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मंगल गोचर 2026: मेष समेत 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन लाभ के योग

 वैदिक ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ग्रहों का सेनापति माना जाता है। मंगल भूमि, रक्त, साहस और पराक्रम के कारक माने जाते हैं। मंगल एक निश्चित समय में अपनी राशि में बदलाव करते हैं। इस समय वे चंद्रमा की कर्क राशि में विराजमान हैं और दीवाली बाद अपने राशि को बदलेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार, मंगल कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में 12 नवंबर 2026 को गोचर करेगा और इस राशि में 9 मार्च 2027 तक यानी करीब 117 दिन विराजमान रहेंगे। मंगल और सूर्य के बीच ज्योतिष में मित्रता का संबंध माना जाता है। सिंह राशि में आने से मंगल ग्रह पर सूर्य का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। जिससे मंगल का सिंह गोचर कई राशियों के लिए आर्थिक, व्यावसायिक और पारिवारिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, मंगल का सिंह गोचर मेष से लेकर मीन राशि वालों के जीवन को प्रभावित करेगा। लेकिन 4 भाग्यशाली राशियों को अत्यंत शुभ फल प्रदान कर सकता है। इन विशेष राशियों के जीवन में मंगल गोचर काल में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जानें मंगल का सिंह गोचर किन राशियों को देगा शुभ फल। 1. मेष राशि: मंगल का सिंह गोचर मेष राशि वालों को अच्छे फल प्रदान कर सकता है। इस समय आपके आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। आपकी कार्य और नेतृत्व क्षमता में सुधार होगा। आत्मविश्वास में वृद्धि होने से कई महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आर्थिक तौर पर स्थिति बेहतर होगी। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति के संकेत हैं। निवेश के अच्छे अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि धन से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला फिलहाल के लिए टाल दें। नौकरी और व्यवसाय में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 2. सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए मंगल का राशि परिवर्तन बहुत लाभकारी रहने वाला है। इस समय आपको अपनी लीडरशिप क्वालिटी साबित करने के अवसर प्राप्त होंगे, जिनका आप भरपूर लाभ उठाएंगे। व्यावसायिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। परिवार से जुड़ी दिक्कतें दूर हो सकती हैं। साहस और पराक्रम रंग लाएगा। रोजी-रोजगार में तरक्की मिल सकती है। आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे खत्म होती जाएंगी। 3. वृश्चिक राशि: मंगल वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह हैं। इस समय वृश्चिक राशि वालों को जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मन मुताबिक परिणाम मिलने से मन प्रसन्न रहेगा और मानसिक तौर पर राहत महसूस करेंगे। धन की स्थिति बेहतर रहेगी। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। भाग्य का साथ मिलने से किसी अटके हुए काम में सफलता हासिल करेंगे। व्यापारी वर्ग को किसी नई डील या सौदे पर साइन करने का अवसर मिल सकता है। पिता का साथ मिलेगा। 4. कुंभ राशि: मंगल गोचर काल में कुंभ राशि वालों के आत्मविश्वास और ऊर्जा अधिक महसूस हो सकती है। इस समय आप लंबित या लंबे समय से अटके हुए कार्य सफलतापूर्वक करेंगे। कोर्ट-कचहरी में विजय के संकेत हैं। शत्रु परास्त होंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और इनकम के नए साधन सामने आएंगे। किसी महत्वपूर्ण फैसले को लेने के लिए समय अनुकूल रहेगा। व्यावसायिक पार्टनरशिप में बेहतर रिजल्ट मिल सकते हैं। किसी नए काम की शुरुआत के लिए समय अच्छा रहने वाला है।

मां स्कंदमाता की पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं? जानें पूजा विधि, प्रिय भोग और आरती

Navaratri 5  day: नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति की कामना पूरी होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं. मां स्कंदमाता के स्वरूप की बात करें, तो उनकी चार भुजाएं हैं. माता ने अपने दो हाथों में कमल के फूल धारण किए हुए हैं. एक हाथ से मां भक्तों को आशीर्वाद देती हैं, जबकि दूसरे हाथ में उन्होंने अपने पुत्र स्कंद यानी भगवान कार्तिकेय को बाल रूप में धारण की हुई हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता को पार्वती और गौरी के नाम से भी जाना जाता है. स्कंदमाता की आरती (Skandmata ki Aarti) जय तेरी हो स्कंदमाता पांचवां नाम तुम्हारा आता सबके मन की जानन हारी जग जननी सबकी महतारी तेरी जोत जलाता रहूं मैं हरदम तुझे ध्याता रहूं मैं कई नामों से तुझे पुकारा मुझे एक है तेरा सहारा कहीं पहाड़ों पर है डेरा कई शहरों में तेरा बसेरा हर मंदिर में तेरे नजारे गुण गाए तेरे भक्त प्यारे भक्ति अपनी मुझे दिला दो शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो इंद्र आदि देवता मिल सारे करे पुकार तुम्हारे द्वारे दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए तू ही खंडा हाथ उठाए दासों को सदा बचाने आयी भक्त की आस पुजाने आयी मां स्कंदमाता की पूजा विधि     नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें.     पूजा स्थल पर मां स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें और गंगाजल छिड़ककर पूजा स्थल को शुद्ध करें.     एक कलश में जल भरकर उसमें कुछ सिक्के डालें और उसे पूजा स्थल पर रखें.     मां स्कंदमाता को रोली और कुमकुम का तिलक लगाएं.     माता को फूल, भोग और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.     मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं.     माता को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें.     अंत में श्रद्धापूर्वक मां स्कंदमाता की आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें. मां स्कंदमाता ध्यान मंत्र  सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

दुर्गा पूजा में ही बाहर आती है मां दुर्गा की सोने की मूर्ति, पुलिस सुरक्षा में होती है पूजा

shardiya navratri : पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के जयपुर राजबाड़ी की दुर्गा पूजा अपनी अनोखी परंपरा, इतिहास और स्वर्ण प्रतिमा के कारण खास पहचान रखती है. यहां मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा साल के लगभग 360 दिन बैंक लॉकर में सुरक्षित रहती है. दुर्गा पूजा के अवसर पर षष्ठी के दिन कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मां की स्वर्ण प्रतिमा को बैंक लॉकर से निकालकर जयपुर राजबाड़ी लाया जाता है. इस दौरान यहां सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं. पूजा संपन्न होने के बाद दशमी के दिन पुलिस सुरक्षा के बीच स्वर्ण प्रतिमा को दोबारा बैंक के लॉकर में सुरक्षित रख दिया जाता है. जयपुर राजबाड़ी की इस पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा और चांदी का चालचित्र है. मां की प्रतिमा द्विभुजा स्वरूप में है. इस अनोखी प्रतिमा को देखने के लिए पुरुलिया के अलावा दूसरे जिलों और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक जयपुर पहुंचते हैं. करीब 400 साल पुरानी परंपरा राजपरिवार से मिली जानकारी के मुताबिक, जयपुर राजबाड़ी की दुर्गा पूजा करीब 400 साल पुरानी परंपरा से जुड़ी है. मान्यता है कि राजा जयसिंह के समय से इस क्षेत्र में राजपरिवार की धार्मिक परंपराओं की शुरुआत हुई. बाद में राजा काशीनाथ सिंह के समय पूजा के दौरान मंदिर में आग लगने की घटना हुई. इसके बाद राजा ने मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प लिया. राजपरिवार से जुड़ी मान्यता के अनुसार, राजा काशीनाथ सिंह को सपने में मां दुर्गा ने स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का संकेत दिया था. इसके बाद बनारस के कारीगरों को बुलाकर स्वर्ण प्रतिमा और चांदी का चालचित्र तैयार कराया गया. राजपरिवार के मुताबिक, प्रतिमा और चालचित्र के निर्माण में बड़ी मात्रा में सोने और चांदी का इस्तेमाल किया गया था. चोरी के बाद बदली सुरक्षा व्यवस्था जयपुर राजबाड़ी में हुई चोरी की एक घटना के बाद स्वर्ण प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था बदली गई. बताया जाता है कि चोर राजबाड़ी में घुसे और कई कीमती सामान व आभूषण लेकर फरार हो गए. इसके बाद पुलिस की सलाह पर स्वर्ण प्रतिमा को पूजा के दिनों को छोड़कर पूरे साल बैंक लॉकर में रखने का फैसला किया गया. ये परंपरा तभी से जारी है. पूजा के समय पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा राजबाड़ी लाई जाती है और पूजा समाप्त होने के बाद फिर बैंक लॉकर में रख दी जाती है. देवी की पूजा का इतिहास जयपुर राजपरिवार के सदस्य प्रशांत नारायण सिंह देव के मुताबिक, यह पूजा कई पीढ़ियों से चली आ रही है. उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में यहां मिट्टी की प्रतिमा और पारंपरिक तरीके से पूजा होती थी. बाद में एक घटना के बाद स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा शुरू हुई. उन्होंने बताया कि राजा काशीनाथ सिंह को स्वप्न में मां दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करने का संकेत मिला था. इसके बाद राजपरिवार ने अपने कोष से सोना निकालकर बनारस के कारीगरों से मां की स्वर्ण प्रतिमा तैयार कराई. उन्होंने यह भी बताया कि आज सुरक्षा कारणों से मां की स्वर्ण प्रतिमा बैंक लॉकर में रखी जाती है और पूजा के समय पुलिस सुरक्षा के बीच राजबाड़ी लाई जाती है. उनके मुताबिक, पहले पूजा चार दिनों की होती थी. जबकि इस बार पूजा को पांच दिनों तक आयोजित करने की तैयारी है. कितनी भव्य होती है देवी की पूजा? राजबाड़ी की पुरानी परंपराओं से जुड़ी रूनी बनर्जी ने बताया कि पहले दुर्गा पूजा राजबाड़ी में बेहद भव्य तरीके से आयोजित होती थी. उस समय राजबाड़ी में हाथी, घोड़े और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी होती थी और पूजा का स्वरूप काफी विशाल हुआ करता था. लेकिन चोरी की घटना के बाद स्वर्ण प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था हुई. उन्होंने बताया कि यह पूजा षष्ठी से शुरू होती है और पुलिस की कड़ी निगरानी में पूरी व्यवस्था संचालित होती है. आज भी पूजा के दौरान दूर-दूर से लोग जयपुर पहुंचते हैं और राजबाड़ी की पूजा और स्वर्ण प्रतिमा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

गुरुवार का राशिफल: 15 अक्टूबर को इन राशियों को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी, धन लाभ के बनेंगे योग

मेष आज धन संबंधी मामलों में आप सफलता देखेंगे। आज का दिन काफी लकी माना जा रहा है। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलें। बिजनेस कर रहे लोगों की किस्मत साथ देगी। रोमांस से भरपूर रहेंगे आज आप। वृषभ आज का दिन थोड़ा बिजी फील हो सकता है। आपकी सेहत ही आपका धन है। फाइनेंशियल सिचूऐशन थोड़ी गड़बड़ा सकती है। हाइड्रेटेड रहें। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में संकोच न करें। मिथुन आज अपने रास्ते में आने वाले अवसरों का लाभ उठाने का दिन है। फाइनेंशियल स्थिति में थोड़े-बहुत उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। स्किल्स में सुधार करना चाहते हैं, तो अब कदम उठाने का सही समय आ गया है। कर्क आज का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। उत्साह से भरा रहेगा दिन। आज आपको काम पर फोकस करने की सलाह दी जाती है। अपनी डाइट को हेल्दी रखें। सिंह आज आपकी कड़ी मेहनत और समर्पण बड़े पैमाने पर फल देंगे। क्रिएटिव महसूस कर सकते हैं। आगे बढ़ने और दुनिया को यह दिखाने से न डरें कि आप क्या कर सकते हैं। आज जीवन की चुनौतियों को हंस कर पार करें। कन्या जो लोग रिलेशन में हैं, उनके लिए आज अपने जुनून को जगाने और अपनी पार्ट्नर्शिप में फिर से स्पार्क लाने का सही समय है। शाम होते-होते आपकी सभी मुश्किलें कम हो जाएंगी। तुला आज सिनीयर्स के साथ नोक-झोक से बचना बेहतर रहेगा। धन के मामले में लकी रहने वाले हैं आप। वर्क प्रेशर ज्यादा हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। अपनी फाइनेंशियल बॉउन्डरी को मेन्टेन करने पर ध्यान दें। वृश्चिक आज अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन पर फोकस करें।अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए आज का दिन शुभ है। थोड़ा इमोशनल फील कर सकते हैं। हेल्थ पर आज कड़ी नजर रखें। धनु आज की एनर्जी आपको अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आप अपने धन संबंधी मामलों में सफलता देखेंगे। अपनी मां की सेहत पर ध्यान दें। हाइड्रेटेड रहें। एक्सरसाइज करें। मकर अपने साथी से जुड़ने और प्यार बांटने के लिए अपने अट्रैक्शन और कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करें। अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए समय निकालें। स्ट्रेस से दूर रहें। कुंभ आज आपको अपने फाइनेंस को मैनेज करने में आपका पार्टनर मदद कर सकता है। जीवन में थोड़ी-बहुत हलचल रहेगी। आज खर्च करते वक्त आपको सावधानी बरतनी जरूरी है। मीन आज आपका दिन खास रहने वाला है। करियर लाइफ थोड़ी बिजी हो सकती है। शाम में अपने लवर के साथ अच्छा टाइम स्पेंड करेंगे। स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें। खर्च करते वक्त आपको सावधानी बरतनी जरूरी है।

मां दुर्गा की सवारी में छिपा है बड़ा संदेश, सिंह और बाघ किस शक्ति के हैं प्रतीक?

शारदीय नवरात्रि : मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर ही क्यों होते हैं? यह सवाल केवल धार्मिक मान्यता से नहीं, बल्कि प्रकृति, शक्ति और मनुष्य के भीतर छिपी प्रवृत्तियों से भी जुड़ा हुआ है. मां दुर्गा को आदिशक्ति, साहस और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है. उनके विभिन्न स्वरूपों के साथ अलग-अलग वाहन जुड़े हैं और इनमें अधिकांश वाहन शक्तिशाली और जंगलों में स्वतंत्र रहने वाले हैं. यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि इनके पीछे एक खास मान्यता भी है. मां दुर्गा का सबसे मुख्य वाहन सिंह है. सिंह को जंगल का शक्तिशाली और निर्भीक जीव माना जाता है. वह अपनी शक्ति, साहस और पराक्रम के लिए जाना जाता है. मां दुर्गा का सिंह पर सवार होना, इस बात का प्रतीक है कि शक्ति जब धर्म के पक्ष में होती है तो वह अहंकार, अत्याचार और आसुरी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है. सिंह को मां के साहस और निर्भीकता से भी जोड़ा जाता है. देवी के हाथों में शस्त्र और उनके साथ सिंह का होना यह संदेश देता है कि केवल शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस शक्ति का सही दिशा में उपयोग भी जरूरी है. कई चित्रों और धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा को बाघ के साथ भी दर्शाया जाता है. उसमें आक्रामकता, गति, एकाग्रता और शिकार पर नियंत्रण जैसी विशेषताएं होती हैं. इसलिए बाघ को देवी की प्रचंड शक्ति और सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सिंह हो या बाघ, दोनों ही मनुष्य के नियंत्रण से बाहर रहने वाले वन्य जीव हैं. देवी का उन पर सवार होना यह दर्शाता है कि दिव्य शक्ति उन ताकतों पर भी नियंत्रण रख सकती है जिन्हें सामान्य मनुष्य नियंत्रित नहीं कर सकता. यहां जंगल का अर्थ भी महत्वपूर्ण है. जंगल ऐसी जगह है जहां प्रकृति अपने मूल और स्वतंत्र स्वरूप में दिखाई देती है. वहां रहने वाले जीव अपनी प्राकृतिक शक्ति के साथ जीवन जीते हैं. मां दुर्गा को प्रकृति की मूल शक्ति माना गया है. इसलिए उनके साथ ऐसे जीवों का जुड़ाव प्रकृति और शक्ति के संबंध को दर्शाता है. देवी केवल घर-परिवार की सुख-समृद्धि की शक्ति नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति के उस प्रचंड रूप का भी प्रतिनिधित्व करती हैं जो जरूरत पड़ने पर विनाशकारी शक्तियों का अंत कर सकता है. सिंह-बाघ का असली मतलब क्या है? मां दुर्गा के वाहन का एक अर्थ मनुष्य के भीतर मौजूद पशु प्रवृत्तियों से भी है. क्रोध, अहंकार, भय, लोभ और हिंसा जैसी प्रवृत्तियां जब अनियंत्रित हो जाती हैं तो मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं. सिंह और बाघ जैसी शक्तिशाली प्रवृत्तियों पर देवी का विराजमान होना यह संदेश देता है कि विवेक और चेतना के द्वारा अपनी आंतरिक शक्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है. शक्ति को दबाना नहीं, बल्कि उसे सही दिशा देना ही देवी के स्वरूप का संदेश है. इस तरह मां दुर्गा के वाहन केवल सवारी के साधन नहीं हैं. वे देवी के गुणों, प्रकृति की शक्ति और मनुष्य के भीतर मौजूद प्रवृत्तियों के प्रतीक हैं. सिंह और बाघ जैसे वाहन यह संदेश देते हैं कि वास्तविक शक्ति वही है जो साहस के साथ-साथ नियंत्रण, विवेक और धर्म का साथ रखे. यही कारण है कि मां दुर्गा के वाहन के रूप में जंगल के शक्तिशाली जीवों की कल्पना भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष अर्थ रखती है.

Navratri 4th Day 2026: मां कूष्मांडा को लगाएं मालपुए का भोग, जानें पूजा विधि और शुभ रंग

Navratri 4th day 2026: नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा को मां कूष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। कहते हैं कि अपनी मंद यानी हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण मां दुर्गा को 'कूष्मांडा' नाम से पुकारा जाता है। कहा जाता है कि जब सृष्टि नहीं थी, चारों ओर अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें सृष्टि की ‘आदिशक्ति’ या ‘आदिस्वरूपा’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करने से समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु और यश में वृद्धि होती है। सुख-समृद्धि के साथ सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है। देवी कूष्मांडा मां भवानी का चौथा स्वरूप हैं। इनका स्वरूप अत्यंत दिव्य, तेजस्वी और प्रकाशमान है। मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमश: कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा है। मां कूष्मांडा के आठवें हाथ में सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। माता का वाहन सिंह या शेर है। जानें मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, रंग, फूल और आरती। मां कूष्मांडा पूजा विधि: मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए मां दुर्गा को फल, फूल, सुहाग का सामान, धूप, दीपक और मिठाई आदि अर्पित करें। अंत में मां कूष्मांडा को भोग लगाएं और आरती उतारें। मां कूष्मांडा की पूजा ये शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:54 से सुबह 05:43 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:30 बजे तक। अमृत काल: दोपहर 04:14 से शाम 05:57 बजे तक। विजय मुहूर्त: दोपहर 02:22 से दोपहर 03:09 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:17 से शाम 06:42 बजे तक। मां कूष्मांडा का प्रिय भोग: मां कूष्मांडा को नवरात्रि के चौथे दिन मालपुआ का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा माता को कद्दू से बनी मिठाई या पेठा और दही आदि भी अर्पित किए जाते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग: नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग हरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करने से मां कूष्मांडा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि के चौथे दिन का प्रिय फूल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा का प्रिय रंग लाल है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा में लाल कमल, लाल गुड़हल और लाल गुलाब आदि शामिल करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां कूष्मांडा की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। मां कूष्मांडा के प्रिय मंत्र: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा के प्रिय मंत्रों का जाप करने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। ये हैं मां के प्रिय मंत्र: मां कूष्मांडा का मंत्र (मंत्र): ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥ मां कूष्मांडा का बीज मंत्र: ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः मां कूष्मांडा का स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ मां कूष्मांडा की आरती: कुष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥ पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी मां भोली भाली॥ लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे॥ भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥ सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुंचती हो मां अंबे॥ तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥ मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥ तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥ मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥ तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

आज का राशिफल 14 अक्टूबर 2026: किन राशियों को होगा धन लाभ, किसे करियर में मिलेगी सफलता?

मेष आज के दिन आप समृद्धि भी देख सकते हैं। आज का दिन प्रोडक्टिव रहने वाला है। प्रमोशन हासिल करने के लिए नए लक्ष्यों की तलाश करें। आज का दिन बेहतरीन रहने वाला है। ड्राइव करते वक्त सावधान रहें। वृषभ आज स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। आज का दिन उथल-पुथल से भरा रहने वाला है। प्रेम संबंधी किसी भी बड़े मुद्दे को कंट्रोल से बाहर नहीं जाने देना चाहिए। खर्च बढ़ सकता है। मिथुन आज के दिन फाइनेंस तौर पर समय शुभ माना जा रहा है। आज का दिन हैप्पी-हैप्पी रहने वाला है। आज आपकी लव लाइफ बेहतरीन रहेगी। नए टास्क के प्रति अलर्ट रहें, जो आपको प्रमोशन भी दिला सकते हैं। कर्क आज के दिन आर्थिक सफलता मिलेगी और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। जंक फूड्स के सेवन से बचें। पैसों की कोई समस्या नहीं होगी। बेहतर उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर मुद्दों का ध्यान रखें। सिंह आज रिश्ते के मुद्दों को जिम्मेदारी के साथ संभालें। अच्छे आधिकारिक रिश्ते का आनंद भी लें। छोटे वित्तीय मुद्दे स्मार्ट तौर पर किए गए खर्च की मांग करते हैं। आज स्वास्थ्य भी अच्छा रहने वाला है। कन्या आज के दिन आपका दिन शुभ रहने वाला है। आज के दिन आप समृद्ध रहेंगे। लवर के साथ अधिक समय बिताएं। यह भी सुनिश्चित करें कि आप सभी व्यावसायिक कार्य पूरा कर लें। तुला आज के दिन छोटी-मोटी वित्तीय समस्या रहेगी। इसलिए लेन-देन करते समय सावधान रहें। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। अपना बेस्ट परिणाम देने के लिए पेशेवर चुनौतियों को सावधानी के साथ संभालें। वृश्चिक आज का दिन शानदार रहने वाला है। दिन रोमांटिक रहेगा, जिससे आपके प्रेम जीवन पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा। छोटी-मोटी रुकावटों के बावजूद व्यावसायिक रिजल्ट पॉजिटिव रहेंगे। धनु आज के दिन लव के मामले में साथी की बातें भी सुननी चाहिए। वित्त और स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना अच्छा होता है। रिश्ते में सरप्राइज पाने की उम्मीद करें। व्यावसायिक तौर पर आप अच्छे रहेंगे। मकर आज का दिन मिल-जुला रहने वाला है। सफलता कमिटमेंट और मेहनत से आती है। रिश्ते में चल रही उथल-पुथल को आज ही सॉल्व करें। व्यावसायिक चुनौतियों से पार पाने के लिए कोशिश करें। कुंभ आज के दिन अपनी डाइट को हेल्दी रखें। धन से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं होगा। आज का दिन बदलावों भरा रहने वाला है। एक मजबूत प्रेम जीवन और उत्पादक ऑफिस जीवन बनाए रखें। मीन आज का दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। आपको जोखिम लेना पसंद हैं क्योंकि वे आपको मजबूत बनाते हैं। आज प्रेम संबंधों में मुस्कुराहट के साथ खुश रहें। व्यावसायिक सफलता मिलेगी।

रावण के सिंहासन के नीचे क्यों दबे थे शनिदेव? दशहरे पर जानिए पौराणिक कथा

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा आने वाला है. मान्यता है कि भगवान राम ने रावण का नाश करके देवी सीता को उसकी कैद से आजाद कराया था. इसी उपलक्ष्य में हर साल दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन किया जाता है. इस साल दशहरा 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा. रावण बेहद शक्तिशाली और मायावी असुर था. उसने अपनी शक्तियों और महाविद्याओं का गलत इस्तेमाल कर बड़े योद्धाओं और देवताओं को भी परेशानी में डाल दिया था. खुद न्याय देव शनि भी रावण के मायाजाल का शिकार हो चुके थे. रामायण से जुड़ी प्रस्तुतियों में क्या आपने कभी रावण के सिंहासन के नीचे एक नीले रंग की मानुष आकृति को देखा है. यह कोई और नहीं बल्कि स्वयं शनि देव हैं. रावण ने अपने अहंकार में इतना चूर हो गया था कि उसने शनि को बंदी बनाकर उन्हें अपने सिंहासन के पास पैरों के नीचे दबाकर रख लिया था. इससे जुड़े एक कथा बहुत प्रचलित है. कैसे रावण के चंगुल में फंसे शनि? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण तंत्र-मंत्र और ज्योतिष विद्या का जानकार था. रावण ने ब्रह्मा और शिवजी जैसे त्रिलोकी देवताओं को प्रसन्न करके मायावी शक्तियों को हासिल कर लिया था. उसे अपनी शक्तियों पर बहुत अभिमान था. एक बार रावण ने अपने पुत्र की कुंडली देखी तो उसे पता चला की उसके पुत्र की अल्प आयु लिखी है. इससे रावण बेचैन हो उठा. उसने तुरंत अपने पुत्र की कुंडली में ग्रहों की चाल को बदलना शुरू कर दिया. ताकि पुत्र के रास्ते में आने वाली हर बाधा को दूर किया जा सके. उसने सभी ग्रहों को अपने वश में कर लिया था. लेकिन शनि देव एक ऐसे ग्रह थे जो रावण के हिसाब से अपनी चाल नहीं चल रहे थे. इससे क्रोधित होकर रावण ने शनि देव को बंदी बना लिया और उन्हें अपने सिंहासन के पास पैरों के नीचे दबाकर रखने लगा. इस तरह वह शनिदेव की गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें अपने नियंत्रण में रखना चाहता था. कहते हैं कि जब तक शनि रावण के चुंगल में फंसे रहे, उसके पुत्र पर कभी कोई खतरा नहीं मंडराया. रावण की कैद से शनि को किसने बचाया? पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान जी भगवान राम का संदेश लेकर लंका पहुंचे. तब उन्होंने माता सीता की खोज की. फिर लंका में आग लगाने के शनि को मुक्त कराया. मान्यता है कि जिस कारागार में रावण ने शनि बंद कर रखा था, वहां उसके द्वार पर ही एक शिवलिंग भी स्थापित कर रहा था. ताकि कोई उसे लांघकर बाहर न आ सके. शिवलिंग के प्रति सम्मान के कारण शनि उसके ऊपर पैर रखकर बाहर नहीं आ सकते थे. लेकिन हनुमान जी स्वंय भगवान शिव के 11वें अवतार थे. इसलिए शनि को मुक्त कराने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई.

शारदीय नवरात्रि में 100 साल बाद दुर्लभ योग? इन 3 राशियों की चमक सकती है किस्मत

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से लेकर 19 अक्टूबर तक रहने वाले हैं. इन पवित्र दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा का विधान बताया गया है. इस बार देवी का आगमन हाथी पर हुआ है जो कि एक शुभ संकेत माना जाता है. इसके अलावा ग्रहों की चाल भी कुछ दुर्लभ और शुभ योग बना रही है. ज्योतिष गणना के अनुसार, नवरात्र में सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य, चंद्रमा-गुरु की केंद्रीय संबंध से गजकेसरी और बुध शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण राजयोग बन रहा है. ये दुर्लभ संयोग करीब 100 वर्ष के बाद बन रहा है. आइए जानते हैं कि यह दुर्लभ संयोग किन राशियों को लाभ देने वाला है. मेष राशि नौकरी करने वालों को तरक्की के नए मौके मिल सकते हैं. लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का अच्छा परिणाम मिलने की उम्मीद है. कारोबारियों के लिए भी लाभ के अवसर बन सकते हैं. अगर आपका पैसा कहीं अटका हुआ है तो उसके वापस मिलने की संभावना जताई जा रही है. कर्ज, उधार का बोझ भी कम होने वाला है. आर्थिक मामलों में राहत मिलने से आपकी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. कर्क राशि नौकरी और कारोबार में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार का लाभ मिल सकता है. कार्यक्षेत्र में बढ़ती जिम्मेदारियां आगे बढ़ने का अवसर दे सकती हैं. परिवार में खुशी का माहौल रहने की संभावना है. घर में कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है. इस दौरान कामकाज और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. सिंह राशि करियर में बदलाव या किसी नई शुरुआत का मौका मिल सकता है. कारोबार से जुड़े लोगों के लिए समय बेहद अनुकूल दिख रहा है. इस दौरान आपका मान-सम्मान बढ़ सकता है और आत्मविश्वास मजबूत हो सकता है. अपनी क्षमता पर भरोसा रखते हुए नए अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश करें. इस दौरान बच्चों की एकाग्रता भी बेहतर होगी. पढ़ाई-लिखाई या नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को अच्छे परिणाम मिलेंगे. तुला राशि तुला राशि वालों के लिए नवरात्रि धन और करियर से जुड़े मामलों में राहत दे सकती है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. कारोबारियों को भी लाभ के अवसर मिल सकते हैं. आर्थिक स्थिति बेहतर होने के संकेत हैं. इसके अलावा, परिवार और रिश्तों में सकारात्मकता बनी रह सकती है. कामकाज के साथ निजी जीवन में भी संतुलन बनाए रखने का मौका मिल सकता है.

Navratri 2026: अष्टमी-नवमी पर कन्याओं को गिफ्ट देते समय न करें ये गलतियां, जानें क्या देना है शुभ

Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का बाल स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें भोजन कराने के बाद दक्षिणा और उपहार देने की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भेंट देने से पूजा का पुण्य मिलता है। हालांकि, उपहार चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ वस्तुएं कन्या पूजन में देना उचित नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं कि कंजक पूजन के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए। नवरात्रि में कन्या पूजन का क्या है महत्व? सनातन धर्म में छोटी कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की परंपरा है। इस दिन भक्त कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोते हैं, तिलक लगाते हैं और सात्विक भोजन कराते हैं। इसके बाद उन्हें दक्षिणा या उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं का सम्मान करना और उन्हें श्रद्धा के साथ भोजन कराना मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान उपहार देते समय भी उनकी उम्र और जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए। कन्या पूजन में नुकीली चीजें देने से बचें कन्या पूजन के दौरान उपहार चुनते समय नुकीली वस्तुओं से बचने की सलाह दी जाती है। छोटी बच्चियों को चाकू, कैंची या ऐसी दूसरी चीजें देना उचित नहीं माना जाता, जिनसे उन्हें चोट लगने का खतरा हो। धार्मिक परंपराओं में भी इस तरह की वस्तुओं को शुभ उपहारों में शामिल नहीं किया जाता है। इसलिए कन्याओं के लिए ऐसा सामान चुनना बेहतर है, जो उनके काम आए और सुरक्षित भी हो। उनकी उम्र के अनुसार कॉपी, पेंसिल, किताब या दूसरी उपयोगी चीजें भेंट की जा सकती हैं। काले रंग की वस्तुएं देना माना जाता है अशुभ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में काले रंग की वस्तुएं उपहार में देने से बचना चाहिए। कई परंपराओं में काले रंग को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए पूजा के अवसर पर इस रंग की चीजें देना उचित नहीं माना जाता है। इसकी जगह लाल, गुलाबी या पीले रंग की वस्तुएं चुनी जा सकती हैं। कन्याओं को रंगीन कपड़े, रुमाल या दूसरी उपयोगी चीजें भेंट करना एक विकल्प है। हालांकि, उपहार चुनते समय सबसे जरूरी बात बच्चियों के प्रति सम्मान और स्नेह का भाव रखना है। कन्या पूजन में चमड़े की चीजें क्यों ना दें? कन्या पूजन के दौरान चमड़े से बनी वस्तुएं देने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से पूजा-पाठ में शुद्धता का विशेष महत्व माना गया है और कुछ परंपराओं में चमड़े की चीजों को शुभ नहीं समझा जाता है। इसलिए कंजक पूजन के लिए उपहार लेते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इसकी जगह कपड़े से बनी उपयोगी वस्तुएं, पुस्तकें या अन्य उपयुक्त सामान दिया जा सकता है। उपहार ऐसा हो, जिसे बच्चियां आसानी से इस्तेमाल कर सकें और जिसे देते समय परिवार भी सहज महसूस करे। कन्या पूजन में कौन-से उपहार देना शुभ है? कन्या पूजन में उपहार की कीमत से ज्यादा उसके पीछे की श्रद्धा और सम्मान को महत्व दिया जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को फल, मिठाई, वस्त्र, कॉपी-पेंसिल, किताबें, चूड़ियां या रुमाल दिए जा सकते हैं। कई लोग मां दुर्गा के प्रतीक के रूप में लाल चुनरी या श्रृंगार सामग्री भी भेंट करते हैं। उपहार चुनते समय बच्चियों की उम्र और जरूरतों का ध्यान रखना अच्छा रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं को प्रेम और आदर के साथ भोजन कराना तथा उन्हें उपयोगी वस्तुएं देना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन के दौरान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर और वर्जित वस्तुओं से बचकर उपहार देने से आपके घर में सुख, समृद्धि और मां दुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है।