samacharsecretary.com

Operation Sindoor: सरकार ने पहली बार जारी किए 6 शहीद जवानों के नाम, वॉर मेमोरियल पर मिली अमर पहचान

 नई दिल्ली भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवान अब औपचारिक रूप से देश के सामने आए हैं. सरकार ने पहली बार इन शहीदों के नाम सार्वजनिक किए हैं. इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर रोल ऑफ ऑनर में शामिल किया गया है. युद्ध स्मारक की वॉल 3डी पर 2025 सेक्शन में अंकित किया गया है।  यह पहली बार है जब सरकार ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ चलाए गए क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन सिंदूर में हुई मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. इससे पहले सरकार ने इन शहीदों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी, हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया पर कई रिपोर्ट्स और अटकलें चल रही थीं।  मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान चलाया था. इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. यह चार दिनों तक चला. इसका मकसद सीमा पार से आने वाले आतंकवाद को कुचलना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना था. इस दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।  अब तक सरकार ने ऑपरेशन के दौरान हुई सैन्य क्षति के बारे में विस्तार से नहीं बताया था. लेकिन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह नामों को शामिल करना सरकार की ओर से पहली आधिकारिक स्वीकृति मानी जा रही है कि ऑपरेशन में भारतीय बलों को नुकसान हुआ था।  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित छह शहीद सैनिकों और एयर वारियर्स के नाम इस प्रकार हैं…     सूबेदार मेजर पवन कुमार – हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड       राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र – 4 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री       लांस नायक दिनेश कुमार – 5 फील्ड रेजिमेंट       एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक – 851 लाइट रेजिमेंट       हवलदार सुनील कुमार सिंह – 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी       सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु मेडल – 39 विंग इनमें दो सैनिकों को वीरता के लिए सम्मानित किया गया था – राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु मेडल मिला था।  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का महत्व राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास है. यहां देश के सभी शहीद सैनिकों के नाम दीवारों पर अमर कर दिए जाते हैं. हर साल नए शहीदों के नाम संबंधित वर्ष के सेक्शन में जोड़े जाते हैं. इन छह नामों को 2025 सेक्शन में शामिल किया गया है।  रोल ऑफ ऑनर में नाम दर्ज होना सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह देश के लिए इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देने का तरीका है. परिवारों, साथी सैनिकों और पूरे देश के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अब इन शहीदों को आधिकारिक रूप से फॉलेन हीरोज कहा जा रहा है।  सरकार की चुप्पी और अब खुलासा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई दिनों तक दोनों तरफ से तनाव रहा. भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने भी कुछ दावे किए. लेकिन भारत सरकार ने शुरुआत से ही सैन्य हताहतों की संख्या या नामों पर चुप्पी साध रखी थी. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक वजहों से यह गोपनीयता बरती गई थी।  अब नाम जारी करने को विशेषज्ञ सकारात्मक कदम मान रहे हैं. इससे परिवारों को न्याय मिला है. देश के लोग अपने शहीदों को सलाम कर सकते हैं. ये छह जवान देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर गए. सूबेदार मेजर पवन कुमार जैसे अनुभवी जवान ब्रिगेड की अगुवाई करते थे।  राइफलमैन सुनील कुमार जैसे युवा सिपाही सीमा पर तैनात थे. एविएशन टेक्नीशियन और सार्जेंट जैसे एयर वारियर्स ने हवाई समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हर शहीद के परिवार में अब दर्द है, लेकिन गर्व भी है. पूरे देश को इन वीरों पर गर्व है. इनके बलिदान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग हैं। 

भारत-पाक परमाणु क्षमता पर नई रिपोर्ट, सिपरी ने किए अहम खुलासे

नई दिल्ली स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की जून 2026 में जारी नई रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की रणनीतिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव को उजागर किया है. मई 2025 में हुए भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के उस परमाणु सुरक्षा कवच के भ्रम को तोड़ दिया है जिसके पीछे वह दशकों से छिपता आया था. इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायु सेना और सेना ने सीधे पाकिस्तान के उन चुनिंदा एयरबेस और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया, जो उसके परमाणु हथियारों के बुनियादी ढांचे से जुड़े माने जाते हैं. वैश्विक स्तर पर हथियारों और सैन्य सुरक्षा पर नजर रखने वाली संस्था सिपरी की इस आधिकारिक पुष्टि ने यह साफ कर दिया है कि भारत ने पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग की नीति को हमेशा के लिए ध्वस्त कर दिया है. ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने सीधे न्यूक्लियर ठिकानों को बनाया निशाना मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए भारत के ऑपरेशन सिंदूर को दशकों का सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना गया है. सिपरी की 'इयरबुक 2026' में यह बात रिकॉर्ड पर लाई गई है कि भारत ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के उन एयर और मिसाइल बेसों पर सटीक हमले किए, जिनके पास परमाणु अभियान चलाने की जिम्मेदारी थी. इसमें पाकिस्तान के कुख्यात किराना हिल्स क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया, जिसके बारे में माना जाता है कि वहां पाकिस्तान के गुप्त परमाणु हथियार और मिसाइल सुविधाएं मौजूद हैं. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के रणनीतिक नूर खान एयरबेस को भी निशाना बनाया, जो पाकिस्तान का मुख्य परमाणु कमांड और कंट्रोल सेंटर माना जाता है. पाकिस्तान हमेशा से यह दावा करता रहा है कि भारत की किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई के जवाब में वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन भारत ने उसके परमाणु अड्डों पर ही पारंपरिक हमला कर इस खोखले दावे की हवा निकाल दी. परमाणु हथियारों की होड़ में भारत आगे: बढ़े कुल वॉरहेड्स सिपरी की रिपोर्ट में केवल सैन्य टकराव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के परमाणु हथियारों की संख्या के ताजा आंकड़े भी जारी किए गए हैं. जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का परमाणु हथियारों का भंडार अब बढ़कर 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है, जबकि इसके मुकाबले पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं. भारत ने अपने परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम को चीन और पाकिस्तान दोनों की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तेज किया है, जिसके कारण पिछले एक साल में भारत के बेड़े में 10 नए परमाणु हथियार शामिल हुए हैं. हथियारों की संख्या में बढ़त ने भारत की रणनीतिक स्थिति को क्षेत्र में और अधिक मजबूत बना दिया है.    इतिहास में पहली बार: शांतिकाल में भारत ने तैनात किए परमाणु हथियार इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण बिंदु भारत की परमाणु नीति में आया एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है. भारत ने शांतिकाल के दौरान भी अपने कुछ परमाणु हथियारों (लगभग 12 वॉरहेड्स) को ऑपरेशनली तैनात स्थिति में रखा है. इससे पहले, भारत के सभी परमाणु हथियारों को हमेशा 'स्टोरेज' या रिजर्व में रखा जाता था, जिन्हें इस्तेमाल करने से पहले मिसाइलों के साथ असेंबल करना पड़ता था. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने संभवतः अपनी परमाणु-संचालित पनडुब्बी (SSBN) पर इन वॉरहेड्स को तैनात किया है, जो समुद्र के भीतर गश्त लगा रही है. यह बदलाव भारत की 'नो फर्स्ट यूज' को कायम रखते हुए भी दुश्मन को पलक झपकते ही 'तगड़ा और अचूक जवाबी हमला' देने की क्षमता को प्रदर्शित करता है.    साइबर वॉरफेयर का पहली बार खुला इस्तेमाल सिपरी 2026 की रिपोर्ट में एक और बेहद आधुनिक पहलू का जिक्र किया गया है. 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों ने पहली बार सक्रिय सैन्य संघर्ष के साथ-साथ 'साइबर ऑपरेशन्स' को भी पूरी तरह से शामिल किया था. 88 घंटे चले इस संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य टकराव में पारंपरिक मिसाइल हमलों (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल) के साथ-साथ डिजिटल मोर्चे पर भी एक-दूसरे की सैन्य संचार प्रणालियों को ठप करने की कोशिशें की गईं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले भी यह संकेत दिया था कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु डर के गुब्बारे को फोड़ दिया है. अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'सिपरी' की स्वतंत्र रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि आधुनिक दौर की जंग में भारत का पलड़ा हर मोर्चे पर भारी रहा है.  

आर्मी चीफ का बड़ा बयान, बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया भारत क्या कर सकता है

नई दिल्ली आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह तय कर दिया है कि उकसावे पर भारत किस तरह जवाब देता है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पासिंग आउट कैडेटों से अपील की कि वे अपने सैन्य करियर की शुरुआत करते हुए इस उच्च मानक को हमेशा बनाए रखें। पुणे के खडकवासला स्थित त्रि-सेवा अकादमी परिसर में एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, "आज के समय में खतरे हमेशा वर्दी में या किसी घोषित मोर्चे पर नहीं आते। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया और एक बेंचमार्क स्थापित किया कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीकता और संकल्प के साथ व्यक्त किया जाता है तो भारत उकसावे का कैसा जवाब देता है। अब इस मानक को बनाए रखने की जिम्मेदारी आपकी है।" तीनों सेनाओं के तालमेल पर दिया जोर सेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच आपसी तालमेल और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता उसी एकीकृत दृष्टिकोण का परिणाम थी, जिसकी नींव एनडीए में रखी जाती है। उन्होंने कैडेट्स से कहा, "ऑपरेशन सिंदूर में आपने जो एकीकृत प्रतिक्रिया देखी, वह ठीक उसी नींव पर बनी थी जो एनडीए तैयार करता है। यहां संयुक्तता केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि पहले दिन से ही तीनों सेनाओं के सैनिकों के साथ मिलकर जीने की एक प्रवृत्ति है।" 42 साल बाद अकादमी लौटे सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने खेत्रपाल परेड ग्राउंड में परेड की समीक्षा की, जहां 355 कैडेटों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया गया। इस पासिंग आउट बैच में 12 मित्र विदेशी देशों के 24 कैडेट भी शामिल थे। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सेना प्रमुख भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह अवसर उनके लिए बेहद खास है क्योंकि चार दशक से भी पहले वह खुद इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। आपको बता दें कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी एनडीए के 65वें कोर्स के छात्र और चार्ली स्क्वाड्रन के कैडेट रह चुके हैं। उन्होंने कहा, "42 साल से अधिक समय पहले मैं इसी क्वार्टर डेक से पास आउट हुआ था। आज समीक्षा अधिकारी के रूप में अपनी मातृ संस्था में लौटना मेरे लिए गर्व की बात है। इसी संस्थान ने मेरे मूल्यों, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को आकार दिया है।"

तीनों सेनाओं ने बताया ऑपरेशन सिंदूर का विस्तृत हाल, 13 एयरक्राफ्ट और 11 बेस तबाह

नई दिल्ली   भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बताया. पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के एक साल बाद सेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ऑपरेशन की सफलता और उसके सबकों पर विस्तार से चर्चा की।  लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, एयर मार्शल अवधेश भारती और वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने संयुक्त रूप से कहा कि यह ऑपरेशन आतंकवादियों और उनके समर्थन ढांचे के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का एक प्रतीक है. उन्होने कहा कि भारत ने 13 पाकिस्तानी विमान गिराए, 11 बेस को तबाह किया और 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों मार गिराया।  'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर, लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने गुरुवार को कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और लोगों की रक्षा पक्के तौर पर, पेशेवर तरीके से और पूरी जिम्मेदारी के साथ करेगा, और आतंक के खिलाफ उसकी लड़ाई जारी रहेगी।  राजस्थान के जयपुर में 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्टिनेंट घई ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर को एक साल हो गया है, और उस समय के डीजीएमओ के तौर पर, मैं इसे न सिर्फ एक मिलिट्री ऑपरेशन बल्कि शायद भारत की रणनीतिक यात्रा में एक अहम पल के तौर पर देखता हूं।  उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहुत सोच-समझकर और सही तरीके से अपने पुराने तरीकों और तरीकों से आगे बढ़कर लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और पाकिस्तान के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार आतंक को टारगेट किया।  ऑपरेशन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सटीकता, अनुपात और मकसद की स्पष्टता के साथ, यह एक देश का पक्का इरादा, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का बयान था।  लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि शुरू से ही सरकार ने हमें दो साफ निर्देश दिए थे, साफ राजनीतिक-मिलिट्री मकसद और इन्हें पाने के लिए परिचालन लचीलापन. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आतंक पारिस्थितिकी तंत्र (terror ecosystems) को खत्म करना और कमजोर करना, उनकी प्लानिंग में रुकावट डालना और इन बेस से भविष्य में होने वाले हमले को रोकना बहुत साफ-साफ बताया गया था. जबकि आर्म्ड फोर्सेज को इस ऑपरेशन की प्लानिंग करने और उसे पूरा करने के लिए जरूरी चीजें सौंपी गई थीं।  उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर कोई अंत नहीं है, यह तो बस शुरुआत है. उन्होंने कहा, "आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी. भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने लोगों की रक्षा पक्के तौर पर, प्रोफेशनल तरीके से और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करेगा।  यह बताते हुए कि ऑपरेशन तीनों सेनाओं का एक मिला-जुला प्रयास था, लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि इसमें जमीन, हवा और समुद्री क्षमताओं को हालात की जानकारी, कॉमन ऑपरेशन और इंटेलिजेंस तस्वीरों और रियल टाइम में फैसले लेने के साथ जोड़ा गया।  उन्होंने कहा, "सटीक हमले, कुल नौ, जिनमें से सात भारतीय सेना ने और दो भारतीय वायुसेना ने किए, एकदम सही समय पर किए गए, पूरी तरह से हैरान करने वाले थे और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर और पाकिस्तान के बीचों-बीच हर बने हुए हब में ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान पहुंचाया।  लेफ्टिनेंट घई ने कहा कि ऑपरेशन ने स्वदेशी क्षमता को भी दिखाया और कहा कि इस्तेमाल किए गए हथियार सिस्टम, गोला-बारूद, रॉकेट और मिसाइल, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया और बनाया गया था।  उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस, आकाश, एडवांस्ड सर्विलांस और टारगेटिंग सिस्टम के साथ-साथ देसी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स, सभी ने अहम भूमिका निभाई. एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा कि पहलगाम की घटना अपने आप में एक ऐसी घटना थी जिसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम होगी।  उन्होंने कहा, "हम 22 अप्रैल, 2025 को बेरहमी से मारे गए अपने देश के लोगों को वापस नहीं ला सकते. लेकिन हम यह पक्का करने का पक्का इरादा कर सकते हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. ऑपरेशन सिंदूर, जो अभी रुका हुआ है, उसी इरादे की तरफ एक कोशिश है।  यह कहते हुए कि भारत जियो और जीने दो की सीधी-सादी सोच के साथ जीता है. उन्होंने कहा, "लेकिन, जब शांति की हमारी चाहत को कमजोरी समझ लिया जाता है, और हमारी चुप्पी को गैर-मौजूदगी समझ लिया जाता है, तो काम करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता. जब हम काम करते हैं, तो कोई आधा-अधूरा तरीका नहीं होता. यह अहम होता है, यह जानलेवा होता है, और यह ऑपरेशन सिंदूर में बदल जाता है।  इससे पहले दिन में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर, हम अपने सशस्त्र बलों की बहादुरी और बलिदान को सलाम करते हैं, जिनका साहस और समर्पण देश की सुरक्षा करता रहता है. ऑपरेशन के दौरान उनके कामों में बेमिसाल सटीकता, बिना रुकावट के तालमेल और सभी सेनाओं के बीच गहरा तालमेल दिखा, जिसने मॉडर्न मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए एक बेंचमार्क सेट किया।  मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर देश के पक्के इरादे और तैयारी का एक मजबूत निशान है, जो दिखाता है कि हमारी सेनाएं सबसे जरूरी समय पर मजबूती से काम करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं।  उन्होंने आगे कहा कि यह आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में भारत की निरंतर प्रगति का भी प्रमाण है, जो लचीलेपन को मजबूत करते हुए क्षमता को बढ़ाता है। 

पाकिस्तानी मिसाइल दिल्ली की ओर बढ़ी, लेकिन कैसे रास्ते में हुई ढेर? ऑपरेशन सिंदूर ने खोला राज

 नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के वक्त दिल्ली की तरफ बढ़ती उस पाकिस्तानी मिसाइल को शायद यह अंदाज़ा नहीं था कि वह हिंदुस्तान की सरहद नहीं, बल्कि जज़्बे की दीवार से टकराने जा रही है. हरियाणा के आसमान में ही उसे मिट्टी में मिलाकर इंडियन एयरफोर्स ने साबित कर दिया था कि भारत पर आंख उठाने वालों का अंजाम क्या होता है. ऑपरेशन सिंदूर की यह कहानी सिर्फ एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि दुश्मन के लिए सख्त पैगाम है कि अगर कोई हमारे घर की तरफ बढ़ेगा, तो उसका नाम और निशान दोनों नहीं बचेगा।  इंडियन एयरफोर्स ने मई 2025 में पाकिस्तान की तरफ से दागी गई फतेह या शाहीन सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइल को दिल्ली पहुंचने से पहले ही हरियाणा के ऊपर सफलतापूर्वक खत्म कर दिया था. यह कार्रवाई पश्चिमी सीमा के पास रणनीतिक रूप से जरूरी सिरसा एयर बेस पर तैनात वायुसेना की यूनिट ने अंजाम दी थी।  एयर कोमोडोर रोहित कपिल के नेतृत्व में एयर डिफेंस ग्रिड ने तत्काल जवाब देते हुए बराक-8 (Barak-8) सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम का उपयोग किया. सिरसा से बरामद मलबे ने उस वक्त इस बड़े खतरे का इशारा किया था. यह सफल ऑपरेशन भारत की सैन्य तत्परता और आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है, जिसने युद्ध के दौरान एक बड़े खतरे को टाल दिया था।  एयर कोमोडोर रोहित कपिल का नेतृत्व इस निर्णायक ऑपरेशन का नेतृत्व 45 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग, एयर कोमोडोर रोहित कपिल ने किया था. उनके सटीक फैसलों और त्वरित जवाबी कार्रवाई की वजह से ही दिल्ली पर होने वाला हमला नाकाम हो सका. उनकी इस बहादुरी और रक्षात्मक व आक्रामक योजना के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें साल 2025 में 'युद्ध सेवा मेडल' से सम्मानित किया था।  सिरसा की यह घटना भारत के विकसित होते एयर डिफेंस आर्किटेक्चर का एक उदाहरण बन गई है. मौजूदा वक्त में 'सुदर्शन प्रोग्राम' के तहत देश भर में एक मल्टी-लेवल सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है. इसमें एस-400, बराक-8 और स्वदेशी इंटरसेप्टर सिस्टम को इंटीग्रेटेड किया जा रहा है. सिरसा इंटरसेप्ट आधुनिक युद्ध में सतर्कता और आपसी कोऑर्डिनेशन की अहमियत की याद दिलाता है। 

आर्मी चीफ का बयान: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में नमाज के वक्त नहीं करते थे हमला, सबका मालिक एक

नई दिल्ली पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों के मासूम पर्यटकों पर किए गए हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर सीमा पार पल रहे आतंकियों के ठिकाने नेस्तनाबूद कर दिए। 'ऑपरेसन सिंदूर' को लेकर आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक इंटरव्यू में कई ऐसी बातें बताई जिससे भारतीय सेना की बहादुरी के साथ ही उसकी इंसानियत भी नजर आती है। जनरल द्विवेदी ने कहा, 'जब भी हमें अपने टारगेट पर हमला होता था तो यह समय कुछ भी हो सकता था लेकिन इतना ध्यान जरूर रखा जाता था कि यह नमाज का वक्त ना हो। अगर आतंकी कैंप में भी लोग नमाज पढ़ रहे हों तो हमला ना किया जाए। क्योंकि सबका मालिक एक है।' आर्मी चीफ ने आगे कहा, भारतीय सेना को अगर पता चलता था कि नमाज हो रही है तो हमले का समय बदल दिया जाता था। उन्होंने कहा कि भले ही स्थिति युद्द वाली रही हो लेकिन भारतीय सेना ने संयम बरता और दुश्मनों की भी इबादत का सम्मान किया। बदल गया है युद्ध इससे पहले रण संवाद मंच को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर, विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की दिशा में भारत की प्रगति का सबसे शक्तिशाली साधन था। लेकिन हमें विभिन्न क्षेत्रों का एकीकरण और तालमेल का लक्ष्य प्राप्त करना होगा।’ सेना प्रमुख ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद गठित युद्ध सूचना संगठन और मनोवैज्ञानिक रक्षा प्रभाग के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ''हमारे प्रयासों का 15 प्रतिशत हिस्सा दुष्प्रचार अभियान से निपटने पर केंद्रित था।' हालांकि, उन्होंने चेताया कि प्रमुख चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, विशेष रूप से रणनीतिक, परिचालन और सामरिक स्तरों पर संचालन में समन्वय स्थापित करने और 'हाइब्रिड या ग्रे-ज़ोन' युद्ध के बढ़ते प्रचलन से निपटने में। उन्होंने कहा, 'ये आमतौर पर पारंपरिक सैन्य सीमा से नीचे होते हैं, जिनका उद्देश्य दुश्मन की कमजोरियों का फायदा उठाना होता है।' थलसेना प्रमुख ने कहा कि एमडीओ की उनकी कल्पना ऐसी नहीं है जिसमें सेना के छह अलग अलग क्षेत्र अलग-अलग समानांतर काम करें, बल्कि सभी ''बदलते हालात के हिसाब से लगातार आपसी तालमेल में हों, जहां परिस्थिति के अनुसार महत्व बदलता रहे और नेतृत्व भी बदलता रहे।'' उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल भौगोलिक सीमाओं या किसी एक सेना की प्रधानता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विभिन्न क्षेत्र, हितधारकों और संघर्ष के अलग-अलग स्तर के बीच लगातार होने वाले आपसी समन्वय से परिभाषित होता है। युद्धक्षेत्र में हो रहे बदलावों पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि एमडीओ के कारण युद्ध का स्वरूप ऐसा हो गया है, जहां अलग-अलग स्तर और दिशाओं में एक साथ ऑपरेशन चलते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कमांडरों को सामरिक से लेकर रणनीतिक स्तर तक, विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी विकसित करनी चाहिए। एकीकरण के परिचालन महत्व को रेखांकित करते हुए, जनरल द्विवेदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बताया जनरल द्विवेदी ने कहा, ''यह जमीनी खुफिया नेटवर्क, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) से मिली जानकारियों का मेल था जिसने थल सेना और वायु सेना की संयुक्त कार्रवाई को लक्ष्य निर्धारित करने में मदद की, वहीं नौसेना की तैनाती में बदलाव ने रणनीतिक आकलन को आकार दिया। किसी एक क्षेत्र ने इस अभियान का फैसला नहीं किया।''जनरल द्विवेदी ने एकीकृत युद्ध समूहों, रुद्र ब्रिगेड, ड्रोन इकाइयों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संरचनाओं और साइबर ऑपरेशन नोड्स के संचालन सहित कई संरचनात्मक सुधारों का भी जिक्र किया।

ऑपरेशन सिंदूर: आखिरी वक्त पर टला समुद्री हमला, चौंकाने वाले खुलासे

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना की भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उन्होंने हमले रोकने का अनुरोध किया। लगभग सालभर पहले पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय नौसेना समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थी, तभी पाकिस्तान ने हमले रोकने का अनुरोध किया। वह नौसेना के अलंकरण समारोह में बोल रहे थे, जहां उन्होंने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी विशिष्ट सेवा के लिए दो शीर्ष नौसेना अधिकारियों को 'युद्ध सेवा पदक' से सम्मानित किया। नौसेना की भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उन्होंने हमले रोकने का अनुरोध किया।" बता दें कि पिछले साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला किया था, जिसमें कई भारतीय पर्यटकों की जान चली गई थी। उनका धर्म पूछकर गोली मारी गई थी। इससे पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा था। भारत ने सात मई आधी रात पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की और पीओके व पाकिस्तान के कई इलाकों में एयर स्ट्राइक करके 100 से अधिक लश्कर व जैश के आतंकियों को ढेर कर दिया था। इससे दोनों देशों में तनाव बढ़ गया और पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, इन हमलों को भारत ने विफल कर दिया और फिर पाकिस्तान के कई एयरबेस को निशाना बनाया, जिसमें उसकी सेना को काफी नुकसान पहुंचा। चार दिन बाद पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तब से इस क्षेत्र में 20 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस शत्रुतापूर्ण माहौल के बीच लगभग 1,900 जहाज फंसे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला दैनिक यातायात तेजी से घटकर छह-सात जहाजों तक रह गया है, जबकि संघर्ष से पहले इसका औसत लगभग 130 जहाज था। एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आगे कहा, "साथ ही, विकसित होती तकनीक और रणनीतियों ने न केवल इस बात को नया रूप दिया है कि संघर्षों की योजना कैसे बनाई जाती है, उन्हें कैसे शुरू किया जाता है और कैसे जारी रखा जाता है, बल्कि उन्होंने गैर-पारंपरिक चुनौतियों को और भी अधिक जटिल बना दिया है, और उनका मुकाबला करना कम अनुमानित हो गया है। परिणामस्वरूप, मौजूदा समुद्री वातावरण में इन चीजों के सावधानीपूर्वक तालमेल की आवश्यकता है। संगठनात्मक स्तर पर फुर्ती और दूरदर्शिता, यूनिट स्तर पर युद्ध की तैयारी और परिचालन प्रभावशीलता और व्यक्तिगत स्तर पर साहस और सही निर्णय लेने की क्षमता पर आधारित पेशेवर उत्कृष्टता। आज, मैं यहां अत्यंत गर्व और प्रसन्नता के साथ यह कहने के लिए खड़ा हूं कि भारतीय नौसेना ने इन सभी आयामों पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है।''  

ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा: SU-30, राफेल और ब्रह्मोस की ताकत ने किया किराना हिल्स पर भारी हमला

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को किस तरह रणनीतिक रूप से झटका दिया, इस पर लंबे समय से बहस होती रही है. अब जाने-माने एरियल वॉरफेयर विश्लेषक और इतिहासकार टॉम कूपर ने दावा किया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स पर सटीक हमला कर उसकी कमर तोड़ दी थी. टॉम कूपर के मुताबिक यही वह निर्णायक वार था, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था और सीजफायर की भीख मांगने लगा. हालांकि भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर किराना हिल्स को निशाना बनाने से इनकार किया है, लेकिन टॉम कूपर का कहना है कि सबूत साफ हैं. टॉम कूपर ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें मिसाइलों के धुएं के निशान पहाड़ियों की ओर जाते और टकराते दिखाई देते हैं. इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पाकिस्तानी वायुसेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से धुआं उठता दिखा. कूपर के मुताबिक भारत ने पहले इन रडार स्टेशनों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को निष्क्रिय किया और फिर अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधाओं के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर हमला किया. पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भी मारे गए?     टॉम कूपर ने दावा किया कि उस समय पाकिस्तान का ऑपरेशन ‘बुनियान-उन-मार्सूस’ फेल हो चुका था. भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम कर दिया.     कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 12-13 एयरबेस पर हमला किया. अंत में किराना हिल्स पर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेर लिया.     हमले के समय कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज थी. पाकिस्तान, अमेरिका और भारत से संपर्क कर युद्धविराम के रास्ते तलाश रहा था. कूपर के शब्दों में यह साफ संकेत था कि पाकिस्तान अब आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था. क्यों पाकिस्तान की कमजोर नस है किराना हिल्स? किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है. यहां 20 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में हार्डन शेल्टर व भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं. टॉम कूपर का तर्क है कि ऐसी जगह पर हमला तभी किया जाता है जब स्पष्ट संदेश देना हो- ‘हम जब चाहें, जहां चाहें, जितनी ताकत से चाहें, वार कर सकते हैं.’ कूपर ने यह भी सवाल उठाया कि जब सबूत इतने स्पष्ट हैं तो भारत आधिकारिक तौर पर हमले से इनकार क्यों करता है. वो इसे लेकर इतने आश्वस्त हैं कि बोलते हैं कि इससे इनकार करना वैसा ही जैसे कोई कहे कि सूरज पूरब से नहीं उगता. रूसी फाइटर जेट और ब्रह्मोस ने किया तांडव हथियारों की बात करें तो कूपर के अनुसार भारत को किसी विशेष गुप्त तकनीक की जरूरत नहीं पड़ी. सुखोई-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं, जगुआर ने रैम्पेज लॉन्च किए और राफेल ने स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया. इतना पाकिस्तान के लिए काफी था. उन्होंने भारत की इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम की खास तारीफ की, जिसने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई. कुल मिलाकर टॉम कूपर का आकलन है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्पष्ट रणनीतिक जीत थी. किराना हिल्स पर कथित हमले ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य क्षमता और एडवांस तकनीक के सामने उसकी जवाबी ताकत सीमित है.

पॉज मोड में ऑपरेशन सिंदूर, डीके त्रिपाठी ने रांची में दी हुंकार

रांची  नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी (DK Tripathi) ने अपने झारखंड दौरे के दौरान राजधानी रांची में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि पॉज (विराम) मोड में है. इस युद्ध में भारतीय सेना ने पराक्रम का परिचय दिया. हम युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार थे. जरूरत पड़ने पर अपनी ताकत दिखाने में भी सक्षम थे, लेकिन प्रतिद्वंदी ने लड़ने का मौका ही नहीं दिया. एडमिरल त्रिपाठी शुक्रवार को सीसीएल सभागार में आयोजित विकसित भारत-2047 संवाद कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे. सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं डीके त्रिपाठी (DK Tripathi) ने कहा कि भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. बिना सुरक्षा के कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता. इसमें वर्दी और बिना वर्दी वाले, दोनों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है. सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं. अगले दो दशकों की यात्रा से ही विकसित भारत का सपना पूरा होगा. इसके कई लक्ष्य हैं. ये लक्ष्य बहुत कठिन हैं, लेकिन सरकार की मंशा स्पष्ट है. इसके लिए शत-प्रतिशत शिक्षा का लक्ष्य पूरा करना होगा. सभी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देनी होंगी. इनोवेशन (नवाचार) में ग्लोबल लीडर बनना होगा. दूसरों पर निर्भरता को कम करना होगा. विकसित भारत कमजोरी से रेसिलिएंस (लचीलापन) की ओर बढ़ने का मार्ग है. यह केवल नीति-निर्माताओं से संभव नहीं होगा. आम लोगों की भागीदारी जरूरी है. इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. भारत की ओर गलत नजर उठी, तो जवाब होगा सख्त इससे पहले नौसेना प्रमुख ने रजप्पा में प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिके के दर्शन किए और वहां पूजा की. रजरप्पा में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है कि भारत के खिलाफ किसी तरह की गलत सोच या मंशा बर्दाश्त नहीं की जायेगी. भारत की ओर गलत नजर उठी, तो सख्त जवाब दिया जायेगा. देश की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्षम है. किसी भी चुनौती का सामना मजबूती के साथ करने के लिए तैयार है. आवश्यक होने पर कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी. एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि देश की सुरक्षा आज मजबूत हाथों में है. समुद्री सीमाओं की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. भारत के खिलाफ किसी प्रकार की गतिविधि का तत्काल और प्रभावी जवाब दिया जायेगा.

जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले— ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने स्थापित किया नया सुरक्षा न्यू नॉर्मल

जयपुर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया है। इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को दर्शाया। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। सेना प्रमुख ने सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में एक स्पष्ट बदलाव आया है। हम केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार लैस और ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून, शक्तिबान रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक चुस्त, तत्पर एवं मिशन-केंद्रित सेना के निर्माण को दर्शाती हैं।'' सेना प्रमुख ने कहा, "हमारे इस परिवर्तन की आधारशिला आत्मनिर्भरता है। इसकी झलक आपको परेड के दौरान 'मेड इन इंडिया' उपकरणों द्वारा देखने को मिली होगी। भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसे हथियार प्रणालियों और उपकरण चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए हों। स्वदेशी अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। हम द्वि-उपयोगी संसाधनों पर भी विशेष जोर दे रहे हैं, ऐसे संसाधन जो सेना और सिविलियन दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों। जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेना के लिए विकसित हो, वह देश के समग्र विकास में भी योगदान दे।" सेना प्रमुख ने कहा कि वह सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी सैनिकों, हमारे सिविलियन कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। इस पावन अवसर पर उन वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं जिन्होंने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने राजस्थान सरकार और जयपुर के नागरिकों का दिल से धन्यवाद किया। सेना प्रमुख के मुताबिक, जयपुर में सेना दिवस का आयोजन सेना को नागरिकों के और करीब लाने का प्रयास है। सेनाध्यक्ष का कहना है कि भारतीय सेना एक फ्यूचर-रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां बेहतरीन प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक सिस्टम और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मौजूद है। टेक्नोलॉजी का उपयोग जवानों को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, अगले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता के वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को एक डेटा-आधारित, नेटवर्क-सक्षम और सभी हितधारकों के साथ पूर्णत: एकीकृत बल में रूपांतरित करना है। जयपुर में हुई सेना दिवस की परेड में परंपरा और ट्रांसफॉर्मेशन का सुंदर संगम देखने को मिला। नेपाल आर्मी बैंड ने हमारे पुराने और मजबूत संबंधों को दर्शाया, जबकि नई इकाइयों की भागीदारी ने सेना की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित किया।