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मकर में मंगल का प्रवेश, इन 5 राशि वालों को मिलेगा बड़ा फायदा

ज्योतिष शास्त्र में मंगल एक बहुत महत्वपूर्ण ग्रह माने जाते हैं. मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा, शक्ति, पराक्रम, भूमि, भाई आदि का कारक कहा गया है. ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह के गोचर को बहुत विशेष माना गया है. मंगल के राशि परिवर्तन का असर सभी 12 राशियों और देश दुनिया में देखने को मिलता है. आज मंगल ने शनि देव की राशि मकर में प्रवेश किया है. मकर राशि में मंगल का प्रवेश सुबह 4 बजकर 36 मिनट पर हुआ है. मकर राशि में पहले से ही सूर्य, शुक्र विराजमान हैं. ऐसे में मंगल के मकर राशि में आने के बाद त्रिग्रही योग बन रहा है. इसके प्रभाव से 5 राशियों को तगड़ा लाभ होने वाला है. त्रिग्रही योग के प्रभाव से इन पांच राशि वालों के लाभ के योग बनेंगे और तरक्की करेंगे. आइए जानते हैं इन 5 लकी राशियों के बारे में जानते हैं. मेष राशि मेष राशि के लोगों को इस दौरान काम के शुभ अवसर मिल सकते हैं. नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है. व्यापार करने वाले लोगों को लाभ मिल सकता है. करियर में ग्रोथ हो सकती है. सरकारी काम में शुभ परिणाम मिल सकते हैं. कर्क राशि कर्क राशि के लोगों को इस दौरान साझेदारी के काम में लाभ मिल सकता है. प्यार के मामले में ये समय अच्छा रह सकता है. लव लाइफ बेहतर हो सकती है. करियर और परिवार में स्थिरता देखने को मिल सकती है. कन्या राशि कन्या राशि के लोगों का इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ सकता है. करियर के लिहाज से ये समय बहुत अच्छा रहने वाला है. कार्यस्थल पर जिम्मेदारी का काम मिल सकता है. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के मार्केटिंग, सेल्स और टीचिंग के प्रोफेशन से जुड़े लोगों के लिए ये समय बहुत अच्छा रहने वाला है. व्यापार में लाभ मिल सकता है. भाई-बहन का सहयोग प्राप्त हो सकता है. इस समय में कोई बड़ा फैसला कर सकते हैं. मकर राशि मंगल का गोचर मकर राशि में ही हुआ है, इसलिए ये समय इस राशि के जातकों के लिए बहुत अच्छा रहने वाला है. मकर राशि के लोगों को इस गोचर के प्रभाव से लाभ मिल सकता है.

कहीं आपकी किस्मत आप खुद तो नहीं बिगाड़ रहे? बिस्तर पर भूलकर भी न करें ये 6 काम

जाहिर है बिस्तर हमारे सोने के लिए होता है। लेकिन मामला इतना सिंपल भी नहीं है। क्योंकि बिस्तर पर हम ढेरों ऐसी चीजें करते हैं, जो शायद नहीं करनी चाहिए। आपने घर के बड़े-बुजुर्गों से भी सुना होगा कि बिस्तर पर ये मत करो वो मत करो। दरअसल बिस्तर का वास्तु और एनर्जी से गहरा नाता है। कई बार जाने-अनजाने में आप कुछ ऐसी चीजें कर बैठते हैं, जो जीवन में नेगेटिविटी और परेशानियों का कारण बन सकती हैं। चलिए जानते हैं ऐसी ही एक्टिविटीज के बारे में, जो बिस्तर पर करने से बचना चाहिए। बिस्तर को बिखरा हुआ रखना रात में सोने के बाद कुछ लोग बिस्तर को यूं ही बिखरा हुआ छोड़ देते हैं। वहीं कुछ लोगों का बिस्तर आमतौर पर बिखरा हुआ ही रहता है। ये ना सिर्फ देखने में गंदा लगता है, बल्कि एक तरह की नेगेटिविटी भी ले कर आता है। कहते हैं कि जिसका बिस्तर गंदा रहता है, उसकी हेल्थ और फाइनेंस में भी परेशानियां आती रहती हैं। बिस्तर पर खाना खाना घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर बिस्तर पर खाना खाने से मना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि बिस्तर पर खाने से घर की बरकत चली जाती है। हेल्थ के लिहाज से भी देखें तो बिस्तर पर खाना खाना सही नहीं है, क्योंकि बिस्तर पर भोजन के कण रह सकते हैं, जो हेल्थ इश्यूज का कारण बन सकते हैं। ऑफिस का काम बेड पर बैठकर करना जब से वर्क फ्रॉम होम पॉपुलर हुआ है, तब से कई लोग अपना काम बेड पर बैठकर करना प्रिफर करने लगे हैं। जबकि ये आदत सही नहीं है। बिस्तर आराम के लिए होता है, आपके काम और वर्क प्रेशर के लिए नहीं। इससे आपकी ग्रोथ भी स्लो होती है और नींद पर भी नेगेटिव असर पड़ता है। बेड पर बैठकर पढ़ना कई बच्चे बेड पर बैठकर पढ़ाई करते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है। ऐसा करने से पढ़ाई पर फोकस और कंसंट्रेशन ठीक से बैठ नहीं पाता, जिसका असर बच्चे के रिजल्ट पर भी पड़ सकता है। पढ़ाई के लिए हमेशा कुर्सी और टेबल का इस्तेमाल करें, वहां पढ़ाई ज्यादा बेहतर तरीके से हो पाती है। बिस्तर के सामने शीशा लगाना अगर आपने भी बिस्तर के सामने शीशा लगा रखा है, तो उसे तुरंत हटा दें। दरअसल जब आप सुबह सो कर उठते हैं, तो सबसे पहले शीशे पर ही नजर जाती है। कहते हैं ऐसा होने की वजह से नेगेटिविटी फैलती है। वास्तु की मानें तो रात के समय भी शीशे से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है। आसपास ये चीजें रखकर ना सोएं बिस्तर पर सोते समय अपना सिरहाने पर कुछ चीजें भूलकर भी ना करें। जैसे- पर्स या पैसे से जुड़ी चीजें, जूते-चप्पल, चाबियां, घड़ी, कॉपी-किताबें और मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण। ये ना सेहत के हिसाब से ठीक हैं और वास्तु के हिसाब से भी इन्हें नेगेटिविटी अट्रैक्ट करने वाला माना गया है।

अगर सोई किस्मत जगानी है तो अपनाएं कपूर के ये वास्तु उपाय, शिव मंत्र से मिलेगा लाभ

नई दिल्ली घर सिर्फ ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं होता, बल्कि वहां मौजूद ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों पर गहरा असर डालती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कभी-कभी घर में बिना किसी ठोस कारण के तनाव, भारीपन या कलह रहने लगती है। इसका मुख्य कारण घर में जमा 'नकारात्मक ऊर्जा' हो सकती है। इसे दूर करने के लिए कपूर और महादेव का एक सरल मंत्र अचूक उपाय माना जाता है। कपूर का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व वास्तु में कपूर को शुद्धता और सकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। इसकी खुशबू न केवल मन को शांत करती है, बल्कि वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और नकारात्मक तरंगों को भी नष्ट करती है। उपयोग करने का सही तरीका: प्रतिदिन आरती: सुबह और शाम पूजा के समय कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर का 'ऑरा' (Aura) साफ होता है। मुख्य द्वार पर प्रयोग: घर के मुख्य दरवाजे पर कपूर का धुआं दिखाने से बाहर की बुरी नजर और नकारात्मकता घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती। बेडरूम की शुद्धि: अगर सोते समय बुरे सपने आते हों, तो सोने से पहले कमरे में कपूर जलाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है और नींद अच्छी आती है। शिव मंत्र की असीम शक्ति भगवान शिव को 'नकारात्मकता का संहारक' माना जाता है। कपूर जलाते समय अगर "ॐ नमः शिवाय" का जाप किया जाए, तो इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। इस मंत्र की ध्वनि से निकलने वाले कंपन घर के कोने-कोने से डर, दरिद्रता और उदासी को बाहर निकाल देते हैं। घर की सुख-शांति के लिए छोटे बदलाव सफाई का ध्यान: घर में टूटा हुआ कांच या बंद घड़ियां न रखें, ये तरक्की रोकती हैं।

मौनी अमावस्या की तिथि: 18 या 19 जनवरी? जानें सही तिथि और इस पर्व का महत्व

माघ मास की मौनी अमावस्या को सनातन धर्म में वर्ष की सबसे पवित्र और पुण्यदायी तिथियों में माना जाता है. इस दिन मौन व्रत, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक कर्मों का नाश होता है और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर किए गए पुण्य कर्म कई गुना फल देते हैं. यही कारण है कि माघ मेले के दौरान इस तिथि का विशेष महत्व होता है. इसी बीच श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि मौनी अमावस्या 2026 में 18 जनवरी को होगी या 19 जनवरी को? आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार सही तारीख और इस दिन के धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से. मौनी अमावस्या 2026 सही तारीख  वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 जनवरी 2026 को रात 12 बजकर 03 मिनट से शुरू होगी और 19 जनवरी 2026 को रात 1 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी. सनातन धर्म में पर्व और व्रत उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, यानी जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होती है, उसी दिन पर्व माना जाता है. इस नियम के अनुसार, मौनी अमावस्या रविवार, 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी. मौनी अमावस्या पर स्नान का विशेष महत्व अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और जब यह माघ मास में आती है, तो इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. शास्त्रों में उल्लेख है कि माघ मास में किया गया स्नान अमृत के समान फल देता है. इस दिन गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से पाप कर्मों का नाश होता है. पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. जीवन के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं. माघ मेले में संगम सहित देशभर के तीर्थ स्थलों पर लाखों श्रद्धालु मौनी अमावस्या के दिन आस्था की डुबकी लगाते हैं. मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान व्यक्ति को मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है. मौनी अमावस्या व्रत का धार्मिक महत्व मौनी अमावस्या का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, वाणी और कर्म की शुद्धि का दिन माना जाता है. इस दिन मौन रहकर आत्मचिंतन करने से मन की चंचलता शांत होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन संयम और श्रद्धा के साथ व्रत करता है, उसके जीवन में मानसिक शांति और सकारात्मकता बनी रहती है. मौनी अमावस्या व्रत के नियम  – ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें. – स्नान के बाद भगवान विष्णु, शिव या अपने इष्ट देव का ध्यान करें. – पूरे दिन मौन व्रत रखने का संकल्प लें. – मंत्र जाप मन ही मन करें, ऊंचे स्वर में बोलने से बचें. – नकारात्मक विचारों, क्रोध और व्यर्थ की बातों से दूर रहें. – धार्मिक ग्रंथों का पाठ, सत्संग, भजन और मंदिर दर्शन करना विशेष फलदायी माना जाता है.

बहुत लकी लोग होते हैं ये! जिन्हें मिल जाएं जीवन की ये चीजें, तरक्की तय है

अक्सर हम किसी इंसान से मिलते हैं और हमारे मन में यही आता है कि ये इंसान वाकई कितना भाग्यशाली है। दरअसल हम सभी की भाग्यशाली होने की परिभाषा बड़ी अलग-अलग होती है। किसी को एक अच्छी नौकरी होना भाग्यशाली होने की निशानी लगता है तो किसी को पुश्तैनी धन-दौलत होना या शानदार लव लाइफ होना। खैर, ये लोगों के अपने-अपने पैमाने हैं। हालांकि महान विद्वान और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीति में कुछ ऐसे व्यक्तियों का जिक्र किया था, जो उनकी नजरों में वाकई बेहद भाग्यशाली होते हैं। आचार्य कहते हैं कि जिन लोगों के पास ये कुछ चीजें मौजूद हैं उन्हें तो खुद को किस्मत वाला ही समझना चाहिए क्योंकि हर इंसान के नसीब में यह नहीं होता। तो चलिए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को भाग्यवान बनाने वाली ये चीजें कौन सी हैं। जिसके पास हो दान-पुण्य करने का सामर्थ्य आचार्य चाणक्य अपने एक श्लोक में इस बात का जिक्र करते हैं कि जिस व्यक्ति में दान-पुण्य करने का सामर्थ्य है, वो भी बहुत किस्मतवाला ही होता है। दरअसल कोई भी व्यक्ति दान-पुण्य करने में सामर्थ्य तब होता है, जब उसके पास पर्याप्त धन होता है और उसे खर्च करते हुए, व्यक्ति को ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। आचार्य कहते हैं कि पिछले कई जन्मों के पुण्य के कारण ही मनुष्य को ये सौभाग्य प्राप्त होता है। जिसका साथ दे उसकी सेहत आचार्य चाणक्य के अनुसार जिन लोगों की सेहत उनका साथ देती है, उनसे ज्यादा भाग्यशाली भी दूसरा कोई नहीं। इस दुनिया में सबसे बड़ी दौलत इंसान की सेहत ही होती है। यदि व्यक्ति स्वास्थ्य ना हो और कोई ना कोई रोग उसे घेरे रहे, तो लाखों की धन संपदा भी बेकार ही जान पड़ती है। आचार्य कहते हैं कि अगर आप भरपेट भोजन कर पा रहे हैं और उसे पचाने में आपको कोई परेशानी भी हो रही है; तो आपको खुद को किस्मतवाला ही समझना चाहिए। अच्छे जीवनसाथी का होना है सौभाग्य की निशानी आचार्य चाणक्य के अनुसार एक अच्छे जीवनसाथी का मिलना भी सौभाग्य की निशानी है, जो हर किसी की किस्मत में नहीं होता। एक अच्छा जीवनसाथी आपके हर सुख-दुख में साथ खड़ा मिलता है और उसके साथ जीवनयात्रा थोड़ी आसान हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में एक अच्छा पार्टनर है और उसका दांपत्य जीवन सुखी है, तो वो इंसान यकीनन ही बेहद भाग्यशाली हैं। मेहनत से बना सकते हैं अपना भाग्य इन सभी बातों के साथ ही आचार्य चाणक्य का कहना यह भी है कि अगर किसी इंसान को किस्मत का साथ ना भी मिले, तो वो अपनी मेहनत के बल पर खुद को भाग्यवान बना सकते है। अपनी नीति में आचार्य कहते हैं कि मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है और जो व्यक्ति मेहनत करने से पीछे नहीं हटता, वो अपनी किस्मत खुद चमका देता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में कुछ बहुत बड़ा करते हैं, जो शायद सिर्फ भगवशाली लोगों के बस की भी बात नहीं।  

मौनी अमावस्या की सही तिथि क्या है? जानें स्नान-दान का शुभ समय और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना गया है। वैदिक पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ती है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन पितरों को समर्पित माना जाता है। यह दिन पितरों की पूजा और तर्पण के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत, पूजा और स्नान-दान का विशेष महत्व है। इससे पुण्य लाभ मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या का स्नान सबसे बड़ा शाही स्नान माना जाता है। माना जाता है कि माघ मास पर हरिद्वार और प्रयागराज में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन लोग मौन व्रत रहकर भगवान की भक्ति में लीन हो जाते हैं। आइए, जानते हैं कि इस साल मौनी अमावस्या की तिथि, दान-स्नान का महत्व और शुभ मुहूर्त क्या है? मौनी अमावस्या 2026 कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 17 जनवरी की रात 12 बजकर 4 मिनट पर होगी और इसका समापन अगले दिन 18 जनवरी की रात 1 बजकर 22 मिनट पर इसका समापन होगा। ऐसे में, उदयातिथि के अनुसार, मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार के दिन मनाई जाएगी। मौनी अमावस्या पर दान-स्नान का शुभ मुहूर्त मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक का समय सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसे में, सुबह 04 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। अगर गंगा स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्य फलदायी होता है। मौनी अमावस्या पर स्नान का महत्व अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। मान्यता है कि माघ मास की अमावस्या पर पवित्र नदियों का जल अमृत के समान फल देता है। इसलिए मौनी अमावस्या पर बड़ी संख्या में लोग गंगा में डुबकी लगाते हैं और संगम किनारे ही दान करते हैं। इस दिन स्नान करने और दान देने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। साथ ही, मोक्ष की प्राप्ति होती है। मौन व्रत रखने के नियम अगर आप इस व्रत को रखना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी उठकर साफ पानी से स्नान कर लें और उसके बाद भगवान की पूजा करें और दिनभर मौन रहने का संकल्प भी लें। इसके साथ ही आप जिस भी भगवान इष्ट देव को मानते हैं, उनका मंत्र का जाप करें। लेकिन यह मंत्र मन ही मन में करें और मंत्र जाप करने के लिए बिल्कुल शांत जगह का ही चयन करें। मौनी अमावस्या पर दान मौनी अमावस्या वाले दिन स्नान के बाद दान का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल मिलता है। साथ ही, जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस अन्न, धन और वस्त्र के साथ-साथ जरूरत की चीजों का भी दान करना चाहिए। इसके अलावा, आप पशु व पक्षियों को चारा भी दे सकते हैं। इससे पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

16 जनवरी 2026 का राशिफल: किस राशि के लिए होगी किस्मत की चमक, ग्रहों की चाल समझें

मेष राशि- आज आप खुद को पहले से ज्यादा ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करेंगे। कामकाज में आपकी मेहनत साफ नजर आएगी और अधिकारी आपके काम से खुश हो सकते हैं। पैसों के मामले में सुधार के संकेत हैं, लेकिन जल्दबाज़ी में कोई बड़ा खर्च करने से बचें। घर का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस गुस्से और तनाव को खुद पर हावी न होने दें। वृषभ राशि- आज का दिन धैर्य और समझदारी से आगे बढ़ने का है। नौकरी और व्यापार में काम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ेगा। खर्च थोड़े बढ़ सकते हैं, इसलिए फालतू खर्च से बचना बेहतर रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने से मन को सुकून मिलेगा। प्रेम संबंधों में स्थिरता बनी रहेगी। सेहत को लेकर लापरवाही न करें। मिथुन राशि– आज आपकी बात करने की कला आपको फायदा दिला सकती है। नए लोगों से संपर्क बनेंगे, जो आने वाले समय में काम आ सकते हैं। करियर से जुड़े रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन ज्यादा काम करने से थकान महसूस हो सकती है। कर्क राशि- आज आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रह सकते हैं। कामकाज में धैर्य रखना ज़रूरी होगा। परिवार में किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है, लेकिन बातचीत से समाधान निकल आएगा। पैसों की स्थिति संतुलित रहेगी। सेहत के लिहाज से आराम जरूरी है, खुद को ज्यादा थकाने से बचें। सिंह राशि– आज का दिन आपके लिए अच्छे संकेत लेकर आया है। करियर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी और लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत होने के योग हैं। प्रेम जीवन में उत्साह और नयापन बना रहेगा। सेहत भी अच्छी रहेगी। कन्या राशि– आज जिम्मेदारियों का बोझ थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन आप सब कुछ अच्छे से संभाल लेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और नतीजे आपके पक्ष में रहेंगे। पैसों की स्थिति मज़बूत रहेगी। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। सेहत को लेकर थोड़ी सावधानी ज़रूरी है। तुला राशि– आज आपको अपनी योजनाओं पर पूरा ध्यान बनाए रखना होगा। कामकाज में की गई मेहनत का पूरा लाभ मिलने की संभावना है। पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें। घर का माहौल सुखद रहेगा। सेहत में धीरे-धीरे सुधार महसूस होगा। वृश्चिक राशि– आज नए विचार और योजनाएं आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। नौकरी और व्यापार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। दोस्तों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। प्रेम जीवन में समझ और तालमेल बना रहेगा। मानसिक रूप से आज खुद को हल्का और शांत महसूस करेंगे। धनु राशि– आज रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना जरूरी होगा। साझेदारी से जुड़े कामों में फायदा हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी। मानसिक शांति के लिए खुद को थोड़ा समय देना फायदेमंद रहेगा। मकर राशि- आज मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन उसका नतीजा सकारात्मक रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं। पैसों को लेकर कोई भी फैसला सोच-समझकर लें। प्रेम संबंधों में भरोसा बनाए रखना ज़रूरी होगा। सेहत सामान्य रहेगी। कुंभ राशि– आज किस्मत आपका पूरा साथ देती नज़र आएगी। करियर और पढ़ाई के क्षेत्र में सफलता मिलने के योग हैं। यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत संभव है। पैसों का लाभ होगा। मन खुश रहेगा और दिन भर ऊर्जा बनी रहेगी। मीन राशि– आज आपका मन रचनात्मक कामों में लगा रहेगा। करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं। पैसों की स्थिति संतुलित बनी रहेगी। परिवार और रिश्तों में मिठास रहेगी। सेहत ठीक रहेगी और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी।

हंस महापुरुष योग का महासंयोग: 12 साल बाद इन राशियों पर बरसेगा पैसा

12 साल बाद गुरु बृहस्पति अपनी राशि बदलने जा रहे हैं. इस गोचर के कारण हंस महापुरुष योग बनेगा. दरअसल, बृहस्पति कर्क राशि में 2 जून 2026 की रात को प्रवेश करेंगे. इससे तीन राशियों के लोगों को अधिक सौभाग्य प्राप्त होगा. उन्हें अपने कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे. हंस महापुरुष योग वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति की ओर से बनाया गया एक शक्तिशाली राज योग है, जो तब बनता है जब बृहस्पति अपनी ही राशि (मीन, धनु) या अपने लग्न भाव (कर्क) में केंद्रीय स्थिति (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम भाव) में होता है. हंस महापुरुष योग बनने से व्यक्ति को ज्ञान, धन, सम्मान और धार्मिक विनम्रता प्रदान हासिल होती है, ऐसे में आइए जानते हैं कि बारह राशियों में से वे कौनसी तीन भाग्यशाली राशियां हैं, जिनके लोगों के लिए ‘सोने पर सुहागा’ वाली कहावत सटीक बैठ रही है? कन्या राशि बृहस्पति द्वारा महापुरुष राजयोग बनने से कन्या राशिवालों को आय के मामले में सकारात्मक लाभ मिलेगा. चूंकि बृहस्पति आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में गोचर कर रहा है इसलिए इस दौरान आपकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. आप नए तरीकों से भी धन अर्जित करेंगे. शेयर बाजार, सट्टेबाजी और लॉटरी से लाभ होने की संभावना है. आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. आपका करियर ऊंचाइयों को छुएगा. व्यापारियों को बड़े व्यापारिक सौदे करने का अवसर मिलेगा. कन्या राशिवालों को अपने बच्चों से संबंधित खुशखबरी मिलेगी. तुला राशि तुला राशि के लोगों को गुरु-हंस महापुरुष राजयोग के बनने से अपार लाभ प्राप्त होगा. यह राजयोग आपके संचार कुंडली के कर्म भाव में बनेगा इसलिए इस दौरान आपको अपने काम और करियर में अच्छी तरक्की देखने को मिलेगी. काम करने वालों को कार्यालय में उनके काम की सराहना मिलेगी. इस राशि के जातकों को बड़ों का पूरा सहयोग मिलेगा. इस दौरान भविष्य की योजनाएं सुव्यवस्थित और मजबूत नजर आएंगी. सामाजिक सहयोग भी मिलेगा. इस दौरान व्यापारियों को अच्छा आर्थिक लाभ हो सकता है. नए व्यापारियों के लिए यह व्यवसाय शुरू करने का अच्छा समय है. वृश्चिक राशि इस राशि के लिए हंस महापुरुष राजयोग के अच्छे परिणाम मिलेंगे. यह राजयोग आपकी राशि से नौवें भाव में बनेगा. यहां मंगल की स्थिति बहुत मजबूत होगी इसलिए इस दौरान आप जो भी काम करेंगे, उसमें आपको सफलता मिलेगी. आप कुछ धार्मिक या शुभ आयोजनों में भी भाग ले सकते हैं. यह अवधि आध्यात्मिक और व्यक्तिगत विकास के लिए अनुकूल रहेगी. रचनात्मक कार्यों और कलात्मक गतिविधियों में आपको सफलता मिलेगी. यात्रा या नए संबंध इस दौरान नए अवसर प्रदान करेंगे. अपनी बढ़ी हुई रचनात्मकता के साथ आप जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे.

जीवन बदल देने वाले नीम करौली बाबा के विचार, तनाव से दिलाएंगे मुक्ति

नीम करोली बाबा का नाम ज्यादातर लोग जानते हैं। कलियुग में हनुमान का अंश बोले जाने वाले ये बाबा इस धरती पर नही हैं। लेकिन उनकी शिक्षाएं और उपदेश लोगों को रास्ता जरूर दिखा रही हैं। जीवन में आगे बढ़ने, निराशा और असफलता को छोड़ कर आगे बढ़ने की सीख देने वाले उपदेशों को आप भी एक बार जरूर पढ़ लें। इन्हीं उपदेशों की बदौलत स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्क तक उनके आश्रम तक चले जाए और उपदेशों से प्रभावित हुए। अगर मन की शांति और सुकून छिन गया है तो पढ़ लें नीम करोली बाबा के ये उपदेश। नीम करोली बाबा के उपदेश 1) सबकी सेवा करो, सबको भोजन दो और सबसे प्यार करो। इन तीन कामों को करते हुए बस भगवान को याद करो। 2) चाहे किसी ने तुम्हें तकलीफ दी हो लेकिन सबको भगवान समझकर ही प्यार करो। 3) जब आप दुखी, बीमार या परेशान होते हैं तो उस समय आप जीवन की सच्चाईयों को सीख रहे होते हैं। इसलिए दुख-तकलीफ से घबराना नहीं चाहिए। ये आपके लिए किसी लेसन की तरह होते हैं। 4) कर्म की सबसे बड़ी पूजा है। इसलिए भागवद् गीता के इस उपदेश को मानना चाहिए। 5) बाहर की दुनिया देखने की बजाय अपने अंदर देखों, झांको और खुद को समझने की कोशिश करो। 6) किसी को माफ कर देना सबसे बड़ा हथियार होता है। क्योंकि संत अपने गुस्से को तुरंत ही छोड़ देते हैं। 7) हमेशा ऐसे लोगों की संगत में रहो जो पॉजिटिव सोचते हैं। ऐसे लोगों का साथ आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा। 8) हर इंसान में ईश्वर को देखो। धर्म और कर्म के आधार पर शिक्षा देना पूरी तरह से गलत है। 9) खुद को साधारण मानों और अपने भगवान से पूछो क्या मैं कुछ नहीं कर सकता। इसके साथ ही ये मान कर चलो कि जो कुछ भी आप करते हैं वो सब भगवान कर रहा है।

घर के मंदिर में मौजूद 5 वस्तुएं रोक सकती हैं धन आगमन, आज ही हटाएं

सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। इसमें मंदिर से जुड़े नियम के बारे में विस्तार से बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के नियम का पालन न करने से साधक को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में कुछ चीजों को रखने से साधक को पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। साथ ही घर में मां लक्ष्मी वास नहीं करती हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल आपको बताते हैं कि मंदिर में किन चीजों को रखने से बचना चाहिए। टूटी मर्तियां मंदिर में भूलकर भी देवी-देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, टूटी हुई मूर्तियों की पूजा करने से नकारात्मकता बढ़ती है और साधक को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही पूजा का फल नहीं मिलता। ऐसे में टूटी हुई मूर्तियां को पवित्र नदी में बहा दें। पितरों की तस्वीर वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि मंदिर में पितरों की तस्वीर भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में पितरों और देवताओं का स्थान अलग-अलग बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में पितरों की मूर्ति लगाने से घर में अशांति का माहौल हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीर को घर की दक्षिण दिशा में लगाना चाहिए। सूखे हुए फूल रोजाना पूजा के दौरान प्रभु को फूल अर्पित किए जाते हैं और अगले दिन सुबह उन फूलों को प्रभु के दौरान शृंगार के दौरान हटा दिया जाता है, लेकिन उन फूलों को मंदिर में न रखें। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में सूखे हुए फूलों को रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसलिए सूखे हुए फूलों को पवित्र नदी में बहा दें या फिर किसी पेड़ के नीचे दबा दें। कटी-फटी धार्मिक पुस्तक मंदिर में भूलकर भी कटी-फटी धार्मिक पुस्तकों को नहीं रखना चाहिए। इससे वयक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नुकीली चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में कैंची और चाकू जैसी नुकीली चीजों को नहीं रखना चाहिए, क्योंकि नुकीली चीजों को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में वर्णित नियम का पालन करने की सलाह दी जाती है।