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जमानत मिलने के बाद पप्पू यादव होंगे रिहा

  पटना बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को पटना सिविल कोर्ट ने जमानत दे दी है. पप्पू यादव अब बेउर जेल से बाहर आएंगे. 9 फरवरी को ही पटना सिविल कोर्ट स्थित एमपी-एमएलए की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन बम की धमकी के बाद परिसर खाली करा दिया गया था और ये सुनवाई टाल दी गई थी. पप्पू यादव समेत तीन लोगों पर 31 साल पुराने एक मामले में केस दर्ज है. 6 फरवरी को पप्पू यादव दिल्ली में थे, उसी दिन देर शाम पटना स्थित आवास पहुंचने पर उनकी गिरफ्तारी हुई थी. इसके बाद उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया था.  बता दें कि पप्पू यादव के खिलाफ 1995 में पटना के गर्दनीबाग थाने में एक मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में जब पुलिस पप्पू यादव को गिरफ्तार करने गई तो उनके 20 अज्ञात समर्थकों ने पुलिस के सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की.  बुद्धा कॉलोनी थाने में थानेदार पल्लव के बयान पर पप्पू यादव के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई. इसमें पप्पू यादव और उनके समर्थकों पर पुलिस को धमकाने का आरोप लगाया.

केंद्र सरकार की योजना में उत्तर प्रदेश से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी पहचान

लखनऊ.  केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेटी) की महत्वाकांक्षी “स्टार्टअप एक्सेलेरेटर ऑफ मेटी फॉर प्रोडक्ट इनोवेशन, डेवलपमेंट एंड ग्रोथ” (SAMRIDH) योजना में उत्तर प्रदेश ने प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। स्टार्टअप्स को नवाचार, उत्पाद विकास और विस्तार के लिए तैयार करने वाली इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश से चयनित एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की संख्या यह संकेत देती है कि प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपनाई गई नीतियों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखने लगा है। योगी सरकार द्वारा केंद्र की योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश स्तर पर लगातार समन्वय किया जा रहा है। एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की निगरानी, मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है, ताकि युवा उद्यमियों को केवल फंडिंग ही नहीं बल्कि स्थायी विकास का रास्ता भी मिल सके। समृद्ध को लेकर उत्तर प्रदेश से कुल 10 एक्सेलेरेटरों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जमा किया था। इनमें से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन किया गया। इन चयनित एक्सेलेरेटरों के माध्यम से प्रदेश के 35 स्टार्टअप्स को एक्सेलेरेशन सपोर्ट दिया गया, जिनमें से 27 स्टार्टअप्स फंडिंग प्राप्त करने में सफल रहे। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को इस योजना के तहत कुल 9.91 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई। यह राशि स्टार्टअप्स को उनके उत्पाद के विकास, बाजार विस्तार और तकनीकी मजबूती के लिए दी गई है। केंद्र सरकार की इस योजना में स्टार्टअप्स को अधिकतम 40 लाख रुपये तक की मैचिंग फंडिंग का प्रावधान है, जबकि प्रत्येक स्टार्टअप के लिए एक्सेलेरेटरों को भी वित्तीय सहयोग दिया जाता है। प्रदेश सरकार का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स के लिए बनाए गए अनुकूल माहौल का ही यह परिणाम है कि उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता का मजबूत केंद्र बन रहा है। नई स्टार्टअप नीति, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बढ़ावा, इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पहल युवाओं को उद्यम के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। समृद्ध योजना के अंतर्गत हेल्थ टेक, एजुकेशन टेक, एग्री टेक, फिनटेक, सॉफ्टवेयर सर्विस और कंज्यूमर टेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को समर्थन दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स की इन सेक्टर्स में सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि राज्य की अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर ज्ञान और तकनीक आधारित मॉडल की ओर अग्रसर है।

बेटियों के सशक्तिकरण की पहल: दिल्ली में रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा ऐलान

दिल्ली दिल्ली की भाजपा सरकार ने लखपति बिटिया योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुआई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही 2008 में लॉन्च की गई लाडली योजना को बंद कर दिया गया है। लखपति बिटिया योजना के तहत ग्रेजुएशन करने के बाद बेटियों को एक लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इससे पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी महिला केंद्रित योजनाएं चलाई जा चुकी हैं जिनमें प्रतिमाह अथवा सालाना आर्थिक सहायता महिलाओं को दी जाती है। अब दिल्ली में भाजपा सरकार ने बेटियों को एकमुश्त रकम देकर लखपति बनाने की पहल की है। कैबिनेट में मुहर के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 31 मार्च तक लाडली योजना बंद कर दी जाएगी और इसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा हर परिवार से दो बिटिया को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। दिल्ली में जन्मी हर बच्ची को इस योजना से जोड़ा जाएगा और ग्रेजुएशन पूरा होने पर मिनिमम एक लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'दिल्ली लखपति बिटिया योजना के तहत हर बच्ची को, जो दिल्ली की निवासी है, जिसका परिवार दिल्ली में रहता होगा, घर में दो बच्चियों को इसका लाभ दिया जाएगा। हर बच्ची पर 20-20 हजार रुपये बढ़ाया जाएगा। पहले 36 हजार था, उसे हमने 56 हजार किया है। 12वीं में जाने पर नहीं, हमने मोटिवेट किया है कि ग्रेजुएशन करने पर मैच्योरिटी मिलती है। मेच्योरिटी पर मिनिमम एक लाख रुपये मिलेंगे।' दिल्ली लखपति बिटिया योजना की क्या-क्या शर्तें मुख्यमंत्री ने योजना की कुछ शर्तों की जानकारी देते हुए बताया कि योजना की लाभार्थी बच्चियों का वैक्सीनेशन होना जरूरी है। मान्यताप्राप्त स्कूल से पढ़ना जरूरी है और यदि 18 साल के उम्र से पहले शादी की जाती है तो लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसकी अनुमानित लागत 160 करोड़ रुपये आएगी, लेकिन यदि इससे अधिक भी लगे तो सरकार फंड को बढ़ाएगी। लाडली योजना क्यों बंद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की बेटियों से जुड़ी लाडली योजना 2008 में शुरू हुई थी। बच्ची को अलग-अलग फेज में पैसे दिए जाते थे। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार ने जब पता किया तो सामने आया कि करोड़ों रुपये बैंक के पास अनक्लेम्ड हैं। लाभार्थी को मिले ही नहीं। 1.86 लाख बेटियों को यह पैसा नहीं मिला। सरकार ने उन्हें खोजा। एक साल में ऐसी तीस हजार बच्चियों को खोजकर 90 करोड़ राशि दी है। अब 41 हजार बच्चियां और मिली हैं जिन्हें लगभग 100 करोड़ का फंड दिया जाएगा।  

बिहान योजना से पंचबाई की बदली तकदीर, बनी सफल व्यवसायी

रायपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में  मुंगेली जिले के विकासखण्ड लोरमी के ग्राम खपरीडीह निवासी श्रीमती पंचबाई साहू ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता प्राप्त की है। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी तकदीर बदली है, अब वे सफल व्यसायी बन चुकी है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व पंचबाई साहू की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें साहूकारों से ऊँचे ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था। आर्थिक निर्भरता के कारण न केवल परिवार की बुनियादी ज़रूरतें अधूरी रह जाती थीं, बल्कि आत्मसम्मान भी प्रभावित होता था।        श्रीमती  पंच बाई ने बताया कि बिहान योजना के अंतर्गत माँ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उन्होंने व्यवसाय के लिए रिवॉल्विंग फंड से 15 हजार रूपए, बैंक ऋण 01 लाख 50 हजार रूपए और 60 हजार रूपए सीआईएफ राशि प्राप्त हुई। साथ ही समूह के स्तर पर उन्हें 30 हजार रूपए का अतिरिक्त सहयोग भी मिला। प्राप्त राशि से उन्होंने फर्नीचर दुकान की शुरुआत की। परिश्रम, सही योजना और समूह के सहयोग से उनका व्यवसाय निरंतर आगे बढ़ता गया। आज उनकी मासिक आय लगभग 2.5 लाख रूपए से 03 लाख रूपए तक पहुँच चुकी है। इससे उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर होने के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार आया है। श्रीमती पंचवाई साहू आज केवल स्वयं सफल नहीं हैं, बल्कि ग्राम की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

राजस्थान में सर्दी हुई फीकी, तापमान सामान्य से अधिक

जयपुर  कुछ दिनों पहले तक राजस्थान के मौसम की तस्वीरों में बर्फ से जमे खेत-खलिहान दिखाई दे रहे थे लेकिन अब यहां भर सर्दी में गर्मी के जैसा एहसास होने लगा है। यहां मौसम अब धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। दिन में तेज धूप के कारण लोगों को हल्की गर्मी का एहसास होने लगा है। सोमवार को बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर समेत प्रदेश के 8 शहरों में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। बाड़मेर में सबसे अधिक तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके अलावा जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर में 30.6 डिग्री, फलोदी और जवाई (पाली) में 30.2, डूंगरपुर में 30.1, जालौर में 30 और चित्तौड़गढ़ में 30.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। अन्य शहरों की बात करें तो भीलवाड़ा में 29.3, जयपुर में 27, अजमेर में 28.4, पिलानी में 26.9, सीकर में 27.4, उदयपुर में 29.5, कोटा में 27.9, चूरू में 29.8, गंगानगर में 26.3 और नागौर में 29.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इन सभी स्थानों पर तापमान औसत से करीब 2 डिग्री अधिक रहा। रात की सर्दी से मिलने लगी राहत दिन के साथ-साथ अब रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जैसलमेर, फलोदी और बीकानेर में न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। डूंगरपुर में 14.9, बीकानेर में 15.3, जैसलमेर में 14.6, जयपुर में 13.7 और प्रतापगढ़ में 13.6 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। सबसे ठंडा इलाका पाली रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अगले कुछ दिन मौसम साफ मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार प्रदेश में अगले 3 से 4 दिनों तक मौसम साफ रहेगा और तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। पिछले 24 घंटों में उत्तरी जिलों को छोड़कर अधिकांश इलाकों में आसमान साफ रहा और तेज धूप खिली रही।

सबक्लेवियन आर्टरी कटने के बावजूद अत्यंत जटिल सर्जरी से बचाया गया मरीज का हाथ

रायपुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की एक और बड़ी सफलता, चाकू से कटी मुख्य धमनी, सबक्लेवियन आर्टरी को जोड़कर बचाया युवक का हाथ पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के डॉक्टरों ने एक बार फिर जटिल और जानलेवा केस की जटिल एवं सफलतापूर्वक  सर्जरी कर घायल मरीज के हाथ को कटने से बचाया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को समय पर इस प्रकार की जटिल शल्य- चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलती तो मरीज के हाथ कटने की नौबत आ जाती और मरीज दिव्यांग हो जाता।  हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में एक युवक के कंधे पर चाकू से हुए हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त मुख्य रक्त नली (सबक्लेवियन आर्टरी) को जोड़कर डॉक्टरों की टीम ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि उसका हाथ कटने से भी बचा लिया। इस सर्जरी की एक और विशेष बात यह रही कि इसमें ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल रहे जिनकी मदद से कॉलर बोन को काटा गया एवं ऑपरेशन के बाद वापस प्लेट लगाकर जोड़ दिया गया।   इस केस की विस्तृत जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष (हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी) डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि :- अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में 34 वर्षीय एक मरीज अत्यधिक रक्तस्राव और मरणासन्न अवस्था में लाया गया। मरीज  इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी में काम करता है और अमलेश्वर का निवासी है। परिजनों के अनुसार, मरीज अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से रायपुर रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी इलेक्ट्रिक रिक्शा से टक्कर हो गई। विवाद के दौरान रिक्शा चालक ने मरीज के बाएं कंधे पर धारदार चाकू से हमला कर दिया। घाव इतना गहरा था कि कंधे की हड्डी (क्लेविकल बोन) के पीछे से गुजरने वाली मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। चोट लगते ही धमनी से खून का तेज फव्वारा निकलने लगा और कुछ ही देर में मरीज बेहोश हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचाया, जहां घाव में कॉटन गॉज भरकर रक्तस्राव को अस्थायी रूप से रोका गया। हालांकि रक्तस्राव रुकने के साथ ही बाएं हाथ में रक्त प्रवाह भी बंद हो गया, जिससे हाथ काला पड़ने लगा और ताकत खत्म होने लगी। समय पर ऑपरेशन न होने की स्थिति में हाथ काटने की नौबत आ सकती थी। प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज के परिजन उसे अपनी इच्छा से अन्य अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन चोट की गंभीरता और धमनी के क्षतिग्रस्त होने के कारण अन्य अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को पुनः अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में लाया गया, जहां मेरे (डॉ. कृष्णकांत साहू के) नेतृत्व में तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी सबक्लेवियन आर्टरी की सर्जरी विशेष रूप से उसके दूसरे भाग (सेकंड पार्ट) में बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि यह धमनी छाती के भीतर कॉलर बोन के पीछे स्थित रहती है। पट्टी हटाते ही अत्यधिक रक्तस्राव की आशंका बनी हुई थी, जिसके लिए वैस्कुलर कंट्रोल अत्यंत आवश्यक था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि मरीज की कॉलर बोन को काटकर धमनी तक पहुंच बनाई जाए। कॉलर बोन को काटने के बाद पाया गया कि धमनी लगभग 3 सेमी तक पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुकी थी। इसे जोड़ने के लिए 7×30 मिमी. साइज का डेक्रॉन ग्राफ्ट (कृत्रिम नस) लगाया गया। सर्जरी के दौरान लगभग 5 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो सका। इस दौरान ब्रैकियल प्लेक्सस (तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, क्योंकि इसमें क्षति होने पर हाथ में स्थायी लकवे की संभावना रहती है। ऑपरेशन के बाद कॉलर बोन को प्लेट लगाकर वापस जोड़ दिया गया अब पूरी तरह स्वस्थ, काम पर लौटा मरीज सफल ऑपरेशन और समय पर उपचार के चलते मरीज का हाथ बच गया और गैंगरीन की स्थिति टल गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अपने रोजमर्रा के कार्यों में वापस लौट चुका है। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रणय वास्तव, डॉ लोमेश साहू,  एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू, जूनियर डॉक्टर – डॉ. आयुषी खरे, ख्याति, , आकांक्षा साहू, संजय त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश शामिल रहे। नर्सिंग स्टाफ में राजेन्द्र, नरेन्द्र, मुनेश, चोवा, दुष्यंत तथा एनेस्थेसिया तकनीशियन भूपेन्द्र और हरीश ने अहम भूमिका निभाई। यह सफलता न केवल अम्बेडकर अस्पताल बल्कि सभी के लिए गर्व का विषय है, जो यह साबित करती है कि समय पर सही निर्णय, समेकित प्रयास और विशेषज्ञ चिकित्सा से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। सबक्लेवियन आर्टरी जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण धमनी की मरम्मत प्रत्येक अस्पताल में संभव नहीं होती। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग, ट्रॉमा यूनिट और एनेस्थेसिया टीम के समन्वित प्रयास से यह संभव हो सका। यह प्रयास यह दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय और जीवन रक्षक उपचार सुविधा उपलब्ध है। डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने 283 जोड़ों को दिया आशीर्वाद

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की सराहनीय पहल छत्तीसगढ़ की साय सरकार की संवेदनशील और कल्याणकारी सोच का प्रतीक बनी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मंगलवार को राजिम के नवीन मेला मैदान में 283 जोड़ों का सामूहिक विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन के मुख्य अतिथि प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल रहे, जिन्होंने नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया। अध्यक्षता राजिम विधायक  रोहित साहू ने की। राज्य सरकार की इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाई है, जो समाज के हर वर्ग के लिए वरदान साबित हो रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज के दौर में बेटी की शादी हर परिवार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ की साय सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने इसे सुलझा दिया है। इस योजना के तहत प्रति जोड़े 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 35 हजार रुपये वधु के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित होते हैं। शेष 15 हजार रुपये श्रृंगार सामग्री, व्यवस्था और अन्य खर्चों पर व्यय किए जाते हैं।  अग्रवाल ने कहा कि यह योजना जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक तरीके से बेटी का विवाह करने में सहारा देती है। पूरे रीति-रिवाजों के साथ एक साथ इतने जोड़ों का विवाह होना समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की सराहना की तथा नवदंपतियों को सुखी वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस भव्य समारोह में राजिम विधानसभा क्षेत्र के 94, बिन्द्रनवागढ़ के 181 तथा कुरूद विधानसभा के 8 जोड़े शामिल हुए। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नई उम्मीद दी है। विधायक  रोहित साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सरकार की जनकल्याणकारी भावना का जीवंत उदाहरण है। विवाह का आर्थिक बोझ अब बोझ नहीं, बल्कि खुशी का अवसर बन गया है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार माना। कलेक्टर  बीएस उइके ने बताया कि यह आयोजन पूरे प्रदेश में एक साथ हो रहा है, जो विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगा। 4 आत्मसमर्पित नक्सली बंधे विवाह बंधन में, मुख्यधारा में लौटकर सराहा राज्य सरकार की योजना योजना की सबसे प्रेरणादायक कहानी रही चार आत्मसमर्पित नक्सली जोड़ों की। कांकेर, सुकमा और बीजापुर जिले से इन जोड़ों ने मुख्यधारा में लौटकर नई जिंदगी अपनाई है। इनमें दिलीप उर्फ संतु, मंजुला उर्फ लखमी, दीपक उर्फ भीमा मंडावी, सुनीता उर्फ जुनकी, कैलाश उर्फ भीमा, रनीता उर्फ पायकी कारम तथा राजेंद्र उर्फ कोसा मुरिया, जैनी उर्फ देवे मड़कम शामिल हैं। विवाह मंत्रोचार के बीच विवाह बंधन में बंधे इन नवदंपतियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की तारीफ की। नक्सली जोड़ों ने मीडिया से कहा कि मुख्यधारा में जुड़ने के बाद हमें नई जिंदगी मिली है। इस योजना से जीवनसाथी के साथ खुशहाल भविष्य का सपना साकार हो रहा है। इस अवसर पर कलेक्टर  बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक  वेदव्रत सिरमौर, जिला पंचायत सीईओ  प्रखर चंद्राकर, जिला कार्यक्रम अधिकारी  अशोक पाण्डेय के अलावा पूर्व विधायक  संतोष उपध्याय, राजिम नगर पालिका अध्यक्ष  महेश यादव, विभिन्न जनपद पंचायतों के अध्यक्षगण मती इंद्राणी साहू, मती मीरा ठाकुर,  सोहन धु्रव तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष  गौरीशंकर कश्यप ने भी संबोधित किया। राज्य सरकार की यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य भी कर रही है।

प्रधानमंत्री आवास योजना: 10 माह में जिले में कुल 27 हजार 441 आवासों का निर्माण पूर्ण

महासमुंद महासमुंद जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मात्र 10 माह की अवधि में जिले में कुल 27 हजार 441 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। जिसके आधार पर महासमुंद जिला राज्य स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। जिले में निर्मित कुल 27,441 आवासों में विभिन्न विकासखंडों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पिथौरा विकासखंड में सर्वाधिक 7,193 आवास, बागबाहरा विकासखंड में 6,102 आवास, महासमुंद विकासखंड अंतर्गत 5,775 आवास, सरायपाली विकासखंड अंतर्गत 5,062 आवास तथा बसना विकासखंड में 3,309 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन द्वारा गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्थायी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। योजना के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के सतत निरीक्षण में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा मैदानी अमले के सतत प्रयासों, नियमित निगरानी एवं प्रभावी समन्वय के चलते यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हितग्राहियों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता एवं निर्माण सामग्री उपलब्ध कराकर कार्यों में गति लाई गई। जिले में आवास निर्माण की इस उपलब्धि से हजारों परिवारों का पक्के मकान का सपना साकार हुआ है। लाभान्वित परिवारों ने केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने निरंतर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है। ताकि कोई भी पात्र परिवार आवास सुविधा से वंचित न रहे।

पंजाब पंचायत का नया फैसला: लव मैरिज पर रोक, नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त कदम

अमृतसर  अमृतसर जिले के गांव धारीवाल में पंचायत ने लव मैरिज को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए गांव की सीमा में ऐसे विवाहों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। पंचायत ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया है कि यदि गांव का कोई युवक-युवती आपसी सहमति से लव मैरिज करते हैं तो उन्हें गांव से बाहर कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, संबंधित परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और पंचायत की ओर से मिलने वाली सरकारी व सामाजिक सुविधाएं भी समाप्त कर दी जाएंगी।  पंचायत के प्रस्ताव में कहा गया है कि लव मैरिज करने वाले युवक-युवती या उनके परिवार को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। गांव के लोगों का तर्क है कि इससे पहले भी गांव में पांच से छह लव मैरिज के मामले सामने आ चुके हैं, जिनके बाद गांव का माहौल बिगड़ा। आपसी झगड़े, रंजिश, मारपीट और धमकियों की घटनाएं हुईं। कई मामलों में पुलिस थानों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़े, जिससे गांव में तनाव का माहौल बना रहा। गांव के सरपंच मुख्तार सिंह ने बताया कि पंचायत ने यह फैसला गांव के सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए लिया है। उन्होंने कहा कि अब लव मैरिज से जुड़े किसी भी मामले में न तो गांव का कोई व्यक्ति अदालत में गवाही देगा और न ही पुलिस थानों में जाकर आरोपियों की जमानत कराएगा। ऐसे मामलों में लव मैरिज करने वालों का समर्थन करने वालों पर भी पंचायत कार्रवाई करेगी और परिवार को इसके परिणाम भुगतने होंगे। सरपंच ने यह भी कहा कि पंचायत समय-समय पर ऐसे मामलों में दोषियों को सजा देने जैसे कदम भी उठाएगी। यह निर्णय किसी एक वर्ग के दबाव में नहीं, बल्कि गांव के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। पंचायत का दावा है कि इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को भटकाव से बचाना और गांव का माहौल शांतिपूर्ण बनाए रखना है। हालांकि, पंचायत के इस फैसले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे गांव की परंपराओं और सामाजिक अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बता रहे हैं। बावजूद इसके, फिलहाल धारीवाल पंचायत अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है और गांव में इसका सख्ती से पालन कराने की बात कह रही है।

बठिंडा कोर्ट का एक्शन: कंचन कुमारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह मेहरों भगोड़ा

बठिंडा  डिजिटल कंटेंट क्रिएटर कंचन कुमारी उर्फ कमल कौर भाभी की हत्या के मामले में बठिंडा की एक स्थानीय अदालत ने सिख कट्टरपंथी नेता अमृतपाल सिंह मेहरों को भगोड़ा (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर – पीओ) घोषित कर दिया है। आरोपित बार-बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। अदालत ने बीती 7 फरवरी को मामले की सुनवाई करते हुए फरार आरोपित अमृतपाल सिंह मेहरों को पीओ घोषित किया। मेहरों इस हत्याकांड का मुख्य आरोपित है और वारदात के बाद जून 2025 में देश छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस के अनुसार उसके वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में छिपे होने की आशंका है। इससे पहले अदालत ने बीती 1 दिसंबर 2025 को अमृतपाल सिंह मेहरों और उसके साथी व आरोपित रंजीत सिंह को गिरफ्तारी से बचने के आरोप में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। मामले में मेहरों के तीन सहयोगी व आरोपित जसप्रीत सिंह, निर्मतजीत सिंह और रंजीत सिंह को गिरफ्तार किए जा चुके हैं। बठिंडा कैंट थाने के एसएचओ दलजीत ढिल्लों ने बताया कि उन्हें अदालत का आदेश प्राप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अमृतपाल सिंह मेहरों के यूएई में छिपे होने की जानकारी है। राज्य सरकार व केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है, ताकि इंटरपोल की मदद से उसे भारत प्रत्यर्पित करवाया जा सके। इंटरपोल को आवश्यक विवरण भेजे जा चुके हैं और आधिकारिक जवाब का इंतजार है। अधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालत ने फरार आरोपित की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। मेहरों मोगा जिले के मेहरों गांव का रहने वाला है। सूत्रों के अनुसार भगोड़ा घोषित किए जाने से इंटरपोल के जरिए रेड कार्नर नोटिस जारी करवाने में पुलिस को और मदद मिलेगी। पुलिस जांच के अनुसार आरोपित अमृतपाल सिंह मेहरों, जसप्रीत सिंह और निर्मतजीत सिंह ने साल 2025 की 9-10 जून की रात को कंचन कुमारी की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। पुलिस का दावा है कि यह हत्या कंचन द्वारा इंटरनेट मीडिया पर डाली गई कथित आपत्तिजनक सामग्री को लेकर की गई, जिसे आरोपितों ने सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ बताया। हत्या के बाद आरोपितों ने कंचन का शव बठिंडा के भुच्चों मंडी स्थित आदेश मेडिकल कालेज एवं अस्पताल की पार्किंग में उसकी कार में छोड़कर फरार हो गए थे। 11 जून की शाम शव बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने बताया कि फरार अमृतपाल सिंह मेहरों की मदद करने वाले रंजीत सिंह को बीती 6 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है। रणजीत इस समय तीन दिन के पुलिस रिमांड पर है और उसे अदालत में पेश किया जाएगा। जसप्रीत सिंह और निर्मतजीत सिंह पहले ही गिरफ्तार होकर न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस के अनुसार रंजीत ने अमृतपाल सिंह मेहरों को अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचाने में मदद की थी, जहां से वह यूएई फरार हो गया।