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‘शौच के लिए बाहर जाना भी छुट्टी माना जाएगा’, शिक्षा मंत्री के बयान पर चर्चा तेज

रामगढ़  बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री व भाजपा के कद्दावर नेता मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे अपने दायित्व बोध को जगाएं तभी विवेकानंद का सपना साकार होगा। आप सभी सहयोग व संकल्प के साथ कार्य करने का निश्चय करने का ठान लेंगे, तब शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की तस्वीर बदल देंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की शिक्षा में गुणात्मक सुधार मेरी प्राथमिकता में है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी रामगढ़ के माधव पैलेस में भाजपा द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मां सरस्वती की आराधना और उपासना से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। शौच के लिए भी बाहर गए तो कार्रवाई तय शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विद्यालय अवधि के दौरान बिना अनुमति स्कूल परिसर से बाहर जाना शिक्षकों को महंगा पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए शिक्षकों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि यदि कोई शिक्षक स्कूल समय में परिसर से बाहर जाता है तो उसकी उपस्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शौच के लिए भी यदि कोई शिक्षक विद्यालय की चहारदीवारी से बाहर जाता है तो उसकी आधे दिन की उपस्थिति प्रभावित हो सकती है वहीं, यदि कोई शिक्षक एक घंटे से अधिक समय तक विद्यालय से बाहर रहता है तो उसे पूरे दिन की अनुपस्थिति माना जा सकता है। 'बिहार का भविष्य शिक्षकों के हाथ में' शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था शिक्षकों के भरोसे चलती है और राज्य के बच्चों का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने कहा, "आप छात्रों को गढ़ने का काम करते हैं। आने वाले बिहार की नींव स्कूलों में रखी जाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" AI आधारित मॉनिटरिंग से बढ़ेगी जवाबदेही मंत्री ने कहा कि विभाग तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दे रहा है और इसी कड़ी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यालय में उनकी गतिविधियों और समय पालन की निगरानी की जाएगी। सरकार का मानना है कि तकनीक के उपयोग से जवाबदेही बढ़ेगी और विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी। लंबित मामलों के समाधान का भी भरोसा शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विभाग में लंबित पड़े एसीपी, वेतन विसंगति, प्रोन्नति और अन्य प्रशासनिक मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सचिवालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग में सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत 20 दिनों के भीतर शिकायतों का निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी शिक्षक की समस्या का समाधान नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर जहां शिक्षकों से अनुशासन और जवाबदेही की अपेक्षा करती है, वहीं दूसरी ओर उनकी वैध समस्याओं के समाधान के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकारी स्‍कूलों में अपने बच्‍चे को पढ़ाने पर होगा गर्व इसलिए हमारा लक्ष्य है कि हम सभी मिलकर राज्य के स्कूलों को कुछ इस तरह विकसित करेंगे, जरुरी संसाधनों से लैस करेंगे कि सरकारी स्कूलों में मंत्री- विधायक और अधिकारी के बच्चे भी गौरव-बोध के साथ पढ़ाई कर सकें। हम ऐसी संरचना व संसाधन स्थापित कर दिखाएंगे। यह हमारा संकल्प भी है और लक्ष्य है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि आप सुविधाएं लीजिए। सरकार जरुरी सहुलियत भी मुहैया कराने का निर्णय ले चुकी है। लेकिन पढ़ाई में ढ़िलाई बर्दाश्त नहीं होगी। पठन पाठन व्यवस्था में सख्ती लागू रहेगी। उन्होंने शिक्षकों को मजाकिया लहजे में चेताया कि अब ई शिक्षा पोर्टल पर हस्ताक्षर बनाकर ससुराल नहीं घूम पाएंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की समस्या को हमने करीब से महसूस किया और फिर सरकार ने निर्णय लिया कि महिला शिक्षकों को अपने मूल पंचायत के बगल वाली पंचायत और पुरुष शिक्षकों को अपने मूल प्रखंड के बगल वाले प्रखंड में पोस्टिंग करेंगे। इस सुविधा और सहूलियत का एक मात्र उद्देश्य है कि शिक्षको को परेशानी से छुटकारा मिले और गुणात्मक शिक्षा की दिशा में सार्थक प्रयास को अंजाम दे सकें। मंत्री ने कहा कि बक्सर और रामगढ़ से मेरा गहरा लगाव है। हर महीने रामगढ़ के एक स्कूल में आऊंगा और पूर्व विधायक अशोक सिंह शिक्षा के क्षेत्र में जो प्रस्ताव भेजेंगे उसे स्वीकृति मिलेगी। समारोह की अध्यक्षता नगर अध्यक्ष संजय जायसवाल और संचालन राजीव श्रीवास्तव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन परशुराम तिवारी ने किया। समारोह को जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय, पूर्व प्रमुख संजय सिंह, तरुण सिंह, दिनेश उपाध्याय, कृपाशंकर चौबे, हरिद्वार राम, मंडल अध्यक्ष आनंद सिंह, अरविंद सिंह, विक्की सिंह ने संबोधित किया।    

बेसिक स्कूल रसोइयों के लिए बड़ा फैसला, सेवा शर्तों और छुट्टियों का मिलेगा लाभ

लखनऊ बेसिक स्‍कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने वाले रसोइयों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल हो सकती है। हाल ही में कई स्तर पर हुई बैठकों के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकारण इनकी सेवा नियमावली बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। नियमावली बनने के बाद अन्य संविदाकर्मियों की तरह छुट्टियों और नियुक्ति प्रक्रिया सहित कई सेवा शर्तें इन पर भी भी लागू होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन दिए जाने की योजना लागू की गई थी। उसके बाद 2007 में पिछड़े ब्लॉक के अपर प्राइमरी स्कूलों में और 2008 में सभी अपर प्राइमरी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की योजना लागू कर दी गई। वर्तमान में 1.41 लाख स्कूलों के 1.52 करोड़ बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए 3.63 लाख रसोइये स्कूलों में कार्यरत हैं। ऐसे बनी सहमति रसोइयों को 2000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है, लेकिन इनकी अब तक सेवा शर्तें नहीं बनीं। ग्राम समिति इनका चयन करती हैं। कुछ रसोइये 70-75 साल की उम्र में भी कार्यरत हैं। वहीं, ग्राम समिति चाहती है तो किसी को कभी भी हटा देती है। इनकी सेवानिवृत्ति की कोई आयु सरकार ने तय नहीं की है। वहीं, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 11 महीने का मानदेय मिलता है, लेकिन रसोइयों को 10 माह का ही मानदेय मिलता है। अब इनकी सेवा शर्ते बनाने की तैयारी की जा रही है। रसोइयों के प्रदर्शन के बाद अफसरों संग हुई बैठक हाल ही में रसाइयों के प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर के अधिकारियों ने भी मंथन किया। उसके बाद प्राधिकरण को इस बाबत प्रस्ताव करने के लिए कहा गया है। इनकी रिटायरमेंट उम्र 62 साल की जा सकती है। सेवा शर्तों से क्या अंतर आएगा? सेवा शर्तें बन जाने से इनकी रिटायरमेंट उम्र तय हो जाएगी। इससे ग्राम समितियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अभी इनको किसी तरह की कोई छुट्टी का प्रावधान नहीं है। यहां तक कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव का भी प्रावधान नहीं है। सेवा शर्तें बन जाने से रसोइयों को ये लाभ भी मिल सकेंगे। अन्य संविदा कर्मियों की तरह इनके 11 माह के मानदेय पर भी विचार किया जा रहा है।  

पंजाब के 24 अप्रेंटिस कर्मचारियों को मिली राहत, PSPCL में नियमितीकरण की घोषणा

चंडीगढ़. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) में भर्ती किए गए 24 अप्रेंटिसशिप उम्मीदवारों को नियमित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन युवाओं को असिस्टेंट लाइनमैन (एएलएम) के पद पर नियुक्त किया जाएगा, जिससे लंबे समय से नियमित भर्ती की मांग कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिलेगी। चीमा ने कहा कि सरकार युवाओं के रोजगार को लेकर गंभीर है और योग्य उम्मीदवारों को उनके कौशल के अनुरूप अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इन उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।वित्त मंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों का पंजाबी भाषा का पेपर भी लिया जाएगा। इस परीक्षा का सिलेबस, परीक्षा पैटर्न और अन्य जरूरी दिशा-निर्देश जल्द ही पीएसपीसीएल की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे, ताकि उम्मीदवार समय पर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकें और तैयारी शुरू कर सकें। उन्होंने बताया कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सरल और व्यवस्थित बनाने के लिए एक मजबूत सिस्टम तैयार कर रही है। इसके तहत ऐसा इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा जिससे चयन प्रक्रिया में स्पष्टता बनी रहे और उम्मीदवारों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। चीमा ने भरोसा दिलाया कि सरकार युवाओं के हितों की रक्षा करते हुए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लगातार काम कर रही है। पीएसपीसीएल में असिस्टेंट लाइनमैन के पद पर इन अप्रेंटिस उम्मीदवारों की नियुक्ति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बनेगा नया रिकॉर्ड! 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं के साथ योग करेगा उत्तर प्रदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं को योग से जोड़ने की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को प्रदेशभर के विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास होगा, जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और अभिभावक सहभागिता करेंगे। कार्यक्रमों के प्रभावी अनुश्रवण और समन्वय के लिए शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। योग को जन आंदोलन और स्वस्थ जीवनशैली का आधार बनाने की दिशा में योगी सरकार की सतत पहल का प्रभाव इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भी दिखाई देगा, जहां गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण के साक्षी बनेंगे।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा विभाग ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयुष मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों तथा खंड शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग का प्रयास है कि योग दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर विद्यार्थियों के जीवन में स्वस्थ आदतों और सकारात्मक जीवनशैली का स्थायी संदेश बन सके। विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास, प्राणायाम और योग का होगा आयोजन बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 21 जून को विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास, प्राणायाम और योग के महत्व पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों को योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों से परिचित कराया जाएगा। साथ ही अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि योग का संदेश समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच सके। नई पीढ़ी को स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने के संकल्प को नई ऊर्जा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन और जनस्वास्थ्य से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। विद्यालयों में नियमित योग गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में स्वास्थ्य, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। 21 जून को होने वाला यह व्यापक आयोजन न केवल योग की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने के संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

इंदौर में बरसे बादल, मध्यप्रदेश में 27 जून के बाद मानसून पहुंचने की संभावना

इंदौर. प्रशांत महासागर में अलनीनो अब सामान्य स्थिति से पाजिटिव में तब्दील हो चुका है। समुद्र तल गर्म होने के कारण इसका दक्षिणी पश्चिमी मानसून पर असर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि भारत में अभी मानसून की गति पर ब्रेक लगने जैसी स्थिति दिखाई दे रहा है। वहीं, शनिवार दोपहर को शहर में तेज बारिश हुई। इससे सड़कों पर पानी बह निकला और मौसम सुहावना हो गया। विगत वर्षो में 19 जून तक जो मानसून इंदौर सहित मप्र तक पहुंच जाता था। इस बार मानूसन उड़ीसा झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ के मुहाने पर ही अटका हुआ है। भोपाल स्थित मौसम केंद्र के विज्ञानियों के मुताबिक 23 जून तक छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने की संभावना है। ऐसे में जून के अंतिम सप्ताह में 27 जून के आसपास ही मप्र में मानूसन के प्रवेश करने की संभावना है। प्रदेश में 45 प्रतिशत कम हुई है वर्षा प्रदेश में जून माह के 19 दिनों में वर्षा (Rain in Madhya Pradesh) लगभग नदारद ही रही है। प्रदेश में प्री मानसून सीजन (Pre Monsoon in MP) में अब तक 45 फीसद कम वर्षा हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों के जिले ज्यादा प्रभावित है। पूर्वी मप्र में 45 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वही पश्चिमी मप्र में 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई। इंदौर में बादल के साथ हल्की बूंदाबांदी के आसार इंदौर शहर में दोपहर में निकली धूप ने शहरवासियों को परेशान किया। दिन में हल्के बादल भी छाए। शुक्रवार को शहर में अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जाएगा। वही न्यूनतम तापमान 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शुक्रवार को शहर में बादल छाएंगे और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है।

सीएम योगी ने किया मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन, मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में भी माथा टेका

दतिया/ललितपुर बुंदेलखंड को विकास परियोजनाओं की सौगात देने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मध्य प्रदेश के दतिया में मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन भी किया। दतिया हवाई पट्टी पर मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सीएम योगी का स्वागत किया। मुख्यमंत्री यहां से पीतांबरा पीठ पहुंचे।  पीतांबरा पीठ में मुख्यमंत्री ने मां बगुलामुखी के दर्शन किए और विधिवत पूजा अर्चना की। उन्होंने परिसर में स्थित वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक भी किया। इसके बाद मुख्यमंत्री लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए ललितपुर रवाना हो गए। ललितपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान मंदिर के पुजारी व महंत आदि उपस्थित रहे।

10 एकड़ तक जमीन आवंटन का अधिकार डीएम को, बिहार में प्रक्रिया होगी तेज और सरल

पटना बिहार में सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार को तेज करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब विभिन्न सरकारी विभागों को फ्री या स्थायी रूप से जमीन ट्रांसफर करने के मामले में डीएम और कमिश्नर के अधिकारों का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस बदलाव को लेकर अपना आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया है। विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से छोटे और मध्यम स्तर के प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि आवंटन की फाइलों को बार-बार मुख्यालय भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय की बड़ी बचत होगी। पहले सिर्फ 3 एकड़ तक ही सीमित था जिलाधिकारियों का पावर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, पुरानी व्यवस्था के तहत अब तक जिलाधिकारियों को केवल 3 एकड़ तक की ही सरकारी या गैर मजरूआ आम भूमि का हस्तांतरण करने का अधिकार प्राप्त था। वहीं, 3 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ तक की भूमि का फ्री हस्तांतरण प्रमंडलीय आयुक्त (कमिश्नर) के स्तर पर किया जा रहा था। हाल ही में विभाग द्वारा की गई उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि इस पुरानी व्यवस्था के कारण छोटी-छोटी परियोजनाओं के लिए भी जमीन हस्तांतरण में बहुत अधिक समय बर्बाद हो रहा था। इसी लेती-देती को खत्म करने के लिए विभाग ने अब 10 एकड़ तक की जमीन के ट्रांसफर की पूरी शक्ति सीधे तौर पर डीएम को सौंप दी है। 10 से 20 एकड़ तक की जमीन का फैसला करेंगे कमिश्नर विभाग द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब 10 एकड़ से अधिक और 20 एकड़ तक की सरकारी जमीन के फ्री या स्थायी हस्तांतरण की मंजूरी प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर दी जा सकेगी। यदि किसी बड़ी परियोजना के लिए 20 एकड़ से अधिक भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए अंतिम मंजूरी सीधे राज्य मंत्रिपरिषद के स्तर पर ली जाएगी। इसके साथ ही, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पारदर्शिता और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए एक और कड़ा फरमान जारी किया है। विभाग ने सख्त लहजे में दोहराया है कि अब आम जनता या किसी भी कार्य के लिए लैंड रिकार्ड की केवल डिजिटल साइन्ड कॉपी ही ली जाएगी।

पीतांबरा पीठ में यूपी के दिग्गज नेताओं का दर्शन, CM योगी और केशव मौर्य ने टेका माथा

दतिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को दतिया पहुंचे। जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ में मां बगलामुखी के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने पीतांबरा पीठ परिसर में स्थित महाभारत कालीन वानखंडेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक भी किया। इस दौरान पीठ के पुजारियों ने मंत्रोच्चार के बीच योगी से जलाभिषेक कराया। एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से हुई अगवानी इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष विमान से दतिया एयरपोर्ट पहुंचे। यहां पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, शिमला विधायक प्रदीप अग्रवाल कलेक्टर स्वप्निल वानखडे व एसपी मयूर खंडेलवाल सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी कर स्वागत किया। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने पार्टीजन से भी मिले। इसके बाद सीधे पीतांबरा पीठ पहुंचे, जहां मंदिर प्रबंधन एवं पुजारियों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। पूजा-अर्चना कर ललितपुर हुए रवाना पीताम्बरा पीठ में दर्शन एवं पूजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद मुख्यमंत्री कुछ समय तक मंदिर परिसर में रहे तथा वहां स्थित अन्य मंदिरों के भी उन्होने दर्शन किए। दर्शन और पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दतिया से उत्तर प्रदेश के ललितपुर के लिए रवाना हो गए। योगी की सुरक्षा के मद्देनजर पीठ के आसपास की दुकानें भी बंद रही। मौर्य भी पहुंचे दतिया वही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य भी शनिवार सुबह दतिया पहुंचे। जहां उन्होंने सुबह पीतांबरा पीठ पर दर्शन पूजन किया। इसके बाद वह वापस रतन महल होटल पहुंचे, जहां से अगले गंतव्य के लिए रवाना हुए। दोनों दिग्गज नेताओं की इस दौरान आपस में मुलाकात नहीं हो सकी।

96 लाख इकाइयों और 1.65 करोड़ रोजगार के साथ उत्तर प्रदेश अग्रणी

आगरा विश्व पटल पर भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और एमएसएमई क्षेत्र की अपार संभावनाओं को नई दिशा देने के लिए ताजनगरी आगरा में 'ब्रिक्स-इंडिया 2026' के अंतर्गत पहले दिन ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरे ब्रिक्स एमएसएमई वर्किंग ग्रुप की दो दिवसीय बैठक का भव्य आयोजन हुआ। ताजगंज स्थित ताज एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने एमएसएमई सेक्टर की शानदार उपलब्धियों और वैश्विक व्यापार की रणनीतियों को विश्व समुदाय के समक्ष प्रमुखता से रखा। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के साथ यूपी बना 'एमएसएमई राजधानी' ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा जनपद प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज भारत की एमएसएमई राजधानी बनकर उभर रहा है। राज्य में वर्तमान में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो लगभग 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही हैं। योगी सरकार एमएसएमई को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सबसे सशक्त इंजन मानती है। ब्रिक्स देशों के साथ 5.36 बिलियन डॉलर का व्यापारिक संबंध प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार, तकनीक और निवेश के नए आयाम स्थापित कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025- 26 के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के साथ उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 5.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3,938 मिलियन डॉलर सदस्य देशों को और 1,429 मिलियन डॉलर साझेदार देशों को) से अधिक रहा है। प्रदेश से मशीनरी, परिधान, चमड़ा, कालीन और बहुमूल्य पत्थर दुनिया के कई देशों में निर्यात हो रहे हैं। ओडीओपी और पारंपरिक शिल्प को मिल रही वैश्विक उड़ान उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय प्रतिभा और पारंपरिक शिल्प को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का अभूतपूर्व कार्य किया है। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि ओडीओपी के तहत अब तक 20 हजार से अधिक लोगों को करीब 897 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी देकर 3.16 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। इसके साथ ही 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' से 4.41 लाख पारंपरिक शिल्पकारों को आधुनिक टूलकिट और प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है। युवाओं और उद्यमियों के लिए योगी सरकार की अभिनव पहल योगी सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' (सीएम युवा) जैसी अभिनव पहल शुरू की है। इसके तहत बिना गारंटी के ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 10 वर्षों में 10 लाख नई सूक्ष्म इकाइयां स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई पार्क विकसित करने के लिए प्लेज (PLEDGE) योजना के तहत प्रदेश के 12 जिलों में पार्क स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो उद्योगों को बेहतर इकोसिस्टम प्रदान करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का विधिवत शुभारंभ सुबह 10:15 बजे भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। उन्होंने देश में एमएसएमई सेक्टर की ग्रोथ और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दूसरे दिन ब्रिक्स देशों से आए विभिन्न प्रतिनिधिमंडल आगरा की ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण करेंगे और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू होंगे।

चावल देखकर भविष्य बताने वाला नरेंद्र शास्त्री रायपुर लाया गया, दुष्कर्म मामले में आरोपी

रायपुर. दुष्कर्म के आरोप में महासमुंद सेंट्रल जेल में कैद ‘चावल वाले बाबा’ के नाम से मशहूर आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री को गोपनीय तरीके से रायपुर लाया गया. सूमो गाड़ी में सवार आरोपी बाबा को पहले रायपुर केंद्रीय जेल में लाया गया है, जहां से उन्हें उपचार के लिए मेकाहारा ले जाया जाएगा. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नरेंद्र नयन शास्त्री को महासमुंद जेल से सूमो गाड़ी नंबर CG 02 5072 में रायपुर लाया गया . इस दौरान फालो गाड़ी के तौर पर CG 03 A 0715 साथ में चल रही थी. शास्त्री को सोनोग्राफी के लिए मेकाहारा ले जाया जाएगा, और रिपोर्ट आने के बाद उन्हें वापस महासमुंद जेल ले जाया जाएगा. बता दें कि महासमुंद जिले के बागबाहरा थाना में एक महिला ने चर्चित कथावाचक एवं ज्योतिषाचार्य आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री के खिलाफ दुष्कर्म की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों को सही पाते हुए बागबाहरा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं 376(2)(ज), 376(2)(एन) और 376(2)(एम) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री को रायपुर जिले के सिलयारी से गिरफ्तार किया था. बताया जा रहा है महासमुंद केंद्रीय जेल में भर्ती रहने के दौरान बाबा की तबीयत बिगड़ी है, जिसके बाद महासमुंद पुलिस की की एक विशेष टीम बाबा की सामाजिक व सार्वजनिक पहचान को देखते हुए बेहद सतर्कता के साथ रायपुर केंद्रीय जेल में लेकर पहुंची है, जहां कागजी कार्रवाई को पूरा करने के बाद उपचार के लिए मेकाहारा ले जाया जाएगा. आश्रम में उमड़ती थी भारी भीड़ गिरफ्तार आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री मूल रूप से रायपुर जिले के सिलयारी क्षेत्र का रहने वाला है. वह लंबे समय से अपनी कथावाचन और ज्योतिष विधा को लेकर सुर्खियों में रहा है. आम जनता और श्रद्धालुओं के बीच उसकी पहचान ‘चावल देखकर भविष्य बताने वाले बाबा’ के रूप में रही है, जिसके चलते उसके आश्रम और कार्यक्रमों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी.