच मिल जाएगी, जो भारत के लिए खतरा हो सकता है। 3. रूस से नैफ्था आयात: चीन के दबदबे को चुनौती भारत ने हाल ही में रूस से नैफ्था (Naphtha) का आयात शुरू किया है, जो पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक और रक्षा निर्माण जैसे क्षेत्रों में कच्चे माल की आपूर्ति के लिए अहम है। वाई वेल्थ के निदेशक अनुज गुप्ता ने कहा, "भारत का रूस से कच्चा तेल आयात रोकना असंभव लगता है, क्योंकि भारत ने रूस से नेफ्था आयात शुरू किया है। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अगला कदम है, जो रासायनिक, प्लास्टिक और रासायनिक रेजिन के आयात में चीन के एकाधिकार को तोड़ने की कोशिश है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रूस यूरोपीय और अन्य देशों को नेफ्था निर्यात नहीं कर पा रहा है, जिसके चलते चीन का वैश्विक व्यापार में एकाधिकार बढ़ गया। भारत का यह कदम इस एकाधिकार को तोड़ने की दिशा में है और भारत जल्द ही अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद नेफ्था का शुद्ध निर्यातक बन सकता है।" एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की वरिष्ठ शोध विश्लेषक सीमा श्रीवास्तव ने कहा, "रूस से नेफ्था आयात का भारत का निर्णय आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और औद्योगिक आधार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव है। यह कदम महत्वपूर्ण सप्लाई चैन में विविधता लाता है, जो पारंपरिक स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और पेट्रोकेमिकल्स और रक्षा विनिर्माण जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों में लागत को कम करने के लिए आवश्यक है।" 4. आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली का निर्माण भारत लंबे समय से रूस से न केवल हथियार खरीदता रहा है, बल्कि रक्षा तकनीक भी शेयर करता रहा है। नैफ्था आयात से भारत को रक्षा उत्पादन (जैसे फाइटर जेट और ड्रोन्स) में नई ऊर्जा मिलेगी। संदीप पांडे ने कहा, "अमेरिकी प्रशासन रूसी तेल आयात के जरिए कई लक्ष्य साधने की कोशिश कर रहा है। वे जानते हैं कि रूस भारत को लड़ाकू विमान और उनकी तकनीक ट्रांसफर करता है, जिसने भारत को स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने की स्थिति में ला दिया है। रूस से नेफ्था आयात शुरू करना भारत-रूस रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अगला कदम है। यह भारत को लड़ाकू विमानों और रक्षा ड्रोनों के लिए बॉडी विकसित करने में मदद करेगा। इसलिए, रूसी कच्चे तेल के आयात को रोकने की अमेरिकी मांग को स्वीकार करना वास्तविकता से परे है।" 5. जवाबी टैरिफ और डिजिटल टैक्स की तैयारी सेबी-पंजीकृत मूलभूत विश्लेषक अविनाश गोरक्षकर ने कहा, "जिस तरह अमेरिकी सरकार ने भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया है, उसी तरह भारतीय सरकार भी अमेरिकी आयात पर टैरिफ बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ एक धमकी की तरह हैं, जबकि भारतीय टैरिफ एक कूटनीतिक कदम होगा। भारत सरकार ऑनलाइन डिजिटल विज्ञापनों से होने वाली आय पर डिजिटल टैक्स फिर से लागू करने पर विचार कर सकती है, … Read more

उत्तरकाशी में भारी त्रासदी: बादल फटने से पहाड़ी मलबा गिरा, कई घर जमींदोज

धराली उत्तराखंड में इस समय कुदरती आफत पीछा नहीं छोड़ रही है। आज उत्तरकाशी के धराली गांव में अचानक बादल फट गया। बादल फटते ही पहाड़ का मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। लोगों में इस भयावह घटना को देखते ही चीख-पुकार मच गई। बादल फटने से खीर गंगा ऊफान पर आ गई। राली बाजार व आसपास के क्षेत्र के भारी नुकसान पहुंचा है। यहां कुछ लोगों के दबे होने की भी सूचना है। हर्षिल से आर्मी,पुलिस,एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई हैं। बादल फटते ही पहाड़ से आया सैलाब उत्तरकाशी के धराली गांव में दोपहर बादल फटने के बाद पहाड़ से ढेर सारा मलबा सैलाब बनकर नीचे आ गया। इसके चलते कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है। वीडियो में देखने पर पता चलता है कि यह जलजला कितना भयावह था। लोगों ने यह दृश्य देखते चीख-पुकार मचाना शुरू कर दी। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई ने बताया रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। लोग वीडियो बनाते वक्त चीख रहे थे। सीएम ने जताया घटना पर दुख उत्तरकाशी में हुए इस भयानक हादसे पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धराली (उत्तरकाशी) क्षेत्र में बादल फटने से हुए भारी नुकसान का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए SDRF,NDRF,जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। इस सम्बन्ध में लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क में हूं और स्थिति की गहन निगरानी की जा रही है। ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं। उत्तराखंड पुलिस ने दी अपडेट उत्तराखंड पुलिस ने अपने एक्स हैंडल से बताया कि उत्तरकाशी,हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस,SDRF,आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। उक्त घटना को देखते हुए सभी नदी से उचित दूरी बनाएं। पुलिस ने सचेत करते हुए स्वयं,बच्चों व मवेशियों को नदी से उचित दूरी पर ले जाने को कहा है।  

बंगाल में वोटर वेरिफिकेशन का नया चरण, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया का आदेश जारी किया

नई दिल्ली बिहार के बाद अब बंगाल में भी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस बारे में सूचित किया है और राज्य के निर्वाचन अधिकारियों से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है. बता दें कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम अपने अंतिम चरण में है. एसआईआर प्रक्रिया के तहत राज्य में 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई. इस प्रक्रिया के बाद बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटेंगे. इनमें ज्यादातर वे मतदाता हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. बाकी ऐसे वोटर हैं जो स्थायी रूप से किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित हो चुके हैं. कुछ ऐसे मतदाता भी हैं, जिनके नाम एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज था. हालांकि, विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध कर रहा है और इसे बीजेपी के इशारे पर वोटों की चोरी करार दे रहा है.  बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) का पहला चरण पूरा बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) का पहला चरण पूरा हो चुका है, लेकिन इस दौरान राजनीतिक दलों की ओर से एक भी आपत्ति दर्ज या सुझाव नहीं मिला है. दूसरी ओर आम वोटरों ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने में सक्रियता दिखाई और 1,927 मामले निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल किए. ये मामले योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल करने और अयोग्य मतदाताओं को हटाने से संबंधित हैं. जबकि 10,977 आवेदन फॉर्म-6 के तहत नए वोटर जोड़ने, हटाने और अन्य घोषणा पत्र से जुड़े हैं. बिहार में आम वोटरों ने मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने में निभाई भूमिका बिहार में, राजनीतिक दलों की निष्क्रियता के बीच आम वोटरों ने मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आयोग को प्राप्त 1,927 शिकायतें और 10,977 आवेदन इस बात का प्रमाण हैं कि आम लोग अपने मताधिकार को लेकर सजग हैं. ये आवेदन मुख्य रूप से नए मतदाताओं को जोड़ने, गलत नाम हटाने और मतदाता सूची में सुधार से संबंधित हैं. राजनीतिक दलों की इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी दलों के करीब 60,000 बूथ लेवल एजेंट्स शायद अब तक मतदाता सूची में आपत्तिजनक नाम ढूंढ नहीं पाए हैं. वहीं, चुनाव आयोग ने सभी दलों और नागरिकों से अपील की है कि वे मतदाता सूची को और सटीक बनाने में सहयोग करें. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले सभी पक्षों को पर्याप्त वक्त दिया जाएगा.

आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान का चांद पर पहुंचने का सपना – क्या ये हकीकत बनेगा?

नई दिल्ली  आतंकवाद से जूझ रहा और IMF से कर्ज के भरोसे चल रहा पाकिस्तान अब चांद पर जाने के ख्वाब देख रहा है। खबर है कि पाकिस्तान ने साल 2035 तक चांद पर रोवर पहुंचाने की योजना बनाई है। खास बात है कि चांद पर लैंडिंग की उपलब्धि भारत दो साल पहले ही हासिल कर चुका है। जबकि, कहा जाता है कि पाकिस्तान ने भारत की तुलना में करीब 10 साल पहले ही अपना स्पेस प्रोग्राम शुरू कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के मंत्री एहसान इकबाल ने 2035 तक पाकिस्तान के रोवर को चांद पर भेजने की बात कही है। बीजिंग में चीनी अधिकारियों के साथ बैठक में इकबाल ने पाकिस्तान के स्पेस और न्यूक्लियर प्रोग्राम में कमियों को भरने में चीन पर काफी निर्भर होने के संकेत दिए हैं। खबर है कि पाकिस्तान के SUPARCO यानी स्पेश एंड अपर एटमॉस्पियर रिसर्च कमीशन को यह मिशन सौंपा गया है। खास बात है कि अब तक SUPARCO ने अपने दम पर और खासतौर से चीन की मदद के बगैर कोई भी अंतरिक्ष मिशन या सैटेलाइट लॉन्च नहीं किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन साल 2028 के Chang'e-8 मिशन के तहत चांद पर जाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान 35 किग्रा के रोवर देने वाला है। चीन इस मिशन के जरिए चांद के साउथ पोल की जानकारी जुटाना चाहता है। खास बात है कि भारत ने साल 2023 में चंद्रयान-3 के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग कर कीर्तिमान स्थापित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, SUPARCO पहले ही सरकारी फंडिंग में कमी के चलते काम ठीक से नहीं कर पा रही है। वहीं, यहां नेतृत्व से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तान सैटेलाइट लॉन्च के लिए काफी ज्यादा चीन पर निर्भर है। साथ ही पाकिस्तान में कुछ ही विश्वविद्यालय हैं, जहां अंतरिक्ष संबंधी शिक्षा दी जाती है।  

भाजपा सांसद थके–हारे 110 किमी कांवड़ यात्रा के बाद व्हीलचेयर से संसद पहुँचे, पैर खराब

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद मनोज तिवारी कांवड़ यात्रा संपन्न करके वापस आ गए हैं। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली सीट से तीसरी बार के सांसद मनोज तिवारी ने सुल्तागंज से गंगाजल भरकर बाबा वैद्यनाथ को जल चढ़ाया। नंगे पैर 110 किलोमीटर पैदल यात्रा की वजह से मनोज तिवारी के दोनों पैरों का बुरा हाल हो गया है। पैर में छालों की वजह से उन्हें व्हील चेयर पर बैठकर संसद जाना पड़ा। मनोज तिवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मनोज तिवारी ने पिछले दिनों बताया था कि 30 साल बाद कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। भोजपुरी गानों के मशहूर गायक मनोज तिवारी पहले भी कई बार बाबा धाम कांवड़ लेकर जा चुके हैं। लेकिन राजनीति में सक्रियता के बाद वह समय नहीं निकाल पाते थे। इस बार उन्होंने बाबा को पैदल जाकर गंगाजल चढ़ाने का फैसला किया। सुल्तानगंज में गंगा स्नान के बाद वह पैदल बाबा धाम तक गए। इस दौरान वह भजन गाते रहे और बोल-बम करते हुए आगे बढ़ते रहे। 3 अगस्त को मनोज तिवारी ने दिल्ली वापस आकर अपनी तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उनके पैरों में पट्टियां बंधी दिख रही हैं। सांसद ने लिखा, 'जय भोलेनाथ.. जय वैद्यनाथ। मैं अर्धरात्रि दिल्ली पहुंच गया था। 110 KM पैदल…नंगे पांव… कांवड़ संभाल के चल पड़ा.. जिस शक्ति ने चलाया, पहुंचाया, वो महादेव ही थे।' तिवारी ने कहा कि दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्चा जी ने फोन पर उनका हालचाल लिया। तिवारी ने कहा कि पैर में छाले पड़े हैं पर दिव्यता का अनुभव कर रहा हूं। पूर्व भाजपा अध्यक्ष संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए सोमवार को और मंगलवार को व्हीलचेयर से पहुंचे। सीढ़ियों तक व्हीलचेयर से लाए गए तिवारी बड़ी मुश्किल से सहारा लेकर चलते हुए दिखाई दिए। भाजपा और अन्य दलों के भी कई नेताओं ने तिवारी के पास आकर उनका हाल चाल लिया।  

30 मई 2019 से अब तक यानी 2258 दिन तक गृह मंत्रालय की कमान, अमित शाह ने नया रिकार्ड बनाया

नई दिल्ली  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया है। वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेता बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। खास बात है कि उन्होंने यह उपलब्धि 5 अगस्त को हासिल की है। इसी दिन उन्होंने संसद में जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का ऐलान किया था। अमित शाह भारत के गृहमंत्री पद पर 2 हजार 258 दिनों से हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 30 मई 2019 को यह पद पहली बार संभाला था। इसके बाद 2024 में NDA सरकार बनने के बाद भी वह इस पद पर काबिज हुए। इस पद पर आडवाणी के बाद कांग्रेस दिग्गज गोविंद वल्लभ पंत सबसे ज्यादा समय तक रहे हैं। एक ओर जहां आडवाणी ने 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक कुल 2 हजार 256 दिन गृहमंत्री के तौर पर सेवाएं दीं। वहीं, पंत 10 जनवरी 1955 से 7 मार्च 1961 तक इस पद पर रहे। यानी कुल 6 साल 56 दिन तक वह गृहमंत्री रहे। खास बात है कि शाह देश के पहले सहकारिता मंत्री भी हैं। इससे पहले वह गुजरात के गृहमंत्री भी रह चुके हैं। पीएम मोदी ने की तारीफ मंगलवार को प्रधानमंत्री ने NDA सांसदों के साथ बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वह अब सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले केंद्रीय गृह मंत्री बन गए हैं। पीएम ने भाषण में कहा कि पांच अगस्त एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि इसी दिन पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था। उन्होंने कहा कि NDA सरकार ने संविधान का सही अर्थों में पालन किया है। खास बात है कि मंगलवार को भाजपा की अगुवाई वाली NDA सरकार ने जून 2024 में सरकार बनने के बाद से संसद के सत्रों के दौरान इस तरह की यह दूसरी बैठक की है।  

नापाक याराना फिर याद दिलाया गया! टैरिफ विवाद पर भारत की सैन्य प्रतिक्रिया ने अमेरिका को घेरा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बोल और भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद दोनों देशों में जारी तनातनी के बीच भारतीय सेना ने अमेरिका को आईना दिखाया है और 54 साल पुराना वाकया याद दिलाया है। दरअसल, भारतीय सेना ने मंगलवार को 1971 में प्रकाशित एक अखबार की क्लिप शेयर कर अमेरिका पर तंज कसा है। इस क्लिप में दिखाया गया है कि अमेरिका कैसे दशकों से पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है। यह पोस्ट इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से भारत के तेल खरीदने पर भारतीय सामानों पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि वह भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करेंगे क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहा है लेकिन अमेरिका खुद भूल गया कि उसका अतीत कैसा रहा है। भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने क्या लिखा? इसी संदर्भ में ट्रंप सरकार को आईना दिखाते हुए भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने 5 अगस्त, 1971 को प्रकाशित अखबार की एक क्लिप साझा की है। उस क्लिप में तत्कालीन रक्षामंत्री विद्याचरण शुक्ला द्वारा राज्यसभा में दिए गए बयान का जिक्र है। तब शुक्ला ने नाटो शक्तियों द्वारा पाकिस्तानी सेना को संभावित हथियारों की सप्लाई को लेकर संसद में बयान दिया था। इसमें दिखाया गया है कि कैसे अमेरिका 1971 के युद्ध की तैयारी के लिए दशकों से पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई कर रहा था। सेना ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा है, “आज का दिन, युद्ध की तैयारी का वह साल – 5 अगस्त, 1971।” तब के रक्षा मंत्री ने संसद में दिया था बयान शुक्ला ने तब राज्यसभा में दिए अपने बयान में बताया था कि कैसे बांग्लादेश में इस्लामाबाद के सशस्त्र आक्रमण की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति को लेकर नाटो और सोवियत संघ से संपर्क किया गया था। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सोवियत संघ और फ्रांसीसी सरकार ने पाकिस्तान को हथियार देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना समर्थन जारी रखा था। इसमें यह भी कहा गया है कि तब अमेरिका और चीन दोनों ने पाकिस्तान को औने-पौने दामों पर हथियार बेचे थे। इससे यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान ने 1971 में भारत के साथ युद्ध दोनों देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए हथियारों से लड़ा था। इसमें एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है कि अमेरिका से पाकिस्तान को 1954 के बाद से करीब दो अरब डॉलर के हथियारों की आपूर्ति की गई है। पाकिस्तान पर मेहरबान ट्रंप बता दें कि अमेरिका अभी भी पाकिस्तान पर मेहरबान और नरम है क्योंकि उस पर लगाए गए टैरिफ इसी बात का संकेत देते हैं। हाल ही में अमेरिका ने जो टैरिफ लगाए हैं, उनमें पाकिस्तान को बड़ी छूट दी गई है। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर टैरिफ 29 प्रतिशत से घटकर 19 प्रतिशत कर दिया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिकी शुल्क में खासी बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर भारी मात्रा में रूस से तेल खरीदने और उसे बड़े मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा, "भारत रूस से भारी मात्रा में तेल सिर्फ खरीद ही नहीं रहा है, बल्कि उस तेल के बड़े हिस्से को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है।" भारत पर बिदक रहे ट्रंप इसके साथ ही ट्रंप ने कहा, "उसे (भारत को) इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है। इसी वजह से मैं भारत से अमेरिका को दिए जाने वाले शुल्क को काफी बढ़ाने जा रहा हूं।" ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाने के साथ ही रूस से तेल एवं गैस खरीदने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस से सैन्य उपकरण और कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर जुर्माना लगाने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में आई अधिसूचना में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया था।  

बड़ी खबर: आयुष्मान योजना पर संकट, IMA ने दी 7 अगस्त से सेवाएं रोकने की धमकी

नई दिल्ली  बीजेपी सरकार के शासन वाले हरियाणा में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जो लाखों आयुष्मान कार्डधारकों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 7 अगस्त तक निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो वे आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर देंगे। इस फैसले से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच संकट में पड़ सकती है। आइए जानते हैं इस गंभीर हालात के पीछे की असली वजहें और इसका प्रभाव। आयुष्मान भारत योजना पर संकट क्यों? हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारियों के इलाज में राहत दी है। योजना के तहत कार्डधारकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जो सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में उपलब्ध है। लेकिन अब लगभग 500 करोड़ रुपये के बकाए के कारण निजी अस्पताल इस सेवा को जारी रखने में असमर्थता जता रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने स्पष्ट किया है कि अगर यह बकाया राशि जल्द न चुकाई गई, तो वे योजना के अंतर्गत इलाज देना बंद कर देंगे। मरीजों को हो सकता है बड़ा नुकसान हरियाणा में लगभग 650 निजी अस्पताल इस योजना के अंतर्गत सेवाएं प्रदान करते हैं और 5 लाख से अधिक कार्डधारक इससे लाभान्वित हैं। लेकिन बकाया भुगतान रोकने से अस्पतालों के हाथ-पांव फूल सकते हैं, जिससे कैंसर, हृदय रोग, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। IMA ने सरकार से आयुष्मान योजना के लिए बजट को मौजूदा 800 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये करने की मांग की है, ताकि भविष्य में बकाया भुगतान जैसी समस्या दोबारा न आए। दूसरी ओर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री ने इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए आश्वासन दिया है कि सरकार जल्द से जल्द बकाया राशि का भुगतान करेगी और योजना को बिना बाधा के जारी रखा जाएगा।