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ऑपरेशन सिंदूर का कहर: पाकिस्तानी सेना फुल-स्केल वॉर के डर से कांपी, जरदारी को मिली बंकर में जाने की सलाह

इस्लामाबाद   पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अब तक उबर नहीं पा रहा है। समय-समय पर उसे ऑपरेशन सिंदूर में भारत द्वारा किए गए हमलों की याद आ जाती है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने माना है कि 10 मई की सुबह भारत ने उसके नूर खान एयरबेस पर हमला किया था। भारत ने पाकिस्तान पर कितने करारे हमले किए थे, इसकी भी डार ने खुद जानकारी दी। डार ने बताया कि 36 घंटे में भारत ने 80 ड्रोन से हमले किए थे। डार ने यह भी कहा कि मई के संघर्ष के दौरान इस्लामाबाद ने पाकिस्तान और भारत के बीच मीडिएशन के लिए रिक्वेस्ट नहीं की थी, लेकिन दावा किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने नई दिल्ली से बात करने की इच्छा जताई थी। भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें पहलगाम हमले के बदले में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।  पाक‍िस्‍तान के राष्‍ट्रपत‍ि आस‍िफ अली जरदारी ने एक द‍िन पहले कहा क‍ि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. वे अपनी शेखी बघार रहे थे क‍ि इतने विकट हालात के बावजूद वे बंकर में नहीं गए. लेकिन इसी बीच उन्‍होंने पाक‍िस्‍तान के डर का भी खुलासा कर द‍िया. तो आख‍िर ऐसा हुआ क्‍या?. इससे साफ पता चलता है क‍ि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना को भारत की ओर से एक बड़े और चौतरफा (Full-scale) हमले का डर सता रहा था. इस खौफ के चलते रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) में हड़कंप मच गया था. पाकिस्तानी सेना को आशंका थी कि पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ आतंकी कैंपों तक सीमित नहीं रहेगा. उन्हें डर था कि यह हवाई ताकत, साइबर ऑपरेशन, गुप्त कार्रवाई और जमीनी हमलों के साथ एक बड़े युद्ध में बदल सकता है. यह घबराहट पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व तक में महसूस की गई थी. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खुद खुलासा किया है कि मई में तनाव बढ़ने पर उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी. शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, जरदारी ने बताया कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें स्थिति की गंभीरता के बारे में बताया था और चेतावनी दी थी कि “जंग शुरू हो चुकी है” क्योंकि भारतीय बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सटीक हमले शुरू कर दिए थे.     जरदारी ने कहा, मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी ने मुझसे कहा कि युद्ध शुरू हो गया है और सुझाव दिया कि हम बंकरों में चले जाएं. मैंने मना कर दिया. अगर शहादत लिखी है, तो यहीं होगी. नेता बंकरों में नहीं मरते. मुझे कई दिन पहले ही इस संघर्ष का आभास हो गया था. सेना का सरकार पर अविश्वास राष्ट्रपति को किसी सुरक्षित ठिकाने पर भेजने की सलाह पाकिस्तान के सत्ता ढांचे के उस जाने-पहचाने पैटर्न को दिखाती है, जहां सरकार को छिपा द‍िया जाता है और सारे फैसले आर्मी करती है. जरदारी का बंकर में जाने से मना करना केवल व्यक्तिगत साहस नहीं, बल्कि नागरिक सत्ता की धमक के तौर पर देखा गया. राष्ट्रपति को कभी-कभी सेना की सलाह के खिलाफ फैसले लेने के लिए जाना जाता है, जो पाकिस्तान के इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है. एटॉमिक ‘रेड-लाइन’ और आर्थिक तबाही का डर     सिर्फ जवाबी हमले का ही डर नहीं था, पाकिस्तानी सेना आंतरिक अस्थिरता को लेकर भी चिंतित थी. उन्हें डर था कि देश की इकॉनमी बर्बाद हो सकती है. जनता विद्रोह कर सकती है और राज्‍यों में फूट पड़ सकती है. इस सैन्य कार्रवाई ने रावलपिंडी को अपनी न्‍यूक्‍ल‍ियर रेड लाइन की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि भारत पाकिस्तान की परमाणु सीमा से ठीक नीचे रहकर भी बड़ी कार्रवाई कर सकता है.     पाकिस्तानी आर्मी लीडरश‍िप इस बात से सबसे ज्‍यादा डरा हुआ था क‍ि कहीं भारत अटैक के साथ साथ इंफॉर्मेशन वॉरफेयर न करने लगे. क्‍योंक‍ि इससे निपटने के ल‍िए उसके पास कोई इंतजाम नहीं थे.     बंकर वाली घटना ने यह साबित कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पाक सेना के अंदर रणनीतिक डर पैदा किया, बल्कि दबाव के समय देश की राजनीतिक व्यवस्था में उनके भरोसे की कमी को भी उजागर कर दिया. क्या था ऑपरेशन सिंदूर? 7 मई की सुबह, इंडियन आर्मी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी शिविरों पर सटीक हमले किए थे. यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. पहला चरण: अपने शुरुआती चरण में, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया. इन हमलों में जैश प्रमुख मसूद अजहर के 10 परिवार वालों और चार करीबी सहयोगियों सहित 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. दूसरा चरण: लेकिन जब पाकिस्तान ने भारतीय शहरों और प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना सहित जवाबी सैन्य कार्रवाई का प्रयास किया, तो भारत ने हमले तेज कर दिए. 9-10 मई की रात को अंजाम दिए गए दूसरे निर्णायक चरण में, भारतीय बलों ने नूर खान, सरगोधा, जैकोबाबाद, मुरीद और रफीकी सहित कई प्रमुख पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला बोल दिया. इसमें पाकिस्तान को इतना नुकसान हुआ कि इस्लामाबाद आज भी सार्वजनिक रूप से उसका हिसाब देने में संघर्ष कर रहा है. यह संघर्ष चार दिनों तक चला था, जिसमें फाइटर जेट, मिसाइल और तोपखाने का जमकर इस्तेमाल हुआ था.

ऑपरेशन सिंदूर से दहला पाकिस्तान, जरदारी का स्वीकार– हालात ऐसे बने कि बंकर में जाना पड़ा

नई दिल्ली  वैश्विक मंच पर पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हुआ है। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा की गई त्वरित सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) के घातक प्रभाव को आखिरकार पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उप प्रधानमंत्री इशाक डार के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय सेना के ड्रोन हमलों ने रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालयों तक को हिला कर रख दिया था। बंकर में शरण लेने की दी गई थी सलाह एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शनिवार को खुलासा किया कि मई में भारतीय जवाबी हमलों के दौरान पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व में भारी खौफ था। जरदारी ने बताया, "मेरे सैन्य सचिव ने मुझसे कहा था कि युद्ध शुरू हो चुका है और मुझे तुरंत सुरक्षा के लिए बंकर में चले जाना चाहिए।" हालांकि, जरदारी ने शेखी बघारते हुए कहा कि उन्होंने बंकर में जाने से इनकार कर दिया था, लेकिन उनके इस बयान ने उस समय पाकिस्तानी सत्ता के गलियारों में व्याप्त डर की पुष्टि कर दी है। नूर खान एयरबेस पर भारत का सटीक प्रहार पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी साल के अंत में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय कार्रवाई की सटीकता को स्वीकार किया। डार ने पुष्टि की कि भारत ने रावलपिंडी के चकाला स्थित नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया था। डार ने बताया, "भारत ने 36 घंटों के भीतर हमारे क्षेत्र में लगभग 80 ड्रोन भेजे थे। हालांकि हमने अधिकांश को रोकने का दावा किया, लेकिन एक ड्रोन ने सीधे हमारे सैन्य प्रतिष्ठान को भारी नुकसान पहुंचाया और वहां तैनात कई सैन्य कर्मी घायल हुए।" यह बयान भारतीय ड्रोन तकनीक और सामरिक सटीकता (Strategic Precision) की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला राज रक्षा विशेषज्ञों और सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारत ने न केवल आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तान के मुख्य वायुसेना अड्डों को भी निशाना बनाया। सैटेलाइट तस्वीरों में इन बेस को हुए नुकसान की पुष्टि हुई है:     नूर खान एयरबेस (रावलपिंडी)     पीएएफ बेस मुशफ (सरगोधा)     पीएएफ बेस शाहबाज (जैकबबाद)     भोलारी एयर फोर्स स्टेशन इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थित नौ आतंकी लॉन्च पैड्स को भी भारतीय सशस्त्र बलों ने नेस्तनाबूद कर दिया था। पहलगाम हमले का प्रतिशोध यह पूरी कार्रवाई मई 2025 में पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के प्रतिशोध में की गई थी, जिसमें 26 निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान गई थी। भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नई दिल्ली अब आतंकी हमलों के खिलाफ 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है और वह सीमा पार दुश्मन के गढ़ में घुसकर हमला करने में सक्षम है।

PAK ने LoC के पास लगाया काउंटर-ड्रोन सिस्टम, ऑपरेशन सिंदूर का असर अभी भी महसूस

 नई दिल्ली भारत की ऑपरेशन सिंदूर में हुई सटीक ड्रोन हमलों से घबराया पाकिस्तान अब नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के आगे के इलाकों में बड़े पैमाने पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात कर रहा है. पाकिस्तान को 'ऑपरेशन सिंदूर 2.0' का डर सता रहा है, इसलिए उसने रावलाकोट, कोटली और भिंबर सेक्टरों के सामने नए एंटी-ड्रोन उपकरण लगाए हैं. 30 से ज्यादा एंटी-ड्रोन यूनिट तैनात LoC के साथ पाकिस्तान ने 30 से अधिक विशेष एंटी-ड्रोन यूनिट तैनात की हैं. यह काम मुख्य रूप से 12वीं इन्फैंट्री डिवीजन (मुर्री मुख्यालय) और 23वीं इन्फैंट्री डिवीजन के सैनिक कर रहे हैं. कोटली-भिंबर इलाके में 23वीं डिवीजन की ब्रिगेड काम संभाल रही हैं. इसका मकसद LoC के पास हवाई निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर को मजबूत करना है. सेक्टर के हिसाब से तैनाती     रावलाकोट सेक्टर: यहां 2nd आजाद कश्मीर ब्रिगेड जिम्मेदार है, जो पूंछ सेक्टर के सामने भारतीय चौकियों को देखती है.     कोटली सेक्टर: 3rd आजाद कश्मीर ब्रिगेड संभाल रही है, जिसका इलाका राजौरी, पूंछ, नौशेरा और सुंदरबनी के सामने है.     भिंबर सेक्टर: 7th आजाद कश्मीर ब्रिगेड यहां तैनात है. पाकिस्तान ने लगाए ये हथियार पाकिस्तान ने इलेक्ट्रॉनिक और हथियारों वाले दोनों तरह के काउंटर-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं…     स्पाइडर काउंटर-UAS सिस्टम: यह रेडियो फ्रीक्वेंसी से ड्रोन का पता लगाता है. 10 किलोमीटर तक छोटे-बड़े ड्रोन को डिटेक्ट कर सकता है.     सफरा एंटी-UAV जैमिंग गन: यह कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली बंदूक है, जो 1.5 किलोमीटर दूर तक ड्रोन का कंट्रोल, वीडियो और GPS सिग्नल जाम कर देती है. इसके अलावा पुराने हवाई रक्षा हथियार भी इस्तेमाल हो रहे हैं…     ओर्लिकॉन GDF 35 mm ट्विन बैरल एंटी-एयरक्राफ्ट गन (रडार के साथ).     अंजा Mk-II और Mk-III MANPADS – ये धीमे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को मार गिरा सकते हैं. तुर्की और चीन से नई खरीदारी की कोशिश पाकिस्तान तुर्की और चीन से नए ड्रोन और रक्षा सिस्टम खरीदने की बातचीत कर रहा है. लेकिन अभी भारत की आक्रामक सैन्य तैयारी से डरा हुआ है. भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना पश्चिमी सीमा पर लगातार युद्धाभ्यास कर रही हैं, जिससे पाकिस्तान में घबराहट बढ़ गई है. यह तैनाती साफ बताती है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अब भारतीय ड्रोन हमलों से बेहद डरा हुआ है. LoC पर अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने में जुट गया है.  

भारत की सख्ती से सहमा पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर के डर से बॉर्डर पर लगाए एंटी-ड्रोन उपकरण

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान पर कई हवाई हमले करते हुए उसे बुरी तरह पराजित किया था। उस हार का भय पाकिस्तान के मन से जा नहीं रहा है। अब उसने एलओसी के पास एंटी ड्रोन सिस्टम की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे भारत अगली बार हवाई हमले करता है तो उसे कुछ सोचने-समझने का समय मिल सके। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान के चीनी एंट्री ड्रोन सिस्टम बिल्कुल काम नहीं किए थे और भारत ने जहां चाहा था, वहां हमला किया था। मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान ने एलओसी के पास पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के आगे वाले इलाकों में एंट्री ड्रोन की तैनाती को बढ़ाया है। उसने रावलकोट, कोटली, भीमबर सेक्टर पर नए काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) लगाए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने 30 डेडीकेटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम्स लगाए हैं। इसके जरिए पाकिस्तान अपने एयरस्पेस को बेहतर करने में लगा हुआ है। पाकिस्तानी सेना ने इलेक्ट्रॉनिक और काइनेटिक काउंटर यूएएस सिस्टम का मिक्स लगाया है। इसको लेकर दावा किया जाता है कि यह दस किलोमीटर की रेंज में आने वाले छोटे या फिर बड़े ड्रोन का पता लगा सकता है। हालांकि, यह युद्ध के समय कितना काम आएगा, यह तो समय पर ही पता चलेगा। वहीं, पाकिस्तान सफराह एंटी यूएवी जैमिंग गन का भी इस्तेमाल करता है, जिसे कंधे से चलाया जाता है और आसानी से डेढ़ किलोमीटर की रेंज में आने वाले ड्रोन को मार गिराया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है अप्रैल महीने में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला करके कई पर्यटकों की जान ले ली थी। इसके बाद भारत ने मई के शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया और पीओके से लेकर पाकिस्तान तक, लश्कर, जैश जैसे आतंकियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की और जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक बॉर्डर के इलाकों में तुर्की ड्रोन के जरिए हमले की नाकाम कोशिश की। भारत ने फिर जवाब देते हुए पाकिस्तान के कई एयरबेस को तबाह कर दिया था। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हो गई, लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है और यह अब भी जारी है। अगर पाकिस्तान की ओर से आगे कोई भी हमला किया गया तो उसे 'एक्ट ऑफ वॉर' माना जाएगा।

देशभक्ति की मिसाल बना नन्हा ‘योद्धा’: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों की सेवा, अब राजधानी दिल्ली में सम्मान

फिरोजपुर  पंजाब के सरहदी जिले फिरोजपुर के चक तरां वाली गांव के रहने वाले 10 साल के श्रवण सिंह को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा. श्रवण को भारत की राष्ट्रपति के द्वारा 26 दिसंबर 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ मिलेगा. इसके लिए वह अपने पिता के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. श्रवण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान असाधारण साहस का परिचय निस्वार्थ सेवा दिखाया था. ​श्रवण सिंह को मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनके असाधारण साहस, सूझबूझ और निस्वार्थ सेवा के लिए पहचाना गया. भारत-पाकिस्तान सीमा पर अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच, श्रवण सिंह ने तैनात सैनिकों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की थी. दुश्मन के ड्रोनों की निरंतर घुसपैठ और भारी तनाव के माहौल में, देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत होकर श्रवण प्रतिदिन अग्रिम चौकियों तक जाते थे. वे सैनिकों के लिए पानी, दूध, लस्सी, चाय और बर्फ जैसी आवश्यक सामग्री पहुंचाते थे. श्रवण ने सैनिकों को पहुंचाई थी मदद दुश्मन की सीधी निगरानी और हमले के निरंतर खतरे के बावजूद, उनके अटूट संकल्प ने लंबे समय से तैनात सैनिकों के लिए जल-आपूर्ति और मनोबल बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन के रूप में काम किया. ​श्रवण ने अपने परिवार को भी सशस्त्र बलों के पूर्ण समर्थन के लिए प्रेरित किया. उन्होंने सैनिकों के आराम और लॉजिस्टिक के लिए अपने घर और संसाधनों के दरवाजे खोल दिए, जिससे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में नागरिक-सैन्य सहयोग की भावना को मजबूती मिली. अब मिलेगा पीएम बाल पुरस्कार उनके इस साहसी और करुणामयी आचरण ने स्थानीय समुदाय को एकजुट किया और देश भर के बच्चों के लिए एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है. उनके इस नेक और बहादुर कार्य के लिए ‘गोल्डन एरो डिवीजन’ ने उनकी शिक्षा को स्पॉन्सर किया है. ​उनकी असाधारण वीरता, निरंतर समर्पण और प्रेरणादायक देशभक्ति को स्वीकार करते हुए, भारत सरकार ने मास्टर श्रवण सिंह को बच्चों को दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 के लिए चुना है. उनका अनुकरणीय साहस और सेवा की गहरी भावना भारतीय समाज के बेहतरीन मूल्यों को दर्शाती है और राष्ट्र के युवाओं के लिए एक चमकते प्रकाश स्तंभ के समान है. वही परिवार में और इलाके में खुशी का माहौल है. परिवार ने कहा कि श्रवण को अवार्ड मिल रहा है हमें बड़ी खुशी है.  

पाकिस्तानी नेवी क्यों रह गई निष्क्रिय? भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन सिंदूर का राज खोला

नई दिल्ली  नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने मंगलवार को कहा कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बल के आक्रामक रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों के करीब रहने पर मजबूर होना पड़ा। भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद 7 मई को ऑपरेश सिंदूर के तहत जवाबी कार्रवाई की थी। एडमिरल त्रिपाठी ने अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद पिछले सात-आठ महीनों में पश्चिमी अरब सागर सहित अन्य स्थानों पर उच्च पैमाने पर अपने जहाजों और पनडुब्बियों को तत्परता के साथ तैनात रखा है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानवाहक पोत की तैनाती समेत आक्रामक रुख और तत्काल कार्रवाई ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों या मकरान तट के पास रहने के लिए मजबूर कर दिया।' नौसेना प्रमुख ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' से पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव पड़ा है, क्योंकि संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाजों ने पाकिस्तान की यात्रा करने से परहेज किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने वाले जहाजों के बीमा की लागत भी बढ़ गई है। सीजफायर में नौसेना की भूमिका वाइस एडमिरल के स्वामीनाथन ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना के आक्रामक कार्रवाई के रुख के कारण पाकिस्तान संघर्ष विराम का अनुरोध करने पर मजबूर हुआ। नौसेना दिवस से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहुत ही कम समय में 30 से अधिक जहाजों और पनडुब्बियों को अभूतपूर्व तरीके से तैनात किया गया। नौसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख ने कहा, 'हमारे अग्रिम पंक्ति के जहाज, विमानवाहक पोत विक्रांत के ‘कैरियर बैटल ग्रुप’ के साथ में मकरान तट पर युद्ध के लिए तैयार थे।' कैरियर बैटल ग्रुप एक नौसैनिक समूह है जिसमें एक या अधिक विमान वाहक के साथ-साथ अन्य युद्धपोत जैसे विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बियां शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती और रुख के कारण पाकिस्तानी नौसेना को अपने तट के करीब रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, 'वास्तव में, भारतीय नौसेना द्वारा आक्रामक कार्रवाई करने के रुख को पाकिस्तान द्वारा युद्ध विराम का अनुरोध करने के महत्वपूर्ण कारकों में से एक माना जा सकता है।'  

जनरल द्विवेदी बोले सतना में: ऑपरेशन सिंदूर जारी, धार्मिक स्थलों पर हमले से हमेशा बचते हैं

सतना  थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी शनिवार को सतना के कृष्ण नगर स्थित सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे. यहां पर वह छात्र-छात्राओं के परिचर्चा कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उनका विद्यालय प्रबंधन द्वारा शॉल, श्रीफल और मोमेंटो देकर सम्मान किया गया. जनरल उपेंद्र द्विवेदी इसी विद्यालय के पूर्व छात्र भी हैं. यहां उन्होंने कक्षा चौथी तक पढ़ाई की. उनकी यादें इस विद्यालय से जुड़ी हैं. स्कूल पहुंचकर अपने बचपन को याद किया थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को बड़ा और कामयाब अभियान बताया. उन्होंने विद्यालय में अध्ययन करने का अनुभव साझा किया. इसके साथ ही सतनावासियों के लिए संदेश दिया "आप चाहे वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में हों, राष्ट्रप्रेम और देश निर्माण के लिए लगातार कार्य करते रहिए. विकसित भारत में हम सबको साथ मिलकर मेहनत करनी है. तब जाकर विकसित भारत का सपना 2047 में साकार हो सकेगा. " ऑपरेशन सिंदूर से देश एकजुट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा "ऑपरेशन सिंदूर का नाम ही पूरे देश को एक साथ जोड़ देता है. भारतीय संस्कृति में सिंदूर का बहुत महत्व है. जब बहन या बेटी सिंदूर लगाती है तो वह हमेशा अपने सैनिकों को याद करती है. जो सरहद पर दिन-रात तैनात रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर इसलिए सफल हुआ, क्योंकि हमने सैद्धांतिक और टेक्निकल कंबाइंड करके लड़ाई की. इस दौरान हमने ये भी तय किया कि किसी नागरिक का नुकसान न हो. केवल आतंकियों के खिलाफ ये मुहिम थी."  आर्मी चीफ बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने देश को बांधा आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा, इस अभियान ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। सिद्धांत और तकनीक के संयोजन से मिशन सफल हुआ। पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि हम धर्म युद्ध के अनुयायी हैं और आगे भी यही नीति अपनाएंगे। 'स्कूल से मिली निर्णय लेने की क्षमता' उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में सीखी निर्णय क्षमता ने उन्हें सेना में कई सफलताएं दिलाईं। चौथी कक्षा में यहीं से निर्णय लेने की क्षमता मिली, इसी ने ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक सफलता दिलाई। उन्होंने आगे बताया कि यह वही स्कूल है, जिसने उनके व्यक्तित्व और राष्ट्र सेवा के संकल्प को मजबूत किया। आर्मी चीफ ने छात्रों को सफलता का मंत्र दिया जनरल द्विवेदी ने छात्रों से कहा, सफलता की नींव विद्यार्थी जीवन में ही रखी जाती है। उन्होंने सफलता का मंत्र Three-A (Attitude, Adaptibility, Ability) बताया। उन्होंने कहा कि Attitude से सकारात्मक दृष्टिकोण और पॉजिटिविटी आती है। Adaptibility से आप अपने अंदर समय के साथ बदलाव ला सकते हैं और Ability आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाएगी। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम करने वाला ही भविष्य में देश का निर्माण करता है। आप वर्दी में हों या सिविल ड्रेस में, राष्ट्र सेवा में अपना योगदान दें। यह देश हमारा है। जब हम सब मिलकर काम करेंगे तभी 2047 का विकसित भारत बनेगा। सरस्वती स्कूल के अनुभव शेयर किए अपने स्कूल सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन करने के अनुभव के बारे में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया "जब आप बालक होते हैं और छोटे होते हैं तो आप उस उम्र में जो भी सीखते हैं, वह आपके साथ जिंदगी भर रहता है. यह स्कूल किस तरीके से आगे बढ़ गया है, यहां से कितने आईपीएस, आईएएस, फौजी और कितने डॉक्टर और इंजीनियर निकले हैं, ये सब देख रहे हैं." वहीं, थल सेनाध्यक्ष के दौरे को देखते हुए सेना की टीमों ने डॉग स्क्वाड सहित अत्याधुनिक मशीनरी के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. इस दौरान उनके बारे में महापौर योगेश ताम्रकार ने भी उन्हें सहपाठी बताया. 

ब्रहमोस मिसाइल और राफेल के साथ ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और बाद में जवाबी कार्रवाई के दौरान वहां के सैन्य प्रतिष्ठानों पर सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के जरिये ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गई थीं। ये मिसाइलें अचूक साबित हुईं। इसने बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा और मुरीदके में जैश-ए-मोहम्मद समेत नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। हाल में सामने आए एक सरकारी दस्तावेज से स्पष्ट तौर पर ऐसे संकेत मिलते हैं। इसके अनुसार वायुसेना और थल सेना द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में राफेल और सुखोई की स्क्वाड्रन तैनात की गई थी। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के दिन ही कच्छ से लेकर कश्मीर तक सीमावर्ती क्षेत्र में बाकायदा वायुसेना ने अभ्यास का ऐलान भी किया था, जो छह मई की रात किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तैयारी थी। हाल में ऑपरेशन सिंदूर के लिए वायुसेना के पायलटों को वीर चक्र से सम्मानित करने के उपलक्ष्य में एक विस्तृत गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसमें ऑपरेशन सिंदूर के नाम लिए बगैर पायलटों की बहादुरी का वर्णन किया गया है। यह विवरण दर्शाता है कि किस प्रकार एयरफोर्स की राफेल और सुखोई की स्क्वाड्रनों ने बहादुरी के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। वीर चक्र से सम्मानित पायलट राफेल और सुखोई दोनों स्क्वाड्रनों से हैं। राफेल ने कई पाकिस्तानी विमानों को गिराया विवरण से संकेत मिलते हैं कि सुखोई से ब्रह्मोस के जरिये जमीनी लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जबकि राफेल का इस्तेमाल उस क्षेत्र में एयर डिफेंस के लिए किया गया। राफेल ने पाकिस्तान के कई हमलों को नाकाम किया और उसके कई विमानों को मार गिराया। दोनों लड़ाकू विमानों के पायलटों ने अपने-अपने कार्य को बाखूबी अंजाम दिया, जिसके लिए उन्हें युद्धकाल का तीसरा बड़ा पुरस्कार वीर चक्र प्रदान किए गए।

रक्षा का नया चरण — ऑपरेशन सिंदूर ने खोले प्राइवेट कंपनियों के लिये हथियार निर्माण के दरवाज़े

नई दिल्ली भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने मिसाइल, तोप के गोले, गोला-बारूद और आयुध के विकास और निर्माण का काम निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। इसका मकसद यह है कि लंबे चलने वावे युद्ध या सैन्य अभियान के दौरान देश के पास हथियारों की कमी न हो। सूत्रों के अनुसार, राजस्व खरीद मैनुअल में संशोधन किया गया है। इसके तहत अब कोई भी निजी कंपनी गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित करने से पहले सरकारी कंपनी म्युनिशन इंडिया लिमिटेड (MIL) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेने के लिए बाध्य नहीं होगी। इस बदलाव के बाद 105 मिमी, 130 मिमी, 150 मिमी तोप के गोले, पिनाका मिसाइल, 1000 पौंड बम, मोर्टार बम, हैंड ग्रेनेड और मध्यम व छोटे कैलिबर के कारतूस जैसे आयुधों का निर्माण अब निजी क्षेत्र में भी संभव होगा। DRDO को भेजा मंत्रालय का प्रस्ताव सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को भी पत्र लिखकर यह संकेत दिया है कि मिसाइल विकास और इंटीग्रेशन का क्षेत्र भी निजी कंपनियों के लिए खोला जाएगा। अब तक यह कार्यक्षेत्र केवल सरकारी कंपनियों भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) तक सीमित था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ा फैसला यह फैसला ऐसे समय आया है जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह साफ हुआ कि भविष्य के युद्ध लॉन्ग-रेंज मिसाइलों और स्टैंड-ऑफ हथियारों पर आधारित होंगे। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने इस अभियान में चीन निर्मित लंबी दूरी की एयर-टू-एयर और एयर-टू-सर्फेस मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे भारत सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के बिना देश की मिसाइल जरूरतें पूरी नहीं की जा सकतीं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को अब ब्रहमोस, निर्भय, प्रलय और शौर्य जैसी कन्वेंशनल मिसाइलों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। भविष्य के युद्ध मुख्यतः स्टैंड-ऑफ वेपन्स और एंटी-मिसाइल सिस्टम्स के जरिए लड़े जाएंगे, क्योंकि लड़ाकू विमानों की भूमिका सीमित होती जा रही है। S-400 सिस्टम की शक्ति का प्रदर्शन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की S-400 वायु रक्षा प्रणाली ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था, जब उसने 10 मई की सुबह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 314 किलोमीटर अंदर एक पाकिस्तानी इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) विमान को मार गिराया था। यह घटना इस बात का प्रमाण थी कि आधुनिक युद्धों में लॉन्ग-रेंज मिसाइल और एंटी-एयर सिस्टम निर्णायक भूमिका निभाएंगे। गोला-बारूद की कमी से बचने की तैयारी रक्षा मंत्रालय का यह कदम इस उद्देश्य से भी प्रेरित है कि यदि भविष्य में कोई लंबा युद्ध छिड़ता है, तो भारतीय सेना गोला-बारूद की कमी का सामना न करे। अब तक भारत को कई बार आपातकालीन स्थिति में विदेशी विक्रेताओं से ऊंचे दामों पर हथियार खरीदने पड़े हैं। वर्तमान में रूस और पश्चिमी देश यूक्रेन युद्ध, इजरायल गाज़ा युद्ध में व्यस्त हैं। ऐसे में मिसाइलों और गोला-बारूद की वैश्विक मांग चरम पर है। दूसरी ओर पाकिस्तान को चीन से निरंतर सैन्य आपूर्ति मिल रही है। इससे भारत को अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि रणनीतिक मिसाइलों का विकास और नियंत्रण केवल DRDO के अधीन रहेगा, जबकि कन्वेंशनल मिसाइलों के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को अवसर दिया जाएगा। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण और निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।  

मुरीदके एयरबेस का दर्द अभी बाकी, ऑपरेशन सिंदूर की सच्चाई गूगल पर उजागर

इस्लामाबाद  मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मुरीदके एयरबेस पर किए गए हमलों के निशान आज भी साफ दिख रहे हैं. गूगल अर्थ की नई तस्वीरों से पता चलता है कि सितंबर 2025 तक हमले वाली दोनों जगहें अभी भी ढकी हुई हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अब भी मरम्मत कर रहा है. यह खुलासा भारत की सैन्य ताकत और पाकिस्तान की कमजोरी को दिखाता है. ऑपरेशन सिंदूर: मई 2025 का बड़ा हमला 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. यह पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम था. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर सटीक हमले किए. इनमें मुरीदके एयरबेस भी शामिल था, जो पाकिस्तान का महत्वपूर्ण हवाई अड्डा है. मई के अंत में जारी सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिखा कि हमले ने भारी नुकसान पहुंचाया. मुरीदके एयरबेस पर हमले का मुख्य निशान एक बड़ा गड्ढा था. यह गड्ढा करीब तीन मीटर चौड़ा था और एयरबेस सुविधा से सिर्फ 30 मीटर दूर था. यह सुविधा पाक वायुसेना के लिए बहुत गोपनीय मानी जाती है. हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों से पुष्टि हुई कि भारत ने सटीक निशाना साधा. हमले से एयरबेस की संरचना को गहरा नुकसान हुआ, जिसमें छतें उड़ गईं और इमारतें टूट गईं. सितंबर 2025 की गूगल अर्थ तस्वीरें: मरम्मत के संकेत अब सितंबर 2025 की गूगल अर्थ तस्वीरों से नया खुलासा हुआ है. हमले वाली दोनों जगहें – गड्ढा और क्षतिग्रस्त हिस्से – अभी भी ढकी हुई दिख रही हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने तिरपाल या अन्य सामग्री से इन्हें छिपाया है, ताकि मरम्मत जारी रख सके. अन्य पाकिस्तानी एयरबेस जैसे सरगोधा में जून 2025 तक रनवे की मरम्मत हो चुकी थी, लेकिन मुरीदके में काम धीमा चल रहा है. यह ढकाव नुकसान की गहराई दिखाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अंडरग्राउंड सुविधा को ठीक करने में महीनों लग सकते हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मई के हमलों से पाकिस्तानी सुविधाओं को सीमित लेकिन साफ नुकसान हुआ. पाकिस्तान की हवाई ताकत पर सवाल ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की हवाई ताकत को कमजोर कर दिया. मुरीदके एयरबेस पर हमला न सिर्फ बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, बल्कि पाकिस्तान के आत्मविश्वास को भी झकझोर दिया. भारत ने न्यूनतम नुकसान के साथ सटीक हमले किए, जो वायुसेना की क्षमता दिखाता है. पाकिस्तान ने शुरुआत में नुकसान को कम बताया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने सच्चाई उजागर कर दी. नूर खान और सरगोधा जैसे अन्य बेस भी प्रभावित हुए. मुरीदके पर फोकस इसलिए, क्योंकि यह अंडरग्राउंड हथियार भंडारण का केंद्र था. भारत की सतर्कता बरकरार यह तस्वीरें दिखाती हैं कि मई के हमले का असर आज भी है. पाकिस्तान मरम्मत में जुटा है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा. भारत के लिए यह चेतावनी है कि सीमा पर सतर्कता जरूरी है. ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी तस्वीरें निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं. गूगल अर्थ जैसी तकनीक से दुनिया को सच्चाई पता चलती है.