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महंगी किताबें और फीस वृद्धि पर कार्रवाई, यूपी के कई स्कूलों को नोटिस और जुर्माना

 लखनऊ  नए शिक्षण सत्र के साथ ही निजी स्कूलों में फीस वृद्धि, ड्रेस व महंगी पाठ्य पुस्तकों के नाम पर आर्थिक शोषण शुरू हो गया है। प्रदेश भर में निजी स्कूलों की मनमानी की शिकायतें सामने आते ही जिला प्रशासन लगाम लगाने को सक्रिय हो गया है। आगरा, सहारनपुर और अलीगढ़ समेत कुछ जिलों में निजी स्कूलों को नोटिस देने के साथ ही जुर्माने की कार्रवाई की तैयारी है। आगरा में निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें पाठ्यक्रम में लगाने, चिन्हित दुकान से ही पुस्तकें, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म आदि लेने की अनिवार्यता थोपने वाले 55 स्कूलों को नोटिस दिया गया है। सेंट पीटर्स जूनियर हाईस्कूल पर डीएम और बीएसए ने पांच लाख का जुर्माना लगाते हुए नोटिस जारी किया है। चार स्कूलों के अंदर पुस्तक बिक्री के काउंटर लगे पाए गए। फिरोजाबाद के स्कूलों में पुस्तक बिक्री पर डीएम रमेश रंजन ने पांच स्कूलों को एक-एक लाख जुर्माने के नोटिस भेजे हैं। एटा में पांच स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है अलीगढ़ में कुछ दिन पहले तीन स्कूलों में हुए डीआईओएस के निरीक्षण में बच्चों के बस्तों में निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें मिलीं। स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। सहारनपुर में पाठ्यपुस्तकों की बिक्री की व्यवस्था में नियमों का खुला उल्लंघन कर अभिभावकों से अधिक रुपये वसूलने के मामले में शिक्षा विभाग की ओर से दिल्ली पब्लिक, इन्टेंट जीसस स्कूल और श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल को नोटिस दिया गया है। डीआईओएस डॉ. अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि इन स्कूलों के अंदर किताब बिक्री हो रही थी। उचित जवाब न देने पर स्कूल पर पांच लाख रुपये अर्थदंड लगाने की चेतावनी दी। तीनों स्कूलों में से किसी ने भी नोटिस का जवाब नहीं दिया है। टीम की जांच रिपोर्ट संग तीनों स्कूलों पर कार्रवाई के लिए डीएम से संस्तुति की जाएगी। प्रयागराज में अधिक फीस और हर साल बदल जाने वाली महंगी किताबों के मुद्दे को दैनिक जागरण ने प्रमुखता से उठाया तो जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक हुई। इसमें पिछले पांच वर्ष में कितनी फीस बढ़ी है, इसका रिकार्ड 10 दिनों में जमा कराने को कहा गया है। स्कूलों को नोटिस देकर पूछा जाएगा कि पहली के बाद अन्य कक्षाओं में एडमिशन फीस की वसूली क्यों हो रही है? वसूली गई फीस की तुलना में शिक्षक व अन्य कर्मियों के वेतन में कितनी बढ़ोतरी की गई। स्कूल की वेबसाइट पर शुल्क का पूरा ब्योरा है या नहीं? स्कूल जिन दुकानों से पाठ्य सामग्री वितरित कराते हैं, उन्हें सूचिबद्ध किया जाए। उनकी आय, जीएसटी का लेखा-जोखा और टैक्स का विवरण जुटाते हुए कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। लखनऊ में डीएम विशाल जी तथा हरदोई में जिलाधिकारी अनन्य झा ने सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में विशेष जांच कमेटी गठित की है, जो दुकानों पर आकस्मिक छापेमारी करेगी। कार्रवाई का चाबुक     आगरा में 55 स्कूलों को नोटिस, एक पर पांच लाख का जुर्माना     फिरोजाबाद में पांच स्कूलों को एक-एक लाख जुर्माने के नोटिस     एटा में भी पांच स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया     अलीगढ़ में बस्तों में मिली निजी प्रकाशकों की किताबें, तीन स्कूलों को नोटिस  

यूपी में जनशिकायत निस्तारण रैंकिंग जारी, रामपुर पहले, हाथरस-बाराबंकी दूसरे स्थान पर

 जयपुर   यूपी सरकार शिकायतों के निस्तारण को लेकर लगातार दूसरी आर रामपुर ने बाजी मारी है। फरवरी में भी रामपुर शिकायतों के निस्तारण के मामले में पहले स्थान पर था। मार्च महीने के आईजीआरएस रिपोर्ट में 139 अंक प्राप्त कर रामपुर ने पहला स्थान प्राप्त किया है। जबकि हाथरस और बाराबंकी ने बराबर अंक प्राप्त कर दूसरा, शाहजहांपुर और पीलीभीत ने बराबर अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बतादें कि आईजीआरएस द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और जन शिकायत की सुनवाई की रिपोर्ट जारी की जाती है। आईजीआरएस द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा होती है। इसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। आईजीआरएस की फरवरी माह की रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने मानक पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 139 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसका रेश्यो 99.29 प्रतिशत है। क्या बोले रामपुर डीएम जिलाधिकारी रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि आईजीआरएस की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही आईजीआरएस के जरिये मिलने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण तरीके से त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। जिले में प्राथमिकता के आधार पर होता है शिकायतों का निस्तारण हाथरस जिलाधिकारी अतुल वत्स ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले में प्राथमिकता के आधार पर जनसुनवाई में शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। यही वजह है कि पिछले चार माह में जिले में जनशिकायतों के निस्तारण दर में सुधार हुआ है। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई अन्य कार्य किये जा रहे हैं। इतना ही नहीं, विकास परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और तय समय सीमा में पूरा करने के लिए हर हफ्ते अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाती है। साथ ही आम जनमानस की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। उनकी समस्या के निस्तारण के संतोषजनक फीडबैक पर ही आईजीआरएस की रिपोर्ट जारी की जाती है। ऐसे में आईजीआरएस की मार्च माह की रिपोर्ट में हाथरस पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। हाथरस ने पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 137 अंक प्राप्त किये। इसी तरह बाराबंकी ने भी 137 अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। टॉप टेन में हमीरपुर, सहारनपुर, बलिया, प्रयागराज और मथुरा ने बनाई जगह शाहजहांपुर और पीलीभीत ने पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 136 बराबर-बराबर अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं सोनभद्र, कन्नौज, अंबेडकरनगर और हापुड़ ने बराबर-बराबर 135 अंक प्राप्त कर चौथा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा बरेली, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी ने 134 अंक हासिल कर पांचवां स्थान प्राप्त किया। वहीं टॉप टेन जिलों में हमीरपुर, सहारनपुर, बलिया, प्रयागराज और मथुरा ने जगह बनाई है।

सीकर के रींगस गढ़ की अनोखी कहानी, राजा उदय सिंह से जुड़ा माना जाता है इतिहास

जयपुर राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और वीरता की कहानियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. इसी विरासत का एक अहम हिस्सा सीकर जिले के रींगस में स्थित प्राचीन गढ़ है. यह गढ़ करीब 550 से 600 साल पुराना माना जाता है और आज भी अपने इतिहास और संरचना के कारण लोगों को आकर्षित करता है. स्थानीय लोग इसे रींगस का गढ़ या प्राचीन किला कहते हैं. राजा उदय सिंह से जुड़ा माना जाता है निर्माण इतिहासकारों के अनुसार इस गढ़ का निर्माण किसने करवाया इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसका निर्माण राजा उदय सिंह ने कराया था. बाद में यह गढ़ सीकर के शासक राव राजा कल्याण सिंह को सौंप दिया गया. समय के साथ देखरेख के अभाव में यह गढ़ खंडहर में बदलने लगा. लोगों ने मिलकर बचाई अपनी धरोहर साल 1957 में रींगस के स्थानीय लोगों ने मिलकर इस गढ़ को खरीद लिया. उनका उद्देश्य इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाना और यहां स्थित प्राचीन मंदिर की आस्था को बनाए रखना था. गढ़ के भीतर बना करीब 600 साल पुराना बालाजी मंदिर लोगों की गहरी श्रद्धा का केंद्र है, जिसके कारण इसे संरक्षित करने की पहल की गई. पर्चे वाले हनुमान मंदिर की अनोखी मान्यता इस गढ़ में स्थित हनुमान मंदिर को पर्चे वाले हनुमान जी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों को बालाजी का साक्षात अनुभव होता है. खास बात यह है कि मंदिर में स्थापित मूर्ति सालासर बालाजी की तरह दिखाई देती है. यहां दर्शन करने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि उन्हें सालासर धाम जैसे ही दर्शन मिलते हैं. युद्ध और सुरक्षा का केंद्र रहा गढ़ गढ़ की बनावट भी बेहद खास है. इसके चारों ओर मजबूत बुर्ज बने हुए हैं और चारों तरफ गहरी खाई मौजूद है, जिसमें कभी पानी भरा रहता था. ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र जयपुर और सीकर के शासकों के बीच युद्ध भूमि के रूप में इस्तेमाल होता था. सैनिकों को सुरक्षा और ठहरने के लिए इस गढ़ का उपयोग किया जाता था. आज भी जारी है संरक्षण का प्रयास वर्तमान में इस गढ़ के करीब 10 मालिक हैं, जो इसकी देखरेख कर रहे हैं. स्थानीय लोग लगातार इस ऐतिहासिक धरोहर और मंदिर की पूजा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं. यह गढ़ आज भी आस्था, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बना हुआ है.

नगर निगम का बड़ा फैसला: गृहकर में कटौती, चार लाख से अधिक लोगों को फायदा

  गाजियाबाद गाजियाबाद नगर निगम ने डीएम सर्किल रेट से लगाए गृहकर की दरों को शासन के आदेश पर संशोधित कर दिया है। बढ़ाए गए डीएम सर्किल रेट की दरों में कटौती के बाद अब करदाताओं को 10 से 15 फीसदी तक बढ़ा गृहकर देना होगा। इसके साथ ही अन्य कई प्रकार की छूट के नियमों को भी लागू कर दिया गया है। इससे नगर निगम क्षेत्र के साढ़े चार लाख करदाताओं को राहत मिलेगी। निगम मुख्यालय में शनिवार को पत्रकार वार्ता में मेयर सुनीता दयाल, विधायक अजीतपाल त्यागी और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि गत वित्त वर्ष डीएम सर्किल रेट की दर से गृहकर बढ़ाया गया था। इसका स्थानीय लोगों के अलावा विभिन्न संगठन विरोध कर रहे थे। सदन में भी पार्षदों ने विरोध जताया। तीन पूर्व पार्षद निगम के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए, जहां अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। नगर आयुक्त ने बताया नगर विकास विभाग ने गृहकर की बढ़ी दरों को संशोधन करने के आदेश दिए हैं। समय पर गृहकर जमा वालों को ही मिलेगा छूट का लाभ नगर आयुक्त ने बताया शासन के आदेश पर वर्ष 2024 से पहले की दरों के आधार पर निर्धारित टैक्स से वर्तमान की जो दर लागू हैं उस पर सभी छूट देने के बाद लगभग 10 से 15 फीसदी की वृद्धि हुई है। करदाता सभी तरह की छूट का लाभ लेकर टैक्स जमा कर सकते हैं। जो करदाता समय पर गृहकर जमा नहीं करेंगे, उन्हें छूट का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे करदाताओं के लिए 20 फीसदी टैक्स बढ़ेगा। इस तरह शहर के साढ़े चार लाख से ज्यादा करदाताओं को राहत मिलेगी। नगर आयुक्त ने बताया कि जो करदाता बढ़ी दर से गृहकर जमा कर चुके हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं हैं। उनके बढ़े टैक्स को अगले तीन साल में समायोजित किया जाएगा। करदाताओं को कम हाउस टैक्स जमा करना होगा। उनका कम टैक्स खुद सॉफ्टवेयर में अपडेट हो जाएगा। नई दर से व्यावसायिक संपत्ति को राहत नहीं पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल ने बताया कि शहर की लगभग 40 फीसदी संपत्ति कमर्शियल है। नई दर के हिसाब से कमर्शियल प्रॉपर्टी को अभी भी लगभग तीन गुना टैक्स देना होगा। उन्हें इसमें किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है। केवल आवासीय कर में ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। गड़बड़ी करने वालों पर सख्ती होगी मेयर सुनीता दयाल ने स्पष्ट किया कि टैक्स में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। टैक्स कम करने के नाम पर लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। यदि किसी जोनल कार्यालय में लोगों को टैक्स कम करने के नाम पर परेशान किया जा रहा है तो इसकी शिकायत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पूरी पारदर्शिता के साथ कर निर्धारण होगा। लोग सेल्फ एसेसमेंट करके भी कर निर्धारण कर सकते हैं। हाउस टैक्स जमा करने के लिए जोनल कार्यालय पर शिविर लगाए जाएंगे। ये छूट भी मिलेंगी मेयर सुनीता दयाल ने बताया एक अप्रैल से छूट के नए नियम लागू हो गए हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन भुगतान करने पर दो फीसदी छूट मिलेगी। अभी तक एक फीसदी छूट करदाताओं को मिल रही थी। घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कूड़े को अलग करने पर पहली बार 10 फीसदी छूट दी जाएगी। 10 वर्ष पुराने भवनों पर निर्धारित एआरवी पर 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। 10 साल से 20 साल तक पुराने भवनों की 32.5% की छूट मिलेगी। 20 साल से पुराने भवन पर 40% की छूट दी जाएगी। नई दर पर इस तरह वसूला जाएगा टैक्स निगम सड़क की चौड़ाई को तीन श्रेणी में बांटकर प्रति वर्ग फुट रुपये के हिसाब से गृहकर वसूल रहा है। पहली श्रेणी 12 मीटर चौड़ी वाली सड़क है। दूसरी श्रेणी 12 से 24 मीटर तक चौड़ी सड़क है। तीसरी श्रेणी 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क है। निगम 12 मीटर चौड़ी सड़क वाले भवन पर 3.50 रुपये प्रति वर्ग फुट रुपये के हिसाब से टैक्स वसूल रहा था। इसे कम कर अब 2.28 रुपये किया है। यानी की 1.22 रुपये के हिसाब से टैक्स लिया जाएगा। 12 से 24 मीटर चौडी सड़क के भवन पर 3.75 रुपये प्रति वर्ग फुट रुपये टैक्स लिया जा रहा था। संशोधन के बाद 2.81 रुपये प्रति वर्ग फुट रुपये टैक्स लिया जाएगा। इस तरह 94 पैसे कम हुए हैं। 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क वाले भवन से 4.00 रुपये लिए जा रहे थे। अब 3.40 रुपये टैक्स वसूला जाएगा। यानी की 60 पैसे टैक्स में कम हुए हैं। ढाई लाख करदाता बिना ब्याज के जमा कर सकेंगे नगर आयुक्त ने बताया पिछले वित्त वर्ष में ढाई लाख से ज्यादा करदाताओं ने गृहकर जमा नहीं कराया है। नियमानुसार कर जमा नहीं कराने पर वित्त वर्ष यानी की 31 मार्च खत्म होने पर 12 फीसदी ब्याज लग जाता है। शासन के आदेश पर फिलहाल ब्याज नहीं लगाया जा रहा है। करदाता ब्याज से बचने और 20 फीसदी छूट के साथ पिछले वित्त वर्ष का टैक्स 15 अप्रैल से लेकर 15 जुलाई तक जमा करा सकेंगे। ब्याज से बचने और 20 फीसदी छूट का लाभ लेने का यह आखिरी मौका है। पुरानी दरों को लागू नहीं किया जा सका निगम वर्ष 2023 तक पुराने नियम से हाउस टैक्स वसूलता था। वर्ष 2025-26 से डीएम सर्किल रेट की दर से गृहकर वसूला जा रहा है। वर्ष 2023 में 12 मीटर चौड़ी सड़क वाले भवन पर 1.61 रुपये का हिसाब से टैक्स लगता था। 12 से 24 मीटर चौडी सड़क के भवन पर टैक्स दर 2.00 रुपये थी। वहीं, 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क वाले भवन का टैक्स दर 2.41 रुपये था। शहर के लोग इन दरों से ही गृहकर लगाने की मांग कर रहे थे, लेकिन शासन के आदेश पर डीएम सर्किल रेट की दरों में ही कटौती की गई है। नई दरों से गृहकर में राहत देने के फैसले को लोगों ने सराहा है। सुनीता दयाल, मेयर, ''गृहकर की दरों में कटौती होने से जनता को राहत मिलेगी। करदाता बिना ब्याज के गत वर्ष का पुराना हाउस टैक्स जमा करा सकेंगे। उन्हें 20 फीसदी छूट भी दी जाएगी। छूट के सभी नए नियम लागू हो गए हैं।''

मध्यप्रदेश में नई व्यवस्था: सहकारी समितियां अब अधिकारियों से मुक्त, राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ

भोपाल. मध्य प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। इसमें किसानों के हित में कई काम किए जा रहे हैं। अब इनसे जुड़ी संस्थाओं के चुनाव कराने की तैयारी है। चुनाव न होने के कारण वर्तमान में समितियों के कामकाज को संचालित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। अब इन्हें मुक्त करके राजनीतिक नियुक्तियां की जाएंगी। सत्ता और संगठन की बैठकों में बनी सहमति दरअसल, पिछले दिनों राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सत्ता और संगठन की जो बैठकें हुईं, उनमें यह बात निकलकर सामने आई कि अब कार्यकर्ताओं को सहकारी और कृषि उपज मंडियों में समायोजित किया जाए। इसके लिए पहले मनोनयन होगा। इसकी तैयारी काफी समय से चल भी रही है लेकिन सहमति नहीं बनने के कारण मामला रुका हुआ था। प्रदेश में 4,345 सहकारी समितियों, 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और राज्य शीर्ष बैंक (अपेक्स बैंक) हैं। कानूनी पेचीदगी और प्रशासनिक बदलाव 2018 से इनके चुनाव अलग-अलग कारणों से नहीं हुए हैं। हाई कोर्ट बार-बार चुनाव कराने को लेकर निर्देश दे रहा है। सरकार ने अवमानना से बचने के लिए अधिनियम में संशोधन करके यह प्रविधान तो कर लिया कि विशेष परिस्थितियों में चुनाव आगे बढ़ाए जा सकते हैं लेकिन अब कार्यकर्ताओं को समायोजित करने की बात है। इससे पहले राजनीतिक नियुक्तियों के क्रम में नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त किए जा चुके हैं। अब सबसे बड़े क्षेत्र सहकारी समितियों की बारी है। सहकारिता नेटवर्क और चुनावी महत्व दरअसल, पंचायत के बाद प्रदेश में इनका ही बड़ा नेटवर्क है। समितियों से लगभग 65 लाख किसान जुड़े हैं। भले ही समितियों के चुनाव राजनीतिक आधार पर नहीं होते हैं मगर इनकी भूमिका पंचायत से लेकर विधानसभा-लोकसभा के चुनाव में महत्वपूर्ण रहती है। पार्टी के पक्ष में वातावरण बनाने का दायित्व इन्हीं का रहता है। कार्यकर्ताओं का मनोबल और चयन प्रक्रिया लंबे समय से चुनाव न होने के कारण सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं। कई बार संगठन स्तर पर नियुक्ति को लेकर बात भी हो चुकी है लेकिन यह किसी न किसी कारण से टलती रही लेकिन अब राजनीतिक व्यक्तियों को प्रशासक पद पर मनोनीत करने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि पहले प्राथमिक समितियों में मनोनयन होगा। इसके लिए जिला इकाइयों के साथ स्थानीय विधायकों से फीडबैक लिया जाएगा। प्रशासकों की देखरेख में कराए जाएंगे चुनाव सूत्रों का कहना है कि सहकारी समितियों के चुनाव प्रशासकों की देखरेख में कराए जाएंगे। ये ही सदस्यता सूची बनवाएंगे और फिर चुनाव कराएंगे। प्रशासक उसे ही मनोनीत किया जाएगा जो समिति का सदस्य हो और चुनाव लड़ने की पात्रता रखता हो। यानी डिफाल्टर न हो। किसी प्रकार का आपराधिक रिकार्ड न हो।  

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की कवायद: रांची में शिक्षक-छात्र उपस्थिति पर कड़ा रुख

रांची विद्यालयों की भूमि एवं भवनों पर हो रहे अतिक्रमण को गंभीर मुद्दा मानते हुए रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने जिला शिक्षा अधीक्षक को निर्देश दिया है कि संबंधित अंचल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर पर्याप्त पुलिस बल की मदद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। समाहरणालय सभागार में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षात्मक बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि विद्यालय परिसरों को अतिक्रमण मुक्त कराना प्राथमिकता में शामिल है और सभी अंचल अधिकारी इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करें। बैठक के दौरान राज्य स्तर से प्राप्त जिले की रैंकिंग की समीक्षा करते हुए शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। शिक्षक उपस्थिति पर सख्ती समीक्षा में पाया गया कि केवल 76 प्रतिशत शिक्षक ही ई-विद्या वाहिनी पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी शिक्षक प्रतिदिन अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज करें, अन्यथा वेतन निर्गत नहीं किया जाएगा। अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों से स्पष्टीकरण लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। छात्र उपस्थिति में सुधार के निर्देश विद्यालयों द्वारा केवल 54 प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति ई-विद्या वाहिनी में दर्ज की जा रही है। उपायुक्त ने इसे गंभीर मानते हुए सभी छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से दर्ज करने का निर्देश दिया। अनुपालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का वेतन स्थगित किया जाएगा। आधार पंजीकरण पर जोर सभी छात्रों का आधार पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए जन्म प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता को देखते हुए प्रखंड स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने को कहा गया। नए सत्र में नामांकन प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूर्ण करने तथा आधारभूत संरचना की कमी का आकलन कर प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि डीएमएफटी फंड से आवश्यक कार्य कराए जा सकें। FLN एवं इनोवेशन चैलेंज प्राथमिक विद्यालयों में फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिला इनोवेशन चैलेंज के लिए विद्यालयों को तैयार करने पर जोर दिया गया। किसी भी विद्यालय में गैस की कमी न हो, इसके लिए जिला शिक्षा अधीक्षक को जिला आपूर्ति पदाधिकारी के साथ समन्वय कर नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही गैस उठाव और एजेंसी रिपोर्ट का मिलान करने को कहा गया। लक्षित असाक्षर व्यक्तियों का आनलाइन नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा विभाग की सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जिले की शैक्षणिक गुणवत्ता और रैंकिंग सुधारने के लिए अत्यंत आवश्यक है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

बिहार की सियासत में हलचल: 14 अप्रैल को सीएम पर फैसला संभव, पटना पहुंचेंगे शिवराज सिंह चौहान

भोपाल. बिहार में सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। अब यह माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार से अगला सीएम होगा। इसकी कवायद बीजेपी ने शुरू कर दी है। इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। इस पर उनकी प्रतिक्रिया आई है कि वह 14 मार्च को बिहार जाएंगे। मैं ईमानदारी के साथ निभाऊंगा जिम्मेदारी बिहार के पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं भारतीय जनता पार्टी का एक समर्पित कार्यकर्ता हूं…। एक कार्यकर्ता के नाते हर जिम्मेदारी की पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ निभाना मेरा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुझे जो भी दायित्व सौंपेगी। उसे मैं पूर्ण निष्ठा, प्रतिबद्धता और पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाऊंगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं 14 अप्रैल को बिहार जाऊंगा। झारखंड के प्रभारी भी रह चुके हैं शिवराज सिंह चौहान शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के अनुभवी नेता हैं। वह मध्य प्रदेश में सबसे लंबे समय तक सीएम रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद वह केंद्रीय कैबिनेट में कृषि मंत्री हैं। सरकार के साथ-साथ वह संगठन में भी अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान इससे पहले झारखंड विधानसभा चुनाव में भी प्रभारी रही हैं। अब बिहार की जिम्मेदारी पार्टी ने एक बड़ा संदेश दिया है। शिवराज सिंह चौहान अभी पश्चिम बंगाल चुनाव में भी प्रचार कर रहे हैं। कौन हैं दावेदार बिहार में सीएम पद की रेस में अभी डेप्युटी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी सबसे आगे चल रहे हैं। हालांकि इस नाम से इतर कई अन्य नामों की अटकलें भी हैं। लेकिन बीजेपी हमेशा अपने फैसलों से चौंकाती रही है। शिवराज सिंह चौहान के पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के बाद यह तय है कि बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी। इसके बाद ही सीएम के नाम का फैसला होगा।  

अब खेला नहीं, विकास होगा—बंगाल पर योगी आदित्यनाथ का तीखा हमला

सोनामुखी (बांकुड़ा).  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में उतरे। उन्होंने कांग्रेस, वामपंथी दलों व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर कड़े प्रहार किए। सोनामुखी में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि तृणमूल के शासन में यहां बहुत तांडव हुआ है। हमारे कार्यकर्ता सुमन को गोली मार दी गई। स्वरूप घोष, पलाश घोष, उत्पल दास जैसे कार्यकर्ताओं के घर उजाड़ दिए गए। सुशोभन का हाथ काट दिया। तृणमूल की गुंडागर्दी के ऐसे अनगिनत उदाहरण भरे पड़े हैं। सीएम ने बंगालवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि दिल्ली में मोदी जी हैं, पश्चिम बंगाल में भी आप भाजपा सरकार लाइए, डबल इंजन सरकार दंगाइयों का इलाज कर देगी। तृणमूल व वामपंथी गुंडों का उपचार केवल भाजपा सरकार के पास है। सीएम योगी ने स्थानीय भाषा में संवाद स्थापित करते हुए कहा कि अब बंगाल में ‘खेला’ बंद और भाजपा की जीत से विकास शुरू होगा। उन्होंने मंच से भाजपा प्रत्याशियों सोनामुखी से दिबाकर घरामी, इंडास से निर्मल धारा व बरजोड़ा से बिलेश्वर सिंघा को जिताने की अपील की। बांग्लादेश में दलित हिंदू की हत्या पर ममता दीदी मौन सीएम योगी ने कहा कि कुछ दिन पहले बांग्लादेश में एक दलित हिंदू की निर्मम हत्या हुई। इसके खिलाफ भाजपा ने आंदोलन किया, लेकिन बंगाल की मुख्यमंत्री ममता दीदी मौन रहीं। भय था कि बोलने पर उनका मुस्लिम वोट न खिसक जाए। वोटबैंक के सौदागर बंगाल की डेमोग्रॉफी को बदलना चाहते हैं। कांग्रेस, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस को भावी पीढ़ी के साथ खिलवाड़ करने की छूट न दीजिए। ये लोग नवरात्रि आयोजन में व्यवधान पैदा करते हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। हम सब मिलकर बंगाल का पुराना वैभव लौटा सकते हैं। मैं इसी आह्वान के साथ आपके बीच आया हूं। परिवर्तन की राह पर चल पड़ा है बंगाल  सीएम योगी ने बंगाल की धरती पर राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रविंद्र नाथ ठाकुर व राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने जनचेतना को जागरूक कर हर भारतवासी के मन में स्वाधीनता की अलख जगाई। स्वाधीनता में अमर मंत्र बनकर वंदे मातरम ने भारत को एकता के सूत्र में जोड़ा। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर मैं विश्वास से कह रहा हूं कि बंगाल परिवर्तन की नई राह पर चल पड़ा है।  बंगाल की दुर्दशा को देखकर होता है दुख  मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल की दुर्दशा को देखकर दुख होता है। बंगाल भारत के अध्यात्म, संस्कृति, कला-शिक्षा की धरती है। इस धरती ने उच्चकोटि के आध्यात्मिक साधक दिए हैं। अपनी उद्यमिता, परिश्रम, कल-कारखानों, युवाओं की प्रतिभा, श्रमिकों के श्रम से बंगाल एक समय भारत की जीडीपी का बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराता था, लेकिन पहले कांग्रेस, फिर वामपंथ और 15 वर्ष से तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल को कंगाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।  बंगाल की धरती पर राष्ट्रनायकों का किया स्मरण  मुख्यमंत्री ने खुदीराम बोस को याद कर कहा कि देश की आजादी के लिए उन्होंने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उद्घोष किया था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। बंगाल ने स्वामी विवेकानंद जैसा संन्यासी दिया, जिन्होंने ‘गर्व से कहो, मैं हिंदू हूं’ का भाव जगाया। बंगाल रामकृष्ण परमहंस व भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद की धरती है, लेकिन भारत की संस्कृति की आत्मा और राष्ट्रवाद की धरती बंगाल को तृणमूल कांग्रेस ने तुष्टिकरण, लूट-खसोट, अराजकता की धरती बनाकर रख दिया।  जो हाल आज बंगाल का, 9 साल पहले वही हाल यूपी का था मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अराजकता, अव्यवस्था, गुंडागर्दी आज पश्चिम बंगाल में है, 9 वर्ष पहले वही स्थिति उत्तर प्रदेश में भी थी। वहां त्योहारों के पहले दंगे होते थे, महीनों कर्फ्यू रहता था। गुंडे-माफिया समानांतर सत्ता संचालन करते थे। 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर उत्तर प्रदेश में जनता-जनार्दन ने डबल इंजन सरकार बनाई तो आज यूपी में तुष्टिकरण नहीं, संतुष्टिकरण है। सरकार नौजवान, गरीब, महिला, किसान, श्रमिक समेत सभी वर्गों के सम्मान के लिए कार्य कर रही है। यूपी में नो कर्फ्यू-नो दंगा, वहां सब है चंगा। यूपी के सभी गुंडे-माफिया जहन्नुम की यात्रा पर चले गए। यूपी में सुरक्षा का अहसास है। यूपी भारत की इकॉनमी में ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। अयोध्या के रामजन्मभूमि आंदोलन में बंगाल से भी कारसेवक गए थे। डबल इंजन सरकार आई तो बुलेट स्पीड से भव्य राम मंदिर का निर्माण भी हो गया।  तृणमूल कांग्रेस सरकार में किसानों का शोषण सीएम योगी ने कहा कि बंगाल का अन्नदाता किसान भारत का पेट भरने वाला है, लेकिन दुख है कि उसे दाम नहीं मिल पा रहा। उत्तर प्रदेश में आलू किसान को 15-16 रुपये किलो का दाम मिल रहा है, जबकि यहां सिर्फ एक से डेढ़ रुपये। यहां किसान कर्ज लेने को मजबूर है, डिप्रेशन का शिकार है। टीएमसी सरकार बंगाल को फिर से उस त्रासदी की ओर ले जाने का कार्य कर रही है, जिसका उल्लेख आनंद मंठ के माध्यम से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने किया था। उस समय अकाल था, लेकिन आज सरकार द्वारा पाले गए गुंडे शोषण कर रहे हैं। शोषण, पलायन, बेरोजगारी के कारण किसान हताश-निराश होकर अन्याय-अत्याचार सहने को मजबूर हैं।  जहां भी है भाजपा सरकार, वहां हर वर्ग का सम्मान  सीएम योगी ने बंगाल के मतदाताओं से कहा कि जिस भी राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार आई है, वहां इंफ्रास्ट्रक्चर, नौकरी, रोजगार, बेटियों व व्यापारियों की सुरक्षा हुई है। हर किसी को सुरक्षा की गारंटी है। किसानों का सम्मान, गरीब के आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं। सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों का भी जिक्र किया। कहा कि बंगाल में सारी संभावनाएं हैं, बस मतदाताओं के समर्थन व आशीर्वाद की आवश्यकता है। 1905 में जब ब्रिटिशर द्वारा बंगाल विभाजन की साजिश रची गई थी, तब बंगाल ने आह्वान किया था कि हम विभाजित नहीं होंगे। उस समय बंगाल से स्वदेशी की हुंकार निकली थी और पूरे भारत को स्वाधीनता आंदोलन से जोड़ने का कार्य किया था।

मां की ममता की मार्मिक तस्वीर, ऊंटनी के शव से चिपका रहा मासूम ऊंट का बच्चा

 जैसलमेर इंसान हो या जानवर, मां की ममता का कोई विकल्प नहीं होता.  राजस्थान के जैसलमेर जिले के लाठी गांव में ममता की एक ऐसी ही मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं. यहां ट्रेन की चपेट में आने से एक ऊंटनी की मौत हो गई, लेकिन उसका बच्चा अपनी मृत मां को सोता समझ तीन दिनों तक उसके शव के पास बैठा लगातार रोता रहा. ट्रेन हादसे में गई मां की जान जानकारी के अनुसार, यह घटना कुछ दिन पहले घटित हुई थी , जिसमें रेलवे ट्रैक के पास चर रही एक ऊंटनी अचानक ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई. ऊंटनी के साथ उसका छोटा बच्चा भी था, जो इस हादसे में बाल-बाल बच गया. मां की मौत से अनजान मासूम बच्चा तीन दिनों तक भीषण गर्मी और भूख-प्यास के बीच शव के पास ही डटा रहा. मंजर देख ग्रामीणों की भर आईं आंखें  प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्चा तीन दिनों तक अपनी मां के शव के पास ही बैठा रहा. वह कभी अपनी मां को सिर से उठाने की कोशिश करता, तो कभी जोर-जोर से चिल्लाने लगता. तीन दिन बाद जब उधर से गुजर रहे किसान जमालदीन और रमेश कुमार की नजर वहां पड़ी, तो वे दुर्गंध के कारण मौके पर पहुंचे. वहां का मंजर देखकर वे भी भावुक हो उठे। उन्होंने देखा कि बच्चा लगातार अपनी मां के पास बैठा रो रहा है और उसे छोड़ने को तैयार नहीं है. आखिरी समय भी मां के शव को रहा निहारता दोनों ने तुरंत इस घटना की सूचना गांव में ग्रामीणों को दी. जिन्होंने जगदम्बा सेवा समिति ट्रस्ट के सचिव जुगल किशोर आसेरा को घटना की सूचना दी. सूचना मिलते ही भादरिया गौशाला के गोरक्षक गोपालसिंह भाटी और दीनेश सिंह देवड़ा मौके पर पहुंचे. काफी मशक्कत के बाद उन्होंने बच्चे को उसकी मां के शव से अलग कर ऊंटनी को दफनाने के लिए गाड़ी में डाल कर विदा किया. रेस्क्यू कर गौशाला भेजा गया बच्चे को भादरिया गौशाला लाया गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है. तीन दिनों से भूखे-प्यासे रहने के कारण वह काफी कमजोर हो गया है. गौशाला में उसे भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.

बुलडोजर की कार्रवाई: जेडीए ने अवैध कॉलोनियों और कब्जों पर कसा शिकंजा

जयपुर जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने शनिवार को अवैध निर्माण और कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. जेडीए के प्रवर्तन दस्ते ने करीब 60 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ा लिया. यह कार्रवाई जेडीए कमिश्नर सिद्धार्थ महाजन के निर्देशों पर हुई है. जेडीए ने साफ कर दिया कि अतिक्रमण के मामले में अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी. जेडीए की बुलडोजर एक्शन में अतिक्रमण करके कब्जाई गई सरकारी जमीन को खाली करवाया गया है. 60 करोड़ की सरकारी से हटवाया अतिक्रमण उप महानिरीक्षक पुलिस आनन्द शर्मा ने बताया कि आज (11 अप्रैल 2026) को प्रवर्तन शाखा ने जोन-14, 17 और 01 के इलाकें में कार्रवाई करते हुए तहसील चाकसू के ग्राम जयचंदपुरा में करीब 15 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमणों को हटाया गया. इन जमीनों पर 10-12 कच्चे-पक्के मकान, बाउण्ड्रीवाल, टीनशेड, कांटों की बाड़, झाड़ियां और तारबंदी कर कब्जा किया गया था. जिसे जेसीबी मशीन व मजदूरों की सहायता से हटवाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया. अतिक्रमण मुक्त करवाई गई इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 60 करोड़ रुपये है. जेडीए की यह कार्रवाई सिर्फ सरकारी जमीन पर किए अवैध कब्जे के खिलाफ नहीं रही. सांगानेर तहसील के दयालपुरा में करीब 03 बीघा कृषि भूमि पर बिना अनुमति कॉलोनी काटने वालों पर भी गाज गिरी है. कृषि भूमि पर बिना किसी भू-रूपांतरण के अवैध कॉलोनी बसाई जा रही थी. भू-माफियाओं ने यहाँ सड़कें बना दी थीं और सीमेंट ब्लॉक से बाउंड्रीवाल भी खींच दी थी. जेडीए के दस्ते ने मौके पर पहुंचकर इन सड़कों को उखाड़ दिया और बाउंड्रीवाल गिराकर कॉलोनी बसाने के प्रयास को शुरुआती दौर में ही नाकाम कर दिया. बंद रास्ते को जेडीए ने खुलवाया शिवदासपुरा क्षेत्र के ग्राम पदमपुरा स्थित गैर अनुमोदित योजना “श्रीराम विहार” के भूखण्ड संख्या 62 पर किए गए अवैध निर्माण को भी जेसीबी मशीन की सहायता से ध्वस्त किया गया. जोन-17 के सरना चौड़ गांव में भी जेडीए ने कार्रवाई की. यहां गैर मुमकिन आम रास्ते की सरकारी जमीन पर करीब 400 मीटर लंबाई में मिट्टी की डोल बनाकर और तारबंदी कर रास्ता रोका गया था. जेडीए ने इसे पूरी तरह साफ कर रास्ता फिर से खोल दिया है. वहीं, जोन-01 में टोंक रोड के पास अवैध रूप से बनाए गए छज्जे के लिए समझाइश करने पर एक भूखंड स्वामी ने खुद हटा लिया. पुलिस उप महानिरीक्षक आनंद शर्मा ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन शिल्पा चौधरी की देखरेख में हुई. जेडीए ने चेतावनी दी है कि शहर में कहीं भी सरकारी जमीन पर कब्जा या बिना अनुमति अवैध निर्माण किया गया, तो प्रशासन इसी तरह सख्त कदम उठाता रहेगा.