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प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने में जनता की भूमिका सबसे अहम, सब मिलकर बनाएं टीबी मुक्त भारत…. स्वास्थ्य मंत्री

रायपुर एमसीबी जिले से टीबी मुक्त भारत अभियान का स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया शुभारंभ विश्व क्षय दिवस के अवसर पर पूरे देश के साथ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में भी “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान की शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा नोएडा से वर्चुअल माध्यम से की गई, वहीं छत्तीसगढ़ में इसका राज्य स्तरीय शुभारंभ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से होना अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण बन गया। एमसीबी जिले से टीबी मुक्त भारत अभियान का स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बोले – जनभागीदारी से ही होगा टीबी का अंत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि 24 मार्च का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “टीबी मुक्त भारत” का संकल्प तेजी से साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि 7 दिसंबर 2024 से 24 मार्च 2025 तक चले अभियान में 4113 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की 118 ग्राम पंचायतों के सरपंचों को उत्कृष्ट कार्य के लिए गांधी जी की प्रतिमा एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अब गांव-गांव पहुंचेगी हाईटेक जांच –   AI  से 10 मिनट में मिलेगी रिपोर्ट अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्वास्थ्य सेवाएं अब गांव-गांव तक पहुंचेंगी। आयुष्मान स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों की जांच की जाएगी, जिसमें रक्त जांच के साथ हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से मौके पर ही छाती का एक्स-रे किया जाएगा। आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI ) तकनीक की मदद से मात्र 5 से 10 मिनट में रिपोर्ट उपलब्ध होगी, जिससे शुरुआती स्तर पर ही टीबी की पहचान संभव हो सकेगी। जिले में 203 मरीज उपचार, निक्षय योजना से मिल रही पोषण सहायता वर्तमान में जिले में 203 टीबी मरीज उपचाररत हैं, जिनमें 7 एमडीआर और 4 टीबी संक्रमण के मरीज शामिल हैं। सभी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा 1000 रुपये प्रतिमाह (6 माह तक) तथा राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 200 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। वहीं वर्ष 2025-26 में 205 निक्षय मित्रों द्वारा 283 मरीजों को गोद लेकर पोषण आहार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही जिले में 3 ट्रू-नेट मशीन, 5 सामान्य एक्स-रे मशीन और 1 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के माध्यम से जांच कार्य संचालित किया जा रहा है। जागरूकता रथ रवाना, 100 दिनों में घर-घर पहुंचेगा अभियान अभियान को चार चरणों में संचालित किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में घर-घर सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी। इसके बाद हाई रिस्क क्षेत्रों, भीड़भाड़ वाले स्थानों, शहरी और जनजातीय क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो जिलेभर में अभियान का प्रचार-प्रसार करेगा। कार्यक्रम में चंपा देवी पावले, महापौर रामनरेश राय, सभापति संतोष सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, एमआईसी सदस्य नीलम सलूजा, मंडल अध्यक्ष पुरुषोत्तम सोनकर, राम लखन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में संकल्प लिया कि “हम सब ने ठाना है, छत्तीसगढ़ से टीबी को भगाना है। टीबी हारेगा, देश जीतेगा।”

विदिशा के डायल 112 हीरोज: सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को समय पर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  विदिशा जिले के थाना सिरोंज क्षेत्र में ट्रैक्टर और कार की टक्कर में घायल हुए लोगों को डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई से समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। डायल-112 टीम की तत्परता से घायलों को शीघ्र चिकित्सीय सहायता मिल सकी। दिनांक 24 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सिरोंज क्षेत्र अंतर्गत दीनदयाल पार्क के पास ट्रैक्टर और कार की टक्कर हो गई है, जिससे कई लोग घायल हो गए हैं। सूचना प्राप्त होते ही सिरोंज थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  रामनरेश एवं पायलट  प्रेमनारायण ने पाया कि दुर्घटना में 05 व्यक्ति घायल हो गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सिविल अस्पताल सिरोंज पहुँचाकर भर्ती कराया। डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई के कारण घायलों को समय पर चिकित्सीय सहायता मिल सकी। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा हर आपात स्थिति में आमजन की सहायता और जीवन रक्षा के लिए सदैव सजग और प्रतिबद्ध है।  

आतंकियों के लिए बनेगी ‘काला पानी’ जैसी जेल! सम्राट चौधरी ने लोकेशन का किया खुलासा

पटना बिहार सरकार 'काला पानी' जैसी नई हाई सिक्योरिटी जेल बनाने जा रही है। इसमें आतंकियों और दुर्दांत अपराधियों को कैद रखा जाएगा। इस जेल की जगह फाइनल कर दी गई है। राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि इसका निर्माण कैमूर जिले में स्थित अधौरा पहाड़ पर किया जाएगा। इस जेल में बंद खूंखार अपराधी बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को समृद्धि यात्रा के तहत कैमूर जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सम्राट ने कहा कि कैमूर को जंगल और पहाड़ वाला इलाका माना जाता है। पिछले साल जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रगति यात्रा पर आए थे, तब उन्होंने उस पहाड़ पर डिग्री कॉलेज खोलने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि अब नीतीश सरकार ने तय किया है कि कैमूर के अधौरा पहाड़ पर हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी। सबसे खूंखार आतंकवादी होंगे, उन्हें यहां बंद किया जाएगा। पहाड़ी पर इस तरह की जेल बनाने की घोषणा सम्राट ने ही पिछले दिनों बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में की थी। हालांकि, उस समय यह नहीं बताया गया था कि यह जेल कहां बनाई जाएगी। अब इसकी जगह फाइनल कर दी गई है। कैसी होगी हाई सिक्योरिटी जेल सम्राट चौधरी ने पिछले महीने सदन में कहा था कि नई हाई सिक्योरिटी जेल में खूंखार अपराधियों को रखा जाएगा। इसे ऐसी पहाड़ी पर बनाया जाएगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं आएगा और इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं होगी। इस जेल तक आने-जाने का बस एक ही रास्ता होगा, उस पर भी कड़ा पहरा होगा। गृह मंत्री ने बताया था कि इस जेल में बाहर से किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं होगी। इसमें कैद अपराधी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए रहेंगे। यहां से ना तो कोई शख्स बाहर जा पाएगा और ना ही अंदर आ पाएगा। जेल के अंदर से आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर और माफिया को भी यहां रखा जाएगा। काला पानी जैसी होगी नई जेल? अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी जेल कहा जाता है। अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को इसमें कैद रखा जाता था और उन्हें बहुत कठोर यातनाएं दी जाती थीं। यहां कैद लोग बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग हो जाते थे। उन्हें काल कोठरियों में बंद रखा जाता था। कोल्हू से तेल निकालने जैसे कठिन काम कराए जाते थे। इसी वजह से इसे काला पानी की सजा कहा जाता था।  

पंजाब में बड़ा विभागीय फेरबदल: चीमा को ट्रांसपोर्ट, भुल्लर से जेल विभाग लेकर डॉ. रवजोत को दिया

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के पोर्टफोलियो में फेरबदल किया है। पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के इस्तीफे और गिरफ्तारी के बाद उनके दोनों विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए गए हैं। पंजाब वेयरहाउस के जिला मैनेजर रहे गगनदीप सिंह रंधावा के खुदकुशी मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के विभागों का बंटवारा किया गया है। पंजाब सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के पोर्टफोलियो में फेरबदल किया है। पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के इस्तीफे और गिरफ्तारी के बाद उनके दोनों विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए गए हैं। वित्त मंत्री हरपाल चीमा को ट्रांसपोर्ट विभाग दिया गया है। वहीं जेल विभाग की जिम्मेदारी डॉ. रवजोत को दी गई है। उक्त दोनों विभाग पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के पास थे।   कोर्ट में भुल्लर की पेशी आज इस मामले में पूर्व मंत्री लाल सिंह भुल्लर को पुलिस ने सोमवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया है। भुल्लर को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। आज उनके शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। भुल्लर की पोस्ट पर क्या बोली रंधावा की बेटी वहीं भुल्लर की खुद को निर्दोष बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर रंधावा की बेटी ने मीडिया के सामने बयान दिया है। रंधावा की बेटी ने कहा कि भुल्लर की ओर से खुद को निर्दोष बताए जाने के दावे बेबुनियाद हैं। उनके मुताबिक, उनके पिता को लगातार फोन कॉल के जरिए दबाव डाला जाता था। उन्होंने कहा कि इन कॉल्स की संख्या काफी है और इसकी जांच साइबर सेल से कराई जानी चाहिए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित सरकारी कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि वीडियो में उनके पिता यह कहते दिखाई देते हैं कि उन पर दबाव बनाया जा रहा था। परिवार की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, इस मामले में पुलिस और अन्य एजेंसियों की कार्रवाई की ओर से बनती कार्रवाई की जा रहीं है। यह है मामला गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार रात को जहरीला पदार्थ निगल लिया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने मरने से पहले बनाए वीडियो में पंजाब के मंत्री लालजीत भुल्लर का नाम लिया था। वीडियो सामने आने के बाद सीएम ने तुरंत मंत्री का इस्तीफा ले लिया था। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और परिवार का दबाव बढ़ा तो भुल्लर, उसके पिता और उसके पीए के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

45 लाख रूपये की लागत के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंगलवार को 45 लाख रुपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि जनता की सेवा और क्षेत्र का समग्र विकास ही हमारा मूल मंत्र है। यही कारण है कि क्षेत्र में विकास के कार्य अनवरत जारी हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार विकास कार्यों और जन-कल्याण के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राज्यमंत्री गौर ने 23 लाख रुपये की लागत से विवेकानंद कॉलोनी के पार्क में बाउंड्री वॉल एवं पाथवे का निर्माण और रजत नगर में सड़क के डामरीकरण कार्य का भूमि-पूजन किया। वहीं राजीव नगर 'ए' सेक्टर में 22 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण, शेड निर्माण और पेवर ब्लॉक लगाने के कार्यों का भी भूमि-पूजन किया गया। भूमि-पूजन के इस भव्य कार्यक्रम में पार्षद ममता विश्वकर्मा, छाया ठाकुर, श्री संतोष ग्वाला, श्री मनोज विश्वकर्मा, श्री बृजेश व्यास, श्री प्रदीप लोधी, श्री दलजीत सिंह, श्री संजय जी, श्री प्रतीक पाराशर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

वन मंत्री कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात

रायपुर वन मंत्री  कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने विकास की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बस्तर का समग्र विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की राह में आने वाली हर बाधा को दूर करना उनका लक्ष्य है।  मंत्री  केदार कश्यप ने आज नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बस्तर विकासखंड में विकास की नई इबारत लिखी। उन्होंने क्षेत्र के सघन दौरे के दौरान मुरकुची और पखना कोंगेरा में आयोजित भव्य कार्यक्रमों मंस शिरकत की, जहाँ उन्होंने विधायक निधि से स्वीकृत कुल 56 लाख रूपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन कर ग्रामीणों को बड़ी सौगात दी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर आवागमन और सामुदायिक सुविधाओं में व्यापक सुधार सुनिश्चित होगा। जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुलियाओं का निर्माण केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। उन्होंने पूर्ववर्ती कठिनाईयों का स्मरण कराते हुए कहा कि बरसात के दिनों में छोटे-छोटे नालों के उफान पर होने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों और मरीजों को जो परेशानियां झेलनी पड़ती थीं, अब ये नई पुलियाएं उन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेंगी। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाना ही सुशासन की असली पहचान है। उन्होंने पुल-पुलिया के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ये निर्माण कार्य स्थानीय परिवहन को सुगम बनाएंगे और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में किसानों की मदद करेंगे। साथ ही तारागांव में सामुदायिक भवन के निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए गांवों में सुरक्षित और पक्के भवनों का होना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीण समाज एकजुट होकर अपनी परंपराओं का निर्वहन कर सके। मंत्री  कश्यप ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए अपील की कि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्वयं भी नजर रखें, क्योंकि यह संपत्ति उनकी अपनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारायणपुर विधानसभा के हर कोने में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार निरंतर जारी रहेगा और धन की कमी को कभी विकास में बाधक नहीं बनने दिया जाएगा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष  संतोष बघेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।    

सरोजिनी नायडू महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव में हुए शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव समारोह स्वयंप्रभा-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने कहा, "ट्राय फॉर द बेस्ट, प्रीपेयर फॉर द वर्स्ट " और समझाया कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्लेषण और धैर्य से ही लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इस ऊँचाई को बनाए रखने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि यही किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास का आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश आबादी युवा है, जो भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की ऊर्जा, शिक्षा और सही दिशा का समन्वय हो जाए, तो भारत विश्व गुरु बनकर विश्व में शांति और स्थिरता स्थापित कर सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से 21वीं सदी भारत की सदी होगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रतिष्ठा वर्षों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण से बनती है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. श्याम बिहारी गोस्वामी के कार्यों और उनके प्रभावशाली वक्तृत्व कौशल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि टीम वर्क और योग्य कर्मचारियों का सम्मान करना संस्थान की सफलता की कुंजी है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत किया। पं. शंकरदयाल शर्मा स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत कु. हिमानी पांडेय को ऑल राउंडर पुरस्कार एवं कु. अर्पणा चौबे को बेस्ट डिबेटर पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त 10 विशिष्ट पुरस्कार भी दिए गए। प्रावीण्य सूची की छात्राओं को पारितोषिक वितरण किया गया एवं एनसीसी व एनएसएस की छात्राओं को भी पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सम्मानित छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षित, आत्मविश्वासी और संस्कारित युवा ही देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आयोजन के लिए कॉलेज प्रबंधन को शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों, एनसीसी कैडेट्स एवं छात्राओं की उपस्थिति रही।  

राजधानी से दूरस्थ जनजातीय अंचल नागलवाड़ी तक होने लगे हैं नीतिगत निर्णय

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल प्रशासन में उनके द्वारा मंत्रि-परिषद की बैठकों के आयोजन के लिए नवाचार करते हुए विभिन्न अंचलों में इन्हें करने की पहल की गई। विकास और जनकल्याण से जुड़े नीतिगत निर्णय सिर्फ मंत्रालय, भोपाल में ही नहीं प्रदेश के सुदूर अंचलों में भी लिए जाने लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में गत सवा 2 वर्ष में राजधानी भोपाल के अतिरिक्त कई स्थानों पर मंत्रि-परिषद बैठक किये जाने संबंधी नवाचार हुआ है। मध्यप्रदेश में किया गया ये नवाचार आम जनता द्वारा भी काफी सराहा गया है। भोपाल के साथ ही जबलपुर, दमोह, खरगौन, नर्मदापुरम्, छतरपुर और बड़वानी जिलों में मंत्रि- परिषद की बैठकें हो चुकी है। इन बैठकों में जनकल्याण से जुड़े बहुआयामी निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य कैबिनेट के साथ ही कृषि कैबिनेट भी प्रदेश के प्रत्येक अंचल में करने का निर्णय लिया है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ कैबिनेट प्रस्तावित है। जबलपुर और सिंग्रामपुर से हुई पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री पद का दायित्व ग्रहण करने के पश्चात सर्वप्रथम ऐसे गौरवशाली व्यक्तित्व के जीवन से नागरिकों को परिचित करवाने की पहल की जिनके बारे में प्रदेश के जन-जन को जानकारी होना चाहिए। स्वाधीनता संग्राम से लेकर प्रदेश के विकास में संलग्न रही ऐसी हस्तियों के जीवन और कार्यों से युवा पीढ़ी को परिचित करवाया जा रहा है जिससे वे प्रेरणा ग्रहण कर सकें। ऐसे प्रयासों में विभिन्न गौरवशाली व्यक्तित्व की स्मृति में कार्यक्रमों के आयोजन के साथ, भोपाल के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर मंत्रि-परिषद की बैठकों का आयोजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबसे पहले जबलपुर में हुई मंत्रि-परिषद बैठक से यह पहल प्रारंभ की। राजधानी भोपाल के अलावा इन स्थानों पर हुईं बैठकें मंत्रि-परिषद बैठक के आयोजन के लिए रानी दुर्गावती और देवी अहिल्याबाई की स्मृति से जुड़े स्थानों का भी ध्यान रखा गया। प्रदेश में ऐसे व्यक्तित्व चयनित किए गए जिनके शासन क्षेत्र और सेवा क्षेत्र के स्थानों पर बैठकों के आयोजन हों। इस कड़ी में ऐसे स्थानों में दमोह जिले का सिंग्रामपुर, खरगौन जिले का महेश्वर, नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी, छतरपुर जिले का खजुराहो और इंदौर का राजवाड़ा स्मारक आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जनजातीय संस्कृति के प्रमुख केंद्र बड़वानी जिले में मंत्रि-परिषद की बैठक का आयोजन किया। यह इस वर्ष की प्रथम कृषि कैबिनेट भी थी। प्रदेश के विभिन्न स्थानों से जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क का कार्य भी इससे आसान हुआ है। राजधानी में ही जन हित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते रहे हैं, इस नवाचार से अब प्रदेश के छोटे से ग्राम नागलवाड़ी से भी जन कल्याण के महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं। स्थानों पर हुई मंत्रि-परिषद की बैठकों में लिए गए प्रमुख निर्णय 3 जनवरी 2024 : जबलपुर के शक्ति भवन में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी और रानी दुर्गावती के सम्मान में पुरस्कार शुरु करने का निर्णय। यह पुरस्कार विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर सफल होने वाली समाजसेवी महिलाओं को दिया जाता है। रानी अवंती बाई लोधी और रानी दुर्गावती के प्रेरणादायी विषय स्कूल, कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत- अन्न-कोदो-कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा आदि के उत्पादक किसानों को प्रति किलो 10 रुपये की राशि खाते में करने का निर्णय। तेन्दूपत्ता संग्राहक दर में एक हजार रुपये प्रति बोरा की वृद्धि करते हुए इसे 4 हजार रुपये प्रति बोरा किया गया। ग्वालियर व्यापार मेले में मोटरयान कर दर पर 50 प्रतिशत छूट का निर्णय। प्रदेश में बुनियादी सिंचाई सुविधाएं विकसित करने के लिए दृष्टि से 32 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति। 5 अक्टूबर 2024 : दमोह जिले के सिंग्रामपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती के सम्मान में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना में में 3900 रुपये प्रति हैक्टेयर अतिरिक्त सहायता राशि मंजूर। जबलपुर स्थित मदन महल पहाड़ी पर 100 करोड़ रुपये की लागत से रानी दुर्गावती स्मारक एवं उद्यान विकसित करने के लिए स्वीकृति। 24 जनवरी 2025 को लोकमाता अहिल्याबाई की नगरी महेश्वर (जिला खरगौन) में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। प्रदेश में उज्जैन, महेश्वर, मैहर, ओरछा, अमरकंटक जैसे 19 नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मदिरा को प्रतिबंधित किए जाने की स्वीकृति। प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में वर्तमान में प्रचलित मुख्यमंत्री कृषक योजना के अंतर्गत सोलर कृषि पंप शामिल किए जाने की स्वीकृति। मध्यप्रदेश एनीमेशन, मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग कॉमिक्स और विस्तारित रियलिटी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग कॉमिक्स और विस्तारित रियलिटी नीति-2025 जारी किए जाने की मंजूरी। भोपाल में बावड़ियाकला चौराहा से ऑशिमा मॉल तक रेलवे ओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति। प्रदेश के 3 नए जिलों मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा जिला चिकित्सालय के संचालन के लिए 424 नवीन पदों की स्वीकृति। 20 मई 2025 : लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के 300 वें जयंती वर्ष पर इंदौर के राजवाड़ा में मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में 3 हजार 867 करोड़ रुपये की योजना एवं निर्माण कार्यों की स्वीकृति। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना शुरु करने की मंजूरी। मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 को स्वीकृति करने का निर्णय। अधिनिय़म लागू होने के बाद महानगर योजना समिति एवं महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन हुआ। इन्दौर, उज्जैन, देवास, धार एवं भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, ब्यावरा (राजगढ़) महानगरीय क्षेत्र बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन कार्यक्रम की वित्तीय वर्ष 2028-29 तक निरंतरता की स्वीकृति। उज्जैन, पीथमपुर, मालनपुर घिरौंगी और मंडीदीप स्थित 4 औद्योगिक क्षेत्र में 249 करोड़ 66 लाख रुपये की लागत से वर्किंग वीमेन हॉस्टल के निर्माण की मंजूरी। ओंकरेश्वर में एकात्म धाम परियोजना अंतर्गत आचार्य शंकर संग्रहालय अद्वैत लोक के निर्माण के लिए 2195 करोड़ रुपये से अधिक की पुनरीक्षित स्वीकृति। महाराजा यशवंत राव चिकित्सालय परिसर इन्दौर और श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के उन्नयन के लिए 1095 करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति। 3 जून 2025 : नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी के राजभवन में राजा भभूत सिंह के शौर्य को समर्पित मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई। मध्यप्रदेश में एग्रीटेक … Read more

महिला आरक्षण लागू होने पर यूपी में सीटों का विस्तार, 120 सांसद और 603 विधायक चुनने की तैयारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 2029 के आम चुनाव से मतदाता 80 के बदले 120 लोकसभा सीटों और 2032 के विधानसभा चुनाव से 403 की जगह पर 603 असेंबली सीटों के लिए सांसद और विधायक चुनते नजर आ सकते हैं, जिनमें 40 लोकसभा और 200 विधानसभा सीट पर हर एक कैंडिडेट महिला हो सकती है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन कानून में जरूरी बदलाव करके 2029 के चुनाव से विधायिका में महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कई राजनीतिक दलों के नेताओं से इसको लेकर चर्चा की और आगे सर्वदलीय बैठक बुलाकर सरकार के प्रस्ताव पर पक्ष-विपक्ष के दलों के सुझाव के साथ इस पर काम आगे बढ़ सकता है। सरकार मौजूदा सीटों को 50 फीसदी बढ़ाकर बढ़ी सीटों पर 33 फीसदी कोटा महिला का तय करने की योजना बना रही है। संविधान में 106वें संशोधन के जरिए महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) बनाया गया था। अमित शाह की बैठक में शामिल रहे नेताओं के हवाले से यह बात बाहर आई है कि केंद्र सरकार का प्रस्ताव है कि इस साल शुरू हुई जनगणना के नतीजों और उसके आधार पर परिसीमन का इंतजार किए बगैर महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर काम कर लिया जाए। इससे उन राज्यों की तकलीफ भी कम होगी, जिन्हें प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण करने के बाद सीटों के नए बंटवारे में नुकसान का डर था। सरकार की तरफ से यह भी प्रस्ताव है कि राय बने तो अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सीटों को उसी अनुपात में महिला आरक्षण के दायरे में लाया जा सकता है। योजना है कि लोकसभा की 543 सीटों को 816 कर दिया जाए और उसमें 273 महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाए। उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण के लिए 120 लोकसभा और 603 विधानसभा सीट! केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर आम सहमति बनी तो 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले सभी संसदीय और विधानसभा चुनावों की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। यूपी में लोकसभा की 80 सीटों को बढ़ाकर 120 किया जा सकता है और उसमें 40 सीट महिलाओं के लिए रिजर्व किया जा सकता है। इसी तरह विधानसभा की सीट संख्या 403 को बढ़ाकर 603 किया जा सकता है और उसमें 200 से 201 असेंबली सीटों को महिला आरक्षित किया जा सकता है। सरकार अभी सहयोगी और विपक्षी दलों से रायशुमारी के चरण में है। सरकार की योजना यह है कि अगर सब राजी हो जाएं तो बजट सत्र में ही या कुछ समय बाद विशेष सत्र बुलाकर कानून में जरूरी संशोधन करके महिला आरक्षण को लागू करने की तरफ कदम बढ़ाया जाए।  

अंदरूनी इलाकों में लौटी पढ़ाई की रौनक, बस्तर के 123 स्कूलों में फिर गूंजी घंटी

सुकमा। नक्सलवाद के काले साये को पीछे छोड़ते हुए छत्तीसगढ़ के अंदरूनी इलाकों में शिक्षा का उजाला एक बार फिर तेजी से फैल रहा है। शासन की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सलवा जुडूम आंदोलन के दौरान नक्सलियों के दहशत से बंद हुए सुकमा जिले के सैकड़ों स्कूलों के दरवाजे अब बच्चों के लिए पूरी तरह खुल चुके हैं और छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्लानार योजना से शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। पुनर्जीवित हुई शिक्षा व्यवस्था दस्तावेज के मुताबिक, वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और सलवा जुडूम आंदोलन के कारण कुल 123 स्कूल बंद हो गए थे। इनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक शालाएं शामिल थीं। प्रशासन के निरंतर प्रयासों से इन सभी स्कूलों को पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वर्तमान में ऐसे स्कूलों की संख्या शून्य है, जो पूर्व में माओवादी प्रभाव के कारण बंद थे। प्रमुख उपलब्धियां और बुनियादी ढांचा शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दूरस्थ इलाकों के छात्रों के भविष्य को देखते हुए आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों का जाल बिछाया गया है। पोटा केबिन (आवासीय विद्यालय) वर्तमान में 16 पोटा केबिन संचालित हैं, जिनमें 6,722 छात्र दर्ज हैं। छात्रावास सुविधा 16 पोटा केबिन छात्रावासों में 1,389 विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय टाइप-3 (कक्षा 6वीं से 12वीं) के 3 विद्यालयों में 600 छात्राएं और टाइप-4 (कक्षा 9वीं से 12वीं) के 2 छात्रावासों में 200 छात्राएं लाभान्वित हो रही हैं। नियद नेल्लानार योजना से नई शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में वर्ष 2024-25 में विकास की गति को और तेज करते हुए नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत शामिल गांवों में 07 नवीन प्राथमिक शालाएं खोली गई है। इन स्कूलों में अब तक 210 बच्चों ने प्रवेश लिया है। भविष्य की कार्ययोजना को देखते हुए प्रशासन ने 19 और नए स्कूल खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है। जमीनी स्तर पर आ रहे ये बदलाव न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, बल्कि इन क्षेत्रों में विश्वास की एक नई किरण भी जगा रहे हैं। शासन ने ‘पहले’ और ‘अब’ की तस्वीरों के साथ विकास के इस परिवर्तन को प्रमाणित भी किया है, जो स्पष्ट करता है कि बंदूक की गूंज पर अब स्कूलों में बच्चों के ककहरा की गूंज और किताबों की सरसराहट भारी पड़ रही है।