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सरकार ने खोले राज: 1629 डिफॉल्टर नहीं चुका रहे ₹1.62 लाख करोड़ का कर्ज

नई दिल्ली बैंकों से लोन लिया… कारोबार किया… पैसा भी बनाया, लेकिन चुकाने का मन नहीं है. जी हां ऐसे ही विलफुल डिफॉल्टर्स (Wilful Defaulters) के पास देश के तमाम सरकारी बैंकों के बकाये का आंकड़ा चौंकाने वाला है, जिसका खुलासा सरकार ने किया है. संसद के मानसून सत्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) ने राज्यसभा में बताया कि PSU Banks से कर्ज लेकर न लौटाने वाले कॉरपोरेट कर्जदारों की संख्या 1600 के पार है और ये 1.62 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दबाए बैठे हैं.   1629 कर्जदारों पर 1.62 लाख करोड़ कर्ज सरकार की ओर से केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया. उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि 31 मार्च 2025 तक पीएसयू बैंकों ने 1629 कॉर्पोरेट कर्जदारों को ऐसे डिफॉल्टर्स के रूप में पहचाना है, जो जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे हैं. इन विलफुल डिफॉल्टर्स पर कुल मिलाकर 1,62,961 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है. यह आंकड़ा विदेशी कर्जदारों को छोड़कर बैंकों द्वारा बड़े Loan पर सूचना के केंद्रीय भंडार (CRILC) को सौंपी गई रिपोर्टों के आधार पर जुटाया गया है.  क्या होते हैं ये विलफुल डिफॉल्टर?  Wilful Defaulters की ये संख्या और इनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को दर्शाने वाला है. यहां ये जान लेना जरूरी है कि आखिर ये विलफुल डिफॉल्टर होते कौन हैं? तो बता दें कि ये ऐसे लोग या फिर कंपनियां होती हैं, बैंकों से लिया गया कर्ज (Loan) चुकाने की क्षमता तो रखते हैं, लेकिन फिर भी इसे चुकाने से बचने के लिए खुद को दिवालिया घोषित कर लेते हैं. साफ शब्दों में कहें तो ये ऐसे कर्जदार होते हैं, जिनके पास इसे चुकाने के लिए पर्याप्त रकम तो होती है, लेकिन जानबूझकर ये Loan Payment करने से इनकार कर देते हैं. सरकार ऐसे कस रही शिकंजा सरकार ने डिफॉल्टर्स, उनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा पेश करने के साथ ही ऐसे कर्जदारों के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों पर भी जोर दिया है. इन पर लिए जाने वाले एक्शन की जानकारी देते हुए बताया गया कि Wilful Defaulters को अतिरिक्त ऋण सुविधाओं मना किया जाता है और इन पर 5 साल के लिए नए बिजनेस शुरू करने पर भी बैन शामिल है. इसके अलावा भविष्य में इस तरह के डिफॉल्ट्स को रोकने के उद्देश्य से इन कॉरपोरेट डिफॉल्टर्स से जुड़ी कंपनियों को इक्विटी मार्केट में एंट्री से भी प्रतिबंधित किया गया है, जिससे उनकी धन जुटाने की क्षमता घटी है या सीमित हो गई है.  पंकज चौधरी ने कहा कि बैंक बड़े मामलों में जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू कर सकते हैं और वे इसके लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, सरकार विलफुल डिफॉल्ट पर अंकुश लगाने के प्रयासों को तेज कर रही है, जिनका बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और फाइनेंशियल हेल्थ पर बड़ा असर पड़ता है. देश छोड़कर भागे कर्जदारों पर एक्शन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मास्टर दिशा-निर्देशों के तहत Willful Defaulters पर घरेलू स्तर पर शिकंजा कसने के अलावा देश छोड़कर भाग गए बड़े डिफॉल्टरों से भी सरकार निपट रही है. वित्त राज्य मंत्री के मुताबिक, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत 9 ऐसे लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उनकी 15,298 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है. यह राष्ट्रीय सीमाओं से परे अपराधियों पर शिकंजा कसने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है.

सरकार ने खोले राज: 1629 डिफॉल्टर नहीं चुका रहे ₹1.62 लाख करोड़ का कर्ज

नई दिल्ली बैंकों से लोन लिया… कारोबार किया… पैसा भी बनाया, लेकिन चुकाने का मन नहीं है. जी हां ऐसे ही विलफुल डिफॉल्टर्स (Wilful Defaulters) के पास देश के तमाम सरकारी बैंकों के बकाये का आंकड़ा चौंकाने वाला है, जिसका खुलासा सरकार ने किया है. संसद के मानसून सत्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) ने राज्यसभा में बताया कि PSU Banks से कर्ज लेकर न लौटाने वाले कॉरपोरेट कर्जदारों की संख्या 1600 के पार है और ये 1.62 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दबाए बैठे हैं.   1629 कर्जदारों पर 1.62 लाख करोड़ कर्ज सरकार की ओर से केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया. उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए बताया कि 31 मार्च 2025 तक पीएसयू बैंकों ने 1629 कॉर्पोरेट कर्जदारों को ऐसे डिफॉल्टर्स के रूप में पहचाना है, जो जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे हैं. इन विलफुल डिफॉल्टर्स पर कुल मिलाकर 1,62,961 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है. यह आंकड़ा विदेशी कर्जदारों को छोड़कर बैंकों द्वारा बड़े Loan पर सूचना के केंद्रीय भंडार (CRILC) को सौंपी गई रिपोर्टों के आधार पर जुटाया गया है.  क्या होते हैं ये विलफुल डिफॉल्टर?  Wilful Defaulters की ये संख्या और इनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को दर्शाने वाला है. यहां ये जान लेना जरूरी है कि आखिर ये विलफुल डिफॉल्टर होते कौन हैं? तो बता दें कि ये ऐसे लोग या फिर कंपनियां होती हैं, बैंकों से लिया गया कर्ज (Loan) चुकाने की क्षमता तो रखते हैं, लेकिन फिर भी इसे चुकाने से बचने के लिए खुद को दिवालिया घोषित कर लेते हैं. साफ शब्दों में कहें तो ये ऐसे कर्जदार होते हैं, जिनके पास इसे चुकाने के लिए पर्याप्त रकम तो होती है, लेकिन जानबूझकर ये Loan Payment करने से इनकार कर देते हैं. सरकार ऐसे कस रही शिकंजा सरकार ने डिफॉल्टर्स, उनके ऊपर कर्ज का आंकड़ा पेश करने के साथ ही ऐसे कर्जदारों के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों पर भी जोर दिया है. इन पर लिए जाने वाले एक्शन की जानकारी देते हुए बताया गया कि Wilful Defaulters को अतिरिक्त ऋण सुविधाओं मना किया जाता है और इन पर 5 साल के लिए नए बिजनेस शुरू करने पर भी बैन शामिल है. इसके अलावा भविष्य में इस तरह के डिफॉल्ट्स को रोकने के उद्देश्य से इन कॉरपोरेट डिफॉल्टर्स से जुड़ी कंपनियों को इक्विटी मार्केट में एंट्री से भी प्रतिबंधित किया गया है, जिससे उनकी धन जुटाने की क्षमता घटी है या सीमित हो गई है.  पंकज चौधरी ने कहा कि बैंक बड़े मामलों में जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही भी शुरू कर सकते हैं और वे इसके लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, सरकार विलफुल डिफॉल्ट पर अंकुश लगाने के प्रयासों को तेज कर रही है, जिनका बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और फाइनेंशियल हेल्थ पर बड़ा असर पड़ता है. देश छोड़कर भागे कर्जदारों पर एक्शन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मास्टर दिशा-निर्देशों के तहत Willful Defaulters पर घरेलू स्तर पर शिकंजा कसने के अलावा देश छोड़कर भाग गए बड़े डिफॉल्टरों से भी सरकार निपट रही है. वित्त राज्य मंत्री के मुताबिक, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत 9 ऐसे लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उनकी 15,298 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है. यह राष्ट्रीय सीमाओं से परे अपराधियों पर शिकंजा कसने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है.

‘लूट लो शेयर’! ब्रोकरेज की राय से उछला भरोसा, रिलायंस के शेयरहोल्डर्स के लिए सुनहरा मौका

मुंबई   भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजों से निवेशकों को थोड़ा निराश किया। नतीजे उम्मीद से कम रहे जिसके कारण सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई। मार्च के निचले स्तर से कंपनी के शेयर 25% तक बढ़ गए थे लेकिन उसके बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज हाउस अभी भी रिलायंस को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि कंपनी में विकास की अपार संभावनाएं हैं जो आने वाले महीनों में कंपनी के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती हैं। शेयर बाजार में RIL के नतीजों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कोटक इक्विटीज ने RIL के शेयर को 'buy' से घटाकर 'add' कर दिया। वहीं, जेपी मॉर्गन और जेफरीज जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के टारगेट प्राइस को क्रमशः 8% और 5% तक बढ़ा दिया है। इससे पता चलता है कि इन ब्रोकरेज हाउस को RIL की तरक्की पर पूरा भरोसा है। यह कंपनी के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है। यहां हम उन 3 मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं, जो RIL के शेयरों में तेजी ला सकते हैं: 1) जियो की ARPU में बढ़ोतरी: जियो ने पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है और उसका ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) बढ़कर ₹208.8 प्रति महीना हो गया है। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 1.3% ज्यादा है। बर्नस्टीन के अनुसार, जियो ने मार्जिन के मामले में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अभी और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। जेफरीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि जियो का ARPU FY25-28 के दौरान 11% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़कर ₹273 तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि जियो टैरिफ में तीन बार 10% की बढ़ोतरी करेगा, जिससे ARPU में वृद्धि होगी। इसके अलावा होम ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या में वृद्धि भी ARPU को बढ़ाने में मदद करेगी। जियो ने 498.1 मिलियन नए सब्सक्राइबर्स जोड़े हैं, जो तिमाही-दर-तिमाही 1.7% की वृद्धि है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 51.8% तक पहुंच गया है, जो तिमाही-दर-तिमाही 170bps की वृद्धि है। जियो का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹410.5 बिलियन रहा, जो साल-दर-साल 18.8% की वृद्धि है। रिलायंस को नतीजे में मिला दमदार मुनाफा, लेकिन BSE में 3% क्यों गिर गए शेयर? 2) नया ऊर्जा कारोबार: RIL नए ऊर्जा कारोबार में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले चार से छह तिमाहियों में गीगा फैक्ट्रियां और नई ऊर्जा परियोजनाएं (पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सेल, मॉड्यूल, बैटरी) पूरी हो जाएं। बर्नस्टीन के अनुसार रिलायंस का गीगा कॉम्प्लेक्स टेस्ला की गीगा फैक्ट्री से 4 गुना बड़ा होगा। कंपनी की योजना है कि अगले साल मार्च तक सोलर सेल की क्षमता को चालू कर दिया जाए। कंपनी का कच्छ स्थित 7,000 एकड़ का साइट 125GW बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है। नुवामा के विश्लेषण से पता चलता है कि RIL के नए ऊर्जा कारोबार में बहुत अधिक वैल्यू है। अगर RIL के मॉड्यूल बिजनेस (20GW क्षमता) को 15x EV/EBITDA दिया जाए, तो इसका EV $20 बिलियन होगा। इससे RIL के स्टॉक प्राइस में तेजी आ सकती है, जैसा कि 2017 में जियो के लॉन्च के बाद देखने को मिला था। नुवामा का मानना है कि नया ऊर्जा कारोबार RIL के PAT में 50% से अधिक का योगदान कर सकता है। इसके अलावा यह O2C बिजनेस के वैल्यूएशन को भी बढ़ा सकता है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य 2035 तक नेट जीरो-कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनस मॉडल बदल रहा है। पहले कंपनी की कमाई या तो नए रिफाइनिंग/केमिकल कैपेसिटी से होती थी या मार्जिन साइकिल से। लेकिन अब रिलायंस रिटेल और टेलीकॉम का कंपनी के कंसोलिडेटेड EBITDA में लगभग 54% का योगदान है। मुकेश अंबानी की इस कंपनी पर ब्रोकरेज फर्मों ने भर कर लुटाया प्यार, बोल रहे हैं लूट लो 3) जियो IPO: जियो का IPO लंबे समय से प्रतीक्षित है। हालांकि, इसे 2025 के बाद के लिए टाल दिया गया है, लेकिन यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करने का एक बड़ा अवसर है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रिलायंस रिटेल का वैल्यूएशन $121 बिलियन है, जो FY27E EBITDA के ~32x पर ट्रेड कर रहा है। यह DMART के 42x मल्टीपल से काफी कम है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस रिटेल के वैल्यूएशन में किसी भी तरह की वृद्धि, चाहे वह IPO के माध्यम से हो या स्टेक सेल्स के माध्यम से रिलायंस के स्टॉक में और तेजी ला सकती है। सीएलएसए को पूरा भरोसा है कि जियो और रिटेल के बढ़ते शेयर के कारण रिलायंस का कंसोलिडेटेड Ebitda आने वाले समय में काफी बेहतर होगा। सीएलएसए का मानना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी कम है, इसलिए यह भारतीय बाजार में निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी उचित है, जबकि बाजार में ज्यादातर स्टॉक ऐतिहासिक वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। उम्मीद है कि RIL पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो देगा और उसका EBITDA लगभग $20 बिलियन प्रति वर्ष होगा। आने वाले हैं अच्छे दिन नोमुरा का भी मानना है कि RIL के शेयर में तेजी आएगी। नोमुरा का कहना है कि RIL का स्टॉक वर्तमान में 12.1x और 23.3x FY27F EV/EBITDA और P/E पर ट्रेड कर रहा है। नोमुरा ने RIL के लिए 'खरीदें' रेटिंग को दोहराया है। निवेशकों की नजर अब आने वाले कंपनी की AGM पर होगी। वे FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में विकास योजनाओं, नई ऊर्जा सुविधाओं के विस्तार, मीडिया बिजनेस के विस्तार, रिटेल में तेजी, जियो के सब्सक्राइबर एडिशन और मोनेटाइजेशन और जियो के IPO पर घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। RIL का लक्ष्य है कि वह अपने जियो और रिटेल बिजनेस को दोगुना करे और नए ऊर्जा कारोबार को अपने O2C बिजनस के आकार तक पहुंचाए। कंपनी का लक्ष्य है कि वह FY30 के अंत तक रिलायंस के आकार को दोगुना कर दे। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि यह लक्ष्य अब हासिल किया जा सकता है। RIL के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अभी … Read more

‘लूट लो शेयर’! ब्रोकरेज की राय से उछला भरोसा, रिलायंस के शेयरहोल्डर्स के लिए सुनहरा मौका

मुंबई   भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजों से निवेशकों को थोड़ा निराश किया। नतीजे उम्मीद से कम रहे जिसके कारण सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई। मार्च के निचले स्तर से कंपनी के शेयर 25% तक बढ़ गए थे लेकिन उसके बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज हाउस अभी भी रिलायंस को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि कंपनी में विकास की अपार संभावनाएं हैं जो आने वाले महीनों में कंपनी के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती हैं। शेयर बाजार में RIL के नतीजों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कोटक इक्विटीज ने RIL के शेयर को 'buy' से घटाकर 'add' कर दिया। वहीं, जेपी मॉर्गन और जेफरीज जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के टारगेट प्राइस को क्रमशः 8% और 5% तक बढ़ा दिया है। इससे पता चलता है कि इन ब्रोकरेज हाउस को RIL की तरक्की पर पूरा भरोसा है। यह कंपनी के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है। यहां हम उन 3 मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं, जो RIL के शेयरों में तेजी ला सकते हैं: 1) जियो की ARPU में बढ़ोतरी: जियो ने पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है और उसका ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) बढ़कर ₹208.8 प्रति महीना हो गया है। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 1.3% ज्यादा है। बर्नस्टीन के अनुसार, जियो ने मार्जिन के मामले में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अभी और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। जेफरीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि जियो का ARPU FY25-28 के दौरान 11% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़कर ₹273 तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि जियो टैरिफ में तीन बार 10% की बढ़ोतरी करेगा, जिससे ARPU में वृद्धि होगी। इसके अलावा होम ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या में वृद्धि भी ARPU को बढ़ाने में मदद करेगी। जियो ने 498.1 मिलियन नए सब्सक्राइबर्स जोड़े हैं, जो तिमाही-दर-तिमाही 1.7% की वृद्धि है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 51.8% तक पहुंच गया है, जो तिमाही-दर-तिमाही 170bps की वृद्धि है। जियो का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹410.5 बिलियन रहा, जो साल-दर-साल 18.8% की वृद्धि है। रिलायंस को नतीजे में मिला दमदार मुनाफा, लेकिन BSE में 3% क्यों गिर गए शेयर? 2) नया ऊर्जा कारोबार: RIL नए ऊर्जा कारोबार में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले चार से छह तिमाहियों में गीगा फैक्ट्रियां और नई ऊर्जा परियोजनाएं (पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सेल, मॉड्यूल, बैटरी) पूरी हो जाएं। बर्नस्टीन के अनुसार रिलायंस का गीगा कॉम्प्लेक्स टेस्ला की गीगा फैक्ट्री से 4 गुना बड़ा होगा। कंपनी की योजना है कि अगले साल मार्च तक सोलर सेल की क्षमता को चालू कर दिया जाए। कंपनी का कच्छ स्थित 7,000 एकड़ का साइट 125GW बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है। नुवामा के विश्लेषण से पता चलता है कि RIL के नए ऊर्जा कारोबार में बहुत अधिक वैल्यू है। अगर RIL के मॉड्यूल बिजनेस (20GW क्षमता) को 15x EV/EBITDA दिया जाए, तो इसका EV $20 बिलियन होगा। इससे RIL के स्टॉक प्राइस में तेजी आ सकती है, जैसा कि 2017 में जियो के लॉन्च के बाद देखने को मिला था। नुवामा का मानना है कि नया ऊर्जा कारोबार RIL के PAT में 50% से अधिक का योगदान कर सकता है। इसके अलावा यह O2C बिजनेस के वैल्यूएशन को भी बढ़ा सकता है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य 2035 तक नेट जीरो-कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनस मॉडल बदल रहा है। पहले कंपनी की कमाई या तो नए रिफाइनिंग/केमिकल कैपेसिटी से होती थी या मार्जिन साइकिल से। लेकिन अब रिलायंस रिटेल और टेलीकॉम का कंपनी के कंसोलिडेटेड EBITDA में लगभग 54% का योगदान है। मुकेश अंबानी की इस कंपनी पर ब्रोकरेज फर्मों ने भर कर लुटाया प्यार, बोल रहे हैं लूट लो 3) जियो IPO: जियो का IPO लंबे समय से प्रतीक्षित है। हालांकि, इसे 2025 के बाद के लिए टाल दिया गया है, लेकिन यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करने का एक बड़ा अवसर है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रिलायंस रिटेल का वैल्यूएशन $121 बिलियन है, जो FY27E EBITDA के ~32x पर ट्रेड कर रहा है। यह DMART के 42x मल्टीपल से काफी कम है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस रिटेल के वैल्यूएशन में किसी भी तरह की वृद्धि, चाहे वह IPO के माध्यम से हो या स्टेक सेल्स के माध्यम से रिलायंस के स्टॉक में और तेजी ला सकती है। सीएलएसए को पूरा भरोसा है कि जियो और रिटेल के बढ़ते शेयर के कारण रिलायंस का कंसोलिडेटेड Ebitda आने वाले समय में काफी बेहतर होगा। सीएलएसए का मानना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी कम है, इसलिए यह भारतीय बाजार में निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी उचित है, जबकि बाजार में ज्यादातर स्टॉक ऐतिहासिक वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। उम्मीद है कि RIL पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो देगा और उसका EBITDA लगभग $20 बिलियन प्रति वर्ष होगा। आने वाले हैं अच्छे दिन नोमुरा का भी मानना है कि RIL के शेयर में तेजी आएगी। नोमुरा का कहना है कि RIL का स्टॉक वर्तमान में 12.1x और 23.3x FY27F EV/EBITDA और P/E पर ट्रेड कर रहा है। नोमुरा ने RIL के लिए 'खरीदें' रेटिंग को दोहराया है। निवेशकों की नजर अब आने वाले कंपनी की AGM पर होगी। वे FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में विकास योजनाओं, नई ऊर्जा सुविधाओं के विस्तार, मीडिया बिजनेस के विस्तार, रिटेल में तेजी, जियो के सब्सक्राइबर एडिशन और मोनेटाइजेशन और जियो के IPO पर घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। RIL का लक्ष्य है कि वह अपने जियो और रिटेल बिजनेस को दोगुना करे और नए ऊर्जा कारोबार को अपने O2C बिजनस के आकार तक पहुंचाए। कंपनी का लक्ष्य है कि वह FY30 के अंत तक रिलायंस के आकार को दोगुना कर दे। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि यह लक्ष्य अब हासिल किया जा सकता है। RIL के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अभी … Read more

सोने की कीमतों पर सरकार का असरदार फैसला, अब 40 हजार से नीचे मिलेगा शुद्ध सोना

मुंबई  सोना (Gold) काफी महंगा हो गया है, 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड का भाव 1 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है. भारत में बड़े पैमाने पर लोग सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं, खासकर महिलाएं गहने लेती हैं. लेकिन अब सोना महंगा होने से महिलाएं चाहकर भी गोल्ड ज्वेलरी नहीं खरीद पा रही हैं. इस बीच अब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. जिससे आने वाले दिनों में सोने की ज्वेलरी की बिक्री बढ़ सकती है. क्योंकि आप 40 हजार रुपये से कम में 10 ग्राम गोल्ड ज्वेलरी (Gold Jewellery) खरीद सकते हैं.   दरअसल, सोना इतना महंगा हो गया है कि ग्राहक 22 या 18 कैरेट की जगह सस्ते 9 कैरेट के गहनों की खरीदारी में इंटरेस्ट ले रहे हैं. कम कैरेट वाले गोल्ड ज्वेलरी खरीदना लोग बेहतर समझ रहे हैं, क्योंकि ये जेब पर कम बोझ डालते हैं. इसलिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ऐलान किया है कि अब 9 कैरेट सोने के गहनों पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी. सरकार का तर्क है कि 9 कैरेट गोल्ड पर हॉलमार्क होने से लोग ठगी से बचेंगे. 9 कैरेट गोल्ड के फायदे  इसलिए अब 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए भी हॉलमार्किंग (Hallmarking) अनिवार्य है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 9 कैरेट सोने को अनिवार्य हॉलमार्किंग श्रेणियों की सूची में शामिल कर लिया है. यह नियम इसी जुलाई से लागू हो गया है, यानी अब आप हॉलमार्क वाले 9 कैरेट वाली गोल्ड ज्वेलरी खरीद सकते हैं. इससे पहले 14, 18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य थी. एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल 9 कैरेट गोल्ड की कीमत करीब 37000 से 38000 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकती है. वहीं, 22 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी के लिए आपको कम से कम 1 लाख रुपये चुकाने होंगे. सरकार के इस कदम से ग्राहकों को सोने की शुद्धता के बारे में सही जानकारी मिलेगी. 9 कैरेट सोना 22 या 24 कैरेट सोने से सस्ता होता है, और इस पर आधुनिक डिजाइन बनाना भी आसान है.  हॉलमार्किंग से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा यही नहीं, 9 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा, विदेशों में भी 9 कैरेट गोल्ड की खूब डिमांड है. 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहकों को सुरक्षा मिलेगी, और 9 कैरेट सोने के आभूषणों की लोकप्रियता भी बढ़ेगी.  अगर फायदे की बात करें तो 9 कैरेट गोल्ड हॉलमार्किंग से गहनों की कीमत कम होगी और लोगों को सस्ता गोल्ड ज्वेलरी खरीदने का बेहतरीन विकल्प मिल जाएगा. हॉलमार्किंग से 9 कैरेट गोल्ड की 37.5% शुद्धता पक्की होगी. नियम के मुताबिक अब ज्वैलर्स और हॉलमार्किंग केंद्रों को इसका पालन करना होगा. कैसे करें शुद्ध ज्वेलरी की पहचान सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की जांच करने के लिए, आप भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का BIS-Care ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ऐप के जरिये आप ज्वेलरी पर दिए गए HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर को डालकर असली या नकली हॉलमार्किंग की पहचान कर सकते हैं. इसके अलावा आप BIS की वेबसाइट पर जाकर भी हॉलमार्क की जांच कर सकते हैं.  गौरतलब है कि आप जब 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी लेते हैं तो आपको पता होनी चाहिए कि उसमें 22 कैरेट गोल्ड के साथ 2 कैरेट कोई और मेटल मिक्स होता है. वहीं जब आप 18 कैरेट की ज्वेलरी खरीदते हैं, उसमें 6 कैरेट कोई और मेटल मिला होता है. हालांकि अगर आप निवेश के लिए ज्वेलरी खरीद रहे हैं तो फिर 22 कैरेट की ज्वेलरी ही खरीदें.   हॉलमार्क क्यों जरूरी? हॉलमार्किंग का मतलब होता है सोने की शुद्धता की सही पहचान. जब आप कोई सोने का गहना खरीदते हैं, तो उस पर एक छोटा-सा निशान बना होता है, जो बताता है कि वो गहना कितने कैरेट का है और उसकी गुणवत्ता क्या है. हॉलमार्किंग से ग्राहक को भरोसा रहता है कि जो सोना वह खरीद रहा है, वह असली है और उसकी कीमत के हिसाब से उसमें कोई धोखा नहीं है. इससे न सिर्फ खरीदार को सुरक्षा मिलती है, बल्कि सोने की बिक्री या आगे चलकर एक्सचेंज में भी आसानी होती है.

Tesla Model Y की बुकिंग लाइव: कश्मीर से कन्याकुमारी तक उमड़ी इलेक्ट्रिक कार की डिमांड, ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

मुंबई एलन मस्‍क की कंपनी टेस्‍ला की भारत में एंट्री हो गई है. मुंबई के बीकेसी में खुला टेस्‍ला का शोरूम शहर की शोभा बढ़ा रहा है. कंपनी ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि टेस्‍ला की Y मॉडल कार यहां एवलेबल होगी. इसी के साथ कंपनी ने कीमतों का भी खुलासा कर दिया है. कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि टेस्‍ला के वाई मॉडल की कार की ऑन रोड प्राइस करीब 61 लाख रुपये से शुरू हो रही है. कंपनी ने कार की बुकिंग को लेकर भी जानकारी दी है. सबसे पहले जान लीजिए कि टेस्‍ला के Y मॉडल में किस वेरिएंट की कितनी कीमत होगी.      कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, ब्‍लैक कलर में रियर-व्‍हील ड्राइव की कीमत 59.89 लाख रुपये के करीब बताई जा रही है, जिसकी ऑन रोड प्राइस 61.07 लाख रुपये पड़ेगी.      इसी मॉडल में रेड वेरिएंट में लॉन्‍ग रेंज रियर-व्‍हील ड्राइव की कीमत 68.14 लाख रुपये के करीब बताई जा रही है, जिसकी ऑन रोड प्राइस 71.02 लाख रुपये पड़ेगी.  ₹22,220 देकर आज ही कर सकते हैं बुकिंग  कंपनी ने ऑनलाइन साइट पर टेस्‍ला कार की बुकिंग के लिए भी जानकारी दी है. इसके लिए आपको कंपनी की वेबसाइट पर जाना होगा और वहां लोकेशन इंडिया सेलेक्‍ट करना होगा. इसके बाद भारत में आपको Y मॉडल की कीमतें दिखने लगेंगी.      सबसे पहले https://www.tesla.com/ पर जाएं.      यहां आपको मॉडल में कार का Y Model सेलेक्‍ट करना होगा.     इसके बाद आपको लेफ्ट कॉर्नर में जाकर लोकेशन भारत (India-English) सेलेक्‍ट करना होगा.      अब आपको भारत में इस कार की कीमतें दिखनी शुरू हो जाएगी.      यहां आप अपनी पसंद के हिसाब से वेरिएंट और कलर चुन सकते हैं.      इसके बाद आपको Order Now पर क्लिक करना है.  यहां पर आप यूपीआई/कार्ड या अन्‍य पेमेंट माध्‍यम से बुकिंग अमाउंट पेड कर अपने लिए कार बुक कर पाएंगे. बुकिंग के लिए 22,220 रुपये देने पड़ेंगे और एक हफ्ते के भीतर ग्राहक को 3 लाख रुपये जमा करने होंगे.  टाइमलाइन: 10 साल पहले प्रयास, अब हुआ साकार     2016: टेस्ला ने मॉडल 3 के लिए प्री-ऑर्डर लेना शुरू किया, जो भारतीय बाजार में उनकी शुरुआती दिलचस्पी को दर्शाता है. हाल ही में (2025 में), कंपनी ने इन बुकिंग का रिफंड भी किया.     2017: एलन मस्क ने भारत में लग्जरी वाहनों पर 100% आयात शुल्क को टेस्ला के लिए बड़ी बाधा बताया.     2021: टेस्ला ने बेंगलुरु में अपनी इकाई पंजीकृत की. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि टेस्ला CBU (पूरी तरह से निर्मित इकाई) के माध्यम से परिचालन शुरू करेगी.     2022: मस्क ने भारत के उच्च आयात शुल्क को फिर से बाधा बताया. टेस्ला ने भारत में अपने चार मॉडलों के लिए होमोलोगेशन प्रक्रिया भी शुरू की.     2023: टेस्ला ने मुंबई में 13 भूमिकाओं के लिए स्थानीय भर्ती शुरू की और गुजरात या महाराष्ट्र में $2 बिलियन की फैक्ट्री की योजना पर विचार किया, लेकिन उच्च टैरिफ और स्थानीय विनिर्माण के दबाव के कारण बातचीत रुक गई.     मार्च 2024: भारत ने नई ईवी नीति (SPMEPCI) की घोषणा की, जिसमें कुछ शर्तों के साथ $35,000 से अधिक कीमत वाले ईवी पर आयात शुल्क घटाकर 15% कर दिया गया.     2025 की शुरुआत: टेस्ला ने मुंबई और दिल्ली में स्टोर मैनेजर, बिक्री और सेवा भूमिकाओं के लिए भर्ती में तेजी लाकर रिटेल ऑपरेशन की नींव रखी.     मिड 2025 : नई ईवी नीति के विवरण को अंतिम रूप दिया गया और रजिस्‍ट्रेशन विंडो खोली गईं; टेस्ला को छोड़कर कई वैश्विक कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई.

ICICI लोन घोटाला: ₹64 करोड़ की डील में फंसी पूर्व CEO चंदा कोचर

मुंबई  प्राइवेट सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा बैंक ICICI उस वक्त सवालों से घिर गया, जब बैंक से 300 करोड़ रुपये के लोन के लिए रिश्वत की बात सामने आई. नियमों की अनदेखी और बैंकिंग अधिनियमों को ताख पर रखकर बैंक की पूर्व CEO चंदा कोचर ने वीडियोकॉन ग्रुप को 300 करोड़ रुपये के लोन जारी कर दिया.  इस लोन के बदले उन्होंने 64 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी. अब इस लोन धांधली मामले में  चंदा कोचर बुरी तरह से फंस गई हैं.  रिपोर्ट के मुताबिक  appellate tribunal ने ED की रिपोर्ट को सही माना है और वीडियोकॉन लोन घोटाला मामले में उन्हें दोषी माना है.  ट्रिब्यूनल ने 3 जुलाई को अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वीडियोकॉन को लोन देने के बदले चंदा कोचर ने 64 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी.  ईडी की दलीलों को सही मानते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा कि सभी सबूत इस बात की गवाही दे रहे हैं कि चंदा कोचर ने अपने पति के जरिए वीडियोकॉन ग्रुप से 64 करोड़ रुपये की रिश्वत ली.आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन को जो लोन लिया वो डूब गया, जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ.  चंदा कोचर ने कैसे किया पूरा खेला   ट्रिब्यूनल ने कहा कि ED ने इस स्कैम से संबंधित जो सबूत दिए हैं, जो PMLA एक्ट की धारा 50 के तहत बयान शामिल हैं. ये बयान मान्य हैं. वीडियोकॉन को 300 करोड़ रुपये के लोन के लिए चंदा कोचर ने बैंकिंग नियमावली की अनदेखी करते हुए रिश्वत ली. रिश्वत की रकम के लिए कंपनियों के कागजातों में हेरफेर किए गए. रिश्वत की रकम नूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) के जरिए रूट की गई. इस कंपनी का मालिकाना हक वीएन धूत के पास था, वो वीडियोकॉन के CMD थे, लेकिन असल में कंपनी पर पूरा कंट्रोल चंदा कोचर के पति दीपक कोचर का था.   78 करोड़ रुपये की संपत्ति होगी जब्त   ट्रिब्यूनल ने ईडी के आरोपों की सही ठहराते हुए पहले की अथॉरिटी को फटकार लगाई, जिसमें चंदा कोचर को आरोपों से राहत दिया गया था. ये भी कहा गया कि चंदा कोचर ने लोन मंजूर करने वाली कमेटी में रहते हुए बैंक के नियमों और नीतियों को अनदेखा किया. जिस दिन वीडियोकॉन को 300 करोड़ रुपये का लोन पास किया गया. अगले ही दिन  वीडियोकॉन की कंपनी SIPL ने NRPL को 64 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए.  अब उनकी संपत्ति फिर से जब्त होगी, जिसमें उनका मुंबई चर्चगेट वाला फ्लैट भी शामिल है. बता दें कि चंदा कोचर अभी जमानत पर बाहर है, लेकिन केस जारी है.  

शेयर बाजार में आज तेजी का रुख , Sensex 327 अंक उछला, Nifty 25150 के ऊपर

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी जोरदार तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. सेंसेक्स-निफ्टी अपने पिछले बंद के मुकाबले उछाल के साथ ओपन हुए. BSE का 30 शेयरों वाला Sesnex जहां 300 अंक से ज्यादा चढ़कर खुला, तो वहीं NSE के निफ्टी इंडेक्स ने भी ग्रीन जोन में शुरुआत की. इस बीच जहां Eternal और Paytm तक के शेयर तेज रफ्तार से भागते दिखे, तो वहीं देश के सबसे अमीर इंसान मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की कंपनी रिलायंस का शेयर (Reliance Share) खुलते ही धड़ाम नजर आया.  82500 के पार निकला सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 82,200.34 की तुलना में तेज छलांग लगाते हुए करीब 327 अंक चढ़कर खुला. ये 82,527 पर ओपन होने के बाद और तेज पकड़ते हुए 82,538 के लेवल पर पहुंच गया. BSE Sensex की तरह से ही NSE Nifty ने भी बीते कारोबारी दिन की तेजी को बरकरार रखा और अपने पिछले बंद 25,090.70 के मुकाबले तेजी के साथ खुलने के बाद 25,182 के लेवल तक उछल गया.  Reliance के शेयर को हुआ क्या?  लगातार दूसरे दिन सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी के बावजूद अरबपति मुकेश अंबानी (Billionaire Mukesh Ambani) की मार्केट वैल्यू के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी Reliance Industries का शेयर मंगलवार को भी सुस्त नजर आया. बीते कारोबारी दिन 3.24 फीसदी की तगड़ी गिरावट के साथ बंद होने के बाद RIL Share शुरुआती कारोबार में ही टूटकर 1417.70 रुपये पर आ गया. शेयर में लगातार जारी गिरावट का असर Reliance Market Cap पर भी दिखा और ये कम होकर 19.32 लाख करोड़ रुपये रह गया.  Bajaj Finance का शेयर भी फिसला रिलायंस के साथ ही एक और दिग्गज कंपनी बजाज फाइनेंस का शेयर ग्रीन जोन में ओपन होने के बाद अचानक फिसलकर रेड जोन में आ गया. Bajaj Finance Share का शेयर 940 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. इस कंपनी में टॉप लेवल पर हुए बड़े फेरबदल का असर शेयर पर देखने को मिला है. बता दें कि कंपनी के एमडी अनूप कुमार साहा (Bajaj Finance MD Resigns) ने नियुक्ति के चार महीने के बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और ये जिम्मेदारी अब कंपनी में वाइस चेयरमैन राजीव जैन को दी गई है, जो 31 मार्च 2028 तक एमडी रहेंगे.  14% उछल गया जोमैटो का शेयर मंगलवार को जिन शेयरों में तूफानी तेजी देखने को मिली उनमें सबसे ज्यादा तेजी फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो (Zomato) की पैरेंट कंपनी एटरनल लिमिटेड के शेयर (Eternal Share) में आई और ये देखते ही देखते मिनटों में 14.55 फीसदी तक उछल गया. इस स्टॉक ने 293 रुपये पर ओपनिंग की और फिर 311.25 रुपये पर ट्रेड करता दिखा.  ये 10 शेयर भी तेज रफ्तार के साथ भागे बाजार की तेजी में रफ्तार पकड़ने वाले अन्य शेयरों की बात करें, तो  BEL, Trent जैसे लार्जकैप शेयर जहां 1 फीसदी से ज्यादा चढ़कर कारोबार कर रहे थे. तो वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल Paytm Share (3.09%), Dalmia Bharat Share (2.52%), SunTv Share (2.31%), Emcure Pharma Share (2%) की उछाल के साथ ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा स्मॉलकैप कंपनियों में Primo Share (8.78%), AeroFlex Share (7.26%), Raclgear Share (7.07%) और Advait Share (6.78%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था. 

डिजिटल सुविधा का नया दौर: बिना एटीएम कार्ड के भी मिलेगा कैश

नई दिल्ली ATM कार्ड नहीं है? खो गया या घर पर छूट गया? अब इससे फर्क नहीं पड़ता. टेक्नोलॉजी ने इस समस्या का हल ढूंढ़ लिया है, Cardless Cash Withdrawal via UPI. आजकल कई बैंक ऐसे ATM मशीनें उपलब्ध करा रहे हैं, जिनसे आप केवल UPI ऐप के माध्यम से कैश निकाल सकते हैं, वो भी बिना कार्ड लगाए. भारत में कुछ चुनिंदा बैंकों ने यह सुविधा शुरू कर दी है और धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैल रही है. बिना कार्ड के ATM से पैसे निकालने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया Step 1: ATM पर जाएं: ATM मशीन के पास जाएं और स्क्रीन पर ‘Cardless Cash Withdrawal’ या ‘UPI Cash Withdrawal’ विकल्प चुनें. Step 2: QR कोड स्कैन करें: ATM स्क्रीन पर एक QR कोड दिखाई देगा. अपने स्मार्टफोन में कोई भी UPI ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm या BHIM) खोलें और QR कोड स्कैन करें. Step 3: राशि दर्ज करें: UPI ऐप में वह राशि दर्ज करें जितना कैश आप निकालना चाहते हैं. Step 4: UPI पिन डालें और कन्फर्म करें: अब अपना UPI पिन डालें और ट्रांज़ैक्शन कन्फर्म करें. Step 5: कैश प्राप्त करें: कन्फर्मेशन के बाद ATM से तुरंत कैश निकल जाएगा, बिना कार्ड लगाए, बिना स्क्रीन को टच किए. किन बातों का रखें ध्यान?     आपके स्मार्टफोन में UPI ऐप इंस्टॉल और सक्रिय होना चाहिए.     आपका बैंक अकाउंट UPI ऐप से लिंक होना अनिवार्य है.     यह सुविधा केवल उन्हीं ATM मशीनों में उपलब्ध है, जिनमें UPI-इनेबल्ड कैश विथड्रॉल सिस्टम लगा है.     हर बैंक की नकद निकासी सीमा अलग-अलग हो सकती है (जैसे ₹5,000 या ₹10,000 प्रति दिन).     नेटवर्क या OTP/पिन में देरी के कारण ट्रांज़ैक्शन असफल हो सकता है — इसलिए इंटरनेट कनेक्शन अच्छा रखें. कौन-कौन से बैंक दे रहे हैं यह सुविधा? भारत के कई प्रमुख बैंक अब UPI आधारित कार्डलेस कैश विथड्रॉल सुविधा प्रदान कर रहे हैं. इनमें शामिल हैं:     HDFC Bank     ICICI Bank     State Bank of India (SBI)     Bank of Baroda     Union Bank of India     Punjab National Bank (PNB) इन बैंकों के चुनिंदा ATM में यह सुविधा उपलब्ध है, और जल्द ही यह पैन-इंडिया स्तर पर लागू होने की उम्मीद है. क्यों बढ़ रही है कार्डलेस ATM की मांग?     सुरक्षा: ATM कार्ड खोने या क्लोनिंग से बचाव.     सहूलियत: केवल मोबाइल और इंटरनेट से ट्रांज़ैक्शन की सुविधा.     फिजिकल टच-फ्री: कोरोना काल के बाद से टचलेस टेक्नोलॉजी की मांग बढ़ी.     डिजिटल इंडिया को बढ़ावा: सरकार और RBI की संयुक्त पहल से डिजिटल ट्रांज़ैक्शन को प्रोत्साहन.  

UPI में बड़ा अपडेट! NPCI की नई गाइडलाइन से ट्रांजैक्शन होंगे और आसान

नई दिल्ली अगर आप UPI का यूज करते हैं तो आपके लिए गुड न्‍यूज है. यूपीआई के माध्‍यम से ओवरड्रॉफ्ट फैसिलिटी को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इसके तहत क्रेडिट लाइन को डायरेक्‍ट UPI से जोड़ा जाएगा. जिसके बाद आप अपने लोन अकाउंट से पैसा UPI के जरिए आसानी से निकाल पाएंगे. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 10 जुलाई 2025 को एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें प्री-अप्रूव क्रेडिट लाइंस को UPI से लिंक के लिए नए गाइडलाइन जारी किए गए हैं.  सर्कुलर में कहा गया है कि अगले महीने यानी अगस्‍तर से बैंक की प्री-अप्रूव्‍ड क्रेडिट लाइन की रकम का यूज आप UPI से डायरेक्‍ट कर पाएंगे. अबतक सिर्फ सामान खरीदने की अनुमति दी गई थी. अब UPI के जरिए क्रेडिट लाइन की रकम से न सिर्फ दुकानों पर पेमेंट किए जा सकेंगे, बल्कि कैश निकालने, किसी को पैसे भेजने से लेकर छोटे दुकानदारों को पेमेंट करने का भी फीचर दिया जाएगा.  पहले यह नियम अलग था. UPI पर क्रेडिट लाइन के जरिए सिर्फ दुकानों पर ही पेमेंट किया जा सकता था, लेकिन अब लोन ओवरड्रफ्ट को यूपीआई से लिंक करने के बाद यूज किया जा सकता है.  लोन अकाउंट UPI से होगा डायरेक्‍ट लिंक  नए नियम के तहत अब UPI यूजर्स फिक्‍स डिपॉजिट, शेयर, बॉन्‍ड, प्रॉपर्टी, गोल्‍ड या फिर पर्सनल और बिजनेस लोन ओवरड्रॉफ्ट को UPI से लिंक करके यूज कर सकेंगे. सरल शब्‍दों में कहें तो अब आप Paytm, PhonePe, Google Pay जैसे थर्ड पार्टी UPI ऐप्‍स से सीधा लोन अकाउंट से पेमेंट कर सकेंगे.  अगले महीने से ये सर्विस NPCI ने सभी यूपीआई बैंक सदस्‍यों और क्रेडिट लाइन सुविधा देने वालों को निर्देश दिया है कि यह सुविधा 31 अगस्‍त 2025 तक लागू करना है. ऐसे में यूपीआई यूज करने वाले करोड़ों यूजर्स को इसका लाभ मिलेगा.  क्‍या होता है क्रेडिट लाइन  आपको बता दें कि क्रेडिट लाइन एक तरह का लोन होता है, जिसे बैंक या कोई भी वित्तीय संस्‍था यूजर्स की इनकम और क्रेडिट स्‍कोर के आधार पर अप्रूव करता है. बैंक की ओर से अप्रूव क्रेडिट लाइन अकाउंट को आप UPI से लिंक कर सकते हैं और इसका इस्‍तेमाल कर सकते हैं.