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पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख, प्रधानमंत्री करेंगे 79 हजार करोड़ की रिफाइनरी का लोकार्पण

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह दौरा पिछले दो महीनों में उनका दूसरा राजस्थान दौरा होगा। इससे पहले वे 28 फरवरी 2026 को अजमेर आए थे, जहां उन्होंने हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। मारवाड़ सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए पचपदरा रिफाइनरी का खास महत्व है। इस परियोजना से बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही पहले चरण के ट्रायल रन की तैयारी शुरू कर दी गई थी और अब जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने किया था, उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी और लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में शर्तों में बदलाव के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका पुनः शुभारंभ किया, तब लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई। समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और अब यह करीब 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।   मुझे यह जानकारी देते हुए अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है कि विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता, हम सभी के मार्गदर्शक, यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी आगामी 21 अप्रैल 2026 को पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण हेतु वीरधरा राजस्थान पधार रहे हैं। रिफाइनरी के बारे में रिफाइनरी की सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है, जबकि 2 मिलियन टन का पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी होगा। इसमें करीब 7.5 मिलियन टन क्रूड ऑयल अरब देशों से आयात किया जाएगा और शेष 1.5 मिलियन टन तेल राजस्थान में उत्पादित होगा। कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है। शुरुआत (2005-2013) वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई। राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017) वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया।    

जंगल माफिया और अफसरों की मिलीभगत पर सरकार सख्त, पंचकूला के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पर गिरेगी गाज

पंचकूला पंचकूला के संरक्षित वन क्षेत्र (आसरेवाली जंगल) में खैर के 1148 पेड़ कटने व उनकी तस्करी के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। विभाग की प्राथमिक जांच में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आईएफएस अधिकारी बी निवेदिता, पंचकूला के रेंज अधिकारी इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह और जिला वन्य जीव अधिकारी आरपी दांगी की लापरवाही व मिलीभगत सामने आई है। पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के एसीएस ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को इन तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश मिलने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पंचकूला के पुलिस कमिश्नर से तीनों पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है। उन्होंने प्राथमिकी में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा लगाने व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इस मामले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी विभागीय रिपोर्ट सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि तीनों अधिकारियों की लापरवाही से कुल ⁠1148 पेड़ काटे गए हैं जिनमें 99 फीसदी खैर के है। कटे पेड़ों के ठूंठ को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध कटाई बिना अंदरखाने मिलीभगत के नहीं हो सकती है। पत्र में तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी है। इस मामले की जांच के लिए बनाई गई छह सदस्यीय एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है। आरोप सही साबित होने पर पहले से दर्ज एफआईआर में तीनों का नाम जोड़ा जा सकता है। तीनों की भूमिका बी. निवेदिता अंबाला कमिश्नरी और रोहतक कमिश्नरी की चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन हैं। रोहतक सर्कल में सात और अंबाला सर्कल के पांच जिलों में स्थित वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, चिड़ियाघर और कलेसर नेशनल पार्क की निगरानी की जिम्मेदारी इनके पास ही है। रिपोर्ट में लिखा कि इनकी सुपरविजन में लापरवाही हुई है जिसकी वजह से जंगल माफिया को जमकर पेड़ काटने से रोका नहीं जा सका। सुरजीत सिंह वाइल्डलाइफ रेंज अधिकारी होने के नाते पंचकूला के सभी संरक्षित जंगल क्षेत्र की सुरक्षा व वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी है। वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुए। आरपी दांगी बतौर जिला वन्य जीव अधिकारी के अधीन पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कैथल के जंगल व चिड़ियाघर आते हैं। उनको हर माह में अपने कार्यक्षेत्र के अधीन आने वाले एक वन क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजनी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन्होंने भी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई।  

नीति में बदलाव: बिहार के मॉडल स्कूलों में अब उर्दू पढ़ाई भी होगी शुरू

पटना. बिहार के मॉडल स्कूलों में अब उर्दू की भी होगी पढ़ाई, सरकार ने बदला अपना फैसला; BSUTA ने जताई खुशी सीतामढ़ी. बिहार के 534 मॉडल स्कूलों में विभिन्न विषयों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में उर्दू विषय को शामिल कर लिया गया है। इससे उर्दू के शिक्षकों में जहां खुशी देखी जा रही है। वहीं, मॉडल स्कूलों में उर्दू की पढ़ाई भी सुनिश्चित हो सकेगी। इसको लेकर लेकर कुछ उर्दू शिक्षक संघों ने भी आवाज उठाई थी। इसके बाद यह मामला सरकार के संज्ञान में आया और इस दिशा में पहल की गई। भाषा को मिला न्याय: कमर बिस्बाही  बिहार स्टेट उर्दू टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क़मर मिस्बाही ने इसके लिए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को धन्यवाद दिया है। उन्होंने राज्य भर के मॉडल स्कूलों में ट्रांसफर होने के इच्छुक उर्दू शिक्षकों से जल्द से जल्द ई-शिक्षा पोर्टल पर ऑनलाइन फार्म भरने का आग्रह किया है, ताकि उनकी उम्मीदवारी पक्की हो सके। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा को मिला न्याय मिल सकेगा। मॉडल स्कूलों के लिए शिक्षकों के रूप में उच्च शिक्षित और ट्रेंड शिक्षकों के चयन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे, लेकिन इसमें उर्दू विषय के लिए कोई पद आवंटित नहीं किया गया था।

ड्रग्स ने ली 20 जिंदगियां: पंजाब में मातम, एक ही परिवार के चार भाई भी शिकार

कपूरथला. सुल्तानपुर लोधी के मोहल्ला पंडोरी की एक मां के चार बेटों को नशे ने लील लिया और पांचवां भी जिंदगी और-मौत के बीच झूल रहा है। एक-एक करके मां-बाप की आंखों के सामने बेटे काल के गाल में समाते गए, लेकिन इस मां की चीखे अंत तक झकझोर रही हैं। केवल यही नहीं, माेहल्ले में नशे ने और भी युवाओं को मौत की नींद सुलाया है। अब तो मोहल्ले के लोग इतने दुखी हैं कि इस नशे के कोहड़ से बचाने कोई तो मदद को आगे आए। रविवार को मोहल्ले की महिलाओं के पिट स्यापे और रो-रोकर सुनाई आपबीती की गूंज सीएम दरबार तक पहुंची गई है। मीडिया के जरिये मामला तूल पकड़ने के बाद अब जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। मोहल्ले में सुबह से सर्च आपरेशन चल रहा है। बाबा नानक की नगरी में थाने की दीवार से सटे मोहल्ला पंडोरी की दर्दनाक तस्वीरे नशे के नाश के दावों पर जहां गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं माताओं की चीखें और उजड़े परिवारों की कहानियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि नशे की जड़े बेहद गहरी हैं। अब लोगों का गुस्सा ऐसा फूटा कि उनको दर्द बयां करने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा। सरेआम पुड़ियां पकड़ा जाते हैं तस्कर मोहल्ले की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि नशे का कारोबार न केवल खुलेआम जारी है, बल्कि अब यह पुलिस थानों के आसपास तक पहुंच चुका है। उनका कहना है कि तस्कर मुंह ढककर मोटरसाइकिलों पर आते हैं और खुलेआम ‘चिट्टे’ की पुड़िया देकर फरार हो जाते हैं। सबसे दिल दहला देने वाली कहानी एक मां की है, जिसने नशे के कारण अपने चार बेटों को खो दिया है। उसकी आंखों में आंसू और आवाज में दर्द साफ झलकता है। चार बेटे को खो चुकी मां रविवार के प्रदर्शन में शामिल इसी मोहल्ले के दंपति जोगिंदर पाल सिंह और उनकी पत्नी मनजीत कौर ने कहा कि नशे की वजह से मैं अपने चार बेटों जसविंदर सिंह, बलविंदर सिंह, मिथुन और रवि खो चुकी हूं। इनमें 2 शादीशुदा और 2 कुंवारे थे। अब 32 साल का 5वां बेटा सोनू भी बिस्तर पर पड़ा है। हमें डर है कि अब इसकी भी मौत हो जाएगी। रुद्धन भरे स्वर में उसने बताया कि “मैं पांच बेटों की मां हूं… चार को नशे ने मुझसे छीन लिया… और पांचवां भी बिस्तर पर पड़ा है… डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया है।” यह दर्द सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है। मोहल्ले की कई महिलाओं ने सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई हैं। किसी ने दो बेटों को खोया, किसी ने तीन तो किसी का इकलौता सहारा भी नशे की भेंट चढ़ चुका है। प्रदर्शन में शामिल दुखी महिलाओं के गंभीर आरोप मोहल्ले की महिलाओं ने प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इलाके में नशा आज भी सरेआम बिक रहा है। तस्कर बेखौफ होकर पुलिस स्टेशन के आसपास ही नशा बेच रहे हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे “नशे के खिलाफ युद्ध” का जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। एक अन्य बेबस मां ने अपने छोटे-छोटे पोतों की ओर इशारा करते हुए प्रशासन से गुहार लगाई, “हमारे बेटे तो चले गए, अब कम से कम इन मासूमों को बचा लो।” महिलाओं का कहना है कि जब ‘बाबा नानक की नगरी’ में ही लोग सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस थानों के नजदीक नशा बिक रहा है, तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है। एक ही गली में 20 से ज्यादा युवा गंवा चुके जान मोहल्ला पंडोरी की एक गली में पिछले कुछ सालों में 20 से ज्यादा युवा नशे की भेंट चढ़ चुके हैं। लेकिन नशे पर लगाम लगने की बजाय यह लगातार फल-फूल रहा है। एएसपी सुल्तानपुर लोधी ने क्या कहा? एएसपी सुल्तानपुर लोधी धीरेंद्र वर्मा ने कहा कि मोहल्ला पंडोरी में जिस महिला द्वारा अपने चार बेटों की मौत होने का दावा किया जा रहा है, उसने कभी इसकी रिपोर्ट थाने में नहीं दी। उसके सबसे बड़े बेटे की मौत आठ साल पहले नशे से हुई थी, उससे छोटे की मौत सात साल पहले जलने, तीसरे की पांच साल पहले जेल और चौथे बेटे की मौत तीन साल पहले अत्याधिक शराब के सेवन से हुई है। महिला का जो पांचवां बेटा भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। करवाया जा रहा इलाज जिला प्रशासन के निर्देश पर पांचवें बेटे का इलाज करवाया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो उसे नशा मुक्ति केंद्र भी भेजा जाएगा। मोहल्ले का सर्वे करवाकर नशे में लिप्त लोगों को नशामुक्ति केंद्र भेज पुलिस उनका ठीक होने तक उपचार करवाएगी। मोहल्ले में नशा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस लगातार मोहल्ले में छापेमारी करती रहेगी।

एग्जाम में गड़बड़ी पर कार्रवाई: दुर्ग में इंग्लिश पेपर रद्द, नई तारीख घोषित

दुर्ग. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बीकॉम फाइनल इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र को लेकर उठे विवाद का पटाक्षेप कर लिया गया है। वार्षिक परीक्षा 2025-26 बीकॉम भाग 3 की 28 मार्च को हुई परीक्षा निरस्त कर दी गई है। इस आशय की अधिसूचना विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा 7 अप्रैल को जारी किया गया है। यह परीक्षा फिर से आयोजित की जाएगी। 30 अप्रैल को यह परीक्षा दोबारा ली जाएगी। दरअसल, इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र के पैटर्न को लेकर विवाद उठा था। इससे प्रभावित छात्र छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में खूब प्रदर्शन भी किया था। छात्रों को प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मामले को परीक्षा समिति में रखे जाने का आश्वासन दिया था। समिति की अनुशंसा के बाद प्रबंधन द्वारा दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रश्न पत्र को लेकर स्कूल शिक्षा तथा उच्च शिक्षा विभाग के छात्र- छात्राओं को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है। इन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। एक ओर जहां सीजी 12वीं बोर्ड हिंदी विषय के प्रश्न पत्र दोबारा दिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। दरअसल यह प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी गई। वहीं बीकॉम फाइनल के छात्र इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र दोबारा देंगे। इसके बारे में छात्र-छात्राओं ने कहा कि कई प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए प्रश्न पत्र सिलेबस के अनुसार नहीं था। यही वजह सामने आया कि ज्यादातर छात्र-छात्राओं के पेपर अच्छे नहीं बने, उनमें आक्रोश पनप गया। ये छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर में प्रश्न पत्र की कमियों को लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी किए। बहरहाल बीकॉम फाइनल इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र को निरस्त कर छात्र हित में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एक बड़ा कदम उठाया है। सातवीं के प्रश्नपत्र में प्रश्न अधूरा, पूर्णांक भी गायब भिलाई नगर. स्कूली परीक्षा में गड़बड़ियों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को सातवीं गणित के प्रश्नपत्र में फिर गड़बड़ी मिली। वहीं कुछ केन्द्रों में सातवीं के प्रश्नपत्र के पैकेट में कक्षा छठवीं का प्रश्नपत्र भी निकलने की खबर है। जानकारी के अनुसार, कुछ परीक्षा केन्द्रों में लिफाफा खोलने पर गणित के प्रश्नपत्र की कटिंग कुछ इस तरह मिली कि जिससे एक तरफ प्रश्नपत्र अधूरा था तो दूसरी ओर पूर्णांक का पता नहीं चल रहा था। जहां पूर्णांक लिखा होता है, वह हिस्सा कट गया था। इससे काफी परेशानी हुई। शिक्षक और बच्चे दोनों परेशान हुए। अधूरे प्रश्नपत्रों को किसी तरह पूरा लिखवाया गया। इसी तरह जहां पूर्णांक कट गया था, वहां पूर्णांक लिखवाया गया। 

पंजाब में लश्कर का बड़ा आतंकी गिरफ्तार, 16 साल पहले की थी घुसपैठ, ऐसे बिछाया था जाल

मालेरकोटला जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक बड़े अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से कई राज्यों में चलाए गए इस व्यापक अभियान में पुलिस ने लश्कर के एक शीर्ष कमांडर सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दो पाकिस्तानी नागरिक और उनके तीन स्थानीय मददगार शामिल हैं। ऑपरेशन और गिरफ्तारी यह खुफिया ऑपरेशन 15 दिनों से अधिक समय तक चला और इसमें केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली गई। जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की एक टीम ने 10 दिन से अधिक समय पहले पंजाब के मालेरकोटला से लश्कर कमांडर अबू हुरैरा और उसके सहयोगी उस्मान को गिरफ्तार किया। पुलिस ह्यूमन इंटेलिजेंस और तकनीकी निगरानी के जरिए पंजाब में स्थित इस आतंकी ठिकाने तक पहुंचने में कामयाब रही। इन दोनों पाकिस्तानी नागरिकों के अलावा, कश्मीर घाटी से तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये तीनों श्रीनगर शहर के रहने वाले हैं और इन पर हुरैरा और उसके सहयोगी की मदद करने का आरोप है। कौन है अबू हुरैरा? इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है कि अबू हुरैरा लश्कर-ए-तैयबा का एक शीर्ष कमांडर है। उसने करीब 16 साल पहले 2010 में कश्मीर घाटी में घुसपैठ की थी। कई वर्षों तक घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के बाद, वह सुरक्षाबलों के रडार से गायब हो गया। इसके बाद उसने पंजाब में अपना नया ठिकाना बनाया, जहां वह अपनी असली पहचान छिपाकर (अंडरकवर) रह रहा था। कई राज्यों में छापेमारी इन मुख्य गिरफ्तारियों के बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस की SOG टीमों ने इस नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए कई राज्यों में छापेमारी की। पुलिस ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के कई ठिकानों पर दबिश दी और पूछताछ के लिए कई लोगों को हिरासत में भी लिया। मॉड्यूल का काम और नेटवर्क इस मॉड्यूल ने 40 से अधिक आतंकियों की मदद की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह अंतर-राज्यीय मॉड्यूल पाकिस्तानी आतंकवादियों को भारत में रिसीव करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाने का काम करता था। सूत्रों के मुताबिक, इस ग्रुप ने अब तक 40 से अधिक आतंकवादियों की घुसपैठ और ट्रांजिट (आवाजाही) को हैंडल किया था और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने में यह मॉड्यूल बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। फर्जी दस्तावेजों की जांच पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या इस मॉड्यूल के किसी सदस्य ने फर्जी भारतीय यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट आदि) बनवाए थे और क्या कोई वैध वीजा पर देश से बाहर भी गया था। पुलिस फिलहाल इस आतंकी नेटवर्क के आगे और पीछे के कनेक्शन खंगाल रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

तापमान में 12 डिग्री की भारी गिरावट, बारिश और कुप्रबंधन ने बढ़ाई अन्नदाता की चिंता

 सोनीपत हरियाणा में मंगलवार रात से मौसम ने एक बार फिर करवट ली। बीते 24 घंटों में प्रदेश के 20 जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हुई। इससे अधिकतम तापमान में 12 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। पूरे प्रदेश में दिन का तापमान 24 से 29 डिग्री के बीच रहा। बारिश के कारण गर्मी से तो राहत मिली लेकिन किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। नूंह व सोनीपत में किसानों को नहीं मिला तिरपाल मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद मंडियों में फसल प्रबंधन के उचित प्रबंध नहीं किए गए। कहीं तिरपाल कम पड़ गईं तो कहीं प्रबंध ही नहीं किया गया। नतीजा हजारों क्विंटल गेहूं व बोरियां भीग गईं। अकेले पानीपत में 20 हजार क्विंटल गेहूं भीग गई। इससे प्रदेश की अधिकतर मंडियों में सरकारी और निजी खरीद भी ठप रही। पूरा दिन किसान अपने स्तर पर मंडियों में लाई गई फसल को बचाते नजर आए। नूंह व सोनीपत में किसानों को तिरपाल ही नहीं मिला। पानीपत अनाज मंडी में बारिश में भीगा गेहूं – फोटो : संवाद रेवाड़ी में खराब मौसम के कारण मंडी की बंद वहीं, झज्जर में हजारों क्विंटल गेहूं भीगने के बाद बुलडोजर की मदद से उसे शेड के नीचे करने का प्रयास किया गया। रेवाड़ी में तो खराब मौसम के कारण मंडी ही बंद कर दी गई। हिसार व भिवानी में जिला मुख्यालय की मंडी में फसल को तिरपाल से ढका पर तेज हवा के कारण फसल भीग गई। करनाल में भी शेड के बाहर पड़े गेहूं को किसान तिरपाल से ढकते नजर आए। अंबाला में केवल साहा अनाज मंडी में थोड़ा गेहूं भीगा है। हालांकि कैथल, यमुनानगर व फतेहाबाद में बचाव रहा। किसानों के चेहरे पर चिंता मंडियों में उचित प्रबंध नहीं होने के कारण किसानों के चेहरे पर चिंता और बेबसी साफ झलकी। पलवल की मंडी में पहुंचे किसान रघुवीर ने बताया कि सरकार ने 12 प्रतिशत नमी का मानक तय किया है लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण फसल ठीक से सूख ही नहीं पा रही। पहले ओलावृष्टि ने फसल को नुकसान पहुंचाया। अब बारिश से हालत और खराब हो गई है। फसल मानकों पर खरी नहीं उतर रही तो खरीद कैसे होगी। इस बीच खेतों में गेहूं कटान व थ्रेसिंग का कार्य रुक गया है। फसल भीगने के कारण नमी की मात्रा बढ़ने की पूरी संभावना है। सिरसा, फरीदाबाद व हांसी में नहीं बरसे बादल अंबाला, पंचकूला, हिसार, महेंद्रगढ़, रोहतक, कुरुक्षेत्र भिवानी, जींद, रेवाड़ी, गुरुग्राम, करनाल, पलवल, नूंह, पानीपत, झज्जर, सोनीपत, चरखी-दादरी, कैथल, यमुनानगर, फतेहाबाद में बारिश हुई है। हालांकि सभी जिलों में दिनभर बादल छाए रहे। फरीदाबाद, हांसी व सिरसा में बारिश नहीं हुई। तापमान में एक दिन में इतनी गिरावट से लोगों को सर्दी महसूस हुई। कैथल में गेहूं खरीद की रफ्तार सुस्त वहीं, हरियाणा के कैथल जिले में करीब 17,500 मीट्रिक टन गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। फसल को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल ही सहारा है। दरअसल, एक ओर जहां गेहूं की आवक तेज हो गई है, वहीं खरीद की सुस्त रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के 42 मंडी केंद्रों पर करीब 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन अब तक केवल 4,500 मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। वहीं, बारिश के बाद किसानों की परेशानी बढ़ गई है। आज भी पूरे प्रदेश में बरसेंगे बादल मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि संपूर्ण प्रदेश में तेज हवा और बूंदाबांदी हुई है। कुछ स्थानों पर मामूली ओलावृष्टि की गतिविधियों को भी दर्ज किया गया। पूर्वी और उत्तरी जिलों में 20-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा ने मौसम को बदला। बुधवार को भी तेज हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना है। गुरुवार को उत्तरी जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। 11 अप्रैल को एक नया कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से धीरे-धीरे संपूर्ण इलाके में तापमान में एक बार फिर से बढ़ोतरी की संभावना बन रही है।  

परसदा में सरकारी जमीन पर फ्लर्टिंग की परंपरा हुई तेज

बिलासपुर   प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दोनों शहर से लगे ग्राम पंचायत परसदा में इन दिनों भूमाफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग किए जाने का मामला सामने आ रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। कई लोगों ने बताया किआरोप है ग्राम परसदा पटवारी हल्का क्रमांक 47र. म.पेंडारी के खसरा क्रमांक  1।  262/2/10 ,2।  258/3 3।  258/11,4।  257/2 5।  329/16,6।  330/2 7।  333/3,8।  321/5/1 9।  336/1/2,10।  335/1/4 11।  249/8 अलग-अलग खसरों को जोड़कर योजनाबद्ध तरीके से प्लॉट काटे जा रहे हैं, वहीं कई स्थानों पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे भी प्लाटिंग के रूप में बेचा जा रहा है। इस गंभीर मामले ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी पर जमीन कब्जा स्थानीय लोगों के मुताबिक, भूमाफिया पहले कृषि भूमि को अपने कब्जे में लेते हैं, फिर बिना किसी वैधानिक अनुमति के उसे छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर देते हैं। इसके लिए न तो भूमि का डायवर्शन कराया जाता है, न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसी) की अनुमति ली जाती है और न ही RERA के तहत पंजीयन कराया जाता है। इसके बावजूद खुलेआम प्लॉटों की बिक्री जारी है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस अवैध प्लाटिंग के लिए सरकारी जमीन तक को नहीं छोड़ा जा रहा। आरोप है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर उसे भी प्लॉटिंग में शामिल किया जा रहा है, जिससे शासन को सीधे तौर पर राजस्व की हानि हो रही है। अलग-अलग खसरों को मिलाकर एक कॉलोनी का स्वरूप तैयार किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को भ्रमित कर उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है  कि इन अवैध कॉलोनियों में न तो बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही भविष्य की कोई कानूनी सुरक्षा। सड़क, नाली, पानी, बिजली जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह से नदारद हैं, जिससे यहां प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यवाही कब प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल इस पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे भूमाफियाओं के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं। जनता की मांग – सख्त कार्रवाई हो ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों ने शासन से मांग की है कि परसदा में चल रहे इस अवैध प्लाटिंग के खेल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले और अवैध प्लाटिंग करने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। राजस्व की चोरी यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह अवैध कारोबार और भी फैल सकता है, जिससे शासन को भारी नुकसान और आम जनता को धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब और कितनी सख्ती से कदम उठाता है।

धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे जवाद अहमद सिद्दीकी, ईडी ने बैंक बैलेंस और जमीनें की जब्त

फरीदाबाद  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत फरीदाबाद स्थित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके मैनेजिंग ट्रस्टी जवाद अहमद सिद्दीकी की कुल 39.45 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इस कुर्की में शामिल संपत्तियों में जवाद अहमद सिद्दीकी का दिल्ली के जामिया नगर, ओखला इलाके में स्थित आवासीय परिसर, फरीदाबाद के धौज गांव में अल-फलाह विश्वविद्यालय के पास स्थित कृषि भूमि, साथ ही ट्रस्ट और जवाद सिद्दीकी की डीमैट अकाउंट्स, बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। तीन एफआईआर पर आधारित है जांच ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की तीन एफआईआर पर आधारित है। इनमें दिल्ली क्राइम ब्रांच की दो एफआईआर (संख्या 337/2025 और 338/2025, दोनों 13 नवंबर 2025 को दर्ज) और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम पुलिस स्टेशन की एफआईआर संख्या 0021/2026 (10 जनवरी 2026 को दर्ज) शामिल हैं। इन एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध माने जाते हैं। क्या है आरोप? आरोप है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय ने अपनी समाप्त हो चुकी एनएएसी 'ए' ग्रेड मान्यता को गलत तरीके से वैध बताकर छात्रों और अभिभावकों को धोखा दिया। साथ ही ऐसी यूजीसी धारा 12बी मान्यता का दावा किया जो कभी मिली ही नहीं थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय के मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से अनुमोदन लेने के लिए कागजों पर दिखाई जाने वाली फर्जी फैकल्टी और नकली मरीजों का इस्तेमाल किया। 'अपराध से अर्जित आय' कमाई ईडी की जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट और विश्वविद्यालय ने वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक इन गलत तरीकों से कुल 493.24 करोड़ रुपए की 'अपराध से अर्जित आय' कमाई। इस पैसे को उन कंपनियों में भेजा गया जिन पर जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके परिवार का नियंत्रण था। इनमें करकुन कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स, अमला एंटरप्राइजेज एलएलपी और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाएं शामिल हैं। बाद में यह राशि विदेश भी भेज दी गई। जवाद अहमद सिद्दीकी अरेस्ट इससे पहले 16 जनवरी 2026 को ईडी ने फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय कैंपस की जमीन और इमारतों को 144.09 करोड़ रुपए में कुर्क किया था। ईडी ने 16 जनवरी 2026 को ही विशेष पीएमएलए अदालत, साकेत, दिल्ली में जवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दायर की है। जवाद अहमद सिद्दीकी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी का कहना है कि ये सभी कुर्कियां अपराध से अर्जित आय की जांच का हिस्सा हैं। जांच अभी भी जारी है और आगे और संपत्तियों तथा लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।

कानपुर: टाइपिंग में गड़बड़ी पर तीन बाबुओं का डिमोशन, क्लर्क से चपरासी बना दिया गया

कानपुर  कानपुर कलेक्ट्रेट से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी दफ्तरों में कामकाज की पोल खोल दी है. यहां तीन जूनियर क्लर्क (बाबू) का इसलिए डिमोशन कर दिया गया, क्योंकि वे तय मानक के अनुसार टाइपिंग नहीं कर सके. सरकारी नियमों के मुताबिक जूनियर क्लर्क के पद पर तैनात कर्मचारी को एक मिनट में कम से कम 25 शब्द टाइप करना आना चाहिए. यह उनकी बुनियादी कार्यकुशलता का हिस्सा है. कलेक्ट्रेट में तैनात तीन कर्मचारी प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव दो बार हुई इस परीक्षा में पास नहीं हो पाए.  मानक को पूरा नहीं कर सके।  साल 2024 में जब टाइपिंग परीक्षा हुई, तब ये तीनों कर्मचारी निर्धारित गति हासिल नहीं कर पाए. प्रशासन ने उस समय उन्हें सीधी सजा देने के बजाय सुधार का मौका दिया. कार्रवाई के तौर पर उनकी सैलरी इंक्रीमेंट रोक दिया गया था और उम्मीद जताई गई कि अगली बार वे अपनी कमी दूर कर लेंगे।  दूसरी बार भी नहीं बदली स्थिति इसके बाद वर्ष 2025 में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई. यह उनके लिए निर्णायक मौका था. लेकिन इस बार भी नतीजा वही रहा. तीनों कर्मचारी एक मिनट में 25 शब्द टाइप करने की अनिवार्य गति तक नहीं पहुंच सके. लगातार दूसरी बार असफल रहने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने पूरे मामले की समीक्षा के बाद सख्त फैसला लिया. डीएम कैंप कार्यालय में तैनात प्रेमनाथ यादव और कलेक्ट्रेट में कार्यरत  अमित कुमार यादव व नेहा श्रीवास्तव को कनिष्ठ लिपिक के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी बना दिया गया. यह आदेश लागू होते ही तीनों कर्मचारियों का पद घटा दिया गया।  मृतक आश्रित कोटे से मिली थी नौकरी इन तीनों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई थी. यानी परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उन्हें नौकरी दी गई थी. ऐसे मामलों में सहानुभूति जरूर रहती है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी होता है कि कर्मचारी अपने काम की न्यूनतम योग्यता पूरी करें. नियम के अनुसार, नियुक्ति के एक साल के भीतर टाइपिंग परीक्षा पास करना अनिवार्य था, लेकिन यह शर्त पूरी नहीं हो सकी।  प्रशासन का स्पष्ट रुख प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों के तहत की गई है. अगर कोई कर्मचारी अपने पद की बुनियादी जिम्मेदारी ही पूरी नहीं कर पाता, तो कामकाज प्रभावित होता है. कलेक्ट्रेट जैसे कार्यालयों में फाइलों का काम, नोटिंग और दस्तावेज तैयार करना टाइपिंग पर ही निर्भर करता है. ऐसे में दक्षता की कमी सीधे काम पर असर डालती है. इसी वजह से यह सख्त कदम उठाया गया।  पूरे विभाग में गया संदेश इस कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट और अन्य विभागों में भी हलचल है. कर्मचारियों के बीच यह चर्चा है कि अब कामकाज को लेकर सख्ती बढ़ सकती है. कई लोग इसे जरूरी कदम मान रहे हैं, क्योंकि इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी. वहीं कुछ का कहना है कि कर्मचारियों को और समय या प्रशिक्षण दिया जा सकता था।