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किसानों के लिए खुशखबरी, ₹2275 प्रति क्विंटल मिलेगा गेहूं का दाम, पंजाब में 1 अप्रैल से शुरू होगी खरीद

चंडीगढ़। पंजाब में गेहूं के सीजन को लेकर मान सरकार ने कमर कस ली है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि कल, यानी 1 अप्रैल से पूरे राज्य में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है। सरकार ने इस सीजन के लिए सभी प्रबंध मुकम्मल होने का दावा किया है। मंत्री कटारूचक्क ने बताया कि इस बार पंजाब में 34 लाख 90 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई हुई है। मंडियों में करीब 7 लाख से ज्यादा किसानों के पहुंचने की उम्मीद है। खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कुल 1,897 स्थायी मंडियां स्थापित की गई हैं। इसके अलावा कुछ अस्थायी मंडियां भी बनाई गई हैं ताकि किसानों को दूर न जाना पड़े। MSP में 150 की बढ़ोतरी, CCL लिमिट हुई प्राप्त इस बार केंद्र सरकार की ओर से गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,275 प्रति क्विंटल तय किया गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 150 प्रति क्विंटल अधिक है। मंत्री ने जानकारी दी कि खरीद के भुगतान के लिए 30,773 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट प्राप्त हो चुकी है, जिससे किसानों को समय पर अदायगी सुनिश्चित की जाएगी। सीमावर्ती इलाकों में विशेष चौकसी दूसरे राज्यों से अवैध रूप से गेहूं लाकर पंजाब की मंडियों में खपाने की कोशिशों को रोकने के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर विशेष नाकेबंदी की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अवैध तरीके से बाहरी राज्य का गेहूं लाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य पंजाब के किसानों के लिए आवंटित फंड का लाभ केवल यहीं के किसानों तक पहुंचाना है।  

सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत से बारनवापारा की हरियाली तक, सिक्किम के खिलाड़ियों ने लिया अनूठा अनुभव

रायपुर सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत से बारनवापारा की हरियाली तक, सिक्किम के खिलाड़ियों ने लिया अनूठा अनुभव खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के रंग में पूरा छत्तीसगढ़ सराबोर नजर आ रहा है। खेलों के इस महाकुंभ के बीच राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता से देशभर से आए खिलाड़ियों को आकर्षित कर रहा है। इसी कड़ी में सिक्किम से आए फुटबॉल खिलाड़ियों के दल ने आज ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का भ्रमण किया। खिलाड़ियों ने यहां प्राचीन मंदिरों, पुरातात्विक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों को करीब से देखा और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास से रूबरू हुए। सिरपुर की स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व ने खिलाड़ियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इसके पश्चात खिलाड़ियों ने बारनवापारा अभयारण्य की हरियाली के बीच प्रकृति का सुकून महसूस किया। घने जंगल, स्वच्छ वातावरण और वन्यजीवों की मौजूदगी ने इस अनुभव को और भी खास बना दिया। दिनभर की यात्रा के दौरान खिलाड़ियों ने हरेली इको रिसॉर्ट में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का आनंद लिया। साथ ही बैंबू राफ्टिंग और जंगल से जुड़े रोमांचक गतिविधियों में भाग लेकर दिन को यादगार बना दिया। छत्तीसगढ़ की आत्मीय मेहमाननवाज़ी ने खिलाड़ियों का दिल जीत लिया। सभी खिलाड़ियों ने इस सुंदर और अविस्मरणीय अनुभव के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।

नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

नामकुम में नशा तस्करों पर स्ट्राइक, बोलेरो के साथ पकड़ा गया मादक पदार्थों का जखीरा, पुलिस की बड़ी कामयाबी

रांची झारखंड की राजधानी रांची में नशे के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. नामकुम थाना क्षेत्र के बुदरी गांव में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित डोडा और अफीम बरामद किया. नामकुम पुलिस ने इसके किंगपिन को गिरफ्तार भी किया है. इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है और नशा कारोबारियों में डर का माहौल देखा जा रहा है. घर से मिला भारी मात्रा में मादक पदार्थ पुलिस की छापेमारी के दौरान एक घर से करीब 6 क्विंटल डोडा और लगभग आधा किलो अफीम बरामद किया गया. इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ की बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि यह कोई संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है. पुलिस ने मौके से कई अहम सुराग भी जुटाए हैं. मुख्य आरोपी मनीष तिर्की गिरफ्तार इस मामले में पुलिस ने घर के मालिक मनीष तिर्की को गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि वह अवैध रूप से डोडा और अफीम का भंडारण कर रहा था. पुलिस ने आरोपी की बोलेरो गाड़ी भी जब्त कर ली है, जिसका इस्तेमाल इस अवैध कारोबार में किया जा रहा था. आरोपी से पूछताछ जारी है और उससे कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है. वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में कार्रवाई मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की सूचना वरीय पुलिस अधीक्षक को मिली थी. इसके बाद पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन में पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय प्रथम) और नामकुम थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रामनारायण सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी कर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. पुलिस ने साधी चुप्पी हालांकि इतनी बड़ी बरामदगी के बावजूद पुलिस फिलहाल पूरे मामले पर ज्यादा जानकारी देने से बच रही है. संभावना जताई जा रही है कि पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे नेटवर्क और अन्य आरोपियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करेगी. नशा कारोबार पर सख्त कार्रवाई के संकेत इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ पुलिस की बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है. लगातार हो रही छापेमारी से यह साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासन अवैध नशा कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है.

उत्तर प्रदेश में पहली बार होगी पेपरलेस जनगणना, घर बैठे खुद भी दर्ज कर सकेंगे अपनी जानकारी

पटना उत्तर प्रदेश में जल्द ही जनगणना शुरू होने जा रही हैं. इस बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जाएगी. जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर गणना करेंगे. उत्तर प्रदेश में जनगणना की तारीख आई सामने उत्तर प्रदेश में साल 2027 की जनगणना शुरू होने जा रही है. इस बार ये पहली बार होगा जब जनगणना डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी, जिसमें डेटा जुटाने, उनकी एंट्री, सत्यापन और निगरानी समेत सभी काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाएंगे. लोगों को स्व-गणना का भी ऑप्शन दिया जाएगा यानी वोटर स्वयं अपना डेटा जमाकर करे जनगणना में शामिल हो सकेंगे. उत्तर प्रदेश में दो चरणों में जनगणना कराई जाएगी पहले चरण में मकान का सूचीकरण एवं मकान की गणना का काम होगा जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या गणना कराई जाएगी. पहले चरण में स्व-गणना की प्रक्रिया 7 मई से 21 मई तक चलेगी, इसके बाद अधिकारी 22 मई से 20 जून घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा करेंगे. दूसरे चरण में ही जातिगत गणनी की जाएगी. जनगणना में इन सवालों के देने होंगे जवाब जनगणना के पहले चरण में मकान का सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी. इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनकी जानकारी लोगों को गणना के लिए आए अधिकारियों को देनी होगी. 1. भवन नंबर या जनगणना नंबर 2. मकान नंबर 3. मकान के फर्श में इस्तेमाल प्रमुख सामग्री. यानी कि फर्श सीमेंट का है, ग्रेनाइट है, मार्बल है. 4. मकान के दीवार में इस्तेमाल सामग्री 5. मकान की छत में इस्तेमाल सामग्री 6. मकान का इस्तेमाल 7. मकान की हालत 8. परिवार क्रमांक 9. परिवार के सदस्यों की संख्या 10. परिवार के मुखिया का नाम 11. परिवार के मुखिया का लिंग 12. जाति, सामान्य, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी. 13. मकान के स्वामित्व की स्थिति 14. मकान में कमरों की संख्या 15. विवाहित दंपतियों की संख्या 16. पेयजल का सोर्स 17. पेयजल की उपलब्धता 18. बिजली का सोर्स 19. शौचालय की उपलब्धता 20. शौचालय का प्रकार 21. गंदे पानी की निकासी 22. स्नानघर की उपलब्धता 23. गैस कनेक्शन 24. खाना पकाने का मुख्य ईंधन 25. रेडियो या ट्रांजिस्टर 26. टीवी 27. इंटरनेट की सुविधा 28. लैपटॉप या कंप्यूटर 29. टेलीफोन, मोबाइल, स्मार्ट फोन 30. साइकल, स्कूटर, मोटरसाइकल 31.कार, जीप, वैन 32. मुख्य अनाज 33. मोबाइल नंबर उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए क़रीब छह लाख से ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी. ये कर्मचारी लोगों के घर-घर जाकर मकानों का सूचीकरण करेंगे और सारा डेटा जुटाएंगे. ये डेटा इकट्ठा करने और उसे सत्यापित करने का काम डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर पर एक नोडल कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा.    

रेत माफिया पर शिकंजा: बालाघाट में एंबुलेंस में पहुंची पुलिस, घेराबंदी कर ट्रैक्टर पकड़े

बालाघाट प्रदेश में अनुबंध समाप्त होने के बाद भी रेत घाटों पर अवैध खनन जारी है। बालाघाट में वैनगंगा नदी के भमोड़ी घाट पर मंगलवार को दो एंबुलेंस से पहुंची पुलिस टीम ने रेत से लदे चार ट्रैक्टर जब्त किए हैं। हालांकि, रेत माफिया के मुखबिर तंत्र ने गुर्गों को सूचित कर दिया, जिससे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर चालक भागने में सफल हो गए। मौके का मंजर और पुलिस बल नवेगांव थाना प्रभारी रमेश जाट के मुताबिक घाट पर करीब 25 ट्रैक्टर मौजूद थे, 50-60 लोग अवैध खनन कर रहे थे। दो एंबुलेंस से करीब 30 पुलिस कर्मी जैसे ही पहुंचे लोग ट्रैक्टर लेकर भागने लगे। बाद में 20 पुलिस कर्मियों का बल और पहुंचा और रेत लोड चार ट्रैक्टर जब्त कर छह को चिह्नित किया। फिलहाल अपराध दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। मुखबिर तंत्र को चकमा देने की कोशिश दरअसल भमोड़ी घाट का रास्ता गांव के अंदर से होकर जाता है, जिससे कोई शासकीय वाहन या पुलिस टीम पहुंचने से पहले ही मुखबिर तंत्र रेत खनन में लगे लोगों को अलर्ट कर देता है। इस बार पुलिस एंबुलेंस से पहुंची फिर भी कई लोग भागने में सफल रहे।  

सावधान, अब चूहे मारने वाली दवा बेचना पड़ेगा महंगा, बिहार सरकार ने लगाया कड़ा प्रतिबंध

पटना बिहार में चूहे, गिलहरी समेत खेतों में फसलों को बचाने के लिए अन्य जीव-जंतुओं को मारने के लिए उपयोग की जाने वाली दवा Ratol Paste पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन ऑर्डर भी नहीं कर सकेंगे। बिहार में चूहे, गिलहरी आदि को मारने वाली दवा रेटॉल पेस्ट (Ratol Paste) पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसकी ऑफलाइन और ऑनलाइन किसी तभी तरह की बिक्री नहीं हो सकेगी। साथ ही आम लोगों को भी इसका उपयोग नहीं करने की अपील की गई है। खेतों में अक्सर चूहे, गिलहरी और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य जीव-जंतुओं को मारने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है। बिहार के कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए इसकी बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया। भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा फॉस्फोरस से संबंधित कठोर सुरक्षा संहिता के प्रकाशन के बाद बिहार के कृषि विभाग ने यह रोक लगाई है। कृषि निदेशक ने बताया कि बिहार में कार्यरत अमेजन मीशो, जोमैटो जैसे सभी ई कॉमर्स प्लेटफार्म और अन्य खुदरा विक्रेताओं को निर्देश दिया गया है कि तत्काल प्रभाव से इस आदेश का पालन करें। आदेश में कहा गया है कि अगर किसी विक्रेता द्वारा रेटॉल पेस्ट (कृंतकनाशक) की बिक्री करते हुए पाया जाता है, तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित जिला स्तरीय सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण को उपलब्ध कराई जाए। ऐसे दुकानदारों और विक्रेताओं के खिलाफ कानून की सुसंगत धाराओं एवं नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। क्या है रेटॉल पेस्ट यह एक चिपचिपा, गाढ़ा पेस्ट या पाउडर‑आधारित उत्पाद होता है। यह जहरीला होता है। चूहे, गिलहरी आदि जीव-जंतु खाना समझकर खाते हैं और बाद में जहर के असर से मर जाते हैं। रेटॉल पेस्ट में आमतौर पर येलो-व्हाइट फास्फोरस नाम का बेहद खतरनाक पदार्थ होता है। यह एक प्रोटोप्लाज्मिक पॉइजन होता है। इसे खाने के बाद जीव-जंतुओं की कुछ देर में ही मौत हो जाती है। यह सीधे जीवित कोशिकाओं पर प्रहार करता है। घरों और दुकानों में भी होता है इस्तेमाल इस दवा का इस्तेमाल सिर्फ खेतों में ही नहीं, बल्कि घर, किराना दुकानें और अनाज-दाल आदि के गोदामों में भी इस्तेमाल किया जाता है। लोग अक्सर चूहों को भगाने (मारने) के लिए अपने घर-गोदाम में यह दवा रखते हैं। इंसान के लिए भी जानलेवा है यह दवा सिर्फ जीव-जंतुओं नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा होती है। रेटॉल पेस्ट की थोड़ी मात्रा भी इंसानों के शरीर में लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। ब्लड प्रेशर बढ़ना, खून का जमना, आंतरिक रक्तस्राव जैसी समस्या हो सकती है। सेवन के 48 घंटे के भीतर इसका असर दिखने लगता है। ज्यादा मात्रा में सेवन करने या उचित उपचार न मिलने पर इंसान की जान भी जा सकती है।

HC का अहम फैसला: अब ससुर से भी मेंटेनेंस ले सकती हैं बहुएं, जानिए क्या है शर्त

इलाहाबाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम और बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि हिन्दू विधवा महिलाएं अपने ससुर से भी गुजारा भत्ता की मांग कर सकती हैं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह टिप्पणी की है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी बना रहता है। ऐसे में कोई भी विधवा अपने ससुर से भी भरण-पोषण की मांग कर सकती है। यानी हाई कोर्ट की शर्तों के अनुसार पति के गुजर जाने के बाद ही कोई विधवा अपने ससुर से भरण-पोषण भत्ता देने का दावा कर सकती है। जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की पीठ ने अपने फैसले में कहा, "यह बात पूरी तरह से स्थापित है कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व होता है। यह स्थिति उन मामलों से सामने आई है, जहाँ पति-पत्नी अलग हो गए हैं और पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की है, चाहे वह आपराधिक मामलों के तहत हो या हिंदू कानून में भरण-पोषण के प्रावधानों के तहत। इतना ही नहीं, पत्नी का भरण-पोषण करने का पति का यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी कानूनन बना रहता है, जिससे विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण की मांग करने का अधिकार मिल जाता है।" लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने अपने आदेश में हालांकि किसी विशेष कानूनी प्रावधान का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन स्पष्ट किया कि 'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956' की धारा 19 और 21 एक हिंदू विधवा को कुछ शर्तों के तहत अपने ससुर/उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की मांग करने की इजाजत देती हैं। मामला क्या? दरअसल, हाई कोर्ट एक पति द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी पत्नी पर झूठी गवाही देने का मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने भरण-पोषण की मांग करते हुए अपने लिखित बयानों में झूठे बयान दिए हैं। पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी ने खुद को झूठे तौर पर एक गृहिणी के रूप में पेश किया, और यह बात छिपाई कि वह एक कामकाजी महिला है। उसने आगे आरोप लगाया कि उसके पास एक बैंक में 20 लाख रुपये से अधिक की कुल राशि वाली फिक्स्ड डिपॉज़िट रसीदें (FDRs) थीं, लेकिन उसने अपने हलफनामे में इस जानकारी को छिपा लिया। विवाह के बाद बेटी का भरण पोषण करना बाप का दायित्व नहीं याचिकाकर्ता ने पीठ को यह भी बताया गया कि वर्तमान में, FDR में लगभग 4 लाख रुपये जमा हैं और बाकी राशि उसने निकाल ली है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने शुरुआत में ही टिप्पणी की कि फैमिली कोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट है कि आवेदक-अपीलकर्ता/पति ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि प्रतिवादी-पत्नी कहीं कार्यरत है। पीठ ने कहा कि यह साबित करने का पूरा दायित्व पति पर ही था कि उसकी पत्नी कहीं नौकरी कर रही है; पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि पत्नी द्वारा यह कहने पर कि वह कहीं कार्यरत नहीं है, उसे किसी नकारात्मक बात को साबित करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पत्नी की वित्तीय संपत्तियों के संबंध में, कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि FDRs उसे उसके पिता द्वारा दी गई थीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक पिता का अपनी बेटी के विवाह के बाद उसके भरण-पोषण का कोई दायित्व नहीं होता, सिवाय उस स्थिति के जब वह विधवा हो गई हो। ससुर से गुजारा मांगने की क्या शर्तें? इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा, "हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 19 के अनुसार, एक विधवा बहू अपने ससुर से गुजारा भत्ता तब तक मांग सकती है, जब तक कि वह अपनी खुद की कमाई या अपनी खुद की संपत्ति से अपना गुजारा करने में असमर्थ हो। इसमें कहा गया है कि विधवा अपने ससुर से तभी संपर्क कर सकती है, जब वह अपने मृत पति की संपत्ति से, अपने माता-पिता की संपत्ति से, या अपने बच्चों और उनकी संपत्ति से गुजारा भत्ता पाने में पूरी तरह से असमर्थ हो।" कोर्ट ने ये भी कहा कि गुजारा भत्ता देने की यह जिम्मेदारी तब लागू नहीं होती, जब ससुर के पास अपनी हिस्सेदारी वाली या पुश्तैनी संपत्ति से (जो उसके कब्ज़े में हो) भुगतान करने के साधन न हों; विशेष रूप से ऐसी संपत्ति से, जिसमें से बहू को पहले ही कोई हिस्सा मिल चुका हो। कोर्ट ने ये भी कहा कि बहू के पुनर्विवाह करने पर यह जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है।  

श्रमिक वर्ग कल्याण के लिये बहुमंजिला एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवास निर्मित करें : मंत्री विजयवर्गीय

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की समीक्षा बैठक हुई। मंत्री  विजयवर्गीय ने प्रदेश के चहुँमुखी विकास और मध्यम एवं निर्धन वर्ग के लिए सुलभ आवास उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता न केवल आवास उपलब्ध कराना है, बल्कि आधुनिकता और पर्यावरण संरक्षण के सामंजस्य के साथ नागरिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना भी है। मंत्री  विजयवर्गीय ने विशेष रूप से श्रमिक वर्ग के हितों को रेखांकित करते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के समीप 5 हजार एलआईजी और ईडब्ल्यूएस आवासों का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि इन आवासों को तीन से चार मंजिला स्वरूप में निर्मित किया जाए जिससे सीमित भूमि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके। मंत्री  विजयवर्गीय ने निर्माण कार्यों में उच्च स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों के पास आवास होने से कर्मचारी वर्ग के समय और संसाधनों की बचत होगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और जीवन स्तर में सुधार आएगा। राजधानी भोपाल का होगा कायाकल्प : भविष्य की जरूरतों पर जोर मंत्री  विजयवर्गीय ने भोपाल में संचालित महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' सहित नवीन कलेक्ट्रेट एवं कमिश्नर भवनों के निर्माण को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सभी नवीन भवन भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए बनाए जाएं। इन भवनों में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ ग्रीन बिल्डिंग मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, जिससे ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संतुलन बना रहे।  पेंशनर्स को सौगात और नीतिगत सुधार कर्मचारी हितैषी निर्णय लेते हुए बैठक में मंडल के पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स को सातवें वेतनमान के अंतर्गत 2 प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई राहत स्वीकृत की गई। साथ ही, पारदर्शिता और व्यवस्थाओं के सरलीकरण के लिये एक बड़ा कदम उठाते हुए मंडल की आवासीय एवं व्यवसायिक संपत्तियों में मूल क्रेता के साथ अन्य नाम जोड़ने या विलोपित करने संबंधी पूर्ववर्ती परिपत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया गया। बजट एवं नवीन योजनाओं का अनुमोदन मंडल की वित्तीय सुदृढ़ता को अक्षुण्ण रखने के लिये बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट एवं आगामी वार्षिक बजट को सर्वसम्मति से अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, मंडल की 'आवासीय पुनर्विकास योजना' तथा 'सुराज योजना' के वार्षिक कार्यक्रमों को सम्मिलित करने की भी स्वीकृति दी गई, जिससे प्रदेश के शहरी अधोसंरचना को नई गति मिलेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे, मंडल आयुक्त  गौतम सिंह, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सु तृप्ति वास्तव, अपर आयुक्त  महेन्द्र सिंह सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 कर्नाटक की मनीषा जोंस सिद्दी ने जीता गोल्ड

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत आज सरगुजा जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में पिछले चार दिनों से जारी कुश्ती स्पर्धा का शानदार समापन आज हुआ। प्रथम ऐतिहासिक संस्करण में कर्नाटक की बेटी मनीषा जोंस सिद्दी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कुश्ती के 76 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। अभावों के बीच पली-बढ़ी मनीषा की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प की विजय है। पिता के निधन के बाद माँ बनीं संबल           मनीषा का खेल जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। इसके बावजूद, उनकी माँ ने हार नहीं मानी और अकेले दिन-रात मेहनत करके मनीषा के सपनों को पंख दिए। पूर्व में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सिल्वर और ब्रोंज मेडल जीत चुकीं मनीषा के करियर का यह पहला गोल्ड मेडल है। स्पोर्ट्स हॉस्टल और परिवार का मिला साथ            अपनी सफलता को साझा करते हुए मनीषा ने कर्नाटक के डिवाइस स्पोर्ट्स हॉस्टल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, हॉस्टल के कोच और साथी खिलाड़ियों ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। मेरा बड़ा भाई मेरा मार्गदर्शक रहा है, वहीं छोटा भाई, जो खुद एक राज्य स्तरीय एथलीट है, वह मेरी सबसे बड़ी हिम्मत है। ट्राइबल गेम्स- एक नई पहचान का मंच            मनीषा ने केंद्र सरकार और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच से जनजातीय समुदाय के बच्चों को अपनी विशेष पहचान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला है। उन्होंने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा मैच के दौरान सुरक्षा, भोजन और यातायात की व्यवस्था बेहतरीन थी। छत्तीसगढ़ के लोगों का व्यवहार और यहाँ का माहौल खिलाड़ियों के लिए अत्यंत सुखद है। लक्ष्य-अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना         स्वर्ण पदक की चमक के साथ मनीषा की निगाहें अब भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर हैं। छत्तीसगढ़ की धरती पर मिली इस सफलता से उत्साहित मनीषा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में जुटी हैं। उनका अंतिम लक्ष्य विश्व पटल पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाना है।