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सफलता की नई उड़ान बिहार बोर्ड 10वीं के नतीजों में छात्रों से आगे निकलीं छात्राएं

बिहार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक (10वीं) का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बोर्ड कार्यालय से आधिकारिक रूप से नतीजे घोषित किए। इस साल कुल 12,35,743 विद्यार्थी सफल रहे हैं, जिससे कुल पास प्रतिशत 81.79% रहा। बिहार बोर्ड ने लगातार 8वीं बार देश में सबसे पहले रिजल्ट जारी कर अपना ही रिकॉर्ड कायम रखा है। ​ दो बेटियों ने किया स्टेट टॉप ​इस वर्ष मेरिट लिस्ट में लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। वैशाली की सबरीन प्रवीण और जमुई (सिमुलतला स्कूल) की पुष्पांजलि कुमारी ने संयुक्त रूप से राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। दोनों टॉपरों ने 500 में से 492 अंक हासिल किए हैं। राज्य सरकार की घोषणा के अनुसार, स्टेट टॉपर को 2 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। ​ छात्रों से आगे निकलीं छात्राएं ​एक बार फिर लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। जहां 6,01,390 छात्र सफल हुए, वहीं सफल छात्राओं की संख्या 6,34,353 रही। टॉप-10 की सूची में इस बार जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखी गई है, जिसमें कुल 139 स्टूडेंट्स ने अपनी जगह बनाई है। इनमें से टॉप-5 में 13 विद्यार्थी शामिल हैं। मोबाइल पर ऐसे देखें परिणाम ​छात्र आधिकारिक वेबसाइट्स biharboardonline.bihar.gov.in या results.biharboardonline.com पर अपना रिजल्ट देख सकते हैं। जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वे SMS के जरिए भी अपना स्कोर जान सकते हैं। इसके लिए मोबाइल के मैसेजिंग ऐप में BIHAR10 टाइप कर 56263 पर भेजें।

असम की पिंकी बोरो को रजत और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके को कांस्य

रायपुर. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत महिला 86$ किलोग्राम वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस स्पर्धा में मिजोरम की ज़ोसांगज़ुआली ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ज़ोसांगज़ुआली ने स्नैच में 70 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 83 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 140 किलोग्राम के साथ पहला स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि ने मिजोरम को गौरवान्वित किया। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय खेल परिसर में किया जा रहा है। असम की पिंकी बोरो ने शानदार प्रयास करते हुए कुल 125 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक पर कब्जा जमाया। उन्होंने स्नैच में 55 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 70 किलोग्राम का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने भी दमदार खेल दिखाते हुए कुल 86 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 39 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 47 किलोग्राम वजन उठाया। प्रतियोगिता में त्रिपुरा की ट्विस्मु जमातिया चौथे स्थान पर रहीं, जिन्होंने कुल 77 किलोग्राम वजन उठाया। प्रतियोगिता की खास बात यह रही की सभी खिलाड़ियों ने युवा आयु में बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। मुकाबला काफी प्रतिस्पर्धात्मक रहा, जहां हर खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। आयोजन स्थल पर दर्शकों का उत्साह खिलाड़ियों के प्रदर्शन को और ऊर्जा दे रहा था।

वन विभाग की बड़ी योजना: टाइगर कॉरिडोर निर्माण के साथ ओवरपॉपुलेशन पर शिफ्टिंग का प्लान

सवाई माधोपुर. रणथम्भौर को बाघों की नगरी और नर्सरी के नाम से भले ही जाना जाता हो, लेकिन वर्तमान में क्षमता से अधिक बाघों के कारण आपसी संघर्ष के मामले बढ़ते जा रहे हैं। करीब 50 बाघ की क्षमता वाले पार्क में वर्तमान में 75 से अधिक संख्या है। वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इण्डिया की ओर से पूर्व में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार रणथम्भौर को क्षेत्रफल और ग्रासलैण्ड के आधार पर पचास बाघ बाघिनों के लिए ही उपयुक्त माना गया था, हालांकि पिछले कुछ सालों में यहां ग्रासलैण्ड में वृद्धि हुई है। फिर भी विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान में यहां क्षमता से अधिक बाघ बाघिन विचरण कर रहे हैं। इलाके की तलाश में लगातार बाघ-बाघिन जंगल से बाहर भी आ रहे हैं। रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक मानस सिंह का कहना है कि वर्तमान में रणथम्भौर में क्षमता से अधिक बाघ बाघिन है। टाइगर शिफ्टिंग और टाइगर कॉरिडोर को विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। अब तक शिफ्ट किए 24 बाघ बाघिन वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 2008 से अब तक रणथम्भौर से कुल 24 बाघ बाघिनों को अन्यत्र शिफ्ट किया जा चुका है। इनमें से 13 बाघ-बाघिनों की मौत भी हो चुकी है। रणथम्भौर से सरिस्का अब तक 11 बाघ-बाघिन भेजे जा चुके हैं। इनमें बाघ टी-1, टी-7, टी-12, टी-18, टी-44, टी-51, टी-52, टी-75 और टी-113 सहित अन्य टाइगर शामिल है. लेकिन सरकार की रणथंभौर से टाइगर शिफ्टिंग की योजना को उस वक्त बड़ा आघात लगा, जब सरिस्का भेजे गए 11 में से 5 बाघों की मौत हो गई। रणथम्भौर से मुकुंदरा हिल्स तक है टाइगर कॉरिडोर वनाधिकारियों ने बताया कि रणथम्भौर में इंद्रगढ़, लाखेरी होते हुए कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व तक बाघों की आवाजाही रहती है। पूर्व में इस मार्ग से कई बाघ बाघिन रणथम्भौर से बूंदी के रामगढ़ विषधारी और कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व पहुंच चुके हैं, लेकिन बीच में हाइवे और रेलवे ट्रैक होने के कारण हादसे हो चुके हैं। पूर्व में रणथम्भौर में मुकुंदरा गया ब्रोकन टेल बाघ की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई थी। इसी प्रकार रणथम्भौर के भिड़ नाके से करौली और धौलपुर तक टाइगर कॉरिडोर है। यहां से सुल्तान यानि टी-72 और तूफान यानि टी-80 रणथम्भौर से करौली पहुंच चुके हैं। लेकिन रास्ते में कई गांव होने के कारण खतरा बना रहता है। वहीं रणथम्भौर से चंबल को पार करके कई बार बाघ एमपी के कूनों तक भी पहुंचे है। ऐसे में इन क्षेत्रों को विकसित किया जाए तो बाघाें के विचरण के लिए स्वचछंद वातावरण मिलेगा। इससे उनका आबादी में मूवमेंट पूरी तरह रूक जाएगा। 15 माह में बाघ के हमले में तीन मौत वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जनवरी 2025 से मार्च 2026 तक बाघ के हमले में 15 माह में तीन मौत हो चुकी है। इनमें 16 अप्रैल 2025 को त्रिनेत्र गणेश मंदिर के पास एक 7 वर्षीय बच्चे पर बाघ हमला कर जंगल में ले गया। 11 मई 2025 को रेंजर देवेंद्र चौधरी पर हमला, गर्दन पर वार कर मौत के घाट उतारा। 09 जून 2025 को रणथम्भौर दुर्ग में जैन मंदिर के चौकीदार राधेश्याम माली पर हमला कर मार दिया।

भारत में हवाई सेवाओं का अकल्पनीय विस्तार, अब हर तबके के लिए संभव हुई हवाई यात्रा: CM यादव

भारत में हवाई सेवाओं का विस्तार अकल्पनीय, अब हर तबके के लिए संभव हुई हवाई यात्रा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया इन्दौर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का लोकार्पण इंदौर में हवाई सुविधाओं का हो रहा विस्तार, मिली अत्याधुनिक टर्मिनल की सौगात अमेरिकी कॉउंसिल ने इंदौर की हवाई सुविधा को क्वॉलिटी सर्टिफिकेट से किया सम्मानित इन्दौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकमाता अहिल्याबाई का जीवन हमें लोककल्याण का मार्ग दिखाता है। लोकमाता के पद चिन्हों पर चलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम जनसेवा के नए कदम बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता ने ही देश के विमानन क्षेत्र का कायाकल्प किया है। प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच और दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज समाज के हर तबके के लिए हवाई यात्रा संभव हुई है। अब हवाई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति भी हवाई जहाज की यात्रा करने में समर्थ्य हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में हवाई सेवाओं का विस्तार जितनी तेजी से हो रहा है वह अकल्पनीय है। मध्यप्रदेश में पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत भी की गई है, इससे गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को त्वरित उपचार के लिए हायर सेंटर पहुंचाया जा रहा हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर में लोकमाता अहिल्याबाई इन्टरनेशनल एयरपोर्ट में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 का लोकार्पण कर इन्दौरवासियों सहित पूरे मालवांचल को अत्याधुनिक टर्मिनल की सौगात दी। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधाओं को लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिससे हवाई यात्रा और भी अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनेगी। यह नया टर्मिनल इन्दौर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूती के साथ प्रतिस्थापित करेगा। इंदौर शहर की बेहतरीन हवाई सुविधाओं को अमेरिका क्वॉलिटी कॉउंसिल ने क्वॉलिटी सर्टिफिकेट से सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉउसिल की ओर से दिया गया क्वालिटी सार्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन इन्दौर एयरपोर्ट के पदाधिकारियों को सौंपकर बधाई दी। नये टर्मिनल में मिलेंगी यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर के नए टर्मिनल में यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इंदौर में पुनर्संरचना परियोजना के तहत करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से हुए विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों से एवं पुरानी टर्मिनल इमारत के नवीनीकरण के बाद अब यह नया टर्मिनल प्रति घंटे लगभग 400 यात्रियों को संभालने में सक्षम हो गया है। इसमें 14 चेक-इन काउंटर्स बनाए गए हैं और लगभग 300 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था भी यहां की गई है। करीब 6 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में बने इस टर्मिनल की वार्षिक यात्री क्षमता 15 लाख (1.5 MMPA) है। यहां पर 18 उड़ानों का संचालन, 150 चार पहिया वाहनों की पार्किंग एवं वीआईपी रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर में यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए हवाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस नए टर्मिनल में एक बहुत बड़ा वेटिंग एरिया विकसित किया गया है, जिससे पीक आवर्स में भी बेहतर तरीके से भीड़ प्रबंधन किया जा सकेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां "उड़ान यात्री कैफे" की शुरुआत भी की जा रही है। इसमें यात्रियों को 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में नाश्ता मिलेगा। प्रदेश में हर 150 किमी पर एक कमर्शियल एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 8 एयरपोर्ट, 20 हवाई पट्टियां और 220 हेलीपैड्स मौजूद हैं। बीते दो साल में ही प्रदेश में रीवा, सतना और दतिया में नए एयरपोर्ट का सफल संचालन हमने शुरु किया है। उज्जैन और शिवपुरी में भी नया एयरपोर्ट बनाने की तैयारी कर ली है। इससे प्रदेश में कुल 10 एयरपोर्ट्स हो जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में हर 150 किलोमीटर पर एक कमर्शियल एयरपोर्ट, हर 75 किलोमीटर पर एक एयरस्ट्रिप और हर 45 किलोमीटर पर एक हेलीपैड की सुविधा उपलब्ध हो। इस दिशा में हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आवागमन के तीनों क्षेत्रों में हो रहे अभूतपूर्व विस्तार कार्य मध्यप्रदेश को लगातार विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जा रहे हैं। रेल और विमानन सेवाओं में बढ़ते कदमों के साथ ही रोड कनेक्टिविटी के लिए केन्द्र से मिले विशाल पैकेज तथा एक्सप्रेस-वे के निर्माण से हमारा मध्यप्रदेश अब देश का लॉजिस्टिक हब बनता जा रहा है। नये टर्मिनल के लोकार्पण कार्यक्रम में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने भी वर्चुअली सहभागिता की। कार्यक्रमको इन्दौर के लोकसभा सांसद शंकर लालवानी सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर लोकार्पण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व मंत्री महेन्द्र हार्डिया, पूर्व मंत्री सुउषा ठाकुर, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़ और महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।  

एक साथ 5000 छात्र कर सकेंगे पढ़ाई झारखंड की इस मेगा लाइब्रेरी में दिखेंगी परमवीर चक्र विजेताओं की गाथाएं

झारखंड  झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल तेजी से आकार ले रही है. यहां पर करीब 65 करोड़ रुपये की लागत से मेगा अत्याधुनिक लाइब्रेरी बनाई जा रही है. यह लाइब्रेरी सूबे के छात्रों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आ रही है. रविवार को झारंखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसका निरीक्षण कर कार्य की प्रगति का जायजा लिया. एक साथ 5000 छात्रों के बैठने की सुविधा यह लाइब्रेरी अपने आप में बेहद खास होगी, जहां एक साथ करीब 5,000 छात्र बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे. हर फ्लोर पर मॉडर्न रीडिंग रूम बनाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों को बेहतर और शांत वातावरण मिल सके. इसके साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर कैफेटेरिया की सुविधा भी विकसित की जा रही है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के बीच आराम और रिफ्रेशमेंट मिल सके. सीनियर सिटीजन्स के लिए विशेष व्यवस्था इस लाइब्रेरी की खास बात यह होगी कि इसमें हर आयु वर्ग के लोगों को सुविधा मिलेगी. पहली मंजिल पर सीनियर सिटीजन्स के लिए अलग व्यवस्था की जा रही है. इसका उद्देश्य यह है कि बुजुर्ग भी यहां आकर पढ़ें और समय बिताएं. परमवीर चक्र विजेताओं को मिलेगा सम्मान इस लाइब्रेरी को सिर्फ पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र भी बनाया जा रहा है. प्रस्ताव रखा गया है कि यहां परमवीर चक्र से सम्मानित 21 वीर सपूतों के चित्र लगाए जाएं. राज्यपाल ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि पूरी पहली मंजिल को इन वीरों को समर्पित किया जाए, जहां उनके शौर्य और बलिदान की कहानियां भी प्रदर्शित होंगी. जून तक पूरा होने की उम्मीद निर्माण कार्य तेजी से जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह लाइब्रेरी जून तक बनकर तैयार हो जाएगी. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जून या जुलाई में इसका उद्घाटन कर दिया जाए, ताकि छात्र जल्द से जल्द इसका लाभ उठा सकें. आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलेगा लाभ इस लाइब्रेरी को एक ट्रस्ट के माध्यम से संचालित किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे छात्रों तक महंगी किताबें और संसाधन पहुंचाना है, जो आर्थिक तंगी के कारण उन्हें खरीद नहीं पाते. इससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर को बढ़ावा मिलेगा. कोल इंडिया और सीसीएल का अहम योगदान इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड (सीसीएल) का बड़ा योगदान रहा है. इनके सहयोग से यह लाइब्रेरी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रही है. शिक्षा का नया केंद्र बनेगा मोराबादी रांची के बीचों-बीच, कई विश्वविद्यालयों के पास स्थित यह लाइब्रेरी आने वाले समय में पूरे झारखंड के छात्रों के लिए एक प्रमुख शिक्षा केंद्र बन सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल सिर्फ एक इमारत तक सीमित रहती है या राज्य के भविष्य को नई दिशा देने वाला ज्ञान का सबसे बड़ा हब बनती है.

चंडीगढ़ में बेंगलुरु के प्रोडक्शन मालिक को सजा, एक साल की कैद और 10 लाख जुर्माना; चेक बाउंस के मामले में फैसला

चंडीगढ़  चंडीगढ़ की जिला अदालत ने सारा प्रोडक्शन बेंगलुरु के मालिक सचिन कांबले को शनिवार को 1 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला मोहाली की कैनम मूवी प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड के साथ चेक फ्रॉड से जुड़ा हुआ है।  फिल्म शूटिंग के लिए गलत कैमरे दिए मंगत वर्मा ने 5 जून 2019 को सचिन कांबले और दिलीप कुमार (दिया प्रोडक्शन) के साथ MoU साइन किया। फिल्म शूटिंग के लिए रेड एपिक कैमरा, CP-2 लेंस, DR-जूम आदि उपकरण खरीदने के लिए कुल 24.50 लाख रुपये दिए गए। लेकिन उपकरण खराब और गलत स्पेसिफिकेशन के निकले थे। बाद में नए उपकरण देने और 9.50 लाख रुपये मुआवजे का वादा किया गया। कुल देय राशि 34 लाख रुपये हो गई। खाता बंद होने के कारण चेक बाउंस सचिन कांबले ने 30 अप्रैल 2021 को एक्सिस बैंक (मल्लेश्वरम ब्रांच, बेंगलुरु) का चेक नंबर 004151 जारी किया, राशि 10 लाख रुपये थी। चेक 17 जून 2021 को बाउंस हो गया। बैंक का रिमार्क था – “Account Closed”। मंगत वर्मा ने 12 जुलाई 2021 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन सचिन कांबले ने 15 दिन में पैसे नहीं दिए। इसके बाद 11 अगस्त 2021 को धारा 138 NI Act के तहत शिकायत दर्ज की गई।  

इन्फ्रास्ट्रक्चर को बूस्ट: बिहार में 26 NH प्रोजेक्ट जल्द शुरू, जमीन अधिग्रहण में तेजी

पटना. राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच) की 26 परियोजनाओं के लिए वन विभाग की 711.92 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि केंद्र सरकार के कानून के तहत प्रतिपूरक वनीकरण की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण एजेंसी की होगी। पथ निर्माण विभाग के सचिव के स्तर से एनएच की संबंधित परियोजनाओं की मानीटरिंग की जा रही है। पथ निर्माण विभाग के सचिव ने कहा कि राष्ट्रीय उच्च पथ परियोजनाएं राज्य की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने, निवेश आकर्षित करने एवं समग्र आर्थिक विकास को गति प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया है। यह बताया गया कि 711.92 हेक्टेयर वन भूमि से संबंधित प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर विधिवत अग्रसारित किया गया है। वन विभाग एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त करने की दिशा में ठोस पहल की गयी है। विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा कि किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना में अनावश्यक विलंब की स्थिति उत्पन्न न हो। कुदरा में एनएच निर्माण बना मुसीबत  कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड मुख्यालय से सकरी गांव तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण सड़क सुरक्षा पूरी तरह सवालों के घेरे में है। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर चल रहा सिक्स लेन निर्माण कार्य पिछले कई महीनों से अधूरा पड़ा है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुदरा से सकरी गांव तक एनएच-19 और उसकी सर्विस सड़क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। निर्माण कार्य के दौरान जगह-जगह गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन उन्हें भरने या समतल करने की दिशा में तत्परता नहीं दर्शायी जा रही है। सर्विस सड़क और उसके किनारे बने फुटपाथ भी इस हालत में हैं कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब कई स्थानों पर बैरियर लगाकर आवागमन बाधित कर दिया जाता है। इससे वाहनों को अचानक दिशा बदलनी पड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। खासकर रात के समय और बारिश में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य में हो रही देरी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। लोगों का आरोप है कि न तो पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और न ही वैकल्पिक रास्तों की समुचित व्यवस्था की गई है। गौरतलब है कि कुदरा थाना क्षेत्र में हाल के दिनों में सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। ऐसे में एनएच-19 की बदहाल स्थिति और अधूरा निर्माण कार्य हादसों को और आमंत्रित कर रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराया जाए, गड्ढों को भरकर सड़क को सुरक्षित बनाया जाए तथा पर्याप्त संकेतक और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बांसवाड़ा में पर्यटन को नई पहचान, जगमेरू हिल्स पर ‘राम वाटिका’ निर्माण की तैयारी

बांसवाड़ा. ‘राजस्थान का स्कॉटलैंड’ व ‘100 द्वीपों के शहर’ (सिटी ऑफ हंड्रेड आइलैंड्स) के नाम से प्रसिद्ध बांसवाड़ा जिले में पर्यटकों की लोकप्रिय जगमेरू हिल्स जल्द अब पर्यटन के नए नक्शे पर उभरेंगी। प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध इस पहाड़ी स्थल को विकसित करने वन विभाग यहां करीब दो करोड़ रुपए की लागत से ‘राम वाटिका’ बनाने की योजना तैयार कर रहा है। यहां पर्यटक बादलों से बातें करते हुए बांसवाड़ा की पहचान ‘बांस’ से बने मड़ हाउस और सेल्फी प्वॉइंट से प्राकृतिक खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर सकेंगे। वन विभाग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से राम वाटिका विकसित करने के एक नई प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो रहा है। इसमें खूबसूरत वाटिका पर चरणबद्ध रूप से दो करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत वन विभाग ने जगमेरू हिल्स को इसमें शामिल किया है। अक्सर यहां पर्यटक यहां कम ऊंचाई की छोटी-छोटी पहाड़ियां और इसकी चोटियां देखने आते हैं। बरसात में यह बेहद खूबसूरत हो जाती हैं। यहां पर्यटन सुविधाएं विकसित होने से बांसवाड़ा पर्यटन मानचित्र पर और उभार सकेगा। प्राकृतिक रोमांच, स्थानीय पहचान बढ़ेगी जगमेरू हिल्स पर बादलों के बीच खड़े होने का अहसास, नीचे से ऊपर उठते हुए धुंध के दृश्य और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है। वन विभाग की ओर से प्रस्तावित रामवाटिका में बांसवाड़ा की पहचान बांस से बनी झोपड़ी, फर्नीचर सहित उसके सजावटी सामान होंगे। बांस का मड हाउस भी यहां बनाया जाएगा। बांस की कलाकारी और फर्नीचर के लिए प्रसिद्ध आदिवासी कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ये भी होंगे आकर्षण बांस के मड़ हाउस के अलावा नक्षत्र गार्डन, गोत्र गार्डन, सेल्फी प्वॉइंट एवं चिल्ड्रन पार्क यहां बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। इसके अलावा पर्यटकों के लिए यहां पेयजल, बैठने की व्यवस्था और स्वच्छ शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। माही बांध क्षेत्र में ‘100 द्वीप’ होंगे नए आकर्षण इसके साथ ही राज्य सरकार ‘100 द्वीपों के शहर’ (सिटी ऑफ हंड्रेड आइलैंड्स) के नाम से प्रसिद्ध बांसवाड़ा के माही क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ाएगी। सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति माही बांध के भराव क्षेत्र और आसपास के टापुओं पर पर्यटन विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करेगी। प्रशासनिक सुधार विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। माही बैकवाटर में फैले खूबसूरत टापू, हरियाली और पहाड़ियां पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। अब यहां वाटर स्पोर्ट्स, नेचर टूरिज्म और व्यू प्वाइंट जैसे नए आकर्षण विकसित किए जाएंगे। माही बैक वाटर में फैले टापू, चारों ओर हरियाली और पहाड़ियों से घिरा इलाका है। इस क्षेत्र में पानी से जुडी गतिविधियां, नेचर-बेस्ड टूरिज्म, व्यू-पॉइंट और अन्य आकर्षण विकसित किए जा सकेंगे। माही नदी पर बने इस बांध के जलाशय में फैले छोटे-बड़े टापू प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत नजारा पेश करते हैं। पर्यटन का नया डेस्टिनेशन बनेगा रामवाटिका के लिए जगमेरू हिल का प्रस्ताव बनाया गया है। अमूमन जून से दिसंबर तक यहां पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती देखने आते हैं। पर्यटकों के लिए यहां गार्डन सहित अन्य सुविधाएं विकसित होने से यह पर्यटन का नया डेस्टिनेशन बनेगा। – अभिषेक शर्मा, डीएफओ, बांसवाड़ा

नोएडा एयरपोर्ट से यूपी आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए बढ़ी सुविधाएं

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्टः यूपी आने वाले विदेशी पर्यटकों को होगी सुविधा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से सीधे यूपी हार्टलैंड में प्रवेश कर सकेंगे विदेशी पर्यटक, बढ़ेगा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन आगरा, मथुरा-वृंदावन के साथ अयोध्या, वाराणसी आने वाले विदेशी पर्यटकों को भी मिला नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नया विकल्प जेवर/ लखनऊ  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ व्यापार, निवेश, औद्योगिक विकास और पर्यटन गतिविधियों के विकास में एक नया अध्याय शुरू होने की संभावना है। यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे बनाया गया यह एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर का दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा, बल्कि आगरा, मथुरा-वृंदावन, फतेहपुर सीकरी और यहां तक कि लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क जैसे पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर नई चमक देगा। जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न सिर्फ उड़ानों का हब बनेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, इतिहास, आस्था और प्रकृति को वैश्विक पर्यटकों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम साबित होगा। उत्तर प्रदेश वर्तमान में देश में घरेलू पर्यटन के मामले में शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है। साथ ही प्रदेश के आगरा, मथुरा, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी योगी सरकार के 9 वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यूपी, जिसे ‘लैंडलॉक्ड’ माना जाता है, अब हवाई मार्ग से दुनिया से जुड़कर विदेशी पर्यटन के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयां छू सकता है। वर्तमान में यूपी आने वाले विदेशी पर्यटकों को लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और अयोध्या के इंटरनेशनल एयरपोर्टों के साथ जेवर एयरपोर्ट का विकल्प भी मिल गया है। साथ ही यूपी में आगरा, फतेहपुर सीकरी और मथुरा-वृंदावन आने वाले अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भक्तों को पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से पर्यटकों को यमुना एक्सप्रेस-वे के जरिए आगरा और फतेहपुर सीकरी महज 1.5 से 2 घंटे में, जबकि मथुरा-वृंदावन केवल 90 मिनट में पहुंचने की सुविधा मिल जाएगी। यही नहीं, जेवर में बना यह एयरपोर्ट केवल यूपी ही नहीं, बल्कि देश के इंटरनेशनल टूरिज्म हब दिल्ली-आगरा-जयपुर का क्लासिक गोल्डन ट्रायंगल भी विदेशी पर्यटकों के लिए अब और अधिक आकर्षक व सुविधाजनक हो जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर में आवागमन शुरू हो जाने से यूपी में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन के साथ ही इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश के प्रसिद्ध दुधवा नेशनल पार्क, लखीमपुर खीरी और उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, देहरादून आने वाले प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को भी विशेष सुविधा मिल सकेगी। यही नहीं, यूपी की पर्यटन नीति-2022 में जिस तरह इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया गया है, उसके चलते दुधवा ही नहीं, कतर्निया घाट (बहराइच), सैफई लायन सफारी जैसे स्थलों के लिए भी विदेशी पर्यटकों की पहुंच आसान होगी।  इसके साथ ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण से यूपी में मेडिकल और बिजनेस टूरिज्म को भी जबरदस्त बढ़ोतरी मिलेगी। यूपी में पर्यटन की बढ़ोतरी के साथ होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट्स, गाइडों के साथ हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों व व्यंजनों का भी तेज गति से विकास होगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के विजन को व्यापार, उद्योग, निवेश के साथ पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि के जरिए साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

मालाबार पाइड हॉर्नबिल और उड़न गिलहरी की मौजूदगी दर्ज, उदंती में तकनीक और परंपरा का संगम

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में एक दिलचस्प बदलाव दिखाई दे रहा है. यहाँ की पहाड़ियों और वनों में अब फिर से उन दुर्लभ प्रजातियों की आहट सुनाई देने लगी है, जो कभी पश्चिमी घाट और हिमालयी क्षेत्रों की पहचान मानी जाती थीं. मालाबार पाइड हॉर्नबिल, मालाबार विशाल गिलहरी और भारतीय उड़ने वाली गिलहरी जैसी प्रजातियाँ अब उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में अपना विस्तार कर रही हैं. इस बदलाव के पीछे आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का एक अनूठा संगम काम कर रहा है. सेंट्रल इंडियन हाइलैंड्सः एक प्राकृतिक ‘जीव-जंतु पुल’ छत्तीसगढ़ का सेंट्रल इंडियन हाइलैंड्स क्षेत्र पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और हिमालय के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कड़ी का काम करता है. यह क्षेत्र कई वन्यजीव प्रजातियों के लिए “फॉनल ब्रिज” यानी जीव-जंतुओं के आवागमन का प्राकृतिक मार्ग बनता है. उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व इसी हाईलैंड्स का हिस्सा है. यह क्षेत्र उन प्रजातियों के लिए आदर्श माना जाता है जो ऐसे वनों में पनपती हैं जहाँ वृक्षों के छत्र आपस में जुड़े हों, जिन्हें “वृक्षीय राजमार्ग” कहा जाता है. सालभर जल स्रोत उपलब्ध हों, फल देने वाले वृक्ष जैसे बरगद, पीपल और सेमल मौजूद हों. लेकिन पिछले वर्षों में अतिक्रमण, अवैध शिकार और अवैध वृक्ष कटाई के कारण इन वनों को नुकसान पहुँचा और इन दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई. जब एआई ने जंगलों की निगरानी शुरू की वर्ष 2022 में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने जंगल संरक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शुरू किया. रिजर्व ने गूगल अर्थ इंजन आधारित रिमोट सेंसिंग पोर्टल का उपयोग करते हुए 1840 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन आवरण और जल स्रोतों की स्थिति का विश्लेषण किया. सेंटिनल और लैंडसैट उपग्रहों से प्राप्त पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन कर मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के माध्यम से एनडीवीआई (वनस्पति सूचकांक) और एनडीडब्ल्यूआई (जल सूचकांक) में बदलावों का विश्लेषण किया गया. इस तकनीक से उन क्षेत्रों की पहचान संभव हुई जहाँ, वन आवरण तेजी से कम हो रहा था. वृक्षों के छत्रों में अंतराल बढ़ रहा था. जल स्रोत सूख रहे थे. इन क्षेत्रों को “हॉटस्पॉट” के रूप में चिह्नित किया गया. ड्रोन से हुआ जमीनी सत्यापन उपग्रह चित्रों से मिले संकेतों की पुष्टि के लिए एआई-संचालित सर्वेक्षण ड्रोन का उपयोग किया गया. इन ड्रोन की मदद से हॉटस्पॉट क्षेत्रों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्र तैयार किया गया. जंगलों की वास्तविक स्थिति का आकलन हुआ. संरक्षण के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई. इससे वन विभाग को एक सटीक और अद्यतन तस्वीर मिली, जो संरक्षण रणनीति बनाने में अत्यंत उपयोगी साबित हुई. असली जानकारी समुदाय के पास तकनीक के साथ-साथ स्थानीय समुदायों का ज्ञान भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बना. ओढ़, अमलोर, आमामोरा, नारिपानी, अमली, खालगढ़, मेचका, बमनीझोला, आमगाँव, बहिगाँव और कारिपानी जैसे गांवों के वनवासियों से बातचीत कर इन प्रजातियों के पुराने रहवास क्षेत्रों, भोजन के स्रोतों और आवागमन के रास्तों की जानकारी जुटाई गई. यह पारंपरिक ज्ञान कई मामलों में वैज्ञानिक डेटा का पूरक साबित हुआ. तीन वर्षों में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम एकत्रित जानकारी और विश्लेषण के आधार पर पिछले तीन वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. लगभग 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया गया. हॉटस्पॉट क्षेत्रों के 21 तालाबों में सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाए गए, जो गर्मियों में सूख जाया करते थे. फाइकस प्रजातियों और फलदार वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण किया गया. जल संरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच, चेक डैम और जल संचयन संरचनाएँ बनाई गईं. इसके साथ ही अवैध शिकार रोकने के लिए 60 से अधिक एंटी-पोचिंग अभियान चलाए गए, जिनमें ओडिशा और यूएसटीआर क्षेत्र से लगभग 500 शिकारी और लकड़ी तस्करों की गिरफ्तारी हुई. समुदाय के साथ संरक्षण की नई पहल वन विभाग ने समुदाय आधारित संरक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं. इनमें प्रमुख हैं, “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” जहाँ हॉर्नबिल के लिए भोजन उपलब्ध कराया जाता है. “वीविंग बैक द स्क्विरल कैनोपी” भारतीय विशाल और उड़न गिलहरियों के लिए जुड़े हुए वृक्ष छत्रों का पुनर्निर्माण. इन पहलों ने स्थानीय लोगों को संरक्षण का सक्रिय भागीदार बना दिया है. अब लौट रही हैं दुर्लभ प्रजातियाँ इन संयुक्त प्रयासों के परिणाम अब दिखने लगे हैं. मालाबार पाइड हॉर्नबिल, जो पहले केवल कुलहाड़ीघाट परिक्षेत्र में दर्ज की जाती थी, अब चार परिक्षेत्रों-कुलहाड़ीघाट, अरसिकनहार, दक्षिण उदंती और इंदागाँव- तक फैल चुकी है. इसी तरह भारतीय विशाल गिलहरी और उड़ने वाली गिलहरी भी अब रिजर्व के कई नए क्षेत्रों में दिखाई देने लगी हैं. यह विस्तार न केवल इन प्रजातियों की वापसी का संकेत है बल्कि जंगलों के बेहतर होते स्वास्थ्य का भी प्रमाण है. यही जंगल महानदी का उद्गम स्थल भी हैं. इको-टूरिज्म से खुलेगा विकास का नया रास्ता विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएँ हैं. विशेषकर गर्मियों के मौसम में यहाँ बर्ड वॉचिंग के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं. इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और पलायन कम हो सकता है. तकनीक और परंपरा का सफल संगम उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का यह मॉडल दिखाता है कि जब आधुनिक तकनीक और स्थानीय ज्ञान साथ आते हैं तो जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण में चमत्कारी परिणाम मिल सकते हैं. यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है.