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अब नहीं जाना पड़ता अन्य जिलों में, पांच हजार से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ

रायपुर. अब नहीं जाना पड़ता अन्य जिलों में, पांच हजार से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार का लाभ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) के अंतर्गत एमसीबी जिले में किडनी रोगियों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पहले उपचार के लिए अन्य जिलों अथवा राज्य के बाहर जाना पड़ता था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि जिले में 01 अक्टूबर 2024 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा किया गया था। बीते डेढ़ वर्ष में अब तक 5,210 से अधिक मरीजों का सफल डायलिसिस किया जा चुका है। इनमें नेगेटिव 3503, पॉजिटिव (सी) 1474 तथा पॉजिटिव (बी) 232 मरीज शामिल हैं। वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस उन मरीजों के लिए आवश्यक होती है जिनकी किडनी की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो चुकी होती है। विशेष रूप से स्टेज-5 क्रोनिक किडनी रोग, अचानक किडनी फेल्योर, अनियंत्रित मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों को इस उपचार की आवश्यकता पड़ती है।  डायलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ एवं अतिरिक्त तरल को बाहर निकालकर मरीजों को राहत दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब किडनी शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगें, अत्यधिक थकान, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तब डायलिसिस आवश्यक हो जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की स्थिति के अनुसार अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध इस निःशुल्क सुविधा से मरीजों का आर्थिक बोझ कम हुआ है तथा उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा

रायपुर. मुख्यधारा में लौटने के बाद चौगेल कैंप में दिया जा रहा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा मन में हो तो जीवन में हर काम आसान हो जाता है। इस कथन को आत्मसमर्पित माओवादियों ने चरितार्थ किया है। जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की राह अख्तियार किया था, आज उन्हीं हाथों को राज्य की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कुशल और दक्ष बनाने की कवायद जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। शासन की मंशानुसार ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण देकर ’हिंसा से हुनर’ की ओर लौटे माओवादियों को नया जीवनदान मिल रहा है। आजीविका मूलक गतिविधियों का दिया जा रहा है प्रशिक्षण कभी माओवाद गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियों को अब ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे विभिन्न ट्रेड में सतत् प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा में लौटने के बाद आजीविका मूलक गतिविधियों में कुशल होकर बेहतर ढंग से सम्मान पूर्वक जीवन निर्वाह कर सके। चौगेल कैंप परिसर बना कौशलगढ़ वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर शनैः-शनैः आगे बढ़ रहा है और माओवाद का दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। छत्तीसगढ़ सहित देश को माओवाद से मुक्ति दिलाने केंद्र सरकार के संकल्प को पूरा करने प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। वहीं हथियार उठाने वालों को भविष्य गढ़ने का सुनहरा अवसर भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। आत्मसमर्पित/पीड़ित नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत उन्हें विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) का बीएसएफ कैम्प परिसर ‘कौशलगढ़’ बन गया है, जहां समाज की मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, साथ ही उन्हें शिक्षित भी किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रमों का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है, जिसमें रूचि लेते हुए सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपने भविष्य को पूरी शिद्दत से गढ़ने में संलग्न हैं। 20-20 का बैच बनाकर उन्हें हुनरमंद बनाने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। ड्राइविंग सीखने का शौक अब पूरा हो रहा- मनहेर तारम चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित माओवादी 40 वर्षीय  मनहेर तारम ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से उन्हें ड्रायविंग की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसे वे पूरी रूचि के साथ सीख रहे हैं। ट्रेनर द्वारा स्टेयरिंग थामने से लेकर क्लच, ब्रेक व एक्सिलरेटर का प्रयोग करना सिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ड्रायविंग सीखने की चाहत अब पूरी हो रही है। इसके अलावा सिलाई और काष्ठशिल्प का प्रशिक्षण कैम्प में दिया जा रहा है। इसी तरह  नरसिंह नेताम ने बताया कि वह भी फोरव्हीलर की ड्रायविंग में अपना हाथ आजमा रहे हैं तथा यहां आकर ऐसी गतिविधियों से जुड़ रहे हैं, जिससे आगे का जीवन बेहतर हो सके। 19 साल के सुकदू पद्दा ने बताया कि यहां पिछले तीन महीने से ट्रेनिंग ले रहे हैं और खुद को आजीविका मूलक कार्यों से जोड़ रहे हैं,  जबकि वह निरक्षर है। वहीं 19 वर्ष की कु. काजल वेड़दा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बचपन से कपड़ों की सिलाई करने की इच्छा थी, यहां आकर वह भी पूरी हो रही है। वहीं शिक्षकां के द्वारा प्राथमिक शिक्षा का भी वह लाभ ले रही हैं। इसी तरह कैंप में रह रहे जगदेव कोमरा, राजू नुरूटी, बीरसिंह मण्डावी, मैनू नेगी, सनऊ गावड़े, मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, रमोती कवाची, मानकेर हुपेंडी, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी सहित सभी आत्मसमर्पित माओवादी अपनी रूचि अनुसार ड्राईविंग, काष्ठशिल्प कला, सिलाई मशीन तथा सहायक इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बेहतर ढंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका नियमितरूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी  विनोद अहिरवार ने बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार आत्मसमर्पित 40 माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 20-20 के बैच में चौगेल (मुल्ला) कैंप में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और सभी को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। भविष्य में मशरूम उत्पादन, बागवानी सहित विभिन्न सृजनात्मक एवं स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रमों में जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों को राज्य शासन द्वारा अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर तथा स्वरोजगारमूलक सकारात्मक कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत करने का मौका मिल सके।

हाईवे किनारे बने अवैध निर्माणों पर चलेगा ‘पीला पंजा’

जयपुर. राजस्थान में नेशनल हाईवे के किनारे बसे अवैध निर्माणों पर अब भजनलाल सरकार का 'पीला पंजा' चलने को तैयार है। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद राजस्थान सरकार ने हाईवे की बिल्डिंग लाइन और कंट्रोल लाइन के भीतर हुए तमाम अवैध निर्माणों को जमींदोज करने का बड़ा फैसला लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने प्रदेश के सभी जिला कलक्टरों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के बाद प्रदेशभर में हाईवे किनारे संचालित अवैध होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक तैयारी तेज सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी अब हाईवे सीमा का सीमांकन शुरू करने की तैयारी में है। जल्द ही अवैध निर्माण को चिन्हित कर उन्हें हटाने के नोटिस जारी किए जा सकते हैं। इस बड़ी कार्रवाई की आहट ने क्षेत्र के 'अतिक्रमणकारियों' की नींद उड़ा दी है। हाईकोर्ट का सख्त रुख: सड़क सुरक्षा सर्वोपरि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हाईवे के किनारे बेतरतीब और अवैध निर्माण सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं। अनियंत्रित एंट्री-एग्जिट और अवैध कब्जों की वजह से आए दिन होने वाले हादसों में लोगों की जान जा रही है। अदालत ने सड़क सुरक्षा को देखते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि इन अवैध ढांचों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोर कदम उठाए जाएं। 75 मीटर के दायरे में बने निर्माण हटेंगे इसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से आदेश जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर की दूरी तक किसी भी तरह का कॉमर्शियल या आवासीय निर्माण कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा। इस दायरे में आने वाले सभी अवैध होटल, ढाबे, दुकानें, सर्विस सेंटर और भवन हटाए जाएं। क्या है नया नियम? नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट (मध्य बिंदु) से 75 मीटर की दूरी तक अब किसी भी प्रकार का निर्माण (व्यावसायिक या आवासीय) अवैध माना जाएगा। इस 75 मीटर के दायरे में आने वाले सभी होटल, ढाबे, दुकानें, शोरूम, गैराज और अन्य पक्के निर्माण हटाए जाएंगे।

पण्डूम 2026 की तैयारियों की समीक्षा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लिया जायजा

रायपुर. उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने लिया जायजा संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर पण्डूम 2026 कार्यक्रम की तैयारियों का उप मुख्यमंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री विजय शर्मा ने आज निरीक्षण कर जायजा लिया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कार्यक्रम स्थल का भ्रमण कर आयोजन की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों में प्रदर्शित बस्तर की पारंपरिक कला, संस्कृति एवं स्थानीय उत्पादों का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और जनसहभागिता से परिपूर्ण हो। निरीक्षण के दौरान स्कूली छात्रों द्वारा की जा रही सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों का अभ्यास देखकर उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डूम जैसे आयोजन बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपरा और प्रतिभाओं को व्यापक पहचान दिलाने का सशक्त मंच हैं। इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी., कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ  प्रतीक जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

शहरी खेती का नया मॉडल: हाइड्रोपोनिक्स से टेरेस गार्डन में हरियाली

रायपुर. छत्तीसगढ़ वन निगम की पहल छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइड्रोपोनिक्स पद्धति पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन नया रायपुर आवासीय परिसर, सेक्टर-26 में विगत दिनों किया गया। इस कार्यशाला में मिट्टी के बिना फल एवं सलाद सब्जियों के उत्पादन तथा टेरेस गार्डन की स्थापना पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्घाटन निगम के प्रबंध संचालक श्री प्रेम कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें सीमित स्थान में अधिक उत्पादन का अवसर देती हैं और पर्यावरण संरक्षण के साथ आय बढ़ाने में भी सहायक हैं। यह पहल शासकीय योजनाओं के अनुरूप आधुनिक कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में हाइड्रोपोनिक्स विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षक श्री जावेद आलम ने प्रतिभागियों को इस पद्धति के मूल सिद्धांत, टेरेस गार्डन की स्थापना, मृदा-रहित खेती की तकनीक तथा न्यूट्रिशन फ्लो टेक्नीक (एनएफटी) विधि के बारे में सरल तरीके से जानकारी दी। साथ ही व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स नर्सरी की स्थापना और प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे प्रतिभागी इस तकनीक को आसानी से अपनाने के लिए प्रेरित हुए। कार्यशाला में निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की यह पहल आधुनिक, कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भविष्य में उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ नए आय के अवसर भी सृजित होने की संभावना है।

मानवता शर्मसार: अस्पताल में नवजात सौंपने के लिए दाई की अवैध वसूली, ₹1500 लेकर दिया बच्चा

बुधनी. शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद जहां आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, वहीं अब यहां से एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसूता के परिजनों से 4 हजार की मांग आरोप है कि सिविल अस्पताल में डिलीवरी के बाद प्रसूति दाइयों द्वारा प्रसूता के परिजनों से खुलेआम पैसों की मांग की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात दाई ने नवजात शिशु को देने से पहले 4 हजार रुपये की मांग की। जब परिवार ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताई और पूरी राशि देने में असमर्थता जताई, तो दाई ने कथित तौर पर बच्चा देने से इनकार कर दिया। 1500 रुपये की 'वसूली' के बाद मिला बच्चा बताया जा रहा है कि मजबूर गरीब परिवार ने जैसे-तैसे 1500 रुपये की व्यवस्था की, तब जाकर उन्हें उनका नवजात शिशु मिला। इस घटना से आक्रोशित परिवार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। जब इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी. बड़ोदिया से बात की गई, तो उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सरकारी योजनाओं की साख पर बट्टा यह घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह निम्न श्रेणी के कुछ कर्मचारी अपनी मनमानी से सरकारी योजनाओं की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। सरकार जहां जननी सुरक्षा जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों को निःशुल्क प्रसव सुविधा देने का दावा करती है, वहीं इस तरह की वसूली गरीबों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जबलपुर के छात्र आयुष के प्रश्न पर दिया जवाब

लेसन प्लान विद्यार्थियों के साथ पूर्व से ही साझा करें प्रधानमंत्री  मोदी ने जबलपुर के छात्र आयुष के प्रश्न पर दिया जवाब स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा में विद्यार्थियों के साथ सुने प्रधानमंत्री  मोदी के परीक्षा मंत्र प्रदेश के विद्यालयों में हुआ परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण, शासकीय सुभाष स्कूल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम में विद्याथिर्यों से संवाद कर परीक्षा से जुड़े तनाव और शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट विद्यालय, जबलपुर के छात्र  आयुष तिवारी ने प्रधानमंत्री  मोदी से प्रश्न किया कि कई बार वे शिक्षकों की पढ़ाने की गति से तालमेल नहीं बिठा पाते हैं, उसे कैसे मैच करें? इस पर प्रधानमंत्री  मोदी ने विद्यार्थियों को समझाते हुए शिक्षकों से भी आग्रह किया कि अपने अध्‍यापन की स्‍पीड विद्यार्थियों के सीखने की गति के अनुरूप रखें। लेसन प्‍लान विद्याथिर्यों के साथ पूर्व से ही साझा करें। विद्यार्थी वह चेप्‍टर पहले से पढें, अध्‍ययन करें जो शिक्षक भविष्‍य में कक्षा में पढाने वाले हैं। उन्‍होंने कहा कि शिक्षकों की गति से सामंजस्‍य बैठाने का सबसे अच्‍छा तरीका यह है कि पहले अपने को जोड़ो, फिर मन को जोड़ो। उसके बाद पढाई के विषय शुरू करो। प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा कि मन को जोड़ने का अर्थ है, विषय की तमाम जानकारियां जुटाना और जोड़ने का अर्थ है, एकाग्रता बनाए रखना। इससे आपकी समझ मजबूत होगी और आप एक कदम आगे चलेंगे। प्रधानमंत्री  मोदी ने विद्यार्थियों के साथ आयोजित ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में तनावमुक्त जीवन, समय प्रबंधन, अनुशासन, जीवन कौशल एवं व्यवसायिक विकास के महत्वपूर्ण मंत्र दिए। इसके साथ ही उन्‍होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। 2018 से लगातार हो रहा आयोजन प्रधानमंत्री  मोदी वर्ष 2018 से परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान परीक्षाओं के तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। इस वर्ष यह कार्यक्रम का 9 वां संस्करण था। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री  मोदी ने देश भर से आये विद्यार्थियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर किया गया। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता- शिक्षा मंत्री  सिंह परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में स्‍कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने नरसिंहपुर जिले के ग्राम तेंदूखेड़ा कन्या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ प्रधानमंत्री  मोदी के परीक्षा मंत्र सुने। मंत्री  सिंह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से प्रधानमंत्री के द्वारा दिए गए सूत्रों और विचारों को आत्‍मसात कर परीक्षाओं की तैयारी करने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुशासन को मजबूत करने और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। जिसने समय का सही प्रबंधन कर लिया, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। समय अनुशासन सिखाता है और अनुशासन के साथ जिया गया जीवन ही सफलता की सच्ची पहचान है। जब तक असंभव को करने का प्रयास नहीं किया जाएगा, तब तक असाधारण उपलब्धियां संभव नहीं हैं। शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय भोपाल में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का भोपाल के शासकीय सुभाष उत्‍कृष्‍ट विद्यालय में राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम हुआ। यहां पर स्‍कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने विशिष्‍ट जनों, वरिष्‍ठ अधिकारी, अभिभावक और विद्यार्थियों के साथ सजीव प्रसारण में सहभागिता की। संचालक लोक शिक्षण  केके द्व‍िवेदी सहि‍त कार्यक्रम के नोडल अधिकारी संयुक्‍त संचालक  एच.एन. नेमा भी उपस्थित रहे। प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान, प्रशिक्षण परिषद (SCERTS), सभी जिला शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों (DIETS) और प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं शासन से अनुदान प्राप्‍त विद्यालयों में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम को समारोह पर्वूक आयोजित किया गया। उक्‍त कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में विद्यार्थियों ने उत्‍साहपूर्वक सहभागिता की। प्रदेश के स्‍कूलों में टीवी प्रसारण के अलावा, इंटरनेट एक्सेस डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि) पर भी कार्यक्रम देखने की सुविधा स्‍थापित की गई थी। 9 फरवरी को होगा अगला प्रसारण परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का अगला प्रसारण 9 फरवरी 2026 को होगा। जिसमें प्रधानमंत्री  मोदी देश के विभिन्‍न अंचलों के विद्यार्थियों के साथ चर्चा करेंगे। यह कार्यक्रम विभिन्‍न संचार माध्‍यमों पर सुबह 10 बजे से प्रसारित किया जायेगा। प्रदेश के विद्यालयों में उक्‍त कार्यक्रम के सजीव प्रसारण की व्‍यवस्‍थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।  

होली पर घर जाने टाटा नगर और रांची से चलेंगी कई स्पेशल ट्रेनें

चक्रधरपुर. रंगों के त्योहार होली पर घर जाने की प्लानिंग कर रहे लाखों पैसेंजर्स के लिए भारतीय रेलवे एक खुशखबरी लेकर आया है। त्योहार के दौरान स्टेशनों पर भारी भीड़ और ट्रेनाें में लंबी वेटिंग लिस्ट को देखते हुए, रेलवे ने इस साल 1410 होली स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। 1410 होली स्पेशल ट्रेनों में से दक्षिण पूर्व रेलवे ने 22 होली स्पेशल ट्रेनों को चलाने की योजना बना ली है। 22 होली स्पेशल ट्रेनों में से चार चक्रधरपुर रेल मंडल से होते हुए चलेगी। दक्षिण पूर्व रेलवे जल्द ही होली स्पेशल ट्रेनों का परिचालन की तिथि जारी करेगी। यात्रियों की सुविधा के लिए इस वर्ष रेलवे ने ट्रेनों की संख्या काफी बढ़ा दी है। इसका खास मकसद बड़े शहरों और उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों के बीच आसान कनेक्टिविटी देना है। मालूम रहे कि 3 व 4 मार्च को हाेली है। दक्षिण पूर्व रेलवे इन होली स्पेशल ट्रेनों का करेगी परिचालन टाटानगर-कटिहार-टाटानगर होली स्पेशल। टाटानगर-बक्सर-टाटानगर होली स्पेशल। रांची-गोरखपुर-रांची होली स्पेशल। रांची-अजमेर-रांची होली स्पेशल। रांची-जयनगर-रांची होली स्पेशल। संतरागाछी-एमजीआर चेन्नई-संतरागाछी होली स्पेशल । संतरागाछी-तिरुवनंतपुरम-संतरागाछी होली स्पेशल । संतरागाछी-चार्लापल्ली-संतरागाछी होली स्पेशल । संतरागाछी-दरभंगा-संतरागाछी होली स्पेशल । शालीमार-वडोदरा-शालीमार होली स्पेशल । शालीमार-विशाखापत्तनम-शालीमार होली स्पेशल।

एमपी हाईकोर्ट की युगलपीठ ने संस्कृति जैन को सजा के मामले में लगाई रोक, भोपाल नगर निगम कमिश्नर को मिली राहत

 जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति हैं को अवमानना की दोषी पाए जाने के आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, आज न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सजा के प्रश्न पर सुनवाई होनी थी। निगमायुक्त को अपना पक्ष देखने हाजिर रहने कहा गया था। किन्तु इससे पूर्व ही युगलपीठ में आवेदन दायर कर निगमायुक्त जैन ने सजा पर रोक की मांग कर दी। गुरुवार को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए नगर निगम, भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने साफ किया था कि नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। लिहाजा, आयुक्त को सजा के प्रश्न पर अपना पक्ष रखना होगा। इस सिलसिले में शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे से सुनवाई नियत की गई थी। मई 2025 में जारी किया गया था नोटिस दरअसल, यह मामला मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने 18 नवंबर, 2025 को उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को विहित प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था। सात नवंबर, 2024 को दी गई अनुमति निरस्त की जा चुकी थी। 14 मई, 2025 को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 2025 में जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को नैसर्गिक न्याय सिद्यांत अनुरूप न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया, न ही सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके स्थान पर सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो अवैधानिक है। आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि बिना शर्त माफी के साथ तोड़े गए हिस्से को बहाल किया जाता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था। लेकिन नगर निगम आयुक्त ने अदालत में स्पष्ट किया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) के तहत दोषी ठहराया है। इस मामले में शुक्रवार, छह फरवरी को सुबह 10:30 बजे सजा के बिंदु पर सुनवाई निर्धारित की गई थी। किन्तु निगमायुक्त ने अपना बचाव सीजे की अध्यक्षता वाली बेंच पहुंचकर कर लिया।

शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय फेस-2 का कार्य जल्द होगा प्रारंभ: सोनमणि बोरा

रायपुर. नवा रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय फेस-2 निर्माण के लिए जल्द ही कार्य प्रक्रिया शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही कन्वेंशन सेंटर का भी निर्माण किया जाएगा। आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान स्थित सभाकक्ष में आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, आर्टिस्ट एवं विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।  गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती वर्ष एक नवंबर को राज्योत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का शुभारंभ हुआ था। इसके पहले जनजातीय जीवन शैली एवं परम्पराओं पर आधारित संग्रहालय का उद्घाटन मई 2025 में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया था। इन संग्रहालयों की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बाद अब शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय फेस-2 का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ किया जाएगा।  प्रमुख सचिव  बोरा ने बैठक में कहा कि संग्रहालय में कैफेटेरिया, गढ़ कलेवा एवं अन्य दुकानें भी खोली जानी हैं इस संबंध में अंतिम रूपरेखा पर चर्चा की गई। उन्होंने संग्रहालय फेस-2 के अंतर्गत ही आकर्षक बागवानी, परिसर के भीतर स्थित नंद सागर का सौंदर्यीकरण, फॉउंटेन एवं पार्किंग की बेहतर व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की।   बैठक में आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में नवनिर्मित छात्रावास के पास ही निर्माणाधीन कन्वेंशन सेंटर की रूपरेखा पर भी चर्चा की। इसके डिजाइन एवं लेआउट पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए। इस कन्वेंशन सेंटर में एक ऑडिटोरियम, आर्ट गैलरी, प्रदर्शनी हॉल, मीटिंग रूम, प्रशासनिक भवन, फूड कोर्ट आदि की व्यवस्था रहेगी।   बैठक में संचालक, टीआरटीआई मती हिना अनिमेष नेताम, उपसचिव  बी.के.राजपूत, अपर संचालक  संजय गौड़,  जितेन्द्र गुप्ता,  आर.एस.भोई, उपायुक्त  विश्वनाथ रेडडी, कार्यपालन यंत्री  त्रिदीप चक्रवर्ती, उपयंत्री  गुप्ता एवं  यशवंत राव सहित आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स, आर्टिस्ट एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।