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सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का उत्थान: वर्मा

इछावर  अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताः राजस्व मंत्री  वर्मा राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार की योजनाएं समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रही हैं। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री  वर्मा शुक्रवार 23 जनवरी को आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना के सामूहिक समारोह में कही। मंत्री  वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी सहायता है। इससे बेटियों के विवाह का दायित्व सम्मानपूर्वक पूरा हो रहा है। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को भावी दांपत्य जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना के अंतर्गत इछावर में भव्य सामूहिक समारोह का आयोजन किया गया। इसमें कुल 200 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। इनमें 173 जोड़ों का विवाह और 27 जोड़ों का निकाह संपन्न हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं नागरिक उपस्थित रहे।  

हाइवे के बीच खड़ा था घर, किसान ने हटाने की बजाय पूरा खिसकाया

चंडीगढ़ पंजाब के एक किसान का अपनी कोठी से अनोखा प्यार सामने आया है। कोठी की जगह हाईवे पर आने से किसान ने उसे आगे खिसाने का फैसला लिया। आप भी ये पूरा मामला पढ़ चौंक जाएंगे। जी हां… बरनाला के किसान सुखप्रीत सिंह की 3 साल की मेहनत, जिंदगी भर की कमाई और सपनों का 2 मंजिला घर सब कुछ तैयार था, बस रंग-रोगन बाकी था। किसा ने 2017 से कोठी बनाना शुरू किया और 2020 में बनकर तैयार हुई। लेकिन तभी एक नोटिस ने किसान सुखप्रीत सिंह की दुनिया हिला दी। नोटिस में बताया गया कि उसकी आलीशान कोठी भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले लुधियाना-बठिंडा हाईवे के रास्ते में आ रही है और इसे हटाना होगा।   यह खबर सुनते ही किसान के पैरों तले से जमीन खिसक गई। पूरा परिवार टेंशन में आ गया कि, वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर को टूटते देखने का ख्याल उन्हें बेचैन कर रहा था। रिश्तेदारों, जानकारों और अधिकारियों से सलाह ली गई, लेकिन सवाल वही था, क्या सपनों का आशियाना तोड़ दिया जाए? इस दौरान किसान के सामने 2 ही विकल्प थे या तो घर गिरा दिया जाए, या फिर नामुमकिन को मुमकिन बनाया जाए। आखिरकार किसान ने हिम्मत दिखाते हुए दूसरा रास्ता चुना।   किसान ने हरियाणा के ठेकेदार से सम्पर्क किया और उसकी मदद से करीब 60 लाख रुपये की लागत से बनी इस 2 मंजिला कोठी को अब मशीनों की मदद से 350 फुट आगे खिसकाया जा रहा है। बीते 2 महीनों से कोठी को शिफ्ट करने का काम चल रहा है और इसे पूरा होने में अभी करीब 3 महीने और लगेंगे। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 10 लाख 60 हजार रुपये का खर्च आएगा, लेकिन किसान का कहना है कि मेहनत से बनाए गए सपनों के घर को बचाने के लिए यह कीमत उसे मंजूर है। मिली जानकारी के अनुसार सुखप्रीत सिंह ने 60 लाख में कोठी तैयार करवाई थी। लेकिन प्रोजेक्ट में आई इस जमीन के लिए उसे सिर्फ 60 लाख रुपए मुआवजा मिल रहा था। किसान ने बताया कि उसकी जमीन और उस पर बनी कोठी की कीमत दोगुनी थी लेकिन उसे मुआवजा बहुत कम मिल रहा था, वह कि वह कहीं और कोठी नहीं बना सकता था। इसी कारण वह परेशान था। इस दौरान लोग भी उसे कहते थे कि, 25-30 लाख रुपए में कोई नई कोठी बन जाएगी, लेकिन उसकी कोठी की कीमत 60 लाख रुपए की कीमत से तैयार हुई थी। ऐसी कोठी बनना उसकी सबसे बड़ा सपना था। कई बार प्रशासन को कोठी हटाने से मना किया लेकिन आखिर में उक्त फैसला लिया गया। किसान ने  बताया कि उसने कोठी को खिसकाने का फैसला इंस्टाग्राम पर रील देखकर लिया। उसने बताया कि एक दिन रात के समय इंस्टाग्राम पर रील देखी जिसमें कोठी को तोड़ने की बजाय खिसकाया जा सकता है। इसके बाद उसने कोठी को शिफ्ट करवाने का फैसला लिया। इस दौरान उन्होंने एक कमरा बनवाया जिसमें परिवार वालों को रखा। इस दौरान कई लोगों ने बाते भी की। कोठी को खिसकाने पर उसमें दरारें आ जाएंगी। किसान ने बताया जो हरियाणा के ठेकेदार उसकी कोठी को शिफ्ट करवा रहा है, वह यमुनागर से काम सीख कर आया है। ये काम बहुत ही मुश्किल है, जरा सी चूक होने पर कोठी को नुकसान हो सकता है। ठेकेदार ने कहा कि अगर कोठी में दरारें आए तो उसका पूरा मुआवजा दिया जाएगा। अप्रैल महीने तक पूरी कोठी शिफ्ट हो जाएगी, जिसके वह और उनका परिवार राहत की सांस लेंगे।

भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों ने डीजीपी कैलाश मकवाणा से की भेंट

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों ने की सौजन्य भेंट पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से आज प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षणरत् भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 5 अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। यह भेंट प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान, आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों तथा बहु-सेवा समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।इस अवसर पर डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस की संगठनात्मक संरचना, कार्यप्रणाली तथा उत्तरदायित्वों से अवगत कराया। उन्होंने कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध, अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियानतथा तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी। डीजीपी ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में प्रवेश के साथ ही नैतिक मूल्योंको अपने आचरण में आत्मसात करना अनिवार्य हो जाता है। ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ किया गया कार्य ही किसी अधिकारी की वास्तविक पहचान और विश्वसनीयता का आधार होता है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके लक्ष्यों पर संवाद करते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही सच्चे अर्थों में लोकसेवा है। डीजीपी ने दुर्ग में अपनी पहली पदस्थापना के अनुभव साझा करते हुए प्रारंभिक चुनौतियों, सीख और सेवा में निरंतर आत्म-प्रेरणा बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपने अधीनस्थ स्टाफ के प्रति व्यवहार में संवेदनशीलता रखना, उनकी बातों को गंभीरता से सुनना और समस्याओं को समझना प्रभावी नेतृत्व की पहचान है, जिससे अधिकारी स्वाभाविक रूप से सम्मान अर्जित करते हैं।अपने मुरैना कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि निरंतर परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ किया जा सकता है। वहीं बस्तर में पदस्‍थापना के दौरान किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना पर त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई से जन-विश्वासमजबूत होता है। इसके अतिरिक्त मंदसौर के लॉ-एंड-ऑर्डर से जुड़े प्रसंग साझा करते हुए डीजीपी ने स्पष्ट किया कि अधिकारी के प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में जनता का विश्वास परिलक्षित होना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि यह उनका सीखने का समय है, अधिक से अधिक सीखें, आवश्यकता पड़ने पर अपने सहकर्मी अथवा अपने अनुभवी अधिकारियों से परामर्श लेने में संकोच न करें, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग करें और पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता के साथ कर्तव्य निर्वहन करें। भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों ने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक भूमिका, वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तथा राज्यों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपनाए जा रहे नवाचारों, तकनीकी समाधानों और जनहित में संचालित अभियानों की सराहना की। यह संवाद विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं के मध्य सहयोग, आपसी समझ और समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।इस अवसर पर पीएसओ टू डीजीपी  विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी मती नेहा भारतीय द्वारा किया गया।  

पदभार संभालते ही तीखा हमला: आदित्य साहू ने हेमंत सरकार को घेरा

रांची झारखंड भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आज औपचारिक रूप से अपने पद का कार्यभार संभाल लिया। इस मौके पर भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और झारखंड की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए। "राज्य में बड़े पैमाने पर अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं" पदभार संभालने से पहले आदित्य साहू ने सरस्वती पूजा के अवसर पर पूजा-अर्चना की। इसके बाद संगठन की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधा। आदित्य साहू ने कहा कि जिस उद्देश्य और सपने के साथ झारखंड राज्य का गठन हुआ था, मौजूदा सरकार उसे खत्म करने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बड़े पैमाने पर अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं। इसके खिलाफ भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ता संगठन के माध्यम से संघर्ष करेंगे। "भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी है" साहू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी है और उसकी विचारधारा को गांव-गांव और व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा। पदभार ग्रहण करते समय उन्होंने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताया और कहा कि उनका राजनीतिक सफर बूथ स्तर के कार्यकर्ता से शुरू होकर प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ऐसा अवसर केवल भाजपा में ही संभव है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: वैश्विक व्यापार में भारत बना पसंदीदा साझेदार

भोपाल रोजगार मूलक व्यवसाय उद्योग स्थापना पर दी जायेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी भी प्रदेश की पहचान उसके केवल नक्शे से नहीं, बल्कि उपलब्धियों से भी होती है। आज मध्यप्रदेश अपनी प्रभावी नीतियों और उनके सफल क्रियान्वयन के कारण न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बना रहा है। प्रदेश औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से अग्रसर है और निवेश के लिए उद्यमियों को आकर्षित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस की वार्षिक बैठक में सहभागिता के बाद जबलपुर में महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के व्यापारियों एवं उद्यमियों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2014 के पहले की स्थिति अब पूरी तरह बदल चुकी है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और आज दुनिया का हर देश व्यापार और निवेश के लिए भारत से जुड़ने को उत्सुक है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, महापौर  जगत बहादुर सिंह 'अन्नू', सांसद  आशीष दुबे, विधायक  अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे सहित व्यापारिक एवं व्यावसायिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में 200 से अधिक देशों ने भाग लिया, लेकिन सबसे अधिक फोकस भारतीय प्रतिनिधिमंडल पर रहा। भारत सरकार के साथ-साथ देश के 10 राज्यों ने भी इस मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें मध्यप्रदेश विशेष रूप से उभरकर सामने आया। विशेषकर नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा एवं पॉवर सेक्टर के माध्यम से सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और मात्र 2 रुपये 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए आर्थिक समृद्धि अत्यंत आवश्यक है। राज्य यदि आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होगा तो विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाई आएगी। मध्यप्रदेश आज एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, जहां सड़क, बिजली, पानी और लैंड बैंक जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर हर प्रकार के उद्योग-व्यवसाय को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। वर्ष 2025 को मध्यप्रदेश में उद्योग रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भारत की विकास दर विश्व में सबसे तेज है। इसमें भी मध्यप्रदेश सभी राज्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश जनसंख्या के आधार पर देश में 5वें स्थान पर है। प्रदेश युवा शक्ति के मामले में पहले स्थान पर है। प्रदेश की प्रभावी नीतियों के कारण बेरोजगारी दर के मामले में मध्यप्रदेश देश के उन तीन राज्यों में शामिल है जहां बेरोजगारी की दर सबसे कम है। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा और तेलंगाना जैसे छोटे राज्यों की तुलना में, लगभग 9 करोड़ की आबादी होने के बावजूद मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर कम होना प्रदेश की बड़ी उपलब्धि है। साथ ही प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में लगातार वृद्धि हो रही है, जो समृद्धि का संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार रोजगार मूलक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रोत्साहन दे रही है। उद्योगों की स्थापना पर 30 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जा रही है, वहीं एमएसएमई सेक्टर को 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि देश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज मध्यप्रदेश में खोले जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज खोलने के इच्छुक उद्यमियों को 25 एकड़ भूमि मात्र एक रुपये की दर से उपलब्ध करायी जा रही है। साथ ही निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में नीट के माध्यम से चयनित छात्रों को फीस भुगतान के लिए राज्य सरकार द्वारा ऋण सुविधा भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्र औद्योगिकीकरण होने से तेजी से आगे बढ़ते हैं। प्रदेश के महानगरों के विकास के लिए औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जबलपुर शहर के समग्र विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें जबलपुर से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी शहरों को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यदि देश में कहीं चीता परिवार का विस्तार हो रहा है तो वह मध्यप्रदेश में हो रहा है, जो पूरे एशिया के लिए गर्व की बात है। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में हेलीकॉप्टर सेवा प्रारंभ की गई है, जिसमें 45 मिनट की यात्रा का किराया मात्र 3500 रुपये रखा गया है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। इससे प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिलेगी।  

नागरिकों को मिलेगा लोकभवन देखने का अवसर, 25 जनवरी से

भोपाल  नागरिकों के लिए 25 जनवरी को दोपहर 2 बजे से खुलेगा लोकभवन  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक लोकभवन आमजन के लिए खोला जा रहा है। इन तीनों दिन नागरिक लोकभवन की ऐतिहासिकता, प्राकृतिक सौंदर्य एवं विशेष सजावट को करीब से देख सकेंगे। केन्द्रीय संचार ब्यूरो और मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर आधारित प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रहेगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने समस्त नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे लोकभवन का भ्रमण जरूर करे। लोकतांत्रिक मूल्यों को निकट से अनुभव कर संविधान के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ करे। यह आयोजन नागरिकों और शासन के बीच संवाद, सहभागिता और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रवेश गेट क्रमांक- 1 से और निकास गेट क्रमांक- 4 से राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी ने बताया कि आमजन लोकभवन का भ्रमण 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक कर सकेंगे। दिनांक 25 और 27 जनवरी को दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक प्रवेश का समय निर्धारित है। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के दिन, लोकभवन भ्रमण का समय प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। नागरिकों के लिए कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में वाहन पार्किंग होगी। आमजन लोकभवन में गेट क्रमांक-1 से प्रवेश और गेट क्रमांक- 4 से निकास करेंगे। भ्रमण का इस प्रकार रहेगा रूट राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी ने बताया कि लोकभवन भ्रमण के लिए आने वाले आमजन का रूट निर्धारित किया गया है। गेट क्रमांक-1 से प्रवेश के बाद नागरिक लोकभवन सचिवालय एवं व्ही.आई.पी. रोड होते हुए कांच गेट से लोकभवन परिसर में प्रवेश करेंगे। स्वर्ण जयंती सभागार (बैंक्वेट हॉल), ऐतिहासिक दरबार हॉल, तोप एवं ध्वज वंदन स्थल का अवलोकन करेंगे। इसके पश्चात सिविल डिस्पेंसरी के सामने आयोजित केन्द्र और राज्य सरकार की प्रदर्शनी, सांदीपनि सभागार के बाहर वॉटर फाउंटेन के समीप वीडियो वॉल के माध्यम से लघु फिल्मों को देख सकेंगे। नागरिक, मंदिर के सामने वाले द्वार से होते हुए, गेट क्रमांक-4 से परिसर से बाहर निकलेंगे। विशेष आकर्षण : केन्द्र एवं राज्य सरकार की प्रदर्शनियां लोकभवन की ऐतिहासिकता के अवलोकन के साथ आमजन, केन्द्र एवं राज्य सरकार के विकासपरक एवं ऐतिहासिक पलों को प्रदर्शनी के माध्यम से देख सकेंगे। भारत सरकार के केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना” तथा “वंदे भारत” थीम पर आधारित आकर्षक एवं सूचनात्मक प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जो नागरिकों को राष्ट्र निर्माण की योजनाओं और विकास यात्रा से परिचित कराएगी। जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर अब तक के सभी राज्यपालों की जानकारी सरल एवं रोचक रूप में प्रस्तुत की जाएंगी। लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

राज्यपाल पटेल बोले—सत्य और पर्यावरण संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा, सत्य बोलना, धर्माचरण और पर्यावरण संरक्षण हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने आचरण में संस्कार, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को आत्मसात करें। राज्यपाल एवं कुलाधिपति  पटेल शुक्रवार को वसंत पंचमी के अवसर पर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने समारोह में विद्यार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि, स्वर्ण पदक तथा विभिन्न उपाधियाँ प्रदान की। दीक्षांत समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार भी मौजूद थे। उपाधियाँ, समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक राज्यपाल  पटेल ने कहा कि समारोह में प्रदान की गई उपाधियाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक है। विद्यार्थी जीवन में नए अवसरों और चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर सीखते रहें। आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि अपने ज्ञान, कौशल, शोध और नवाचार के माध्यम से देश को निरंतर आगे बढ़ाएँ। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय या विश्वविद्यालयों से नहीं, बल्कि परिवार और समाज से भी व्यक्ति जीवन मूल्यों की शिक्षा प्राप्त करता है। आज के विद्यार्थी ही कल के विकसित भारत की नींव हैं। शिक्षा का लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना भी होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक, कौशल आधारित और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने में नई शिक्षा नीति की सराहनीय भूमिका है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ते समय माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, तपस्या और मार्गदर्शन को कभी न भूलें। उनका सम्मान करना ही सच्ची सफलता की पहचान है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षक का व्यक्तित्व विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उनमें ज्ञान, कौशल और चरित्र का संचार करता है। शिक्षक के कार्य की तभी सच्ची सार्थकता है जब समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचे। राज्यपाल  पटेल ने दीक्षांत समारोह में 19 विद्यार्थियों को पीएचडी, 46 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और लगभग 200 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की। माँ सरस्वती और महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। स्मारिका “दीक्षावाणी” का लोकार्पण और विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थी शोध और नवाचार के माध्यम से प्रदेश और देश की प्रगति में योगदान दें। सारस्वत अतिथि एवं म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. खेम सिंह डहेरिया ने कहा कि कठोर अनुशासन, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता जीवन में सफलता के आधार हैं। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उपाधि धारकों को शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।  

प्रमुख सचिव निहारिका बारिक ने गरियाबंद में की समीक्षा बैठक

रायपुर.गरियाबंद  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव  निहारिका बारिक ने शुक्रवार को गरियाबंद के जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले में संचालित प्रमुख शासकीय योजनाओं, विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं तथा सेवा प्रदाय तंत्र की समग्र प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मनरेगा आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा, एनआरएलएम के प्रबंध संचालक  अश्विनी देवांगन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के उप सचिव  सच्चिदानंद आलोक, जिला पंचायत सीईओ  प्रखर चंद्राकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव   बारिक ने ग्रामीण विकास से संबंधित प्रमुख योजनाओं—प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), पंचायत एवं ग्रामीण अधोसंरचना विकास, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवाओं तथा राज्यपाल द्वारा गोद लिए गए ग्राम बिजली की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिक योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र हितग्राहियों तक पारदर्शी, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पहुँचना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागों के मध्य बेहतर समन्वय, कार्यों की नियमित निगरानी तथा लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृति, निर्माण प्रगति एवं भुगतान की स्थिति की सतत निगरानी करने के निर्देश देते हुए उन्होंने लक्ष्य के अनुरूप समय पर आवास पूर्ण कराने पर बल दिया। मनरेगा अंतर्गत सृजित श्रम दिवसों, सामुदायिक एवं व्यक्तिगत लाभ के कार्यों, जल संरक्षण एवं संवर्धन गतिविधियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने पूर्ण पारदर्शिता एवं सटीक अभिलेख संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत शौचालय निर्माण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन गतिविधियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जल जीवन मिशन के अंतर्गत घरेलू नल कनेक्शन की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्धता, मोटर-पंप एवं पाइपलाइन मरम्मत कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही ग्रामीण सड़क निर्माण, पुल-पुलियों के रखरखाव, यातायात सुविधा विस्तार एवं पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित कार्यों की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव   बारिक ने कहा कि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सर्वोपरि है, तथा दिए गए निर्देशों के पालन की सतत समीक्षा की जाएगी।

रायपुर साहित्य उत्सव: ओपन माइक ने प्रतिभाओं को बनाया केंद्र बिंदु

रायपुर. रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्म  स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे जी को समर्पित ओपन माइक मंच पर पहले दिन चार सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 75 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। इस मंच पर कविता, कहानी, गायन, वादन, सामूहिक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसी विविध विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। ओपन माइक सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह विशेष मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सुसज्जित किया गया था, जहाँ बाँसुरी, गिटार और वायलिन वादन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। नन्ही नृत्यांगनाओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं सरगुजा से लेकर बस्तर तक के युवा कवियों और ग़ज़लकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष   अमरजीत सिंह छाबड़ा, महंत कॉलेज के प्राचार्य   देवाशीष महंत तथा संयुक्त संचालक, जनसंपर्क  मती इस्मत जहाँ दानी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ओपन माइक सत्र ने न केवल नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति युवाओं के उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा को भी प्रभावी रूप से उजागर किया।

तेल की गुणवत्ता पर कड़ी नजर, खराब खाद्य सामग्री का निस्तारण

अंबिकापुर कलेक्टर  अजीत वसंत के आदेश एवं अपर कलेक्टर  सुनील नायक के निर्देशानुसार खाद्य प्रतिष्ठानों में उपयोग हो रहे खाद्य तेल की गुणवत्ता एवं स्वच्छता की जांच हेतु खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा शहर में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के दौरान भारत माता चौक स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में तेल रिफ्रेक्टोमीटर के माध्यम से खाद्य तेल के घनत्व की जांच की गई, जिसमें तेल का घनत्व 35 मानक पाया गया, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। टीम द्वारा मौके पर ही लगभग 22 लीटर हानिकारक तेल को नष्ट कराया गया। साथ ही उसी तेल से बनाए गए लगभग 250 नग समोसे भी तत्काल नष्ट कराए गए। इसके अतिरिक्त होटल परिसर में काकरोच पाए जाने पर होटल संचालक को नोटिस जारी किया गया। इसके पश्चात् खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम अभिहित अधिकारी के नेतृत्व में टीम द्वारा रिंग रोड स्थित होटल आरजू का निरीक्षण किया गया, जहां शाकाहारी एवं मांसाहारी खाद्य पदार्थों का पृथक भंडारण नहीं पाया गया। निरीक्षण में काबुली चना, पनीर एवं हरी चटनी को एक ही डीप फ्रीजर में चिकन एवं मटन के साथ भंडारित किया जाना पाया गया। साथ ही होटल की रसोई में बड़ी संख्या में काकरोच पाए गए, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। उक्त गंभीर लापरवाही को देखते हुए दोनों होटल संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। अग्रिम कार्रवाई के तहत संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में संबंधित फर्मों के लाइसेंस निलंबन की कार्यवाही की जाएगी।खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं नियमों के पालन के निर्देश दिए हैं।